दो आंटियों की चूत से किराया माफ का सफर!
Bhabhi Ki Chudai : दो विधवा आंटियों ने, जवान लड़के की रेंट माफ कर अपनी चूत और गांड चुदवाई! पिलाया दूध व सुसु! लड़के ने थ्रीसम में फाड़ी दोनों बूढ़ी चूतें! Vasna!
इस कहानी से संबंधित पहला भाग : "मकान मालकिन ने रेंट माफ कर चोदवाई चूत!"
उस दिन दोपहर का वक्त था। गर्मी दिल्ली में ऐसी थी कि दीवारें भी पसीना बहा रही थीं। मैं अपने रूम में लेटा था, पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था। अचानक नीचे से आंटी की आवाज़ आई।
“अरविंद… बेटा… नीचे आना जरा।”
मैं उतरकर गया। किचन में कंगना आंटी खड़ी थीं। उनके साथ एक औरत थी – मीरा आंटी। उम्र शायद 55 के आसपास। कंगना आंटी से थोड़ी पतली, लेकिन जिस्म से काफी सघन।
उनकी साड़ी हल्के हरे रंग की थी, ब्लाउज गहरा कट वाला। चूचियां छोटी जरूर थीं, लेकिन काफी सख्त और ऊपर उठी हुई दिख रही थीं। चेहरे पर हल्की झुर्रियां थीं, लेकिन आँखों में एक भूखी-सी चमक थी।
कंगना आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये मेरी पुरानी सहेली हैं… मीरा। पति नहीं रहे उनके भी। आजकल अकेली रहती हैं। बोलीं कि तुझे देखने आएँ।”
मीरा आंटी ने मेरी तरफ देखा। उनकी नज़र मेरे चेहरे से सीधे छाती पर गई, फिर नीचे। मैंने टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे। गर्मी की वजह से शॉर्ट्स थोड़े टाइट हो गए थे। उनकी आँखें वहीं अटक गईं।
“वाह… इतना जवान लड़का?” मीरा आंटी ने धीरे से कहा, आवाज़ में हल्की हँसी थी। “कंगना, तूने अच्छा किराएदार चुना है।”
मैं शर्मा गया। सिर झुका लिया। लेकिन अंदर कुछ हलचल हुई। पिछले एक महीने में कंगना आंटी ने मुझे इतना इस्तेमाल किया था कि अब किसी औरत की ऐसी नज़र भी मेरे लंड को हिला देती थी।
कंगना आंटी ने चाय बनाई। हम तीनों बैठे। बातें शुरू हुईं - मौसम, महंगाई, अकेलापन। मीरा आंटी बार-बार मेरी तरफ देख रही थीं।
जब मैं चाय का कप उठाता, उनकी उंगलियाँ मेरे हाथ से छू जातीं। एक बार तो जानबूझकर छुआ। गर्म छुआव था।
“बेटा,” मीरा आंटी ने धीरे से पूछा, “तू पढ़ाई के अलावा और क्या करता है? इतना पतला-सा जिस्म… कहीं जिम जाता है क्या?”
“नहीं आंटी… सिर्फ पार्ट-टाइम जॉब।”
कंगना आंटी हँसीं। “मीरा, ये लड़का बहुत शर्मीला है। लेकिन रात को… शर्मा नहीं करता।”
दोनों औरतें एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं। मैंने नज़रें फेर लीं। लेकिन मेरा लंड शॉर्ट्स में हल्का-सा उठने लगा था।
शाम होने लगी। कंगना आंटी ने कहा, “मीरा आज रात यहीं रुकेगी। तू भी नीचे ही खा लेना।”
खाना बनाते वक्त किचन में जगह कम थी। मैं सब्जी काट रहा था। पीछे से कंगना आंटी आईं। उनका मोटा पेट मेरी कमर से सटा। उनकी चूचियाँ मेरी पीठ पर दब गईं।
उन्होंने धीरे से फुसफुसाया, “आज रात मज़ा आएगा बेटा… दो-दो आंटी।”
मैंने चाकू रोक दिया। साँस भारी हो गई।
मीरा आंटी दरवाज़े पर खड़ी थीं, देख रही थीं। उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुराईं और अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया। पल्लू सरकते ही उनकी कमर और नाभि दिख गई। चिकनी, गोरी त्वचा।
रात का खाना खाते वक्त टेबल पर तीनों बैठे। बातें गंदी होती गईं। कंगना आंटी ने शराब निकाली - पुरानी ब्रांडी। दो-दो पेग पीने के बाद मीरा आंटी की आवाज़ और भी मोटी हो गई।
“कंगना… तूने बताया था कि ये लड़का… सब कुछ करता है।” ये Antarvasna Hindi Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।
