मकान मालकिन पटकर चुदी रात भर!
Antarvasna Hindi Sex Kahani : किराएदार ने मकान मालकिन भाभी कविता को पटाकर घर के हर कोने में चोदा! मारी टाइट गांड! रात भर दोनों होल में भरता रहा माल!
दोस्तों, मेरा नाम अजय है। मैं भदोही का रहने वाला हूँ। उम्र चौबीस साल। अभी इंजीनियरिंग थर्ड ईयर पूरा करके समर इंटरनशिप के लिए बनारस BLW आया हूँ। यहाँ किराए के कमरे में रहता हूँ।
मेरा कद 5 फीट 4 इंच, रंग गेहुँआ और लंड 6 इंच लंबा व 3 इंच मोटा है। आज उसी लंड की कहानी बताने जा रहा हूँ जिसने मेरी मकान मालकिन को पटाकर चोदा।
मकान मालिक का अपना कारोबार है। घर में उनकी पत्नी, दो छोटे बच्चे और कानों से कम सुनने वाली सास रहती हैं। दूसरा फ्लोर पर दो कमरे किराए के लिए बने हैं। मैंने ऊपर वाला कमरा लिया है।
अंदर और बाहर दोनों तरफ से रास्ता है। मुझे यहाँ छह हफ्ते रहना था।
शाम को मैं अक्सर उनके बच्चों के साथ खेलता। बच्चों के साथ उनकी माँ भी होतीं। धीरे-धीरे उनसे दोस्ती हो गई। मैं उन्हें भाभी कहने लगा। भाभी ही असल में मकान मालकिन हैं।
भाभी सुबह-शाम वॉकिंग करतीं। एक दिन मैंने हिम्मत करके कहा, “भाभी जी, अगर आपको कोई दिक्कत न हो तो क्या मैं भी आपके साथ वॉकिंग पर चल सकता हूँ?” उन्होंने मुस्कुराते हुए हाँ कर दी।
उसके बाद रोज सुबह हम साथ वॉकिंग करने लगे। बातें बढ़ने लगीं।
मेरा इंटरनशिप का तीसरा हफ्ता चल रहा था तभी मकान मालिक ने मुझसे कहा, “अजय, मैं पंद्रह दिन के लिए टूर पर जा रहा हूँ। भाभी जी को किसी चीज की जरूरत पड़े तो प्लीज लाकर दे देना।”
मैंने तुरंत जवाब दिया, “ठीक है भैया, आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए। मैं सब देख लूँगा।”
अब भाभी के बारे में बता दूँ। उनका नाम कविता है। उम्र करीब बत्तीस साल। फिगर 34-30-36। गोरी चमकदार त्वचा, देखने में एकदम काँटा। इस कहानी में सिर्फ नाम बदले हैं, बाकी सब रियल है।
भैया के जाने के चार दिन बाद एक दोपहर भाभी ने कहा, “अजय, क्या तुम मेरे साथ मार्केट चल सकते हो?”
मैंने झट से हाँ कह दी। उन्होंने पति की बाइक की चाभी मेरे हाथ में थमा दी। हम दोनों BLW मार्केट की तरफ निकले। रास्ते में भीड़ की वजह से बार-बार ब्रेक लगाना पड़ रहा था।
हर ब्रेक पर भाभी के नरम बूब्स मेरी पीठ से रगड़ खा रहे थे। उनकी गर्माहट और मुलायमता से मेरा लंड पजामे में हलचल करने लगा।
मार्केट से सामान लेकर वापस लौटे तो भाभी और भी करीब चिपककर बैठ गईं। उनका एक हाथ मेरे कंधे पर आ गया था। मैंने पूछा, “भाभी जी, कुछ पियेंगी?”
“क्या पिला रहे हो?” उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा।
“चलो जूस पी लेते हैं।”
जूस की दुकान पर बैठे-बैठे मैंने धीरे से पूछा, “भैया आपको इतने दिन अकेला छोड़कर चले जाते हैं… मन कैसे लगता है?”
