दोस्त ने खेत में दिलाई दो मुस्लिम भाभी की चुत
Antarvasna Sex Story : गाँव में दो मुस्लिम भाभी की भूखी चुत मिली! फिर खेत में एक साथ थप्पड़ मारकर चोदा दोनों की मोटी गांड़! चुत में बीज डलवा कर हुई Pregnent!
मेरा नाम राहुल है। उम्र पच्चीस साल। गाँव का लड़का, कद पाँच फुट चार इंच, रंग साफ और शरीर थोड़ा पतला लेकिन फुर्तीला। हमारे गाँव में मर्दों की संख्या बहुत कम थी।
ज्यादातर भाभियों के पति शहर में कमाने चले जाते थे। सुबह-शाम औरतें खेतों में शौच करने जाती थीं और यही हमारे लिए सबसे बड़ा मजे का स्रोत बन गया था।
मेरे पाँच दोस्त थे — विक्रम, सुरेश, राजेश और अमित। हम पाँचों रोज सुबह खेतों के किनारे छुपकर बैठ जाते। गन्ने की फसल घनी थी, इसलिए आसानी से छुप जाते थे।
औरतें जब शौच करने आतीं तो हम उनकी गांडें, चूतें और टट्टी निकलते देखते।
फिर जब वो चली जातीं तो हम उस जगह पर जाकर उनकी टट्टी सूँघते, छूते और आपस में चर्चा करते कि किसकी टट्टी ज्यादा गाढ़ी थी, किसने क्या खाया होगा।
राजेश अक्सर कहता, “यार आज शिल्पा भाभी ने बहुत मोटी टट्टी निकाली है।” सुरेश हँसते हुए उस पर पेशाब कर देता। विक्रम अपनी माँ की टट्टी देखकर मुठ मारने की बात करता।
मैं भी चुपचाप देखता और मन में सोचता — ये औरतें कितनी बेफिक्र होकर सब कुछ खुलेआम कर रही हैं। धीरे-धीरे मुझे देसी औरतों की मोटी-मोटी गांडें और काली-काली चूतें पसंद आने लगीं।
मानसून के दिनों में बारिश के बाद खेत और भी हरे हो जाते। एक शाम हम पाँचों गन्ने के खेत में बैठे थे।
विक्रम ने कहा, “यार अब तो बहुत दिन हो गए किसी चूत पर हाथ नहीं लगा। बस देखते रह जाते हैं।” राजेश बोला, “घर की चूतें भी तो हैं।”
सुरेश ने आँखें चमकाते हुए कहा, “मैं तो कई महीनों से अपनी माँ को माली बृजेश के साथ चुदवाते देख रहा हूँ। रात को खिड़की से देखता हूँ।
माँ चीखती है - ‘आह्ह्ह… बृजेश… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दे…’ और वो माँ की मोटी गांड पर थप्पड़ मारता है।”
हम सब चुप हो गए। फिर राजेश बोला, “मेरी माँ और दीदी दोनों किसी और से चुदवा रही हैं। एक बार मैंने दोनों को एक साथ चुदवाते देखा था। दीदी चीख रही थी — ‘आह्ह्ह… माँ… ये लंड बहुत मोटा है…’”
अमित ने कहा, “मैंने अपनी चाची को चोदते देखा है। चाची की चूत काली और बालों से भरी हुई है। पापा जब चोदते हैं तो चाची ‘उफ्फ… आह्ह्ह… धीरे… फट जाएगी…’ बोलती रहती है।”
आखिर में मेरी बारी आई। मैंने धीरे से कहा, “मैंने अपने चाचा को मेरी माँ को चोदते देखा है। माँ की गांड बहुत बड़ी है। चाचा जब पीछे से मारते हैं तो माँ ‘आह्ह्ह… ससुर जी… और गहरा…’ चिल्लाती है।”
हम सबकी साँसें तेज हो गई थीं। किसी ने कुछ नहीं बोला। बस एक-एक करके मुठ मार ली और चुपचाप घर चले गए।
कुछ दिनों बाद नामित (जिसका नाम अब सुरेश रखा है) के चाचा की दुर्घटना में मौत हो गई।
सुरेश बहुत टूटा हुआ था। एक शाम वो हमसे मिलने आया। आँखें लाल थीं। बोला, “यार अब मेरी चाची को कैसे देखूँ? वो अकेली रह गई है।”
मैंने सोचा और धीरे से कहा, “एक रास्ता है… अगर तू मान जाए तो अपनी चाची को चोद ले।”
