खेत में माँ की चूत चोदकर घर में रिस्की सेक्स!

Family Sex Story : माँ को गरम करके खेत में माँ की चूत फाड़ी!! फिर घर में बहन के पास रिस्क लेकर माँ को रंडी की तरह चोदा! Full Dirty Talk और Kamvasna से भरपूर!


दोस्तों, ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। ये घटना दो साल पहले मेरे साथ हुई थी। मैं आपको धीरे-धीरे, बिना कुछ छुपाए बताता हूँ कि कैसे मेरी अपनी माँ के साथ वो सब शुरू हुआ जो कभी सोचा भी नहीं था।


मेरा नाम अर्जुन है। उम्र 23 साल। हम पंजाब के एक छोटे से गाँव में रहते हैं। हमारे परिवार में पाँच लोग हैं — पापा सुखदेव (46), मम्मी मीरा (44), बड़ी बहन सिमरन, छोटी बहन रिया और मैं।


पापा खेती करते हैं, हमारे पास काफी जमीन है। ज्यादातर समय वो खेतों में ही रहते हैं। मम्मी घर और खेत दोनों संभालती हैं।


मम्मी का नाम मीरा है। दोस्तों, उनकी उम्र 44 साल है लेकिन शरीर देखकर कोई नहीं कह सकता। गौरा रंग, भरा हुआ बदन, भारी-भारी स्तन और सबसे खास उनकी मोटी, गोल और भारी गांड। जब वो चलती हैं तो वो गांड दोनों तरफ हिलती हुई लगती है।


साड़ी पहनती हैं तो पीछे से उनका आकार और भी ज्यादा उभरकर आता है। मैं बचपन से ही उनकी गांड और स्तनों की तरफ आकर्षित रहता था, लेकिन असली हवस दो साल पहले जागी।


शहर में पढ़ाई करते हुए मैंने बहुत सारी माँ-बेटे वाली कहानियाँ पढ़ी थीं। गरमकहानी डॉट कॉम पर रियल माँ-बेटे, भाई-बहन की चुदाई की कहानियाँ पढ़कर मेरा लंड घंटों खड़ा रहता था।


लेकिन कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी अपनी सगी माँ के साथ ऐसा कुछ हो जाएगा।


नवंबर की बात है। हमारे खेत में सरसों की फसल लगी थी और सब्जियाँ भी। पानी देने के लिए मुझे गाँव आना पड़ा। शाम को जब मैं घर पहुँचा तो सबसे पहले छोटी बहन रिया मुझसे लिपट गई।


फिर मम्मी ने गले लगाया। जैसे ही उनकी भारी छाती मेरी छाती से सटी, मेरे दिमाग में वो सारी कहानियाँ घूम गईं। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने जल्दी से मम्मी को छोड़ा और कमरे में चला गया।


रात को खाना खाते समय पापा ने बताया कि सुबह उन्हें अमृतसर जाना है और दो-तीन दिन लग सकते हैं। खेतों में पानी देने की जिम्मेदारी उन्होंने मुझे सौंपी।


सुबह हुई। मैं अभी भी सो रहा था। मम्मी कमरे में आईं।


“अर्जुन, उठ जा बेटा। देर हो रही है।”


मैंने आँखें खोलीं। मम्मी रजाई खींच रही थीं।


अचानक मेरी नजर मेरे पजामे पर गई — मेरा लंड पूरा खड़ा होकर तम्बू बना रहा था। मम्मी ने भी देख लिया। उन्होंने तुरंत मुँह दूसरी तरफ कर लिया, लेकिन उनके गालों पर हल्की लाली आ गई थी।


मैं शर्मिंदा भी हुआ और कुछ अजीब सा भी महसूस कर रहा था।


मम्मी बाहर चली गईं। मैं उठा, नहाया और खेत पर पापा के साथ चला गया। दोपहर में पापा को अचानक शहर जाना पड़ा। उन्होंने कहा, “बेटा, तू पानी देना संभाल लेना। तेरी माँ खाना लेकर आएगी और मदद भी कर देगी।”


