मायके में फाड़ी सौतेली माँ की चूत!
Family Sex Stories : किचन में 25 साल की नई माँ के गांड पर सटाया लंड! चाँदनी रात में बेटे ने चाटी चूत! 7 इंची लंड घुसाकर फाड़ी चूत! और बुझाया माँ की प्यास प्यास! नानी के बगल वाले कमरे में चुदाई की!
हेलो जी, मेरा नाम रजत है और मैं जिला गाज़ियाबाद का रहने वाला हूँ आप लोगों का समय बर्बाद न करते हुए सीधे कहानी पर आता हूं।
ये कहानी मेरी और मेरी सौतेली मां के बारे में है आज मुझे नई मां मिलकर पूरे 6 महीने हो चुके है। मेरी उमर अभी 19 साल है लेकिन मेरे पिता को लगा की मुझे एक मां की ज़रूरत है इसलिए उन्होंने शादी कर ली।
मेरे पिता की उमर अभी 45 साल हो गी लेकिन मेरी मां बस 25 वर्षीय एक मस्त माल जैसी लड़की है। हम वैसे मुरादाबाद इलाके के रहने वाले है।
मेरे पिता ने अपने गांव की ही एक लड़की से शादी कर ली। मेरे घर में पैसे की कोई कमी नहीं एक ठीक ठाक खाने पीने वाला मेरा घर है, मेरे पिता दिन में काम पर जाते है और रात में देर से आकर सो जाते है।
आप अंदाज़ा लगा सकते हो की मेरी नई मां रजनी की सुहागन वाली ज़िंदगी कैसी हो गी। मेरे पिता को चुदाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं है शायद उनकी उमर की वजह से।
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मेरी मां अभी अभी जवान हुई है और गांव की लड़कियों में जोश आम तौर पर बाकियों से अधिक होता है। ये कहानी एक महीने पहले अपने रंग में आई।
मेरी गर्मियों की छुट्टियां चल रही थी और मेरी नई मां मुझे अपने मायके लेकर गई थी। जब हम वहां गुजरे कुछ महीनों में हमारी आपस में बॉन्डिंग अच्छी हो गई थी।
उमर में ज़्यादा फर्क न होने की वजह से मैं उनके मन को समझ लेता था एक औरत को इससे ज़्यादा और कुछ चाहिए भी नहीं होता है।
फिर जब हम उनके गांव पहुंचे तो वहां आबादी कोई खास नहीं थी घर की ज़मीन बड़ी थी लेकिन कमरे बस दो ही थे जिसमें मेरी मां की मां रहती थी।
जब हम गांव गए तो मेरी मां ने बहुत खुशी खुशी मुझे सबसे मिलाया। उसके बाद हमने थोड़ा आराम करा और बाज़ार गए गांव के बाहर थोड़ी दूर एक बाज़ार लगता था।
बाज़ार में आसपास के गांव से भी लोग आए थे तो भीड़ बहुत थी वहां कुछ लड़के ऐसे भी थे जो मां को घूर रहे थे मुझे थोड़ा बुरा लगा लेकिन फिर मैने मां को एक नज़र ठीक से पहली बार देखा।
उनकी साड़ी की एक तरफ से मोटे सख्त चूंचे के आकार साफ दिख रहे थे। उनकी खुली कमर एक दम मस्त थी और पीछे से गांड़ की गोलाई बिल्कुल मक्खन मलाई जैसी लग रही थी।
अचानक सामने से मेरी मां की सहेली आ गई वो उनसे गले मिली और बोली “अरे रजनी तूने शादी कब कर ली।”
फिर उनकी सहेली मुझे देखकर बोली " अरी रजनी। तेरा मरद तो बहुत सुंदर है कहा से ढूंढी ऐसा लड़का।”
हम एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिया मुझे थोड़ी शर्म सी आ गई। तभी मां बोली " कृतिया ये मेरा पति नहीं बेटा है।
घर की खराब हालत के चलते मुझे ये समझौता करना पड़ा। लेकिन रजत के रूप में मुझे एक अच्छा साथी मिला है।”
मां की बाते मेरे दिल को छू गई फिर उनकी सहेली ने मुझे गले लगाया वो मेरे जिस्म से अपने जिस्म को रगड़ कर बोली " बेटा मैं तेरी मासी हूं कभी मेरे पास भी आना प्यार लेने।”
