ट्रेन में बहन-बीवी की सामूहिक चुदाई! 02

Group Sex Story : ट्रेन में 3 मुस्लिमों ने बीवी-साली की चूत-गांड फाड़ डाली! चुदती रही दोनों बहनें साथ में! सील तोड़ डर्टी चुदाई, पढ़िए यह Antarvasna Story!


अभी तक "ट्रेन में बहन-बीवी की सामूहिक चुदाई!" में आपने पढ़ा :-


"नहीं... गांड में मत... आह्ह... दर्द होगा..." प्रिया ने डरते हुए कहा, लेकिन सलमान ने थूक लगाकर धीरे से अंदर डालना शुरू कर दिया।


"आआआह्ह्ह्ह... फट गई गांड... उफ्फ्फ... धीरे... हां... आह्ह..." प्रिया दोनों तरफ से भर चुकी थी। उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन वो कमर हिला रही थी।


स्नेहा अभी मिशनरी में फिरोज से चुद रही थी। उसके चुचे उछल रहे थे। "फिरोज... तेज... हां... मेरी चूत में पूरा डाल दो... आह्ह्ह... मैं तुम्हारी रंडी हूँ..."


अब आगे :-


मैं ऊपर से सब देख रहा था। मेरा लंड पैंट में तन गया था, लेकिन मैं चुप था।


करीब १०-१५ मिनट बाद रशीद ने प्रिया की चूत में अपना गर्म पानी छोड़ा।


"ले रंडी... भर जा... आह्ह्ह..."


सलमान ने गांड में छोड़ा। प्रिया थरथरा गई।


स्नेहा भी उसी समय झड़ गई। "आआआह्ह्ह... निकल गया... हां..."


लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी। तीनों आदमी अभी तरोताजा थे।


ट्रेन की रफ्तार बढ़ती जा रही थी, लेकिन हमारे डिब्बे में समय रुक सा गया था। चुदाई की थपथपाहट, कराहने की आवाजें और बदबूदार पसीने की महक पूरे कोच को भर रही थी।


मैं ऊपर अपर बर्थ पर लेटा सब कुछ चुपचाप देख रहा था। प्रिया और स्नेहा अब पूरी तरह हवस की गुलाम बन चुकी थीं।


रशीद ने प्रिया को सीट पर घोड़ी बनाकर रखा हुआ था। उसकी मोटी गाँड ऊपर उठी हुई थी।


सलमान अभी भी प्रिया की गांड में अपना मोटा लंड धीरे-धीरे हिला रहा था। प्रिया की गांड पहले ही फट चुकी थी, खून और मलमल की थोड़ी सी धार निकल रही थी, लेकिन वो अब दर्द के साथ मजे का आनंद ले रही थी।


"आह्ह्ह्ह... सलमान... धीरे... मेरी गांड फट गई है... उफ्फ्फ... लेकिन मत निकालो... हां... और अंदर... म्म्म्माह्ह..." प्रिया की आवाज कांप रही थी। उसकी आँखें आधी बंद थीं, मुंह खुला हुआ था।


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नीचे रशीद लेटा हुआ था। प्रिया उसकी चूत पर बैठी हुई थी और ऊपर-नीचे हो रही थी। रशीद के दोनों हाथ प्रिया के भारी ३६D चुचों को जोर-जोर से दबा रहे थे। निप्पल्स को खींच-खींच कर मोड़ रहा था।


"ले रंडी... तेरे चूचे तो कमाल के हैं... चोद... अपनी चूत से मेरे लंड को निचोड़..." रशीद ने प्रिया की कमर पकड़कर जोर से नीचे दबाया।


प्रिया पूरी तरह दो लंडों से भरी हुई थी। "आआआह्ह्ह... दोनों तरफ से फाड़ रहे हो... हां... जोर से... मेरी चूत और गांड का भोसड़ा बना दो... उफ्फ्फ... सलमान तेज... आह्ह्ह..."