पापा चले गए।


खेत खाली था। चारों तरफ सिर्फ फसलें। मैं अकेला था। मोबाइल निकाला और माँ-बेटे वाली वीडियो लगाई। लंड बाहर निकालकर हिलाने लगा। मम्मी की मोटी गांड और भारी स्तनों के ख्याल आते ही मेरा लंड और सख्त हो गया।


मैं सोच रहा था — “काश मम्मी की गांड में अपना लंड घुसा पाता।” सोचते-सोचते मैं झड़ गया। आज जितना माल निकला, पहले कभी नहीं निकला था।


लगभग 11 बजे मम्मी खाना लेकर आईं। सफेद साड़ी पहनी हुई थी। वो टिफिन लेकर मेरे पास आईं।


“बेटा, खाना खा ले। मैं तब तक पानी संभाल लेती हूँ।”


मैं टिफिन लेकर बैठ गया। मम्मी पानी का पाइप संभाल रही थीं। जब भी वो झुकतीं, उनकी भारी गांड घाघरे में उभरकर आती। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैं खाना खाते हुए उनकी गांड ही देखता रहा।


थोड़ी देर बाद पाइप का जोड़ खुल गया। पानी का तेज प्रेशर निकलने लगा। मैं और मम्मी दोनों उसे जोड़ने की कोशिश करने लगे। पानी हम दोनों पर छिटक रहा था। कुछ सेकंड में मम्मी की पूरी साड़ी भीग गई।


साड़ी उनके शरीर से चिपक गई थी। उनके भारी स्तन साफ दिख रहे थे। निप्पल्स की हल्की उभार भी नजर आ रही थी। उनकी मोटी गांड भी साड़ी से चिपककर और ज्यादा आकर्षक लग रही थी।


मैं उनकी तरफ देखता ही रह गया। मेरा लंड दर्द करने लगा था। मम्मी ने भी मुझे देख लिया। उन्होंने मेरे पजामे में बने तम्बू को देखा और तुरंत दूसरी तरफ मुँह कर लिया। लेकिन उनके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी।


हम दोनों भीग चुके थे। मम्मी ने कहा, “बेटा, तू भी भीग गया। कमरे में जाकर कपड़े बदल ले।”


लेकिन मैं वहीं खड़ा रहा। मम्मी की भीगी हुई साड़ी, उनके स्तन, उनकी गांड — सब कुछ मेरे सामने था। मेरे मन में सिर्फ एक ही ख्याल था :-


“आज कुछ तो होगा… आज मम्मी को छूने का बहाना मिल गया है।”


मम्मी ने पानी बंद किया और मेरी तरफ देखा। उनकी साड़ी पूरी तरह चिपकी हुई थी। उनके स्तन साफ उभर रहे थे। आँखों में कुछ अजीब सी चमक थी।


मैं धीरे से उनके पास गया।


“मम्मी… आप भी भीग गईं।”


मैंने उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा खींचा। पानी की बूँदें उनके गले से नीचे उतर रही थीं और उनके स्तनों के बीच गायब हो रही थीं।


मम्मी ने मेरी तरफ देखा। इस बार उन्होंने मुँह नहीं घुमाया।


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उनकी साँसें थोड़ी तेज हो रही थीं।


मैंने आगे बढ़कर उनकी कमर पर हाथ रख दिया।


“मम्मी… ठंड लग रही है क्या?”


मम्मी कुछ बोली नहीं। बस मेरी आँखों में देखती रहीं।


उस पल खेत में सिर्फ हम दोनों थे। पानी की आवाज बंद हो चुकी थी। सिर्फ हमारी साँसें सुनाई दे रही थीं।


मैंने मम्मी की कमर पर हाथ रखा हुआ था। उनकी भीगी हुई साड़ी मेरी उँगलियों से चिपक रही थी। पानी की बूँदें उनके गले से नीचे उतरकर स्तनों के बीच गायब हो रही थीं। मम्मी मेरी आँखों में देख रही थीं। उनके होंठ थोड़े खुले हुए थे और साँसें थोड़ी तेज हो चुकी थीं।


