मौसी बीमार तो बेटी ने पकड़ा लंड! 02
Family Sex Kahani : अनन्या बहन बनी कुतिया! गांड में घुसाया लंड! थप्पड़ों के साथ हुई चुत और गांड की चुदाई! रात भर अपनी Antarvasna शांत करके चुत में छोड़ा माल!
अभी तक "मौसी बीमार तो बेटी ने पकड़ा लंड!" में आपने पढ़ा :-
“भैया… डालो… प्लीज… आह्ह्ह…” अनन्या ने लंड की नोक अपनी चूत के मुँह पर रख दी। मैंने धीरे से धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। अनन्या की आँखें फैल गईं — “आह्हhhhh… भैया… मोटा… आह्ह्ह… धीरे… आह्ह्ह…”
मैं रुक गया। “दर्द हो रहा है?” अनन्या ने सिर हिलाया, “थोड़ा… लेकिन मत निकाल… आह्ह्ह…” मैंने धीरे-धीरे और अंदर धकेला। पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। अनन्या ने मेरे कंधे पर नाखून गाड़ दिए।
“आह्ह्ह… भैया… पूरा… अंदर है… आह्ह्ह…”
अब आगे :-
मैं कुछ पल रुका रहा। फिर धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। “फच… फच…” की हल्की आवाज आने लगी। अनन्या पहले दर्द से कराह रही थी, लेकिन जल्दी ही उसकी आवाज बदल गई।
“आह्ह्ह… भैया… अब… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… और… आह्ह्ह…” मैंने स्पीड थोड़ी बढ़ा दी। अनन्या अपनी गांड ऊपर उठा-उठा कर जवाब देने लगी। “आह्ह्ह… आर्यन… और जोर से… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह…”
मैंने उसके दोनों मम्मों को पकड़कर मसलना शुरू कर दिया। अनन्या के निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसते हुए धक्के लगाने लगा। “आह्ह्ह… भैया… चूसो… और चोदो… आह्ह्ह…”
कमरे में सिर्फ हमारी साँसें और “फच… फच…” की आवाज गूंज रही थी। अनन्या अब पूरी तरह खुल चुकी थी। उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लीं और मुझे और गहराई तक खींचने लगी।
“भैया… आज रात… मुझे पूरी तरह चोद… आह्ह्ह… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह्ह…” मैंने स्पीड और बढ़ा दी। अनन्या की चीखें तेज हो गईं। “आह्हhhhh… भैया… और तेज… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…”
लगभग 12-13 मिनट बाद अनन्या का शरीर अकड़ गया। “आह्हhhhh… भैया… आ गया… आह्ह्ह…” उसकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया। मैं भी रुक न सका।
“अनन्या… मैं भी… आह्ह्ह…” मैंने आखिरी जोरदार झटके मारे और सारा माल उसकी चूत में छोड़ दिया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। अनन्या मेरे सीने पर सिर रखकर हाँफ रही थी। “भैया… आज से… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह्ह…” मैंने उसके बाल सहलाए और बोला, “अनन्या… ये गलत है… लेकिन… मैं भी तुझे चाहता हूँ।”
थोड़ी देर बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… एक बार और… प्लीज…” मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में अभी भी चाहत थी। मैंने उसे चूम लिया और फिर से उसके ऊपर चढ़ गया।
अनन्या ने फिर से कहा, “भैया… एक बार और… प्लीज…” उसकी आवाज में अभी भी हवस थी। मैंने उसे चूम लिया। उसके होंठ अभी भी गीले और नरम थे।
मैंने उसे पलट दिया। अनन्या कुतिया बनकर बिस्तर पर झुक गई। उसकी गोल, मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से उसकी गांड दबाई।
“अनन्या… तेरी गांड… कितनी मस्त है…” अनन्या ने पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराई — “भैया… आज इसे भी चोद लो… आह्ह्ह…”
मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। अनन्या चीख पड़ी — “आह्हhhhh… भैया… गहरा… आह्ह्ह…” मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
“फच… फच… फच…” की आवाज तेज हो गई। अनन्या अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल रही थी।
