सुहागरात में माँ की सील पैक गांड फाड़ दी!
First Time Sex : बेटे ने सुहागरात में माँ की Seal Pack गांड की कुंवारी सील तोड़ी! जड़ तक ठोका लंड! कुतिया बनाकर थप्पड़ों के साथ फटी वर्जिन गांड! Antarvasna XXX!
अभी तक "पैंटी फाड़कर बेटे ने माँ की चुत चोद दी!!" में आपने पढ़ा :-
माँ ने कमजोर आवाज में कहा, “हरामी… आज… मेरी चूत… सच में फाड़ दी तूने…”
मैंने उनके गले पर दाँत गड़ाते हुए जवाब दिया, “यही तो चाहिए था तुझे… रंडी माँ…”
माँ हल्के से मुस्कुराईं। उनके नाखून अभी भी मेरे पीठ में गड़े हुए थे!!
आगे की कहानी :-
रात के बारह बज रहे थे। कमरे का माहौल पूरी तरह बदल चुका था।
मैंने खुद कमरे को सजाया था। बिस्तर पर लाल रेशमी चादर बिछाई, चारों तरफ छोटे-छोटे दिए और फूल रखे। हल्की सुगंध वाली अगरबत्ती जल रही थी।
आईने के पास सिंदूर की डिब्बी, शिलाजीत का छोटा डिब्बा और एक गिलास गुनगुना दूध रखा था।
माँ बाथरूम से निकलीं।
वो बिल्कुल सुहागरात वाली दुल्हन लग रही थीं।
लाल रंग की नई लहंगा-चोली। चोली इतनी टाइट थी कि उनके 36 के भारी स्तन बाहर आने को बेताब थे। कमर पर सुनहरे जेवर, माथे पर बिंदी, और बालों में सिंदूर की एक लंबी लकीर।
उन्होंने खुद सिंदूर लगाया था। आँखों में काजल और होंठों पर गहरा लाल लिपस्टिक।
अंदर उन्होंने जो पहना था… वो और भी गंदा था।
काली लेस वाली ब्रा, जो सिर्फ निप्पल ढक रही थी, और नीचे एक ऐसी पैंटी जो बीच से पूरी खुली हुई थी — क्रॉचलेस। उनकी मोटी गांड और चिकनी मुँडी हुई चूत साफ दिख रही थी।
पूरे शरीर पर वैक्स किया हुआ था। एक priorit भी बाल नहीं। चिकना, चमकदार और नरम।
माँ ने मेरे सामने आकर खड़े होकर धीरे से कहा, “आज रात… तेरी माँ पूरी तरह तेरी दुल्हन है। जो करना है… कर ले।”
मैं उनके पास गया। पहले उनके माथे के सिंदूर को उंगली से छुआ, फिर होंठों पर गहरा किस किया। माँ ने मुझे कसकर गले लगा लिया। उनके भारी स्तन मेरे सीने से दब रहे थे।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। लहंगा ऊपर सरकाया। क्रॉचलेस पैंटी में उनकी चूत और गांड दोनों नंगी चमक रही थीं। मैंने शिलाजीत की छोटी सी डली निकाली और माँ के मुँह में रख दी।
फिर गुनगुना दूध उनके होठों पर लगाकर खुद चूस लिया।
“पी ले माँ… आज रात लंबी होने वाली है।”
माँ ने दूध पिया। उनकी आँखों में वासना और हल्की घबराहट दोनों थी। ये xxx Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
मैंने उनकी चोली के हुक खोले। भारी स्तन बाहर आ गए। निप्पल पहले से सख्त। मैंने दोनों को मुँह में लेकर जोर से चूसा, काटा, मसला। माँ कराहने लगीं।
“आह्ह्ह… बेटे… आज जोर से… अपनी दुल्हन के बोब्स चूस…”
मैं नीचे गया। उनकी चिकनी चूत को जीभ से चाटा, क्लिट चूसा, फिर उंगलियाँ अंदर डालकर गीला किया। माँ की कमर उठने लगी।
“आह्ह्ह… आर्यन… चूत मत फाड़… आज… गांड की बारी है…”
मैंने उन्हें कुतिया की पोजीशन में कर दिया। लहंगा कमर तक उठा हुआ। उनकी मोटी, गोल, पूरी तरह चिकनी गांड मेरे चेहरे के सामने थी। मैंने दोनों गोल हिस्सों को फैलाया।
बीच में गुलाबी, सिकुड़ा हुआ छोटा सा छेद। एक priorit भी बाल नहीं। बिल्कुल साफ और टाइट।
मैंने थूक का बड़ा हिस्सा वहाँ जमा किया। फिर एक उंगली धीरे से अंदर धकेली। माँ की सिसकी निकल गई।
“आह्ह्ह… दर्द… संकरा है… धीरे…”
मैंने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। धीरे-धीरे दूसरी उंगली भी डाल दी। माँ की गांड फैल रही थी। वो तकिया दबाए कराह रही थीं।
“आह्ह्ह… दो उंगलियाँ… लग रही हैं… बेटे… और फैला… आज पूरी सील तोड़ दे…”
मैंने उंगलियाँ निकालकर और थूक लगाया। फिर अपना मोटा लंड उनके छेद पर रखा। नोक से दबाव दिया।
“माँ… अब तेरी गांड की कुंवारी सील तोड़ने वाला हूँ… तैयार है?”