उधर स्नेहा की हालत और भी पागल कर देने वाली थी। फिरोज ने उसे कुत्ते की तरह घोड़ी बनाया था। स्नेहा की छोटी स्कर्ट अब पूरी तरह गायब थी।


उसकी जवान, टाइट चूत अभी भी पहली चुदाई के खून और पानी से सनी हुई थी। फिरोज पीछे से तेज-तेज धक्के दे रहा था।


"थप... थप... थप... थप..." आवाज पूरे डिब्बे में गूंज रही थी।


"फिरोज... आह्ह्ह... बहुत तेज... मेरी चूत जल रही है... हां... और जोर से मारो... मैं तुम्हारी छोटी रंडी हूँ... आह्ह्ह... चोदो मुझे..." स्नेहा रोती-कराती चिल्ला रही थी। उसके चुचे नीचे लटककर झूल रहे थे।


 फिरोज ने आगे झुककर एक हाथ से उन्हें मसलना शुरू कर दिया।


कुछ मिनट बाद तीनों आदमियों ने पोजीशन बदली। सलमान ने प्रिया को उठाकर खड़ा किया। उसने प्रिया की एक टांग अपनी कमर पर चढ़ाई और खड़े-खड़े ही उसकी चूत में लंड ठोक दिया। प्रिया की पीठ दीवार से सटी हुई थी।


"आह्ह्ह... ऊंचा... बहुत ऊंचा है... मेरी चूत फाड़ दो... हां... चोदो अपनी हिंदु रंडी को..." प्रिया ने सलमान की गर्दन में हाथ डालकर चूम लिया।


रशीद पीछे आ गया और प्रिया की गांड में फिर से घुस गया। अब प्रिया दो लंडों के बीच सैंडविच हो गई थी। दोनों तरफ से एक साथ धक्के लग रहे थे।


प्रिया का पूरा जिस्म हिल रहा था। उसके मुंह से लगातार गंदी-गंदी चीखें निकल रही थीं।


"म्म्म्माह्ह्ह... आआआह्ह... फट गई... दोनों तरफ से... हां... मारो... मेरे अंदर अपना माल भर दो... उफ्फ्फ... मैं मर जाऊंगी आज..."


स्नेहा को भी आराम नहीं मिला। फिरोज ने उसे अपनी गोद में उठा लिया। स्नेहा की दोनों जांघें उसकी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं। फिरोज खड़े-खड़े ही उसे ऊपर-नीचे करके चोद रहा था। स्नेहा की छोटी चूत पूरी तरह फैल चुकी थी।


"फिरोज भाई... आह्ह्ह... इतना गहरा... मेरी कोख तक पहुंच रहा है... हां... फाड़ दो... मैं पहली बार इतना मजे से चुद रही हूँ... आह्ह्ह... तेज... तेज..." स्नेहा की आँखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन उसकी कमर खुद-ब-खुद हिल रही थी।


करीब १० मिनट बाद पहला राउंड खत्म हुआ। तीनों आदमियों ने अपनी-अपनी जगह पर पानी छोड़ दिया।


रशीद ने प्रिया की चूत में भरा। सलमान ने गांड में गर्म माल उड़ेला। फिरोज ने स्नेहा की चूत को भर दिया।


प्रिया और स्नेहा दोनों थरथरा कर रह गईं। प्रिया की जांघों से सफेद-लाल मिश्रित तरल टपक रहा था। स्नेहा की चूत से खून की धार अभी भी निकल रही थी। दोनों का सांस फूल रहा था।


लेकिन तीनों मुस्लिम मर्द अभी थके नहीं थे। उन्होंने थोड़ी देर आराम किया। चादर की आड़ में सिगरेट सुलगाई और प्रिया-स्नेहा को पानी पिलाया।


"अब असली मजा शुरू होता है रंडियों..." सलमान ने हंसते हुए कहा।


उन्होंने प्रिया और स्नेहा को बगल-बगल में लिटा दिया। दोनों बहनों की टांगें एक-दूसरे की तरफ फैली हुई थीं। रशीद ने प्रिया की चूत में फिर से लंड डाला। फिरोज ने स्नेहा की चूत ली।


सलमान बीच में खड़ा होकर दोनों के मुंह में बारी-बारी लंड चुसवा रहा था।


प्रिया ने स्नेहा की तरफ देखा और धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। "बहन... मजा आ रहा है ना... आह्ह..."


स्नेहा शर्म से लाल हो गई लेकिन हां में सिर हिलाया। "बहुत... आह्ह्ह... लेकिन बहुत दर्द भी हो रहा है..."


