माँ की चूत में बेटे का लंड! डबल मीनिंग से शुरू हुई चुदाई! 02
Maa Bete Ki Chudai : किचन, शावर और रिसॉर्ट में माँ-बेटे की Dirty चुदाई का खेल! बेटे ने प्यासी माँ की चूत और गांड फाड़ी! प्रेग्नेंट करने चुत में डाला अपना बीज! Family Dirty Wild Sex Story
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"आह्ह्ह... हाँ बेटा... माँ झड़ रही है फिर से... राहुल... आह्ह्हह... तेरी माँ तेरी slut है... आह्ह्ह..."
माँ की चूत मेरी उँगलियों पर फिर से सिकुड़ रही थी। उनका गर्म पानी मेरी हथेली को भिगो रहा था।
मैं उँगलियाँ तेज़-तेज़ अंदर-बाहर कर रहा था जबकि मेरा मोटा लंड उनकी चूत की लकीर पर रगड़ खा रहा था। माँ की जाँघें मेरी कमर को कसकर जकड़े हुए थीं।
"आह्ह्हह... राहुल... बेटा... माँ मर जाएगी तेरी उँगलियों से... उफ्फफ... और गहरी... तीन उँगलियाँ डाल... माँ की चूत को फैला दे..."
अब आगे :-
मैंने तीन उँगलियाँ अंदर ठूँस दीं। माँ का शरीर लहरा उठा। उनकी आँखें उलट गईं। "ओह्ह्ह माँ... हाँ... ऐसे ही... चोद अपनी माँ को... आह्ह्ह... तेरी उँगलियाँ तेरे लंड जितनी मोटी लग रही हैं..."
माँ ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और तेज़ी से मुठ मारने लगीं। उनकी हथेली लंड के सिरे पर रगड़ खा रही थी। मैं कराह उठा, "माँ... आह... तुम्हारा हाथ... मुझे झड़ने वाला है..."
रेखा माँ ने मुझे अपनी तरफ खींचा। उनके भारी स्तन मेरी छाती से दब रहे थे।
उन्होंने मेरे कान में गंदी-गंदी फुसफुसाहट की, "बेटा... अब माँ तेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर लगाकर रगड़ना चाहती है... लेकिन पूरा अंदर मत डालना... बस सिरा ही... माँ को tease कर..."
मैंने अपना लंड उनकी चूत की भीगी फाँक पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया।
गर्म, चिपचिपा और बहुत नरम। माँ ने अपनी कमर ऊपर-नीचे हिलानी शुरू कर दी। हर रगड़ पर उनका क्लिटोरिस मेरे लंड के सिरे से टकरा रहा था।
"आह्ह्ह... हाँ राहुल... तेरे मोटे लंड का सिरा मेरी चूत को चूम रहा है... उफ्फ... और दबा... माँ की चूत बहुत तरस रही है तेरे लंड के लिए... लेकिन अभी मत चोद... माँ को और भिगो..."
हम दोनों पसीने से लथपथ थे। कमरे में सिर्फ हमारी साँसें, सिसकारियाँ और चूत-लंड की चप-चप की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैंने उनके दोनों स्तनों को जोर से दबाया और निप्पल चूसने लगा। माँ मेरे बाल खींच रही थीं।
"राहुल... आह्ह्ह... माँ तेरी lactating रंडी बन गई है... चूस... दूध निकाल... नीचे अपना लंड मेरी चूत में थोड़ा और दबा... आह्ह्हह... बस सिरा अंदर... हाँ... बस इतना..."
मैंने लंड का सिरा उनकी चूत के मुँह में धकेला। बहुत टाइट और गर्म। माँ का पूरा शरीर काँप उठा।
"उफ्फफफ... बेटा... तेरे लंड का सिरा अंदर... माँ की चूत फट रही है... आह्ह्ह... और मत डाल... बस यहीं रगड़... माँ झड़ने वाली है फिर से..."
मैंने हल्के-हल्के धक्के देने शुरू कर दिए। सिर्फ सिरा अंदर-बाहर। माँ की चूत मेरे लंड को चूस रही थी। उनकी नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे।
"आह्ह्ह राहुल... मेरा बेटा अपनी माँ को चोद रहा है... तेरी माँ अब तेरी personal slut है... जब चाहे चोद... आह्ह्ह... लेकिन आज रात पूरा मत डालना... माँ को tease करके पागल कर दे..."
