सरसों के खेत में मम्मी ने चूस लिया बेटे का लंड!
Family Sex Story: सरसों के खेत में गीले कपड़े बदलते वक्त, कामुक माँ के बूब्स को बेटे ने चूसा! उंगली से की चूत गीली! घुटनों पर बैठकर Mom ने चूसा बेटे का मोटा लंड!
दोस्तों, ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। ये घटना आज से करीब दो साल पहले मेरे साथ सच में घटी थी। आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी ही सगी माँ की चूत और गांड दोनों मार ली।
मेरा नाम गुरप्रीत है। उम्र तेईस साल। हम पंजाब के एक छोटे से गाँव में रहते हैं। परिवार में कुल पाँच लोग हैं - पापा रणवीर (46), मम्मी जसलीन (44), बड़ी बहन सिमर, छोटी बहन प्रीती और मैं।
पापा खेती करते हैं। जमीन काफी है, इसलिए वो ज्यादातर खेतों में ही रहते हैं। मम्मी घर और खेत दोनों संभालती हैं। मैं और सिमर जालंधर में पढ़ाई के लिए रहते हैं, प्रीती गाँव में मम्मी-पापा के साथ है।
मम्मी का फिगर कमाल का है। जब वो चलती हैं तो उनके भारी चुत्तड़ दोनों तरफ लहराते हैं। बड़े-बड़े बूब्स, पतली चिकनी कमर और पीछे निकली हुई मोटी गांड। गोरा रंग और भरा हुआ बदन।
सच कहूँ तो वो स्वेता तिवारी जैसी लगती हैं। कोई अंजान आदमी उन्हें देखे तो कभी नहीं कह सकता कि वो तीन बच्चों की माँ हैं।
शहर में रहते हुए मैंने बहुत कुछ सीख लिया था। पोर्न वीडियो और गरम कहानियाँ पढ़-पढ़कर मेरे अंदर सेक्स की भूख बढ़ गई थी। खासकर माँ-बेटे वाली कहानियाँ। लेकिन कभी नहीं सोचा था कि वो दिन सच में आएगा।
नवंबर की बात है। खेतों में सरसों और सब्जियों को पानी देना था। घर से कॉल आया तो मैं गाँव के लिए निकल पड़ा। शाम होते-होते घर पहुँच गया।
प्रीती ने दूर से ही दौड़कर मुझे गले लगा लिया। फिर मम्मी आईं। उन्होंने भी मुझे गले लगा लिया। उनके भारी बूब्स मेरी छाती से जोर से दब गए। एक पल के लिए मेरा दिमाग बंद हो गया।
जितनी कहानियाँ पढ़ी थीं, सब आँखों के सामने घूम गईं। मेरा लंड तुरंत तन गया। मैंने जल्दी से खुद को अलग किया और बैग लेकर कमरे में चला गया।
कमरे में जाकर मैं बिस्तर पर गिर गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मन में गंदे ख्याल आने लगे - मम्मी की साड़ी ऊपर करके उनकी गांड देखना, उनके बूब्स चूसना, उनकी चूत में लंड डालना… मैंने खुद को काबू में किया।
थोड़ी देर बाद पापा भी खेत से आ गए। सबने साथ खाना खाया। पापा बताने लगे कि किस खेत में पहले पानी देना है। रात को ही सारी तैयारी हो गई।
सुबह मम्मी मुझे उठाने आईं। मैं रजाई ओढ़े सो रहा था। उन्होंने रजाई खींची तो मेरा तना हुआ लंड पजामे में साफ दिख रहा था। मम्मी की नजर वहाँ गई।
उन्होंने तुरंत मुँह दूसरी तरफ कर लिया और बिना कुछ कहे बाहर चली गईं। मुझे शर्म भी आई और अजीब सा मजा भी।
मैं तैयार होकर पापा के साथ खेत पर चला गया। हमारे खेत में ही दो कमरे और नहाने का टैंक बना हुआ है। हमने सरसों में पानी देना शुरू किया। तभी पापा को कॉल आया।
पापा बोले, “बेटा, तू देख लेना पानी। मैं कुछ सामान लेने अमृतसर जा रहा हूँ। आने में लेट हो सकता है। खाना तेरी माँ ले आएगी और मदद भी कर देगी।”
पापा के जाने के बाद मैं अकेला पड़ गया। बोरियत होने लगी तो मोबाइल निकाला। पहले चुदाई की वीडियो देखी, फिर गरम कहानियों वाली साइट खोली। माँ-बेटे वाली कहानियाँ पढ़ते हुए मेरा लंड फिर से तन गया।