कंगना आंटी ने मेरी जांघ पर हाथ रखा। ऊपर की तरफ सरकाया। “हाँ… सब कुछ। दूध भी पीता है, सुसु भी… और चूत भी फाड़ता है।”
मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। शॉर्ट्स में तंबू सा बन गया था। मीरा आंटी की नज़र वहीं थी। उन्होंने जीभ से होंठ चाटे।
“दिखा… ज़रा।” मीरा आंटी ने अचानक कहा।
मैं हैरान रह गया। कंगना आंटी ने मुझे आँख मारी। “दिखा दे बेटा। शर्मा मत।”
मैं उठा। शॉर्ट्स नीचे खींचे। मेरा काला, मोटा, 6 इंच का लंड बाहर निकल आया। नसों से भरा हुआ, सिर से टपकता हुआ।
मीरा आंटी की साँस रुक गई। “उफ्फ… इतना मोटा? कंगना… तूने सही कहा था।”
उन्होंने कुर्सी से उठकर पास आईं। हाथ बढ़ाया, लेकिन छुआ नहीं। बस हवा में महसूस किया। “गर्म है… बहुत गर्म।”
कंगना आंटी पीछे से आईं। उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया। धीरे-धीरे हिलाने लगीं। “देख मीरा… कितना कड़ा हो जाता है। रोज रात यही करता है मेरी चूत में।”
मैं कराह उठा। “आंटी… आह…”
मीरा आंटी अब और करीब आ गईं। उनकी साँस मेरे गाल पर पड़ रही थी। उन्होंने अपनी उँगली से मेरे लंड के सिर को छुआ। हल्के से मसला। “इतना गीला… पहले से ही। अच्छा लगता है क्या बेटा… दो आंटी के हाथ?”
मैंने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया। लंड और सख्त हो गया।
कंगना आंटी ने मुझे सोफे पर बैठा दिया। दोनों औरतें मेरे सामने खड़ी हो गईं। कंगना आंटी ने अपना ब्लाउज के हुक खोले। उनकी भारी चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल पहले से ही कड़क थे। दूध की एक बूँद टपक पड़ी।
मीरा आंटी ने भी अपनी साड़ी का पल्लू हटाया। ब्लाउज खोला। उनकी चूचियाँ छोटी थीं, लेकिन निप्पल लंबे और गहरे रंग के। उन्होंने अपने निप्पल को अपने ही हाथ से मसला।
“देख… ये भी कभी दूध देती थीं। अब सिर्फ चूसने के लिए बची हैं।”
दोनों मेरे पास आईं। कंगना आंटी ने मेरा सिर अपनी चूची पर दबा दिया। “चूस… पहले मेरा।”
मैंने मुँह खोला। निप्पल अंदर गया। मीठा-मीठा स्वाद। दूध की धार मुँह में भर गई। मैं चूसने लगा। कंगना आंटी कराह उठीं। “आआह… हाँ बेटा… ऐसे ही… जोर से चूस…”
मीरा आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चूची पर रख दिया। “इधर भी… दोनों साथ।”
मैं एक हाथ से मीरा आंटी की चूची मसल रहा था, दूसरे से कंगना आंटी की। मुँह में कंगना का निप्पल था। कमरा सिर्फ कराहों से भर गया था।
“उम्मम्म… आह्ह्ह…” कंगना आंटी की आवाज़ काँप रही थी। “ओह्ह्ह… धीरे… नहीं… जोर से…” मीरा आंटी भी कराह रही थीं।
मेरा लंड हवा में झूल रहा था। कोई छू नहीं रहा था, लेकिन इतना उत्तेजित था कि टपक रहा था।
एक घंटा ऐसे ही बीत गया। दोनों औरतें बारी-बारी से अपनी चूचियाँ मेरे मुँह में डालती रहीं। दूध, पसीना, और उनकी गर्म साँसें। कमरा गर्म हो चुका था।
अचानक कंगना आंटी ने कहा, “अब काफी हो गया। रात अभी बाकी है। चल… बेडरूम में।”
मीरा आंटी ने मेरा लंड एक बार फिर छुआ। हल्के से दबाया। “आज रात… पूरा निकालूँगी इसका। धीरे-धीरे। जल्दी नहीं।”
मैं उठा। लंड हिलता हुआ। दोनों औरतें आगे-आगे चल रही थीं। उनकी गांडें साड़ी के अंदर लहरा रही थीं। कंगना आंटी की मोटी, मीरा आंटी की थोड़ी सख्त।
बेडरूम का दरवाज़ा बंद हुआ। अंदर सिर्फ एक बल्ब जल रहा था। बिस्तर बड़ा था। दोनों औरतें मेरे सामने खड़ी हो गईं। साड़ियाँ खोलने लगीं… धीरे-धीरे।
मैं देख रहा था। साँसें तेज़। लंड और भी सख्त। लेकिन अभी भी कोई जल्दी नहीं थी। सिर्फ नज़रें, छुआव, और कराहें।
