खेत में प्यासी चाची की पहली चुदाई! 02
Antarvasna Family Hindi Sex Stories : खेत के ट्यूबवेल पर प्यासी चाची की चूत फाड़ी! अभिनय ने 36 वाले चूचे दूध पिया और चाची को पानी में जोरदार चोदा!
अभी तक आपने "खेत में प्यासी चाची की पहली चुदाई!" में पढ़ा :-
मेरे सामने वो अपने कपड़ो को कभी ठीक नहीं करती उनकी अदा से पता चलता के वो मेरे लन्ड को तैयार कर रही है।
वो मुझे अपने बचपन की कहानियां सुनातीं और मैं उन्हें शहर की बातें बताता। हमारी बातचीत में एक सच्ची दोस्ती की झलक तो थी साथ ही हवस भरे रिश्ते के पनपने की निशान भी थे।
धीरे-धीरे हमारा रिश्ता और गहरा होता गया। हम साथ बैठकर मेरे फोन में रोमांटिक फिल्म देखते थे वो मुझसे चिपककर मज़ा लेती थी। हम दोनों के पास हरा सिग्नल था बस मौके की कमी थी।
अब आगे :-
एक दिन मैंने चाची से कहा कि हम खेतों में भी काम करेंगे। पहले वो थोड़ी हिचकिचाईं, लेकिन फिर मान गईं। हम दोनों सुबह-सुबह खेतों की ओर निकल पड़े। खेतों की मिट्टी की खुशबू ने मन को ताजगी से भर दिया।
उस दिन मैंने महसूस किया कि औरत असली खुशी क्या होती है। उसे बस किसी का साथ चाहिए जिससे वो हसी खुशी अपना हर रिश्ता आगे बढ़ाए।।ये Family Sex Story आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।
खेतों में काम करते करते हमे दोपहरी हो गई तो मैने भूख के बारे में उनको बोला। चाची खाने के लिए समान लाई थी हमने भरपूर खाया पिया फिर कुछ देर चाची मेरे हाथ पर सर रखकर लेती आसमान देखती रही।
मौसम में थोड़ी गर्मी बढ़ गई थी चाची ने एक हल्की साड़ी ले रखी थी जो उनके जिस्म को छुपाने के लिए काफी नहीं थी।
मैने चाची को बोला ' चलिए टूब वेल पर नहाएंगे '। वो मना करने लगी के कोई देख लेगा मगर दोपहर में गांव में लोग कम ही बाहर घूमते है और खेतों में भी दूर दूर तक कोई नहीं दिख रह था।
जब मैने इन बातों पर ध्यान दिलाया तो चाची मेरी बात मान गई।
हम मिलकर ट्यूब वेल पर नहाने लगे, मैने अपने सारे कपड़े उतारे और बस एक चड्डी में ही पानी में उतर गया। मेरी चड्डी का रंग चाची की साड़ी से मिल रहा था जिसे देखकर वो हास पड़ी।
फिर चाची भी अंदर घुसी उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी और बस पेटीकोट और ब्रा में पानी में आ गई।
हमने मज़ा करते करते नहाया और एक दूसरे पर पानी डालने लगे।
मैने ध्यान दिया के उनकी ब्रा में निप्पल चमक रहे है, उन्होंने भी मेरी नज़र को पकड़ लिया जैसे ही मैने नज़र हटाई तो वो मुस्कुरा दी। उन्होंने एक तीखी मुस्कान देकर मुझसे कहा “अच्छे है के नहीं!” ।
मैने भी थोड़ा निसंकोच होकर बोल दिया “बिना देखे कैसे कह दूं कि अच्छे है।”
तो चाची बोली “अच्छा जी! भतीजे की चाची के चूचे देखने है।” तो मैने भी हिम्मत कर के बोल दिया “अगर चाची दिखाएंगी तो बिल्कुल देख लेंगे।”
मेरा जवाब सुनकर चाची ने अपने हाथ काटे और मेरी तरफ कदम बढ़ा दिए।
वो मस्ताने से दो कदम लेकर मेरे पास आई और घूम गई, मैने पीछे से उनकी ब्रा का हुक खोला और ब्रा नीचे गिर गई।
