पड़ोसी के लन्ड से हुई आंटी की मलाईदार चुदाई!

Hindi Sex Stories : विधवा हवसी आंटी ने चोट के बहाने जवान पड़ोसी को घर बुलाया, हल्दी दूध की मलाई लगाकर चटवाई अपनी चूत! फिर उसके मोटे लंड से जमकर चुदवाया! 


ये मेरी कहानी है मैं हूं मेघना मेरे पति आरव की मौत को आज सात साल हो चुके हैं। आरव हमेशा कहते थे कि उन्होंने मेरे लिए इतना पैसा जोड़ दिया है कि मुझे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होगी।


लेकिन एक औरत की जिंदगी में सबसे बड़ा खालीपन पैसों की कमी नहीं, बल्कि अपनेपन वासना और चरमसुख की कमी होती है।


रात को जब पूरे घर में सन्नाटा फैल जाता, तब मुझे अपने अकेले जिस्म की गर्मी तड़पाने लगती थी। मैं कई बार अपने कमरे की खिड़की खोलकर देर तक बाहर सड़क को देखती रहती थी।


दिल करता कोई रस्ते से आकर मेरे जिस्म की आग बुझा जाए मगर बड़े घरों के आंगन में अनजान लोगों से मिलना भी आसान नहीं होता।


मुझे किराए के लन्ड लेना मंजूर नहीं था क्यों के मुझे चुदाई में पैसा की दखल का होना सहन नहीं है। उसके अलावा अपने स्टेटस की वजह से मैं किसी अंजान पर भरोसा भी नहीं कर सकती थी। 


मैंने खुद को व्यस्त रखने की बहुत कोशिश की, कभी किताबें पढ़ीं, कभी टीवी देखा और कभी मंदिर जाने लगी मगर जब वासना भड़कती है तो आस्था भी कमज़ोर हो जाती है।


मेरे नौकर मेरा सम्मान करते थे, मगर उनसे दिल की बातें नहीं की जा सकती थीं मेरे दिल में बहुत बार विचार आया की रामू काका को रिझा कर अपनी चुदासी चूत की गर्मी मिटा लूं।


 लेकिन डर भी लगता कही वो थकान की वजह से प्राण न त्याग दे क्योंकि मेरी चूत की आग शांत करना कोई बच्चों का खेल नहीं था। मेरे अपने बच्चे नहीं थे, इसलिए घर की दीवारें और भी ज्यादा सूनी लगती थीं।


कई बार मैं अपने पति की तस्वीर के सामने बैठकर उनके सामने अपनी टांगे खोलकर अपनी चूत में कभी खीरा तो कभी मोमबत्ती चढ़ा लेती थी। अगर आत्माएं सच में हुआ करती तो ज़रूर मुझे देखकर उनके लन्ड खड़े हो जाते।


एक दिन मैंने तय किया कि अगर मुझे इस अकेलेपन से लड़ना है तो मुझे घर से बाहर निकलना ही होगा थोड़ी बेशर्मी दिखानी ही पड़ेगी। उसी दिन से मैंने सुबह-सुबह पास के पार्क में टहलने जाना शुरू किया या कह सकते है अपना शिकार तलाशने लगी ।


कुछ समय पहने मैने अखबार में पढ़ा था की चुदासी औरतों ने इसी पार्क में एक आदमी के लन्ड की इज़्ज़त लूटी थी। उसके बाद से यह मर्द थे तो बहुत मगर मुझे कोई अपनी पसंद का नहीं दिख रहा था।


मेरी उमर बस 40 थी लेकिन मेरा जिस्म 30 वाली महिला का था 38 के चूंचे 30 की कमर और 36 की गांड़ और 5.5 की लंबाई , मेरी हालत इतनी चुदासी थी कोई चोर अगर चोरी करते हुए मुझे चोद जाए तो मैं बुरा नहीं मानूंगी।


पार्क में जाने के शुरू में मैं बस चुपचाप एक बेंच पर बैठी रहती और लोगों को देखती रहती थी। कुछ बूढ़े लोग हंसते हुए योग करते थे, बच्चे दौड़ते थे और कुछ युवा एक्सरसाइज में लगे रहते थे। उन सबको देखकर मुझे एहसास होता था कि जिंदगी अभी भी चल रही है।


