गर्लफ्रेंड की माँ मेरी रंडी बनकर चुद गई!
Antarvasna Family Sex : गर्लफ्रेंड से लड़ाई हुई तो उसकी माँ ने रंडी बनकर बेटी के BF को, चूत और गांड दोनों सौंपी! फिर बेटी के साथ मिलकर करवाई Threesome चुदाई!
कैसे हो सब लंड और चूत वालों मैं हाशमी लायन फिर हाज़िर हूं अपने पाठक के द्वारा भेजे गए मेल की एक कहानी के साथ!
ये कहानी है विनय और उसकी गर्लफ्रेंड की मां के बीच चुदाई की तो चलिए बताता हूं की ज़िंदगी कैसे दो जिस्मों को मिलकर उनके बीच के रिश्तों को हवस से भर देती है।
विनय एक 25 वर्षीय गोरा सुंदर लड़का था। वो उस समय नोएडा का रहने वाला था वहीं पर रहकर बी ए की पढ़ाई कर रहा था जब महक उसकी गर्ल फ्रेंड बनी। महक दिखने में एक सुंदर लड़की थी।
महक उन लड़कियों में से थी जिन्हें देखकर हर लड़का रात को बिना मुठ मारे नहीं सो पाता उसके चूंचे एक जवान औरत की तरह थे बिल्कुल नुकीले 28 के साइज के उसकी कमर पतली थी और गांड़ 26 की थी।
विनय और महक की जोड़ी सभी लोगों को अच्छी लगती थी। दोनों के रिश्ते को आगे बढ़ते बढ़ते 1 साल हो गया था उसके बाद महक ने कहा की मेरी मम्मी से मुलाकात कर लो।
महक और विनय के बीच सब कुछ हो चुका था उनके जिस्म का कोई हिस्सा ऐसा नहीं था जो उन्होंने देखा नहीं हो। हफ्ते के 4 दिन महक विनय के रूम पर ही रहती थी और रूम के अंदर दोनों नंगे ही रहते थे।
लेकिन परेशानी तब शुरू हुई जब विनय महक की मां से मिलने जा रहा था। विनय ने जब महक की मां से मिलने का प्लान बनाया था तो किसी वजह से दोनों में पहले ही झगड़ा हो गया और महक ने बात करनी बंद कर दी।
उन दिनों विनय बहुत उदास था और उसे चुदाई का भी जुनून चढ़ रहा था महक को विनय रोज़ चोदता था। महक की चूत को भी रोज़ लंड चाहिए होता था मगर अब दोनों के बीच झगड़े के कारण चुदाई का कोई जरिया नहीं बन रहा था।
विनय के दोस्तों ने कहा जब तक महक वापस नहीं आती तब तक किराए की चूत से काम चला ले। रण्डी नहीं चोदेगा तो कही दूसरी जगह अफेयर करना पड़ेगा फिर महक बिल्कुल दूर हो जाएगी।
विनय को ये मंज़ूर नहीं था की वो किसी रण्डी को चोदे लेकिन लंड और चूत की जोश जब उबाल मारता है तो इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है।
एक दिन जब विनय बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ा हो गया तो उसके दोस्त रात को एक रण्डी को लेकर आ गए। विनय उसे देखकर पहले तो दोस्तो पर गुस्सा हुआ और उनको भगा दिया उसके बाद कुछ पैसे देते हुए रण्डी को भी जाने के लिए बोल दिया।
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वो रण्डी एक 40 साल की महिला थी उसकी सेहत देखकर लगता नहीं था की वो ये किराए पर चूत देने का काम पेसो की मजबूरी में कर रही है।
विनय ने जब उसे पैसे दिए तो उसने मना कर दिया और बोली “मैं पैसे की भूखी नहीं हूं मेरी ज़िंदगी बहुत सुनसान है तो बस अपनी ज़िंदगी को रंगीन बनाने के लिए ये सब कर लेती हूं।”
विनय ने पूछा “अगर मज़ा लेने के लिए ही करती हो तो बॉयफ्रेंड बना लेती ये सब काम से क्या मिल जाता है ?”
