चाची बनी दो बच्चों की माँ! पड़ोसी मुस्लिम से चुदकर!
Muslim Pregnant Stories : चाचा के जाने के बाद पड़ोसी मुस्लिम से चाची चुदवाती रही चूत-गांड! वीर्य को डलवाया अंदर और बन गई मुस्लिम की बीज से दो बच्चियाँ की माँ!
यह कहानी बता कर अपने ऊपर से बोझ हल्का करना चाहता हूँ. इस घटना के बाद मुझे पता चला कि छोटी चाची कितनी बड़ी चुदक्कड़ है. यह कहानी छह साल पहले की है, जब कुछ इस तरह का घटनाक्रम हुआ लेकिन समय के अभाव में नहीं बता सका.
मेरा नाम गौरव है और उस समय 12th का स्टूडेंट्स था.
मेरी छोटी चाची शुरू से ही गाँव में रहती थी. कई बार उनके घर आ चुका था. लेकिन इस बार उनके बारे में जानकारी ली.
मेरे छोटे चाचा का नाम रोहित है छोटे चाचा का शहर में दवाई की दुकान थी जिस पर उन्होंने एक आदमी लगा रखा था. वो गाँव में खेती करते, गाँव में आयोजित अखाड़ा में भाग लेते थे.
बाकी छोटे चाचा के घर में एक नौकरानी भी काम करती थी.
छोटे चाचा बड़े ही विनम्र और सज्जन आदमी है. छोटी चाची का नाम संध्या है।
दूसरी तरफ गाँव में रहने के कारण छोटी चाची का वजन काफ़ी ज्यादा बढ़ते जा रहा था इस वजह से चाचा का सेक्स में रूचि दिन पर दिन कम हो रहा था। और उनकी उम्र तो लगभग 34-36 साल की होगी।
चाची मोटी जरूर हैं क्युकी वो उस समय तक चाची सिर्फ दो लड़कों की माँ थी. उस समय तक उनके लड़के 6 और 4 साल के थे.
चाचा के घर के बगल में रहीमा नाम की आंटी बर्षों से रहती थी जिनका एक लड़का और दो लड़कियाँ थी जो कि पास के स्कूल में पढ़ती और खेतों में काम करती थी।
उनकी लडकिया आचरण से काफ़ी अछि थी, लेकिन उनका मकबूल नाम का बेटा भी रहता था जो कि शुरू से ही आवारा किस्म का था.
कुछ दिनों तक मुझे यहाँ रहते हुए पता चला कि कुछ इस तरह का वातावरण था।
पड़ोसी होने के कारण रहीमा आंटी कभी -कभार आती रहती थी.उनका चाची के घर आना मुझे बहुत बुरा लगता था लेकिन धीरे-धीरे सोच बदल गई थी. उस समय चाची मेरे साथ थी और वो स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहीं थीं.
मैं चाची के यहाँ बरामदे में बैठा हुआ कुछ कंपनियों की बैलेंस शीट पढ़ रहा था क्युकी मुझे शेयर बाजार में और ज्यादा शेयर खरीदने का निर्णय लिया था. जब पीछे तीन साल से रिजल्ट काफी ज्यादा बेहतर आया।
उसके बाद अपना स्वामित्व बढ़ाने के लिए बैलेंस शीट पढ़ना जरूरी था क्युकी कभी इसी के कारण मेरे कई दोस्तों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई थी. कभी
मैंने इससे ही अपनी कई सारी जरूरत को पूरा किया था.
संध्या चाची का फिगर 38-38-42 का है. चूचियां और गांड काफी बड़ी है. कुछ दिनों के बाद मैंने उस घर की बड़ी बहू को देखा जो सलवार कमीज में मुझे दिखाई दी।
उसके बाद कामों में व्यस्त रहा लेकिन जब एक दिन उनकी नजर मुझ पर पड़ी तब उन्होंने पूछा कि यह कोन है. चाची ने बताया कि मेरे छोटा भतीजा है. उसने तिरछी निगाहों से मुझे देखा और कामुकता से मुस्काई।
मैंने व्यस्तता के चलते कभी भी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. उनका भरा पुरा परिवार था और रहीमा आंटी ही घर का निजाम चलाती थी. उस समय मेरे आने के कुछ दिन पहले चाचा अपने साथियों के साथ ओमान गये हुए थे.
