मामा की बोल्ड बेटी की सील तोड़ चुदाई!

Family Sex Story : मेरे मामा की बोल्ड बेटी के साथ सील तोड़ चुदाई का मौका कैसे बना? और वो रात जिसमें हम दोनों ने अपनी Antarvasna की प्यास को पूरा किया! पढिए इस Bold Sex स्टोरी में! 


हेलो दोस्तों, मेरा नाम तो आप जानते हो हाश्मी लायन है। आपका स्वागत है मेरी इस सेक्स कहानी में। ये कहानी कुछ महीनों पहले की है, जब मैं अपने मामू के घर काशीपुर गया था। 


काशीपुर उत्तराखंड का एक छोटा-सा खूबसूरत शहर है, जहाँ हरी-भरी वादियाँ और पहाड़ों की ताज़ा हवा हमेशा मन को सुकून देती है।


मामू की बेटी मेघा से मेरी मुलाकात ने मेरी ज़िंदगी को एक नया मोड़ दे दिया। 


वो एकदम मॉडर्न खुली मिजाज़ की लड़की थी, सभी से हँसी-मजाक करने वाली, और इतनी चुलबुली की हर पल उसके साथ बीतना किसी रोमांटिक फिल्म जैसा लगता है। अगर आपको ये कहानी पसंद आए, तो कमेंट्स में ज़रूर बताइए। चलिए, शुरू करते हैं।


मामू के घर जाना तो बस एक फैमिली गेट-टुगेदर के बहाने था। मेरे पापा की तबीयत ठीक नहीं थी, और मामू ने हमें बुलाया था। काशीपुर हमसे करीब 80 किलोमीटर दूर था, तो हम ट्रेन से निकले। 


रास्ते भर मैं खिड़की से बाहर झाँकता रहा, पहाड़ों की सुंदरता देखकर मेरा तो मन प्रसन्न हो गया था। शाम के करीब हम मामू के घर पहुँचे।


उनका घर शहर के बीचों-बीच था वो शहर का एक पुराना लेकिन मजबूत सा घर था, जिसमें आँगन में आम का पेड़ था और छत पर फूलों की क्यारियाँ थी। 


मामू ने गेट खोला, और अंदर आते ही सबने हमें गले लगाया। मामू की पत्नी मामी ने चाय का इंतज़ाम करा, और फिर बातों का सिलसिला शुरू हो गया। तभी कमरे से एक लड़की निकली – उसके लंबे बाल था, गोरा रंग थी, और काली आँखें जो शरारत से चमक रही थीं।


वो नीली जींस और सफेद टॉप में इतनी हॉट लग रही थी के मेरा दिल एक पल को धड़क गया। ये Antarvasna Family Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


मामू ने हमें एक दूसरे से इंट्रोड्यूस करा "ये हमारी बेटी मेघा है। ये तेरी कजिन है, और बस दो साल छोटी है।" मेघा ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाय हाश्मी भैया! कितने दिनों बाद आए हो। चलो, मैं तुम्हें अपना घर घुमाती हूँ।"


उसकी आवाज़ में वो मिठास थी जो किसी को भी अपना बना ले। मैंने हँसते हुए कहा, "भैया मत बुलाओ यार, बस हाश्मी कहो मुझे। वरना लगेगा जैसे मैं बूढ़ा हो गया हूं।" 


मेरी बात पर सब हँस पड़े, और मेघा ने मेरी बाँह पकड़ ली। उस स्पर्श से ही मेरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। पहले दिन तो बस फैमिली के साथ वाली बातें हुईं। फिर रात को डिनर के बाद सब छत पर बैठे। मेघा मेरे पास आकर बैठ गई। 


वो खुली मिजाज़ की लड़की थी – मतलब, बिल्कुल फ्रैंक वाली लड़की। हँसी-मजाक में वो इतना चिपक जाती थी की उसके शरीर का स्पर्श मेरी साँसें रोक देता था। 


"हाश्मी, तुम्हें काशीपुर कैसा लग रहा है? पहाड़ देखे?" उसने अपनी मीठी आवाज़ में मुझसे पूछा, और मेरी तरफ झुकते हुए अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया।


मैंने कहा, "बहुत खूबसूरत है। लेकिन तुम्हारी तरह नहीं।" वो हँसी, "अरे वाह! कॉम्प्लिमेंट? चलो, कल घुमाने ले जाऊँगी तुमको।" उसकी हँसी इतनी प्यार थी, लेकिन आँखों में एक अजीब शरारत साफ झलक रही थी।


रात को सोते वक्त मैं उसके बारे में सोचता रहा। उसकी वो मुस्कान, वो स्पर्श – सब कुछ मेरे दिमाग में घूम रहा था। फिर अगले दिन सुबह मैं उठा तो मेघा पहले से तैयार थी।