वो बोली “मैं एक अमीर घर की औरत हूं मुझसे रिश्ता सिर्फ मेरे पैसे के लिए बनाते है अब इसलिए इस तरह रात के अंधेरे में अपनी गहरी काली ज़िंदगी में थोड़े रंग भर लेती हूं।”
विनय ने अपने आपको थोड़ा शांत करा और उसे बैठा कर पानी दिया। उसके बाद विनय ने उससे उसका नाम पूछा तो उसने बताया की वो कविता है।
विनय और कविता के बीच थोड़ी बात चीत हुई कविता ने बताया के उसकी एक सौतेली बेटी है। दोनों मां बेटी में बहुत खास लगाओ नहीं है मगर फिर भी एक ठीक ठाक रिश्ता है। विनय अब गोर से कविता के जिस्म को देख रहा था।
कविता का जिस्म बेहद कामुक था 40 के मोटे चूंचे 36 का पेट और 36 की गांड़ उसने एक चुस्त जींस और कुर्ती पहनी थी जिसमें से उसके गोरे गोरे चूंचे साफ नज़र आ रहे थे।
उसकी लाल ब्रा कुर्ती के ऊपर से भी दिख पा रही थी। उसकी पैंटी के धागे जींस के बाहर भाग रहें थे।
विनय एक टक कविता के चुदासी भरे जिस्म को निहार रहा था वो उसे देखते देखते वही करीब में बैठ गया कविता उसकी नज़रों को पकड़ कर मुस्कुराई। वो खिसकती हुई थोड़ा विनय के पास आ गई।
उसने अपने मखमल से नर्म हाथ विनय के चेहरे से सहला दिए फिर एक मधुर सी आवाज़ में बोली “कितने समय से अकेले हो तुम ?”
विनय ने जवाब दिया “मेरी गर्लफ्रेंड एक हफ्ते से नाराज़ है।” बातों बातों में कविता का हाथ विनय के जिस्म को छूता हुआ लंड की तरफ जा रहा था।
जैसे ही उसने पेट से नीचे हाथ लेजाने की कोशिश करी तो विनय ने उसे रोक दिया और बोला “नहीं! मैं नहीं कर सकता मुझे अपनी गर्लफेंड्र से प्यार है।”
कविता बोली “जो होता है अच्छे के लिए होता है। परेशान मत हो मैं कुछ नहीं कर रही मुझे तो बस तुम्हारी गर्लफ्रेंड के बारे में जानना है थोड़ा ज़्यादा तुम बोलते रहो।”
कविता ने विनय को बिस्तर पर धीरे से गिराया और उसके बराबर में लेटकर बालों को सहलाने लगी।
विनय बोलता जा रहा था लेकिन कविता बस उससे चिपक कर अपने जिस्म को उसके जिस्म पर सहला रही थी और दबा रही थी। कविता का भरी जिस्म किसी भी मर्द को बहकाने के लिए काफी था।
कविता ने धीरे से विनय के गले को चूम लिया लेकिन विनय ने बातों में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी उसके दिल में चुदाई के ख्याल थे।
लेकिन कुछ था जो उसे रोक रहा था इसलिए विनय जान कर कविता के चूमने पर भी कुछ नहीं बोला लेकिन उसने कविता को रोका भी नहीं।
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आखिरकार विनय बोलते बोलते खामोश हो गया कविता का चेहरा विनय के गाल के एक दम करीब छू रहा था कविता ने अपनी उंगलियां उसके कंधे से घुमाते हुए हथेली पर लगाई विनय ने बेचारगी की नज़र से कविता की तरफ देखा।
कविता नज़ाकत से आगे बढ़ी और अपने मोटे रसीले होठों को विनय के होठों से मिला़दी। विनय थोड़ा हिला लेकिन कविता ने उसके हाथ को पकड़ लिया और शिद्दत के साथ होठ चूमने लगी।
कुछ पल बाद विनय का सबर भी जवाब दे गया उसने भी कविता की कमर में हाथ डाला और उसके ऊपर चढ़कर होठों का रस चूसने लगा।
