पूर्णिमा माँ की बेटे संग रांडगी!

Hindi Sex Stories : सोती माँ ने चुत में लिया बेटे का लंड! बूढ़े पति के रहते Kamvasna में किचन व बालकनी में चुदी! कोख में लिया बेटे का बीज और बन गई बेटे की रांड!


मेरा नाम पूर्णिमा है। उम्र पैंतालीस साल। लेकिन मेरा जिस्म अभी भी किसी पच्चीस साल की कुतिया जितना मचला और भूखा है।


मेरे स्तन भारी-भरकम हैं। बड़े-बड़े, गोल, और थोड़े लटकते हुए। जैसे दो पके आम जो किसी भी समय तोड़े जा सकते हैं। निप्पल काले और मोटे हैं। हमेशा थोड़े से खड़े रहते हैं।


जब मैं चलती हूँ तो वे साड़ी के नीचे लहराते हैं। ब्लाउज के कपड़े से रगड़ खाकर और सख्त हो जाते हैं। गहरी दरार में हमेशा हल्का पसीना जमा रहता है। मैं खुद आईने के सामने खड़ी होकर उन्हें दोनों हाथों से मसलती हूँ।


निप्पल को उँगली और अंगूठे से घुमाती हूँ। कभी-कभी इतना जोर से मसलती हूँ कि दर्द होने लगता है, लेकिन वही दर्द मुझे गीला कर देता है।


मेरी कमर अभी भी पतली है। लेकिन नीचे जाते ही दो विशाल, मुलायम और गोल चूतड़ शुरू हो जाते हैं। इतने मोटे और नरम कि कोई भी मर्द उन्हें दोनों हथेलियों से फैलाकर बीच की गहरी दरार में मुँह मार सकता है।


जब मैं चलती हूँ तो वे हिलते-डुलते हैं। साड़ी के नीचे उनकी गोलाई साफ नजर आती है। पैंटी गीली हो जाए तो कपड़ा जाँघों से चिपक जाता है और पीछे से देखने वाले का लंड तुरंत खड़ा हो जाता है।


मेरी गांड का छेद छोटा और गुलाबी है। पहले तो बहुत कसकर बंद रहता था, लेकिन अब वह भी खुल चुका है। बार-बार लंड घुसने से थोड़ा ढीला पड़ गया है, लेकिन अभी भी इतना कसा हुआ है कि कोई भी मोटा लंड घुसते समय दर्द और मजा दोनों दे।


और मेरी चूत… वह तो मेरी असली पहचान है। घनी काली झाड़ियों से ढकी हुई। ऊपरी होंठ मोटे और गहरे रंग के। निचले होंठ हमेशा थोड़े खुले रहते हैं। अंदर की दीवारें नरम, गरम और चिकनी हैं। जैसे मक्खन।


मैं जब उँगली डालती हूँ तो तुरंत पानी छूटने लगता है। चूत की खुशबू तेज और तेलीय होती है। खासकर उन रातों में जब मैं अकेली होती हूँ। मेरी जाँघें मोटी और चिकनी हैं।


उनके बीच की जगह हमेशा गर्माहट से भरी रहती है। पेट थोड़ा उभरा हुआ है, लेकिन अभी भी इतना नरम कि कोई भी उस पर लेटकर रगड़ सकता है। 


गर्दन लंबी और चिकनी। होठ मोटे। जीभ हमेशा लार से गीली। मुँह भी अब एक छेद बन चुका है जो लंड चूसने और वीर्य निगलने के लिए बना है।


यह है मेरा पूरा जिस्म। पैंतालीस साल की पूर्णिमा का जिस्म। हर हिस्सा भूखा। हर छेद खाली। हर रात तड़पता हुआ। ये Nonveg XXX Kahani वाली Hindi Sex Kahani व Mom Son Family Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


सरकारी नौकरी के लालच में मैंने पंद्रह साल बड़े आदमी से शादी कर ली थी। तब मेरी उम्र तीस थी, उसकी पैंतालीस। अब वह साठ का हो चुका है। बिल्कुल सड़ चुका। लंड अब कभी ठीक से खड़ा नहीं होता।