फिर धीरे धीरे चाची मेरी तरफ घूमी वो इतना धीरे घूमी की मेरा लन्ड फटने लगा। मेरे सामने चाची की मोती सांवली चूची पानी से चमक रही थी उसपर काले खड़े निप्पल बता रहे थे के आज क्या होने वाला है।
चाची मेरे और करीब आई और बाहें मेरे गले में डाल दी, मैने अपने हाथ लेकर उनकी चूंची महसूस करी वो जान कर सांसे तेज़ ले रही थी जिससे चूंचे ऊपर नीचे हो रहे थे।
उनकी सांसों की खुशबू मुझे बहका रही थी। उनकी नंगी खुली चूची मेरे सामने थी।
मैने जैसे ही उनके सीने को हाथ लगाया तो चाची सिहर गई, उनके मुंह से एक हम्ममम! की सुकून भरी सिसकी निकली।
उस समय चाची और मैं बस चड्डी में खड़े थे आसपास खुले खेत और हमारे भीगे जिस्म थे, मैने चाची का चेहरा देखा उनके चेहरे पर वासना की प्यास साफ दिख रही थी चाची की आंखे बंद थी उन्हें होठ मेरा इंतजार करते हुए कांप रहे थे।
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मैने गौर करा चाची अपने बंद होठों से धीरे धीरे मेरी तरफ बढ़ रही थी, मैने भी उनका स्वागत करते हुए अपने होठ उनके होठों पर रख दिए। चाची एक लन्ड की प्यासी शेरनी की तरह मुझे चूमने लगीं।
उन्होंने अपने हाथ मेरी पीठ पर जमाए और पैंटी में छुपी चूत को लन्ड पर दबाने लगी।
हम एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे, चाची मेरी जीभ को चूस कर मुझे उकसा रही थी। फिर मैंने उनकी गर्दन को चूमना शुरू करा, गले को चूमते चूमते मैं चूंची पर आया और उसे पीने लगा।
मेरी चाची का एक दूध पिता बच्चा भी है जिसकी वजह से उनके दूध भरे हुए थे, जैसे ही मैने निप्पल पर मुंह लगाया तो उसमें से दूध आने लगा।
उसे पीकर मुझे जोश आ गया फिर मैने ज़ोर से निप्पल चूसना शुरू करी मैं एक निप्पल पीता और दूसरे को नोचता चाची भी मदहोश होने लगी थी वो अआआह! आह अभिनय ओह! हम्ममम!
कब से प्यासी थी मैं इस सुकून के लिए आअआअह! जब से तुमने मेरी गांड़ दबाई थी तब से ही मैं बेचैन हूं तुम्हारे लिए। ओह अभिनय हम्ममम आगाह पियो और पियो खत्म कर दो।
चाची की बाते मुझे उत्साहित कर रही थी मैने उनको घुमाया और पैंटी उतर दी उसके बाद अपनी चड्डी उतारकर लन्ड को उनकी गांड़ पर घिसने लगा और चूचे दबाने लगा।
एक हाथ मेरा चूंचे मसलता और दूसरा चूत को सहलाता चाची पानी अंदर भी बिना पानी की मछली की तरह तड़प रही थी।
उसके बाद में होज़ की दीवार पर बैठा मेरा लन्ड पूरी तरह तैयार खड़ा था । चाची ने मेरे लन्ड को भूखी नज़रों से देखा और सदियों की प्यासी की तरह टूट पड़ी।
उन्होंने बहुत सख्ती से मेरे लन्ड को चूसा वो जब जब गले तक मेरे लन्ड को लेती तो मुझे दर्द का एहसास होता। चाची बहुत ज़्यादा चुदासी हो रही थी।
मैने उनको लन्ड से हटाकर चोदना चाहा मगर उन्होंने मुझे रोक दिया वो घुप! गप्प! घुप्प! गोपप! की आवाज़ के साथ बुरी तरह लन्ड को खा रही थी। आखिरकार उन्होंने मेरा लन्ड छोड़ा और खड़ी हुई।
उनका चेहरा हवस से लाल हो गया था उनकी आंखों में भी वासना का लाल रंग था।
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चाची मुझे जिस तरीके से देख रही थी मुझे एक डर महसूस हुआ, मेरे सामने एक नंगी औरत थी जिसे महीनों से लन्ड नहीं मिला था और पीछे कुछ दिनों से लगातार मैं उनको उकसा रहा था!