सब हैरान होकर मुझे देखने लगे।
मैंने आगे कहा, “देख, तेरी चाची विधवा हो गई है। रोज सुबह खेत में आएगी। जब वो औरतों को चुदवाते देखेगी तो खुद भी चुदवाने का मन करेगा। तू धीरे-धीरे उसके पास जा। पहले बातें कर, फिर छूना, फिर चूमना… और एक दिन चोद देना।”
सुरेश की आँखों में चमक आ गई। उसने सिर हिलाया।
उसके बाद हमारे गाँव में कुछ बदलाव आने लगा। सुरेश ने सच में अपनी चाची को चोदना शुरू कर दिया। वो रोज सुबह खेत में उसका इंतजार करता और धीरे-धीरे उसे बहला-फुसला कर चोदता।
चाची पहले तो मना करती, फिर धीरे-धीरे ‘आह्ह्ह… ये गलत है बेटा…’ बोलते हुए भी गांड उठाने लगी।
मैं भी अकेला नहीं रहना चाहता था। गाँव में कई भाभियाँ थीं जिनके पति बाहर थे। मैंने एक-एक करके उनसे दोस्ती बढ़ानी शुरू की।
पहले नमस्ते-सलाम, फिर छोटी-मोटी मदद - पानी भरना, खेत में काम करना। धीरे-धीरे भाभियाँ मुझसे खुलने लगीं।
एक दिन मैंने दो मुस्लिम भाभियों — सलमा और रुखसाना — को खेत में किसी से चुदवाते देखा। सलमा विधवा थी, उम्र करीब पैंतीस, मोटी गांड और भारी छातियाँ। रुखसाना के चार बच्चे थे, पति दिल्ली में था। दोनों की चूतें काली और बालों से भरी हुई थीं।
अमित मेरे सबसे करीबी दोस्तों में से एक था। एक शाम वो मेरे पास आया और बोला, “यार राहुल, मेरे पास दो भाभियाँ हैं… सलमा और रुखसाना। दोनों चुदवाने को तैयार हैं। तू मदद करेगा?”
मैंने पूछा, “कैसे?”
अमित मुस्कुराया, “दोनों को खेत में ले जा रहे हैं। तू भी आ जा।”
मैं तैयार हो गया।
जब हम तीनों गन्ने के खेत में पहुंचे तो सूरज ढल चुका था। हल्की अंधेरा छा रहा था। अमित आगे-आगे चल रहा था। उसके पीछे सलमा और रुखसाना चुपचाप चल रही थीं।
सलमा ने हरा टाइट सूट पहना हुआ था, बाल खुले थे। रुखसाना नाइटी में थी, जिसके नीचे से उसकी मोटी गांड साफ दिख रही थी।
खेत के बीचों-बीच एक घनी जगह पर हम रुक गए। अमित बोला, “यार राहुल, ये दोनों भाभी हैं। सलमा विधवा है और रुखसाना का पति दिल्ली में है। दोनों को चुदवाने का शौक है।”
सलमा ने मुझे देखा और थोड़ा शरमा गई। रुखसाना की नजरें नीचे थीं। मैंने धीरे से कहा, “डरने की कोई बात नहीं। हम सब यहीं अकेले हैं।”
पहले कुछ देर हम चुपचाप बैठे रहे। हवा में गन्ने की महक थी। मैंने सलमा की तरफ देखा और कहा, “तुम्हारा सूट बहुत अच्छा लग रहा है।” सलमा मुस्कुराई लेकिन कुछ बोली नहीं।
रुखसाना ने कहा, “हम दोनों को बहुत दिनों से कोई छुआ भी नहीं।”
मैंने धीरे से सलमा का हाथ पकड़ा। उसका हाथ गर्म था। मैंने उंगली से उसके हाथ पर हल्का सा घुमाया। सलमा ने सांस ली लेकिन हाथ नहीं छुड़ाया। रुखसाना मुझे देख रही थी।
मैंने रुखसाना की तरफ झुककर कहा, “तुम्हारी नाइटी के नीचे क्या छुपा है?” रुखसाना शरमा गई। “देख लो…” वो धीरे से बोली।
मैंने उसके नाइटी को धीरे से ऊपर किया। उसके मोटे-मोटे सफेद जांघ दिखने लगे। रुखसाना की सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके घुटने पर हाथ रखा और ऊपर की तरफ सरकाया। उसकी त्वचा नरम और गर्म थी।
सलमा अब मेरी तरफ देख रही थी। मैंने उसका चेहरा अपनी हथेली में लिया और धीरे से उसके होंठों पर किस किया। सलमा ने पहले तो आँखें बंद कर लीं, फिर धीरे से मेरे होंठों को चूसने लगी। उसकी सांस गर्म थी।