भाभी थोड़ी उदास हो गईं। “अब उनका काम सिर्फ पैसे कमाना रह गया है। और किसी चीज का ध्यान ही नहीं रहता।”
मैंने समझ लिया कि उनकी जवानी अधूरी रह गई है।
मैंने कहा, “आप टेंशन मत लीजिए भाभी। मैं हूँ ना आपका देवर। किसी भी चीज की जरूरत हो तो बता दीजिएगा।”
भाभी हँस पड़ीं। उनकी आँखों में एक शरारती चमक थी। जूस खत्म करके जब हम बाइक पर बैठे तो भाभी ने इस बार और कसकर मुझे पकड़ लिया। उनकी चूचियाँ मेरी पीठ पर और साफ महसूस हो रही थीं।
घर पहुँचकर भाभी ने मेरा नंबर माँग लिया। रात को व्हाट्सऐप पर उनका मैसेज आया—
“हाय”
मैंने जवाब दिया, “हाँ जी भाभी जी!”
“सोए नहीं क्या?”
“नहीं भाभी… अभी नहीं सोया।”
“किससे बातें कर रहे हो?”
“एक फ्रेंड से।”
“फ्रेंड से या गर्लफ्रेंड से?”
“नहीं भाभी, फ्रेंड से ही।”
“झूठ मत बोलो। आपकी गर्लफ्रेंड नहीं हो, ऐसा हो नहीं सकता।”
“सच भाभी… अभी तक वैसी कोई मिली ही नहीं जैसी मुझे चाहिए।”
“हम्म… कैसी चाहिए?”
मैंने मौका देखकर लिख दिया, “आपकी जैसी मिल जाए।”
भाभी ने जवाब दिया, “आप मजाक अच्छा करते हो।”
“मैं मजाक नहीं कर रहा भाभी… सच कह रहा हूँ।”
“अच्छा… आपको मेरी जैसी चाहिए… मतलब मैं आपको पसंद हूँ?”
मैंने झोंक में लिख दिया, “हाँ जी।”
तभी उन्होंने लिखा, “ठीक है अजय, अभी उनका कॉल आ रहा है… बाद में बात करती हूँ।”
सुबह जाते समय मैंने हैलो किया और पूछा, “भाभी, मार्केट से कुछ लाना है?”
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “जरूरत पड़ेगी तो मैसेज कर दूँगी।”
शाम को सब्जी लाने का मैसेज आया। साथ में लिखा था— “जब तक भैया नहीं हैं, मेरे साथ खाना खा लिया करो।”
मैंने मना किया लेकिन भाभी नहीं मानीं। सब्जी का थैला देकर मैं ऊपर फ्रेश होने चला गया। गर्मी बहुत थी। नहाकर सिर्फ तौलिया लपेटे लेटा था तभी मैसेज आया
“ऊपर अकेले हो? नीचे आ जाओ… अंदर वाले रास्ते से। वो खुला है।”
मैं अंदर के रास्ते से नीचे उतरा। किचन में कविता भाभी लाल मैक्सी में खड़ी थीं। 5 फीट 2 इंच, दूध जैसी गोरी, 34 के भरे बूब्स, पतली कमर और 36 की गोल गांड। मैक्सी शरीर से चिपक रही थी। मेरा लंड तुरंत तन गया।
“बच्चे और सास कहाँ गए भाभी?” मैंने पूछा।
“दोनों बच्चे सास के साथ घूमने गए हैं,” उन्होंने जवाब दिया।
हम बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद भाभी ने सीधा पूछ लिया, “रात को जो तुमने लिखा था… मेरी जैसी चाहिए… वो सब क्या था?”
मैंने उनका मूड भाँप लिया। “हाँ भाभी… आपकी जैसी ही मुझे पसंद है। काश आप मिल जातीं तो मैं कभी कहीं नहीं जाता।”
“ऐसा मेरे में क्या पसंद आ गया?” उन्होंने हँसते हुए पूछा।
“आपका तो सब कुछ… लेकिन सबसे ज्यादा…” मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, “आपके बूब्स।”
भाभी जोर से हँसीं। “उस दिन मार्केट में बार-बार ब्रेक इसलिए मार रहे थे?”
