पैंटी फाड़कर बेटे ने माँ की चुत चोद दी!
Family Antarvasna : बेटे ने माँ की लाल पैंटी फाड़ी, पहली बार में ही मोटा लंड टाइट चूत में ठोका! कुतिया बनाकर गांड पर मारे थप्पड़! Wild Mode में रात भर चुदाई!
अभी तक "पोर्न दिखाकर माँ को लंड चूसना सिखाया!" में आपने पढ़ा :-
मैंने उनकी टांगें और फैलाईं और लंड को उनकी गीली पैंटी पर जोर-जोर से रगड़ने लगा। माँ की चूत का आकार पैंटी के माध्यम से महसूस हो रहा था। हर रगड़ पर माँ की आवाज निकल रही थी।
“आह्ह्ह… हाँ… ऐसे… मेरी चूत पर… पैंटी सहित… चोद… आह्ह्ह…”
मैं तेज हो गया। माँ की मोटी गांड मेरे हाथों में थी। थोड़ी देर बाद मैं भी उनके पेट पर ही झड़ गया। वीर्य उनकी नाइटी और पैंटी पर फैल गया।
दोनों थककर लेट गए। माँ ने मेरा सिर अपने स्तनों पर रख लिया। ब्रा अभी भी खुली थी। पैंटी गीली और गंदी।
उन्होंने धीरे से कहा, “आर्यन… अगली बार… जब यह पैंटी फटेगी… तब तुम अंदर आना। आज बस इतना ही…”
मैंने उनके निप्पल को चूमा। “अगली बार जल्दी आएगी माँ।”
माँ चुपचाप मुस्कुराईं। उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में थीं। लैपटॉप की स्क्रीन पर वीडियो का एंडिंग क्रेडिट्स चल रहे थे। कमरे में सेक्स की गंध और हमारी साँसें तैर रही थीं।
अब आगे :-
अगली रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था।
दिन भर माँ और मेरे बीच एक अजीब सी खामोशी रही। लेकिन खामोशी के नीचे आग जल रही थी। शाम को खाना खाते समय माँ की नजर बार-बार मेरे चेहरे पर जाती।
उनकी आँखों में वही भूख थी जो कल रात पोर्न देखते समय थी।
रात के ग्यारह बजे जब सब कुछ शांत हो गया, माँ खुद मेरे बिस्तर के पास आईं। नाइटी पहने हुई। ब्रा नहीं लगाई थी। लाल पैंटी फिर से पहनी हुई थी - साफ वाली। उन्होंने लैपटॉप की तरफ देखा।
“आज… कोई वीडियो नहीं। आज… असली।”
मैंने उन्हें खींचकर बिस्तर पर लिटा दिया। नाइटी एक झटके में ऊपर हो गई। उनके भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने दोनों को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। माँ की उंगलियाँ मेरे बालों में फँस गईं।
“आह्ह्ह… बेटे… आज जोर से… काट भी ले…”
मैंने निप्पल को दाँतों से हल्के काटा। माँ सिसक उठीं। मेरा हाथ उनकी पैंटी पर गया। पहले से ही हल्की गीली थी। मैंने पैंटी के दोनों तरफ से पकड़ा। माँ की आँखें मुझ पर थीं। उन्होंने हल्के से सिर हिलाया।
मैंने जोर से खींचा।
कच्चाड़…!!
