रक्षाबंधन में दीदी को गिफ्ट में दिया लंड!

Rakshabandhan Antarvasna Family Sex : राखी के दिन दीदी को गिफ्ट में भाई ने दिया अपना लंड! भाई ने बेहराहमी से फाड़ी वर्जिन चुत! और हुई Kamuk चुदाई की दास्ता शुरू!


दोस्तों, मेरा नाम आरव है। उम्र 21 साल। घर में चार लोग हैं - मम्मी, पापा, मैं और मेरी दीदी अनन्या।


दीदी की उम्र 24 साल है। हम दोनों बचपन से बहुत करीब हैं। दोस्तों की तरह बात करते हैं, एक-दूसरे के सीक्रेट शेयर करते हैं, और घर में ज्यादातर समय साथ बिताते हैं।


बात पिछले साल अगस्त की है। राखी से करीब पंद्रह दिन पहले की।


एक शाम मैं दीदी के कमरे में गया। फोन टेबल पर पड़ा था। स्क्रीन अनलॉक थी। मैंने बेवजह हिस्ट्री चेक कर ली। अंदर दर्जनों पोर्न वीडियो थे। भाई-बहन वाली कहानियाँ, हॉट क्लिप्स… सब। दिल जोर से धड़कने लगा।


मैंने फोन रख दिया और बाहर आ गया। लेकिन दिमाग में वही बात घूमती रही।


उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, मैं दीदी का फोन चेक करने लगा। हर बार हिस्ट्री में नई-नई वीडियो मिलतीं। धीरे-धीरे मेरा नज़रिया बदलने लगा। दीदी को देखता तो मन में अलग ख्याल आने लगे।


एक दोपहर मैं उनके कमरे के बाहर से गुजर रहा था। दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर से हल्की कराहें आ रही थीं। मैंने साँस रोककर कुंजी के छेद से देखा।


दीदी बिस्तर पर नंगी लेटी थीं। एक हाथ से फोन पकड़े पोर्न देख रही थीं, दूसरे हाथ से अपनी चूत में उंगलियाँ डाले अंदर-बाहर कर रही थीं। टांगें फैली हुई थीं। चूत चमक रही थी।


“आह्ह्ह… और अंदर… हाँ… ऐसे…” वे फुसफुसा रही थीं। ये Incest Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


मेरा लंड तुरंत तन गया। मैं पाँच-सात मिनट तक खड़ा देखता रहा, फिर चुपचाप चला गया। उस दिन बाथरूम में जाकर मैंने मुठ मारी। आँखों के सामने सिर्फ दीदी की नंगी तस्वीर थी।


अगले कुछ दिनों में तनाव बढ़ता गया। मैं जानबूझकर उनके पास ज्यादा समय बिताने लगा। कभी उनके बाल सहला देता, कभी लंबे हग कर लेता। हग अब पहले जैसे नहीं रह गए थे। ज्यादा कसकर, ज्यादा देर तक।


एक शाम मैंने पूछा, “दी, आजकल मुझसे कम बात करती हो। कोई बॉयफ्रेंड बन गया क्या?”


अनन्या हँसीं। “नहीं यार। पढ़ाई के चक्कर में टाइम नहीं मिलता। और मेरी किस्मत कहाँ कि बॉयफ्रेंड बने। अगर कुछ हुआ तो सबसे पहले तुझे ही बताऊँगी।”


मैंने मन ही मन सोचा – बॉयफ्रेंड नहीं है, इसलिए ही रात को अकेले उंगलियाँ चलाती हो।


मैंने उन्हें कसकर हग किया। इस बार छाती से छाती सट गई। दीदी ने भी हग को तोड़ा नहीं। कुछ पल बाद धीरे से बोलीं, “क्या बात है आरव… आज दी पर ज्यादा ही प्यार आ रहा है। कुछ चाहिए क्या?”


“नहीं दी… बस अच्छा लगता है जब आप मुझसे कुछ नहीं छुपातीं। जो भी चाहिए हो, मुझसे कह देना। आपके लिए कुछ भी कर सकता हूँ।”


दीदी ने सिर हिलाया। “ठीक है… बता दूँगी।” ये Rakshbandhan Me Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है !


