लिफ्ट में गरम कर, मौसी को ज़बरदस्ती पेला!

Family Sex : भतीजे ने लिफ्ट में मौसी की गांड पर रगड़ा लंड! ज़बरदस्ती कमरे में पेली चूत! मौसी ने हाथ बांधकर, थप्पड़ मारते हुए चुदवाया! और बना लिया अपना गुलाम!


मेरा नाम मनीष है और मैं नोएडा में जॉब करता हूं, मेरा ऑफिस रूम से तकरीबन एक घंटे की दूरी पर है तो सुबह सुबह अपार्टमेन से जल्दी निकलना पड़ता है।


मेरा रूम 7वी मंज़िल पर है तो सुबह सुबह सब ऑफिस के लिए जब निकलते है तो पूरी लिफ्ट बुरी तरह भर जाती है। एक रात मेरी मौसी का फोन आया उन्होंने बोला की तुम्हारी बिल्डिंग में ही मैने एक कमरा किराए पर लिया है।


उनको समान शिफ्ट करने में मेरी मदद चाहिए थी उन्होंने ठीक मेरे सामने का कमरा ही किराए पर लिया। अब शहरों में माहौल कुछ इस तरह होता है की अपने सगे घर वालों के साथ भी आप बात चीत कम ही रखपाते है।


खैर मैने मौसी को मदद के लिए हां बोल दिया, अगले दिन मैने अपने ऑफिस से छुट्टी लेली और दिन भर मौसी के साथ सामान को लगाता रहा। मौसी दिखने में एक मस्त जिस्म वाली औरत थी उनके पति ने उनको छोड़ दिया था ।


मौसी ने नोएडा में ही नौकरी लेली थी और अब मेरे सामने रहने आई थी। जब हम दोनों समान लगाकर थोड़ा थककर बैठ गए तो मौसी चाय बना लाई। मेरी मौसी एक मॉडर्न औरत है उनका नाम प्रिया ।


उस समय मौसी ने एक स्कर्ट और टी शर्ट पहना हुआ था वो चाय टेबल पर रखकर और सोफे पर पालथी लगाकर बैठ गई। मौसी ठीक मेरे सामने बैठी चाय पी रही थी मेरा तापमान मौसी को देखकर बढ़ रहा था।


मौसी की टांगे खुली हुई थी और उसकी गुलाबी चड्डी मुझे साफ दिखाई दे रही थी मौसी का रंग एकदम दूध सा गोरा था। उनके चूंचे 36 कमर 30 और गांड़ 34 की थी उनकी शादी खत्म हुए 1 साल से ज़्यादा हो गया था।


मौसी के जिस्म को देखकर पता चल रहा था वो चूत में किसी न किसी का लौड़ा लेती रहती है। मेरे अरमान चाय से ज़्यादा गरम हो रहे थे। मैने बस लोवर पहना था जिसमें से लंड ताना हुआ दिख रहा था।


मैने ध्यान दिया के मौसी की नज़रे मेरे लंड पर रुकी हुई है, उन्होंने भी मुझे टांगों के अंदर तक जाते हुए एक दो बार पकड़ लिया।


 बड़े शहर में इस तरह की ताक झाक आम होती है इसलिए न मैने कुछ कहा न मौसी कुछ बोली।


चाय खत्म कर के मैने उनसे जाने की इजाज़त मांगली उन्होंने भी ठीक है बोल दिया और बेड रूम में आराम करने चली गई। 


दोपहर तक मेहनत करने के बाद में शाम तक सोया फिर रात को खाने के समय मैने सोचा की मौसी को पूछ लेता हूं। ये Kamvasna Hot Sex Story आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


मैने सामने के कमरे का दरवाज़ा बजाया लेकिन मौसी ने दरवाज़ा नहीं खोला मुझे लगा वो सो रही है इसलिए मैं वापस कमरे में आ गया और खाना खाकर सो गया क्यों के अगले दिन ऑफिस जाना था।


अगली सुबह मैने हमेशा की तरह नाश्ता करा और तैयार होकर लिफ्ट पकड़ने के लिए भगा मुझे मौसी का बिल्कुल ख्याल नहीं था। रोज़ की तरह की लिफ्ट पूरी भरी थी। जैसे तैसे मैं सबसे पीछे घुस गया।


लिफ्ट में मेरे अलावा दो चार अंकल एक दो आंटी और दो स्कूल के बच्चे होते थे जब लिफ्ट चलने को थी तभी मौसी भी आ गई उनके आते ही लिफ्ट में जगह तंग हो गई।