जहाँ तक मैंने खिड़की से देखा उनके घर में उनके अलावा,
उनके पति, उनकी एक बहू,एक छोटा बेटा, दो लड़कियाँ थी.
पहली बार जो बताया और इस बार जो देखा पूरा अलग अलग था. चाची ही खाना बनाती और मुझे खिलाती थी.
कुछ दिनों बाद रहीमा आंटी ने चाची को दावत पर बुलाया था, मैं चाची के साथ गया था. उसके घर में अजीब सी इत्र
की महक से मुझे काफ़ी ज्यादा घिन सी हो रही थी. उस समय मकबूल की भाभी ने खाना लाकर मेज पर रखा।
मैं यहाँ हमेशा से नहीं रहता था जिस कारण मुझे उनके परिवार के अंदर सदस्यों के बारे में जानकारी लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. वहां बस सिर्फ औपचारिकता के लिए गया हुआ था.
मैंने खाना शुरू किया, जो कि काफी ज्यादा मसाले वाला था.
खाते ही खाना गले में अटक गया और तीखा भी लग रहा था.
उस समय रहीमा आंटी को आता देखा तब उनकी चूचियाँ और विशालकाय बड़े बड़े चुत्तड़ बहुत फुले -फुले दिखाई दिए.
मैंने गाँव में भी कई सारी औरतों को देखा था लेकिन उनके जितना भारी भरकम महिला अपनी जिन्दगी में नहीं देखा था.
उसी के अनुरूप उनकी बड़ी बहू भी थी, जो कि काफी ज्यादा
मोटी होने के साथ साथ बदन भी काफ़ी ज्यादा फैली हुई थी.
तब तक मैंने पानी पिया, कुछ देर बाद मिठाई लेकर आई. हम
उसके कुछ समय बाद अपने कमरे में पहुँचें. पड़ोसी होने के कारण मकबूल चाची की मदद करता था जिससे छोटी चाची मकबूल को अच्छा लड़का समझती थी।
मकबूल मुझे हाय हेल्लो करता लेकिन वो मुझे पसंद नहीं था, ना ही उनकी बदसूरत भाभी कभी पसंद आई. कुछ दिनों बाद चाचा के लड़के को दस्त आने लगा. मुझे चाची के लड़के के लिए दवाई लाने में भागादौरी होती रही।
इस बीच में मकबूल भी मदद करता रहा. एक दिन मैं काम से सुबह आठ बजे निकल गया, मुझे आने में काफ़ी लेट हुई और आते आते दो बज गए थे.
उस समय मैंने सोचा चाची अकेली होगी चलो देखते हैं क्या कर रही होगी. कुछ देर बाद जब ऑटो से पहुँचा तब कमरे में अंदर कदम रखा. मैंने देखा कि घर में कोई नहीं था इसलिए जाकर खाना खाने लगा।
उसके कुछ देर बाद ही सही, स्टोर रूम की तरफ गया. मैंने दरवाज़े के होल से देखा तो पाया.
उस समय मैंने देखा कि मकबूल जोर-जोर से लंड को अन्दर -बाहर कर रहा था. संध्या चाची को दर्द और मजा दोनों आ रहा था. उसने चाची के पीले रंग के सूट को बस ऊपर उठा दिया था लेकिन उसने चाची के सूट को निकाला नही था.
मुझे यह देखकर एक बार तो गुस्सा आया की अपने पति से चुदने की बजाय अपने पड़ोसी के साथ साथ चुद रही थी.
चाची कुत्तिया की तरह मस्ती से अपनी चूत चुदवा रही थी.
