हनीमून पर पत्नी मसाजर से चुदी!
Vasna Sex : मनाली की स्पा में पत्नी ने Massager विक्रम का चूसा मोटा लंड! फड़वाई चूत और गांड! फिर पति को सुनाई बड़े लंड से उसकी टाइट चूत को फाड़ देने वाली दास्ता!
अभी तक आपने "मसाज गर्ल की चूत में पति का लंड!" में पढ़ा :-
पार्लर का बिल चुकाने के बाद हम टैक्सी में बैठे। सन्नाटा गहरा था। ललिता खिड़की से बाहर पहाड़ों की तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी साँसें साफ तेज चल रही थीं।
उसके हाथ ठंडे मौसम में भी गर्म और हल्के पसीने से गीले थे।
मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और सीधे पूछा, “ललिता… सच-सच बता। तेरे कमरे में क्या-क्या हुआ? उस मेल मसाजर ने कैसे मालिश की? सब विस्तार से बता।”
ललिता ने चौंककर मेरी तरफ देखा। गाल और लाल हो गए। नजरें चुराईं। फिर बहुत धीमी, काँपती आवाज में बोलना शुरू किया। जैसे वो खुद को दोबारा उस कमरे में महसूस कर रही हो।
अब आगे :-
“अंशुल… जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मेरा दिल धड़कन से बाहर आने वाला था। कमरे में सिर्फ एक बड़ा मसाज बेड था। चारों तरफ मोमबत्तियाँ जल रही थीं। मद्धम रोशनी। तेल की नशीली खुशबू।
कुछ ही देर में वो लंबा-चौड़ा, गठीले बदन वाला मसाजर अंदर आया। विक्रम।
उसने बड़े पेशेवर अंदाज में कहा, ‘मैम, गाउन खोलकर बेड पर लेट जाइए।’
मैं लेट गई। उसने बहुत धीरे से गाउन की डोरी खींची और कंधों से नीचे सरका दिया। अब मैं सिर्फ लाल जालीदार ब्रा और पैंटी में थी। मेरी साँसें पहले से तेज थीं।
उसने गुनगुना तेल लिया और मेरी नंगी पीठ पर डाल दिया। जब उसकी सख्त, गर्म और बड़ी हथेलियाँ मेरी पीठ पर पड़ीं तो मुँह से हल्की ‘आह’ निकल गई। उसने कंधों से शुरू किया।
फिर रीढ़ के दोनों तरफ गहरा दबाव दिया। कमर के निचले हिस्से तक मालिश करते हुए उसके हाथ जानबूझकर धीमे और sensuous हो रहे थे।
पहाड़ों की थकान तो निकल रही थी, लेकिन पलंगतोड़ पान के असर से मेरे अंदर एक बेचैनी और गर्मी बढ़ती जा रही थी। चूत हल्की गीली होने लगी थी।
पीठ की मालिश के बाद उसने मुझसे सीधे लेटने को कहा। जब मैं सीधी हुई तो उसकी निगाहें सीधे मेरे स्तनों पर टिक गईं। जालीदार ब्रा के पार निप्पल्स पूरी तरह खड़े और साफ दिख रहे थे।
उसने बिना एक शब्द पूछे पीछे से ब्रा का हुक खोला और ब्रा को धीरे से अलग कर दिया। मेरे दोनों भारी स्तन उसके सामने पूरी तरह नंगे हो गए।
उसने तेल की कुछ बूँदें निप्पलों पर गिराईं और दोनों बड़ी हथेलियों से उन्हें गोल-गोल घुमाते हुए दबाना शुरू किया। कभी हल्के, कभी जोर से।
निप्पलों को उँगलियों के बीच लेकर मसल रहा था। मैं उत्तेजना से काँप रही थी। आँखें खुद-ब-खुद बंद हो गईं। मुँह से हल्की कराहें निकलने लगीं—‘आह्ह… उम्म…’
फिर उसने मेरी पैंटी का इलास्टिक पकड़ा और बहुत धीरे-धीरे नीचे खींचते हुए पैरों के रास्ते निकाल दिया। अब मैं उस बेड पर एकदम नंगी लेटी थी। मेरी चूत पहले से गीली थी और हल्का-हल्का पानी टपक रहा था। क्लीन शेव्ड।
उसने जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर तेल लगाया और सहलाने लगा। उँगलियाँ बार-बार मेरी चूत के बिलकुल किनारे से गुजर रही थीं… छूती हुई, लेकिन अंदर नहीं जाती हुई।