माँ ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में आँसू और हवस दोनों थे। “तोड़… हरामी… अपनी माँ की गांड की सील तोड़… रंडी बना दे मुझे…”
मैंने धीरे लेकिन लगातार दबाव डाला। नोक अंदर घुसी। माँ की चीख निकल गई।
“आह्हhhhh… आईईई… दर्द… बहुत दर्द… निकल… नहीं… मत निकाल… और डाल…”
मैंने और धक्का मारा। आधा लंड उनकी गांड में समा गया। माँ के नाखून चादर में गड़ गए। आँसू बहने लगे।
“आह्हhhhh… फट गई… मादरचोद… तेरे लंड ने माँ की गांड फाड़ दी… आह्ह्ह… पूरा डाल… हरामी…”
मैंने उनकी कमर कसकर पकड़ी और एक लंबा धक्का मारा। साढ़े आठ इंच का मोटा लंड एकदम जड़ तक उनकी गांड में चला गया। माँ की लंबी चीख निकली। पूरा शरीर काँप गया।
“आईईईईई… मर गई… पूरी गांड फट गई… आर्यन… हरामी बेटे… निकाल मत… अंदर ही रख… आह्ह्ह…”
मैंने बिना हिले उनके अंदर रहा। उनकी गांड मेरे लंड को इतनी जोर से कस रही थी कि लग रहा था खून भी निकल सकता है। फिर बहुत धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया।
हर छोटे धक्के पर माँ की आवाज बदल रही थी।
“आह्ह्ह… दर्द… अभी भी… लेकिन… अंदर तक… लग रहा है… और… थोड़ा तेज… अपनी रंडी माँ की गांड चोद… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अब लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। माँ की मोटी गांड मेरे पेट से टकरा-टकरा कर लहरा रही थी। मैंने जोरदार थप्पड़ मारे।
“ले रंडी… ले अपनी कुंवारी गांड में… मादरचोद लंड… आज तेरी गांड की इज्जत खत्म… आह्ह्ह…”
माँ पागल हो रही थीं। “हाँ… खत्म कर… इज्जत… फाड़ दे… थप्पड़ मार… हरामी… और जोर से पेल… आह्ह्ह… गाली दे मुझे…”
“बोल… तू क्या है?” ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
“रंडी… तेरी व्यक्तिगत गांड वाली रंडी माँ… कुतिया… सिर्फ तेरे लंड की… आह्ह्ह… फाड़ दे पूरी…”
मैंने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्का पूरा बाहर निकालकर फिर जड़ तक जाता। माँ की चीखें अब मजे में बदल चुकी थीं।
“आह्हhhhh… हाँ… ऐसे… माँ की गांड चोदो… हरामी बेटे… आज रात… सुहागरात वाली गांड फाड़ दो… आह्ह्ह…”
मैं उनकी गांड में जोर-जोर से पेल रहा था। हर धक्के पर माँ की मोटी, चिकनी गांड मेरे पेट से जोर से टकरा रही थी।
सिंदूर उनकी माँग में पसीने से थोड़ा फैल गया था। लहंगा कमर तक उठा हुआ, चोली पूरी खुली, स्तन नीचे लटक-लटका कर हिल रहे थे।
मैंने उनकी गांड पर लगातार थप्पड़ मारे। दोनों गोल हिस्से लाल हो चुके थे।
“ले रंडी दुल्हन… ले अपनी कुंवारी गांड में… मादरचोद… आज तेरी गांड की शादी हो रही है मेरे लंड से… आह्ह्ह…”
माँ चीख रही थीं, “हाँ… शादी… कर ले… हरामी… माँ की गांड से शादी कर ले… फाड़ दे पूरी… थप्पड़ मार… और जोर से… आह्ह्ह… गाली दे… और गाली दे…”
मैंने बालों का जूड़ा खोल दिया। लंबे बाल बिखर गए। मैंने मुट्ठी भर बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कुत्ते की तरह और तेज पेलने लगा।
“बोल जाकर… तू किसकी रंडी है?”
