अंधी भाभी की देवर ने फाड़ी चूत!
Bhabhi Ki Chudai : देवर ने आंधी भाभी को कुतिया बनाकर जोरो से चोदा! भाभी चिल्लाई- “हां देवर जी… चोद अपनी रंडी भाभी को! मारो गांड! डाल दो चूत में पानी!”
हैलो दोस्तों कैसे है आप लोगो के मिज़ाज, मेरा नाम अशोक है और मैं मुंबई का रहने वाला हूं। आज मैं आपके लिए एक बेहद कामुक और चालाकी भरी कहानी लेकर आया हूं।
जो मेरी जिंदगी के उस पल की है जब मैंने अपनी भाभी राधिका की चूत को चालाकी से चोद डाला था।
पहले मैं आप लोगो को राधिका भाभी के बारे में बता देता हूं , राधिका भाभी की तो बात ही कुछ और ही है – वो 32 साल की उम्र वाली भरी जवानी वाले यौवन की औरत है।
उसकी स्किन दूध सी गोरी चिट है, उनके दिल की हिफाजत करते मोटे-मोटे बोबे जो 36 के आसपास होंगे जो हमेशा मुझे छेड़ते है, उनकी कसी हुई कमर है और ऐसी उठी हुई गांड है की देखते ही लंड खड़ा हो जाए।
भाभी की चूत तो बिल्कुल चिकनी और गुलाबी है, जैसे किसी ने रसीले फल की तरह तराशी गई हो।
भाभी का पति, मेरा बड़ा भाई अलोक, एक मल्टीनेशनल कंपनी में हाई-पोस्ट पर है, लेकिन वो अक्सर बाहर घूमता रहता है। घर में तो बस मैं, भाई-भाभी और मां-पापा रहते है।
दिन तो मेरा वैसा ही गुजरता है जैसा मेरी उमर के लड़कों का हमेशा से गुजरता आया है, अपना हाथ जगन्नाथ , लेकिन रातें अकेले कटती हैं, और भाभी की वो सेक्सी अदाएं... आह, सोचते ही लंड सरकता है।
ये कहानी उस समय की है जब मैं कॉलेज में फाइनल ईयर का स्टूडेंट था, और भाई-भाभी की शादी को अभी दो साल ही हुए थे।
मेरी भाभी राधिका घर संभालती थीं, लेकिन उनकी आंखों में हमेशा एक बेचैनी रहती थी।
मैं जनता था की मेरे अलोक भाई सेक्स के मामले में ठंडे थे क्योंकी उनकी एक गर्ल फ्रेंड ने इसी कारण उनसे ब्रेक अप कर लिया था– अभी भी वो हफ्ते में एक-दो बार ही रात को भाभी की चुदाई करते थे, उसमें भी वो जल्दबाजी में निपट कर सो जाते थे।
मैंने कई बार सुना था भाभी की सिसकारियां लेती तो थी मगर वो बस ऐसी आहे होती, जो रुक-रुक कर आतीं और फिर दबकर रह जातीं थी। मुझे पता था की भाभी की चूत को असली मजा नहीं मिल रहा है।
मैं तो रोज रात को भाभी के नाम पर मुठ मारता जिस वजह से मेरा लंड रोज़ उनको याद करके आंसू बहता रहता था। मैं कल्पना करता की मैं उनकी गोरी चूचियां चूस रहा हूं, उनकी चिकनी भोसड़ी में लंड घुसा रहा हूं।
हाय मेरी राधिका भाभी, तेरी चूत तो मेरा लंड खाएगी एक दिन! कभी कभी मैं भाभी की घर के कामों में मदद कर दिया करता था।
भाभी की आदत थी जब भी वो कपड़े धोती तो साड़ी को जांघों तक उठाती थी, मैं भी जानकर उनके सामने ही बैठकर उनकी मदद करता था।
मेरी भाभी वैसे तो घरेलू है मगर थोड़ी सीधी है, उनकी पैंटी में छुपी चूत की लकीरें मुझे उकसाती थी।
कोई कोई दिन तो वो बिना पैंटी के काम कर रही होती थी ऐसे समय मेरा बैठना मुश्किल हो जाता था मगर हुं तो मैं लन्ड वाला ही दर्द सेहत लेकिन आंखे पूरी सेकता था।