“आह्ह्ह… भैया… और जोर से… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह…” मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। अनन्या और जोर से कराह उठी।
“आह्ह्ह… आर्यन… और मार… आह्ह्ह… गांड लाल कर दो… आह्ह्ह…” मैंने लगातार थप्पड़ मारते हुए चोदना जारी रखा। अनन्या की गांड लाल हो चुकी थी।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अनन्या अब पागलों की तरह कराह रही थी — “आह्ह्ह… भैया… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह… रुक मत… आह्ह्ह…” कुछ देर बाद अनन्या जोर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
मैंने लंड बाहर निकाला। अनन्या थककर बिस्तर पर गिर पड़ी। मैंने उसे घुमाया और उसके ऊपर चढ़ गया।
“अभी खत्म नहीं हुआ…” मैंने फिर से लंड उसकी चूत में डाल दिया। अनन्या की आँखें बंद थीं, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी।
“आह्ह्ह… भैया… तुम नहीं थकते… आह्ह्ह…” मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और गहराई तक धक्के लगाने लगा। “अनन्या… तेरी चूत… मुझे पागल कर रही है… आह्ह्ह…”
अनन्या ने मेरे चेहरे को पकड़कर किस करना शुरू कर दिया। हम दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। मैं तेजी से चोद रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी चीखें और बिस्तर की चरचराहट गूंज रही थी।
“भैया… आज मुझे अपनी रंडी बना लो… आह्ह्ह… हमेशा के लिए… आह्ह्ह…” अनन्या की बात सुनकर मैं और जोश में आ गया। मैंने उसके मम्मों को जोर से मसलते हुए आखिरी धक्के लगाए।
“अनन्या… मैं आ गया… आह्ह्ह…” मैंने उसकी चूत में दूसरी बार माल छोड़ दिया। अनन्या भी साथ में झड़ गई। “आह्हhhhh… भैया… भर गया… आह्ह्ह…”
हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से लिपट गए। अनन्या मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “भैया… अब मैं तुम्हारी हूँ… सच में…” मैंने उसके बाल सहलाए। “अनन्या… ये सब गलत है… लेकिन अब पीछे नहीं हट सकता।”
थोड़ी देर बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… मेरी गांड भी ले लो… प्लीज…” मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में अभी भी चाहत थी। मैंने उसे फिर से कुतिया बनाया।
मैंने थूक लगाया और लंड उसकी गांड के छेद पर रखा। अनन्या ने गहरी साँस ली।
“भैया… धीरे… आह्ह्ह…” मैंने धीरे-धीरे धक्का मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। अनन्या चीख पड़ी — “आह्हhhhh… दर्द… आह्ह्ह… लेकिन मत निकाल… आह्ह्ह…”
मैंने और धीरे से पूरा लंड अंदर डाला। अनन्या का शरीर अकड़ गया। मैं कुछ पल रुका, फिर धीरे-धीरे कमर चलाने लगा। “आह्ह्ह… भैया… अब… थोड़ा अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अनन्या अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगी। “आह्ह्ह… आर्यन… और जोर से… आह्ह्ह… मेरी गांड फाड़ दो… आह्ह्ह…” मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
लगभग 10 मिनट बाद अनन्या फिर झड़ गई। मैंने भी उसकी गांड में माल छोड़ दिया। “आह्ह्ह… अनन्या… भर गया… आह्ह्ह…”
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। अनन्या मेरे पास आकर लिपट गई। “भैया… आज रात… मैं कभी नहीं भूलूँगी…”
मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। कमरे में सिर्फ हमारी तेज साँसें चल रही थीं।
हम दोनों थककर बिस्तर पर लेटे हुए थे। अनन्या मेरे सीने पर सिर रखकर सोने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी उंगलियाँ अभी भी मेरे लंड पर धीरे-धीरे फिर रही थीं।
कमरे में पंखे की आवाज और हमारी साँसें ही सुनाई दे रही थीं।
थोड़ी देर बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… तुम सो नहीं रहे?”