सबने मौसी को आगे पीछे कर के पीछे कर दिया वो बिल्कुल मेरे आगे खड़ी थी।


मौसी और मैं बिल्कुल चिपककर खड़े थे उन्होंने एक काली ड्रेस पहनी थी जो घुटने के नीचे से खुली टांगों वाली थी। मैने तब एक जींस टी शर्ट पहनी थी और मौसी की मोती गांड़ मेरे लंड पर पूरा दबाओ बना रही थी।


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मुझे अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे डर था कही मौसी मुझे गलत न समझले। उन्होंने मुझे बोला की मुझे उठा देते तो मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई के मैं उनके बारे में भूल गया था।


जिस भी फ्लोर पर लिफ्ट रुकती तो हमे एक धक्का लगता और और उस धक्के का असर मेरे लंड से होता हुआ मौसी की गांड़ पर पहुंचता एक धक्का इतना ज़ोर से लगा।


 मौसी पीछे मुड़कर देखने लगी उनकी नज़र मेरे उभरे लंड पर टिकी एक पल उन्होंने मुझे देखा फिर अपनी गांड़ की छेद की सीध में लगे मेरे लंड को देखने लगी मगर कुछ नहीं बोली।


लिफ्ट आखिरकार नीचे पहुंची और हम अपने अपने रास्ते पर निकल गए। शाम को फिर से वही सीन दोहराया गया सब की लिफ्ट में अपनी अपनी जगह फिक्स थी और अब मौसी ने भी अपनी जगह मेरे लंड की नोक पर बनाली थी।


शाम को भी हम सुबह की तरह ही गांड़ पर लंड दबाकर ही अपने फ्लोर तक गए। मेरे लंड में सुबह से ही दर्द हो रहा था अपने कमरे पर पहुंचते ही मैने जल्दी से बाथरूम जाकर मौसी के नाम की मूठ मारी तब थोड़ा सुकून मिला।


दो दिन लगातार मेरी यही हालत रही मुझे लंड में काफी दर्द हो रहा था।


संडे के दिन मुझमें हिम्मत नहीं थी के कही बाहर जाऊं इसलिए पूरा दिन कमरे में ही गुज़ार दिया हालांकि मुझे रोज़ इस तरह मौसी की गांड़ की खुशबू लेना अच्छा लग रहा था।


अगले दिन सोमवार को फिर से मैने जल्दी जल्दी खुदको ऑफिस के लिए तैयार करा।


आज मैने अंडरवियर नहीं पहना, सोचा आज थोड़ा अच्छी तरह से मज़ा लूंगा मौसी की गांड़ का, अपने ख्यालों में जल्दी जल्दी मैं मौसी के दरवाज़े पर उनको जगाने गया।


इस बार फिर से मौसी ने दरवाज़ा नहीं खोला मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही थी तो मैं बेमन सा लिफ्ट में जाकर खड़ा हो गया। पूरा दिन मुझे अपने खड़े लंड पर मिले धोखे के लिए बुरा लगा जब शाम को छुट्टी हुई तब राहत मिली के अब मज़ा आएगा।


शाम को फिर से लाइफ भरी हुई थी रोज़ वाले सभी लोग थे लेकिन मौसी नहीं थी मुझे लगा उनकी तबियत खराब है लाइफ मेरे फ्लोर तक पहुंची तो जल्दी से मैं फ्रेश होकर 8 बजे मौसी के दरवाज़े पर गया।


इस बार मैने थोड़ा ज़ोर से दरवाज़ा खट खटाया तो आखिर प्रिया मौसी ने दरवाज़ा खोल दिया। उनके हाथ में बर्फ में लिपटा एक पैकेट था जिसे वो सर पर लगाए हुए थी।


मैने उनसे बोला “आप आज लिफ्ट में नहीं थी और आते समय भी नहीं दिखाई दी तो मैने सोचा शायद आपकी तबियत खराब हो इसलिए पूछने आ गया, ठीक हो आप ?" 