"चलो नाश्ता करते हैं, फिर बाहर चलेंगे।" वो उत्सुकता से बोली और हमने साथ में ही पराँठे खाए, और मामी ने चाय दी। नाश्ते के दौरान वो मेरे इतने करीब बैठी के उसकी जाँघ मेरी जाँघ से सट गई थी। 


मैंने महसूस करा उसके शरीर की गर्मी मेरी जांघ पर महसूस हो रही है। ये Family में Hindi Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


वो जानबूझकर कर रही थी या अनजाने में, पता नहीं, लेकिन मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने रहा था। बाहर निकले तो हमने उसके पापा की बाइक ली। मेघा पीछे बैठी, और अपनी बाँहें मेरी कमर पर लपेट लीं। 


"पकड़ो मुझे अच्छे से," मैंने कहा। वो हँसी, "तुम्हें पकड़ूँ या बाइक को?" रास्ते भर वो मुझसे चिपककर बैठी रही, उसके बूब मेरी पीठ से दब रहे थे। हर गड्ढे पर उसे झटका लगता, तो वो मुझसे और ज़ोर से चिपट जाती।


मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा। मैंने सोचा, कहीं वो सख्ती को न महसूस कर ले। लेकिन वो तो और मज़े ले रही थी।हम काशीपुर घूमने लगे – हमने झरने देखे, पहाड़ी रास्तों पर बाइक चलाई। लंच के लिए एक ढाबे पर रुके। 


वहाँ भी वो मेरे बगल में ही बैठी, और खाते वक्त अपनी उंगली से मेरी प्लेट में पराठा तोड़कर खिलाने लगी। "खाओ ना, ये वाला स्पेशल है।" उसके होंठों पर मक्खन लग गया था, और मैं उन मखमली होठों को बस घूरता रह गया।


"ऐसे कैसे देख रहे हो?" वो बोलते हुए शरमाई, लेकिन उसकी आँखों में चमक थी।


हमारी दोस्ती तो हो ही गई थी – वो मुझसे हर बात शेयर करती जा रही थी, अपनी कॉलेज लाइफ, बॉयफ्रेंड्स के बारे में हसी मज़ाक वगैरह वगैरह। 


"तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?" फिर उसने पूछा। मैंने कहा, "नहीं, अभी तो सिंगल हूं।" वो हँसी, "अच्छा? तो मैं अप्लाई कर दूँ?" हम दोनों हँसे, लेकिन उसके शब्दों में सच्चाई लग रही थी। घर लौटते वक्त बारिश हो गई तो हम भीगते हुए पहुँचे। 


मामू-मामी कहीं गए हुए थे, घर पर सिर्फ हम और मेरे माता-पिता थे।


मेघा ने कहा, "चलो, कपड़े बदलते हैं।" लेकिन वो मेरे ही कमरे में घुस गई। "तुम्हारा कमरा अच्छा है।" मैने बोला तो वो मेरी अलमारी खोलने लगी। मैंने रोकने की कोशिश की, लेकिन वो हँसती रही।


"अरे, कुछ नहीं चुराऊँगी।" फिर उसकी वो नाज़ुक नज़र मेरे मोबाइल पर पड़ी। मैं कपड़े बदलकर वीडियो देख रहा था – कोई कॉमेडी क्लिप देखनी थी उसे। वो तुरंत मेरे बगल में बैठ गई, इतना करीब की उसके चूंचे मेरी बाँह से दब गए।


 "देखो ना, ये वाला सीन मज़ेदार है।" वो चिपककर हँसने लगी। उसके नरम स्तन का दबाव इतना कामुक था के मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मेरी पैंट में उभार साफ दिख रहा था।


मेघा ने भी ये नोटिस करा, उसने शरमाकर आँखें नीची कर लीं, और बोली, "सॉरी... मैं... मैं बाहर जाती हूँ।" लेकिन जाते-जाते वो मुझे देखकर मुस्कुराई। मैं सोच में पड़ गया – ये लड़की कितनी बोल्ड है! ये Mama Ki Beti Ki Chudai Ki Kahani Audio आप Garamkahani पर पढ़ रहे हैं।


शाम को फिर फैमिली डिनर हुआ। सबने साथ खाना खाया, और फिर बाहर आँगन में टीवी लगाया गया। मामू-मामी, मेरे माता-पिता – सब ' साथ निभाना साथिया ' देखने लगे। मामा का घर पुराना था, तो अंदर के कमरे अलग-थलग थे। मेघा ने मुझे इशारा करा, "चलो अंदर, कुछ बात करनी है।"


 मेरा दिल फिर से धड़कने लगा। हम चुप चाप उसके कमरे में चले गए। फिर दरवाज़ा बंद किया, और लाइट डिम कर दी। वो बेड पर बैठ गई, और मुझे पास बुलाया। "हाश्मी, आज तुम्हें देखकर... कुछ अजीब सा लग रहा है।" उसकी आवाज़ काँप रही थी।


