मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई!


Family Group Sex : खेत में मुखिया के बेटे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर चोदी मुस्लिम माँ-बेटी की गांड और चूत! Blackmail करके दोनों को ग्रुप सेक्स में बनाया रंडी!


दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। उम्र 22 साल। हमारा गाँव उत्तर प्रदेश के किसी कोने में बसा है। वहाँ मुसलमान परिवार भी काफी हैं।


मेरा सबसे अच्छा दोस्त विक्रम है। विक्रम गाँव के मुखिया का बेटा है।


उसकी माँ कई साल पहले मर चुकी थी, इसलिए वो थोड़ा नादान और जिद्दी हो गया था। लेकिन मुखिया का बेटा होने की वजह से गाँव में उसका काफी दबदबा था। हमारी दोस्ती बचपन से थी।


हमारे गाँव में औरतें शौच के लिए सुबह-शाम खेतों में जाती थीं। खासकर मुस्लिम औरतें। हम दोस्त अक्सर छुप-छुपकर उन्हें देखते थे।


उनकी मोटी-मोटी गांडें, गोरी-काली जांघें और शौच करते समय का नजारा… ये सब देखकर हमारे लंड खड़े हो जाते थे। कॉलेज में छुट्टियों के दौरान हम गाँव आते तो यही हमारा मजा होता था।


एक दिन मैं बोर होकर घर से निकला और बगल वाले खेत की तरफ चला गया।


वहाँ मैंने देखा - दो औरतें आ रही थीं। एक तो युवा लड़की, नाम रुखसाना, उम्र करीब 19-20 साल। दूसरी उसकी माँ, सलमा। सलमा की उम्र 38-39 साल होगी। दोनों गेहुँआ रंग की थीं। 


रुखसाना पतली कमर वाली, लेकिन गांड अच्छी-खासी भरी हुई। सलमा की गांड तो और भी मोटी, चौड़ी और हिलती हुई थी। जैसे चल रही हों, मानो कयामत बरस रही हो।


मैंने छुपकर देखा। दोनों खेत के अंदर घुस गईं। मैं भी धीरे-धीरे पीछे-पीछे चला गया। पेड़ के पीछे खड़ा होकर देखता रहा। दोनों ने आगे-पीछे देखा, फिर सलवार नीचे की और शौच करने लगीं।


सलमा की गांड मेरी तरफ थी। इतनी चौड़ी, गेहुँआ रंग की, और थोड़ी-थोड़ी फूली हुई। मैंने देखा उनकी दोनों टांगों के बीच से पेशाब की धार गिर रही थी। नीचे का हिस्सा गीला हो चुका था। रुखसाना भी थोड़ी दूर बैठी थी।


ये नजारा देखकर मेरा लंड फनफना उठा। मैंने खुद पर काबू रखा और चुपचाप देखता रहा। दोनों ने शौच-मूत करके सलवार पहनी और खड़ी हो गईं। तभी मैंने देखा विक्रम भी आ चुका था। वो भी छुपकर देख रहा था।


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विक्रम ने मुझे इशारा किया। हम दोनों चुपचाप पीछे हट गए। लेकिन उस दिन के बाद से सलमा और रुखसाना मेरे दिमाग में बस गईं। रात को सोते समय उनकी गांड, जांघें और शौच करते समय का नजारा बार-बार याद आता।


मैं मुठ मारता और सोचता - अगर कभी मौका मिले तो…


अगले कुछ दिनों में मैंने उन्हें और ध्यान से देखा। सुबह जब वो खेत जातीं, तो मैं भी वहाँ पहुँच जाता। कभी-कभी वो मुझे देख लेतीं तो शरमा जातीं, लेकिन फिर भी आती रहीं। एक दिन रुखसाना अकेली आई।


मैंने हिम्मत करके पास जाकर पानी माँगा। उसने थोड़ा घबराते हुए पानी दिया। उसकी आँखें झुकी हुई थीं। मैंने कहा, “तुम्हारी माँ कहाँ हैं?” उसने धीरे से कहा, “घर पर।”


उस दिन से रुखसाना से मेरी हल्की-फुल्की बातें शुरू हो गईं। विक्रम भी कभी-कभी साथ आता। वो मुखिया का बेटा था, इसलिए दोनों औरतें उससे थोड़ा डरती थीं।


