मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई! 02


Hindi Sex Kahani : सलमा की गांड और रुखसाना की चूत Swap करके खेत में डबल चुदाई! बेटी बन गई माँ से बड़ी रंडी! Kamvasna से भरपूर प्यासी Wild Sex Story! 


अभी तक "मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई!" में आपने पढ़ा :-


दोनों माँ-बेटी अब हमारे लंड चूस रही थीं। खेत में सिर्फ “गप… गप…” और हल्की सिसकारियाँ गूंज रही थीं।


विक्रम ने सलमा के बाल पकड़कर जोर से मुँह में ठोका। “आह्ह्ह… साली… चूस… तेरी बेटी भी देख रही है…” सलमा की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वो चूसती जा रही थी।


मैंने रुखसाना के मम्मों को मसलते हुए उसके मुँह में लंड ठोकना शुरू कर दिया। रुखसाना कराह रही थी - “आह्ह्ह… राहुल… दर्द… आह्ह्ह…” लेकिन उसकी जीभ अब मेरे लंड पर घूम रही थी।


थोड़ी देर बाद विक्रम ने लंड बाहर निकाला और सलमा को कुतिया बना दिया। उसकी मोटी गांड मेरे सामने थी। विक्रम ने थूक लगाया और लंड उसके भोसड़े पर रगड़ने लगा। सलमा सिसकार उठी — “आह्ह्ह… बेटा… धीरे… बहुत मोटा है…”


मैंने भी रुखसाना को उसी पोजीशन में कर दिया। उसकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उंगली उसके छेद पर फेरी। रुखसाना काँप गई - “आह्ह्ह… नहीं… वहाँ मत…”


विक्रम ने धीरे से लंड सलमा की चूत में धकेलना शुरू किया। सलमा चीख पड़ी — “आह्हhhhh… अल्लाह… धीरे… आह्ह्ह…”


अब आगे :-


विक्रम ने धीरे-धीरे अपना मोटा लंड सलमा की चूत में धकेलना जारी रखा। सलमा की आँखें बंद थीं और मुँह से कराह निकल रही थी - “आह्हhhhh… बेटा… धीरे… बहुत मोटा है… आह्ह्ह…”


उसकी चौड़ी गांड मेरे सामने हिल रही थी। विक्रम ने उसके बाल पकड़कर जोर का झटका मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। सलमा चीख पड़ी - “आह्हhhhhhh… अल्लाह… फट गई… आह्ह्ह…”


विक्रम मुस्कुराते हुए बोला, “साली रंडी… इतनी बड़ी चूत है फिर भी टाइट लग रही है।” उसने कमर चलानी शुरू की। “फच… फच… फच…” की आवाज खेत में गूंजने लगी।


सलमा अब दोनों हाथों से जमीन पकड़े हुए कराह रही थी - “आह्ह्ह… बेटा… और… धीरे… आह्ह्ह… मजा… आ रहा है…”


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मैंने रुखसाना को भी उसी पोजीशन में कर दिया। उसकी गोल-मटोल गांड मेरे सामने थी। मैंने थूक लगाया और लंड उसके भोसड़े पर रगड़ा। रुखसाना काँप गई - “आह्ह्ह… राहुल… नहीं… दर्द होगा… आह्ह्ह…”


मैंने धीरे से धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। रुखसाना की आँखों से आँसू निकल आए — “आह्हhhhh… अम्मी… बचाओ… आह्ह्ह… फट गई… आह्ह्ह…”


सलमा ने पीछे मुड़कर देखा। उसकी अपनी चुदाई के बावजूद वो बेटी की तरफ देख रही थी। “बेटा… धीरे करो… वो कुँवारी है…”


विक्रम हँस पड़ा। “चुप रह साली। तू अपनी चूत का मजा ले।” उसने सलमा की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। सलमा सिसकार उठी — “आह्ह्ह…”


मैंने रुखसाना के बाल पकड़कर और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया। रुखसाना जोर से चीखी — “आह्हhhhhhh… मर गई… आह्ह्ह… निकालो… प्लीज… आह्ह्ह…”


मैं रुक गया। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड कस गया था। मैंने धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। “आह्ह्ह… रुखसाना… तेरी चूत बहुत मस्त है… आह्ह्ह…”


रुखसाना पहले दर्द से रो रही थी, लेकिन 4-5 मिनट बाद उसकी सिसकारियाँ बदलने लगीं — “आह्ह्ह… राहुल… अब… थोड़ा… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”


उधर विक्रम अब सलमा को जोर-जोर से चोद रहा था। सलमा की मोटी गांड हिल रही थी और उसके बड़े मम्मे नीचे झूल रहे थे। “आह्ह्ह… बेटा… और जोर से… आह्ह्ह… चोद… अपनी रंडी को… आह्ह्ह…”


