भतीजे ने चलती बस में फाड़ी मासी की चूत!
Bus Sex Story : भतीजे ने चलती बस में दबाए मासी के बूब्स! पजामी उतारी और नंगी चूत में डाला मोटा लंड! और शुरू हुई जबदस्त चुदाई, अंत में अंदर ही छोड़ दिया अपना माल! Aunty Sex Story!
तो कैसे है आप लोग ? दोस्तो मेरा नाम है पीहू और मैं रहती हूं गोरखपुर में मैं एक हाउस वाइफ हूं मगर लिखना मेरा शोक है बहुत समय से मैं सोच रही थी।
अपनी लाइफ के कुछ चटपटे गरम किस्से आप लोगों के साथ बाटलू तो चहलिए शुरू करते है आज मेरी पहली सच्ची कहानी के साथ।
ये कहानी तब की जब मेरी उमर 35 साल थी मेरी शादी को तब 8 साल गुज़र गए थे मेरे पति से तब मेरा रिश्ता कुछ ठीक नहीं चल रहा था ।
मैं अपने मायके दिल्ली जा रही थी। उस समय मेरे साथ मेरे भाई का बेटा भी था जिसकी उम्र 22 साल की रही होगी उसका नाम था आनंद।
आनंद दिखने में एक खूबसूरत लड़का था लंबाई उसकी 5.6 थी और सेहत अच्छी होने के कारण उसे देखकर लड़कियों के दिल भी मचलते ही होंगे आनंद वैसा ही था जैसा के एक आम लड़का हो सकता है।
मैं कहने को उसकी मासी हूं लेकिन मैंने उसकी नज़रों में हमेशा अपने लिए एक वासना देखी है। मेरा मानना है इसमें उसकी गलती नहीं थी।
एक दिन जब में अपने मायके थी तब में आनंद के कमरे में कपड़े बदल रही थी । मैं तब बढ़ पेटीकोट में थी और मेरी चूचियां नंगी हवा में झूल रही थी।
तभी आनंद कमरे में आ गया एक 18 साल के लड़के के सामने 30 साल की औरत जिसके 36 के चूंचे नंगे लटक रह हो उसकी 28 की कमर खुली पड़ी हो और 34 की गांड़ ढीले पेटीकोट को संभाल रही हो।
इस नज़ारे के बाद कौन लड़का होगा जिसके लंड में उस औरत के लिए जज़्बात न जाग जाए। ये हादसा एक बार हुआ और इसकी वजह से आनंद की नज़रे मेरे जिस्म को हमेशा सहलाने लगी।
आनंद अक्सर मेरे चूंचे निहारता रहता है उसमें और मुझमें दोस्तो के संबंध तो हमेशा से ही है इसकी वजह है के वो घर का एक लौता बेटा है और मेरे पास उसके सिवा दर्द बाटने वाला भी कोई नहीं है।
एक बार जब पति ने मुझे बहुत मारा था तब मैं छत पर बैठी रो रही थी तब आनंद आया और मुझसे बात करने लगा उससे बात कर के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली ।
उस रात 3 बजे तक मैं उसे गले लगाके असमान को देखती रही तभी उसने मुझे बोला की वो मुझे प्यार करता है ।
मैने तब उसको साफ साफ कह दिया था के जो वो सोच रहा है वो कभी नहीं हो सकता लेकिन हम अच्छे दोस्त है इस लिहाज़ से एक दूसरे के सुख दुख बाट सकते है।
अब वापस अपनी आज की कहानी पर आती हूं। आज जब हम बस से दिल्ली जा रहे थे तो कुछ ऐसा हुआ जिसके होने का मुझे दुख तो नहीं है लेकिन अगर ये नहीं होता तो शायद ज़्यादा बेहतर होता।
आज से दो दिन पहले मेरी पति के साथ बहुत लड़ाई हुई मेरे पति मुझे पसंद नहीं करते उनका कहना है घर वालों की वजह से मुझसे शादी करी थी हमारी आज तक कोई औलाद नहीं हुई मेरे पति रात में घर पर नहीं रुकते।
मैं दिखने में एक खूबसूरत महिला हूं मैने सोचा था अपने तन मन को पति को अर्पित करूंगी इसलिए कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाया मगर लाइफ ने ऐसा थप्पड़ मेरे अरमानों पर मारा की मुझे अपने संस्कारों की चिता जलानी पड़ी।
जब हमारी लड़ाई हुई तो मैने घर पर बोला के मुझे आकर ले जाओ नहीं तो मैं मर जाऊंगी फिर आनंद मुझे लेने आ गया। हमारा रात का सफर था गोरखपुर से बस ने चलना शुरू करा मेरा सर आनंद के कंधे पर रखा हुआ था।