इन्हीं दिनों मेरे घर के सामने वाले खाली मकान में नए पड़ोसी रहने आए। वह तीन लोगों का छोटा सा परिवार था, जिसमें पति-पत्नी और उनका इकलौता बेटा रवि था।


रवि की उम्र करीब इक्कीस साल रही होगी और उसके चेहरे पर हमेशा एक शांत मुस्कान रहती थी वो मेरी लंबाई से बस कुछ ही बड़ा था।


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उसकी मां बहुत विनम्र महिला थीं और उसके पिता बेहद सीधे-सादे इंसान लगे। उन्होंने आते ही पूरे मोहल्ले में सबसे मिलना-जुलना शुरू कर दिया था। मैंने पहली बार रवि को ठीक से पार्क में देखा था, जहां वह हर सुबह एक्सरसाइज किया करता था।


वह बाकी लड़कों की तरह शोर मचाने वाला नहीं था बल्कि शांत स्वभाव का था। उसकी आंखों में एक जवानी वाली मस्ती दिखाई देती थी जो आजकल कम लोगों में मिलती है।


उस दिन उसने हल्की नीली टीशर्ट पहन रखी थी और वह दौड़ने के बाद स्ट्रेचिंग कर रहा था उसका जिस्म एक दम जोशीला दिख रहा था उसका बहता पसीना मुझे अपनी चूत के गीलेपन में महसूस हो रहा था।


मैं दूर बैठकर बस उसे देख रही थी और अपने ख्यालों में खोई हुई थी उसे देख देखकर मेरी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी जब वो पीछे झुका तो उसकी शर्ट ऊपर हो गई।


उसकी लन्ड की मोटाई मुझे कपड़ों के ऊपर से नज़र आ गई। मेरी एक पल को सांस रोकी और मैने बेंच को कसकर पकड़ लिया उस एक पल में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।


लोग मुझमें हमेशा से दिलचस्पी लेते आय है शायद इसका कारण यह था कि मैंने खुद को हमेशा संभालकर रखा था। मैं अच्छे और चुस्त कपड़े पहनने थी, योग करती थी और अपनी सेहत का ध्यान रखती थी।


 अपनी शर्म को दूर करने के लिए मैने अपने जिस्म को दूसरों पर इज़हार करना शुरू कर दिया था। लेकिन चेहरे की सुंदरता दिल के खालीपन को कभी नहीं छुपा पाती।


मेरी मुस्कान अक्सर नकली होती थी जिसे सिर्फ मैं ही समझ सकती थी। एक सुबह मैं पार्क के रास्ते पर धीरे-धीरे टहल रही थी कि अचानक मेरा पैर मुड़ गया। तेज दर्द के कारण मैं वहीं लड़खड़ाकर नीचे बैठ गई और मेरी आंखों में आंसू आ गए।


आसपास मौजूद लोग बस एक नजर देखकर आगे बढ़ गए, मगर रवि तुरंत दौड़कर मेरे पास आया। ये Antarvasna Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


उसने घबराकर पूछा कि मुझे ज्यादा चोट तो नहीं लगी और फिर सहारा देकर मुझे बेंच तक ले गया। उसकी आवाज में इतनी सच्ची चिंता थी कि न जाने क्यों मेरा दिल भर आया। उसने सहारा देते हुए जब मुझे छुआ तो मेरे बदन में सुर सुरी दौड़ गई।


मैं उठने की कोशिश कर रही थी मगर दर्द के कारण ठीक से चल नहीं पा रही थी। रवि ने बिना झिझक मेरा हाथ अपने कंधे पर रखा और एक हाथ से मेरी कमर को पकड़ लिया और मेरी इसससिस! निकली वो धीरे-धीरे मुझे पार्क से बाहर लाया।


रास्ते भर वह मुझे संभालता रहा ताकि मैं फिर से गिर न जाऊँ उसके हाथ का मर्दा स्पर्श मुझे अच्छा लग रहा था। 


मैं चाहती थी वो मुझे और ज़ोर से पकड़ले मैने जानकर गिरने का बहाना करा और रवि ने मुझे संभालने के लिए कमर को सख्ती से दबा दिया मैने भी झट से उसके हाथ को पकड़ लिया, और हम मेरे घर आ गए।