दो दिन बाद फिर वही नज़ारा। कमरा लॉक था, लेकिन कुंजी के छेद से सब साफ दिख रहा था। दीदी इस बार और बेकाबू थीं। पोर्न की आवाज धीमी थी, लेकिन उनकी कराहें साफ सुनाई दे रही थीं।


“मैं अब इस उंगली से थक गई हूँ… मुझे भी अब असली लंड चाहिए… कितना ट्राई किया बॉयफ्रेंड के लिए… कोई नहीं मिला… अब मैं बॉयफ्रेंड नहीं ढूँढूँगी… अब सिर्फ लंड ढूँढूँगी… किसी का भी…”


मेरा दिल बैठ गया। बाहर किसी गलत आदमी के हाथ लग गईं तो ब्लैकमेल, बदनामी… सब हो सकता था। मैं वहाँ से हट गया। रात भर सोचा।


🔥 एक और कामुक स्टोरी : विस्की पिलाकर भाइयों ने रानी की फाड़ी गांड!


दीदी को बहुत प्यार करता था। उनकी देखभाल भी करता था। उनसे कुछ गलत नहीं होने देना चाहता था। और उनके लिए कुछ भी कर सकता था।


फिर मन में एक ख्याल आया – जब मैं उनके लिए सब कुछ कर सकता हूँ… तो उनकी ये जरूरत भी पूरी कर सकता हूँ।


अगले दिन मैंने उनके फोन की नोटिफिकेशन में भाई-बहन वाली सेक्स स्टोरीज़ और वीडियो चालू कर दीं। एक दिन बाद चेक किया तो दीदी ने वे सारी साइट्स खोल रखी थीं। कहानियाँ पढ़ी थीं, वीडियो देखी थीं।


दो दिन बाद राखी का दिन आने वाला था। दीदी मेरे पास आईं।


“आरव, परसों राखी है। इस बार क्या गिफ्ट देगा? मुझे बहुत अच्छा गिफ्ट चाहिए।”


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “दी, इस बार ऐसा गिफ्ट दूँगा जो किसी ने कभी नहीं दिया होगा। देखकर आप बहुत खुश हो जाएँगी।”


“ऐसा क्या देगा जो किसी ने नहीं दिया?”


“वो सरप्राइज है। अकेले में दूँगा… जब मम्मी-पापा बुआ के घर चले जाएँगे।”


दीदी ने सिर हिलाया। “ठीक है।”


राखी का दिन आया। सुबह हमने एक-दूसरे को राखी बाँधी। मम्मी-पापा दोपहर बाद बुआ के यहाँ चले गए। घर में सिर्फ हम दोनों रह गए।


शाम होते-होते दीदी मेरे कमरे में आईं।


“आरव, अब मम्मी-पापा भी गए। अब तो मेरा गिफ्ट दे दो।”


मैंने कहा, “दी, आप बाहर जाइए। मैं गिफ्ट तैयार करके बुलाता हूँ।”


दीदी चली गईं। मैंने पहले से तैयार एक छोटा सा खुला डिब्बा लिया। पैंट खोली। अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और डिब्बे को उसके ऊपर रख दिया। फिर दीदी को आवाज दी।


दीदी अंदर आईं। आँखों में उत्सुकता थी।


“बताओ… कहाँ है मेरा गिफ्ट? पसंद आना चाहिए, वरना तू गया।”


“आपको जरूर पसंद आएगा। लेकिन उसके लिए आँखें बंद करके डिब्बे के अंदर हाथ डालना होगा।”


दीदी ने आँखें बंद कीं और हाथ अंदर डाला।


“ये क्या है… सॉफ्ट-सॉफ्ट लग रहा है?”


उन्होंने और अंदर हाथ बढ़ाया। जैसे ही समझ में आया कि ये लंड है, उन्होंने झटके से हाथ बाहर निकाला और आँखें खोल दीं।


“आरव… ये क्या है? गिफ्ट की जगह ये क्या?”


मैंने डिब्बा हटा दिया। लंड साफ उनके सामने था। मैंने उनका हाथ पकड़कर धीरे से लंड पर रख दिया।


“यही आपका गिफ्ट है दी। जो आपको चाहिए था। मैंने आपको उंगलियाँ करते देखा है!!


और ये भी सुना है कि अब आप किसी का भी लंड लेने को तैयार हैं। बाहर किसी अजनबी से लेना रिस्की है। ब्लैकमेल हो सकता है, परेशानी हो सकती है। इसलिए… अपने प्यारे भाई का लंड ले लो।”


दीदी का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन मेरा हाथ उनके हाथ पर था। 


“तू… मुझे देखता था? हाँ… मैंने वैसा बोला था… लेकिन तू मेरा भाई है… ऐसा नहीं कर सकती…”


“दी, लंड तो लंड होता है। चाहे किसी का भी हो। ये Kamvasna से भरपूर Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है 


और मैं ये भी जानता हूँ कि पिछले कुछ दिनों से आप भाई-बहन वाली स्टोरीज़ और वीडियो देख रही हैं। उनमें भी आपने देखा कि ये गलत नहीं है। तो हम क्यों नहीं कर सकते?”