विनय ने गले को चूमना शुरू करा कविता का गला काफी बड़ा था विनय उसके सामने काफी छोटा था उमर में भी और हवस में भी।
कविता ने विनय को पलटा और उसके घुटनों पर बैठ गई विनय कविता को घूर रहा था कविता ने अपनी कुर्ती उतार कर एक तरफ डाल दी और विनय के हाथ को लेकर अपने चूंचे पर रख दिया।
उसके चूंचे तरबूज़ की तरह मोटे और नर्म थे विनय ने चूंचे भींचे तो कविता की सीसीएस! निकल गई। कविता अपनी चूत को उसके लंड पर घिस रही थी। फिर उसने अपनी ब्रा भी निकाल दी और विनय के ऊपर लेटकर चूंचे से उसके चेहरे को सहलाने लगी।
विनय ने मोटे काले निप्पल को पीना शुरू करा अब विनय का एक हाथ कविता की चूत को जींस के ऊपर से सहला रहा था। दोनों ने एक दूसरे के की पेंट खोली और पहले कविता के विनय को नंगा करा उसके बाद खुद नंगी हो विनय को अदाएं दिखाने लगी।
कमरे में दोनों जिस्म नंगे थे और कविता उसे नाच दिखाकर उकसा रही थी। वो बार बार करीब आती और लंड दबाकर पीछे हट जाती कभी बाल पकड़ के होठों को चूत पर लगा देती उसने चूत को बिल्कुल चिकना साफ कर रखा था।
फिर धीरे धीरे डांस करते हुए वो बिस्तर पर आकर बैठी और विनय के निप्पल को चूमी उसके बाद पेट को चूमा फिर लंड के ऊपर चूमी और धीरे धीरे ज़बान से उसके जिस्म को सहलाते हुए लंड पर चूमने लगी।
कविता ने लंड पर चूमा और उसे अपने मुंह में ले लिया। विनय अब अपना आपा खो चुका था उसने भी कविता के एक चूंचे और बाल पकड़ कर लंड को मुंह में धकेलने लगा, कविता के गले से गॉग गृह गॉग आह! की आवाज़ निकल कर कमरे को गरमा रही थी।
10 मिनिट लंड चूसने के बाद कविता उठी उसने अपने थूक से लंड को पूरी तरह चिकना कर दिया था। उसने बाद उसने अपनी चूत को विनय के मुंह पर रगड़ना शुरू करा , विनय अपनी जीभ को कविता की चिकनी चूत के अंदर लेजाकर चाट रहा था।
वो उसके छेद के अंदर जीभ घुमा रहा था तो कविता -
अआह! ओहह्ह्ह्ह! उफ्फ करते रहो और अंदर आगाह! ओह अआआह! हम्ममम बहुत अच्छा अआआह! ऐसे ही अआआह! उफ्फ अआआह की आवाज़ निकल रही थी आवाज़ करते करते कविता ने उसके मुंह में सुसु कर दी।
सुसु से विनय चौक गया लेकिन कविता हस रही थी वो तुरंत झुकी और उन्होंने विनय के चेहरे को चाट चाट कर साफ करा। उसने विनय के मुंह में थूका और फिर जीभ से उसके होठों को पीकर साफ करा।
दोनों का जोश अब चरम पर आ चुका था विनय ने उस पलट कर ऊपर आना चाहा लेकिन कविता ने रोक दिया और बोली “मैं करूंगी।”
तो विनय सुकून से लेटा रहा । कविता उसके लंड पर चूत दबाने लगी फिर लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर लगाई और आअआअह! की आवाज़ निकलते हुए लंड को अंदर ले गई।
विनय ने नीचे से एक धक्का मारा जिससे पूरा 7 इंच का लंड कविता की चूत में समा गया। कविता विनय के ऊपर चूचे उसके चेहरे पर दबाकर लेटी और चूत को लंड पर धकेलने लगी।
कविता एक पेशेवर रण्डी की तरह चुद रही थी । विनय भी पूरी ताकत से उसकी चूत पर धक्के लगा रहा था वो उठकर घोड़े की तरह लोड़े की सवारी करने लगी। कविता ने अपने होठों उसके होठों पर लगाए और चुदाई की रफ्तार बढ़ाई ।