बेडरूम में हल्का अंधेरा था। सिर्फ एक पीला बल्ब जल रहा था। हवा में पसीने और औरतों की देह की महक फैल रही थी। मैं बिस्तर के पास खड़ा था। लंड अभी भी पूरा खड़ा, सिर से पारदर्शी रस टपक रहा था।
कंगना आंटी ने अपनी साड़ी का पल्लू पूरी तरह सरका दिया। साड़ी धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी। उनकी मोटी जांघें, गोरी चर्बी वाली पेट, और सफेद बालों वाली चूत दिखने लगी। चूत के होंठ थोड़े लटके हुए थे, लेकिन गीले चमक रहे थे।
मीरा आंटी भी अपनी साड़ी खोल रही थीं। उनकी देह पतली थी, लेकिन कमर में एक खूबसूरत मोड़ था। उनकी चूत साफ-सुथरी थी, सिर्फ हल्के बाल थे।
दोनों आंटी अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं।
कंगना आंटी मेरे पास आईं। उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतारी। मेरे सीने पर हाथ फेरा। “कितना नरम है अभी भी… जवान मांस।” फिर उन्होंने मेरी गर्दन पर हल्का-सा काटा। “उम्म्म…”
मीरा आंटी पीछे से आईं। उनकी चूचियाँ मेरी पीठ से सटीं। निप्पल कड़क होकर चुभ रहे थे। उन्होंने मेरी कमर से नीचे हाथ डाला और लंड को हल्के से पकड़ लिया। “आह्ह्ह… इतना मोटा… गर्म लोहे जैसा।”
मैं सिहर उठा। “आंटी… धीरे… आआह…”
वे दोनों मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। अब मैं बीच में लेटा था। कंगना आंटी दाईं तरफ, मीरा आंटी बाईं तरफ। दोनों मेरे सीने पर झुक गईं। उनकी चूचियाँ मेरे मुंह के पास।
कंगना आंटी ने अपना निप्पल मेरे होंठों पर रखा। “चूस बेटा… आज पूरी रात पीना है।”
मैंने मुंह खोला। दूध फिर निकला। गर्म, मीठा, थोड़ा खट्टा। मैं जोर से चूसने लगा। “उम्म्म… आंटी… स्वादिष्ट है…”
मीरा आंटी ने मेरे दूसरे हाथ को अपनी चूत पर ले जाकर रख दिया। “इधर भी… उँगलियाँ डाल।”
मेरी उँगलियाँ उनकी चूत के होंठों पर गईं। गीली, चिपचिपी। मैंने एक उँगली अंदर डाली। अंदर बहुत गर्मी थी। मीरा आंटी काँप गईं। “आआह्ह्ह… हाँ… गहरी… और घुमाओ…”
कंगना आंटी मेरे दूसरे हाथ से अपना निप्पल मलवा रही थीं। तीनों देह एक साथ हिल रही थीं। कमरे में सिर्फ कराहें और चूसने की आवाज़ें।
“चूस… जोर से… आह्ह्ह… मेरे दूध का राजा…” – कंगना आंटी
“उँगली तेज… फाड़ दे मेरी बूढ़ी चूत…” – मीरा आंटी! ये Makan Malkin Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।
मेरा लंड अब दर्द कर रहा था। कोई छू नहीं रहा था। सिर्फ हवा में तना हुआ।
करीब 20 मिनट बाद कंगना आंटी नीचे सरकीं। उन्होंने मेरे लंड के पास मुँह ले जाया। लेकिन चूसा नहीं। सिर्फ गर्म साँसें फेंकी। “देख मीरा… कितना सुंदर लंड है। नसें फूली हुईं।”
मीरा आंटी भी नीचे आईं। दोनों औरतें मेरे लंड के दोनों तरफ मुँह ले गईं। उन्होंने जीभ निकाली। दोनों तरफ से लंड को चाटने लगीं। जैसे आइसक्रीम हो।
“उफ्फ्फ… स्वाद… नमकीन…” मीरा आंटी ने कहा।
वे दोनों जीभ से लंड के सिर को चाट रही थीं। कभी-कभी होंठ लगाकर हल्का चूस लेतीं। लेकिन पूरा मुँह नहीं ले रही थीं। सिर्फ tease।
मैं बेचैन हो गया। “आंटी… प्लीज… चूसो ना… आआह्ह्ह…”
कंगना आंटी हँसीं। “अभी नहीं बेटा। पहले हम दोनों को तैयार कर।”
उन्होंने मुझे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब मैं कुत्ते की तरह था। कंगना आंटी मेरे सामने आईं, चूत मेरे मुंह के पास। मीरा आंटी पीछे, मेरी गांड के पास।
“चाट…” कंगना आंटी ने कहा और अपनी चूत मेरे चेहरे पर दबा दी।
मैंने जीभ निकाली। नमकीन स्वाद, थोड़े सफेद बाल जीभ में अटक रहे थे। मैं जोर से चाटने लगा। कंगना आंटी की कमर हिलने लगी। “आआह्ह्ह… हाँ… अंदर जीभ डाल… चूस मेरी चूत का रस… ओह्ह्हह!”
