खेत के कमरे में फाड़ी मम्मी की टाइट चुत!

Mom Son : बेटे ने खेत के कमरे में मम्मी की पैंटी उतारी! पहली ही बार में जड़ दिया टाइट चूत में मोटा लंड! कुतिया बनाकर मारे थप्पड़! फिर बेटे ने बीज से भर दी चुत!


अभी तक आपने "सरसों के खेत में मम्मी ने चूस लिया बेटे का लंड!" में पढ़ा :-


मम्मी घुटनों के बल मेरे सामने बैठी थीं। उनका मुँह मेरे लंड पर काम कर रहा था। गीले बाल चेहरे पर चिपक गए थे। ब्लाउज पूरी तरह खुला हुआ, भारी बूब्स बाहर निकले हुए।


सफेद पैंटी अभी भी पहनी हुई थी, लेकिन एक तरफ खिसक चुकी थी।


वो धीरे-धीरे लंड को और गहराई तक लेने की कोशिश कर रही थीं। जब नोक उनके गले के पास पहुँचती तो उनकी आँखों में पानी आ जाता, लेकिन वो रुकती नहीं थीं।


लार उनकी ठोड़ी से बहकर मेरे अंडकोष तक पहुँच रही थी। एक हाथ से वो लंड के निचले हिस्से को हिला रही थीं, दूसरे से अपना एक बूब्स मसल रही थीं।


“उम्म… ग्लक… उम्म…”


मैंने उनके बाल और कसकर पकड़ लिए। “माँ… ऐसे ही… और गहरा… आह्ह्ह… तेरा मुँह कितना गरम है…”


मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। शर्म अब उनकी पुतलियों में बहुत कम बची थी। उन्होंने लंड बाहर निकाला। लंबी लार की लकीर टूटी। साँसें फूल रही थीं।


“बेटा… बहुत बड़ा है… मुँह में पूरा नहीं आ रहा…” उनकी आवाज काँप रही थी।


अब आगे :-


“अब… और क्या करना है…”


मैंने उन्हें उठाया और चारपाई पर लिटा दिया। उनकी टांगें फैलाईं। पैंटी अभी भी बीच में थी। मैंने पैंटी के दोनों तरफ से पकड़ा और एक झटके में नीचे खींच दिया।


मम्मी की चूत पहली बार पूरी तरह नंगी मेरे सामने थी - घने काले बालों वाली, गुलाबी होंठ थोड़े सूजे हुए और चमकते हुए।


मैंने झपटकर मुँह लगा दिया। जीभ अंदर तक घुसा दी। मम्मी की कमर जोर से उछली।


“आह्हhhhh… गुरप्रीत… जीभ… अंदर… आह्ह्ह… मत कर ऐसा… अह्ह्ह…”


मैंने क्लिट को चूसा, होंठों को फैलाया और जीभ से उनकी चूत को खोदना शुरू कर दिया। मम्मी के दोनों हाथ मेरे सिर पर थे। वो मुझे और अपनी चूत में धकेल रही थीं। उनकी टांगें मेरे कंधों पर काँप रही थीं।


“आह्ह्ह… वहाँ… हाँ… उसी जगह… चूस… बेटे… अपनी माँ की चूत चूस… आह्ह्ह…”


🔥 एक और कामुक स्टोरी : सरसों के खेत में मम्मी ने चूस लिया बेटे का लंड!


थोड़ी देर बाद मम्मी का शरीर अकड़ गया। उन्होंने मेरे बाल जोर से पकड़ लिए और लंबी कराह के साथ झड़ गईं। उनका पानी मेरे मुँह और ठोड़ी पर लग गया। मैंने सब चाट लिया।


मैं ऊपर उठा। मेरा लंड तना हुआ उनके छेद के सामने था। मम्मी हाँफ रही थीं। आँखों में आँसू और हवस दोनों थे। उन्होंने खुद अपनी टांगें और फैला दीं।


“डाल… बेटा… अब डाल दे… माँ तैयार है…”


