माँ की चूत में बेटे का लंड! डबल मीनिंग से शुरू हुई चुदाई!
Family Sex Story : माँ-बेटे की Double Meaning बातों से शुरू हुई चुदाई! प्यासी विधवा माँ ने राहुल के मोटे लंड से फड़वाई अपनी चूत और गांड!! Antarvasna Dirty Sex
मैं राहुल, 24 साल का। सुबह उठते ही सबसे पहले माँ की याद आती है। पापा के गुजर जाने के बाद से हम दोनों ही इस घर में अकेले हैं। माँ रेखा, 42 साल की, लेकिन देखने में अभी भी बहुत आकर्षक।
उनका गोरा शरीर, भारी स्तन, पतली कमर और नितंब... मैं कोशिश करता हूँ कि इन विचारों को मन से निकाल दूँ, लेकिन रोज-रोज मुश्किल होता जा रहा है।
"बेटा, उठ गए? चाय पी लो।" माँ की मीठी आवाज़ किचन से आई।
मैं किचन में गया। माँ सूती साड़ी में खड़ी थीं। पल्लू थोड़ा ढीला था। उन्होंने चाय का कप मेरी तरफ बढ़ाया। मैंने कप लेते वक्त उनकी उँगलियों को छू लिया। गर्माहट महसूस हुई।
"थैंक्यू माँ। तुम रोज इतना अच्छा ख्याल रखती हो मेरा।" मैंने कहा और उनकी आँखों में देखा।
माँ मुस्कुराईं, "मेरा बेटा है तू... माँ का काम ही यही है कि बेटे को हर तरह से संभाले। गरम चाय, खाना, और... जो भी जरूरत हो।"
उनके शब्द सामान्य लग रहे थे, लेकिन मुझे अजीब सा लगा। मैंने चाय पीते हुए उनकी कमर पर नजर डाली। साड़ी का घेरा उनके गोल नितंबों पर टाइट था।
दिन भर मैं काम करता रहा, लेकिन मन बार-बार माँ के पास जाता। दोपहर को जब माँ खाना परोस रही थीं तो मैंने पूछा,
"माँ, तुम्हें अकेलापन तो नहीं लगता? मैं ऑफिस जाता हूँ, तुम घर पर अकेली।"
माँ ने मेरी प्लेट में सब्जी डालते हुए कहा, "लगता है बेटा... बहुत लगता है। रात को बिस्तर पर लेटे-लेटे शरीर में एक अजीब सी खालीपन महसूस होती है। जैसे कुछ गर्म चीज की जरूरत हो।"
मैंने घूँट भरकर कहा, "मैं हूँ न माँ। जब चाहो, मैं तुम्हें गर्माहट दे सकता हूँ।"
माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में कुछ पल के लिए चमक आई। "अच्छा? तो मेरा बेटा अब माँ की सारी जरूरतें पूरी करने लगा है?"
शाम को मैं छत पर कपड़े सुखाने में मदद कर रहा था। माँ नीचे से साड़ियाँ दे रही थीं। जब उन्होंने हाथ ऊपर किया तो उनका ब्लाउज थोड़ा ऊपर चढ़ गया। उनकी कमर का गोरा हिस्सा दिखा।
मैंने आगे बढ़कर साड़ी ली और जानबूझकर उनकी उँगलियों को थोड़ा दबा दिया।
"सावधानी से बेटा... माँ की कमर में दर्द हो जाता है कभी-कभी।" माँ ने कहा।
"मैं मालिश कर दूँगा माँ। तुम्हारी कमर, पीठ... जहाँ भी दर्द हो।" मैंने धीरे से कहा।
माँ हँसीं, लेकिन उनकी हँसी में शर्म थी। "बेटा, तू बड़ा हो गया है। अब माँ को भी अच्छा लगता है जब तू पास आता है।"
रात हो गई। बिजली चली गई। हम दोनों हॉल में मोमबत्ती जलाकर बैठे थे। माँ ने हल्का नाइट सूट पहना था। उनकी जाँघें आधी दिख रही थीं। मैं उनके बगल में बैठ गया।
"माँ, ठंड लग रही है क्या?" मैंने पूछा और अपना हाथ उनकी जाँघ के पास ले गया।
माँ ने मेरे हाथ को हल्का छुआ और बोलीं, "लग रही है बेटा... लेकिन तेरा हाथ पास में है तो गर्मी महसूस हो रही है। तू तो जवान है, तेरा शरीर कितना गरम रहता होगा।"
मैंने हिम्मत करके कहा, "माँ, तुम भी बहुत गरम हो। जब तुम पास होती हो तो मुझे भी अजीब सा लगता है।"
माँ ने मेरी आँखों में देखा। उनकी साँसें थोड़ी तेज हो गईं। "राहुल... तू ऐसी बातें करता है तो माँ को भी याद आ जाता है कि उसका शरीर अब भी जवान है। स्तन भारी हो जाते हैं, नीचे कुछ गीला-गीला सा महसूस होता है।"
मैं चौंक गया लेकिन रुका नहीं। "माँ, तुम्हें अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे बता दो। मैं तुम्हें सहला सकता हूँ... दबा सकता हूँ... जहाँ जरूरत हो।"
माँ ने आँखें बंद कीं। उनकी आवाज़ भारी हो गई, "आह... बेटा, तू माँ की चूत की बात कर रहा है क्या? माँ की उस जगह को छूना चाहता है जहाँ बहुत दिनों से किसी का हाथ नहीं पड़ा?"