रुखसाना ने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया। मैंने सलमा को चूमते हुए रुखसाना की नाइटी और ऊपर खींची। उसके नीचे कुछ नहीं था। उसकी चूत के आसपास घने काले बाल थे।
मैंने उंगली से उसके चूत के होठों को छुआ।
रुखसाना काँप गई। “आह्ह्ह…” एक हल्की सी आवाज उसके मुंह से निकली।
मैंने सलमा को पीठ के बल लिटा दिया। उसके सूट के ऊपर से ही उसके भारी स्तनों को दबाने लगा। सलमा की आँखें बंद थीं। “उफ्फ… राहुल…” वो फुसफुसाई।
मैंने उसके सूट को ऊपर खींचा और ब्रा के ऊपर से उसके निप्पलों को उंगली से घुमाया। सलमा की सांसें अब और तेज हो गई थीं।
रुखसाना अब मेरे पास आ गई। उसने खुद मेरी पैंट का बटन खोला और लंड बाहर निकाल लिया। मेरा लंड पहले से खड़ा था। रुखसाना ने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।
“बहुत गर्म है…” वो बोली।
मैंने सलमा की ब्रा उतार दी। उसके स्तन बाहर आ गए — भारी, नरम और निप्पल काले। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। सलमा का शरीर काँप उठा। “आह्ह्ह… चूसो… और जोर से…” वो चीखी।
मैंने उसके निप्पल को जीभ से चाटा और हल्का सा काट लिया। सलमा ने मेरे बाल पकड़ लिए।
रुखसाना अब मेरे लंड को मुंह में ले चुकी थी। वो धीरे-धीरे चूस रही थी। उसकी गर्म सांस और गीली जीभ से मेरा लंड और सख्त हो रहा था। “आह्ह्ह… रुखसाना…” मैंने कहा। वो और गहरा लेने लगी।
सलमा अब पूरी तरह खुल चुकी थी। मैंने उसके सूट की पायजामी उतार दी। उसकी चूत घने बालों से ढकी हुई थी। मैंने उंगली से उसके चूत के होठों को अलग किया। अंदर से गुलाबी और गीली थी।
मैंने जीभ से उसके चूत पर एक लंबा चाटा मारा। सलमा चीख पड़ी — “आह्ह्ह्ह… क्या कर रहे हो… उफ्फ… जीभ मत चलाओ…” लेकिन उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया।
मैंने उसकी चूत चाटते हुए रुखसाना के बाल पकड़कर उसके मुंह में लंड और जोर से ठोकने लगा। रुखसाना का मुंह भर रहा था लेकिन वो रुकी नहीं।
कुछ देर बाद मैंने सलमा को घुटनों के बल करवाया। उसकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने उसके चूत में उंगली डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। सलमा की गांड हिल रही थी।
“आह्ह्ह… राहुल… उंगली मत निकालो… और गहरी… आह्ह्ह…”
रुखसाना अब मेरे पीछे आ गई। उसने मेरी गांड पर हाथ फेरा और मेरे कान में फुसफुसाया, “अब इसे इसकी चूत में डाल दो…”
मैंने सलमा की चूत पर लंड रखा और सुपाड़े से हल्का सा रगड़ने लगा। सलमा तड़प रही थी। “डाल दो… अब और मत तड़पाओ…” वो बोली।
मैंने धीरे से सुपाड़ा अंदर डाला। सलमा की चूत टाइट थी। “आह्ह्ह्ह… धीरे… फट जाएगी…” वो चीखी। मैंने रुककर उसे सहलाया। फिर धीरे-धीरे और अंदर घुसाया। सलमा की सांस रुक गई।
जब आधा लंड अंदर चला गया तो सलमा खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगी।
“अब पूरा डाल दो… आह्ह्ह…”