मैंने लंड का सिरा उनकी चूत पर रखा। गरम और बहुत गीला। धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। मम्मी की आँखें बंद हो गईं।


“आह्ह्ह… बड़ा… है… धीरे…”


मैंने और धक्का मारा। आधा लंड उनकी टाइट चूत में घुस गया। मम्मी ने मेरे पीठ पर नाखून गाड़ दिए।


“आईईई… दर्द… गुरप्रीत… बहुत मोटा… आह्ह्ह… रुक…”


मैं रुक गया। उनके माथे पर किस किया। “सह ले माँ… पूरा अभी जाना है…”


मम्मी ने दाँत भींचकर सिर हिलाया। मैंने एक लंबा जोरदार धक्का मारा। पूरा 8 इंच का मोटा लंड एकदम जड़ तक उनकी चूत में समा गया। मम्मी की चीख निकल गई। पूरा शरीर काँप उठा।


“आह्हhhhh… मर गई… फट गई चूत… बेटे… निकाल… नहीं… मत निकाल… अंदर रख… आह्ह्ह…”


मैंने बिना हिले उनके अंदर रहा। उनकी चूत मेरे लंड को बुरी तरह कस रही थी। इतनी टाइट कि लग रहा था खून भी निकल सकता है। फिर बहुत धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे धक्के पर मम्मी की आवाज बदल रही थी।


“आह्ह्ह… दर्द… अभी भी… लेकिन… अंदर तक… लग रहा है… और… थोड़ा तेज… आह्ह्ह…”


मैंने स्पीड बढ़ा दी। अब लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा। मम्मी की कराहें दर्द से बदलकर मजे में होने लगीं। उनकी कमर भी जवाब देने लगी।


“आह्ह्ह… हाँ… ऐसे… चोदो… अपनी माँ को… आह्ह्ह… और जोर से… गुरप्रीत… चूत फाड़ दो… आह्ह्ह…”


मैंने उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक पेलने लगा। हर धक्के पर उनके भारी बूब्स जोर-जोर से हिल रहे थे। मैंने एक बूब्स मुँह में ले लिया और काटते हुए चोदता रहा।


“आह्हhhhh… काट… बोब्स काट… चूत चोद… दोनों जगह से… आह्ह्ह… बेटा… तेरा लंड… माँ की चूत को चीर रहा है… आह्ह्ह…”


मैं पागल हो रहा था। “माँ… तेरी चूत… कितनी टाइट है… पापा ने कभी ऐसे नहीं चोदा होगा तुझे…”


मम्मी शर्म से लाल हो गईं लेकिन मजे में बोलीं, “नहीं… कभी नहीं… इतना मोटा… इतना जोर से… आह्ह्ह… आज पहली बार… असली चुदाई हो रही है… फाड़ दे… हरामी… अपनी माँ की चूत फाड़ दे…”


मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। चारपाई जोर-जोर से चरमरा रही थी।


खेत में दूर तक हमारी आवाजें जा रही होंगी, लेकिन उस समय किसी की परवाह नहीं थी। मम्मी की चूत अब पूरी तरह खुल चुकी थी और मेरे लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर “छप-छप” की आवाज आ रही थी।


“आह्ह्ह… गुरप्रीत… मैं… झड़ने वाली हूँ… जोर से… और जोर से… आह्हhhhh…”


उनकी चूत ने अचानक मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया। मम्मी लंबी चीख के साथ काँपते हुए झड़ गईं। उनका पानी मेरे लंड पर और चारपाई पर फैल गया। मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी पेलता रहा।


“ले माँ… झड़… अपनी चूत से झड़… अब मेरी बारी…”


कुछ ही पल में मेरा भी नियंत्रण खत्म हो गया। मैंने आखिरी कई गहरे धक्के मारे और उनकी चूत की गहराई में ही अपना पूरा गाढ़ा माल उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि बाहर तक बहने लगा।


मैं उनके ऊपर गिर पड़ा। दोनों हाँफ रहे थे। मम्मी के नाखून अभी भी मेरे पीठ में गड़े हुए थे। उनके शरीर पर पसीना और मेरे माल की चमक थी।