मैंने चारों तरफ देखा - कोई नहीं था। लंड बाहर निकाला और मम्मी की मोटी गांड का ख्याल करते हुए जोर-जोर से हिलाने लगा। आज तक इतना गाढ़ा माल कभी नहीं निकला था।
उसी पल मैंने ठान लिया - कैसे भी करके मम्मी को चोदना ही है।
ग्यारह बजे मम्मी तiffin लेकर आ गईं। उन्होंने कहा, “बेटा खाना खा ले, तब तक पानी मैं संभाल लेती हूँ।”
मैं पास बैठकर खाना खाने लगा और मम्मी को देखता रहा। वो जब भी झुककर पानी मोड़तीं, घाघरे के अंदर उनके भारी चुत्तड़ तरबूज की तरह उभर आते। मेरा मन कर रहा था कि पीछे जाकर घाघरा ऊपर करूँ और उसी समय अपना लंड उनकी गांड में डाल दूँ।
मेरा लंड फिर से तनकर दर्द करने लगा। मैंने जल्दी से खाना खत्म किया और लंड को एडजस्ट किया। मम्मी ने वो तम्बू देख लिया। उन्होंने तुरंत मुँह फेर लिया, लेकिन उनके गाल हल्के लाल हो गए थे।
थोड़ी देर बाद लंड शांत हुआ तो मैं भी काम में जुट गया। मम्मी जब झुकतीं तो उनके बूब्स ब्लाउज से बाहर आने को बेताब लगते। मैं बार-बार वही ख्याल सोचता।
मम्मी के पैरों में दर्द था, मैंने कहा, “माँ आप आराम कर लो, कमरे में जाकर लेट जाओ।”
वो बोलीं, “बेटा अब तो जब तेरी भाभी आएगी तभी आराम मिलेगा।”
मैंने थोड़ा जोर देकर कहा, “माँ, मेरे होते हुए आपको किसी और की जरूरत नहीं। मैं हर तरीके से आपका ख्याल रख सकता हूँ।”
मम्मी मेरी बात का असली मतलब शायद नहीं समझीं। बातचीत आगे बढ़ी। उन्होंने सिमर की शादी की बात की।
मैंने कहा, “माँ आप भी कैसी बात करती हो। आपको देखकर लगता है जैसे आप दीदी की उम्र की हो। कोई अंजान व्यक्ति आपको दोनों को साथ देखे तो भाई-बहन ही समझे।”
मम्मी शर्मा गईं। “धत! मेरी उम्र हो गई और तू मुझे अभी भी जवान बता रहा है?”
“सच कह रहा हूँ माँ। पापा भी तो कभी तारीफ करते होंगे?”
मम्मी की मुस्कान थोड़ी उदास हो गई। “तेरे पापा को तो खेतों से फुरसत ही नहीं मिलती। सुबह जाते हैं, रात को आकर सो जाते हैं।”
बात सही दिशा में जा रही थी। तभी थोड़ी दूर पर पानी का पाइप अचानक खुल गया। पानी का तेज प्रेशर निकलने लगा। मैं पाइप जोड़ने गया। मम्मी भी मदद को आ गईं।
प्रेशर इतना तेज था कि हम दोनों पूरी तरह भीग गए।
मैंने मम्मी की तरफ देखा।
उनकी साड़ी पूरी तरह शरीर से चिपक गई थी। ब्लाउज के अंदर के बूब्स साफ उभर रहे थे। निप्पल तक की आकृति दिख रही थी।
घाघरा भी जांघों और गांड पर चिपक कर उनके आकार को और सेक्सी बना रहा था। पानी उनके चेहरे और गर्दन से बह रहा था।
हमारी निगाहें मिलीं।
मम्मी ने जल्दी से साड़ी ठीक करने की कोशिश की, लेकिन गीला कपड़ा और ज्यादा चिपक गया। मेरे लंड ने फिर से तम्बू गाड़ दिया। मम्मी की नजर वहाँ गई और इस बार उन्होंने नजर नहीं फेरी।
कुछ पल दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।
खेत में सिर्फ पानी की आवाज गूंज रही थी… और हमारे दिलों की धड़कनें।
खेत में पानी की तेज धार अभी भी शोर मचा रही थी। मम्मी की गीली साड़ी उनके शरीर से चिपककर उनके हर उभार को साफ दिखा रही थी।
बड़े-बड़े बूब्स, सख्त निप्पल की आकृति, पतली कमर और घाघरे के अंदर छिपी मोटी गांड… सब कुछ मेरे सामने नंगा सा लग रहा था। मेरा लंड पजामे में तना हुआ दर्द कर रहा था।
मम्मी ने साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, लेकिन गीला कपड़ा हाथ से फिसल रहा था। उनकी नजर फिर मेरे तम्बू पर गई। इस बार उन्होंने जल्दी से नजर नहीं फेरी।