“अर्जुन… छोड़ दे बेटा…” उन्होंने धीरे से कहा, लेकिन उनकी आवाज में वो ताकत नहीं थी जो पहले होती थी।


मैंने हाथ नहीं हटाया। उल्टे हल्का सा दबाव बढ़ा दिया।


“मम्मी, आप भीग गई हैं… ठंड लग जाएगी।”


मैंने अपनी दूसरी उँगली से उनकी कमर के पास साड़ी को हल्का सा खींचा। साड़ी और भी ज्यादा उनके शरीर से चिपक गई। अब उनके भारी स्तन और भी साफ दिख रहे थे। निप्पल्स सख्त हो चुके थे और साड़ी के कपड़े से उभर रहे थे।


मम्मी ने मेरी तरफ देखा। इस बार उनकी आँखों में शर्म के साथ कुछ और भी था — एक अजीब सी बेचैनी।


“बेटा… ये गलत है। तू मेरा बेटा है…”


लेकिन वो मेरी तरफ से हटी नहीं।


मैंने धीरे से कहा, “मम्मी… आपकी साड़ी पूरी भीग गई है। कमरे में चलकर कपड़े बदल लीजिए ना।”


मम्मी ने सिर हिलाया। हम दोनों खेत के छोटे से कमरे की तरफ चल पड़े। रास्ते में मैंने जानबूझकर अपनी बाँह उनकी कमर से लगाए रखी। हर कदम पर उनकी मोटी गांड मेरी जाँघ से टकरा रही थी। वो भारी-भारी हिल रही थी। मेरा लंड अब पूरी तरह पत्थर जैसा खड़ा हो चुका था और पजामे में दर्द कर रहा था।


कमरे में पहुँचकर मम्मी ने दरवाजा बंद किया। कमरा छोटा था — सिर्फ एक चारपाई, एक पुराना पंखा और एक टेबल। मम्मी ने अलमारी से तौलिया निकाला और खुद को पोंछने लगीं।


मैं पीछे खड़ा उन्हें देख रहा था।


जैसे ही उन्होंने तौलिये से अपने स्तनों को पोंछा, उनका भारीपन और भी ज्यादा उभर आया। मैंने आगे बढ़कर तौलिया उनके हाथ से ले लिया।


“मैं कर देता हूँ मम्मी…”


मम्मी ने मुझे रोकने की कोशिश की, “नहीं बेटा… मैं खुद…”


लेकिन मैंने तौलिया उनकी गर्दन पर रख दिया और धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगा। तौलिये के कपड़े ने उनके स्तनों को छुआ। मम्मी का शरीर हल्का सा काँप गया।


“अर्जुन… रुक जा…”


मैंने उनकी आँखों में देखा। “मम्मी, आप भीग गई हैं… बीमार पड़ जाएँगी।”


मैंने तौलिये को उनके स्तनों पर रखा और हल्के हाथ से दबाते हुए पोंछने लगा। मम्मी की साँसें और तेज हो गईं। उनके निप्पल्स अब पूरी तरह सख्त हो चुके थे और तौलिये के नीचे साफ महसूस हो रहे थे।


मैंने तौलिया थोड़ा नीचे सरकाया। अब उनके पेट और कमर पर था। फिर मैंने धीरे से तौलिये को उनकी पीठ की तरफ ले जाकर उनकी मोटी गांड पर रख दिया।


मम्मी का शरीर और ज्यादा काँप उठा।


“बेटा… ये… ये ठीक नहीं…”


लेकिन उनकी आवाज बहुत कमजोर थी।


मैंने उनकी गांड पर तौलिये से हल्का दबाव दिया। उनकी मोटी, मुलायम और भारी गांड मेरी हथेली के नीचे महसूस हो रही थी। मैंने दो-तीन बार धीरे से दबाया। मम्मी ने आँखें बंद कर लीं।


“अर्जुन… पाप लगेगा बेटा…”


मैंने उनके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से कहा, “मम्मी… आप बहुत सुंदर हो। मैं बचपन से आपकी गांड और स्तन देखता हूँ… आज आप भीग गईं तो मैं खुद को रोक नहीं पा रहा।”