खैर अब असली बात पर आते है ये रात ठीक 2 बजे की बात है। वो गर्मी का मौसम था और मुझे नींद में प्यास लगी। मेरी आंख खुली तो पानी लेने बिस्तर से उठा। बाहर पूरे घर में सन्नाटा था। मां-पापा नीचे सो रहे थे, भाई-भाभी का कमरा ऊपर था।
मैं किचन में पानी लेने के लिए गया तो सीढ़ियां चढ़ते हुए अचानक एक आवाज सुनाई दी।
आह... उफ्फ...ओंह्ह्ह! ऐसी चुदाई भरी सिसकारियां मैं पहचानता था , जो सीधे भाई के कमरे से आ रही थीं। मेरा दिल धक्-धक् तब भी करने लगा। मेरा लंड भाभी की मोहक आवाज़ सुनकर झट से खड़ा हो गया।
मैं आवाज़ सुनकर रुक गया और धीरे से भाई के कमरे की खिड़की की तरफ बढ़ा।
खिड़की का पर्दा थोड़ा सा खुला था, और अंदर हल्की लाइट जल रही थी – शायद नाइट लैंप था। मैंने सांस रोकी और अंदर झांकने लगा। दोस्तों! वो नजारा देखकर तो मेरी सारी हड्डियां लंड की तरह कड़ी होने लगीं!
भाभी राधिका बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थीं। उनकी आंखों पर काली पट्टी बंधी थी – जैसे कोई आंखमिचौली का गेम चल रहा हो। उनके मोटे गोरे बोबे ऊपर-नीचे हो रहे थे, काले निप्पल तने हुए मुझे उकसा रहे थे जैसे चूसने को बुला रहे हों।
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वो टांगें फैलाई हुईं और भाई अलोक उनके ऊपर चढ़ा हुआ था। मेरे भाई का लंड – जो मेरा जितना ही मोटा था – भाभी की चिकनी चूत में पूरी तरह घुसा हुआ था वो आगाह! हाआअ! ओह आलोक आगाह! बडबडा रही थी ।
भाभी की भोसड़ी चमक रही थी पसीने और चूत के रस से। भाई जोर-जोर से धक्के मार रहे थे, और भाभी आहें भर रही थीं – "आह अलोक... उफ्फ... और जोर से चोदो मुझे... हाय मेरी चूत फाड़ दो... कितने दिन हो गए, साले आआह!"
भाभी की आवाज में भूख थी, जैसे कोई कुतिया महीनों से लंड के लिए तड़प रही हो। भाई ने उनके बोबे पकड़े और निप्पल काटकर चूसने लगे, तो भाभी की कमर उछल पड़ी।
"हां...ओंह्ह्ह! चूसो मेरे दूध... आह मादरचोद... तेरी बीवी की चूत तेरे लंड के लिए बनी है अआआह!"मैं तो बस अब खिड़की पर चिपक गया, अपने हाथ में लंड पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
भाभी की वो गोरी चूत, जो बाल-रहित चिकनी थी, भाई के लंड को अंदर तक निगल रही थी। हर धक्के के साथ चूत के होंठ फैल जाते और रस टपकता दिखने लगता।
फिर भाई ने भाभी को डॉगी स्टाइल में कर दिया – भाभी की उठी गांड ऊपर थी, और भाई पीछे से लंड पेल रहे थे। "रंडी साली... तेरी गांड कितनी टाइट है... आह चोदूंगा तुझे रात भर अआज ओहद्ह!" भाई की गालियां सुनकर भाभी और गर्म हो गईं –
वो बोलने लगी "हां चोदो... फाड़ दो मेरी गांड... उफ्फ अलोक...अआआह! मेरी जान ओहद्ह! मैं तेरी रंडी हूं तेरी आआह!" मैं तो पागल हो रहा था।
मेरा लंड इतना सख्त हो गया की अब दर्द होने लगा। मैने सोचा, काश मैं भाई की जगह होता!