मैंने उन्हें पलट दिया। अब माँ घुटनों के बल थीं, उनका गोल-गोल नितंब मेरे सामने था। मैंने पीछे से उनकी चूत पर लंड रखा और रगड़ने लगा। माँ ने कमर पीछे की तरफ झुका दी।
"हाँ बेटा... doggy style... माँ की गांड देख... मार अपनी माँ की गांड पर थप्पड़... आह्ह्ह..."
मैंने उनकी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। लाल निशान पड़ गया। माँ चीख उठीं लेकिन खुशी से — "आह्ह्ह... और मार... माँ तेरी bad girl है... अपनी माँ की चूत को लंड से चोद... लेकिन सिर्फ सिरा..."
मैंने फिर से सिरा अंदर किया और तेज़-तेज़ छोटे धक्के दिए। माँ की चूत से पानी टपक रहा था। "चप... चप... चप..." की आवाज़ तेज हो गई। माँ का सिर बिस्तर पर दबा हुआ था, गांड ऊपर।
"राहुल... आह्ह्ह... माँ का पानी फिर निकल रहा है... तू माँ को squirting करा रहा है... उफ्फफ... बेटा... तेरी माँ बहुत गंदी हो गई है तेरे लंड की वजह से..."
मैंने उन्हें फिर से अपनी गोद में बिठा लिया। अब हम face-to-face थे। माँ ने मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा और खुद हिलने लगीं। उनके स्तन मेरे चेहरे पर उछल रहे थे। मैं उन्हें चूसता रहा।
"माँ... तुम कितनी भूखी हो... मैं अब और control नहीं कर पा रहा..."
रेखा माँ ने मेरी आँखों में गहरी नजर डाली, उनकी आवाज़ भरी हुई थी, "बेटा... माँ भी नहीं रोक पा रही... लेकिन आज पूरा मत डाल... कल रात पूरा डालकर माँ की चूत फाड़ देना... आज बस यहीं तक... माँ तेरे लंड पर झड़ना चाहती है..."
मैंने तेज़ी से रगड़ना शुरू किया। माँ की चूत मेरे लंड के सिरे को चूस रही थी। दोनों की सिसकारियाँ एक हो गईं।
"आह्ह्ह... राहुल... माँ आ रही है... साथ में झड़... आह्ह्हह... हाँ बेटा... माँ तेरी... तेरी रंडी माँ... आह्ह्हहह!!!"
माँ की वो आखिरी सिसकारी और उनका पूरा शरीर काँपना देखकर मेरा दिमाग़ पूरी तरह से काबू से बाहर हो गया।
उनकी चूत मेरे लंड के सिरे को जोर-जोर से चूस रही थी। रेखा माँ ने मेरी आँखों में गहरी नजर डाली, उनकी आवाज़ भरी हुई और भूखी थी:
"राहुल... अब रोक मत बेटा... माँ को पूरा चोद दो... अपनी माँ की चूत में अपना मोटा लंड पूरा-पूरा ठूँस दो... आह्ह्ह... माँ तेरी रंडी है आज रात... फाड़ दो माँ की चूत..."
मैंने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया। उनके पैर फैलाए, घुटनों को मोड़कर ऊपर किया। उनकी चूत पूरी तरह भीगी, लाल और खुली हुई थी। मैंने अपना मोटा लंड पकड़ा और उनके चूत के मुँह पर रखा।
"माँ... मैं अंदर जा रहा हूँ... पूरी तरह..."
"हाँ बेटा... धीरे से शुरू कर... आह्ह्ह... तेरे लंड का सिरा अंदर..."
मैंने कमर आगे की। मेरा लंड का मोटा सिरा उनकी टाइट चूत में धंस गया। माँ की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी चीख निकली — "आआआह्ह्हह... राहुल... बहुत मोटा है... माँ की चूत फट रही है... आह्ह्ह... और अंदर..."
मैं धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डालने लगा। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं। बहुत गर्म, बहुत चिपचिपा और बहुत टाइट। आधा लंड अंदर गया तो माँ ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
"उफ्फफफ... बेटा... पूरा डाल... माँ को चीर डाल... आह्ह्हह... हाँ... हाँ... पूरा अंदर... ओह्ह्ह माँ मर गई..."
एक जोरदार धक्के के साथ मैंने पूरा मोटा लंड उनकी चूत में उतार दिया। हमारी हड्डियाँ टकराईं। माँ का पूरा शरीर मेरे नीचे अकड़ गया। उनकी चूत मेरे लंड को अंदर से मसल रही थी।
"आह्ह्हहह... राहुल... तेरे लंड ने माँ की चूत भर दी... बहुत गहरा... आह्ह्ह... अब चोद... जोर-जोर से चोद अपनी माँ को..."