अब चुदाई फिर से शुरू हो गई। दोनों बहनें बगल-बगल में चुद रही थीं। उनके कराहने की आवाजें एक-दूसरे को और उत्तेजित कर रही थीं।


"हां... चोदो... आह्ह्ह... मेरी चूत फाड़ दो..." प्रिया "उफ्फ... और जोर से... आह्ह्ह... मैं तुम्हारी हूँ..." स्नेहा


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सलमान ने प्रिया के मुंह में गहरा लंड घुसाया। प्रिया ग्लक-ग्लक करती हुई चूस रही थी।


धीरे-धीरे रात ढल रही थी। ट्रेन टनल से टनल पार कर रही थी।


ट्रेन अब किसी दूसरे स्टेशन पर रुकी थी। बाहर अंधेरा था, सिर्फ प्लेटफॉर्म की हल्की रोशनी अंदर आ रही थी। तीनों मुस्लिम आदमी अभी भी नंगे थे। उनके मोटे, काले लंड आधे-आधे खड़े हो रहे थे।


प्रिया और स्नेहा बगल-बगल में लेटी हुई थीं। दोनों की जांघें चिपचिपी हो चुकी थीं – चूत से निकला पानी, खून और मर्दों का वीर्य मिश्रित।


रशीद ने प्रिया के बाल पकड़े और उसे उठाकर बैठा दिया। "अब तू हमारी रंडी बन चुकी है प्रिया। अपनी बहन को भी तैयार कर।"


प्रिया ने स्नेहा की तरफ देखा। स्नेहा अभी भी सांस फूल रही थी, आँखें बंद किए हुए। प्रिया ने धीरे से उसकी तरफ झुककर उसके होंठ चूम लिए। "स्नेहा... डर मत... मजा आएगा... देख बहन, कितना अच्छा लग रहा है..." प्रिया की आवाज में अब शर्म कम और हवस ज्यादा थी।


सलमान ने दोनों बहनों को एक साथ घोड़ी बनाया। प्रिया और स्नेहा बगल-बगल में चारों हाथ-पैरों पर। उनकी मोटी गाँडें ऊपर उठी हुईं। रशीद प्रिया के पीछे आ गया, फिरोज स्नेहा के पीछे। सलमान दोनों के सामने खड़ा होकर अपने लंड हिला रहा था।


रशीद ने प्रिया की गाँड पर थूक लगाया और अपना मोटा लंड फिर से गांड में धीरे-धीरे दबाया।


"आआआह्ह्ह्ह... रशीद... मेरी गांड अभी भी फटी हुई है... उफ्फ्फ... धीरे से... हां... पूरा डाल दो... आह्ह्ह..." प्रिया की कमर कांप गई।


उसी समय फिरोज ने स्नेहा की चूत में झटका मारा। स्नेहा जोर से चीखी – "आह्ह्ह... फिरोज... मेरी चूत जल रही है... बहुत गर्म है तेरा लंड... हां... चोदो... मारो जोर से... उफ्फ्फ्फ..."


दोनों बहनों की चीखें एक-दूसरे को और उत्तेजित कर रही थीं। थप-थप-थप की आवाज तेज हो गई। रशीद प्रिया की गांड में पूरा लंड अंदर-बाहर कर रहा था। प्रिया की भारी गांड हर झटके पर हिल रही थी।


"ले प्रिया रानी... तेरी गांड तो स्वर्ग है... निचोड़ मेरे लंड को... आह्ह..." रशीद ने प्रिया की कमर पकड़कर और तेज धक्के मारे।


सलमान ने अब प्रिया का मुंह लिया। प्रिया ग्लक-ग्लक करती हुई पूरा लंड मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी। उसकी लार लंड पर बह रही थी। "सल्... स्लर्प... म्म्म... कितना स्वादिष्ट है... गंदा लेकिन अच्छा... चूसती हूँ पूरा... आह्ह..."


स्नेहा की तरफ देखा तो वो पूरी तरह पागल हो चुकी थी। फिरोज उसे तेजी से चोद रहा था और सलमान ने बीच-बीच में अपना लंड स्नेहा के मुंह में भी दे दिया। स्नेहा दोनों तरफ से भर चुकी थी।


"ग्लक... आह्ह्ह... मैं रंडी बन गई हूँ... हां... चोदो मुझे... मेरी छोटी चूत फाड़ दो... उफ्फ... बहन देखो... कितना मजा आ रहा है..." स्नेहा ने प्रिया की तरफ देखकर कहा।


करीब १५ मिनट बाद तीनों ने फिर बदलाव किया। उन्होंने प्रिया को बीच में लिटा दिया। रशीद नीचे लेट गया, प्रिया उसकी चूत पर बैठ गई। सलमान पीछे से गांड में घुस गया। फिरोज खड़ा होकर प्रिया के मुंह में लंड देने लगा।