मैंने उनका चेहरा अपने करीब किया।


“बाहर किसी का लंड लोगी तो रिस्क है। वो कैसा होगा, आपको ब्लैकमेल करेगा, परेशान करेगा। बदनामी का डर भी रहेगा। यहाँ… कोई नहीं जाने वाला। सिर्फ हम दोनों।”


👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : माँ भाभी के भाई से चुद गई!


इतना कहकर मैंने धीरे से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहला किस हल्का था। दीदी अकड़ गईं। दो पल बाद उनकी साँस तेज हुई। तीसरे पल में उन्होंने जवाब देना शुरू कर दिया।


किस गहरा होता गया। मैंने उनका हाथ लंड पर छोड़ दिया। दीदी ने इस बार खुद नहीं हटाया। उल्टे हल्के से पकड़ लिया।


दो मिनट बाद जब किस टूटा तो दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। दीदी की आँखों में अब सिर्फ विरोध नहीं था। हवस भी थी।


“ठीक है…” उन्होंने धीमी आवाज में कहा। “लेकिन किसी को कभी पता नहीं चलना चाहिए। ये सिर्फ तेरा और मेरा सीक्रेट रहेगा।”


मैंने सिर हिलाया। “वादा।”


दीदी ने फिर से मुझे किस किया। इस बार खुद पहल करके। एक हाथ से मेरा लंड हिलाने लगीं। मैंने उनके कुर्ते के हुक खोले। ब्रा के ऊपर से बूब्स मसलने लगा। कुछ ही देर में दोनों के कपड़े फर्श पर बिखरे पड़े थे।


हम दोनों नंगे एक-दूसरे के सामने खड़े थे। दीदी ने मेरा लंड दोनों हाथों में लिया और धीरे से बोलीं -


“आरव… ये लंड मुझे बहुत समय से चाहिए था। आज ये मेरे हाथ में आया है… अब मैं इसे कभी नहीं छोड़ूँगी।”


दीदी ने मेरा लंड दोनों हाथों में कसकर पकड़ रखा था। उनकी आँखों में अब कोई झिझक नहीं बची थी। सिर्फ भूख थी।


वे घुटनों के बल बैठ गईं। पहले नोक को धीरे से चूमा, फिर जीभ निकाली और लंबी-लंबी चाटने लगीं। लार की चमक लंड पर फैल गई। फिर उन्होंने मुँह खोलकर नोक को अंदर ले लिया।


“उम्म…” की आवाज उनके गले से निकली।


मैंने उनके बाल सहलाए। “ऐसे ही दी… धीरे… आराम से…”


दीदी ने और गहराई तक लेने की कोशिश की। जब लंड उनके गले के पास पहुँचा तो आँखों में पानी आ गया, लेकिन उन्होंने रोका नहीं। एक हाथ से लंड के निचले हिस्से को हिला रही थीं, दूसरे से अपने एक बूब्स को मसल रही थीं।


मैं थोड़ी देर बाद उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। खुद उनके ऊपर उल्टा लेट गया। 69। मेरे मुँह के ठीक नीचे उनकी चमकती हुई चूत थी। मैंने बिना देर किए जीभ अंदर तक घुसा दी।


“आह्हhhhh… आरव… जीभ… अंदर… आह्ह्ह… वहाँ… चाटो…” ये Bhai Bahan Ki Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है 


दीदी भी मेरे लंड को और जोर से चूसने लगीं। दोनों एक-दूसरे को खा रहे थे। कमरे में सिर्फ चूसने और चाटने की आवाजें गूंज रही थीं। मैंने उनकी क्लिट को मुँह में लेकर जोर से चूसा। दीदी का शरीर उछल गया। उन्होंने मेरे लंड को मुँह से निकाला और जोर से कराह उठीं।


“आरव… अब और मत तड़पाओ… डाल दो… मेरी चूत में डाल दो…”


मैं सीधा हुआ। दीदी ने बिस्तर के साइड टेबल से एक कंडोम निकाला (वे पहले से रखती थीं) और मेरे लंड पर चढ़ा दिया। फिर अपनी टांगें फैला दीं।


मैंने लंड उनकी गीली चूत के मुँह पर रखा। आँखों में आँखें डाले धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। दीदी की साँस रुक गई।


“आह्ह्ह… दर्द… थोड़ा… धीरे… पहली बार… अह्ह्ह…”


मैं रुक गया। उनके होंठों पर किस किया, एक बूब्स मुँह में लेकर चूसने लगा। जब उनकी साँसें थोड़ी सामान्य हुईं तो फिर से धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। आधा… फिर और… आखिर में पूरा लंड उनकी चूत में समा गया।