कुछ पल हमारी आँखें मिली रहीं। फिर उन्होंने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।
“पाइप… जोड़… बेटा,” उनकी आवाज में हल्की कंपन थी।
हम दोनों फिर से पाइप पर झुक गए। इस बार हमारे शरीर और करीब थे। मम्मी का गीला बूब्स मेरे बाजू से छू गया। एक करंट सा गुजरा। मैंने जानबूझकर थोड़ा और सट गया।
मम्मी हिले नहीं। पाइप आखिरकार जुड़ गया। पानी सही दिशा में बहने लगा।
दोनों खड़े होकर एक-दूसरे को देख रहे थे। मम्मी के बाल चेहरे पर चिपक गए थे। पानी उनकी गर्दन से होता हुआ ब्लाउज के अंदर जा रहा था। मैंने अपना तौलिया निकाला जो बैग में था और उन्हें दिया।
“पोंछ लो माँ… सर्दी लग जाएगी।”
उन्होंने तौलिया लिया, लेकिन इस्तेमाल नहीं किया। बस हाथ में पकड़े रहे। “तू भी भीग गया है… चल कमरे में चलते हैं। कपड़े बदलने हैं।”
खेत वाले कमरे तक हम चुपचाप चले। अंदर जाकर मम्मी ने दरवाजा बंद कर दिया। कमरे में एक चारपाई, एक पुरानी अलमारी और नहाने का छोटा सा कोना था। मम्मी ने अपना गीला पल्लू उतारा।
ब्लाउज पूरी तरह शरीर से चिपका हुआ था। उनके बूब्स का आकार और भी साफ दिख रहा था।
मैंने पीठ मोड़ ली। “आप बदल लो माँ… मैं बाहर हूँ।”
“रुक,” मम्मी की आवाज आई। “तेरे पास दूसरे कपड़े हैं? तू भी भीगा है।”
मेरे पास सिर्फ एक अतिरिक्त कमीज थी। मम्मी ने अलमारी से पापा का पुराना कुर्ता निकाला और मुझे दिया। फिर उन्होंने मेरी तरफ पीठ करके साड़ी खोलनी शुरू की। गीली साड़ी नीचे गिरी।
उनके पास सिर्फ गीला ब्लाउज और पेटीकोट रह गए। पेटीकोट भी शरीर से चिपक रहा था। उनकी मोटी गांड का गोलाकार आकार साफ नजर आ रहा था।
मैं नजर नहीं हटा पा रहा था। मम्मी ने आईने में मेरी नजर पकड़ ली। इस बार उन्होंने गुस्सा नहीं किया। बस चुपचाप पेटीकोट भी खोल दिया।
अब वो सिर्फ गीले ब्लाउज और सफेद पैंटी में खड़ी थीं। पैंटी भी गीली होकर उनके चुत्तड़ों के बीच में धँस गई थी।
मेरा लंड लगभग फटने वाला था। मम्मी ने धीरे से कहा, “नजर फेर ले बेटा… माँ है मैं।”
लेकिन उनकी आवाज में वह सख्ती नहीं थी जो सुबह थी। मैंने एक कदम उनकी तरफ बढ़ाया। “माँ… आप बहुत सुंदर लग रही हो ऐसे…”
मम्मी की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक… दो… तीन। ब्लाउज उनके कंधों से नीचे सरक गया। उनके भारी, गोरे बूब्स बिना ब्रा के बाहर आ गए।
निप्पल ठंड और उत्तेजना से सख्त हो चुके थे। पानी की बूंदें उनके बूब्स पर चमक रही थीं।
मैंने होश खो दिया। एक कदम और बढ़ाया और उनके बूब्स दोनों हाथों में ले लिए। मम्मी का शरीर सिहर उठा। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा, लेकिन हटाया नहीं।
“गुरप्रीत… यह गलत है… मैं तेरी माँ हूँ…”
“माँ… मैं जानता हूँ,” मैंने उनके निप्पल को अंगूठे से सहलाते हुए कहा। “लेकिन मैं रुक नहीं पा रहा। सुबह से… नहीं, शहर से आने के बाद से ही…”
मैंने झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया। गरम और थोड़ा नमकीन। मम्मी की लंबी सिसकी निकल गई। उनका हाथ मेरे बालों में घिर गया। उन्होंने जोर से नहीं दबाया, बस पकड़े रखा।
मैं दोनों बूब्स बारी-बारी से चूसने लगा। कभी हल्का काटता, कभी जोर से खींचता।
“आह्ह्ह… बेटा… मत कर… अह्ह्ह… धीरे…”