मेरी आंखों में आंसू थे मेरा जिस्म थोड़ा मोटा हो गया है मेरे चूंचे अब 40 के हो चुके है। मैने आनंद की बाहों में अपने हाथ बांध रखे थे और बस की रफ्तार व रस्ते की खराबी के चलते मेरे चूंचे उसकी कोहनी पर घिस रहे थे।
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मैं आनंद को दोष नहीं दूंगी लेकिन उसे कम से कम हालात को तो समझना चाहिए था जब मेरे मोटे चूंचे उसकी कोहनी पर लग रहे थे तो कुछ ही पलो में उसने अपनी कोहनी मेरे चूचों में दबानी शुरू कर दी।
मेरी चूत न जाने पिछले कितने सालों से सुखी है मेरे जिस्म ने बहुत समय से उस स्पर्श को महसूस नहीं करा जिससे औरत की जवानी में निखार आता है । चुदाई न होने के कारण मेरा जिस्म भी खराब होने लगा था।
मैने आनंद को नहीं रोका मैने सोचा मुझे तो कभी सुख मिला नहीं थोड़ा इसी को जिंदगी जी लेने दूं। आनंद धीरे धीरे मेरे चूंचे दबा रहा था मैने उसके कंधे पर सर रखकर सोने का नाटक करा।
मैने उस रात एक टाइट ड्रेस पहनी थी बस कुर्ती और पजामी और बस में बैठने के बाद दुपट्टा हटा दिया था। मेरे निप्पल से ऊपर के चूंचे बाहर से दिख रहे थे लेकिन रात के सफर के कारण लोग सोए हुए थे।
आनंद ने अपने दूसरे हाथ को धीरे से लाकर मेरे एक चूचे के ऊपर रख दिया था। वो धीरे धीरे मेरे चूचे को सहला रहा था कभी कभी मेरे दोनों चूंची की गहराई में अपनी उंगली भी उतार लेता था।
कुछ देर में मुझे भी मज़ा आने लगा मेरी सांसे भी तेज़ हो गई मैने सोचा आज की रात इसे कर लेने देती हूं इसके मन की इस बस के सफर में ये ज़्यादा से ज़्यादा बस चूंचे दबा लेगा चोद नहीं सकता इसलिए मुझे डर नहीं था।
मैं फिर थोड़ा रिलैक्स होकर बैठी मैने अपने चूंचे अपने भतीजे को परोस दिया टाके वो अपनी मासी के चूंचे दबाकर मजे ले सके।
थोड़ी देर तक तो उसने घबराते आर हिचकिचाते हुए मेरे चूंचे सहलाए फिर जब उसे मेरी गर्म सांसे महसूस हुई तो उसकी हिम्मत बढ़ गई।
आनंद ने अपने हाथ को मेरे कंधे से लेकर मेरे चूंचे पर रख दिया और मेरे हाथ को अपनी कमर पर रख लिया मुझे नींद का नाटक तो जारी रखना था।
लेकिन मुझे उसका ये तरीका अच्छा लगा मुझे इस तरह सोने के लिए और अच्छी पोजीशन भी मिली और अब मुझे भड़कती सांस भी नहीं संभालनी थी।
आनंद ने धीरे से मेरे दोनों चूंचे पकड़ लिए वो आराम आराम से मेरे दूध दबाने लगा मुझे भी अब सच में मज़ा आ रहा था वो बहुत हल्के से एवं हाथ चूंचे के ऊपर ले जाता।
उसके बाद पूरे हाथ में दूध पकड़ कर दबाता मेरे चूचे उसके हाथों में नहीं आ रहे थे जिसपर मुझे हसी भी आई।
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आनंद अपनी तरफ से काबू करने की अच्छी कोशिश कर रहा था जिससे कही मैं जाग न जाऊं । उसने धीरे धीरे मेरे चूंचे मसलने शुरू करे और मेरी सांसे ट्रेन की तरह दौड़ने लगी।
मेरी सांसे फूल रही थी मुझे उसके मर्दाने हाथ अपने जिस्म पर अच्छे लग रहे थे। मैने सोचा था थोड़ा सा ज़िंदगी का सुकून ले लुंगी फिर आगे कुछ सोचूंगी। लेकिन बात तब बिगड़ी जब आनंद ने अपना एक हाथ मेरे घुटने पर रखा।
उसने मेरे माथे को प्यार से चूम लिया ऐसे किस की हर औरत को ज़रूरत होती है लेकिन मुझे ये कभी नहीं मिला था। जब उसने मुझे चूमा तो मेरी आँख से एक आंसू गिरा जिसे वो नहीं देख पाया होगा।