आज हम दोनों नंगे थे और उनके सामने एक लन्ड था मैने ध्यान दिया चाची की चूत के पास से पानी में गुब्बारे बन रहे थे।
चाची ने फिर मेरा लन्ड पकड़ कर खींचा और मेरे होठों पर हावी हो गई, मैं दीवार के सहारे खड़ा था , चाची ने अपना एक पर मेरे पेट पर बन्द लिया और दूसरे हाथ से चूत को लन्ड पर टिका लिया उसके बाद एक घटक मुस्कान देकर झटका मारा ।
उनके झटके से हमारी आअआअह! निकल गई, लन्ड चूत में जाते ही चाची के चेहरे पर एक सुकून की लहर निकल गई। उन्होंने मुझे कस कर गले लगा लिया, फिर धीरे धीरे लन्ड को चूत में लेने लगी।
मैने भी उनकी गोल गोल गांड़ को पकड़ कर धक्के लगाने लगा।
धीरे धीरे हमारी रफ्तार बढ़ने लगी और हवा में आगाह! ओहह्ह्ह्ह। हम्ममम अआआह आह आगाह ओह अभिनय ओहह्ह्ह्ह , और तेज़ आअआअह करते रहो आअआअह।
मैं बहुत प्यासी हूं आअआअह चोदो आह चोदो की आवाज़ गूंज ने लगी। मैं चाची के होठों को खा रहा था और उनकी चूत मेरे लन्ड को खा रही थी, मैने उनको पलटा और पूरी ताकत से उनकी चुदाई करने लगा ओहह्ह्ह्ह।
हम्ममम अआआह आह आगाह ओह अभिनय ओहह्ह्ह्ह , और तेज़ आअआअह करते रहो आअआअह वाली उनकी सिसकियां मुझे जोश दिला रही थी।
हमारी ये पहली चुदाई पूरे आधे घंटे चली करीब 20 मिनिट चाची मेरा लन्ड चूत में दबाकर खेत में लेटी रही उसके बाद हम घर वापस लौटे।
चाचा की हालत अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं थी। लेकिन अब हम दोनों मिलकर उनका ख्याल रखते थे। मैं उन्हें समय पर दवा देता और चाची उनका खाना बनातीं।
हम दोनों की कोशिश थी कि चाचा को किसी चीज की कमी ना हो। उनकी सेवा करते हुए हमें एक अलग ही संतोष मिलता था और चाची की चूत भी अब संतुष्ट थी।
चाची और मैं अब सिर्फ रिश्तेदार नहीं थे हमारे रिश्ते में चुदाई का रंग लग चुका था। हमें जहां मौका मिलता हम वहां चूत और लन्ड का खेल खेलने लगते रोज़ रात को अपने बच्चे को सुलाकर और चाचा को दवाई देकर चाची मेरे पास आ जाती।
मैं रात भर उनके जिस्म को भोगता और चरमसुख लेता यह रिश्ता अब सिर्फ चाची भतीजे से अधिक अपनापन का बन चुका था। चाचा की तबियत अब पहले से बेहतर हो चुकी थी।
वो धीरे-धीरे चलने-फिरने लगे थे। कुछ समय बाद मुझे शहर वापस जाना पड़ा। मेरा और चाची का मन भारी था क्योंकि अब हमे एक दूसरे की लत लग गई थी।
अफीम के नशे से ज़्यादा बुरा है चूत लन्ड का नशा। मैं इस घर और चाची को छोड़कर नहीं जाना चाहता था। चाची की आंखों में भी आंसू थे। लेकिन उन्होंने मुझे हिम्मत दी और कहा कि मैं जरूर वापस आऊं।
मैंने उनसे वादा किया कि मैं जल्दी ही फिर आऊंगा। मैंने चाचा का आशीर्वाद लिया और गांव से विदा ली। बस में बैठते ही मेरी आंखों के सामने सारी यादें घूमने लगीं। यह सफर मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गया था।
चाची ने चलते चलते अपनी कुछ पैंटी दी और मेरी चड्डी अपने पास रखली वो बोली “जब भी याद आएगी! इनके सहारे एक दूसरे को याद करेंगे।”
ये Family Hindi Sex Stories कहानी कैसी लगी ये कमेंट में बताए और hashmilion5@gmail.com अपनी कोई इच्छा हो तो मेल कर दे!
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