“तेरी… सिर्फ तेरी… हरामी बेटे की रंडी माँ… तेरी गांड वाली कुतिया… आह्ह्ह… चोद… और गहरा… पेट में लग रहा है… आह्ह्ह…”
मैंने अचानक लंड बाहर निकाला। माँ की गांड का छेद खुला रह गया, थोड़ा गुलाबी और सूजा हुआ। मैंने उन्हें पलटा और चित लिटा दिया। उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं। लहंगा पूरी तरह ऊपर था।
सिंदूर वाली माँग, खुले स्तन, और फैली हुई टांगों के बीच उनकी गांड का छेद साफ दिख रहा था।
मैंने फिर से लंड उनके छेद पर रखा और एक ही झटके में जड़ तक ठेल दिया। माँ की आँखें फटी की फटी रह गईं।
“आह्हhhhh… आईईई… इस पोजीशन में… और गहरा… मर गई… हरामी… पूरी गांड फाड़ दी… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी टांगें और चौड़ाई में फैलाकर पागलों की तरह पेलना शुरू कर दिया। हर धक्का इतना जोरदार था कि बिस्तर की सिरहाना दीवार से टकरा रहा था। माँ के स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे।
मैंने एक स्तन मुँह में ले लिया और दाँतों से काटते हुए चोदता रहा।
“आह्ह्ह… काट… बोब्स काट… गांड चोद… दोनों जगह से सता… हरामी… आह्ह्ह… अपनी सुहागरात वाली माँ को कुतिया बना दे…”
मैंने उनके मुँह में दो उंगलियाँ ठूंस दीं। माँ उन्हें चूसने लगीं। लार बह रही थी। मैंने उंगलियाँ निकालकर उनके गाल पर थप्पड़ मारा।
“चूस… अपनी ही लार… रंडी… बोल कितनी गंदी है तू…”
माँ आँसू भरी आँखों से बोलीं, “बहुत गंदी… तेरी सबसे गंदी रंडी माँ… गांड में लंड लेकर मजा लेने वाली… आह्ह्ह… और मार… थप्पड़ मार…”
मैंने उन्हें फिर से घुमाया। इस बार साइड में लिटाकर एक टांग ऊपर उठाई और पीछे से गांड में लंड डाल दिया। एक हाथ से उनका स्तन मसल रहा था, दूसरे से क्लिट सहला रहा था। माँ पागल हो चुकी थीं।
“आह्हhhhh… तीनों जगह… एक साथ… चूत सहला… गांड चोद… बोब्स मसल… हरामी… मार डाल… आज रात… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड और बढ़ा दी। माँ की गांड अब पूरी तरह खुल चुकी थी। लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था, लेकिन अभी भी बहुत टाइट था। हर धक्के पर “छप-छप” की आवाज आ रही थी।
“माँ… तेरी गांड… कितनी मस्त निचोड़ रही है लंड को… आज के बाद यह गांड सिर्फ मेरी… समझी?”