तभी अचानक बाहर मैन दरवाजे पर शोर हुआ।
"अलोक! अलोक भाई! खोल ना दरवाजा, हम आ गए!" ये भाई के दोस्तों की आवाज थी – तीन-चार लड़के, जो शायद पार्टी से लौटे थे और भाई को बुलाने आए। अलोक भाई अचानक चौंके फिर बोले—
"अरे यार, अभी तो...मज़ा आना शुरू हुआ था, ठीक है, आता हूं!" वो जल्दी से लंड बाहर निकाला – लंड भी उफान पर था तो भाभी की चूत से खिंचाव के साथ निकला, और रस की धार भाभी की टांगे पर टपकी।
भाभी अभी भी आहें भर रही थीं, अभी भी उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी।
भाई ने जल्दी से शर्ट पहनी, पैंट ठीक की और बोले, "राधु, तू यूं ही लेटी रह... मैं अभी आता हूं, दोस्तों से बात करके। पट्टी मत खोलना, सरप्राइज है तेरे लिए!" भाभी ने एक लंबी सिसकारी ली फिर बोली—
"जल्दी आना अलोक... हमममम! मेरी चूत तड़प रही है... आह!" भाई हंस पड़े और बाहर चले गए, मगर कमरे का दरवाजा लॉक करना भूल गए।
मैं एक तरफ छुपा खड़ा था। भाभी नंगी लेटी हुईं थी, उन्होंने टांगें फैलाईं हुई थी, उनकी चूत गीली चमक रही थी, वासना की तड़प से बोबे हिल रहे थे उफ्फफ! क्या नज़ारा था।
उनकी पट्टी बंधी थी, तो कुछ दिख नहीं रहा होगा मैने सोचा ये मौका है!
मेरा दिमाग तभी से तेज चला – चालाकी से घुस जाऊं, चोद डालूं, और भाई के आने से पहले निकल लूं मैने एक नज़र भाभी को देखा वो अपनी उंगली चूस रही थी चूत सहला रही थी और लंद के लिए मचल रही थी।
मैने कान लगाकर भाई की बातों को सुना , दोस्तों की बातें सुनकर पता चला कि वो 20 मिनट तो रुकेंगे ही – वो बीयर पीकर गपशप में लगे थे जिससे मुझे अंदाज़ा हुआ अभी बाहर ही रहेंगे वो कुछ देर।
यानी चुदाई के लिए मेरे पास टाइम था! मेरे दिल की धड़कन तेज थी, मैं धीरे से दरवाजा खोला और अंदर घुस गया।
कमरे में वो हल्की लाइट अभी भी जल रही थी, भाभी की खुशबू – परफ्यूम और चूत के रस की मिली-जुली मीठी सी फिलिंग दे रही थी। मैं बिस्तर के पास पहुंचा। भाभी ने आवाज सुनी तो बोलीं, "अलोक? आ गए?
आओ जल्दी चोदो मुझे... मेरी भोसड़ी जल रही है लंड के लिए!" मैंने कुछ नहीं कहा। मैं सीधा उनके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड पहले से ही सख्त था, भाई का रस भाभी की चूत पर चिपचिपा सा लगा हुआ था।
मैं जल्दी से कपड़े उतार कर नंगा हुआ फिर मैंने लंड का सिरा चूत पर रगड़ा – आहआआह, कितनी गर्म और गीली चूत थी वो! मेरा लंड उनकी चूत पर लगते ही भाभी सिहर उठीं – "हां अलोक... घुसाओ... उफ्फ!"
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मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर धकेल दिया। भाभी की चूत काफी टाइट थी, भाई के लंड से ढीली हुई हो लेकिन फिर भी मेरे मोटे लंड को चूत ने कसकर जकड़ लिया था। "आह्ह्ह... अलोक... कितना सख्त लग रहा आज... ओंह्ह्ह! मज़ा आ जाएगा , अआआह जान चोदो जोर से!"