मैं भी हँस पड़ा। उसी जोश में मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और बोला, “आई लव यू भाभी जी।”
भाभी का चेहरा गंभीर हो गया। “अब तुम यहाँ से चले जाओ… ज्यादा हो रहा है तुम्हारा।”
मैं सिर झुकाए ऊपर चला गया। मन में डर और उत्तेजना दोनों थे। थोड़ी देर बाद खाने का मैसेज आया। मैं नीचे गया और सबके साथ खाना खाया। खाना खत्म होने के बाद किचन में जाकर माफी माँगने लगा। भाभी ने तुरंत माफ कर दिया।
मैंने फिर से हिम्मत करके कहा, “भाभी… आप बहुत खूबसूरत हो। आई लव यू कविता।”
इस बार उन्होंने मेरी आँखों में देखा और धीरे से बोलीं, “लव यू टू अजय।”
मैंने उन्हें पकड़ लिया और किस कर दिया। भाभी ने भी पूरा साथ दिया। किस तोड़ते हुए उन्होंने फुसफुसाया, “अजय… अभी सास और बच्चे जाग रहे हैं। काम खत्म होने दो… सब सो जाएँ… फिर जो करना है करना।”
लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। भाभी बर्तन धो रही थीं। मैं पीछे से जाकर चिपक गया। मेरा तना हुआ लंड उनकी गांड के बीच में दब गया। भाभी ने साँस तेज कर ली लेकिन हटी नहीं।
उनके दोनों चूतड़ों की गर्माहट मेरे लंड में सनसनी पैदा कर रही थी।
बर्तन खत्म करके भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा। “चलो… कमरे में चलते हैं।”
हम दोनों उनके बेडरूम में दाखिल हुए। दरवाजा बंद होते ही मैंने भाभी की लाल मैक्सी के नीचे हाथ डाल दिया। उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। एक झटके में मैक्सी ऊपर खिंच गई और उनके सिर के ऊपर से निकल गई।
नीचे कुछ नहीं था। न ब्रा, न पैंटी। कविता भाभी पहली बार मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थीं।
गोरी चमकदार त्वचा। 34 के गोल-मटोल बूब्स जिनके निप्पल पहले से सख्त थे। पतली कमर और नीचे 36 की भारी, गोल गांड। जांघें मुलायम और सफेद। नाभि के नीचे हल्के बालों वाली चूत पहले से थोड़ी गीली चमक रही थी।
मैंने पूछा, “अंदर कुछ नहीं पहना भाभी?”
वे हँस पड़ीं। “वैसे भी तुम सब उतारने वाले थे… तो पहनने का क्या फायदा?”
मैंने उन्हें दीवार से सटाया और जोर से किस करने लगा। उनके रसीले होंठ पहले तो हल्के थे, फिर पूरी तरह खुल गए। जीभ से जीभ लड़ने लगी। मेरे हाथ उनके बूब्स पर थे।
दोनों को मसलते हुए निप्पल मरोड़ रहा था। भाभी की कराहें दबी-दबी निकल रही थीं।
“आह्ह्ह… अजय… धीरे… अह्ह्ह…”
मैं उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। दोनों बूब्स मुँह में लेकर चूसने लगा। कभी एक, कभी दूसरा। दाँतों से हल्के काट भी रहा था। भाभी का शरीर तन रहा था। उनके हाथ मेरे बालों में फँसे थे।
एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी जांघों के बीच रखा। चूत पहले से गीली थी। उंगली आसानी से अंदर चली गई। मैं बूब्स चूसते हुए उंगली अंदर-बाहर करने लगा। क्लिट पर अंगूठे से गोलाकार रगड़ भी रहा था।
“आह्ह्ह… अजय… वहाँ… और… आह्ह्ह… क्या कर रहे हो…”
मैं और नीचे गया। उनकी नाभि पर किस किया तो भाभी उछल पड़ीं। फिर और नीचे। जांघों को फैलाया और जीभ सीधे उनकी चूत पर रख दी।
भाभी की कमर जोर से उछली। “आआह्ह्ह… यश… अह्ह्ह… मर गई… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी चूत के दोनों होंठों को चूसा। फिर क्लिट को मुँह में लेकर जोर से चूसने लगा। जीभ अंदर तक घुसा दी। भाभी खुद मेरे सिर को अपनी चूत पर और जोर से दबाने लगीं। उनकी जांघें मेरे कानों को दबा रही थीं।
