संस्कारी माँ की मामा संग चुदाई!
Family Sex : कैसे मामा ने चाटी माँ की चूत! गालियां देकर मोटे लंड से फाड़ी चुत! फिर गांड में डाला लंड! और माँ के मुँह में ही छोड़ा पूरा माल! बेटे ने पकड़ी चुदाई!
दोस्तों, आज मैं अपनी माँ की चुदाई की वो सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ जो मैंने अपनी आँखों से देखी थी। ये कोई कल्पना नहीं, बल्कि वो रात है जो मेरे दिमाग में हमेशा के लिए कैद हो गई।
मेरा नाम आदित्य है। उस समय मेरी उम्र इक्कीस साल थी। माँ का नाम रुचिका है। उम्र सैंतालीस, लेकिन दिखने में बत्तीस-चौंतीस की लगती हैं। गोरी चमकदार त्वचा, 36 के भारी गोल बूब्स, 30 की पतली कमर और 38 की मोटी, गदराई हुई गांड।
साड़ी पहनकर जब वो चलती हैं तो उनकी गांड के लहराते हुए हिस्से किसी को भी पागल बना सकते हैं।
माँ हमेशा से धार्मिक, संस्कारी और पतिव्रता किस्म की औरत रही हैं। घर में पूजा-पाठ, व्रत, सब कुछ नियमित। किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि ऐसी माँ किसी दिन अपने ही भाई के साथ नंगी होकर कराहेंगी।
मामा बिजली विभाग में सीनियर इंजीनियर हैं। उनकी उम्र करीब पचास के आसपास। मामी भी घर में ही रहती हैं। उस साल मामा के यहाँ एक रिश्तेदार की शादी थी।माँ और मुझे कुछ दिन पहले ही वहाँ पहुँचना था।
पहले तो मैं जाने को तैयार नहीं था। मेरी गर्लफ्रेंड से उस वीकेंड मिलने का प्लान था, और मुझे उसकी चूत की याद आ रही थी। लेकिन माँ के जोर देने पर आखिरकार मैं तैयार हो गया।
हम ट्रेन से पहुँचे। माँ ने उस दिन हल्की गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज टाइट था। उनके मोटे बूब्स साड़ी के पल्लू के नीचे से उभरे हुए थे। जैसे ही हम मामा के घर पहुँचे,
मामा ने माँ को देखते ही कहा, “दीदी, आप तो पहले से भी ज्यादा सुंदर लग रही हो।”
मामी मंदी-मंदी मुस्कुराईं। उनकी मुस्कान में कुछ ऐसा था जैसे उन्हें पता हो कि आगे क्या होने वाला है। मैंने उस समय कोई खास ध्यान नहीं दिया।
रात को सब थक चुके थे। मामा ने कहा कि मैं उनके साथ उनके कमरे में सो जाऊँ। माँ और मामी दूसरे कमरे में चली गईं। मैं मामा के बिस्तर पर लेट गया, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।
दिमाग में गर्लफ्रेंड के नंगे शरीर के ख्याल आ रहे थे। आखिरकार मैं सो गया।
अगले दिन मैं कुछ पुराने दोस्तों से मिलने निकल गया। दोपहर तक वापस आ गया क्योंकि मन नहीं लग रहा था। घर में मामी बाजार गई हुई थीं। मामा और माँ घर पर ही थे। मैं ऊपर वाले कमरे में अपना बैग रखने गया। तभी नीचे से हल्की सी आवाजें सुनाई दीं।
पहले तो लगा कोई बातचीत हो रही है। लेकिन फिर एक लंबी, दबी हुई आह सुनाई दी। माँ की आवाज थी। मेरा दिल बैठ गया। मैंने दबे पाँव गलियारे में जाकर सुना। कमरे का दरवाजा बंद था। खिड़की भी बंद।
लेकिन मुझे याद आया कि इस कमरे की ऊपरी छोटी खिड़की सीढ़ियों से दिखती है। अगर कोई वहाँ चढ़ जाए तो अंदर का पूरा नजारा साफ दिख सकता है।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं नहीं जाना चाहता था। लेकिन पैर खुद-ब-खुद सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए। मैंने बहुत हल्के पाँव रखे। ऊपरी खिड़की तक पहुँचकर धीरे से झाँका।