उन्होंने शांति ने मुझे अंदर आने को बोला और बताया के पिछली रात उनके सर में चोट लग गई थी इसलिए ऑफिस नहीं है अब कल जाएंगी।


खाने का समय था तो मैने उनसे बोला के " खाना ऑर्डर कर दूं” उन्होंने हां का इशारा दिया। उस रात हमने साथ में खाना खाया मौसी को मेरे सामने आय 1 हफ्ते से ज़्यादा हो गया था लेकिन आज पहली बार हम साथ खाना खाने वाले थे।


मौसी खाने का इंतज़ार करते हुए नहाने गई मैं तबतक लेटे हुए मोबाइल चलाने लगा मेरा मूड थोड़ा चुदासा हो रहा था इसलिए Garamkahani.com पर कहानी पढ़ने लगा जिससे लंड की आग अधिक भड़क गई।


मेरा हाथ लंड को सहला रहा था तभी मौसी ने आवाज़ दी “बेडरूम पर मेरे कपड़े पड़े थे ज़रा मुझे दे दो प्लीज़।"


मैं उठकर बेडरूम गया तो बस एक नीली ब्रा और स्कर्ट पड़ी थी मैने वही उठकर कपड़े सूंघे यूयूफफ! मज़ा ही आ गया।


फिर जाकर मौसी को कपड़े पकड़ा दिए अब मेरे लोवर के अंदर लंड फटने को तैयार था। दरवाज़े पर खाना लेकर आए लड़के की दस्तक हुई मैने जाकर उससे खाना लिया और पीछे से मौसी भी आ गई।


मैं खाना लगा ही रहा था की मौसी आकर मेरे सामने बैठ गई। उनके मोटे चूंचे ब्रा में से झाक रहे थे। उनके खुले पेट पर पानी की कुछ बूंदे अभी भी थी।


 मैने उनको गर्मा गरम खाना दिया और हमने साथ बैठे हुए खाया पूरे समय मेरी नज़रे मौसी के हुस्न को निहार रही थी।


मौसी बोली " चलो बेड पर चलकर खायेंगे टीवी देखते हुए।” मैने उनकी बात तुरंत मानली, हम दोनों ने अपनी अपनी प्लेट उठाई और बेड पर जाकर बैठ गई टीवी शुरू करा और खाना खाने लगी।


मौसी का ध्यान टीवी पर था लेकिन मेरा ध्यान मौसी के चूचों पर अटका हुआ था। अचानक मौसी बोली “टीवी देखो मुझे नहीं।" मुझे हिचकी आई और मौसी हंसने लगीं।


हम दोनों ने खाना खत्म करा और मैं वापस अपने कमरे में जाने लगा।


मैने मौसी को कहा “आपको ठीक लगे तो डिनर साथ ही कर लिया करे ?" मौसी बोली “ओके! जो भी खाने का मन हो ऑफिस से आते हुए ले आया करना लेकिन, एक दिन तुम लाना एक दिन मैं।" 


अगले दिन फिरसे मैने जल्दी जल्दी अपने आपको ऑफिस के लिए तैयार करा बाहर निकलते ही मैने देखा मौसी अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर रही है। मैने अपना दरवाज़ा जल्दी से बंद करा और अंडरवियर निकालकर फेक दिया।


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जब तक मैं लिफ्ट में पोहचा तो मौसी अपनी जगह खड़ी हो गई थी। मैं अंदर घुसा तो मौसी सेकसी मुस्कान देकर बोली “चलो अपनी जगह पर आओ।" 


मैं खुशी खुशी मौसी के पीछे आ गया आज मेरा लंड आज़ाद था मैने पीछे आते ही लंड को टांग के आगे करा और मौसी की गांड़ पर दबा दिया।


मौसी को शायद कुछ अलग लगा होगा उन्होंने एक पल नीचे को देखा उसके बाद अपनी गांड़ को पीछे दबाने लगी। अब मौसी खुद अपनी गांड़ मेरे लंड पर सहला रही थी मेरी सांसे भारी होने लगी थी।


लिफ्ट के नीचे जाने तक मौसी और मैं अपनी रासलीला में मग्न रहे उसके बाद अपने अपने रास्ते चले गए। उस पूरे दिन मेरे दिमाग में शाम को मौसी से मिलने के इंतज़ार के ख्याल थे। 


जैसे ही शाम को छुट्टी हुई तो मैं तेज़ी से अपनी बिल्डिंग की तरफ गया। लिफ्ट चलने के लिए तैयार थी लेकिन मौसी लिफ्ट में नहीं आई थी जिससे मेरी उम्मीदें टूटने लगी ।


लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होने ही वाला था के मुझे मौसी दिखी और मैने अपने हाथ को लिफ्ट के दरवाज़े पर लगा दिया ।


लिफ्ट में खड़े कुछ लोगों ने मुझे पागल कहते हुए डाटा लेकिन अब में उनको अपने पागलपन की वजह नहीं बता सकता था मेरा दिमाग लंड में आ गया था।