फिर मैंने उनकी चूत को पेलना शुरू कर दिया वो भी धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
भाभी की भी कमर उछलने लगी,उनके मोटे बोबे मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे। मैंने उनके निप्पल पकड़े और होठ से दबा कर चूसने लगा – हाय, क्या स्वाद मिल रहा था! बिल्कुल मीठा दूध जैसा।
भाभी चुदासी होकर गालियां देने लगीं – "अआआह! मादरचोद... ओहद्ह! चोद साले...आगाह फाड़ दे मेरी चूत... आह कितना अच्छा लग रहा आज, अआआह!" मैं भी फिर जोश में आ गया था।
चुपके से मैने उनके कान में फुसफुसाया – "अरे रंडी... तेरी चूत तो लंड की बहुत भूखी है!" लेकिन मैने अपनी आवाज दबाई, शायद न पहचानें। बाहर से दोस्तों की हंसी आ रही थी – भाई कह रहा था।
"अरे यार, बस 10-15 मिनट और... राधु इंतजार कर रही है!" उनके दोस्त हंस रहे, "भाई, चुदाई बीच में छोड़ दी? हाहा!" भाभी की चूत में लंड था उनको अभी बस चुदाई से मतलब था फिर मैंने स्पीड बढ़ा दी।
भाभी की चूत में लंड घुस-घुस कर चपचप आवाज कर रहा था। उनका रस मेरे अंडकोष पर टपक रहा था।
मैंने एक हाथ से उनकी गांड पकड़ी – वो गोरी थी और बहुत मुलायम, जैसे रसीला लड्डू होता है। मैने अपनी उंगली भाभी की गांड के छेद पर रगड़ी, तो भाभी चिल्लाईं –
"आह...अआआह जान वहां मत करो कुछ...आआह उफ्फ...ओह अभी चोदो चूत को ही साले!" मुझे भाभी को चोदते हुए 10 मिनट हो चुके थे। मैं पागलों की तरह उनकी चूत में लंड पेल रहा था, भाभी की टांगें मेरी कमर पर लिपटीं पड़ी थी।
उनके बोबे चूसते हुए मैंने सोचा, आज तो मजा ले ही लूं। तभी भाभी ने हाथ बढ़ाया और आंखों की पट्टी हटा दी। उस धीमी लाइट में उनकी आंखें खुलीं – और वो मुझे देखकर सिहर गईं। "अ... अशोक? तू? यहां कैसे... अलोक कहां है?"
हैरानी से वो उठने लगीं, लेकिन मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में गहराई तक धंसा था इसलिए सीधी नहीं हो पाई।
उनकी चूत ने लंड को और कस रखा था – शायद उसे भी मजा आ रहा था बेचारी चूत कहा जानती है किसका लंड लेना सही है और किसका नहीं।
उस समय मैं रुक गया, लेकिन लंड बाहर नहीं निकाला।
बाहर भाई की बातें चल रही थीं – "हां यार, प्रमोशन की बात हो रही है... कुछ दिन तो लगेंगे!" लेकिन इधर भाभी की सांसें तेज दौड़ रही थी उनका चेहरा लाल हो रहा था ये गुस्सा था या चुदास मैं आज तक न जान सका।
वो मेरी आंखों में देख रही थीं फिर वो वासना भरी आवाज़ में बोली "अशोक... ये गलत है... तू मेरा देवर है, मैं तेरी मां समान हूं... निकाल अपना लंड बाहर!" लेकिन उनकी आवाज कांप रही थी, और कमर हल्के से हिल रही।
मैंने चालाकी से मुस्कुराया – "भाभी... भाई तो दोस्तों से बात कर रहे हैं... तेरी चूत तो तड़प रही है ना? मैं पूरा कर दूंगा काम बाकी तेरी मर्ज़ी... अगर तू कहे तो आराम से चोद लूं?"
उनके जवाब का इंतज़ार करे बिना मैंने धीरे से एक धक्का मारा।
भाभी की आहआह! निकल गई फिर मैं आराम आराम से धक्के मारने लगा
और भाभी "आह्ह... ओह अशोक मत कर.. उफ्फ ओंह्ह्ह!... कितना मोटा है तेरा आगाह! मत करना...ओंह्ह्ह! अलोक से भी ज्यादा मज़ा आ रहा है लेकिन मैं कैसे! ओंह्ह्ह अशोक!"