चाची जोर जोर से कामुक सिसकारियां भरने लगीं. कुछ देर की धकापेल चुदाई होती रहीं.चाची को पूरा नंगा देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो गया और मैं भी अपना लंड हिलाने लग गया.
मकबूल एक हाथ से वो उनकी गांड को मसलने लगा. कुछ हीं
देर में मकबूल ने अपना वीर्य चाची की चुत में ही निकाल दिया जो कि पानी की तरह निकल रहा था. थोड़ी देर के बाद ही मकबूल चाची की चुत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
चाची को मज़े आने लगे और सिसकारी ले रही थी. वो चाची की चुत चाटने लगा रहा और दूसरे हाथ से चुची को दबा रहा था.
मकबूल 5 इंच का लंड खड़ा हो गया था. उसने चाची को लंड चूसने के लिए बोला, पहले तो साफ़ साफ़ मना करती रहीं.
मकबूल ने एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
तभी अचानक जोर से चीख उठीं- ओह्ह आह दर्द हो रहा है
चाची खुद से दूर हटाने लगी लेकिन मकबूल ने मजबूती से पकड़ रखा था. चाची दो बच्चे की माँ होने के बावजूद कसम साने लगीं मकबूल चाची की हचककर चूत चुदाई करने लगा.
कुतिया बनी हुई थी और मकबूल पीछे से चढ़ कर चुदाई कर रहा था. चाची को लंड का अहसास हुआ तो वो गांड उठाने लगीं. मकबूल चाची की गांड पर बार-बार थपकी मार रहा था.
कुछ देर के बाद संध्या चाची स्वतह ही हचाहच चुदवाने लगी।
वे खुद पीछे गांड हिला रही थीं. रोहित चाचा ने संध्या चाची की चूत से तीन बच्चे निकाल कर फैला दी थी जो कि दिखने में पता चल रहा था कि दोनों फांक काफ़ी ज्यादा खुले हुए थे.
चाची को इस हालत में देखकर मुझे यकीन नहीं हो रहा था
कि यह वही चाची है जो शरीफ बनती हैं, आज नंगी होकर मकबूल के लंड पर चढ़ी हुई चीख-चीख कर खूब चुद रही थीं.
मकबूल की गोलियाँ बड़ी हो गई और जोर जोर से चाची की गाण्ड से टकरा रही थी. वो आहे भर रही थी, मजे ले रही थी.
उसने फट फट खट खट के शोर के साथ चाची की बुर में ही
अपना पानी छोड़ दिया.उसने लण्ड चाची के भोंसड़े से बाहर निकाला. कुछ सेकंड बाद जो माल उसने अंदर छोड़ दिया था.
उसमे से थोड़ा बहुत बाहर की तरफ आ रहा था.मुझे यह जान कर हैरानी नहीं हुई, क्योंकि मेरे फैमिली में सब कोई फ्रैंक हैं.
मकबूल कुता के पोज में अपने घुटनों पर नंगे बैठा हुआ चाची
के फैले हुए चूतड़ों के बीच में अपना मुँह डालकर गांड चाट रहा था।
संध्या चाची जिनके चालीस के चूतड़ों पर काफी सारे दाग थे, मकबूल उसे किसी स्वादिष्ट पकवान समझ कर देर से खा रहा हैं और चाची भी बड़ी खुशी खुशी अपनी गांड के छेद को पड़ोसी लड़के से चटवा रहीं थीं।
अब मैं समझ सकता था क्युकी अब जानता था 36+ औरतों में ज्यादा थरक होती हैं.