लाल पैंटी बीच से फट गई। दोनों टुकड़े उनके हिप्स पर लटक गए। माँ की चूत पहली बार पूरी तरह नंगी मेरे सामने थी — काले घने बालों वाली, गुलाबी होंठ थोड़े खुले हुए और चमकते हुए।
“आह्ह्ह…” माँ की लंबी साँस निकली। जैसे सालों का बोझ उतर गया हो।
मैंने झपटकर उनकी चूत पर मुँह लगा दिया। जीभ अंदर तक घुसा दी। माँ की कमर उछल गई।
“आह्हhhhh… जीभ… पूरी अंदर… चट बेटे… अपनी माँ की चूत चट…”
मैंने क्लिट को चूसा, होंठों को फैलाया, जीभ से गहराई तक खोदा। माँ की टांगें मेरे कंधों पर आ गईं। वो मेरे सिर को दोनों हाथों से दबा रही थीं। “आह्ह्ह… और… वहाँ… हाँ… उसी जगह… आह्ह्ह…”
थोड़ी देर बाद माँ काँपते हुए झड़ गईं। उनका पानी मेरे चेहरे पर लग गया। मैं ऊपर उठा। मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था। माँ ने खुद टांगें और फैला दीं। “अब… डाल… बेटे… अपनी माँ की चूत में… डाल दे…”
मैंने लंड का सिरा उनके छेद पर रखा। गरम और गीला स्पर्श। धीरे से दबाव डाला। सिर्फ नोक अंदर गई। माँ की आँखें फटी की फटी रह गईं। “आह्हhhhh… बड़ा… है… धीरे…”
मैंने और धक्का मारा। आधा लंड उनकी टाइट चूत में घुस गया। माँ ने मेरे पीठ पर नाखून गाड़ दिए।
“आईईई… फट रही है… आर्यन… बहुत मोटा… आह्ह्ह…” ये Kamvasna वाली XXX Antarvasana Hindi Sex Stories आप GaramKahani.com पर पढ़ रहे है।
मैं रुक गया। उनके माथे पर किस किया। “सह लो माँ… पूरा अभी अंदर जाना है।”
माँ ने दाँत भींचकर सिर हिलाया। मैंने एक लंबा धक्का मारा। साढ़े आठ इंच का मोटा लंड एकदम जड़ तक उनकी चूत में समा गया। माँ की चीख निकल गई।
“आह्हhhhh… मर गई… पूरी चूत फट गई… बेटे…”
मैंने कुछ पल बिना हिले उनके अंदर रहा। उनकी चूत मेरे लंड को बुरी तरह कस रही थी। फिर धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर माँ की आवाज निकल रही थी।
“आह्ह्ह… आह्ह्ह… धीरे… अभी… दर्द… है… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड धीमी रखी। उनके स्तन मुँह में लेकर चूसते हुए धक्के मारता रहा। धीरे-धीरे माँ की कराहें दर्द से बदलकर मजे में होने लगीं। उनकी कमर भी जवाब देने लगी।
“आह्ह्ह… अब… अच्छा लग रहा है… और… जोर से… बेटे… चोदो…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। बिस्तर चरचराने लगा। माँ की मोटी गांड मेरे हाथों में थी। मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक पेलने लगा।
“आह्हhhhh… हाँ… ऐसे… बच्चेदानी तक चोदो… अपनी माँ को… आह्ह्ह… गंदी माँ को चोदो…”
मैं पागल हो गया। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर “छप-छप” की आवाज आ रही थी। माँ की चूत अब खुल चुकी थी और मेरे लंड को चूस रही थी।
“माँ… तुम्हारी चूत… कितनी टाइट है… लंड निचोड़ रही है…”
“निचोड़ने दे… फाड़ दे इसे… तेरी माँ की चूत तेरी हो गई… आह्ह्ह… और तेज…”
मैंने उन्हें घुमाकर कुतिया बना दिया। फटी हुई पैंटी अभी भी उनके पैरों पर लटकी थी। मैंने पीछे से लंड एकदम जड़ तक धकेल दिया। माँ ने तकिया मुँह में दबा लिया।
“आह्हhhhh… इस पोजीशन में… और गहरा… आह्ह्ह… गाँड पर थप्पड़ मार… बेटे…”
मैंने उनकी मोटी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। माँ और जोर से पीछे की तरफ धकेलने लगीं। “हाँ… मार… अपनी रंडी माँ को… चोदो… आह्ह्ह…”
मैंने बाल पकड़कर और तेजी से पेलना शुरू कर दिया। माँ की आवाजें अब दब नहीं पा रही थीं। “आह्ह्ह… आर्यन… मैं फिर से… झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…”
उनकी चूत ने अचानक मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया। माँ जोर से काँपते हुए झड़ गईं। मैं रुका नहीं। उन्हें फिर से लिटाया, टांगें फैलाईं और मिशनरी में और जोर से चोदने लगा।
“माँ… अब मैं भी… अंदर ही छोड़ूँगा…” ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