पीछे मीरा आंटी ने मेरी गांड के दोनों चुट्टों को फैलाया। उनकी गर्म जीभ गांड के छेद पर लगी। “उम्म्म… साफ… जवान गांड…” उन्होंने चाटना शुरू किया। गुदगुदी और मजा एक साथ। मेरी कमर हिल गई।
“आआह… आंटी… क्या कर रही हो…” मैं कराह उठा।
दोनों तरफ से चाटा जा रहा था। मैं कंगना आंटी की चूत चाट रहा था, वे मेरे सिर को दबाए हुए थीं। मीरा आंटी मेरी गांड चाट रही थीं, कभी उँगली भी डाल रही थीं।
समय गुजरता गया। 30-40 मिनट तक यह सिलसिला चला। दोनों औरतें बारी-बारी से पोजीशन बदल रही थीं। कभी मीरा की चूत मेरे मुंह पर, कभी कंगना की गांड।
अब सबके शरीर पसीने से तर थे।
कंगना आंटी ने आखिरकार कहा, “अब काफी tease हो गया। अब असली खेल शुरू करते हैं।”
वे दोनों लेट गईं। कंगना आंटी ऊपर, मीरा नीचे। दोनों की टांगें फैली हुईं। चूतें गीली, खुली हुईं।
“पहले कंगना को चोद…” मीरा आंटी ने कहा। “मैं देखूंगी।”
कंगना आंटी ने मुझे अपनी तरफ खींचा। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उनकी चूत के मुंहाने पर टिका। गर्मी महसूस हो रही थी।
“धीरे… अंदर डाल…” कंगना आंटी ने फुसफुसाया। उनकी आँखें बंद थीं।
मैंने हल्का धक्का दिया। लंड का सिर अंदर घुसा। चूत ढीली थी, लेकिन बहुत गर्म और चिपचिपी।
“आआह्ह्ह… भर गया… राजा…” कंगना आंटी कराह उठीं।
मैं रुक गया। पूरा नहीं डाला। सिर्फ सिर अंदर। धीरे-धीरे हिलाने लगा। ये Aunty Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।
मीरा आंटी पास बैठी थीं। एक हाथ से अपनी चूत मल रही थीं, दूसरे से कंगना आंटी की चूची। “जोर से… लेकिन धीरे… उसे पूरा मजा दो…”
मैंने थोड़ा और अंदर डाला। अब आधा लंड अंदर था। कंगना आंटी की कमर उठने लगी। “हम्म्म… आह्ह्ह… गहरा… फाड़ दे मेरी बूढ़ी चूत…”
मेरा लंड अब पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। धीमी गति में। हर धक्के पर कराह बढ़ रही थी।
“आआह्ह्ह… ओह्ह्ह… हाँ बेटा… ऐसे ही… मेरी चूत तुझे याद करेगी…” कंगना आंटी की आवाज़ काँप रही थी।
मीरा आंटी अब मेरे पास आईं। उन्होंने अपना निप्पल मेरे मुंह में दिया। मैं चूसता रहा। तीनों शरीर एक लय में हिल रहे थे।
लेकिन मैं जानबूझकर तेज नहीं कर रहा था। धीरे-धीरे चोद रहा था। ताकि मजा लंबा चले।
कंगना आंटी की चूत अब और गीली हो गई थी। हर धक्के पर “पच… पच…” की आवाज़ आ रही थी।
“मेरी बारी…” मीरा आंटी ने अधीर होकर कहा।
मैंने लंड बाहर निकाला। कंगना आंटी ने निराशा से कराहा। “निकाल मत… आह्ह…”
लेकिन मीरा आंटी पहले से ही घोड़ी बन चुकी थीं। उनकी पतली गांड ऊपर। चूत पीछे से चमक रही थी।
मैं उनके पीछे गया। लंड को उनके चूत पर रगड़ा।
“डाल… जल्दी…” मीरा आंटी ने कहा।
आगे की कहानी : "दो आंटियों की चूत से किराया माफ का सफर! 02"
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