 मैं उसके पास बैठा, और उसके हाथ को पकड़ा। "मुझे भी, तुम्हारी वो चिपकन... वो स्पर्श...जब से मिला है मेरे दिल में हलचल सी हो रही है" फिर वो शरमाई, लेकिन उसने मेरी आँखों में देखा। "तुम्हें पसंद आया?" मैंने हां में सिर हिलाया।


फिर वही हुआ जो होना चाहिए था – हमारी नज़रें मिलीं, और होंठ आपस में आकर्षित हो गए। मैंने धीरे से उसके होंठ चूमे। वो नरम और, गर्म थे। मेघा ने भी जवाब दिया, वो अपनी जीभ लेकर मेरी जीभ से खेलने लगी। हमारा किस गहरा होता गया। 


उसके हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे, और मेरे हाथ उसके बालों में उलझ गए।


"हाश्मी... ये गलत तो नहीं है?" वो फुसफुसाई। मैंने कहा, "प्यार गलत नहीं होता।" फिर वो मुस्कुराई, और उसने मुझे ज़ोर से गले लगा लिया। उसके चूंचे मेरे सीने से दबे जा रहे थे, और मेरा लंड फिर से सख्त हो गया। 


इस बार वो भागी नहीं – उल्टा, वो अपना हाथ नीचे ले गई और मेरी पैंट पर रख दिया।


"ये... इतना सख्त...कैसे हो गया" वो शरमाकर बोली। मैंने उसका टॉप ऊपर करा, और उसके काले ब्रा में लिपटे स्तन देखे। उसका साइज़ 34B के आसपास था उसके चूंचे गोल-मटोल थे, और निप्पल्स सख्त हो चुके थे।


मैंने मेघा की ब्रा खींची, और उसके स्तनों को मुट्ठी में भरा।


वो सिसकारी भरने लगी, "आह...हमममम! हाश्मी... धीरे..." मैंने चूमा उन्हें, फिर ज़बान से चाटा। मैने उसके खड़े निप्पल को जीभ से घुमाया, तो वो तड़प उठी। उसके हाथ मेरी शर्ट उतारने लगे। कुछ ही पलो में हम दोनों नंगे हो गए। 


मेघा की स्किन रेशम जैसी चिकनी थी। उसकी कमर नहीं सी पतली, और नाभि गहरी थी। मैंने उसकी जींस खोली, और पैंटी उतारी। उसकी चूत बिल्कुल साफ-सुथरी थी, वो भी गुलाबी होंठों वाली। मेरे सामने खुदको नंगा पाकर वो शरम से लाल हो गई।


 "पहली बार किसी को अपनी चूत दिखा रही हूँ।" मैंने कहा, "तुम परफेक्ट हो।" फिर मैंने उसे प्यार से बेड पर लिटाया। उसके पैर फैलाए, और चूत को अच्छे से देखा।


वो गीली हो चुकी थी उसकी चूत से रस आ रहा था तो मैंने जीभ लगाई – मैने प्यार से चाटा उसके चूत के होंठों को,फिर उसकी क्लिट को चूसा। 


मेघा तड़प कर चीखी, "ओह गॉड... हाश्मी... अआआह! क्या कर रहे हो... आह्ह..." उसके हाथ मेरे सिर में उलझे जा रहे थे, उत्तेजना से उसकी कमर ऊपर हो गई।


मैंने चूत के और अंदर जीभ डाली, और होठों में चूत दबाकर चूसने लगा। मेघा के स्वाद खट्टा-मीठा था। वो तड़प रही थी, "बस... अआआह! मत रुको... ओहद्ह और मेरा पानी आ जाएगा अआआह!"


अब मेघा ने मुझे खींचा। "अब मेरी बारी।" वो बोलते हुए उठी, और मेरे लंड को हाथ में ले लिया। ये XXX Hindi Sex Stories आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


मेरा लंड 7 इंच का, मोटा, सख्त था। "वाह... इतना बड़ा..." वो आश्चर्य से बोली। फिर उसने मेरा सांप मुंह में लिया। उसने लंड के टोपे पर जीभ से घुमाया, फिर टोपे को चूसा उसकी हरकत से मैं सिहर उठा। 


"मेघा... यार... कमाल है..." मैं बोला फिर वो लंड ऊपर-नीचे कर रही थी, मेरा लंड उसक सलाइवा से गीला हो गया था। कभी वो मेरी गेंदों को चाटती, कभी लंड को होठ में दबाकर रगड़ती।


मैं कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब आग लग चुकी थी। मैने उसे घुमाया और हम 69 पोज़िशन में आ गए। मैं नीचे था, वो ऊपर आई। उसकी चूत मेरे मुंह पर रगड़ रही थी, मेरा लंड उसके मुंह में था। 