और जो नजारा दिखा, उसने मेरी साँसें रोक दीं।
माँ बिस्तर पर लेटी हुई थीं। उनकी गुलाबी साड़ी कमर तक ऊपर उठी हुई थी। गोरी, चिकनी जांघें फैली हुई थीं। बैंगनी रंग की फूलदार पैंटी उनके एक पैर पर लटकी हुई थी। मामा उनके पैरों के बीच उल्टे लेटे हुए थे। उनका मुँह माँ की चूत पर लगा हुआ था।
माँ की चूत मोटी, फूली हुई और चमक रही थी। मामा अपनी मोटी जीभ से उनकी चूत के दोनों होंठों को चाट रहे थे, फिर क्लिट को मुँह में लेकर चूस रहे थे। माँ के दोनों हाथ उनके सिर पर थे। वो जोर-जोर से कराह रही थीं।
“आह्ह्ह… रमेश… वहाँ… धीरे… आह्ह्ह… जीभ… अंदर…”
मामा का नाम रमेश था। मैंने पहली बार उन्हें इस नाम से पुकारते सुना। माँ की आवाज में वह संस्कारी स्वर बिलकुल गायब था। सिर्फ वासना थी।
मामा ने उनकी चूत के अंदर जीभ घुसा दी। माँ की कमर उछल गई।
“आह्हhhhh… मत करो ऐसा… अह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”
मैं पत्थर की तरह खड़ा देख रहा था। मेरा लंड पजामे में तन चुका था। माँ की गोरी जांघें काँप रही थीं। मामा उनकी चूत को इतनी जोर से चूस रहे थे कि चूसने की आवाज तक ऊपर आ रही थी।
थोड़ी देर बाद माँ का शरीर तन गया। उन्होंने मामा के बाल जोर से पकड़ लिए और लंबी कराह के साथ झड़ गईं।
मामा ने अपना मुँह उनकी चूत पर लगाए रखा। माँ के पानी को वो पी रहे थे। जीभ से चाट-चाट कर साफ कर रहे थे। माँ हाँफ रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं। चेहरे पर एक अजीब सी सुकून और शर्म की मिश्रित भाव था।
फिर मामा ऊपर आए। उन्होंने माँ की साड़ी और ब्लाउज पूरी तरह हटा दिए। ब्रा भी खोल दी। माँ के भारी, गोरे बूब्स बाहर आ गए। निप्पल सख्त और गुलाबी।
मामा ने दोनों को मुँह में लेकर जोर से चूसना शुरू कर दिया। कभी एक, कभी दूसरा। दाँतों से हल्के काट भी रहे थे। माँ की कराहें फिर से शुरू हो गईं।
“आह्ह्ह… चूसो… जोर से चूसो… आह्ह्ह… मेरे भाई… आज तो बहुत जोर से… आह्ह्ह…”
“भाई” शब्द सुनकर मेरे पेट में एक अजीब सा दर्द हुआ। लेकिन साथ ही मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने पजामा के ऊपर से ही उसे दबाना शुरू कर दिया।
मामा ने माँ के बूब्स छोड़कर अपना पजामा नीचे किया। उनका लंड बाहर आया - मोटा, सांवला, करीब साढ़े छह इंच का। माँ ने उसे देखते ही हाथ बढ़ाया। उन्होंने लंड को पकड़ा और अपने मुँह की तरफ ले गईं।
पहले नोक को चाटा। फिर धीरे-धीरे मुँह में ले लिया। मामा के बाल पकड़कर माँ ने सिर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। लार उनके मुँह से बहकर बूब्स पर गिर रही थी।
“आह्ह्ह… ऐसे ही चूसो दीदी… उफ्फ… गले तक ले लो… आह्ह्ह…”
माँ पूरी तरह डूबी हुई थीं। वो मामा के लंड को चूस रही थीं जैसे सालों से तरस रही हों। कभी नोक को चूसतीं, कभी पूरा अंदर लेने की कोशिश करतीं। उनकी आँखों में पानी आ गया था लेकिन वो रुकी नहीं।
मैं ऊपर से सब देख रहा था। मेरा हाथ अब पजामे के अंदर चला गया था। लंड को सीधे पकड़कर हिलाने लगा था। माँ की वो संस्कारी छवि टूट चुकी थी। उनकी जगह एक हवस से भरी औरत ले चुकी थी जो अपने ही भाई का लंड चूस रही थी।