“सिर्फ तेरी… हरामी… हमेशा के लिए… जब चाहे चोदना… गांड हो या चूत… दोनों तेरी… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… गांड से झड़ने वाली हूँ… जोर से… और जोर से…”
मैंने बाल पकड़कर अंतिम हमला बोल दिया। पागलों की तरह पेल रहा था। माँ की चीखें अब शब्दों में नहीं रह गई थीं। सिर्फ आवाजें थीं। अचानक उनका पूरा शरीर तन गया।
गांड ने मेरे लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि मैं हिल भी नहीं पा रहा था। माँ जोर से काँपते हुए गांड से ही झड़ गईं। उनका पानी चूत से भी निकल रहा था।
मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी पेलता रहा। “ले… झड़… अपनी गांड से झड़… रंडी दुल्हन… ले मेरे लंड की पूरी ताकत…”
फिर कुछ ही पल में मेरा भी नियंत्रण खत्म हो गया। मैंने आखिरी कई गहरे धक्के मारे और उनकी गांड की गहराई में ही अपना पूरा गाढ़ा माल उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि बाहर तक बहने लगा।
माँ की गांड से सफेद द्रव निकलकर उनकी जांघों पर बह रहा था। ये Family Free Hindi Sex Kahani आप GaramKahani.com पर पढ़ रहे है।
मैं उनके ऊपर गिर पड़ा। दोनों हाँफ रहे थे। माँ के शरीर पर पसीना, सिंदूर, और मेरे माल की चमक थी। लहंगा गंदा हो चुका था। चोली एक तरफ फेंकी हुई थी।
मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। उनका छेद खुला रह गया। थोड़ा सूजा हुआ और मेरे वीर्य से भरा। माँ ने पीछे हाथ बढ़ाकर अपनी गांड सहलाई। उंगलियों पर सफेद द्रव लग गया।
उन्होंने उंगलियाँ मुँह में ले लीं और चूस लिया।
“आह्ह्ह… बेटे का माल… माँ की गांड से… स्वादिष्ट…”
मैंने उन्हें अपनी तरफ मोड़ा। उनके माथे का सिंदूर पसीने से बह रहा था। मैंने उंगली से फिर से सिंदूर ठीक किया और बोला,
“अब तू मेरी असली दुल्हन है माँ। गांड की सील तोड़ दी… अब यह गांड मेरी पत्नी वाली गांड है।”
माँ ने मेरे लंड को हाथ में लिया जो अभी भी आधा तना था। “तो फिर… पत्नी को और चाहिए… थोड़ा आराम करके… फिर से डाल… इस बार और जोर से…”
मैंने उनके निप्पल को काटते हुए कहा, “जैसी आज्ञा… मेरी रंडी दुल्हन।”
कमरे में दिए की रोशनी में माँ का शरीर चमक रहा था। सिंदूर, पसीना, वीर्य और लहंगा… सब मिलकर एक गंदा लेकिन बहुत कामुक नजारा बना रहे थे।
माँ अभी भी मेरे बाजू में लेटी हुई थीं। उनकी गांड से मेरा गाढ़ा माल धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था और जांघों पर चमक रहा था। सिंदूर उनकी माँग में बिखरा हुआ था।
लहंगा कमर तक ही था, बाकी शरीर पूरी तरह नंगा और पसीने से चमक रहा था।
उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लिया। वो अभी भी आधा सख्त था। धीरे-धीरे हिलाने लगीं।
आवाज में थकान और हवस दोनों थे, “हरामी… अभी थमा नहीं… माँ की गांड में इतना माल छोड़ा… फिर से खड़ा कर… आज रात पूरी लेनी है…”
मैंने उनके स्तनों पर हाथ फेरा। निप्पल अभी भी सख्त थे। “माँ… गांड सूज गई होगी…”
उन्होंने मेरी तरफ देखा। आँखों में कोई शर्म नहीं बची थी। “सूज गई तो फाड़ दे… दर्द में भी मजा आ रहा है… उठा… फिर से डाल…”
मैंने उन्हें कुतिया बना दिया। इस बार और रुखा। उनकी मोटी गांड दोनों हाथों से फैलाई। छेद अभी भी थोड़ा खुला और लाल था। मैंने थूक लगाया और बिना किसी चेतावनी के पूरा लंड एक झटके में अंदर ठेल दिया।
माँ की लंबी चीख निकली। “आह्हhhhh… हरामी… एकदम… जड़ तक… फिर से फाड़ दी… आह्ह्ह… मादरचोद… जोर से पेल…”
मैंने बाल पकड़कर पागलों की तरह धक्के शुरू कर दिए। हर धक्का इतना तेज था कि माँ का शरीर आगे खिसक रहा था। मैंने उनकी गांड पर लगातार थप्पड़ मारे। लाल निशान और गहरे हो गए।
“ले रंडी… ले अपनी फटी हुई गांड में… आज सुहागरात में तेरी गांड की इज्जत के लड्डू बना दिए… आह्ह्ह…”
माँ चीख-चीखकर जवाब दे रही थीं, “हाँ… लड्डू… बना दे… हरामी बेटे… माँ की गांड के लड्डू… थप्पड़ मार… और मार… गाली दे… और गंदी गाली दे…”
“बोल… तू क्या है मेरी?”