मैंने साँस रोके कहा, "माँ... अगर तुम चाहो तो... मैं बहुत धीरे-धीरे करूँगा। तुम्हारी गरम चूत को अपनी उँगलियों से सहलाऊँगा।"
माँ ने मेरी जाँघ पर हाथ रख दिया। उनकी उँगलियाँ हल्के से ऊपर की तरफ सरक रही थीं। "राहुल... तू माँ को पागल कर रहा है। मेरा बेटा अब माँ को चोदने की सोच रहा है? लेकिन अभी तो बस बातें ही कर... माँ का शरीर बहुत दिनों बाद जाग रहा है।"
मैंने उनकी कमर पर हाथ रखा और धीरे से सहलाया। माँ की सिसकारी निकली, "म्म्म... बेटा... और ऊपर मत जा अभी... धीरे-धीरे... माँ तेरी है।"
माँ की वो सिसकारी सुनकर मेरा लंड पैंट के अंदर पूरी तरह खड़ा हो गया। मोमबत्ती की हल्की रोशनी में उनका चेहरा लाल दिख रहा था। मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और उनकी कमर पर हाथ को थोड़ा और कसकर पकड़ लिया।
"माँ... तुम्हारी ये सिसकारी सुनकर मुझे और भी मन करता है।" मैंने उनके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा।
रेखा माँ ने आँखें आधी बंद कर लीं। उनकी साँसें तेज हो रही थीं। "आह्ह्ह... राहुल बेटा... तू माँ को कितना ललचा रहा है। मेरी जाँघें गीली हो रही हैं बेटा... बहुत दिनों बाद कोई मुझे छू रहा है।"
मैंने धीरे से अपनी उँगलियाँ उनकी कमर से ऊपर सरकाईं। नाइट सूट का कपड़ा पतला था, उनके स्तनों की गर्माहट मेरे हाथ को महसूस हो रही थी।
माँ ने मेरी जाँघ पर अपना हाथ और दबाया, लेकिन अभी तक मेरे लंड तक नहीं पहुँचा।
"माँ, तुम्हारे स्तन... बहुत भारी लग रहे हैं। क्या मैं उन्हें थोड़ा सहला दूँ? सिर्फ सहलाने के लिए..." मैंने शर्माते हुए लेकिन ललचाते हुए कहा।
रेखा माँ ने मेरी छाती पर सिर रख दिया। उनकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं। "बेटा... तू माँ का दूध पीना चाहता है क्या? मेरा बेटा अब माँ के इन बड़े-बड़े स्तनों को दबाना चाहता है... उफ्फ... छू तो ले धीरे से।"
मैंने अपना हाथ उनके ब्लाउज के ऊपर रखा। नरम, गर्म और भारी। हल्के से दबाया।
माँ के मुँह से लंबी सिसकारी निकली — "म्म्म्म्म... आह राहुल... धीरे बेटा... बहुत दिनों से सूखे पड़े हैं ये... तू दबा रहा है तो मेरा नीचे वाला हिस्सा तरप रहा है।"
हम दोनों बिस्तर पर और पास आ गए। मैंने उन्हें अपनी गोद में थोड़ा खींच लिया। माँ की जाँघें मेरी जाँघों पर रखी हुई थीं। मैं धीरे-धीरे उनकी पीठ सहलाता रहा, कभी कमर, कभी गर्दन। हर छुअन पर माँ का शरीर काँप उठता।
"माँ, तुम्हें कैसा लग रहा है?" मैंने पूछा।
"बहुत गंदा लग रहा है बेटा..." माँ ने शर्माते हुए कहा, "मेरा बेटा मुझे छू रहा है... मेरी चूत में पानी भर रहा है। तू अपनी उँगलियाँ मेरी जाँघों के बीच सरकाना चाहता है न? बोल न... माँ को बताकर शर्म दिला रहा है।"
मैंने हिम्मत करके अपनी उँगली उनकी जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर फेर दी। कपड़ा पहले से ही गीला महसूस हो रहा था। माँ ने अपने पैर थोड़े फैला दिए।
"आह्ह्ह... हाँ बेटा... वहीं... ऊपर मत जा अभी... बस सहला... माँ की गरम चूत को बाहर से ही छू... उफ्फफ... तेरी उँगलियाँ कितनी मोटी हैं।"
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने उन्हें चूम लिया — पहले गाल, फिर गर्दन। माँ ने भी मेरी गर्दन चूम ली और धीरे से काटा।
"राहुल... तू माँ को रंडी बना रहा है क्या? अपनी माँ को चोदने का मन कर रहा है... लेकिन अभी नहीं बेटा... पहले माँ को अच्छे से तैयार कर... मेरे स्तन चूस... मेरी चूत को उँगलियों से चोद... लेकिन लंड अंदर मत डालना अभी।"
मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश की। माँ ने खुद ही मदद की। उनके भारी, गोरे स्तन बाहर आ गए। ब्राउन निप्पल सख्त हो रहे थे। मैंने एक को मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
"ओह्ह्ह माँ... कितने स्वादिष्ट हैं..."