जितनी तेज़ चुदाई होती उतनी ज़ोर से दोनों के हित रगड़ते कविता आअआअह! ओहह्ह्ह्ह हां और तेज़ अआआह! मज़ा आ गया आअआअह ओहह्ह्ह्ह आह! ओहह्ह्ह्ह आगाह! चोद मुझे अआआह! कहते हुए जोश दिला रही थी।
ताबड़तोड़ चुदाई के बाद कविता की कंपकपी बनने लगी तो वो समझगए के अब झड़ने का समय आने वाला है कविता बोली “रफ्तार तेज़ करो। मेरा होने वाला है।” विनय ने उसके चूंचे दबाकर लंड की रफ्तार बढ़ाई।
तकरीबन आधे घंटे बाद दोनों एक साथ झड़ गए। विनय ने पहली बार अपने से दुगनी औरत को चोदा था जिसे वो झेल कर थक गया।
कविता उसकी बाहों में गिर गई वो उसको बहुत ज़ोर से गले लगाए हुए थी उसकी चूत अभी भी पानी निकाल रही थी।
विनय ने कविता के होठों को थोड़ी देर चूसा कविता भी उनको चूमती रही उसके बाद वो उठकर कपड़े पहनने लगी । विनय बोला “फिर कब मिलेंगे।” कविता ने कहा “मैं तो रण्डी हूं जब बुक करोगे आ जाऊंगी।”
विनय ने कविता को पीछे से गले लगाया उसके चूंचे अभी भी नंगे थे लेकिन जिंस पहन चुकी थी। विनय बोला रण्डी के बजाय अकेलेपन के हमसफर की तरह नहीं मिल सकते क्या ?”
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कविता बस ये बोलकर चली गई के दो दिन बाद उसके घर में बर्थ डे की पार्टी है जो उसकी बेटी के लिए है। अकेलेपन का साथी बनना चाहते हो तो रण्डी के घर दावत में आओ।
विनय ने उसके आमंत्रण को स्वीकार कर लिया और कविता विनय के होठों को चूमकर चली गई और अपना पता छोड़ गई।
दो दिन बाद विनय कविता के घर गया जैसे ही उसने घंटी बजाई तो सामने से महक निकल आई। विनय उसे देखकर हैरान था विनय को देखकर महक ने पूछा “तुमको कैसे पता मेरा घर ये है ?”
पीछे से कविता आई और बोली “महक ये मेरा गेस्ट है।” महक गुस्से में बोली “आपको को किसने बोला मेरी लाइफ में दखल दो खेर ये आपका गेस्ट है न तो आप ही ध्यान रखो इसका।”
महक इतना बोलकर घर में चली गई विनय हैरान परेशान खड़ा था और कविता विनय को लेकर अपने रूम में पहुंच गई। “मुझे नहीं पता थी के तुम उसके ब्वॉयफ्रेंड हो ये सब बस संयोग से हुआ ज़्यादा मत सोचना।”
विनय अपने उतरे चेहरे के साथ बिस्तर पर बैठा रहा कविता उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे समझाने की कोशिश कर रही थी। कविता ने अचानक ऐसी बात कही के विनय का चेहरा खिल गया ।
“घबराओ मत महक तुम्हारी ही है कुछ दिन में वो तुमसे बात करलेगी, मैं तुम्हारी मदद करूंगी बस तुम मेरे अकेलेपन के हमसफर बने रहना ताकी मुझे रण्डी न बनना पड़े।”
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विनय ने हैरानी और मुस्कुराकर कविता को देखा दोनों एक दूसरे की आंखों में झाक रहे थे और एकदम दोनों ने एक दूसरे को पकड़ा और चूमना शुरू कर दिया। पागलों की तरह विनय कविता के होठों को चूस रहा था।