मैंने उनके पेटीकोट के इलास्टिक में हाथ डाल दिया। पैंटी के ऊपर से उनकी गांड को मसलने लगा। मोटी, नरम और गोल। मम्मी पीछे की तरफ धकेलने लगीं। मेरा लंड उनके पेट से छू रहा था। उन्होंने महसूस किया।
मैंने पैंटी के अंदर हाथ सरकाया। उनकी चूत पहले से गीली थी — पानी की वजह से नहीं, और कुछ वजह से। मेरी उंगली उनके गीले होंठों के बीच से फिसल गई। मम्मी का शरीर काँप उठा।
“आह्ह्ह… वहाँ… मत छू… गुरप्रीत… अह्ह्ह…”
मैंने उंगली अंदर डाल दी। टाइट और गरम। मम्मी की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं। मैं उनकी चूत में उंगली करता रहा और बूब्स चूसता रहा। थोड़ी देर बाद मम्मी का शरीर तन गया।
उन्होंने मेरे कंधे दबाए और जोर से काँपते हुए झड़ गईं। उनका पानी मेरी हथेली पर बह निकला।
मम्मी मेरे सीने से लगकर हाँफ रही थीं। उनके बूब्स मेरे शरीर से दबे हुए थे। लंबी खामोशी के बाद उन्होंने धीरे से कहा, “अब… क्या होगा बेटा… यह सब… गलत हो गया…”
मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया। “माँ… अब पीछे नहीं जा सकता। आपने भी मजा लिया अभी…”
मम्मी की आँखों में आँसू थे, लेकिन वासना भी थी। उन्होंने मेरे पजामे पर हाथ रखा। तना हुआ लंड उनके हाथ में आ गया। उन्होंने धीरे से ऊपर-नीचे किया।
“इतना… बड़ा…मदारचोद!” उनकी आवाज काँप रही थी। “तेरे पापा से भी…”
मैंने उनका हाथ पकड़कर और कस दिया। "माँ… निकालो इसे… छूो सही से…”
मम्मी ने पजामा और चड्ढी दोनों नीचे सरका दिए। मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकलकर उनके पेट से छूने लगा। उन्होंने इसे दोनों हाथों में लिया। हल्के से हिलाया। फिर घुटनों के बल बैठ गईं।
उनकी आँखें मेरे लंड पर थीं। उन्होंने पहले सिर्फ नोक को चूमा। फिर जीभ निकाली और चाटा। धीरे-धीरे। जैसे हिम्मत जुटा रही हों। फिर नोक को मुँह में ले लिया। गरम और गीला अहसास।
“उम्म…” की आवाज उनके गले से निकली।
मैंने उनके गीले बाल पकड़ लिए। मम्मी ने और अंदर लिया। पहली बार था उनके लिए शायद, लेकिन वो कोशिश कर रही थीं। लार उनके मुँह से बहने लगी। मैं धीरे-धीरे उनकी ओर धकेलने लगा।
कमरे के बाहर खेत में पानी की आवाज आ रही थी… और अंदर सिर्फ मम्मी के मुँह से निकलती चूसने की आवाजें।
मम्मी घुटनों के बल मेरे सामने बैठी थीं। उनका मुँह मेरे लंड पर काम कर रहा था। गीले बाल चेहरे पर चिपक गए थे। ब्लाउज पूरी तरह खुला हुआ, भारी बूब्स बाहर निकले हुए।
सफेद पैंटी अभी भी पहनी हुई थी, लेकिन एक तरफ खिसक चुकी थी।
वो धीरे-धीरे लंड को और गहराई तक लेने की कोशिश कर रही थीं। जब नोक उनके गले के पास पहुँचती तो उनकी आँखों में पानी आ जाता, लेकिन वो रुकती नहीं थीं।
लार उनकी ठोड़ी से बहकर मेरे अंडकोष तक पहुँच रही थी। एक हाथ से वो लंड के निचले हिस्से को हिला रही थीं, दूसरे से अपना एक बूब्स मसल रही थीं।
“उम्म… ग्लक… उम्म…”
मैंने उनके बाल और कसकर पकड़ लिए। “माँ… ऐसे ही… और गहरा… आह्ह्ह… तेरा मुँह कितना गरम है…”
मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। शर्म अब उनकी पुतलियों में बहुत कम बची थी। उन्होंने लंड बाहर निकाला। लंबी लार की लकीर टूटी। साँसें फूल रही थीं।
“बेटा… बहुत बड़ा है… मुँह में पूरा नहीं आ रहा…” उनकी आवाज काँप रही थी।
आगे की कहानी :- "जल्द ही.."
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