मौसी मुस्कुराती हुई अंदर आई और फिर से मेरे लंड के आगे गांड़ लगाकर खड़ी हो गई। मैने दोबारा अपने लंड को पैंट में ठीक कर के उनकी गांड़ पर दबा दिया। मौसी भी अब अच्छे से अपनी गांड़ मेरे लंड पर सहला रही थी।


5वी मंज़िल पर आकर लिफ्ट रुक गई। उसने अंधेरा होने लगा ऐसा होने पर आम हालत में मुझे गुस्सा आता था लेकिन आज सचमे बहुत खुशी हुई। अंधेरे में मैने अपने हाथ को मौसी की कमर पर रख दिया और कंधे पर धीरे से चूम लिया।


मौसी अपने हाथ को मेरे पर लाई और मुझे मना करने लगी। फिर भी मैने कमर से उनको अपने करीब कर के लंड को रगड़ दिया । मैं उस समय हवस के 7 वे आसमान पर था।


10 मिनट बाद लिफ्ट शुरू हुई और सब अपने अपने कमरों में घुस गए। मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी मौसी अपने दरवाज़े को खोल रही थी मैं अपने दरवाज़े के आगे खड़ा उनको देख रहा था। उस समय वहां बस हम दोनों थे।


जैसे ही मौसी कमरे के अंदर गई मैं भी उनकी तरफ पलट गया और उनके कमरे घुस गया। मैने अंदर घुसते ही उनको बिना मौका दिए पीछे से दबोच लिया और सीधा चूंचे पकड़ लिए।


मौसी घबराकर चीखते हुए बोली “आआआह! मनीष पागल हो गए हो ये क्या कर रहे हो तुम। बत्तमीज़ में मौसी हूं तुम्हारी।"


मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था । मैं मौसी को पागलो की तरह गले पर चूमने लगा।


मौसी बुरी तरह छठपटा रही थी और मुझे पीछे धकेल रही थी, मैने उनको पीछे लेकर मैने पहले दरवाज़ा बंद करा और सीधे दीवार से लगाकर उनकी पीठ चूमने लगा। मैने उनकी शर्ट खींचकर निकाल दी और पीठ चाटने लगा।


मौसी चिल्लाने लगी तो मैने हाथ लगाकर मुँह बंद कर दिया, मैने उन्हें लेकर सोफे पर ज़बरदस्ती गिराया और पलटकर होठ चूमने लगा। 


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मौसी अपनी पूरी ताकत से मुझे हटा रही थी। मैं अपनी पूरी ताकत से उनको काबू कर रहा था, मैने उनकी ब्रा फाड़ दी और चूंचे दबाने लगा। वो मचल रही थी और मेरी पीठ नोच रही थी जिससे मुझे अधिक जोश मिल रहा था।


मैने सोफे पर ही उनको पैंट खोलकर पैंटी निकाल दी, जल्दी जल्दी मैने अपने लंड को बाहर निकाला और मौसी की चूत पर रखकर ज़ोर का धक्का मार दिया। मौसी की आआआह! की चीख निकल गई जिससे वो थोड़ी बेहोश सी हो गई।


मैने उनकी बेहोशी पर ध्यान नहीं दिया और अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। उनकी चूत पहले से गीली थी लंड अच्छे से अंदर बाहर आ जा रहा था। मौसी की मरी मेरी सी आआह! आआह! हम्ममम मत करो मनीष अआह! की आवाज़ निकल रही थी।


दस मिनट Mausi Ki Zabardasti Chudai के बाद मैने अपना पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया और निढाल होकर ज़मीन पर लेट गया।


थोड़ी देर बाद मेरी आंख खुली तो मैने देखा के मेरे हाथ दोनों तरफ सोफे से बंधे हुए है मैं पूरी तरह नंगा बैठा हूं मेरे ऊपर एकदम से पानी पड़ा मेरी मुझे पूरी तरह होश आया तो मैने देखा मौसी सामने नंगी बैठी है।


वो अपनी चूत में उंगली कर रही थी, उनके दूसरे हाथ में एक बेल्ट है मौसी से मैने बोला “मौसी ये सब क्या है। मुझे मुझे माफ कर दो मैं बहक गया था आपके जिस्म आपके हुस्न पर, मुझसे गलती हो गई।" 


मौसी बोली " जो होना था वो हो गया करना तो मैं भी चाहती थी लेकिन तुझे ज़बरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी। अब गलती हुई है तो उसकी सज़ा भी सहनी पड़ेगी।”


मौसी ने अपनी चूत से उंगली निकाली और मेरी तरफ चलकर आई पहले उन्होंने मुझे एक ज़ोरका थप्पड़ लगाया शायद मेरा गाल लाल हो गया होगा। फिर अपनी चूत के पानी से गीली हुई उंगलियों को मेरे मुंह में डाल दी और बोली “चूस मेरे पानी को।" 