महीने में एक बार भी मुश्किल से। वह ऊपर से ही रगड़ता है, दो-तीन झटके मारता है, उसका पतला पानी निकल जाता है और वह खर्राटे मारकर सो जाता है। मेरी चूत अधूरी रह जाती है।


मैं उसी कमरे में अपनी उँगली से अपनी चूत रगड़ती हूँ। कभी दो उँगलियाँ, कभी तीन। कभी तकिया के नीचे मुँह दबाकर कराहती हूँ। बेटा उसी कमरे में सोता है। उम्र बाईस साल। जवान, मजबूत, और अब मेरा असली मर्द।


पहले सालों तक वह सोता रहता था। लेकिन धीरे-धीरे उसकी नींद उथली पड़ने लगी। एक रात मैंने देखा कि उसकी आँखें आधी खुली हैं। वह मेरी उँगली चूत में घुसते हुए देख रहा था।


मेरे बड़े स्तन उछल रहे थे। मेरे मोटे चूतड़ बिस्तर पर दब रहे थे। मैंने उस रात और जोर से उँगली मारी। जानबूझकर। उसे दिखाने के लिए। मेरी चूत की आवाज़ – चिप-चिप-चिप – कमरे में गूँज रही थी। वह चुपचाप देखता रहा।


🔥 एक और कामुक स्टोरी : बहन ने बनाया मदारचोद! 02


अगली रात उसने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रखा। गर्म हाथ। मैं सहम गई लेकिन हटी नहीं। उसने धीरे-धीरे हाथ ऊपर सरकाया। मेरी पैंटी के इलास्टिक तक पहुँचा। फिर अंदर घुसा दिया।


उसकी उँगली सीधे मेरी गीली चूत पर जा लगी। मैंने आँखें बंद कर लीं। साँस रोके रखा। वह मेरी चूत के होंठ सहला रहा था। फिर एक उँगली अंदर डाल दी। धीरे से। मैंने कुछ नहीं कहा।


क्योंकि अंदर तक गर्माहट फैल गई थी। बूढ़े पति के लंड में जो गर्मी कभी नहीं मिली, वह उसके बेटे की उँगली में थी।


उस रात उसने देर तक मेरी चूत सहलाई। दो उँगलियाँ डालकर अंदर-बाहर किया। मेरे निप्पल को दूसरी हाथ से मसला। मैं लेटी रही। शांत। लेकिन मेरी चूत पानी छोड़ रही थी। उसकी हथेली पूरी गीली हो गई थी।


आखिर में उसने अपनी उँगलियाँ चूस लीं। मैंने आँखें खोलीं तो वह मुझे देख रहा था। मैंने कुछ नहीं बोला। बस करवट बदल ली।


अगली रात वह और नजदीक आ गया। मेरे बिस्तर पर चढ़ आया। मेरे ब्लाउज के बटन खोले। मेरे भारी स्तन निकाल लिए। मुँह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। निप्पल को जीभ से घुमाया, दाँतों से हल्का काटा।


मैंने उसके सिर को पकड़ लिया। पहली बार मैंने प्रतिक्रिया दी। उसके बालों में उँगलियाँ फेर दीं। वह और जोश में आ गया। मेरी साड़ी ऊपर की, पैंटी नीचे खींची और अपनी जीभ सीधे मेरी चूत पर रख दी।


पहली बार किसी ने मेरी चूत इस तरह चाटी थी। बूढ़े पति ने तो कभी जीभ भी नहीं लगाई थी। बेटा मेरी चूत के होंठ चूस रहा था। क्लिटोरिस को जीभ की नोक से फड़फड़ा रहा था।


दो उँगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिला रहा था। मैं काँपने लगी। मेरे मोटे चूतड़ उसकी बाँहों में दब रहे थे। मैंने तकिया मुँह पर रखा और कराहने लगी। वह नहीं रुका।


जब तक मैं जोर से झड़ नहीं गई, वह चाटता रहा। मेरी चूत से पानी उसकी पूरी हथेली पर बह गया। उसने वह पानी चाट लिया। उस रात उसने अपना लंड नहीं डाला। बस चाटकर सो गया। लेकिन अगली रात उसने डाला।