कुछ मिनट तक लगातार चाटने के बाद भाभी का शरीर अकड़ गया। उन्होंने मेरे बाल जोर से पकड़ लिए और लंबी कराह के साथ झड़ गईं। उनका पानी मेरी जीभ पर फैल गया। मैंने सब चाट लिया।
भाभी हाँफते हुए बोलीं, “सच में अजय… आज तक इतना मजा नहीं आया…”
मैं ऊपर आया। अपना तौलिया खोला। मेरा 6 इंच का मोटा लंड तना हुआ बाहर आ गया। भाभी ने उसे देखा और आँखें बड़ी कर लीं। मैंने लंड उनके मुँह के पास ले जाकर कहा, “अब तुम भी चूसो भाभी…”
वे थोड़ा झिझकीं। “मैंने… कभी नहीं किया ऐसा… लेकिन आज… जरूर करूँगी।”
उन्होंने लंड हाथ में लिया। पहले नोक को चाटा। फिर धीरे-धीरे मुँह में ले लिया। दाँत न लगने का ख्याल रखते हुए चूसने लगीं। मैंने उनके बाल पकड़ रखे थे लेकिन जोर से नहीं धकेला।
भाभी की लार लंड पर बह रही थी। उनकी कोशिश देखकर मेरा मजा दोगुना हो गया।
“आह्ह्ह… भाभी… ऐसे ही… और गहरा… उफ्फ…”
लगभग पाँच-सात मिनट चूसने के बाद भाभी ने खुद लंड मुँह से निकाला और बोलीं, “अब ज्यादा इंतजार मत करवाओ… मुझे चोद दो… जोर से चोद दो अजय…”
मैंने उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया ताकि चूत थोड़ी ऊपर उठ जाए। लंड का सिरा उनकी गीली चूत पर रखा। आँखों में आँखें डाले धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। भाभी ने साँस रोक ली।
“आह्ह्ह… अंदर… आ रहा है… अह्ह्ह…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी चूत में धकेल दिया। भाभी की चूत गरम और टाइट थी। पूरा अंदर जाते ही दोनों की कराहें एक साथ निकलीं। मैंने रुककर उन्हें साँस लेने का समय दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।
“आह्ह्ह… अजय… मजा आ गया… और जोर से… करो… मेरी जान… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। भाभी की दोनों टांगें मेरे कंधों पर थीं। हर धक्के पर उनके बूब्स उछल रहे थे। मैंने झुककर उनके होंठ चूस लिए। जीभ से जीभ लड़ रही थी। नीचे “छप-छप” की आवाज आने लगी।
भाभी की चूत से पानी निकल रहा था और मेरे लंड पर चिपक रहा था।
करीब दस मिनट लगातार चोदने के बाद भाभी का शरीर फिर से तन गया। उन्होंने मेरे कंधे जोर से दबोच लिए और जोर से कराहते हुए दूसरी बार झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी धक्के मारता रहा।
“भाभी… रस कहाँ डालूँ?” मैंने हाँफते हुए पूछा।
उन्होंने आँखें बंद किए हुए कहा, “अंदर ही छोड़ दो… मुझे अपना प्यार का रस महसूस करना है…”
मैंने आखिरी कई जोरदार धक्के मारे और उनकी चूत की गहराई में ही अपना पूरा गाढ़ा माल उड़ेल दिया। भाभी ने मेरे लंड को और कस लिया। दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए काँप रहे थे।
मैं उनके ऊपर ही गिर पड़ा। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया, “बहुत तगड़ा चोदा है तुमने मुझे… आई लव यू अजय…”
मैंने उनके गाल पर किस करते हुए जवाब दिया, “लव यू टू कविता… डार्लिंग…”
थोड़ी देर हम वैसे ही लेते रहे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में था। धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा था। भाभी ने महसूस किया और मुस्कुराते हुए बोलीं, “फिर से…?”