मैंने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “सोने का मन नहीं कर रहा।” अनन्या मुस्कुराई और मेरे लंड को हल्के से दबाया। “ये भी तो नहीं सो रहा…”
मैंने हँसते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया। अनन्या मेरे ऊपर चढ़ गई। उसके लंबे बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। उसने मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया। इस बार किस में जल्दबाजी नहीं थी।
धीरे-धीरे, लंबे समय तक। उसकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी।
अनन्या ने अपना शरीर नीचे सरकाया और मेरे लंड को मुँह में ले लिया।
“आह्ह्ह… अनन्या…” मैंने उसकी कमर पकड़ ली। अनन्या मेरे लंड को धीरे-धीरे चूस रही थी। कभी सिर्फ नोक, कभी पूरा अंदर तक। उसकी गर्माहट और जीभ का स्पर्श मुझे पागल कर रहा था।
“अनन्या… ऐसे ही… आह्ह्ह…” अनन्या ने मेरे अंडकोष को भी सहलाते हुए लंड को और गहराई तक ले लिया।
मैंने उसके बाल पकड़कर हल्के-हल्के धक्के देने शुरू कर दिए। अनन्या गले तक लंड ले रही थी। उसकी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वो रुकी नहीं।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे ऊपर खींचा।
“अब काफी… मुझे अंदर चाहिए।” अनन्या मुस्कुराई और मेरे लंड पर बैठ गई। उसने खुद लंड को अपनी चूत पर सेट किया और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी।
“आह्ह्ह… भैया… फिर से… आह्ह्ह…” अनन्या पूरी तरह बैठ गई। उसका चेहरा सुख और दर्द के मिश्रण से भर गया। वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके मम्मे मेरे चेहरे के सामने हिल रहे थे। मैंने दोनों मम्मों को पकड़कर चूसना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह… आर्यन… चूसो… और जोर से… आह्ह्ह…” अनन्या तेजी से कूदने लगी। उसकी चूत मेरे लंड को कस रही थी। “भैया… तुम्हारा लंड… मुझे पागल कर देता है… आह्ह्ह…”
मैंने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। अनन्या और जोर से कराहने लगी। “आह्ह्ह… भैया… और तेज… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह…” कमरे में फिर से “फच… फच…” की आवाज गूंजने लगी।
अनन्या झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। हम दोनों की साँसें एक-दूसरे में मिल रही थीं। मैंने उसकी गांड पकड़कर और जोर से नीचे से धक्के लगाए। अनन्या की चीखें दब गईं।
“भैया… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…” अनन्या का शरीर काँपने लगा। मैंने भी स्पीड बढ़ा दी। कुछ ही पल में अनन्या जोर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया। मैं भी खुद को रोक न सका।
“अनन्या… ले… आह्ह्ह…” मैंने फिर से उसकी चूत में माल छोड़ दिया।
अनन्या मेरे ऊपर गिर पड़ी। दोनों पसीने से तरबतर थे। थोड़ी देर चुप रहने के बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… क्या हम गलत कर रहे हैं?” मैंने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “शायद… लेकिन अभी रुकने का मन नहीं कर रहा।”
अनन्या ने सिर उठाया और मुस्कुराई। “तो फिर… एक बार और?” मैंने हँसते हुए उसे चूम लिया। “तू थक नहीं रही?” अनन्या ने मेरे लंड को छुआ। “ये तो अभी भी तैयार है…”
मैंने उसे पलट दिया और उसके पीछे से चिपक गया। इस बार मैंने धीरे-धीरे उसकी गांड में उंगली डाली। अनन्या सिसकार उठी - “आह्ह्ह… भैया… वहाँ… आह्ह्ह…” मैंने उंगली अंदर-बाहर की, फिर लंड उसकी गांड पर रखा।
“भैया… धीरे… आह्ह्ह…” मैंने धीरे से धक्का मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। अनन्या ने बिस्तर का चादर कसकर पकड़ लिया। “आह्हhhhh… दर्द… लेकिन… मत निकाल… आह्ह्ह…”