“कुतिया… तेरी गांड वाली कुतिया… रंडी माँ… सिर्फ तेरे लंड की पेशाब की जगह… आह्ह्ह… चोद… और तेज… पेट फाड़ दे…”
मैंने अचानक लंड बाहर निकाला और उनकी चूत में एकदम जोर से डाल दिया। माँ हैरान रह गईं। “आह्हhhhh… चूत में… अचानक… हरामी… दोनों छेद बारी-बारी… मार रहा है… आह्ह्ह…”
मैं पांच-छह धक्के चूत में मारता, फिर निकालकर गांड में ठेल देता। माँ पागल हो रही थीं। उनके शरीर पर नियंत्रण नहीं रह गया था। सिंदूर पसीने से बहकर आँखों तक आ गया था।
“आह्ह्ह… आर्यन… दोनों… एक साथ सता… चूत… गांड… दोनों फाड़… हरामी… आज रात… माँ को बारह बजा दे… आह्ह्ह…”
मैंने उन्हें उठाया और गोद में ले लिया। उनकी टांगें मेरी कमर से लिपट गईं। खड़े-खड़े ही लंड उनकी गांड में डालकर ऊपर-नीचे करने लगा। माँ मेरे गले में बाँहें डाले चीख रही थीं। उनके स्तन मेरे चेहरे से टकरा रहे थे।
“आह्हhhhh… खड़े-खड़े… गांड चोद… बहुत गहरा… लग रहा है… हरामी… बोब्स काट… काट ले… आह्ह्ह…”
मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से काटते हुए पेलता रहा। माँ के नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। खून की हल्की रेखाएँ बन गईं।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर पटक दिया। इस बार मिशनरी में उनकी दोनों टांगें एकदम फैलाकर कंधों तक दबा दीं। लंड गांड में ही रखा और जोर-जोर से पेलने लगा।
माँ की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी। हर धक्के पर उनकी आवाज टूट रही थी। ये Kamvasna वाली XXX Antarvasana Hindi Sex Stories आप GaramKahani.com पर पढ़ रहे है।
“आह्हhhhh… आईईई… इस तरह… टांगें फैलाकर… गांड चोदना… बहुत… शर्मनाक… और मजेदार… हरामी… गाली दे… अपनी माँ को वैशाली रंडी बोल… आह्ह्ह…”
“वैशाली रंडी… गांड में लंड लेकर मजे लेने वाली… मादरचोद माँ… तेरी गांड अब मेरी पेशाब की मुटिया है… जब चाहूँगा चोदूँगा… आह्ह्ह…”
माँ चरम पर पहुँचने वाली थीं। उनका शरीर काँप रहा था। “हाँ… मुटिया… बना दे… हरामी… मैं झड़ रही हूँ… गांड से… चूत से… दोनों से… जोर से… और जोर से… आह्हhhhh…”
उनकी गांड और चूत दोनों ने एक साथ मेरे लंड को जकड़ लिया। माँ जोर से चीखते हुए लंबे समय तक काँपती रहीं। उनके शरीर से पानी निकल रहा था। मैं भी उसी पल नियंत्रण खो बैठा।
उनकी गांड की गहराई में दूसरी बार अपना पूरा माल उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि बाहर आकर चूत और जांघों तक फैल गया।
मैं उनके ऊपर गिर पड़ा। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं।
कमरे में सिर्फ दिए की हल्की रोशनी और हमारी भारी साँसें बची थीं। माँ के शरीर पर सिंदूर, पसीना, थप्पड़ों के निशान, काटने के निशान और मेरे माल की परत चिपकी हुई थी।
मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। उनका छेद खुला रह गया। सफेद द्रव निकलता रहा। माँ ने कमजोर हाथ से अपनी गांड सहलाई और बोलीं, “हरामी… आज… सच में… माँ की गांड… तेरी बीवी वाली गांड बना दी…”
मैंने उनके माथे का सिंदूर फिर से ठीक किया। “अब तू मेरी असली दुल्हन है। गांड की सील तोड़ दी… चूत पहले से ही मेरी थी… अब पूरा शरीर मेरा है।”
माँ ने मेरे लंड को धीरे से चूमा। “तो फिर… अपनी दुल्हन को गोद में लेकर सो… कल सुबह… फिर से उठाना… माँ और लेगी…”
मैंने उन्हें अपनी छाती से चिपका लिया। उनके गंदे, पसीने से भरे शरीर को सहलाते हुए कहा, “सो जा मेरी रंडी दुल्हन… आज की सुहागरात पूरी हुई…”
माँ मेरे सीने पर सिर रखकर मुस्कुराईं। आँखें बंद करते हुए अंतिम बार बोलीं, “हरामी बेटे… बहुत जोर से फाड़ी… अब यह गांड… हमेशा तेरी रहेगी…”
कमरे में दिए धीरे-धीरे बुझने लगे।
बिस्तर पर सिंदूर, वीर्य, पसीना और फटा हुआ लहंगा बिखरा पड़ा था। माँ और बेटा एक-दूसरे से लिपटे हुए सो गए… दोनों के शरीर पर रात की गंदी लेकिन पूरी सुहागरात के निशान चमक रहे थे।
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