मैं लेटी हुई थी। उसने मेरे ऊपर चढ़कर अपना कड़ा लंड मेरी जाँघों के बीच रगड़ा। फिर चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का मारा। अंदर घुस गया। मोटा। गरम। नसों वाला।


मैंने साँस रोक ली। पूरा लंड अंदर तक चला गया। मेरे गर्भ तक। उसने रुककर मुझसे पूछा – “माँ… दर्द हो रहा है?” मैंने सिर हिलाया। “नहीं… और अंदर कर।”


उसने पूरी तरह पेल दिया। फिर रगड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे। फिर तेज। मेरे बड़े स्तन उसके हाथों में थे। वह उन्हें मसलते हुए चोद रहा था। मेरे चूतड़ बिस्तर पर दब-दबकर फैल रहे थे।


चूत की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी – थप-थप-थप। पति बगल वाले कमरे में खर्राटे मार रहा था। बेटा और जोर से भोंकने लगा। मैंने अपने पैर उसकी कमर पर लपेट लिए।


“जोर से… बेटा… माँ की चूत फाड़ दे…” ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम  पर पढ़ रहे है।


वह फाड़ने लगा। इतनी जोर से कि बेड की लकड़ी चरमरा गई। मेरे स्तन उछल-उछलकर उसके चेहरे से टकरा रहे थे। उसने एक स्तन मुँह में लिया और चूसते हुए चोदता रहा।


आखिर में उसने गहरी कराह ली और अपना गाढ़ा वीर्य मेरी चूत के अंदर उड़ेल दिया। गरम। बहुत गरम। मैंने महसूस किया कि उसका पानी अंदर गहराई तक जा रहा है। वह मेरे ऊपर गिरा रहा। हम दोनों पसीने से लथपथ थे।


उस रात के बाद मैं उसकी रांड बन गई।


अब हर रात वही होता है। पति सो जाता है तो बेटा मेरे बिस्तर पर आ जाता है। कभी वह मुझे घोड़ी बनाता है। मैं चारों पैरों पर होती हूँ। मेरे भारी स्तन लटकते हैं। चूतड़ हवा में उठे होते हैं। वह पीछे से लंड डालता है और मेरे बाल पकड़कर खींचता है।


“माँ… तेरी गांड कितनी नरम है… आज गांड में दूँ?” मैं सिर हिलाती हूँ। वह थूक लगाता है और धीरे-धीरे गांड में घुसा देता है। दर्द होता है लेकिन मैं सहती हूँ। पूरा लंड अंदर चला जाता है।


वह गांड चोदते हुए मेरी चूत में उँगलियाँ डालता है। दो जगह से भरी हुई माँ। मैं कुतिया की तरह हांफती हूँ। “हाँ बेटा… फाड़ दे माँ की गांड… पानी अंदर छोड़…”


कभी वह मुझे सोफे पर लिटाता है। दोनों टाँगें उसके कंधों पर। इतनी गहरी चुदाई कि मुझे लगता है लंड पेट में चुभ जाएगा। मेरे स्तन इधर-उधर उछलते हैं। वह उन्हें पकड़कर मसलता है।


निप्पल को ऐंठता है। मैं चिल्लाती हूँ लेकिन आवाज़ दबा लेती हूँ।


दिन में भी। पति दफ्तर चला जाता है तो बेटा घर पर रहता है। मैं किचन में रोटी बना रही होती हूँ तो वह पीछे से आता है। साड़ी ऊपर करता है। पैंटी एक तरफ करता है और खड़े-खड़े चोदने लगता है।


मैं आटे में हाथ डाले खड़ी रहती हूँ और वह मुझे पीछे से भोंकता रहता है। कभी वह मुझे सिंक पर झुका देता है। ठंडा सिंक मेरे स्तनों से लग रहा होता है और पीछे से गरम लंड चूत में।


एक दिन उसने मुझे बालकनी में चोदा। दोपहर का समय। नीचे गली में लोग आ-जा रहे थे। मैं रेलिंग पकड़े खड़ी थी। साड़ी कमर तक उठी हुई। वह पीछे से चोद रहा था।


👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : लिफ्ट में गरम कर, मौसी को ज़बरदस्ती पेला!