विक्रम ने उसके बाल कसकर पकड़े और बोला, “साली… तुम्हारी बिरादरी की औरतें सब ऐसी ही होती हैं ना? खेत में आकर लंड लेती हैं…”


सलमा कराहते हुए बोली, “आह्ह्ह… हाँ… बेटा… चोद… आह्ह्ह… आज जितना मन करे… चोद ले… आह्ह्ह…”


मैंने भी रुखसाना की स्पीड बढ़ा दी। उसकी टाइट चूत अब गीली हो चुकी थी। “फच… फच…” की आवाज आ रही थी। रुखसाना अब खुद अपनी गांड पीछे की तरफ उठा रही थी — “आह्ह्ह… राहुल… और… आह्ह्ह… गहरा… आह्ह्ह…”


मैंने उसके मम्मों को पकड़कर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। रुखसाना की सिसकारियाँ तेज हो गईं — “आह्ह्ह… अम्मी… देख… वो मुझे चोद रहा है… आह्ह्ह… मजा आ रहा है… आह्ह्ह…”


सलमा ने बेटी की तरफ देखा। उसकी अपनी आँखें भी मस्ती से आधी बंद थीं। विक्रम अब सलमा की गांड में उंगली डालने लगा। सलमा सिसकार उठी - “आह्ह्ह… बेटा… वहाँ… मत… आह्ह्ह…”


विक्रम ने लंड बाहर निकाला और थूक लगाकर सलमा की गांड के छेद पर रखा। “अब तेरी गांड लूंगा।”


सलमा डर गई — “नहीं… बेटा… बहुत दर्द होगा… आह्ह्ह…” लेकिन विक्रम ने धीरे-धीरे लंड धकेलना शुरू कर दिया। सलमा चीख पड़ी — “आह्हhhhhhh… अल्लाह… फट गई… आह्ह्ह… निकालो… आह्ह्ह…”


पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया। सलमा का शरीर अकड़ गया। विक्रम ने धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। “आह्ह्ह… साली… तेरी गांड भी मस्त है… आह्ह्ह…”


सलमा अब दर्द और मजे के मिश्रण में कराह रही थी — “आह्ह्ह… बेटा… धीरे… आह्ह्ह… अब… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”


मैंने भी रुखसाना को कुतिया बनाए रखा और उसकी चूत जोर-जोर से चोदने लगा। रुखसाना अब पूरी तरह खुल चुकी थी - “आह्ह्ह… राहुल… और जोर से… आह्ह्ह… फाड़ दे… आह्ह्ह… अपनी रंडी को चोद… आह्ह्ह…”


दोनों माँ-बेटी अब खेत में कराह रही थीं। विक्रम सलमा की गांड मार रहा था और मैं रुखसाना की चूत।


थोड़ी देर बाद विक्रम चिल्लाया — “आह्ह्ह… सलमा… मैं आ गया…” और उसने सलमा की गांड में वीर्य भर दिया। सलमा भी जोर से झड़ गई — “आह्हhhhh… बेटा… भर गया… आह्ह्ह…”


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मैं भी रुखसाना की चूत में तेजी से धक्के लगा रहा था। रुखसाना की आवाज काँप रही थी - “आह्ह्ह… राहुल… आ रहा है… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…”


दोनों साथ में झड़ गए। मैंने रुखसाना की चूत में माल छोड़ दिया। रुखसाना थककर जमीन पर गिर पड़ी।


हम चारों हाँफ रहे थे। विक्रम ने सलमा के बाल सहलाते हुए कहा, “आज से तुम दोनों हमारी हो। जब चाहेंगे, बुलाएंगे।”


सलमा ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। रुखसाना भी चुपचाप लेटी हुई थी, लेकिन उसकी साँसें अभी भी तेज थीं।


हम चारों थोड़ी देर तक खेत की मिट्टी पर ही लेटे रहे। सलमा और रुखसाना दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। उनके शरीर पसीने से चमक रहे थे। विक्रम ने सलमा के मोटे मम्मों को सहलाते हुए कहा, “अब पार्टनर बदलते हैं।”


सलमा ने आँखें खोलीं। रुखसाना भी उठकर बैठ गई। उसका चेहरा अभी भी लाल था।


विक्रम ने रुखसाना की तरफ इशारा किया। “आ जा… अब तेरी बारी मेरी।” रुखसाना ने माँ की तरफ देखा। सलमा ने धीरे से सिर हिलाया। “जा… बेटा… अब इनकी बात मान।”


रुखसाना घुटनों के बल विक्रम के पास चली गई। विक्रम ने उसका मुँह अपने लंड पर दबा दिया। “चूस… अच्छे से चूस।” रुखसाना ने झिझकते हुए लंड मुँह में लिया। “गप… गप…” की आवाज आने लगी।