मैं देखना चाहती थी आगे वो क्या करता है आनंद ने थोड़ी देर बहुत आराम से मेरे घुटने को सहलाया उसके बाद मुझे देखा मेरी आंखे बंद देखकर उसने मेरी नाक को चूम लिया।
वो लगातार मेरे एक चूंचे को दबा रहा था अब तक उसका हाथ मेरे कपड़ों के अंदर पहुंच गया था।
फिर धीरे धीरे उसकी उंगलियां मेरे घुटने से आगे बढ़कर जांघों पर आ गई। वो मेरी ठंड दबाने लगा “आअआअह!” मुझे बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन ये गलत था मैं चाहती थी की मैं उसे रोक दू मगर मेरी तड़पती वासना ने मुझे बहका दिया।
वो मेरी मोटी गोल जांघ पर अपने हाथ को घुमा रहता मैं अपनी सांसे संभाल रही थी कही उसे पता लग गया की में जग रही हूं तो बिना चुदाई के ये रिश्ता नहीं बचता।
धीरे धीरे आनंद मेरी जांघ से चूत की तरफ बढ़ने लगा मेरी सांस भी गले में भारी भारी मेहसूस हो रही थी मैं चाहती थी के आनंद को रोकलू लेकिन मेरे अंदर की औरत ने मुझे उसे रोकने नहीं दिया।
मैने आनंद के कंधे जो पकड़कर ज़ोर से दबाया तो आनंद कुछ पल घबरा कर रुक गया। फिर मैने खुद को शांत करा थोड़ी देर में उसने दोबारा मुझे सहलाना शुरू कर दिया इस बार उसने चूत के बिल्कुल करीब ही अपनी उंगली चलाई ।
आनंद मेरे चूंचे अब ब्रा के अंदर से दबा रहा था उसे पूरा यकीन था के मैं गहरी नींद में हूं। नीचे से उसकी उंगली मेरी चूत को लग रही थी। इतना हसीन एहसास मुझे कई साल के बाद मिल रहा था।
औरत को अगर लंड का प्यार न मिले तो जिस्म जंग खाने लगता है। आनंद ने धीरे से नीचे चूत पर दबाओ बनाया और मेरी आईआईएससी! सिसकी निकल गई लेकिन इस बार आनंद नहीं रुका वो धीरे धीरे अब चूत को कपड़ों के ऊपर से ही सहला रहा था।
वो मेरे निप्पल को भी दबा रहा था और दूसरे हाथ से मेरी चूत को तड़पा रहा था। मैने सोचा था ये रात बस थी तक आकर थम जाएगी मगर ऐसा नहीं हुआ।
आनंद से अपने हाथ मेरी कमर से कुर्ती के अंदर ले जाकर पजामी के नाडे पर जमा दिए उसने सख्ती से नाडे को खींच दिया मुझे एक झटका सा लगा मैं चलती बस में अपने भतीजे से नंगी हो रही थी।
उसने हाथ को पजामी में लेकर मेरे चूतड ऊपर करे और पजामी से चूत को आज़ाद कर दिया मुझे ठंडी ऐ सी की हवा चूत पर लगी तो में सिहर ने लगी।
अचानक आनंद ने अपने होठों से मेरे कान पर चूमा और कहा “अब आंखे खोल भी लो बुआ।” बस की सीटी बजी और मैने आंखें खोल दी, आनंद मुस्कुराकर मुझे देख रहा था मैं शर्माती निगाहों से उसको अपनी सहमति दे रही थी।
फिर उसने आगे बढ़कर मेरे होठों पर अपने होठ रख दिए हमारे बीच कोई बात नहीं हुई उसने ये किस इतनी तेज़ी से करा की मैं सम्भल न सकी और अब मैं भी उसका साथ दे रही थी।
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हम एक दूसरे को चूमते जा रहे थे मुझे होठों का ये मीठा रस चखे ज़माना बीत गया था। उसने मेरी गांड़ पर दबाओ बनाया तो मैं थोड़ा ऊपर उठी फिर उसने मेरी पजामी घुटनों तक उतार दी।
उसकी उंगली अब मेरी छेद के अंदर बाहर हो रही थी मैं पूरे जोश में उसके होठ चूम रही थी उसकी जीभ को चूस रही थी वो मेरे चूंचे दबा रहा था मेरी चूत को उंगली से चोद रहा था।
मेरे मन कर रहा था सालों की इस प्यास को आज ही मिटा दूं लेकिन वो जगह मेरे अरमान पूरे करने के लिए काफी नहीं थी। उसके बाद उसने अपनी पेंट की जिप खोली और मेरे हाथ को अपने लंड पर रखवा दिया।