कुछ देर बाद वह मेरे लिए अदरक वाली गर्म चाय बनाकर लाया। उस चाय की खुशबू के साथ जैसे मेरे सूने घर में एक नई गर्माहट भी लौट आई थी उसके चिकने चेहरे पर तो पहले से फिसल चुकी थी।


रवि ने मेरे पैर पर दवाई लगाई मैं बस उसे देखती जा रही थी। मेरे मरहम लगाकर और हवस की आग भड़का कर वो चला गया।


अगली सुबह मेरी दरवाजे की घंटी बजी तो मैने दरवाज़ा खोला तो सामने रवि खड़ा था। उसने मुस्कुराते हुए पूछा कि मेरा पैर अब कैसा है मेरी हालत अब बेहतर थी मगर अब मुझे हर हाल में एक मर्दाने लन्ड की ज़रूरत थी ।


तो मैने उसको बोल दिया के अभी दर्द है। रवि को मेरी चाय बहुत पसंद थी उसने मुझसे नाश्ते का पूछा और खुद ही किचेन से चाय बनाकर लाया उसने अपने लिए चाय बनाई और मेरे लिए हल्दी दूध तैयार करा।


उसने बैठकर चाय पी में उसे देखकर मेरी आंखों में आंसू का एक कतरा आ गया जिसे देखकर वो बोला “आप रो क्यू रही हो ?”, मैने भी कह दिया मैं अकेली हूं और अपना ध्यान नहीं रख पाती। वो उठकर मेरे पास आया और मेरे सर को अपने कंधे पर लेकर मुझे गले लगा लिया।


मैने भी मौका देखकर उसके पेट पर बा बांध ली। मैने उससे कहा “अगर हो सके तो मेरे पास आते रहा करो”! उसने मेरी बात मानते हुए मुझे लेटने को बोला और मरहम लेकर मेरे पैरों की तरफ बैठ गया।


मैं उस समय बस एक नाइटी पहने हुए थी, मेरी ब्रा हल्की सी थी जिससे मेरे काले निप्पल चमक रहे थे और मेरी नाइटी के नीचे पेंटी भी नहीं थी।


मैने भी सोच लिया था आज तो चूत की प्यास को बुझाकर ही मानूंगी, मैने रवि के सामने लेट गई उसने मेरी नाइटी को सावधानी से ऊपर करा और मरहम लगाना शुरू करा। उसका मर्दा स्पर्श मिलते ही मेरी चूत मचलने लगी।


मैने मुश्किल से खुदपर काबू करा मैं नहीं चाहती थी वो मुझे कोई रण्डी समझे।


उसने मरहम लेकर टांगों को सहलाने शुरू करा, वो धीरे धीरे ऊपर की तरफ हाथ को लेकर आ रहा था, मेरा सीना वासना से ऊपर नीचे हो रहा था मेरी सांसे फूल रही थी।


उसके बाद उसने मेरे घुटने मोड़ दिए जिससे शायद उसे मेरी चूत नज़र आ गई। वो गौर से मेरी नाइटी के अंदर देख रह था उसकी सांस भरी हो रही थी।


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मैने उससे बोला “करोना रुक क्यू गए”। उसने कुछ नहीं कहते हुए मालिश शुरू कर दी, वो ऊपर की तरफ ठीक से होकर बैठा और घुटनों की मालिश करने लगा, मेरी नाइटी में से खुली चूत उसके सामने थी जो गीली हो रही थी।


मैने रवि की हालत पर मुस्कुराते हुए कहा “रवि थोड़ा घुटनों से ऊपर करो प्लीज़ वहां जरूरत ज़्यादा है।”


रवि कितना भी अच्छा इंसान हो आखिर था तो जवान मर्द ही उसके सामने एक कामुक औरत का जिस्म था, हमे देखने या टोकने वाला कोई नहीं था और रवि के सामने एक गीली चूत थी।


मैने उसे उकसाने के लिए बोला “अगर कपड़े गंदे हो रहे हो तो बता देना मैं उतार दूंगी! तुम तो घर के ही हो अब तुमसे कैसी शर्म , हे न रवि ?”