मेरे चूतड़ उसके पेट से टकरा रहे थे। मैं डर रही थी कि कोई देख न ले लेकिन उसी डर में मेरी चूत और गीली हो गई।


उसने मेरे कान में कहा – “माँ, अगर कोई देख ले तो क्या होगा? सबको पता चल जाएगा कि तू अपने बेटे की रांड है।” मैं और भीग गई। उसने उस दिन मेरी गांड में पानी छोड़ा।


रात को वह मुझे बाथरूम में ले जाता है। शीशे के सामने। मैं अपनी चूत में उसका लंड घुसता हुआ देखती हूँ। कैसे मेरे मोटे होंठ उसके लंड को निगल रहे हैं। कैसे मेरी गांड लाल हो रही है।


वह मेरे बाल पकड़कर सिर पीछे खींचता है ताकि मैं खुद को अच्छी तरह देखूँ। 


“देख माँ… कैसे तेरी चूत मेरे लंड को खा रही है… तू मेरी रांड है ना मदारचोद?” मैं हाँ में जवाब देती हूँ। लार टपकाती हूँ। ये Family XXX Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


कभी वह मुझे रस्सी से बाँधता है। हाथ पीछे। टाँगें फैली हुई। फिर घंटों चाटता है। मेरी चूत, गांड, स्तन सब। जब मैं झड़ने के करीब होती हूँ तो रुक जाता है। फिर से शुरू।


तीन-चार बार ऐसा करके आखिर में लंड डालता है। मैं पागल हो जाती हूँ। रोने लगती हूँ। “बेटा प्लीज… डाल दे… माँ मर रही है…” तब वह दया दिखाता है और जोरदार चुदाई करता है।


एक रात उसने अपने दोस्त को बुलाया। मैंने पहले मना किया लेकिन उसने कहा – “माँ, तू मेरी रांड है। मेरी मर्जी।” दोस्त आया। बेटा मुझे कमरे में ले गया। कपड़े उतरवाए।


मेरे बड़े स्तन, मोटे चूतड़, घनी चूत सब दिखा दिए। दोस्त का लंड तुरंत खड़ा हो गया। बेटा बैठकर देखता रहा जबकि दोस्त ने मुझे चोदा। पहले चूत में। फिर गांड में।


बेटा बीच-बीच में मेरे मुँह में अपना लंड ठूंस देता था। आखिर में दोनों ने मिलकर मेरे ऊपर पानी छोड़ा। चेहरे पर, स्तनों पर, चूत पर। मैं लेटी रही और दोनों का वीर्य चाटती रही।


उस दिन के बाद बेटा और खुला हो गया। अब वह मुझे सिर्फ अपनी रांड नहीं, अपनी निजी वेश्या समझता है। कभी वह मुझे छत पर ले जाता है। रात के अंधेरे में। आसमान के नीचे चोदता है।


कभी कार में। पति जब बाहर होता है तो वह मुझे पीछे की सीट पर लिटाकर चोदता है।


मेरी चूत अब हमेशा थोड़ी खुली रहती है। उसके लंड की आदत पड़ गई है। गांड भी। मुँह भी। सुबह जब वह कॉलेज जाता है तो मैं उसके इस्तेमाल किए हुए अंडरवियर सूँघती हूँ।


अपनी चूत में उँगली डालकर उसकी याद में झड़ती हूँ। शाम को वह आता है तो दरवाजे पर ही उसकी पैंट खोल देती हूँ और घुटनों के बल बैठकर लंड चूसने लगती हूँ।


वह बाल पकड़कर मेरे मुँह में और गहरा ठोंकता है। मैं लार और आँसू मिलाकर चूसती हूँ। कभी वह मुँह में ही पानी छोड़ देता है। मैं निगल जाती हूँ। कभी निकालकर मेरे चेहरे पर मारता है। मैं हँसती हूँ और चाट लेती हूँ।


बूढ़ा पति कुछ नहीं जानता। या जानता है लेकिन बोलता नहीं। उसका लंड अब बिलकुल मर चुका है। कभी-कभी मैं उसे छूती हूँ तो वह शर्म से मुँह फेर लेता है। मैं हँसती हूँ और बेटे के कमरे में चली जाती हूँ।