माँ ने मुझे और अंदर खींच लिया। “हाँ… छोड़… अपनी माँ की चूत में… भर दे… आह्ह्ह…”
मैंने आखिरी कई जोरदार धक्के मारे और उनकी चूत की गहराई में ही अपना पूरा माल उड़ेल दिया। गरम वीर्य उनकी अंदर तक भर गया। माँ ने भी फिर से काँपते हुए चरम पाया।
दोनों पसीने से तरबतर बिस्तर पर गिरे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में था। माँ ने मुझे गले से लगा लिया। उनके नाखून मेरे पीठ पर हल्के खरोंच छोड़ गए थे।
लंबी खामोशी के बाद माँ ने फुसफुसाया, “अब… रोज… यही करना बेटे। पैंटी चाहे फाड़ देना… या खुद उतारना… लेकिन यह चूत अब तेरी है।”
मैंने उनके होंठ चूसते हुए जवाब दिया, “और तुम्हारी गाँड भी माँ… अगली बार।”
माँ हल्के से मुस्कुराईं। उनकी चूत से मेरा वीर्य धीरे-धीरे बाहर बह रहा था। फटी हुई लाल पैंटी उनके एक पैर पर लटकी हुई थी।
हर बार माँ की गंदी बातें और कराहें कमरे में गूंजती रहीं।
माँ अभी भी मेरे नीचे लेटी हुई थीं। मेरा लंड उनकी चूत से बाहर निकल चुका था, लेकिन दोनों की जांघों के बीच सफेद गाढ़ा द्रव चिपका हुआ था।
फटी हुई लाल पैंटी उनके दाहिने पैर पर लटकी रह गई थी। कमरे में पसीने और सेक्स की गंध फैली हुई थी।
माँ ने धीरे से मेरा चेहरा अपने करीब खींचा और होंठों पर लंबा किस किया। उनकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी।
किस तोड़ते हुए उन्होंने फुसफुसाया, “बेटे… एक बार और… इस बार मैं ऊपर से लूँगी। आज रात मेरी चूत को पूरी तरह फाड़ दे।”
मैंने हँसते हुए कहा, “माँ… थक नहीं गईं?”
उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लिया जो आधा नरम हो चुका था। धीरे-धीरे हिलाने लगीं। ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
गंदी आवाज में बोलीं, “थकने का नाम नहीं ले रहा ये मादरचोद लंड… देख कैसे फिर से खड़ा हो रहा है… तेरी रंडी माँ की चुत इसे और चाहिए…”
कुछ ही देर में लंड फिर से सख्त होने लगा। माँ मुस्कुराईं। “अब लेट जा हरामी। माँ खुद चूत में लेगी।”
मैं बिस्तर पर चित लेट गया। माँ मेरे ऊपर आ गईं। उनके भारी स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। उन्होंने खुद लंड को अपनी चूत के मुँह पर सेट किया और एक झटके में लगभग पूरा अंदर बैठ गईं।
“आह्हhhhh… पूरा… अंदर… बैठ गया… आह्ह्ह… बेटे का मोटा लंड… माँ की चूत में…”
वो ऊपर-नीचे होने लगीं। पहले धीरे, फिर पागलों की तरह रफ्तार पकड़ ली। उनके स्तन मेरे चेहरे पर बार-बार पटक रहे थे। मैंने दोनों को पकड़कर मुँह में ले लिया और जोर से काटते हुए चूसने लगा। माँ की गति और तेज हो गई।
“आह्ह्ह… चूस… मेरे बोब्स… काट ले… जोर से… आह्ह्ह… अपनी रंडी माँ के बोब्स चूस… बेटे का लंड… माँ की चूत फाड़ रहा है… कितना गहरा…”
मैं नीचे से जोर-जोर से धक्के देने लगा। माँ की गांड मेरे हाथों में थी। मैंने उसे दोनों हाथों से फैलाकर और ऊपर की तरफ धकेला। माँ पागलों की तरह कूदने लगीं। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था।
“आह्हhhhh… ऐसे ही… मारो नीचे से… मेरी चूत फाड़ दो… आर्यन… हरामी… और जोर से… आह्ह्ह… रंडी माँ को चोदो…”
मैंने उनके बाल पकड़कर नीचे खींचा और उनके होंठ चूसने लगा। माँ की कराहें मेरे मुँह में गूंज रही थीं।
“चोद… अपनी माँ को चोद… गंदी रंडी बनाकर… आह्ह्ह…” थोड़ी देर बाद माँ का शरीर अकड़ गया।
उन्होंने मेरे सीने पर नाखून गाड़ दिए और जोर से झड़ गईं। उनकी चूत ने लंड को बुरी तरह जकड़ लिया। मैंने भी उसी पल अपनी कमर उठाई और उनके अंदर ही दूसरी बार माल छोड़ दिया।
माँ मेरे ऊपर गिर पड़ीं। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं। कुछ पल बाद माँ ने सिर उठाया। उनके बाल चेहरे पर बिखरे थे। आँखों में अभी भी हवस बाकी थी। “अब… कुतिया बना… पीछे से चोद… जोर से…”