माँ अभी भी मामा के लंड को मुँह में लिए हुए थीं। उनकी लार लंड पर बह रही थी और बूब्स पर टपक रही थी। मामा के हाथ उनके बालों में थे। वो धीरे-धीरे माँ के सिर को आगे-पीछे कर रहे थे।
“आह्ह्ह… दीदी… गले तक ले लो… ऐसे ही चूसो… उफ्फ…”
माँ ने लंड को और गहराई तक लिया। उनकी आँखों में पानी आ गया लेकिन वो रुकीं नहीं। कुछ देर बाद मामा ने उन्हें रोका। उन्होंने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ गए।
पहले दोनों बूब्स को फिर से चूसा, काटा, मसला। माँ कराह रही थीं।
फिर मामा ने माँ को घोड़ी बना दिया। माँ ने खुद अपनी गांड पीछे की तरफ उठाई। मामा ने अपना मोटा लंड उनकी चूत के मुँह पर रगड़ा। गीली चूत पर लंड फिसल रहा था। फिर उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा।
पूरा लंड माँ की चूत में समा गया।
“आह्हhhhh… रमेश… धीरे… बहुत अंदर… आह्ह्ह…”
मामा ने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के पर “फच-फच” की आवाज कमरे में गूंज रही थी। माँ की मोटी गांड मामा के पेट से टकरा-टकरा कर लहरा रही थी। उनके बूब्स नीचे लटककर जोर-जोर से हिल रहे थे।
मैं ऊपर से सब देख रहा था। मेरा लंड अब पूरी तरह बाहर निकाल लिया था। हाथ से तेजी से हिला रहा था।
माँ की वो कराहें… “आह्ह… आह्ह… और जोर से…” सुनकर मेरा शरीर काँप रहा था।
मामा ने स्पीड बढ़ा दी। “दीदी… तेरी चूत आज भी उतनी ही टाइट है… कितने दिन बाद चोद रहा हूँ… आह्ह्ह…”
माँ पीछे की तरफ धकेलते हुए जवाब दे रही थीं, “चोदो… अपनी दीदी को चोदो… आह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है… और तेज… रमेश…”
कुछ देर बाद मामा ने माँ को घुमाया। उन्हें अपने ऊपर बैठा लिया। माँ ने खुद लंड को अपनी चूत में सेट किया और बैठ गईं। पूरा लंड अंदर जाते ही उन्होंने लंबी साँस भरी। फिर ऊपर-नीचे कूदने लगीं।
उनके भारी बूब्स हवा में उछल-उछल रहे थे। मामा नीचे से धक्के दे रहे थे। दोनों के शरीर पसीने से चमक रहे थे। माँ की चूत से सफेद चिपचिपा पानी निकलकर लंड पर चिपक रहा था और अंदर-बाहर हो रहा था।
“आह्हhhhh… ऐसे ही… कूदो दीदी… अपनी चूत से मेरे लंड को पीसो… आह्ह्ह…”
माँ पागलों की तरह ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी गांड मामा की जांघों पर थप-थप की आवाज कर रही थी। मैंने अपनी मुठ की रफ्तार और बढ़ा दी। लगता था जैसे मैं भी उनके साथ ही चोद रहा हूँ।
थोड़ी देर बाद मामा ने माँ को फिर से नीचे किया। इस बार उन्होंने माँ की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और बहुत गहराई तक पेलने लगे। हर धक्का इतना जोरदार था कि बिस्तर चरचराने लगा। माँ की आँखें बंद थीं। मुँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं।
“आह्ह्ह… रमेश… बहुत गहरा… बच्चेदानी तक जा रहा है… आह्ह्ह… धीरे… नहीं… जोर से ही चोदो… आह्ह्ह…”
मामा ने अचानक लंड बाहर निकाला और माँ की चूत को फिर से चाटने लगे। माँ की कमर उछल गई। फिर मामा ने उनकी मोटी गांड के दोनों हिस्सों को फैलाया और जीभ से उनके छेद को चाटना शुरू कर दिया।
माँ सिसक उठीं। “ओह्ह्ह… ऐसा मत करो… अह्ह्ह… रमेश… गांड… मत चाटो…”