रजनी मां ने उसे एक थप्पड़ मारा और बोली हवसी किसी को तो छोड़ दे। उनके जाने के बाद हम बाज़ार में घूमने लगे। पूरे रास्ते मैने मां का हाथ पकड़े रखा और उन्होंने भी मेरा हाथ नहीं छोड़ा।
कोई जान पहचान का मां को देखता तो बोलता " बड़ा सोना पति चुनकर लाई है छोरी।” मां ने कुछ देर बाद दूसरों को बताना भी बंद कर दिया की मैं कौन हूं।
मेरे मन ने पहली बार रजनी को मां के नहीं बल्की एक लड़की के रूप में देखा मैं खुद भी एक जवान शहरी लड़का था कद काठी से मैं उनसे बड़ा ही लगता था और मां 28 , 26, 28 के जिस्म की मालकिन थी।
लोग हमें पति पत्नी समझते थे इसमें उनकी गलती नहीं थी। हम सचमे देखने में पति पत्नी ही लग रहे थे बाज़ार घूमने के बाद हम घर पहुंचे और मां किचेन में खाने की तैयारी करने चली गई।
मैं थोड़ी देर आराम करने लगा मेरे दिमाग में रजनी मां का मादक जिस्म घूम रहा था। मेरा हाथ अपने आप ही लंड पर चला गया मैने सोचा थोड़ी देर मां के पास जाकर मज़े लिए जाए।
मैं तुरंत उठा और किचेन में चला गया जहां वो सब्ज़ी काट रही थी। मैं दरवाज़े पर जाकर खड़ा हो गया और अपनी मां के उभरे चूचे निहारने लगा।
मेरी नज़रो को उन्होंने पकड़ लिया और मुस्कुरादी हमारे बीच में से जैसे कोई पर्दा हटता हुआ मुझे महसूस हुआ।
मेरे से आंखे मिलाकर मां ने अपने सीने पर से पल्लू को थोड़ा अलग करा जिससे उनकी मोटी चूची मुझे दिखने लगी।
मेरे लंड का उभार साफ देखा जा सकता था उसे देखकर रजनी मां आहे भर रही थी। तभी उनकी मां किचेन में आ गई और आटा पीटने लगी।
रजनी ने जल्दी से साड़ी को ठीक करा वो अपने काम में लगी होने का नाटक करने लगी। मैं अभी भी वही खड़ा था। रजनी ने नीचे से एक डब्बा उठाया।
मुझे देखकर एक तीखी निगाह से वो बोली “बेटा ज़रा मेरी मदद कर दो” मैने आगे बढ़कर डिब्बा ले लिया उसे ऊपर अलमारी में रखना था।
मां मेरे आगे थी और ऊपर की तरफ देख रही थी उनकी मस्त गांड़ मेरे लंड पर लग रही थी। मैने डिब्बा अलमारी पर टिकाया और गांड़ पर लंड टिका दिया।
ओह्ह्ह्ह! मखमली सी नर्म और गर्म गांड़ मेरे लंड पर दबने लगी फिर मुझे भी अच्छा लगने लगा तो आराम से मज़ा लेते लेते मैने पानी खींचना शुरू करा।
जब भी मैं अपने हाथ पीछे लेता तो पूरे जिस्म को उनके साथ घिस देता वो भी झुक कर गांड़ को लंड पर टिका देती उनकी मदद कर के मेरा लंड पूरा तन चुका था।
जब तक में घर वापस आया तो खाने का समय हो गया था हम तीनों ने साथ बैठकर खाना खाया उसके बाद रजनी मां की मां जाकर सो गई और हम दोनों को अकेला छोड़ गई।
अब हमारे पास एक ही बिस्तर था जिसपर सोना था कहने को हम मां बेटा थे लेकिन आज ये लकीर बीच से हटने वाली थी।
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हम दोनों करीब रात को दस बजे सोए उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी दिन में जो कुछ हुआ सब मेरे दिमाग में घूम रहा था। शायद रजनी मां की भी वही हालत थी जो मेरी थी।
करीब रात के 1 बजे मैने अपनी आंखों खोली खिड़की से चाँद की रोशनी आती साफ दिख रही थी। रजनी मां ने बस पेटीकोट और एक ब्रा पहनी थी।
उनकी कमर चांदनी में चमक रही थी मुझसे खुद पर काबू नहीं रहा था तो मैने उनकी तरफ करवट ले ली और अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया।
मां कमर मक्खन की तरह चिकनी थी मैने नींद में होने के नाटक के साथ उनको कमर से पकड़कर बाहों में कर लिया।