अब मेरी जिंदगी का हर पल उसी के लंड के इर्द-गिर्द घूमता है। खाना बनाते हुए, कपड़े धोते हुए, टीवी देखते हुए – हर वक्त मेरी चूत याद दिलाती है कि खाली है।


बेटा जब चाहे आता है और भर देता है। कभी सुबह पाँच बजे। कभी दोपहर में। कभी रात के दो बजे। मैं हमेशा तैयार रहती हूँ। पैंटी नहीं पहनती। सिर्फ साड़ी। ताकि जब चाहे ऊपर करके डाल सके।


एक दिन उसने कहा – “माँ, आज मैं तुझे Pregnant/गर्भवती बनाऊँगा।”


मैंने हँसकर कहा – “बेटा, तेरी माँ पहले से ही तेरी रांड है। बच्चा हो जाए तो पाल लेंगे।” ये XXX Kahani व Mom Pregnant Ki Chudai Ki Kahani आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


उस दिन उसने बहुत देर तक चोदा। बार-बार अंदर पानी छोड़ा। मेरी चूत उसके वीर्य से लबालब भर गई। वह बाहर निकल रहा था तो मैं उँगली से वापस अंदर कर देती थी।


रातें लंबी हो गई हैं। कभी वह मुझे पूरी रात भर चोदता है। थकता नहीं। बाईस साल का जोश है। मेरी पैंतालीस साल की भूख है। दोनों मिलकर आग बन गए हैं।


सुबह जब पति उठता है तो हम दोनों नहा चुके होते हैं। सामान्य चेहरे। लेकिन मेरी चूत अभी भी उसके वीर्य से भरी होती है। चलते समय वह रिसता है और मेरी जाँघों पर चिपक जाता है।


मैं अब कोई शर्म नहीं महसूस करती। आईने के सामने खड़ी होकर अपने जिस्म को देखती हूँ – बड़े स्तन, मोटे चूतड़, इस्तेमाल से थोड़ी सूजी हुई चूत – और मुस्कुराती हूँ। यह जिस्म अब सिर्फ एक व्यक्ति का है। मेरे बेटे का।


वह जब भी चाहे मेरी चूत फाड़ सकता है। गांड चीर सकता है। मुँह भर सकता है। मैं उसकी रांड हूँ। उसकी कुतिया। उसकी निजी वेश्या।


और यह कहानी हर रात दोबारा लिखी जाती है। और गंदी। और गीली। और गहरी।


💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : बहन ने बनाया मदारचोद!


बेटा चोदता है।


माँ लेती है।


बूढ़ा पति सोता रहता है।


यही है मेरी जिंदगी अब।


पैंतालीस साल की माँ। बाईस साल के बेटे की पूरी तरह खोली हुई, इस्तेमाल की हुई, वीर्य से लथपथ रांड।


कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हर नया दिन नई चुदाई लेकर आता है। कभी वह मुझे रसोई की मेज पर लिटाकर चोदता है। कभी अलमारी में खड़ा करके। कभी छत की दीवार से सटाकर।


कभी वह मेरे पूरे शरीर पर तेल लगाता है और मालिश करते-करते चोदने लगता है। कभी वह मुझे अपनी पसंदीदा पोर्न की तरह पोजीशन में रखता है और वीडियो बनाता है। मैं देखती हूँ और और गीली हो जाती हूँ।


कभी वह मुझे अपने दोस्तों के सामने नंगा करके नाचवाता है। फिर बारी-बारी सब चोदते हैं। मैं सबका पानी पीती हूँ। सबकी चूत और गांड में लेती हूँ। बेटा सबसे ज्यादा खुश होता है जब मैं उसकी रांडगिरी की हद पार कर जाती हूँ।


अब कोई सीमा नहीं बची।


सिर्फ चूत की प्यास।


लंड की भूख।


और माँ-बेटे की गंदी, असली, खून से भरी हुई रांडगी।


हर रात।


हर दिन।


जब तक साँस चले।


तो दोस्तों यह Mom Son की Family Sex Story कैसे लगी कॉमेंट में जरूर बताए! आपकी पूर्णिमा ताई!!

← Previous Story

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-


📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!