मैंने एक जोरदार झटका मारा। सलमा चीख पड़ी — “आह्ह्ह्ह्ह… मार डाला… उफ्फ… राहुल…” लेकिन उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैंने धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की।
सलमा अब आहें भर रही थी — “आह्ह्ह… और… और जोर से… चोदो मुझे…”
रुखसाना मेरे पास बैठी हुई सब देख रही थी। उसने अपनी चूत पर हाथ रख लिया था और उंगली डालकर खुद को सहला रही थी।
मैंने सलमा की गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह!” सलमा चीखी। “और मार… अपनी भाभी की गांड़ लाल कर दे…”
मैंने और तेज होकर चोदना शुरू कर दिया। सलमा की चूत से “फच… फच…” की आवाज आ रही थी। वो बार-बार “आह्ह्ह… चोद… अपनी भाभी को… आह्ह्ह…” बोल रही थी।
कुछ देर बाद सलमा का शरीर अकड़ गया। “आह्ह्ह्ह… आ रहा है… आह्ह्ह…” वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
मैंने लंड बाहर निकाला और रुखसाना को लिटा दिया। अब रुखसाना की बारी थी…
रुखसाना को पीठ के बल लिटाते ही मैं उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी नाइटी पूरी तरह खुली हुई थी। उसके भारी-भारी स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने उसके एक स्तन को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। रुखसाना की आँखें बंद हो गईं।
“आह्ह्ह… राहुल… चूस… और जोर से चूस…” वो फुसफुसाई।
मैंने उसके निप्पल को दांतों से हल्का सा काटा। रुखसाना का शरीर काँप उठा। “उफ्फ… दर्द हो रहा है… लेकिन मत छोड़…”
सलमा अब मेरे बगल में बैठ गई थी। उसने मेरी पीठ पर हाथ फेरा और धीरे से मेरे कान में कहा, “इसे भी वैसा ही चोद जैसे मुझे चोदा।”
मैंने रुखसाना की टांगें खोलीं। उसकी चूत घने काले बालों से ढकी थी। मैंने उंगली से उसके चूत के होठों को अलग किया। अंदर से वो पहले से ही गीली हो चुकी थी।
मैंने सुपाड़े से उसके चूत पर हल्का सा रगड़ा। रुखसाना ने कमर ऊपर उठा दी।
“डाल दो… अब और मत सताओ…” वो बोली।
मैंने धीरे से लंड का सुपाड़ा उसके चूत के छेद पर रखा और हल्का सा दबाया। रुखसाना की सांस रुक गई। “आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है…”
मैंने रुककर उसे सहलाया। फिर धीरे-धीरे और अंदर घुसाया। रुखसाना की चूत टाइट थी। जब आधा लंड अंदर चला गया तो उसने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। “आह्ह्ह्ह… फट रही है… उफ्फ…”
मैंने फिर रुककर उसके स्तनों को चूसा। रुखसाना की सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं। “अब पूरा… डाल दो… आह्ह्ह…”
मैंने एक जोरदार झटका मारा। मेरा पूरा लंड उसके अंदर घुस गया। रुखसाना चीख पड़ी — “आह्ह्हhhhh… मार डाला रे… आह्ह्ह…” लेकिन उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
मैंने धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। रुखसाना अब आहें भर रही थी — “आह्ह्ह… और… और गहरा… चोद… अपनी भाभी को…”
सलमा मेरे पास बैठी हुई सब देख रही थी। उसने अपना एक हाथ रुखसाना के स्तन पर रख दिया और निप्पल को मसलने लगी। रुखसाना ने आँखें खोलीं और सलमा को देखा। दोनों ने एक-दूसरे को देखते हुए मुस्कुराया।
मैंने रुखसाना की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और तेज होकर चोदने लगा। “फच… फच…” की आवाज खेत में गूंज रही थी। रुखसाना की मोटी गांड नीचे से हिल रही थी।