हम दोनों एक दूसरे को चूस रहे थे – वो जोर-जोर से, मैं धीरे-धीरे से। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं। "आह...आगाह! हाश्मी... ओंह्ह्ह! तेरी जीभ... मार डालेगी... अआआह! आआह।"


कुछ मिनट बाद मैंने कहा, "अंदर डालूँ अब?" वो बोली, "हाँ... लेकिन धीरे डालना… मेरा पहली बार है।" मैं हमेशा कंडोम और ताबीज़ अपने साथ रखता हूं तो तो मैंने कंडोम पहनने की सोची, लेकिन उत्साह में भूल गया। 


फिर मैने चूत पर थूक लगाया,और लंड पर भी।


अपने लंड की टिप को उसकी चूत के गेट पर सेट किया, और धीरे लोड़ा अंदर धकेला और वो आधा अंदर घुसा, तो वो चीखी, "आह आगाह! दर्द हो रहा है.. रुको...आअआआ!" उसकी चूत से खून निकला – यानी वो सच में वर्जिन थी। 


तो मैं रुका, और प्यार से चूमा उसे। फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। मैं आराम से धक्के लगाए और लंड पूरा घुस गया।


अब मेरा लंड उसके अंदर फिट हो गया था – उसकी चूत अंदर से गर्म और, टाइट थी। वो रो रही थी, लेकिन उसकी आँखों में चाहत थी। 


मैंने धीरे-धीरे लंड के धक्के अंदर बाहर चलाना शुरू करे। अंदर बाहर - बाहर- अंदर। "आह...ओंह्ह्ह! अब अच्छा लग रहा... और तेज़... आआह और करो" वो बोली। फिर मैंने स्पीड बढ़ाई।


पूरा कमरा 'पच-पच' की आवाज़ से भर गया। उसके स्तन उछल रहे थे, मैं जोश से उन्हें दबा रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गाड़ रही, "हाँ... अआआह! फाड़ दो ओहद्ह!... तेरी रंडी हूँ मैं...हम्मम आअआआअह!"


फिर वो घुटनों पर आई,और गांड ऊपर कर के घोड़ी बन गई। मैं भी पीछे से मारा एक ज़ोर का धक्का तो वो पूरी हिल गई "ओह्ह... हाश्मी अआआह... मार डालोगे ओहद्ह!... चोदो मुझे... अआआह!"


वो वासना में अजर गालियाँ देने लगी, "मादरचोद...आआह और गहरा डालना ओहद्ह!... तेरी ही चूत है ये तेरी है अब से।" मैंने उसने बाल पकड़े, कमर पकड़ी, और तेज़ी से ठोकने लगा। ये Bhai Bahan Ki Desi Sex Stories Hindi आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


हमारा पसीना बह रहा था, साँसें तेज़ हो रही थी। उसके चरम सुख का समय आने वाला था – क्योंकि उसकी चूत सिकुड़ने लगी थी।


"आ... आ रहा है मेरा... आअआआ ! झड़ रही हूँ..." वो चीखी, और शरीर काँप गया। मगर मैं रुका नहीं – और लगाते 10-15 धक्के मारे। 


अब मेरा भी टाइम आया। मैं बोला "मेघा... झड़ने वाला हूं मैं..." वो जल्दी से मुड़ी, "मुंह में डाल मेरे... पीना चाहती हूँ मैं।"


मैंने पानी निकाला, और उसक मुंह में डाला। 3-4 झटके उसने मुट्ठी में लेकर मारे, और सारा माल उसके मुंह में घुस गया। वो भी सारा माल निगल गई।


हम दोनों काफी देर तक निढाल लेटे रहे। एक-दूसरे को चूमते व गले लगाते रहे।


"प्यार करता हूँ तुमसे," मैंने कहा। "मैं भी... ये हमारा राज़ रहेगा।" वो बोली। बाहर से टीवी का शोर आ रहा था, लेकिन हमें फर्क न पड़ा। हम खामोशी से नहाने गए। 


मैंने उसके बाल धोए, वो मेरी पीठ मालती रही । फिर हमने कपड़े पहने, और बाहर आए। सब सो चुके थे। अगले दिनों हम चुपके-चुपके मिलते रहे और चुदाई करते रहे। कभी छत पर, कभी जंगल में।


मेघा अब और खुलकर बोल्ड हो गई थी – वो गांड मारने की भी बात करने लगी। लेकिन मुझे वो पहली रात हमेशा याद रहेगी। दोस्तों, ये थी प्रेम कहानी मेरी और मेघा की। उम्मीद है आपको मज़ा आया होगा।


कमेंट्स में बताओ कैसी लगी ये Bhai Bahan Ki Family Wali चुदाई कहानी, धन्यवाद!!

← Previous Story Next Story →

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!