लंबी खामोशी के बाद मम्मी ने धीरे से कहा, “बेटा… यह… क्या कर दिया हमने…”


👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : मानसी भाभी की ट्रेनिंग से फाड़ी उनकी चूत - 02


मैंने उनके गले में चेहरा छुपाते हुए जवाब दिया, “वही जो दोनों चाहते थे माँ… अब पीछे नहीं जा सकते…”


मम्मी ने मेरे बाल सहलाए। उनकी चूत से मेरा वीर्य धीरे-धीरे बाहर आ रहा था। कमरे के बाहर सरसों के खेत में हवा चल रही थी… और अंदर एक माँ और बेटा पहली बार एक-दूसरे के हो चुके थे।


मम्मी अभी भी मेरे नीचे लेटी हुई थीं। मेरा लंड उनकी चूत से बाहर निकल चुका था, लेकिन दोनों की जांघों के बीच सफेद गाढ़ा द्रव चिपका हुआ था।


कमरे में पसीने और सेक्स की तेज गंध फैली हुई थी।


बाहर सरसों के खेत में हवा के साथ पानी की हल्की आवाज आ रही थी।


मम्मी ने धीरे से मेरा चेहरा अपने करीब खींचा। उनकी आँखों में अभी भी वासना बाकी थी। “बेटा… एक बार और… इस बार पीछे से… जोर से…”


मैंने उन्हें पलट दिया। मम्मी कुतिया की पोजीशन में चारपाई पर झुक गईं। उनकी मोटी, गोल गांड मेरे चेहरे के सामने आ गई। चूत से मेरा माल अभी भी रिस रहा था और उनकी जांघों पर चमक रहा था।


मैंने दोनों हाथों से उनकी गांड फैलाई और लंड का सिरा उनकी गीली चूत पर रखा।


एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर तक चला गया। मम्मी की लंबी कराह निकली।


“आह्हhhhh… हरामी… एकदम जड़ तक… चूत फिर से फट गई… आह्ह्ह…”


मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू कर दिया। हर धक्के पर उनकी भारी गांड मेरे पेट से जोर से टकरा रही थी। चारपाई चरमरा रही थी। मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे। लाल निशान उभर आए।


“ले माँ… ले अपनी मोटी गांड हिला-हिला कर… मादरचोद लंड… आज तेरी चूत की पूरी इज्जत उतार दूँगा… आह्ह्ह…”


मम्मी पीछे की तरफ धकेलते हुए चिल्ला रही थीं, “हाँ… उतार… इज्जत… फाड़ दे… थप्पड़ मार… और मार… अपनी माँ की गांड लाल कर दे… आह्ह्ह… गाली दे… और गंदी गाली दे…”


“बोल… तू क्या है मेरी?”


“रंडी… तेरी रंडी माँ… सिर्फ तेरे लंड की… चूत तेरी… गांड तेरी… आह्ह्ह… चोद… और तेज… हरामी बेटे…”


मैंने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेजी से धक्के मारे। हर धक्का पूरा बाहर निकालकर फिर जड़ तक जाता। मम्मी की चीखें अब पूरी तरह खुल चुकी थीं।


खेत में अगर कोई होता तो जरूर सुन लेता, लेकिन उस समय दोनों को किसी की परवाह नहीं थी।


“आह्हhhhh… गुरप्रीत… बहुत जोर से… चूत जल रही है… लेकिन मत रुक… फाड़ दे पूरी… आह्ह्ह…”


मैंने अचानक लंड बाहर निकाला। मम्मी की चूत खुली रह गई। मैंने उन्हें साइड में लिटाया, एक टांग ऊपर उठाई और फिर से लंड अंदर ठेल दिया। इस पोजीशन में और गहरा जा रहा था।