“आह्ह्ह… राहुल… तेरे लंड से मेरी चूत फट रही है… उफ्फ… और जोर से… हाँ… ऐसे ही…” वो चिल्ला रही थी।
सलमा ने अब रुखसाना के मुंह पर अपना स्तन रख दिया। रुखसाना ने सलमा का निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगी। सलमा की सांसें भी तेज हो गईं। “आह्ह्ह… चूस… मेरे स्तन चूस…”
मैंने रुखसाना की गांड पर दो जोरदार थप्पड़ मारे। “आह्ह्ह!” रुखसाना चीखी। “और मार… अपनी भाभी की गांड़ लाल कर दे…”
मैंने और तेज स्पीड से चोदना शुरू कर दिया। रुखसाना का शरीर पसीने से तर हो चुका था। उसकी चूत से चिपचिपी आवाज आ रही थी।
“आह्ह्ह… आ रहा है… आह्ह्ह… राहुल… मैं झड़ने वाली हूँ…” रुखसाना चीखी।
उसका शरीर अकड़ गया और वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैंने स्पीड और बढ़ा दी।
सलमा ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरे कान में फुसफुसाया, “अंदर ही छोड़ दे… इसे भी गर्भवती कर दे…”
मैंने रुखसाना की टांगें और ऊपर कीं और जोर-जोर से चोदने लगा। “आह्ह्ह… साली… तेरी चूत बहुत गर्म है… आज तेरी चूत में अपना माल भर दूंगा…”
रुखसाना अब बिल्कुल पागल हो चुकी थी। “हाँ… अंदर छोड़… अपनी भाभी की चूत भर दे… आह्हhhhh…”
मैंने आखिरी जोरदार झटके मारे और उसके अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य की फुहारें रुखसाना की चूत में भर गईं। रुखसाना की आँखें बंद थीं। “आह्ह्ह… भर गया… उफ्फ…”
मैं थककर रुखसाना के ऊपर गिर पड़ा। मेरा लंड अभी भी उसके अंदर था।
सलमा ने मुझे उठाया और खुद मेरे नीचे लेट गई। “अब मेरी बारी…” वो बोली।
मैंने सलमा को घुटनों के बल करवाया। उसकी बड़ी-बड़ी गांड मेरे सामने थी। मैंने उसके चूत में उंगली डाली — वो अभी भी गीली थी।
“पीछे से मार… गांड़ मार…” सलमा बोली।
मैंने उसकी गांड़ पर थप्पड़ मारा और लंड उसके चूत में डाल दिया। सलमा ने सिर पीछे झुकाया। “आह्ह्ह… राहुल… फिर से चोद…”
मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। सलमा की गांड़ हिल रही थी। रुखसाना अब उठ बैठी थी और सलमा के स्तनों को चूस रही थी।
“आह्ह्ह… दोनों मिलकर मुझे चोदो… आह्ह्ह…” सलमा चीख रही थी।
मैंने सलमा की गांड़ पर लगातार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। सलमा की चूत से “छप… छप…” की आवाज आ रही थी।
रुखसाना ने सलमा के बाल पकड़कर उसके मुंह में अपना स्तन ठूंस दिया। सलमा चूस रही थी और मैं पीछे से उसकी चूत फाड़ रहा था।
कुछ देर बाद सलमा भी जोर से झड़ गई। “आह्ह्हhhhh… भर गया… आह्ह्ह…”
मैंने लंड बाहर निकाला और दोनों भाभियों को एक साथ लिटा दिया। दोनों की चूतें मेरे वीर्य से भीग चुकी थीं।
रुखसाना ने मेरे लंड को हाथ में लिया और धीरे से हिलाने लगी। “अभी और है…” वो मुस्कुराते हुए बोली।
सलमा ने मेरे कान में फुसफुसाया, “अगली बार हम दोनों को एक साथ चोदना… और अंदर ही छोड़ना…”
मैंने दोनों को कसकर पकड़ लिया। खेत में सिर्फ हम तीनों की सांसें और हल्की हवा की आवाज थी।
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