दीदी की आँखें बंद थीं। नाखून मेरी पीठ में गड़ गए थे।


“पूरा… अंदर… आ गया… आरव… आह्ह्ह… अब हिलो… धीरे…”


मैंने बहुत धीमी गति से धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ दीदी की कराहें बदल रही थीं। दर्द कम हो रहा था, मजा बढ़ रहा था। कुछ मिनट बाद वे खुद अपनी कमर ऊपर उठाने लगीं।


“आह्ह्ह… अब… थोड़ा तेज… करो… आह्ह्ह… मजा आ रहा है… आरव… और तेज…”


मैंने स्पीड बढ़ा दी। उनके दोनों बूब्स हाथों में लेकर मसलने लगा। दीदी की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। छप-छप की आवाज आने लगी।


“चोदो… आरव… अपनी दीदी को चोदो… आज पूरी तरह… फाड़ दो… आह्ह्ह…”


मैं उनके ऊपर झुक गया। होंठों को चूसते हुए जोर-जोर से पेलने लगा। दीदी की टांगें मेरे कमर पर लिपट गईं। हर धक्के पर उनके बूब्स मेरे सीने से दब रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारी कराहें और बिस्तर की चरमराहट थी।


दस-बारह मिनट लगातार चोदने के बाद दीदी का शरीर तन गया। उन्होंने मेरे बाल जोर से पकड़ लिए और लंबी चीख के साथ झड़ गईं।


उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी धक्के मारता रहा।


💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : दो कजिन भाइयों संग रानी की पहली थ्रीसम!


थोड़ी देर बाद मैंने भी कंट्रोल खो दिया। आखिरी गहरे धक्के मारकर कंडोम के अंदर ही अपना माल छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए हाँफ रहे थे।


लंबी खामोशी के बाद मैंने धीरे से पूछा, “तो दी… कैसा लगा राखी वाला गिफ्ट?”


दीदी ने आँखें खोलीं। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थीं। उन्होंने मेरे गाल पर हाथ रखा और मुस्कुराईं।


“बहुत अच्छा… अब मुझे ये गिफ्ट हर रोज चाहिए।”


मैंने उनके माथे पर किस किया। “ये अब आपका ही है। जब चाहो, ले सकती हो।”


हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर लेटे रहे। एक-दूसरे के शरीर को सहलाते हुए। थोड़ी देर बाद दीदी ने खुद मेरा लंड हाथ में लिया। वह फिर से सख्त होने लगा था।


“एक बार और…” उन्होंने फुसफुसाया।


इस बार दीदी ऊपर थीं। उन्होंने खुद लंड अपनी चूत में डाल लिया और धीरे-धीरे उछलने लगीं। मैं नीचे से उनके बूब्स चूस रहा था। दीदी की कराहें फिर से कमरे में गूंजने लगीं।


“आह्ह्ह… आरव… ऐसे… और जोर से… अपनी दीदी की चूत ले लो… आह्ह्ह…” ये XXX Antarvasna Hindi Sex Stories आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।


दूसरे राउंड में हमने और देर तक किया। कभी मैं ऊपर, कभी वे। आखिर में दोनों फिर से एक साथ झड़ गए। इस बार कंडोम के बिना। दीदी ने खुद कहा था।


रात के करीब दो बजे तक हम थककर सो गए। एक-दूसरे की बाहों में। सुबह होने से पहले हमने एक बार और किया – धीरे-धीरे, चुपचाप, सिर्फ साँसों और हल्की कराहों के साथ।


मम्मी-पापा दोपहर तक लौटे। घर में सब सामान्य था। लेकिन दीदी और मेरी नजरें जब मिलतीं तो दोनों जानते थे कि अब हमारे बीच सिर्फ भाई-बहन वाला रिश्ता नहीं बचा। कुछ और भी था!! 


भाई चोद! बहन चोद!


उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, हम मिलते। कभी मेरे कमरे में, कभी उनके। कभी सिर्फ चूमकर और सहलाकर रह जाते, कभी पूरी रात चोदते। दीदी अब खुलकर मांगतीं।


“आज रात तेरा गिफ्ट चाहिए… और आज गांड में भी आज़माना है…”


मैं कभी मना नहीं करता था।


दोस्तों, ये थी मेरी और मेरी दीदी अनन्या की राखी वाली कहानी। जो शुरू हुई थी एक फोन की हिस्ट्री से… और खत्म हुई एक ऐसे रिश्ते में जहाँ भाई और बहन एक-दूसरे की सबसे बड़ी जरूरत बन गए!


तो दोस्तों ये Brother Sister Sex Story आपको कैसे लगी कॉमेंट करके जरूर बताना!

← Previous Story

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-


📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!