मुझे वो नमकीन पानी चूसना पड़ा मौसी का गोरा नंगा जिस्म मेरे सामने था इसी जिस्म को सोचकर में मूठ मारा करता था। मौसी ने मेरे हलक तक अपनी उंगली डाली उनके बाद मेरे नंगे लंड पर अपनी गीली चूत लेकर बैठ गई।


उन्होंने एक थप्पड़ फिर से मुझे मारा और मेरे गाल पकड़कर मेरे होठ पर होठ रख दी वो मेरे होठों को काट रही थी और चूस करी थी उन्होंने मेरे मुंह को खोला और उसमें थूक दिया फिर अपनी जीभ लेकर मेरे मुंह में डाल दी।


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मौसी मेरे लंड को चूत के नीचे कुचल रही थी मुझे दर्द हो रहा था लेकिन वो नहीं मानी उसके बाद उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर लगाया पहले उन्होंने मेरे मुंह पर थूका और चेहरे को चाटने लगी।


मौसी ने चूत के अंदर मेरा लंड लिया और मुझे थप्पड़ मारते मारते लंड पर कूद ने लगी वो चुदाई करते करते मुझे मार रही थी।


 मुझे अच्छा लग रहा था साथ ही दर्द भी हो रहा था। मौसी अआआह! ओह्ह्ह्ह! कुत्ता साला मुझसे ज़बादर्ती करेगा! आआह दिखा अब कितना बड़ा मर्द है आआआह।


मौसी लगातार मेरे मुंह पर थूक कर चाट रही थी मेरा चेहरा उनके थूक से गिला हो चुका था मेरे सामने उनके नंगे चूंचे उछल रहे थे लेकिन हाथ बंधे होने के कारण में उनको पकड़ नहीं सकता था।


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20 मिनट मौसी मुझसे इसी तरह चुदाई करवाती रही उसके बाद बोली “अगर तू मेरी चूत का गुलाम बनेगा तो तू मज़े ले सकता है मेरे वरना आज ये सब आखरी बार है।” ऐसा मौका कोई भी मर्द नहीं छोड़ सकता था मैने भी हाँ कर दी।


हां करते ही मौसी ने मेरे हाथ खोल दिए और मैने उनके चूंचे दबाने शुरू कर दिया। जब मौसी को महसूस हुआ के उनका पानी निकलने वाला है तो वो उठी और मेरे चेहरे से चूत को रगड़ने लगी।


मेरे होठों पर वो अपनी चूत घुसते हुए आआह! आआह! ओह्ह्ह्ह! मनीष अआआह कर रही थी। कुछ ही पल बाद मौसी की टांगे कांपने लगी।


 मेरे होठों से चूत मिलाकर उन्होंने अपना सारा पानी निकाल दिया मैने भी अपनी जीभ उनके छेद के अंदर तक डालकर घुमाई।


मैने अपनी मौसी की चूत से निकलता हुआ सारा रस पी लिया इसके बाद मौसी नीचे उतरी और घुटनों पर बैठकर मेरे लंड को चूमने लगी। चूमते चूमते उन्होंने पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया।


मौसी पूरी रफ्तार से लंड को खा रही थी मेरे लंड पर बहुत ज़ोर आ रहा था जो मेरे लिए सहना मुश्किल हो रहा था मैने उनके बाल पकड़े और मुंह चोदने लगा।


 10 मिनट की मुंह चुदाई के बाद मेरा भी निकलने वाला था मैने सर को नीचे दबाकर सारा पानी मौसी के मुंह में छोड़ दिया।


मेरे लंड का रस उनकी नाक से बाहर आने लगा मौसी मेरा सारा पानी पी गई। हम दोनों बेजान होकर ज़मीन पर गिर गए और एक दूसरे के होठों चूमने लगे।


उसके बाद से मौसी और मेरा ये रोज़ का किस्सा बन गया ऑफिस के बाद मुझे उनकी चूत की गुलामी करनी होती थी। कभी वो मुझे अपना सुसु पिलाती कभी मेरे चेहरे पर थूक कर चाटती थी।


हमारा ये रिश्ता आज भी कायम है और रोज़ मौसी और मैं नए नए तरीके से अपनी चुदाई को अंजाम देते है।


मेरी ये Hindi Sex Kahani आपको कैसी लगी hashmilion5@gmail.com पर मैल कर के ज़रूर बताना। धन्यवाद।

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