मम्मी ने आँखें खोलीं। उनके चेहरे पर शर्म, डर और कुछ और भाव थे।


मैंने तौलिया नीचे रख दिया और सीधे उनके स्तन पर हाथ रख दिया। इस बार बिना तौलिये के। उनकी साड़ी अभी भी भीगी हुई थी। मेरी हथेली उनके भारी स्तन पर रखी थी। मैंने हल्का सा दबाया।


मम्मी का मुँह खुल गया। एक हल्की सी सिसकारी निकली — “आह…”


मैंने दूसरा हाथ भी उनके दूसरे स्तन पर रख दिया। अब दोनों स्तन मेरी हथेलियों में थे। मैंने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। मम्मी की साँसें और भी तेज हो गईं।


“अर्जुन… रुक… प्लीज… तू मेरा बेटा है…”


लेकिन उन्होंने मेरे हाथ नहीं हटाए।


मैंने उनके स्तनों को और जोर से दबाया। मम्मी ने पीछे की तरफ झुककर कमर का सहारा लिया। उनकी गांड बाहर की तरफ उभर आई। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी गांड पर रख दिया और जोर से दबा दिया।


“मम्मी… आपकी गांड कितनी मोटी और मुलायम है…”


मम्मी ने इस बार कुछ नहीं कहा। बस आँखें बंद करके साँसें ले रही थीं।


मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। साड़ी उनके एक कंधे से नीचे सरक गई। अब उनका एक भारी स्तन आधा बाहर आ गया था। मैंने तुरंत मुँह आगे बढ़ाया और उनके निप्पल पर होंठ रख दिए।


मम्मी का शरीर झटका खा गया।


“अर्जुन… नहीं… ये गलत है…”


लेकिन उन्होंने मुझे दूर नहीं किया।


मैंने उनके निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। दूसरा हाथ उनकी गांड पर रखा हुआ था और जोर-जोर से दबा रहा था। मम्मी की साँसें अब कराह में बदल रही थीं।


“आह… बेटा… धीरे… उफ्फ…”


मैंने उनका दूसरा स्तन भी बाहर निकाला और दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसने लगा। मम्मी अब मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं। उनका शरीर काँप रहा था।


मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी जाँघों के बीच डाल दिया। साड़ी के ऊपर से ही मैंने उनकी चूत को छुआ।


मम्मी का शरीर और ज्यादा काँप उठा।


“अर्जुन… नहीं बेटा… ये मत कर…”


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लेकिन उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। साड़ी के कपड़े से भी मुझे महसूस हो रहा था।


मैंने उनकी चूत पर हथेली रखी और हल्का सा रगड़ना शुरू किया।


मम्मी ने इस बार जोर से कराहा — “आआह… अर्जुन…”


मैंने उनका मुँह अपने मुँह से ढक लिया और जोर से किस किया। मम्मी ने पहले तो विरोध किया, लेकिन कुछ सेकंड बाद उन्होंने भी किस का जवाब देना शुरू कर दिया।


हम दोनों खड़े-खड़े एक-दूसरे को चूम रहे थे। मेरा एक हाथ उनके स्तन पर था, दूसरा उनकी चूत पर। मम्मी की साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं।


मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “मम्मी… आज मैं आपको चोदना चाहता हूँ।”


मम्मी ने आँखें खोलीं। उनके चेहरे पर आँसू थे।


“बेटा… पाप लगेगा… तू मेरा बेटा है…”


लेकिन उनकी आवाज में अब कोई रोक नहीं थी।


मैंने उनकी साड़ी का नाड़ा खोलने की कोशिश की।


मम्मी ने मेरी कलाई पकड़ ली।


“रुक जा अर्जुन… अभी नहीं… प्लीज…”


मैंने उन्हें जोर से अपनी तरफ खींचा। मेरा खड़ा लंड उनकी जाँघ से टकरा रहा था।


“मम्मी… मैं और नहीं रुक सकता…”