रेखा माँ ने मेरे सिर को अपने स्तनों पर दबाया — "आह्ह्ह... चूस बेटा... जोर से चूस... माँ का दूध निकाल... आह्ह्हह... नीचे भी हाथ डाल... मेरी चूत सहला... बहुत गीली हो गई है तेरी वजह से।"
मैंने नीचे हाथ डाला। उनकी पैंटी पूरी भीगी हुई थी। उँगलियों से बाहर से ही सहलाने लगा।
माँ जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थीं — "म्म्म... आह... हाँ बेटा... उँगली अंदर डाल... बस एक... माँ की चूत में अपनी उँगली घुमा... आह्ह्ह राहुल... तू माँ को पागल कर देगा..."
मैंने धीरे से एक उँगली अंदर डाली। अंदर बहुत गर्म और चिपचिपा था। माँ का पूरा शरीर तन गया।
"उफ्फफ... बेटा... और अंदर... दूसरी भी डाल... माँ को दो उँगलियों से चोद... आह्ह्ह... हाँ... ऐसे ही... तेज... माँ का पानी निकल रहा है..."
हम दोनों पसीने से तर थे। माँ मेरी गोद में बैठकर अपनी कमर हिला रही थीं। मेरे लंड पर उनकी गुद वाली जगह रगड़ खा रही थी। लेकिन मैंने अभी तक पैंट नहीं उतारी।
रेखा माँ ने मेरे कान में गंदी आवाज में कहा, "राहुल... तेरा लंड कितना खड़ा है... माँ को महसूस हो रहा है।
एक दिन माँ तेरे इस मोटे लंड को अपनी चूत में लेगी... लेकिन आज बस उँगलियों और मुँह से माँ को चोद... माँ तेरी रंडी बन गई है बेटा..."
मैंने तेजी से उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। माँ की सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। "आह्ह्ह... हाँ... और जोर से... माँ झड़ने वाली है... राहुल... माँ तेरी... आह्ह्हह..."
माँ की सिसकारियाँ सुनकर मेरा सिर घूम रहा था। उनकी चूत मेरी दो उँगलियों पर कसकर भींच रही थी।
अंदर बहुत गर्म, चिपचिपा और गीला था। मैं तेज़ी से उँगलियाँ अंदर-बाहर कर रहा था, कभी-कभी घुमाकर उनके अंदरूनी दीवार को छूता।
"आह्ह्हह... राहुल... बेटा... और तेज... माँ की चूत फाड़ दे अपनी उँगलियों से... उफ्फफ... हाँ... वहीं... ग-spot... आह्ह्ह... माँ झड़ रही है... आह्ह्हह!!"
माँ का पूरा शरीर अचानक तन गया। उनकी चूत मेरी उँगलियों पर सिकुड़ने लगी। गर्म पानी की धार मेरी हथेली पर बह निकली। माँ जोर-जोर से काँप रही थीं। मैंने उन्हें अपनी छाती से चिपकाए रखा और स्तनों को चूसता रहा।
"माँ... तुम कितनी हॉट हो... तुम्हारा पानी बहुत स्वादिष्ट है..." मैंने उनकी चूत से उँगलियाँ निकालकर अपने मुँह में डाल लीं।
रेखा माँ ने शर्म से आँखें बंद कर लीं लेकिन मुस्कुरा भी रही थीं। "गंदा बेटा... अपनी माँ का चूत का रस चाट रहा है... आह... माँ को बहुत अच्छा लगा... अब तू भी अपनी माँ को कुछ दे..."