वो एक बार फिर चाची की चूत को चाटने लगा. उसके कारण
चाची सेक्सी आवाजें निकालने लगी थीं और अपने एक हाथ से मकबूल का सर अपनी चूत पर दबाती हुई चूत चटवाने का मजा ले रही थीं।
आह रंडी के पैदायशी औलाद बहनचोद चाट ले भोसड़ी केआह चाटो और जोर से चाटो खा जाओ मेरी काली चूत को.मकबूल बोला हाँ तू एक नंबर की छिनाल है जो मुझे चुदती है।
फ़िर से मकबूल किसी कुत्ते की तरह चाची की चूत को चूस चाट रहा था.चाची काफी ज्यादा कामुक हो गई थी वो खुद अपने हॉट को अपने दांतों से दबा रही थी।
मकबूल ने चाची की चूत का पूरा पानी चाट लिया.कुछ देर बाद पूरा चाटने के बाद उठा. मकबूल ने फिर चाची को पीछे घुमाया और पलंग पर पटक दिया. फिर चाची की चूचियां पिने लगा.
चाची की हल्की हल्की काली काली झांटे मुझे दिख रही थी.
चाची नवयुवक मकबूल का लंड हिलाने लगीं और लंड चूसने लगीं. उसका लंड संध्या चाची के गले तक समाया हुआ था.
संध्या चाची ने मकबूल का लंड तब तक चूसा जब तक उसने
अपना पानी चाची के मुँह में ही छोड़ दिया.चाची आज्ञाकारी की तरह मकबूल के लंड की मलाई चाट ली और लंड को चूस कर साफ कर दिया.उसका झड़ जाने से लंड मुरझा गया था.
तो उन्होंने फिर से मकबूल का लंड हिलाने लगीं. कुछ मिनट के बाद मकबूल का लंड पहले की तरह फिर से खड़ा हो गया.
मकबूल ने अपने मुँह से थूक निकाल कर चाची के गांड पर लगाया. गांड में थूक लगाने के बाद अपने लंड पर भी थूक को लगाया. फिर उसने छोटी चाची के गांड पर लंड को सटाया.
मकबूल ने एक ही बार में पूरा लंड चाची की गांड में डाल दिया और फिर अन्दर-बाहर करने लगा. इससे चाची को कोई फर्क़ नहीं पड़ा, वह बस उफ्फ्फ उम्म आआह ओह कर रही थी.
मकबूल ने गांड में से लंड बाहर निकाला और चाची को सीधा लेटा दिया और वापस चुत में अपना मोटा लंड डाल दिया था.
चाची की चूत से पानी निकल रही थी, आवाजें पच-पच कर रही थीं. उसने चाची की कमर पकड़कर पीछे से तेज-तेज धक्के मारे. उनकी बड़ी गांड हर धक्के पर झूल रही थी. हर धक्के के साथ उनकी भारी चूचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं
उसने लंड को चूत से निकालकर गांड के अंदर सरका दिया.
तब चाची की गांड में लंड सटासट चलने लगा था तो चाची भीआआह ओओह मजे लेकर अपनी गांड मरवा रही थीं.
चाची मकबूल के गांड को पकड़ कर अपने चूत में जोर जोर से सटा रही थी और वह बार बार धक्के पर धक्के दे रहा था. मैंने जब ध्यान से देखा तो पाया कि चाची की चुत उसके पूरे लंड को अपने अंदर ले रखा था.वो आआह्ह्ह करके सिसकी ली.
थोड़ी देर बाद मकबूल ने चाची को चोदा जिस कारण चाची की चूत पूरी उसके वीर्य से भर चुकी थी. उसके बाद दुबारा
मकबूल चाची की चूचियों को बहुत जोर जोर से दबा रहा था.
मकबूल ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा था. जैसे ही लण्ड उनके भोंसड़े में जाता था उसके चुच्चे ऊपर की ओर उछल पड़ते थे.
संध्या चाची ने सिसकी लेकर उसके उमंग को बढ़ा रही थी.
मकबूल चाची चोदने लगा और उनके मम्मों को दबाने लगा.
उन दोनों में घमासान चुदाई चलने लगी. संध्या चाची का बदन पसीने से तर था.उनकी चूचियाँ के सीने से रगड़ खा रही थीं.