मैंने सिर हिलाया। इस बार मैंने उन्हें कुतिया की पोजीशन में कर दिया। पीछे से लंड उनकी चूत में डालकर जोर-जोर से पेलने लगा। भाभी की मोटी गांड मेरे पेट से टकरा-टकरा कर लहरा रही थी। मैंने गांड पर थप्पड़ मारे।
“आह्ह्ह… अजय… और मारो… गांड पर… आह्ह्ह… जोर से चोदो…”
मैंने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेजी से धक्के लगाने लगा। भाभी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं। गाली भी देने लगीं।
“चोदो… हरामी… अपनी भाभी को चोदो… आह्ह्ह… लंड बहुत मस्त है तेरा…”
दूसरे राउंड में भी भाभी झड़ गईं। मैंने फिर से उनकी चूत में ही माल छोड़ दिया। इस बार और ज्यादा। बाहर तक बहने लगा।
हम दोनों पसीने से तरबतर थे। कमरे में सेक्स की तेज गंध फैली हुई थी। बाहर घर में सन्नाटा था। बच्चे और सास सो चुके थे।
भाभी ने मेरे सीने पर सिर रखकर कहा, “आज रात यहीं रहो… सुबह पहले उठकर ऊपर चले जाना।”
मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया। रात अभी लंबी थी। और कई राउंड बाकी थे।
उस रात हमने तीन और राउंड किए। कभी मैं ऊपर, कभी भाभी ऊपर बैठकर।
एक बार मैंने उन्हें गोद में उठाया और दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। भाभी के नाखून मेरी पीठ पर लकीरें बना गए। हर राउंड में वो जोर-जोर से कराहतीं और अंदर ही माल लेने को कहतीं।
सुबह चार बजे के आसपास मैंने धीरे से उनके शरीर से अपने को अलग किया। भाभी आधी नींद में थीं। मैंने उनके माथे पर किस किया, कपड़े पहने और अंदर वाले रास्ते से चुपके से ऊपर अपने कमरे में चला गया। शरीर में थकान थी लेकिन मन हल्का था।
अगले दिन से हमारा सिलसिला नियमित हो गया। सुबह वॉकिंग पर मिलते तो आँखों से ही बात हो जाती। दिन में मौका मिलते ही भाभी मैसेज करतीं— “अंदर वाले रास्ते से आ जाओ… अकेली हूँ।”
कभी किचन में बर्तन धोते समय पीछे से पकड़ लेता। मैक्सी ऊपर करके उनकी गांड सहलाता। कभी हॉल में सोफे पर। एक दोपहर जब बच्चे स्कूल गए और सास सो रही थीं, तो हम बालकनी में चोदने लगे।
भाभी की पीठ बालकनी की रेलिंग से लगी थी। मैंने उनके पैर फैलाए और खड़े-खड़े ही लंड अंदर कर दिया। बाहर सड़क पर लोग आ-जा रहे थे। भाभी मुँह दबाकर कराह रही थीं।
“आह्ह्ह… अजय… कोई देख लेगा… अह्ह्ह… लेकिन मत रुक… चोदो…”
बाथरूम में भी कई बार किया। नहाते समय भाभी अंदर बुला लेतीं। गीले शरीर पर साबुन लगाते-लगाते बात सेक्स तक पहुँच जाती। दीवार से सटाकर, या फिर भाभी सिंक पकड़कर कुतिया बन जातीं। पानी की धार के नीचे उनकी चीखें दब जातीं।
एक रात जब सब गहरी नींद में थे, भाभी मेरे कमरे में आ गईं। दरवाजा बंद करते ही उन्होंने खुद अपने कपड़े उतार दिए। इस बार उनकी आँखों में एक अलग सी भूख थी।
“आज… कुछ नया करना है,” उन्होंने धीरे से कहा।
मैं समझ गया। मैंने उन्हें बेड पर पेट के बल लिटाया। गांड के दोनों हिस्सों को फैलाया। पहले जीभ से उनके छेद को गीला किया। भाभी सिसक रही थीं। फिर उंगली डाली। धीरे-धीरे दो उंगलियाँ।