माँ ने मेरी पैंट पर हाथ रख दिया। मेरे मोटे और खड़े लंड को बाहर से सहलाने लगीं। कपड़े के ऊपर से ही दबाव बढ़ा रही थीं।
"उफ्फ... राहुल... तेरा लंड तो बहुत मोटा और गरम है... माँ की चूत इसमें फिट हो जाएगी... लेकिन अभी नहीं... पहले माँ इसे देखना चाहती है... उसे चूसना चाहती है..."
मैंने पैंट का बटन खोल दिया। माँ ने खुद मेरी जाँघिया नीचे की। मेरा लंड बाहर छलांग लगाकर खड़ा हो गया। माँ की आँखें चमक उठीं।
"वाह बेटा... इतना बड़ा और मोटा... माँ का बेटा कितना जबरदस्त है... आह्ह्ह..."
माँ ने अपना हाथ लंड पर लपेट लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। उनकी नरम हथेली और ठंडी उँगलियाँ मेरे लंड को और भी तना रही थीं। मैं कराह उठा — "माँ... आह... तुम्हारा हाथ जादू कर रहा है..."
रेखा माँ मुस्कुराईं और नीचे झुक गईं। उन्होंने पहले लंड के सिरे को चूमा, फिर जीभ से चाटा। "म्म्म... स्वाद अच्छा है बेटा... अब माँ इसे मुँह में लेगी..."
माँ ने अपना मुँह खोला और मेरे लंड का आधा हिस्सा अंदर ले लिया। गर्म, गीला और नरम मुँह। उन्होंने चूसना शुरू किया — ऊपर-नीचे, कभी जोर से, कभी धीरे। उनकी जीभ लंड के नीचे वाले नसों पर घूम रही थी।
"आह्ह्ह माँ... तुम्हारा मुँह... बहुत अच्छा है... चूसो माँ... अपनी बेटे का लंड चूसो... उफ्फ..."
मैंने उनका सिर पकड़ लिया और हल्के से दबाया। माँ ने गला खोलकर और गहरा ले लिया। उनके मुँह से "ग्लक... ग्लक..." की आवाज़ आ रही थी। आँखों में पानी आ गया था लेकिन वे रुकी नहीं।
"राहुल... गप... गप... माँ तेरी रंडी है... तेरे लंड की भूखी... आह्ह्ह..."
कुछ देर बाद मैंने माँ को ऊपर खींच लिया। अब मैं उनके ऊपर आ गया। उनके दोनों स्तन बाहर थे। मैं दोनों को दबाते हुए चूसने लगा। माँ की जाँघें मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गईं।
"बेटा... मेरी चूत पर अपना लंड रगड़... लेकिन अंदर मत डालना अभी... बस रगड़... माँ को महसूस करा अपनी गर्मी..."
मैंने अपना लंड उनकी भीगी चूत की लकीर पर रख दिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे रगड़ने लगा। माँ जोर-जोर से कराह रही थीं — "आह्ह्ह... हाँ... ऐसे ही... तेरे मोटे लंड की गर्मी मेरी चूत को जला रही है... आह्ह्ह राहुल... माँ को चोदने वाला है तू... लेकिन धीरे... बहुत धीरे..."
मेरी रगड़ तेज़ होती गई। माँ का पानी फिर से बहने लगा। हम दोनों पसीने से तर थे। माँ ने मेरे कान में फुसफुसाया,
"राहुल... माँ तेरी हो गई... तू जब चाहे माँ की चूत फाड़ सकता है... माँ तेरे बच्चे की माँ बनने को तैयार है... लेकिन आज रात बस इसी तरह खेलो... माँ को और उँगलियों से चोदो... और अपना लंड मुँह में दो..."
मैंने फिर से दो उँगलियाँ अंदर डालीं और तेज़ी से चोदने लगा। माँ की चूत "चप... चप..." की आवाज़ कर रही थी। उनकी सिसकारियाँ पूरे घर में गूँज रही थीं।
"आह्ह्ह... हाँ बेटा... माँ झड़ रही है फिर से... राहुल... आह्ह्हह... तेरी माँ तेरी slut है... आह्ह्ह..."
माँ की चूत मेरी उँगलियों पर फिर से सिकुड़ रही थी। उनका गर्म पानी मेरी हथेली को भिगो रहा था।
मैं उँगलियाँ तेज़-तेज़ अंदर-बाहर कर रहा था जबकि मेरा मोटा लंड उनकी चूत की लकीर पर रगड़ खा रहा था। माँ की जाँघें मेरी कमर को कसकर जकड़े हुए थीं।
"आह्ह्हह... राहुल... बेटा... माँ मर जाएगी तेरी उँगलियों से... उफ्फफ... और गहरी... तीन उँगलियाँ डाल... माँ की चूत को फैला दे..."
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