लेकिन मामा नहीं रुके। वो गांड के छेद को जीभ से गीला कर रहे थे, उंगली से सहला रहे थे। माँ अपनी गांड उचका-उचका कर जवाब दे रही थीं।
“आह्ह्ह… मेरे भाई… आज मेरी गांड भी चाट रहे हो… आह्ह्ह…”
फिर मामा ने अपना लंड उनकी गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। माँ की आँखें फट गईं।
“आह्हhhhh… दर्द… रमेश… बहुत संकरा… आह्ह्ह…”
मामा ने धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गांड में धकेल दिया। माँ ने तकिया मुँह में दबा लिया। मामा ने कमर पकड़कर गांड में जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। साथ ही हाथों से उनके बूब्स मसल रहे थे।
“आह्ह्ह… दीदी… तेरी गांड भी चूत जैसी मस्त है… आज दोनों होल चोदूँगा… आह्ह्ह…”
माँ अब दर्द भूल चुकी थीं। वो अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल रही थीं। “चोदो… गांड चोदो… अपनी दीदी की गांड फाड़ दो… आह्ह्ह… जोर से… रमेश…”
मैं ऊपर से सब देखकर पागल हो रहा था। मेरी मुठ इतनी तेज चल रही थी कि लग रहा था अभी निकल जाएगा। माँ की मोटी गांड में मामा का लंड अंदर-बाहर हो रहा था। उनके आंड माँ की चूत से लगकर थप-थप की आवाज कर रहे थे।
कुछ देर बाद मामा ने फिर से लंड चूत में डाल दिया। अब वो बारी-बारी से चूत और गांड दोनों में डाल रहे थे। माँ पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं।
“आह्हhhhh… दोनों… एक साथ सता… चूत… गांड… आह्ह्ह… आज तो पूरी तरह चोद दिया… रमेश…”
मामा ने माँ को गोद में उठा लिया। खड़े-खड़े ही उनकी चूत में लंड डालकर जोर-जोर से पेलने लगे। माँ ने उनके गले में बाँहें डाल रखी थीं। उनके बूब्स मामा के सीने से दब रहे थे। दोनों पसीने से लथ-पथ थे। कमरे में सिर्फ “फच-फच” और माँ की कराहें गूंज रही थीं।
“आह्ह्ह… रमेश… बहुत जोर से… पकड़ के चोदो… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”
मामा ने स्पीड और बढ़ा दी। माँ का शरीर तन गया। उन्होंने जोर से काँपते हुए झड़ गईं। उनकी चूत से पानी की धार निकल पड़ी। बिस्तर गीला हो गया। मामा ने रुकने की बजाय और तेज कर दिया।
“ले दीदी… झड़… अपनी चूत से झड़… अब मेरी बारी…”
कुछ ही देर बाद मामा बोले, “दीदी… मेरा निकलने वाला है…”
माँ ने तुरंत कहा, “मुँह पर निकाल… मेरे मुँह में दे…”
मामा ने लंड बाहर निकाला। माँ घुटनों के बल बैठ गईं और मुँह खोल दिया। मामा ने अपना गाढ़ा वीर्य उनकी जीभ, होंठ और मुँह में उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि माँ के मुँह से टप-टप करके बिस्तर पर गिरने लगा। माँ ने जितना बन पड़ा निगल लिया। बाकी को होंठों से चाट लिया।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। माँ के मुँह के आसपास वीर्य चिपका हुआ था। शरीर पसीने से चमक रहा था। मामा उनके बगल में लेट गए।
“दीदी… बहुत दिन बाद तेरी चुदाई की… आज तो मजा आ गया,” मामा ने हाँफते हुए कहा।
माँ कुछ नहीं बोलीं। बस आँखें बंद किए हांफ रही थीं।
मैं ऊपर से सब देख चुका था। मेरा भी पानी निकल चुका था। हाथ में चिपचिपा माल लगा था। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने चुपचाप वहाँ से हटने की सोची।
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