विक्रम ने उसके बाल पकड़कर जोर से ठोकना शुरू कर दिया। “आह्ह्ह… साली… तेरी माँ से बेहतर चूस रही है… आह्ह्ह…”


मैंने सलमा को अपने पास खींच लिया। सलमा अब बिना किसी हिचकिचाहट के मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी।


“बेटा… तुम्हारा भी मोटा है…” उसने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। “आह्ह्ह… सलमा… ऐसे ही… आह्ह्ह…”


थोड़ी देर बाद विक्रम ने रुखसाना को कुतिया बना दिया। उसकी गोल गांड उसके सामने थी। विक्रम ने थूक लगाया और लंड उसके भोसड़े पर रगड़ा। “अब तेरी गांड लूंगा।”


रुखसाना डर गई — “नहीं… विक्रम… वहाँ मत… दर्द होगा… आह्ह्ह…” लेकिन विक्रम ने धीरे-धीरे लंड धकेलना शुरू कर दिया। रुखसाना चीख पड़ी — “आह्हhhhhhh… अम्मी… बचाओ… फट गई… आह्ह्ह…”


सलमा ने मेरा लंड मुँह से निकाला और बेटी की तरफ देखा। उसकी आँखों में दर्द था, लेकिन वो कुछ नहीं बोली। मैंने सलमा के बाल पकड़कर फिर से लंड उसके मुँह में डाल दिया। “चूस… देख अपनी बेटी कैसे चुद रही है।”


विक्रम अब रुखसाना की गांड जोर-जोर से मार रहा था। “फच… फच… फच…” की आवाज गूंज रही थी।


रुखसाना पहले दर्द से रो रही थी - “आह्ह्ह… धीरे… आह्ह्ह… मर जाऊंगी…” लेकिन 5-6 मिनट बाद उसकी आवाज बदल गई — “आह्ह्ह… अब… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…”


मैंने सलमा को जमीन पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी चौड़ी गांड और खुली चूत मेरे सामने थी। मैंने लंड उसकी चूत में डाल दिया और तेजी से धक्के लगाने लगा।


सलमा कराह उठी - “आह्ह्ह… राहुल… और… आह्ह्ह… चोद… अपनी रंडी को… आह्ह्ह…”


दोनों माँ-बेटी अब अलग-अलग चुद रही थीं। विक्रम रुखसाना की गांड मार रहा था और मैं सलमा की चूत।


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विक्रम ने रुखसाना के बाल पकड़कर और जोर से धक्के लगाए। “साली… तेरी माँ की तरह तू भी चुदक्कड़ निकली… आह्ह्ह…” रुखसाना अब खुद अपनी गांड पीछे की तरफ उठा रही थी — “आह्ह्ह… विक्रम… फाड़ दे… आह्ह्ह… मेरी गांड फाड़ दे… आह्ह्ह…”


मैंने सलमा की गांड पर थप्पड़ मारे। उसके मोटे चूतड़ लाल हो गए। सलमा मजे से कराह रही थी - “आह्ह्ह… और मार… आह्ह्ह… गांड लाल कर दे… आह्ह्ह…”


थोड़ी देर बाद विक्रम चिल्लाया — “आह्ह्ह… रुखसाना… मैं आ गया…” और उसने रुखसाना की गांड में वीर्य भर दिया। रुखसाना भी जोर से झड़ गई — “आह्हhhhh… विक्रम… भर गया… आह्ह्ह…”


मैंने भी सलमा की चूत में तेजी से धक्के लगाए। सलमा की आवाज काँप रही थी — “आह्ह्ह… राहुल… और… आह्ह्ह… गहरा… आह्ह्ह… आज मुझे पूरा चोद ले… आह्ह्ह…”


10 मिनट बाद मैं भी सलमा की चूत में झड़ गया। सलमा ने मेरे लंड को कस लिया और खुद भी झड़ गई — “आह्हhhhh… बेटा… आह्ह्ह…”


हम चारों फिर से थककर गिर पड़े। सलमा ने मेरे लंड को मुँह में लेकर साफ किया। रुखसाना ने भी विक्रम का लंड चूस-चूसकर साफ कर दिया।


विक्रम ने दोनों को देखा और बोला, “आज से तुम दोनों हमारी रखैल हो। जब चाहेंगे, खेत में बुलाएंगे… या रात को तुम्हारे घर आ जाएंगे।”


सलमा ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। रुखसाना भी चुपचाप लेटी हुई थी। उसके शरीर पर अभी भी मेरे और विक्रम के निशान थे।


मैंने सलमा के मोटे मम्मों को दबाते हुए कहा, “कल फिर आना… दोनों।”


सलमा ने धीरे से कहा, “आएंगे… बेटा… आएंगे…”


आगे की कहानी : "मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई! 03"


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