मम्मी ने मेरी छाती पर हाथ रखा और धीरे से धक्का दिया।


“बेटा… आज के लिए बस… मुझे जाने दो।”


उनकी आँखों में आँसू थे। लेकिन उनके शरीर से अभी भी गर्मी निकल रही थी।


मैंने उन्हें छोड़ दिया।


मम्मी ने जल्दी से अपनी साड़ी ठीक की, दरवाजा खोला और बाहर चली गईं।


मैं वहीं खड़ा रह गया। मेरा लंड अभी भी दर्द कर रहा था।


लेकिन मैं जानता था…


आज जो शुरू हुआ है, वो अब रुकने वाला नहीं है।


शाम हो चुकी थी।


मैं खेत के कमरे में अकेला लेटा हुआ था। मम्मी दो घंटे पहले चली गई थीं और तब से मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही चीज चल रही थी — उनकी भीगी साड़ी, उनके भारी स्तन मेरे मुँह में, और मेरी उँगलियाँ उनकी चूत पर। मेरा लंड अभी भी अधूरा था।


दरवाजे पर हल्की खटखट हुई।


मैंने उठकर दरवाजा खोला। मम्मी खड़ी थीं। अब उन्होंने साड़ी बदल ली थी, लेकिन चेहरा अभी भी लाल था।


“खाना ले आई हूँ…” उन्होंने धीरे से कहा और अंदर आ गईं।


उन्होंने टिफिन टेबल पर रखा और मेरी तरफ देखे बिना ही बोलीं, “खा ले बेटा… फिर घर चलना है।”


मैंने दरवाजा बंद किया।


“मम्मी…” मैंने उनके पीछे से आकर उनकी कमर पकड़ ली।


मम्मी का शरीर काँप गया।


“अर्जुन… मत कर। जो सुबह हुआ वो गलत था।”


मैंने उनके कान के पास मुँह रखा, “मम्मी… मैं और नहीं रुक सकता।”


मैंने उन्हें अपनी तरफ घुमाया और जोर से उनके होंठों पर किस कर लिया। मम्मी ने पहले विरोध किया, लेकिन कुछ सेकंड बाद उनकी होंठ खुल गए। हम दोनों जोर-जोर से एक-दूसरे को चूमने लगे। मेरी जीभ उनकी जीभ से लड़ रही थी।


मैंने उन्हें चारपाई पर लिटा दिया।


इस बार मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचकर फेंक दिया। ब्लाउज के हुक खोलने लगा। मम्मी ने मेरे हाथ पकड़ लिए, “नहीं बेटा… प्लीज…”


लेकिन उनकी आवाज में कोई ताकत नहीं थी।


मैंने ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए। अंदर ब्रा थी। मैंने ब्रा भी ऊपर खिसका दी। मम्मी के दोनों भारी, गोरे और मोटे स्तन बाहर आ गए। निप्पल्स गुलाबी और सख्त हो चुके थे।


मैंने एक स्तन मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा।


“आआह… अर्जुन…” मम्मी कराह उठीं।


मैंने दूसरे स्तन को हाथ से मसलते हुए पहले वाले को चूसता रहा। मम्मी मेरे बालों में उँगलियाँ फंसा चुकी थीं। मैंने उनके निप्पल को दाँतों से हल्का काटा।


“उफ्फ… बेटा… धीरे…”


मैंने उनकी साड़ी का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट के साथ ही साड़ी नीचे खिसक गई। अब मम्मी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने पेटीकोट भी नीचे खिसका दिया।


मम्मी की मोटी, सफेद और थोड़ी-थोड़ी बालों वाली चूत सामने आ गई।


मैंने उनकी जाँघें फैलाईं और सीधे उनके चूत पर मुँह लगा दिया।


“अर्जुन… नहीं… ये मत कर…” मम्मी ने विरोध किया, लेकिन जब मेरी जीभ ने उनकी चूत के फटे पर पहला स्पर्श किया तो उनका शरीर झटके से ऊपर उठ गया।


“आआह… भगवान…”