मैंने तेज़ी से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर माँ के भारी स्तन उछल रहे थे। कमरे में "पच... पच... पच..." की आवाज़ और माँ की सिसकारियाँ गूँज रही थीं।
"आह्ह्ह... हाँ बेटा... और तेज... माँ की चूत फाड़ दे... आह्ह्ह राहुल... तू माँ का असली मर्द है... उफ्फफ... गहरी... और गहरी... आह्ह्हह..."
मैंने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक धकेलने लगा। माँ की चूत से सफेद झाग बन रहा था। उनका पानी हर धक्के पर मेरी जाँघों पर छींट रहा था।
"माँ... तुम्हारी चूत कितनी गरम और टाइट है... मैं अपनी माँ को चोद रहा हूँ... आह्ह्ह... बहुत मज़ा आ रहा है..."
रेखा माँ ने अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरे धक्कों का साथ देना शुरू कर दिया। उनकी आँखें उलटी हुई थीं, मुँह खुला था, लार टपक रही थी।
"आह्ह्ह... हाँ... चोद... अपनी माँ को प्रेग्नेंट कर दे... माँ तेरे बच्चे को जन्म देना चाहती है... आह्ह्ह... तेरी माँ अब तेरी wife है... चोदो... जोर से चोदो..."
मैंने उन्हें doggy style में पलटा। उनकी गोल-मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे और पीछे से लंड घोंप दिया।
"आआआह्ह्हह... फाड़ दी गांड... आह्ह्ह राहुल... गांड भी मारना चाहता है न?... मार... माँ की दोनों जगहें तेरी हैं... आह्ह्ह... तेज... तेज... माँ झड़ रही है... आह्ह्हहह!!!"
माँ की चूत फिर से सिकुड़ी। गर्म पानी की फुहार मेरे लंड पर पड़ी। लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उनका बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज धक्के मारे।
"माँ... मैं भी आने वाला हूँ... कहाँ डालूँ?"
रेखा माँ ने कराहते हुए कहा, "अंदर... पूरी तरह अंदर... माँ की चूत में अपना गर्म वीर्य भर दो... आह्ह्ह... माँ प्रेग्नेंट होना चाहती है तेरे से..."
मैंने आखिरी जोरदार धक्के दिए। मेरा लंड उनकी चूत के सबसे अंदर तक पहुँच गया और फूट पड़ा। गर्म-गर्म वीर्य की धार माँ की चूत में भर गई। माँ भी साथ में झड़ गईं। दोनों की चीखें कमरे में गूँज गईं।
"आह्ह्हह... राहुल... भर दी माँ की चूत... उफ्फ... कितना गर्म है... माँ तेरी... हमेशा तेरी..."
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। माँ की चूत से हमारा मिश्रित रस बह रहा था। माँ ने मेरे चेहरे को चूम लिया और फुसफुसाई,
"बेटा... ये सिर्फ शुरुआत है... माँ अब रोज़ तेरे लंड की भूखी रहेगी... कल नई फैंटसी है... माँ तेरे साथ और गंदी-गंदी चीजें करना चाहती है..."
मैंने मुस्कुराते हुए उनकी कमर पर हाथ फेरा। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी। घर में अब सिर्फ हम दोनों की गर्म साँसें थीं। लेकिन ये रात खत्म होने वाली नहीं थी...
माँ की चूत अभी भी मेरे लंड पर हल्के-हल्के सिकुड़ रही थी। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके हुए लेटे थे।
मेरे गर्म वीर्य की कुछ बूँदें उनकी चूत से बाहर निकलकर बिस्तर पर गिर रही थीं। रेखा माँ ने अपनी आँखें आधी खोलीं, उनकी नजर में अभी भी वही भूख थी।
"राहुल... बेटा... तूने माँ को स्वर्ग पहुँचा दिया..." उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर ही हल्का दबाया। "आह्ह्ह... अभी भी इतना सख्त है... माँ की चूत अभी भी भूखी है तेरे लंड की..."
मैंने उन्हें चूम लिया, गहरी फ्रेंच किस। उनकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। कुछ देर बाद माँ ने मुझे पीछे धकेला और खुद ऊपर आ गईं। अब वे मेरे ऊपर सवार थीं। मेरे लंड पर बैठकर धीरे-धीरे हिलने लगीं।
"माँ... आह... तुम कितनी गंदी हो गई हो..." मैंने उनके स्तनों को दबाते हुए कहा।
रेखा माँ ने मुस्कुराते हुए अपनी कमर घुमाई, "हाँ बेटा... तेरी वजह से माँ अब पूरी रंडी बन गई है। तूने माँ की चूत, मुँह, गांड... सब कुछ अपना बना लिया है। लेकिन ये सिर्फ शुरुआत है..."