एक दिन विक्रम ने रुखसाना से सीधा कहा, “तुम दोनों रोज खेत आती हो… हम भी देखते हैं।” रुखसाना के चेहरे का रंग उड़ गया। विक्रम हँसते हुए बोला, “डरो मत। बस हमारी बात मानना।”


धीरे-धीरे हम दोनों की नजरें सलमा और रुखसाना पर और गहरी होती गईं। एक शाम जब दोनों फिर खेत आईं, तो विक्रम ने मुझे कहा, “आज कुछ करते हैं।” मैंने सिर हिलाया। हम दोनों छुपकर इंतजार करने लगे।


दोनों ने फिर सलवार नीचे की। सलमा की मोटी गांड और रुखसाना की गोल-मटोल गांड साफ दिख रही थी। मैंने देखा सलमा के भोसड़े पर घने बाल थे और थोड़ा गीला था। रुखसाना की चूत भी बालों से भरी हुई थी।


मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। विक्रम भी अपनी पैंट के ऊपर से लंड हिला रहा था। तभी विक्रम ने फैसला कर लिया।


वो अचानक आगे बढ़ गया। रुखसाना और सलमा चौंक गईं। विक्रम ने सीधा कहा, “अगर तुम दोनों हमारी बात नहीं मानोगी तो मैं बापू से कहकर तुम्हें गाँव से निकलवा दूंगा।”


दोनों की आँखें फैल गईं। सलमा ने हाथ जोड़ लिए। रुखसाना डर गई। विक्रम बोला, “एक बार हमें अपनी चूत और गांड दे दो… फिर कभी कुछ नहीं कहेंगे।”


सलमा ने रुखसाना की तरफ देखा। उसकी आँखें डर से भरी हुई थीं। रुखसाना का चेहरा सफेद पड़ गया था। वो काँप रही थी।


सलमा ने धीरे से बेटी का हाथ पकड़ा और बोली, “बेटा… डर मत…” लेकिन खुद की आवाज भी काँप रही थी।


विक्रम आगे बढ़ा। उसकी आवाज में ठंडक थी,


“जल्दी फैसला करो। मेरे बापू को अगर पता चल गया कि तुम दोनों रोज खेत में आती हो और… तो फिर गाँव में रहना मुश्किल हो जाएगा। तुम्हारे घर वाले भी परेशान हो जाएंगे।”


सलमा ने हाथ जोड़ लिए। “बेटा… प्लीज… हम गरीब लोग हैं… कुछ मत करना… अल्लाह के लिए…” उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।


रुखसाना अब जोर-जोर से काँप रही थी। वो अपनी माँ के पीछे छिपने की कोशिश कर रही थी। “अम्मी… चलो यहाँ से… प्लीज…”


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विक्रम हँस पड़ा। “भागने की कोशिश मत करना। मैंने कहा ना… एक बार अपनी चूत और गांड दे दो… फिर कभी कुछ नहीं कहेंगे। वरना…”


उसने जेब से फोन निकाला और दिखाया, “मैंने तुम्हारी फोटो भी ले ली है। चाहूँ तो गाँव में फैला दूँ।”


सलमा का चेहरा और भी पीला पड़ गया। वो घुटनों के बल बैठ गई और विक्रम के पैर पकड़ लिए। “बेटा… माफ कर दो… हम कुछ भी कर लेंगे… लेकिन ये मत करो… मेरी बेटी अभी जवान है… कुँवारी है…”


रुखसाना भी अब रो पड़ी। “अम्मी… नहीं… प्लीज…”


मैं (राहुल) चुपचाप खड़ा देख रहा था। दिल धड़क रहा था।


विक्रम ने मेरी तरफ देखा और आँख मारी। फिर सलमा से बोला, “ठीक है… एक मौका देती हूँ। आज सिर्फ हम दोनों को छूने दो… चूमने दो… बाकी बाद में सोचेंगे। अगर मना किया तो…”


सलमा ने रुखसाना की तरफ देखा। दोनों माँ-बेटी की आँखें मिल रही थीं। रुखसाना ने सिर झुका लिया। सलमा ने धीरे से कहा, “बेटा… क्या करना होगा?”


विक्रम मुस्कुराया। “पहले कपड़े उतारो।”


सलमा का शरीर काँप गया। “यहीं… खुले में?”