मैंने उनकी चूत चाटना शुरू किया। जीभ को अंदर-बाहर करते हुए और ऊपर क्लिट को चूसते हुए। मम्मी की चूत पहले से ही काफी गीली थी। मीठा-खारा स्वाद मेरे मुँह में भर रहा था।


मम्मी अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं।


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“आह… अर्जुन… हाँ बेटा… चाट… उफ्फ… जीभ अंदर डाल…”


मैंने एक उँगली उनकी चूत में डाली। बहुत टाइट थी। धीरे-धीरे दूसरी उँगली भी डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा जबकि जीभ से उनकी क्लिट चूस रहा था।


मम्मी का शरीर काँप रहा था।


“अर्जुन… कुछ हो रहा है… आआह… रुक… आह… आह…”


उनका शरीर अचानक तन गया और उन्होंने जोर से कराहते हुए झड़ना शुरू कर दिया। चूत से पानी निकल रहा था। मैंने सब कुछ पी लिया।


मम्मी थर-थर काँप रही थीं। आँखें बंद थीं और मुँह खुला हुआ था।


मैंने ऊपर आकर उनके ऊपर लेट गया। मेरा लंड अब उनके चूत के पास टिका हुआ था।


“मम्मी… अब और नहीं रुक सकता।”


मैंने अपना लंड निकाला। 8 इंच का मोटा लंड मम्मी की चूत पर रख दिया।


मम्मी ने आँखें खोलीं। डर और चाहत दोनों उनके चेहरे पर थे।


“अर्जुन… नहीं बेटा… ये मत कर… पाप लग जाएगा…”


लेकिन उन्होंने अपने पैरों से मुझे दूर नहीं किया।


मैंने लंड की नोक से उनकी चूत के फटे को रगड़ना शुरू किया। मम्मी की चूत अभी भी झड़ने के बाद गीली थी।


“मम्मी… बस एक बार… अंदर डाल दूँ?”


मम्मी ने सिर हिलाया, “नहीं… अभी नहीं… प्लीज…”


मैंने लंड को उनकी चूत पर जोर से रगड़ना शुरू किया। मम्मी की क्लिट पर लंड का सिरा घिस रहा था। मम्मी फिर से कराहने लगीं।


“आह… अर्जुन… मत… उफ्फ…”


मैंने एक बार फिर उनकी चूत चाटी, फिर ऊपर आकर उनके स्तन चूसते हुए लंड को उनकी चूत पर जोर-जोर से रगड़ने लगा।


मम्मी अब दोनों हाथों से मेरी पीठ पकड़े हुए थीं।


“बेटा… मैं फिर से… आआह…”


मम्मी दूसरी बार झड़ गईं। इस बार और जोर से।


मैं भी अब कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। मैंने लंड को उनकी चूत पर रखा और थोड़ा दबाव दिया। सुपारा अंदर घुसने लगा।


मम्मी ने जोर से मेरी कमर पकड़ ली, “नहीं… अर्जुन… अभी नहीं… प्लीज बेटा…”


मैंने रुक गया। लंड आधा अंदर था। मम्मी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।


मम्मी की आँखों में आँसू थे।


“बेटा… आज के लिए बस… मुझे जाने दो। मैं… मैं तैयार नहीं हूँ…”


मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। मम्मी ने राहत की साँस ली, लेकिन उनके शरीर से अभी भी गर्मी निकल रही थी।


मैंने उन्हें गले लगा लिया। दोनों नंगे ऊपर से लिपटे हुए थे।


मम्मी ने मेरे बाल सहलाते हुए धीरे से कहा, “बेटा… जो हो रहा है वो गलत है… लेकिन… मैं भी रोक नहीं पा रही हूँ।”


मैंने उनके कान में कहा, “मम्मी… कल फिर आऊँगा। और अगली बार… मैं आपको पूरा चोदूँगा।”


मम्मी ने कुछ जवाब नहीं दिया। बस मेरी छाती पर सिर रखकर लेटी रहीं।


आगे की कहानी अगले भाग : "खेत में माँ की चूत चोदकर घर में रिस्की सेक्स! भाग 02" में पढे!

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