एक हाथ से उनका भारी बूब्स मसल रहा था, दूसरे से उनकी गांड सहला रहा था।


“आह्ह्ह… इस तरह… टांग उठाकर… बहुत अंदर… पेट में लग रहा है… आह्ह्ह… बोब्स जोर से मसल… काट भी ले… हरामी…”


मैंने उनके निप्पल को मुँह में ले लिया और दाँतों से काटते हुए पेलता रहा। मम्मी के नाखून चादर में गड़ गए। उनकी कराहें अब शब्दों में नहीं रह गई थीं।


थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें फिर से कुतिया बना दिया। इस बार और रुखा। गांड पर लगातार थप्पड़ मारते हुए पागलों की तरह चोद रहा था। मम्मी की आवाज डूबने-उतराने लगी थी।


“आह्हhhhh… अब… झड़ने वाली हूँ… जोर से… और जोर से… अपनी रंडी माँ को चोद… आह्ह्ह…”


उनकी चूत ने अचानक मेरे लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि मैं हिल भी नहीं पा रहा था। मम्मी लंबी चीख के साथ काँपते हुए झड़ गईं। उनका पानी मेरे लंड पर और उनकी जांघों पर फैल गया।


मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी पेलता रहा।


💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : सुहागरात में माँ की सील पैक गांड फाड़ दी!


“ले… झड़… अपनी चूत से झड़… रंडी माँ… अब मेरी बारी…”


कुछ ही पल में मेरा नियंत्रण खत्म हो गया। मैंने आखिरी कई गहरे धक्के मारे और उनकी चूत की गहराई में दूसरी बार अपना पूरा माल उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि बाहर आकर उनकी गांड तक बह गया।


मैं उनके ऊपर गिर पड़ा। दोनों पूरी तरह चूक चुके थे। मम्मी के शरीर पर थप्पड़ों के लाल निशान, काटने के निशान और पसीना चमक रहा था। मेरा वीर्य उनकी चूत से लगातार बाहर निकल रहा था।


लंबी खामोशी के बाद मम्मी ने कमजोर आवाज में कहा, “बेटा… आज… सच में… माँ की चूत… तेरी हो गई…”


मैंने उनके गले में चेहरा छुपाया। “अब पीछे नहीं जा सकते माँ… न तू… न मैं…”


मम्मी ने मेरे बाल सहलाए। “पापा… शाम तक नहीं आएंगे… अभी… थोड़ा आराम करके… एक बार और…”


मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया। आँखों में अभी भी भूख बाकी थी। “गांड भी आज लेनी है माँ… तैयार है?”


मम्मी की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। फिर उन्होंने धीरे से सिर हिलाया। “ले… लेकिन… धीरे… पहली बार है वहाँ भी…”


मैंने उन्हें फिर से कुतिया की पोजीशन में कर दिया। उनकी मोटी गांड फैलाई। गुलाबी छेद बिल्कुल टाइट और सिकुड़ा हुआ था। मैंने थूक का बड़ा हिस्सा लगाया और एक उंगली धीरे से अंदर धकेली। मम्मी सिसक उठीं।


“आह्ह्ह… दर्द… संकरा है… धीरे बेटा…”


मैंने उंगली अंदर-बाहर की, फिर दूसरी उंगली भी डाल दी। मम्मी की गांड धीरे-धीरे फैल रही थी। वो तकिया दबाए कराह रही थीं। जब काफी गीली और थोड़ी खुली लगने लगी तो मैंने लंड का सिरा उनके छेद पर रखा।


“माँ… अब तेरी गांड की सील तोड़ने वाला हूँ… बोल दे…”


मम्मी ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में आँसू और हवस दोनों थे। “तोड़… हरामी… अपनी माँ की गांड की सील तोड़ दे… रंडी बना दे मुझे पूरी तरह…”


मैंने धीरे लेकिन लगातार दबाव डाला। नोक अंदर घुसी। मम्मी की तेज चीख निकली।


“आह्हhhhh… आईईई… दर्द… बहुत दर्द… गुरप्रीत… आह्ह्ह…”


आगे की कहानी :- "जल्द ही.."

← Previous Story

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-


📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!