“हाँ। जल्दी करो।”


सलमा ने थोड़ी देर चुप रहकर फिर रुखसाना को गले लगाया। “बेटा… माफ करना… हम मजबूर हैं…” फिर उसने खुद अपना कुर्ता ऊपर खींचना शुरू किया।


उसके बड़े-बड़े मम्मे ब्रा के अंदर से बाहर आने लगे। 38 साइज के भरे हुए। गेहुँआ रंग की त्वचा।


रुखसाना अभी भी काँप रही थी। सलमा ने बेटी का हाथ पकड़ा और धीरे से उसका कुर्ता भी ऊपर किया। रुखसाना ने आँखें बंद कर लीं। उसकी छोटी लेकिन गोल चूचियाँ सामने आ गईं।


विक्रम ने आगे बढ़कर सलमा की ब्रा का हुक खोला। सलमा सिसकार उठी — “आह्ह्ह…” उसके भारी मम्मे बाहर झूलने लगे। विक्रम ने दोनों हाथों से उन्हें दबाया। “वाह… क्या मम्मे हैं…”


मैं भी अब रुखसाना के पास गया। उसने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसकी कमर पकड़ ली। “डरो मत…” मैंने उसके मम्मों को हल्के से दबाया। रुखसाना कराह उठी — “आह्ह्ह… छोड़ो…” लेकिन विरोध कमजोर था।


विक्रम ने सलमा की सलवार नीचे खींच दी। सलमा की मोटी, चौड़ी गांड और घने बालों वाली चूत सामने आ गई। विक्रम ने उसके भोसड़े पर हाथ फेरा। सलमा का शरीर सिहर गया — “आह्ह्ह… बेटा… धीरे…”


मैंने रुखसाना की सलवार भी नीचे कर दी। उसकी चूत पर काले घने बाल थे। थोड़ा गीला लग रहा था। मैंने उंगली से छुआ। रुखसाना जोर से सिसकार उठी — “आह्ह्ह… नहीं… आह्ह्ह…”


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विक्रम ने सलमा को जमीन पर लिटा दिया। “अब दोनों को चूसना होगा।” सलमा ने आँखें बंद कर लीं। विक्रम ने अपना लंड निकाला — मोटा और काला। सलमा के मुँह के पास ले गया। “चूस…”


सलमा ने झिझकते हुए मुँह खोला। विक्रम ने लंड उसके मुँह में ठूंस दिया। “गप… गप…” की आवाज आने लगी। सलमा आँसू बहाते हुए चूस रही थी।


मैंने रुखसाना को भी घुटनों के बल बैठाया। “अब तू भी…” रुखसाना ने सिर हिलाया, लेकिन मैंने उसके बाल पकड़कर लंड उसके मुँह में डाल दिया। वो खांसने लगी, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। “चूस अच्छे से…”


दोनों माँ-बेटी अब हमारे लंड चूस रही थीं। खेत में सिर्फ “गप… गप…” और हल्की सिसकारियाँ गूंज रही थीं।


विक्रम ने सलमा के बाल पकड़कर जोर से मुँह में ठोका। “आह्ह्ह… साली… चूस… तेरी बेटी भी देख रही है…” सलमा की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वो चूसती जा रही थी।


मैंने रुखसाना के मम्मों को मसलते हुए उसके मुँह में लंड ठोकना शुरू कर दिया। रुखसाना कराह रही थी - “आह्ह्ह… राहुल… दर्द… आह्ह्ह…” लेकिन उसकी जीभ अब मेरे लंड पर घूम रही थी।


थोड़ी देर बाद विक्रम ने लंड बाहर निकाला और सलमा को कुतिया बना दिया। उसकी मोटी गांड मेरे सामने थी। विक्रम ने थूक लगाया और लंड उसके भोसड़े पर रगड़ने लगा। सलमा सिसकार उठी — “आह्ह्ह… बेटा… धीरे… बहुत मोटा है…”


मैंने भी रुखसाना को उसी पोजीशन में कर दिया। उसकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उंगली उसके छेद पर फेरी। रुखसाना काँप गई - “आह्ह्ह… नहीं… वहाँ मत…”


विक्रम ने धीरे से लंड सलमा की चूत में धकेलना शुरू किया। सलमा चीख पड़ी — “आह्हhhhh… अल्लाह… धीरे… आह्ह्ह…”


 आगे की कहानी : "मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई! 02"


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