मैं बेचैन हो रही थी। कमर हल्की-हल्की उठने लगी थी।
तभी उसने मालिश रोक दी। अपना लोअर नीचे सरकाया। उसका लंड बाहर निकला। अंशुल… वो तुमसे काफी लंबा और मोटा था। नसें फूली हुईं। सिर चमक रहा था। देखकर मेरी साँस रुक गई।
उसने मुझे बेड के किनारे खिसकाया। खुद नीचे घुटनों के बल बैठ गया। दोनों टाँगें फैलाईं और अपना चेहरा सीधे मेरी जाँघों के बीच ले गया।
जब पहली बार उसकी गर्म, मोटी जीभ मेरी चूत पर लगी तो मैं चादर को दोनों हाथों से भींचते हुए जोर से चिल्ला उठी—‘ओह्ह्ह… अम्मा… क्या कर रहे हो…’
वो रुका नहीं। जीभ को अंदर तक घुसाकर चाटने लगा। क्लिटोरिस को पूरे मुँह से चूस रहा था। कभी दाँतों से हल्का काटता। मैं पागल हो गई थी। कमर बार-बार ऊपर उठा-उठाकर उसके मुँह में चूत रगड़ रही थी।
आवाजें निकल रही थीं जो मैं खुद कंट्रोल नहीं कर पा रही थी—‘आआह्ह… और… वहाँ… चाटो… उम्मम्म…’
काफी देर तक वो मेरी चूत चाटता और चूसता रहा। जब मैं लगभग झड़ने वाली थी तो उसने रुककर इशारा किया। उत्तेजना में मैंने उसका मोटा लंड अपने मुँह में ले लिया।
जितना संभव था अंदर तक। गला भर गया। आँखों से पानी आ गया। वो मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। लंड मेरे गले तक जा रहा था। मैंने दोनों हाथों से उसके चूतड़ पकड़ रखे थे।
कुछ देर बाद वो बेड पर चढ़ आया। मेरे दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख दिए। लंड के सिरे पर तेल लगाया और मेरी चूत के मुहाने पर टिका दिया। एक गहरा, जोरदार झटका… उसका मोटा लंड मेरी टाइट चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर तक धंस गया।
‘आआआह्ह… ह्न्न्न्… बहुत मोटा… फट गई… निकालो…’ मैं चीख पड़ी। आँखों से आँसू आ गए।
शुरुआत में तेज खिंचाव और दर्द हुआ, लेकिन उसने रुककर मुझे थोड़ा समय दिया। फिर बेहद सधे और तेज स्ट्रोक्स लगाने शुरू किए। हर धक्के पर उसका लंड गर्भ तक जा रहा था।
कमरे में सिर्फ शरीरों के टकराने और तेल की छप-छप की आवाजें गूँज रही थीं। मेरे स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। वो झुककर एक निप्पल मुँह में ले लेता और चूसते हुए चोदता रहता।
मैं लगातार कराह रही थी—‘आह्ह… जोर से… और गहरा… चोदो… आआह्ह…’
लेकिन विक्रम अभी भी संतुष्ट नहीं हुआ था। उसने अचानक लंड बाहर निकाला। मेरी चूत खाली होते ही एक अजीब सी बेचैनी हुई। उसने मुझे पलटा। पेट के बल लिटा दिया।
मेरे नीचे तकिया लगाकर कमर ऊँची कर दी। अब मेरे चूतड़ उसके सामने पूरी तरह उठे हुए थे।
उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ फैलाए और फिर से लंड अंदर डाल दिया। इस एंगल में वो और भी गहरा जा रहा था। हर धक्के पर लग रहा था जैसे गर्भ को ही ठोके जा रहा हो।
‘आआआह्ह… बहुत गहरा… अंशुल जैसा नहीं… फट जाएगी…’ मैं चिल्ला रही थी।
विक्रम ने मेरे बाल पकड़कर सिर पीछे खींच लिया। दूसरे हाथ से मेरे एक चूतड़ पर जोर-जोर के थप्पड़ मारने लगा। छपाक… छपाक… लाल निशान पड़ गए। दर्द और मजे की मिली-जुली अनुभूति से मैं पागल हो रही थी।
‘बोल… कैसा लग रहा है? इतना मोटा लंड पहली बार ले रही है ना?’ उसने कान में गंदे शब्द कहे।
मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी, सिर्फ कराह रही थी। उसने और जोर से थप्पड़ मारा। ‘बोल रंडी… कैसा लग रहा है?’