मैंने पूरा लंड अंदर डाला और धीरे-धीरे कमर चलाने लगा। अनन्या पहले तो दर्द से कराह रही थी, लेकिन जल्दी ही उसकी आवाज बदल गई। “आह्ह्ह… भैया… अब… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अनन्या अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगी। “आह्ह्ह… आर्यन… मेरी गांड फाड़ दो… आह्ह्ह… आज पूरी तरह अपनी बना लो… आह्ह्ह…”
मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। अनन्या की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। कुछ देर बाद दोनों फिर से झड़ गए।
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। अनन्या मेरे पास आकर लिपट गई। “भैया… अब सो जाते हैं… सुबह फिर…” उसकी आवाज में थकान और संतुष्टि दोनों थे।
मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। खिड़की से हल्की रोशनी आ रही थी। दोनों आँखें बंद करके लेटे रहे, लेकिन नींद दूर थी।
रात के तीन बज चुके थे। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज और हमारी धीमी साँसें गूंज रही थीं। अनन्या मेरे सीने पर लेटी हुई थी। उसका एक हाथ मेरे लंड पर था, जैसे वो छोड़ना ही न चाहती हो।
मैंने उसके बाल सहलाते हुए पूछा, “अनन्या… पछतावा हो रहा है?” उसने सिर हिलाया। “नहीं भैया… बल्कि डर लग रहा है कि ये रात खत्म हो जाएगी।” उसकी आवाज में हल्की काँपन थी।
मैंने उसका चेहरा ऊपर किया और उसके माथे पर किस किया। “सुबह हो जाएगी… फिर सब पहले जैसा हो जाएगा।” अनन्या ने मेरे होंठों पर उंगली रख दी। “नहीं… अब पहले जैसा नहीं हो सकता। मैं तुम्हें भूल नहीं पाऊँगी।”
थोड़ी देर चुप रहने के बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… एक बार और… आखिरी बार…” मैंने हँसते हुए कहा, “आखिरी बार? तू हर बार यही कह रही है।” अनन्या मुस्कुराई और मेरे ऊपर चढ़ गई।
इस बार जल्दबाजी नहीं थी। अनन्या ने मेरे लंड को सहलाते हुए अपनी चूत पर रगड़ा। फिर धीरे-धीरे बैठ गई। “आह्ह्ह… भैया… अभी भी… टाइट लग रहा है…” वो ऊपर-नीचे होने लगी।
उसके मम्मे मेरे चेहरे के सामने हिल रहे थे। मैंने दोनों को पकड़कर चूसना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह… आर्यन… ऐसे ही… आह्ह्ह…” अनन्या की गति धीमी लेकिन गहरी थी। हर बार वो पूरा लंड अंदर ले रही थी। मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे से हल्के धक्के दिए। अनन्या झुककर मेरे होंठ चूसने लगी।
हम दोनों लंबे समय तक ऐसे ही जुड़े रहे। कभी धीरे, कभी तेज। अनन्या कभी मेरे कान में गंदी बातें कहती, कभी बस कराहती रहती।
“भैया… तुमने मेरी जवानी लूट ली.. अब मैं किसी और को नहीं चाहूँगी… लेकिन आपका लंड.. आह्ह्ह… ”
आखिर में दोनों फिर से एक साथ झड़ गए। अनन्या मेरे ऊपर गिर पड़ी। हम दोनों पसीने और थकान से चिपके हुए थे।
कुछ देर बाद अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… मौसी कल डिस्चार्ज हो सकती हैं। फिर तू चला जाएगा…” मैंने उसके बाल सहलाए। “हाँ… लेकिन…” अनन्या ने मेरी बात काट दी।
“कोई लेकिन नहीं। जब भी मौका मिलेगा… मैं तुझे बुलाऊँगी।”
मैंने उसके माथे पर किस किया। “और अगर मैं खुद आ जाऊँ?” अनन्या मुस्कुराई। “तो दरवाजा हमेशा खुला रहेगा… सिर्फ तेरे लिए।”
हम दोनों चुपचाप लेटे रहे। खिड़की से हल्की सुबह की रोशनी आने लगी थी। अनन्या ने मेरी उंगलियों में अपनी उंगलियाँ फँसा लीं।
“भैया…” उसने फुसफुसाया, “आज रात के बाद… मैं तुम्हारी कजिन कम, और तुम्हारी औरत ज्यादा बन गई हूँ।” मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसे और कसकर पकड़ लिया।
सुबह होने से पहले हमने एक बार और प्यार किया। इस बार बहुत धीरे, बहुत लंबे समय तक। जैसे दोनों जानते हों कि ये पल जल्दी खत्म होने वाला है।
जब अनन्या आखिर में मेरे सीने पर सो गई, तो मैं छत की तरफ देखता रहा। मन में एक ही बात घूम रही थी —
ये रात खत्म हो गई है… लेकिन कहानी अभी बाकी है।
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