उसने भी हां बोल दिया और मैने झट से अपनी नाइटी उतार दी। अब रवि के सामने सफेद ब्रा में छुपी मोती गोल चूंची थी और खुली गीली चूत थी, उसके चेहरे पर भी हवस का लाल रंग दिख रहा था। 


उसने फिर से मालिश शुरू करी अब उसने खुद से चूत के करीब मालिश शुरू कर दी शायद वो भी जान चुका था के मैने अपनी चूत उसे परोस दी है अब रवि मेरी दोनों जांघों पर मालिश कर रहा था।


बीच बीच में उसका हाथ मेरी चूत भी छू लेता था जिससे मुझे एक करेंट सा लग जाता जब लगातार उसका हाथ मेरी चूत पर आने लगा तो मैं समझ गई आज मेरी प्यास बुझने वाली है और मैने अपनी आँखें बंद करली क्यों की अब जो भी होना था वो अपने आप होता।


मैने मादक सिसकियां लेनी शुरू करी “हम्ममम! ओहद! अच्छा लग रहा है रवि, तुम्हारे हाथों में तो जादू है।” रवि भी समझ चुका था आगे क्या करना है। मेरी चूत पर बाल थे रवि का एक हाथ अब लगातार मेरे बाल सहला रहा था मैं उसके सामने नंगी चूत लेकर तड़प रही थी।


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मेरी चूत से पानी आना शुरू हो चुका था, मेरी टांगे अपने आप मचल रही थी।


रवि बिल्कुल चुप था मैं भी चुप थी हम हवस की गर्मी में जल रहे है अचानक मुझे महसूस हुआ के रवि ने एक उंगली मेरी चूत में सरका दी जिससे मेरी अआआह! निकली और मैने आंखें खोल दी।


रवि की तेज़ सांसे उसके सीने पर पता लग रही थी मेरी और उसकी आँखें मिल गई हमारे सांसे भारी थी। मैने अपनी आंखों से उसे आगे बढ़ने का इशारा दिया उसने अपनी उंगली मेरी चूत में पूरी अंदर तक डाल दी। मैं उससे आंखे मिलते हुए आअआअह! कर के रह गई।


वो अब मेरी चूत में उंगली को अंदर बाहर कर रहा था हमारी आंखे मिली हुई थी और मैं बस आगाह! ओह अआआह! आअआअह! कर के उसे जोश दिला रही थी,


मैने अपनी आँखें बंद की और अपनी वासना मज़ा लेने लगी। मुझे महसूस हो रहा था रवि ने अपनी दो उंगली मेरी चूत में दे रखी थी।


वो तेज़ी से मेरी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रहा था मुझसे रहा नहीं गया और मैं बोल उठी “रवि ! अब रुका नहीं जा रहा है। कुछ करो! अआआह!” मैने आँखें खोली तो रवि अपने कपड़े उतार रहा था।


उसने एक एक कर के अपने सारे कपड़े उतारे हम एक दूसरे को लगातार देख रहे थे।


वो अपनी पेंट उतार रहा था मैं अपनी ब्रा खोल रही थी, मैने ब्रा हटाई और नंगी उसके सामने खड़ी हो गई वो ज़मीन पर मेरे सामने नंगा खड़ा था हमारी सांसे भारी थी मैं उसकी तरफ आगे बढ़ी ।


 उसके बाल सहलाते हुए चेहरे को अपनी बालों से भरी चूत पर लगा दिया। मेरी चूत को चाट कर उसने रखे हुए हल्दी दूध से मलाई निकालकर चूत पर लगाई।


वो मेरी चूत को खाने लगा उसे चाटने लगा उसने पूरी मलाई साफ कर दी मुझे उसकी जीभ अपनी गर्म चूत के अंदर तक महसूस हो रही थी। मैं अआआह! उन्ह्ह्ह्ह! रवि आअआअह रवि आअआअह! करती जा रही थी।


फिर उसने मुझे गोद में उठाया उसमें अलग ही ताकत थी उसने मुझे दीवार से लगाकर चूमा।


मैं भी उसके होठों को चूम रही थी उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली मैने एक आइसक्रीम की तरह उनकी जीभ चूसी मुझे अपनी चूत मैं बहुत चूल हो रही थी फिर उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया मेरी टांगे उसके पेट पर बांधी थी तो मैने उसे अपनी तरफ खींचा।


वो मेरे जिस को चूम रहा था मैं अपनी टांगों की ताकत से उसके लन्ड को चूत पर दबा रही थी।