‘अच्छा… बहुत अच्छा… और चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… आआह्ह…’ मेरे मुँह से निकला।
वो और बेकाबू हो गया। अब धक्के इतने तेज थे कि बेड हिल रहा था। मेरे स्तन नीचे तकिए से रगड़ खा रहे थे। निप्पल्स सख्त होकर दुखने लगे थे। मैंने खुद ही हाथ बढ़ाकर अपने स्तन पकड़ लिए और मसलने लगी।
कुछ देर बाद उसने लंड निकाला और मुझे फिर से सीधा किया। इस बार उसने मेरे दोनों पैरों को उसके कंधों पर नहीं, बल्कि पूरी तरह मोड़कर मेरे ही सिर के पास रख दिया। मेरी चूत पूरी तरह खुल गई थी।
उसने लंड फिर से अंदर ठोका। इतनी गहराई पहले कभी महसूस नहीं की थी।
‘देख… कितना अंदर तक जा रहा है…’ उसने नीचे देखा और मुझे भी देखने को कहा। मैंने गर्दन उठाकर देखा। उसका मोटा लंड मेरी चूत को फैलाए हुए अंदर-बाहर हो रहा था। नजारा देखकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई।
वो झुक गया। दोनों निप्पलों को बारी-बारी से मुँह में ले लेकर जोर से चूसने लगा। दाँतों से काट रहा था। मैं उसके बाल पकड़कर अपने स्तन और उसके मुँह में धकेल रही थी।
‘चूस… जोर से चूस… आगाह… मेरी बूब्स काट…’
इसी बीच उसने एक उँगली मेरी गाँड के छेद पर फेरनी शुरू कर दी। तेल लगाकर धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। पहली बार किसी ने वहाँ उँगली डाली थी। मैं सिहर गई।
‘वहाँ मत… अह्ह…’
लेकिन उसने नहीं मानी। उँगली अंदर तक घुसा दी और चूत में लंड के साथ ही गाँड में उँगली चलाते हुए चोदने लगा। दो जगह एक साथ भरा होना… दिमाग खराब हो रहा था।
मैं बेकाबू होकर चिल्ला रही थी। कभी दर्द की, कभी मजे की। मेरी चूत बार-बार सिकुड़-सिकुड़कर उसके लंड को निचोड़ रही थी। मैं कई बार झड़ चुकी थी, लेकिन वो रुकने वाला नहीं था।
अचानक उसने लंड निकाला और मेरे मुँह के पास ले आया। ‘चूस… अपनी चूत का रस चख…’
मैंने आँखें बंद करके उसका गीला, मेरी चूत के रस से लथ-पथ लंड मुँह में ले लिया। स्वाद अजीब लेकिन बहुत उत्तेजक था।
मैंने जीभ से साफ करते हुए चूसा। वो मेरे बाल पकड़कर मुँह में धक्के मारने लगा। गला भर रहा था। आँखों से आँसू बह रहे थे।
फिर से उसने मुझे डॉगी में कर दिया। इस बार और भी जोर से। एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी हुई थी, दूसरे से मेरी चूत के ऊपर वाली घंटी सहला रहा था। उँगली से घुमा-घुमाकर।
‘अब झड़… मेरे लंड पर झड़…’
मैं काबू नहीं कर पाई। जोर की सिसकारी के साथ फिर से झड़ गई। मेरी चूत ने उसके लंड को इतने जोर से निचोड़ा कि वो भी लगभग जाने वाला था। लेकिन उसने खुद को रोका।
उसने मुझे उल्टा कर दिया। खुद नीचे लेट गया। ‘ऊपर बैठ…’