बहुत समय बाद कोई लंड पकड़ने को मिला मुझे मैने उसे छूते ही मुट्ठी में दबा लिया वो एकदम सख्त व गर्म था अंधेरे के कारण उसकी लंबाई समझ नहीं आई मगर ये बात पक्की थी के मेरी तड़प का इलाज मुझे मिलने वाला था।
आनंद से मेरी गांड़ और कमर को पकड़कर मुझे उठाया और अपनी अपनी पेंट को घुटनों पर लेकर मुझे नंगी अपने लंड पर बैठा लिया।
मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी मेरे भतीजे ने मुझे अपने लंड पर बैठा रखा था। मेरी नंगी चूत उसके लंड के ऊपर अपने अंदर बुला रही थी मगर चुदाई से मुझे डर लग रहा था।
इस बस में अगर कोई हमें देखता तो आज रात ही मेरी जवानी शायद लुट जाती 10 15 मर्द मुझे चोदकर बर्बाद कर डालते। मैने कहा “यहां कोई देख लेगा बाद में कर लेना।”
लेकिन वो नहीं माना उसने एक हाथ मेरे मुंह पर रखा फिर मेरी पीठ पर चूमा और अपने हाथ को नीचे लेजाकर लंड को चूत के दरवाज़े पर लगाया। ये सच बात है की चुदने का मन मेरा भी था इसलिए मैंने विरोध नहीं करा।
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उसने अपने लंड को मेरी चूत से लगाया फिर मेरी कमर पकड़ कर मुझे बैठाने लगा मैं अपनी दर्द भरी आवाज़ को काबू में करती हुई उसके लंड पर बैठ गई।
मुझे सालों बाद अपनी चूत में लंड लेने का आनंद आनंद से मिल रहा था। मेरे जिस्म ने मेरे ऊपर काबू पा लिया मैं अपने आप ही लंड पर ऊपर नीचे होने लगी और हम Bua Bhatije Ki Chudai आगे बढ़ने लगी।
चलती बस में मैं अपने भतीजे के लंड से चुद रही थी मेरे मुंह पर उसने हाथ रख लिया था मैं पूरी तरह मदहोश थी।
उसका लंड बहुत मोटा था और मेरा छेद भी टाइट था मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन थोड़ी देर बाद दर्द की जगह मजे ने ले ली।
मैं उसके ऊपर गिरकर चुद रही थी और वो नीचे से धक्के लगा रहा था साथ साथ मेरी पीठ मेरे कंधे मेरे गले पर चूम रहा था मुझे काट रहा था। मेरे अंदर की औरत आज मुझे महसूस हुई थी।
मैं भूल गई के हम बस में लोगों के बीच में थे मैने उसका हाथ हटाकर “आगाह आअआअह! और तेज़ अआआह हम्ममम ओहह्ह्ह्ह yes आगाह!” की मादक आवाज़ निकलने लगी आनंद ने जल्दी से मेरे मुंह को बंद करा।
उसने फिर तेज़ी से मुझे चोद ना शुरू कर दिया , आनंद बुरी तरह मेरे दोनों चूंचे कुर्ती से बाहर निकाल कर मसल रहा था मेरी सांसे बहकाती जा रही थी। मुझे सुकून के चरम पर पहुंचने वाली थी।
हमारी चुदाई का सिलसिला आधे घंटे से ज़्यादा चला हम दोनों पसीने में नहा रहे थे। मैं बहुत ज़ोर से चुदाई के मजे में चीखना चाहती थी लेकिन आनंद ने मुंह बंद कर रखा था।
फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों साथ साथ ही झड़ गए उसने मेरी चूत में इतना पानी छोड़ा के मेरी चूत के पानी से मिलकर उसने मेरी टांगे गीली कर दी।
मुझे जिंदगी का असीम सुख प्राप्त हुआ फिर अगली सुबह तक हम घर पहुंचे। घर जाकर देखा तो वहां कोई उठा भी नहीं था हमने जल्दी से बाथरूम जाकर नहाया और साथ नहाते हुए चुदाई के कुछ हसीन पल फिर से महसूस करे।
आज भी आनंद के साथ मेरा चुदाई का रिश्ता बरकरार है पति से मैं अलग हो चुकी हूं लेकिन आनंद से पहली चुदाई की निशानी अब मेरे साथ है मेरा एक बेटा हर्षित जिस सब बहुत प्यार करते है।
मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी कमेंट कर के ज़रूर बताना मैं मिलूंगी अपनी लाइफ के एक दूसरे किस्से के साथ जल्द ही। टाटा! बाई! बाय।
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