विनय उठा और उसने कविता को बिस्तर पर उल्टा पटक दिया कविता उस समय एक काली साड़ी पहने उल्टी लेटी हुई बल खाती नागिन लग रही थी विनय ने एक थप्पड़ उसकी गांड़ पर मारा और पीछे से उसके ऊपर लेट गया।
विनय कविता के गले को चूमकर बोला “आई लव यू।” और फिर पीठ को चूमते हुए ब्लाउज खोलने लगा कविता उसे रोक रही थी लेकिन हंस भी रही थी उसकी कोशिशें बस दिखावे की थी।
कुछ ही पल में कविता ने उसे रोकना बंद कर दिया लेकिन बोली “जल्दी करना नहीं तो ये रिश्ता लाइव हो जाएगा।” विनय ने हंसकर एक थप्पड़ फिर से गांड़ पर मारा जिससे कविता समझ गई इसका इरादा क्या है।
उसने टेबल पर हाथ बढ़ा कर नारियल तेल की बोतल विनय को दी और विनय ने कविता की कमर पर हाथ लेजाकर उसे घोड़ी बनाया और साड़ी के अंदर हाथ डालकर पैंटी उतारली। उसके बाद उसने पैंटी की खुशबू ली फिर हाथ से चूत को चुके थोड़ा छेड़ा।
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कविता की आसाअज! निकल गई वो बोली “जो करना है जल्दी करो शरारत का समय नहीं है।” विनय ने साड़ी ऊपर की और खूब सारा तेल कविता की गांड़ पर मसल दिया रोशनी में उसकी गांड़ चमक रही थी।
फिर एक बार गांड़ को चूमकर अपनी पेंट उतार दी और बिस्तर पर खड़ा हो गया विनय के लिए कविता की गांड़ बहुत बड़ी थी। उसके हाथों को उसके छेद को खोला फिर थोड़ा झुककर लंड को गांड़ पर दबाया।
दोनों ने एक लंबी सांस खींची और विनय ने लंड पर ज़ोरदार धक्का मारा। कविता की अआआआअह! निकलने वाली थी लेकिन उसने हाथ लगाकर अपनी चीख रोक ली पीछे से विनय घापा गप लंड कविता की गांड़ में चढ़ा रहा था।
कविता का हाथ मुंह पर था फिर हम्ममम! उन्हों ! ओहह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी। विनय ने कविता को उठाकर उसके चूंचे ब्लाउज के ऊपर से दबोच लिए और अपनी पूरी ताकत से अपनी गर्ल फ्रेंड की मां की गांड़ मारने लगा।
10 मिनिट यूंही ही गांड़ मारने के बाद विनय कांपा और उसने अपना माल उसकी गांड़ के अंदर ही छोड़ दिया। कविता बुरी तरह से हफ्ते हुए बिस्तर पर गिर गई और विनय उसपर ऊपर गिर कर पीठ चूमने लगा।
अचानक बाहर से दरवाज़े के खटकने की आवाज़ आई तो दोनों ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े ठीक करे कविता ने नाश्ते को बिस्तर पर रखा और दरवाज़ा खोलने गई। दरवाज़े पर महक खड़ी थी जो दोनों को बुलाने आई थी।
कविता ने कहा “बेटा मुझे नहीं पता था के आप दोनों जानते हो एक दूसरे को मैं तो बस मार्केट में थी जब इन्होंने मेरी मदद करी और जब विनय ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया तो मैने इसे इनवाइट कर दिया।”
महक ने कुछ नहीं कहा और कविता बाहर चली गई जब विनय भी जाने लगा तो महक ने दरवाज़ा बंद कर दिया और उसे रोक कर गले लगाते हुए बोली “मुझे माफ कर दो।”
विनय की खुशी का ठिकाना नहीं था उसे अब एक ही घर की दो चूत चोदने की राह मिल चुकी थी उसके दिमाग में बस तब एक ही ख्याल आया जो होता है अच्छे के लिए होता है।
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