हमारे बीच से उमर की दीवार टूट चुकी थी में अपने से आधी उमर के लड़के का लन्ड लेने वाली थी रवि का लन्ड 7 इंच का तगड़ा नाग जैसा था। फिर मैंने रवि को पलटा और उसके ऊपर आ गई।


मैने अपनी चूत को उसके चेहरे पर रगड दी और दूध से बची हुई मलाई उसके लन्ड पर लगाकर चूसने लगी वो मेरी चूत खा रहा था मैं उसके लन्ड को चूस रही थी फिर धीरे धीरे उसके ऊपर लेटती चली गई और जिस्म को चूमने लगी।


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 मैने अपने हाथ उसके सीने पर रखे वो अपने हाथों से मेरी चूंची दबा रह था मुझे बहुत समय बाद ये जिस्मानी सुख मिल रहा था, मैने कुछ पल अपनी चूत उसके लन्ड पर मसली जब तक उसका लन्ड चिकना नहीं हो गया।


फिर उसके खड़े लन्ड को धीरे से अपनी चूत में लेकर मैं बैठ गई मुझे बहुत दर्द हो रहा था कई साल हो गए थे और इस चूत ने कोई लन्ड नहीं खाया था। रवि ने धीरे धीरे धक्के देना शुरू करा। मैं उसके ऊपर झुककर चूत को लन्ड पर धकेलने लगी।


वो मेरे लटकते आम जैसे चूंचे पीने लगा और धक्के लगाने लगा


मैं अआआह! अआह ओहो रवि अआआह करो और तेज़ अआआह रवि आअआअह! चोदो मुझे! मुझे अपनी रण्डी बना लो आअआअह रवि। कहते हुए चुद रही थी। वो भी तेज़ी से लन्ड को चूत में पेल रहा था।


काफी देर तक हमारी अआआह! अआह ओहो हिम्मम्मम! ओह भाभी आअआअह! हम्ममम रवि आअआअह और तेज़ आअआअह चोदो ओह साली मुझे नहीं पता थी तू इतनी प्यासी है अआआह! ओहद हम्ममम रवि मैं प्यासी हूं मेरी प्यास बुझाओ आअआअह! हमारी आवाज़ गूंजती रही।


रवि एक माहिर चुदक्कड था उसने एक 20 मिनिट तक मुझे चोद लिया फिर मुझे पलट कर गांड़ की तरफ आया,उसने पीछे से मेरी चूत में लन्ड को पेला और मेरे चूंचे मसलने लगा, वो मुझे गोद में लेकर चोद रहा था इस हाल में मेरा खुदपर कोई काबू नहीं था वो जैसे चाहता मेरे जिस्म से खेल रहा था।


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रवि से चुदाते हुए मुझे चरमसुख मिल रहा था। करीब आधे घंटे बाद हम साथ में झड़ गए वो मेरे ऊपर लेटा रहा मैं उसके होठों को किसी रसीली चीज़ की तरह चूमती रही। मुझे एहसास हो गया के अब जिंदगी रंगीन हो जाएगी। उसके बाद वो अपने कॉलेज के लिए चला गया।


अब हमारा रोज़ का मिलना शुरू हो चुका था वह बड़े आराम से पहले मेरे पैरों की मालिश करता और उसी तेल को अपने लन्ड पर खाकर मेरी चूत के अंदर तक मुझे आराम देता।


उसके परिवार से मेरी अच्छी बोल चल हो गई थी दुनिया की नज़रों में वो मेरे बेटे की तरह था।


मगर बिस्तर पर मैं उसकी रण्डी थी वो हफ्ते में 3 दिन मेरे साथ रात बिताता और कभी उसका परिवार बाहर होता तो मैं उसकी बीवी बनकर उसके घर में रहती। हम पूरा दिन नंगे रहते कहा दिल करता वहां चुदाई करते।


मैने रवि को पेशकश करी की जब तक मैं जिंदा हूं वो मेरा पति बनकर रहे और बदले में मैं अपनी जायदाद उसे दे दूंगी और रवि ने बात मनली।


उसने एक रात छुपकर मेरी मांग भरी और हमने सुहागरात मनाई उसने दूध से मलाई लेकर मेरी चूत से लगाकर चाटी और मैने मलाई उसके लन्ड पर लगाकर खाई फिर हमने सुहागरात मनाई और मैने दुबारा सुहागन का सुख पाया। 


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