मैंने उन्हें जबरदस्ती पलट दिया। कुतिया की पोजीशन में कर दिया। माँ ने खुद अपनी मोटी गांड दोनों हाथों से फैलाई और चूत का छेद दिखाया। “देख… तेरी माँ की फटी हुई चूत… डाल… पूरा डाल…”
मैंने लंड का सिरा उनके छेद पर रखा और एक ही धक्के में जड़ तक ठेल दिया। माँ की चीख निकल गई।
“आह्हhhhh… हरामी… एकदम जड़ तक… चूत फट गई… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर पागलों की तरह पेलना शुरू कर दिया। हर धक्के पर उनकी मोटी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मैंने जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल निशान उभर आए।
“ले रंडी… ले अपनी चूत में… मादरचोद लंड… आह्ह्ह… माँ… तुम्हारी चूत कितनी प्यारी टाइट है…”
माँ पीछे की तरफ धकेलते हुए चिल्ला रही थीं, “हाँ… मार… थप्पड़ मार… अपनी माँ की गांड लाल कर दे… चूत फाड़ दे… हरामी बेटे… आह्ह्ह… और तेज… चोद…”
मैंने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेजी से धक्के मारे। “बोल… तू क्या है मेरी?” ये xxx Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
“रंडी… तेरी रंडी माँ… तेरी व्यक्तिगत चूत… आह्ह्ह… सिर्फ तेरे लंड की… फाड़ दे इसे… आह्ह्ह…”
मैंने उन्हें अचानक उठाया और दीवार से सटा दिया। एक टांग अपने कंधे पर चढ़ाई और खड़े-खड़े ही लंड अंदर कर दिया। इस पोजीशन में लंड बहुत गहरा जा रहा था। माँ मेरे गले में बाँहें डाले चीख रही थीं।
“आह्हhhhh… दीवार से… लगाकर… चोद… बहुत अंदर… पेट में लग रहा है… आर्यन… हरामी… और जोर से पेल… आह्ह्ह…”
मैंने उनके एक स्तन को मुँह में ले लिया और काटते हुए पेलता रहा। माँ की दूसरी टांग काँप रही थी। “मार… मार… अपनी रंडी को… चूत के टुकड़े कर दे… आह्ह्ह…”
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें फिर से बिस्तर पर फेंक दिया। इस बार मिशनरी में उनके दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए। कमर के नीचे तकिया लगाकर और गहराई तक ठेलने लगा।
हर धक्का पूरा बाहर निकालकर फिर जड़ तक जाता।
“आह्हhhhh… आईईई… फट गई… बेटे… इतना गहरा… बच्चेदानी चोद रहा है… आह्ह्ह… गाली दे… मुझे गाली दे…”
“ले चुदाई की रंडी… मादरचोद माँ… तेरी चूत सिर्फ मेरे लंड के लिए बनी है… आज पूरी तरह फाड़ दूँगा… आह्ह्ह…”
माँ पागल हो रही थीं। “हाँ… फाड़ दे… हरामी… अपनी माँ की चूत के दो टुकड़े कर दे… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… जोर से… और जोर से…”
मैंने स्पीड सबसे तेज कर दी। बिस्तर जोर-जोर से खटखटा रहा था। माँ की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।
अचानक उनका शरीर तन गया। चूत ने लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि मैं हिल भी नहीं पा रहा था। माँ जोर से चीखते हुए झड़ गईं। गरम पानी मेरे लंड पर और बिस्तर पर फैल गया।
मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी पेलता रहा।
“ले… झड़… अपनी चूत से झड़… रंडी माँ…” फिर कुछ ही देर में मैं भी उनकी चूत की गहराई में तीसरी बार अपना माल उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि बाहर तक बहने लगा।
दोनों एकदम चूककर बिस्तर पर गिरे। माँ के पूरे शरीर पर पसीना चमक रहा था। चूत से मेरा गाढ़ा वीर्य लगातार बाहर आ रहा था। मैं उनके ऊपर ही पड़ा रहा। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं।
माँ ने कमजोर आवाज में कहा, “हरामी… आज… मेरी चूत… सच में फाड़ दी तूने…”
मैंने उनके गले पर दाँत गड़ाते हुए जवाब दिया, “यही तो चाहिए था तुझे… रंडी माँ…”
माँ हल्के से मुस्कुराईं। उनके नाखून अभी भी मेरे पीठ में गड़े हुए थे!!
आगे की गांड फाड़ चुदाई : "सुहागरात में माँ की सील पैक गांड फाड़ दी!"
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