मेरे काँपते हुए पैरों के साथ मैं उसके ऊपर चढ़ी। उसके मोटे लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा अंदर जाते ही सिर चकराने लगा।
फिर मैंने उछलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। मेरे भारी स्तन उसके चेहरे पर थपथपा रहे थे। उसने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया और निप्पलों को मुँह में ले लेकर चूसने लगा।
मैं पागलों की तरह उसकी कमर पर उछल रही थी। छप-छप-छप की तेज आवाज। पसीने से दोनों लथपथ।
‘आआह्ह… इतना मोटा… पेट में नस फड़क रही है… चोदो… नीचे से भी ठोको…’
विक्रम ने मेरी कमर पकड़ी और नीचे से जोर-जोर के धक्के मारने लगा। अब दोनों की मिलकर लय बन गई थी। कमरा हमारी कराहों और गीली आवाजों से गूँज रहा था।
इसी दौरान उसने फिर से मेरी गाँड में उँगली डाल दी। दो उँगलियाँ। चूत में लंड और गाँड में उँगलियाँ… मैं बिल्कुल पागल हो गई। आँखें पलटने लगीं।
‘मैं और नहीं सह सकती… झड़ जाऊँगी… आआआह्ह…’
और मैं जोर से ऐंठते हुए एक बार फिर झड़ गई। इस बार इतनी जोर से कि मेरे पैर काँपने लगे।
विक्रम ने भी इस बार खुद को नहीं रोका। उसने मेरी कमर पकड़कर और गहराई तक लंड ठोका और गहरी कराह के साथ कंडोम में अपना पानी छोड़ दिया।
मैं उसके ऊपर ही ढह गई। दोनों हांफ रहे थे। उसका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर धड़क रहा था।
थोड़ी देर हम वैसे ही पड़े रहे। फिर उसने धीरे से लंड बाहर निकाला। मेरी चूत खुली और लाल थी। हल्का-हल्का पानी टपक रहा था। उसने हल्के हाथों से मेरी चूत सहलाई और बोला, ‘बहुत टाइट थी… और बहुत मजेदार।’
मैं कुछ बोल नहीं पाई। सिर्फ साँसें ले रही थी। शरीर में जैसे करंट सा दौड़ रहा था।
करीब दस-बारह मिनट की उस जबरदस्त, बेरहम चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। मैं जोर से ऐंठते हुए झड़ गई। उसने कंडोम में अपना पानी छोड़ा।
लंड निकालते समय मेरी चूत अभी भी धड़क रही थी… खुली और लाल।”
ललिता ने बात खत्म की तो उसका पूरा चेहरा जल रहा था। साँसें तेज थीं। उसने मेरे कान में बिल्कुल चिपककर फुसफुसाया, “सच कहूँ अंशुल… उसका लंड तुमसे काफी बड़ा और मोटा था।
अंदर तक हिलाकर रख दिया। अभी भी मेरी चूत में उसका अहसास है।”
मेरे अंदर जलन की कोई भावना नहीं उभरी। बल्कि एक गहरी, काली और तीव्र उत्तेजना ने पूरा शरीर झकझोर दिया।
नवविवाहित पत्नी के मुँह से दूसरे मर्द के मोटे लंड की तारीफ सुनना… मेरा लंड पैंट में तुरंत सख्त हो गया।
मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा। “हम वापस जा रहे हैं।”
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