वे तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके भारी स्तन मेरे चेहरे पर उछल रहे थे। मैं उन्हें चूसता रहा।
कमरे में फिर से "चप... चप... चप..." की आवाज़ गूँजने लगी। माँ की सिसकारियाँ और बढ़ गईं — "आह्ह्ह... हाँ... गहरी... तेरे लंड ने माँ की चूत को खोल दिया है... अब रोज़ चोदना पड़ेगा बेटा... आह्ह्हह..."
मैंने उनकी गांड पकड़कर नीचे से जोरदार धक्के दिए। माँ झुक गईं और मेरे कान में फुसफुसाईं,
"कल से नई फैंटसी शुरू करेंगे... माँ तेरे सामने नंगी नहाएगी... तू मुझे शावर के नीचे चोदेगा... फिर रसोई में... छत पर... और एक दिन हम बाहर भी... किसी रिसॉर्ट में... जहाँ कोई हमें माँ-बेटे न समझे... बस पति-पत्नी..."
उनकी बातें सुनकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उन्हें पलटा और फिर से missionary में चोदने लगा।
हर धक्के के साथ माँ चीख रही थीं, "आह्ह्ह राहुल... फाड़ दो... माँ को प्रेग्नेंट कर दो... माँ तेरे बच्चे को पेट में रखना चाहती है... आह्ह्ह... हाँ... और तेज..."
हम दोनों कई बार झड़ चुके थे। आखिरकार थककर हम एक-दूसरे की बाँहों में सो गए।
अगली सुबह...
मैं उठा तो माँ रसोई में थीं। उन्होंने हल्की ट्रांसपेरेंट नाइट सूट पहना था। उनके निप्पल साफ दिख रहे थे। मैं पीछे से गया और उन्हें जकड़ लिया। मेरा लंड उनकी गांड पर दब रहा था।
"गुड मॉर्निंग माँ..." मैंने उनकी गर्दन चूमते हुए कहा।
रेखा माँ ने मुड़कर मुस्कुराई, "गुड मॉर्निंग मेरे लवर... आज माँ ने ब्रा नहीं पहनी... देखना चाहो तो..."
उन्होंने खुद ही नाइट सूट का ऊपरी हिस्सा नीचे किया। उनके भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने उन्हें चूस लिया। माँ ने आह भरी, "आह्ह... बेटा... नाश्ते से पहले माँ का दूध पी ले..."
हम फिर से गर्म हो गए। उन्होंने काउंटर पर झुककर अपनी गांड निकाली। मैंने पीछे से लंड अंदर किया और धीरे-धीरे चोदने लगा।
"आह्ह्ह... हाँ... रोज़ सुबह ऐसा ही चोदना... माँ तेरी personal fuck toy है अब..."
दिन भर हमने कई बार सेक्स किया — सोफे पर, बाथरूम में, बेडरूम पर। हर बार माँ और ज्यादा गंदी बातें कर रही थीं। शाम को हम बिस्तर पर लेटे थे। माँ मेरी छाती पर सिर रखे हुए थीं।
"राहुल... ये रिश्ता हमेशा चलेगा न? माँ अब तेरे बिना नहीं रह सकती।
लेकिन..." उन्होंने मेरी आँखों में देखा, "कभी-कभी लगता है कि ये सब सपना तो नहीं है? या फिर हम और आगे जा सकते हैं... कोई फैंटसी जो अभी तक सोची भी नहीं..."
मैंने उनकी कमर सहलाई, "माँ, जो भी फैंटसी हो... मैं तैयार हूँ। तुम बोलो।"
रेखा माँ मुस्कुराईं। उनकी आँखों में शरारत और ललक दोनों थी। उन्होंने मेरे लंड पर हाथ फेरा और फुसफुसाई,
"तो फिर कल रात... माँ एक नई चीज ट्राई करना चाहती है... लेकिन उससे पहले... तू बता... तुझे क्या-क्या करना है अपनी माँ के साथ?"
मैंने उन्हें कसकर चूम लिया। बाहर अंधेरा हो चुका था। हम दोनों फिर से एक-दूसरे में खो गए।
लेकिन ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। हमारे बीच की आग अभी और बहुत कुछ जलाने वाली थी... भविष्य में क्या-क्या फैंटसी पूरी होंगी, ये तो सिर्फ हम दोनों ही जानते थे।
तो दोस्तों यह Maa Bete Ki Chudai कहानी कैसे लगी आपको? आगे की और wild sex story जाननी है तो कॉमेंट में जरूर बताए!
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