प्रिया अब पूरी तरह तीन लंडों से भरी हुई थी। उसका पूरा जिस्म हिल रहा था।


"आआआह्ह्ह्ह... मर गई... तीनों तरफ से... मेरी चूत... गांड... मुंह... सब फट गए... हां... जोर से चोदो... मुझे अपनी हिंदू रंडी बना लो... आह्ह्ह... तेज... तेज... म्म्म्माह्ह..." प्रिया की चीखें अब चीख से ज्यादा कराह बन गई थीं। उसके चूचे उछल-उछल रहे थे। रशीद नीचे से उन्हें चूस रहा था।


स्नेहा को भी आराम नहीं। फिरोज ने उसे प्रिया के बगल में लिटाया और मिशनरी पोजीशन में चोदना शुरू कर दिया। स्नेहा की जांघें आकाश की तरफ थीं।


"फिरोज... आह्ह्ह... गहरा... बहुत गहरा जा रहा है... मेरी कोख चीर दो... हां... मैं तुम्हारी हूँ... चोदते रहो... उफ्फ्फ... निकलने वाला है फिर... आह्ह्ह..."


दोनों बहनों के कराहने की आवाजें अब एक-दूसरे में घुल गई थीं। ट्रेन की आवाज के साथ-साथ थपथपाहट और चीखें गूंज रही थीं।


समय गुजरता रहा। करीब आधा घंटा बाद तीनों आदमियों ने एक साथ झड़ने का फैसला किया।


रशीद ने प्रिया की चूत में गर्म-गर्म वीर्य उड़ेल दिया। सलमान ने गांड में भर दिया। फिरोज ने स्नेहा की चूत में छोड़ा।


प्रिया और स्नेहा दोनों एक साथ झड़ गईं। "आआआह्ह्ह्ह... भर गया... गर्म है... हां... ले रही हूँ पूरा... म्म्म्म..."


दोनों थककर लेट गईं। उनकी चूत और गांड से सफेद तरल टपक रहा था। सीटें पूरी गंदी हो चुकी थीं।


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लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। तीनों आदमियों ने फिर से तैयार होना शुरू कर दिया। उन्होंने प्रिया और स्नेहा को चादर में लपेटकर थोड़ी देर आराम करने दिया। फिर करीब ४० मिनट बाद फिर से शुरू किया।


इस बार उन्होंने दोनों को एक साथ खड़ा किया। प्रिया और स्नेहा आमने-सामने खड़ी थीं। दोनों की टांगें फैलाई गईं। रशीद प्रिया को पीछे से चोद रहा था, फिरोज स्नेहा को। सलमान बीच में दोनों के चुचों को चूस रहा था।


"आह्ह... बहन... तुम्हारे चुचे भी चूस रहे हैं... हां... मजा आ रहा है ना..." प्रिया ने स्नेहा को चूमते हुए कहा।


"हां दीदी... बहुत... आह्ह्ह... हम दोनों रंडी बन गए... चोदो हमें... उफ्फ..."


चुदाई का ये सिलसिला सुबह तक चलता रहा। कुल मिलाकर ५-६ राउंड हुए। हर बार नई पोजीशन, नई गंदी बातें। प्रिया की गांड दो बार और फटी, स्नेहा की चूत पूरी लाल और सूजी हुई हो गई।


सुबह करीब ४:३० बजे तीनों आदमी अगले स्टेशन पर उतर गए। उन्होंने प्रिया और स्नेहा को चूमकर विदा लिया। "फिर मिलेंगे रंडियों..."


प्रिया और स्नेहा नंगी ही लेटी रहीं। दोनों बेहोश जैसे सो रही थीं।


मैं ऊपर से नीचे उतरा। चायवाला आया। उसने प्रिया की नंगी गांड देखी और बिना कुछ कहे अपना लंड निकालकर प्रिया की चूत में डाल दिया।


"आह्ह... कौन है... उफ्फ..." प्रिया आधी नींद में कराही, लेकिन चुप हो गई। चायवाले ने तेजी से चोदा और चेहरे पर छोड़कर चला गया।


मैंने दोनों को जगाया। "स्टेशन आने वाला है।"


दोनों लड़खड़ाते हुए टॉयलेट गईं, साफ हुईं और कपड़े पहने। जबलपुर पहुंचने पर दोनों को चलने में बहुत दिक्कत हो रही थी।


"क्या हुआ?" मैंने पूछा।


"पीरियड्स..." दोनों ने शर्माते हुए कहा।


लेकिन मुझे सब पता था। अब मेरी बीवी और साली पूरी तरह बदल चुकी थीं।


तो दोस्तों कैसे लगी यह Train में हुई Group Sex Story? कॉमेंट में अपनी राय जरूर बताए! और यह भी की क्या आप भी प्रिया और स्नेहा को चोदना चाहते हैं?

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