मकबूल एक साथ तीन काम कर रहा था एक तरफ चुत में जोर-जोर से झटके मार रहा था. वहीं दूसरे तरफ अपनी दोनों हथेलियों से उनके चुचियों को मसल रहा था तो तीसरे तरफ चाची के होंठों को चूस रहा था।
कुछ समय बाद चाची ने भी बड़ी जोर जोर से धक्के मारना शूरु कर दिया था. संध्या चाची इतनी बार हुई चुदाई के कारण पूरी तरह टूट चुकी थीं. चाची: हाँ और जोर से आह्ह्ह चोद मुझे मैं तेरी हूँ आज तेरी रंडी हूँ
कुछ समय तक पूरी तरह स्मरण होने पर मकबूल भी भोसड़ी का किसी पहलवान की तरह छोटी चाची की चूत में उन्हें जम कर चोद रहा था. उन दोनों की धकापेल चुदाई चलती रही.
दोनों फुल स्पीड में आ गए और कमरे में आ आहे ओह्ह को आवाज आ रही थी चुदाई की आवाज आ रही थी और दोनों फुल स्पीड में लगे थे और अचानक दोनों एक साथ झड गए.
मकबूल का लंड बाहर आते ही चूत का मुँह खुला का खुला रह गया और अन्दर की हल्की लाल दरार साफ दिखने लगी थी.
उसने आखिरी बार जबरदस्त पिचकारी मारी जो चाची के मुँह तक गई और ढेर सारा लंड का पानी चाची के मुँह पर गया था.
उसने अपने कपड़े को पहना और जल्दी से निकल गया था.
इस दौरान छोटी चाची कम से कम 6 बार झड़ चुकी थी.कुछ देर बाद जब उसी कमरे में पहुँचा तब तक चाची ने सब कुछ सही कर दिया था जिससे किसी को शक ना हो।
लेकिन उस कमरे में अजीब सी पसीने और वीर्य की महक से मुझे घिन सी हो रही थी.मैं चाह कर अपना हुनर नहीं दिखा सकता था.
उसके बाद चाचा के आने तक और उनके ठीक होने तक दो हफ्ते उनके पास रुका. उसके बाद उस कमरे में ऐसी चुदाई दस बार से अधिक बार देखा और
मुझे शक जरूर था उसके बाद दो साल सिर्फ़ दोनों बच्ची को संभालने में लगे.
इस दौरान एक साल का समय गुजरा फिर उनके दोनों बेटे बड़े हो चुके थे और उनकी दोनों छोटी छोटी लड़कियां तीन तीन साल की हो गई थी.जब लड़की पाँच साल की हुई तब उसके भाई ग्यारह और नौ साल के हो गए थे.
एक जरूरत काम से ब्लड ग्रुप बताना था तब उस समय चाची के साथ साथ मैं भी अपना ब्लड ग्रुप चेक कराने गया. चाची का A आया जबकि उनकी दोनों बेटियों का O - आया.
कई साल पहले चाचा ने अपना ब्लड ग्रुप चेक करवाया था लेकिन दूर दूर तक उस बच्ची का ब्लड ग्रुप उसके माता-पिता से नहीं मिलता था. ये किसकी बच्ची है सिर्फ चाची और मुझे पता है.
मुझे यकीन है कि पढ़ने के बाद आपको मालूम चला होगा.
मैंने चाची के पड़ोस में मकबूल को नहीं देखा लेकिन उसका परिवार वही का वही था.
मैंने जानने की कोशिश की क्या हुआ तब पता चला कि उसका निगाह हो चुका था और एक बेटी और बेटा भी इस दुनिया में आ चुका था. उसके तीन साल के भीतर मकबूल को नशीले समान का सेवन करने की
आदत के कारण फेफड़ा खराब हो गया और उसकी मृत्यु हो
गई.उस समय चाची के पास सिर्फ़ दो दिन के लिए आया था लेकिन मकबूल की वालिदा को जब मैंने रोते हुए देखा, मुझे पता चला कि नशीला समान कितना ज्यादा खराब होता है.
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