ये Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है। आखिरकार वो पट्टी फेंक दी और मेरी पीठ पर हाथ रख लिया।
फिर अचानक बोलीं, "अशोक...अब रुको मत... काम पूरा कर अपना आगाह! चोद मुझे... जोर से चोद।
लेकिन मेरी कसम है तुमको ओहद्ह! भाई को नहीं पता चलना!" दोस्तों, वो पल तो बहुत ही हसीन था! अब भाभी ने खुद फैसला कर लिया था। मैंने फिर से उनकी चूत को पेलना शुरू करा – और अब बिना डर के।
भाभी रंडी मोड में आ गईं थी। "हां अशोक...अआआह! चोद अपनी भाभी को...ओंह्ह्ह! आह मादरचोद देवर... मेरी चूत तेरी है आज से!" मैंने उनके बोबे मुंह में लिए और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
उनकी चूत का रस इतना निकला के बिस्तर भीग गया। भाभी ने फिर मुझे नीचे दबाया और खुद ऊपर चढ़ गईं – वो काउगर्ल पोजिशन में आ गई थी। उनकी गोरी गांड ऊपर-नीचे हो रही थी, अब लंड चूत में गहराई तक जा रहा था।
"देख साले... अआआह ! तेरी भाभी कैसी सवार है... उफ्फ... चूस मेरे दूध ओहद्ह!!" मैंने उनके निप्पल चूसे, हाथों से गांड मसली। भाभी की सिसकारियां तेज होती जा रही थी – "आह... फाड़ दे अआआह!
हाय देवर जी का लंड कितना तगड़ा है अआआह.. अलोक तो कुछ नहीं तेरे सामने!"
बाहर भाई अभी भी बातें कर रहा था– "हां यार, अगले हफ्ते पार्टी... रुको ना!" 20 मिनट पूरे हो चुके थे, लेकिन वो रुके नहीं। हमारी चुदाई चरम पर आ चुकी थी।
मैंने भाभी को घोड़ी बनाया –फिर पीछे से गांड पकड़ी और लंड अंदर घुसाया। "रंडी भाभी... तेरी गांड चोदूं?" भाभी चिल्लाईं – "हां चोद... लेकिन चूत ही... आह जोर से पेल आज उसे कमीने!"
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा, लंड चूत में तेजी से अंदर-बाहर।
भाभी का बदन कांप रहा था, उनके बोबे लटककर हिल रहे। फिर भाभी बोली "अआआह अशोक... मैं झड़ने वाली हूं... आह मादरचोद...ओहद्ह तेरे लंड से... उफ्फ!"
तभी उनकी चूत सिकुड़ गई, उनकी चूत से रस की बौछार होने लगी – उनका पानी गर्म व चिपचिपा था। उनकी चूत भट्टी जैसी गर्म थी तो मैं भी कंट्रोल न कर सका तो मैं भी बोला "भाभी... मेरा निकलने वाला है!"
भाभी ने मुड़कर कहा – "अंदर ही झाड़ दे देवर... भर दे मेरी चूत को!"
मैंने आखिरी धक्के मारे और पूरा माल उनकी भोसड़ी में उंडेल दिया। ओह आह... क्या मजा आया उस रात! भाभी की चूत ने मेरे रस की हर बूंद सोख ली।
हम दोनों हांफते हुए लेट गए। भाभी ने फिर से पट्टी उठाई और बोली– "अशोक... देखो ये राज रहेगा हमारा। भाई को पता नहीं चलना चाहिए। लेकिन... अगली बार फिर कब आओगे?" मैंने उनके होंठ चूसे और बोला।
"हां रंडी भाभी मैं जनता हूं... तेरी चूत अब मेरी है।" तभी बाहर भाई की कदमों की आवाज आई। हमने जल्दी से कपड़े पहने। भाई अंदर आए तो भाभी बिस्तर पर लेटीं थी, उन्होंने पट्टी दोबारा बांध ली थी।
भाई बोला "अरे राधु, सॉरी यार... दोस्तों ने रोक लिया था।"
भाभी सिसकारी भरकर बोलीं – "कोई बात नहीं अलोक... मजा तो आ गया वैसे आज।" भाई थककर सो गए, लेकिन मैं जानता था – ये भाभी और मेरे रिश्ते की शुरुआत है। अब भाभी की चूत मेरी चालाकी का शिकार बनेगी बार-बार।
दोस्तों, ये थी मेरी गरम भाभी राधिका के साथ वाली चुदाई की कहानी। बताइए आपको कैसी लगी hashmilion5@gmail.com पर मेल करो व कमेंट्स में बताओ। धन्यवाद।
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