जब काफी नरम लगने लगा तो मैंने लंड पर थूक लगाकर नोक उनके छेद पर रखी।
“आह्ह्ह… अजय… धीरे… पहली बार है… दर्द होगा…”
मैंने धीरे लेकिन लगातार दबाव दिया। नोक अंदर गई। भाभी ने तकिया मुँह में दबा लिया। आधा लंड समाते-समाते उनकी आँखों से आँसू आ गए। मैं रुका। उनकी कमर सहलाई। फिर बाकी हिस्सा भी धीरे-धीरे अंदर कर दिया।
पूरा लंड उनकी गांड में था। भाभी का शरीर काँप रहा था। मैंने बिना हिले कुछ पल रखा। फिर बहुत धीमी गति से हिलाना शुरू किया।
“आह्ह्ह… अंदर… लग रहा है… दर्द… लेकिन… मत निकाल… आह्ह्ह…”
धीरे-धीरे दर्द मजे में बदलने लगा। भाभी खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगीं। मैंने स्पीड बढ़ा दी। एक हाथ से उनके बाल पकड़े, दूसरे से बूब्स मसले।
“चोदो… अजय… अपनी भाभी की गांड चोदो… जोर से… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए और तेज कर दिया। करीब दस-बारह मिनट बाद भाभी जोर से झड़ गईं। उनकी गांड ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी खुद को रोक न सका।
उनकी गांड की गहराई में ही अपना माल छोड़ दिया।
भाभी हाँफते हुए बोलीं, “आज… सच में… पूरा ले लिया तुमने…”
उस रात के बाद गांड वाली बात भी नियमित हो गई। कभी चूत, कभी गांड, कभी दोनों बारी-बारी से। फ्लैट का कोई कोना ऐसा नहीं बचा जहाँ हमने सेक्स न किया हो।
बेड, फर्श, सोफा, बालकनी, बाथरूम, किचन का काउंटर… हर जगह हमारे पसीने और वीर्य की महक रह गई थी।
भैया के आने में दो दिन बाकी थे जब आखिरी रात हमने लगभग सुबह तक चोदा। भाभी मेरे सीने पर लेटी हुई थीं। उंगलियों से मेरे लंड को खेल रही थीं।
“तुम चले जाओगे तो क्या होगा अजय…” उनकी आवाज में उदासी थी।
मैंने उनके बाल सहलाते हुए कहा, “नंबर तो है। जब भी मौका मिलेगा… मिल लेंगे।”
भैया आ गए। घर में सामान्य माहौल हो गया। मैंने दो दिन बाद कमरा छोड़ दिया क्योंकि इंटरनशिप खत्म हो चुकी थी और कॉलेज खुलने वाला था। जाते समय भाभी से सिर्फ आँखें मिलीं। दोनों ने कुछ नहीं कहा।
अब लगभग दो हफ्ते हो गए हैं। मैं वापस कॉलेज आ चुका हूँ। लेकिन कविता भाभी जब भी मौका पाती हैं तो फोन कर देती हैं। कभी रात को देर से वीडियो कॉल आती है।
कभी सिर्फ गंदी बातें करके दोनों मस्त कर लेते हैं। कभी प्लान बनाते हैं कि अगली छुट्टियों में बनारस आकर मिलेंगे।
दोस्तों, ये मेरी रियल हॉट भाभी स्टोरी है। मकान मालकिन को कैसे दोस्त बनाया, फिर प्रेमिका और फिर सेक्स पार्टनर… सब कुछ रियल है।
अगर Feedback मे अगले कुछ दिनों के चुदाई का और कविता भाभी की गांड मारने का story की डिमांड आयी तो आगे की स्टोरी जरूर शेयर करूँगा। दोस्तो, ये मेरी रीयल हॉट भाभी Xxx स्टोरी है. आपको कैसी लगी, मुझे मेल जरूर करें।
मेल पर भी लिख सकते हो: engineermeandhottii@gmail.com
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