वो सो रही थी या नहीं में नहीं जानता था लेकिन मेरी नींद बिल्कुल गायब थी मैने खुदको उनस चिपका लिया।
उनके जिस्म से आती खुशबू मुझे मदहोश कर रही थीं मैने धीरे से उनकी कमर को सहलाना शुरू कर दिया। धीरे धीरे मैं अपने हाथ को पेट पर ले गया और नाभि में उंगली घुमाने लगा।
मां थोड़ा हिली और गांड़ को मेरे लंड पर दबाकर फिर से शांत हो गई। मैं समझ गया अब उनको भी अच्छा लग रहा है।
मैने उनकी गर्दन को चूमना शुरू करा मां लेकिन बिल्कुल शांत लेटी रही फिर मैं अपने हाथ को उनकी चूंची पर लेकर आ गया और नरमी से दबाने लगा।
मां की बढ़ती सांसे मुझे सुनाई दे रही थी वो आआह! ह्म्म्म आह ! हुहह्हः ऑफ़्फाफ! बड़बड़ाते हुए खुद को रोकने की कोशिश कर रही थी।
मैने भी सोच लिया जब तक ये आंखे नहीं खोलेंगी तब तक लंड नहीं डालूँगा। मैं उठा और पैरों की तरफ बैठ गया एक बाद चाँद की रोशनी में मैने अपनी खूबसूरत मां को देखा।
उसके बाद उनको पैरों से सहलाना चालू कर दिया। मैने उनके पैर पर चूमा फिर टांगों से चूत की तरफ चूमते चूमते जाने लगा। मां लगातार अपने पैर मसल रही थी।
मैने उन्हें थोड़ा घुमाया फिर झांग पर चूमते हुए चूत की तरफ जाने लगा धीरे धीरे चूमते हुए जब में चूत के करीब आया तो मां की आआह! उफ्फ की आवाज़ तेज़ हो गई।
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अब वो जग चुकी थी लेकिन अभी भी आंखे नहीं खोली थी। मैने फिर चूत पर चूमा धीरे से अपनी उंगली से उनकी चूत को सहलाने लगा।
उनकी टांगे हिलने लगी थी मैने अपनी जीभ बाहर निकाली और आइस क्रीम की तरह चूत के नीचे से ऊपर तक एक बार चाटा। रजनी मां का जिस्म पूरी तरह काँप गया ।
मैने हाथ ऊपर लेकर उनके चूंचे दबाने शुरू करे। अपनी पूरी ताकत से मैं उनके चूंचे भींच रहा था नीचे से उनकी चूत को चाट रहा था चूम रहा था।
उसके बाद अपनी चूत को थोड़ा सख्त कर के मैने छेद के अंदर को घुसा दिया। मेरे ऐसा करते ही मां के हाथ मेरे सर के ऊपर आए।
वो मुझे चूत के अंदर दबाने लगी अपनी टांगे उन्हों मेरे गले में बंधी मैं भी लगातार चूत को अंदर तक से चाट रह था। उनकी चूत गीली होने लगी थी।
मां का पानी निकलने लगा था उसके बाद मैं ऊपर की तरफ जाने लगा उनके पेट को चूमने लगा कुछ ही पलो में मैं उनके चूचों तक पहुंच गया।
मेरे सामने उनके मोटे मोटे चूंचे और भूरे निप्पल्स थे मैने उनकी ब्रा हटाई और निप्पल पर अपने होठ रख दिए। मैं बहुत प्यार से अपने मां के चूचों को चूम रहा था।
उनकी सांसे बेधड़क तेज़ थी उनके मुंह से आआह! उन्भ्भः अआआह अआफ अआआह की सिसकियां निकल रही थी। उनके चूचों से आगे बढ़कर मैं रजनी मां के चेहरे पर पहुंचा।
अभी भी उन्होंने आंखे नहीं खोली थी तो मैने अपने कपड़े निकाले और पूरी तरह नंगा होकर उनके ऊपर लेट गया मेरा लंड उनकी चूत के ऊपर था जिसे मैं धीरे धीरे से रगड़ रहा था।
मां भी लंड पर अपनी चूत दबा रही थी उसके बाद मैने उनकी पैंटी उतार दी फिर अपने मोटे 7 इंच का लंड को उनकी चूत पर रखकर एक धक्का दिया।
मां चीखती हुई जागी उन्होंने अपनी आँखें खोली । मां अपनी बड़ी बड़ी आंखों से मुझे घूर रही थी उन्होंने एक बार नीचे देखा तो मेरा लंड उनकी चूत में उतर चुका था।
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फिर मुझे देखकर हसी ओर हलका एक प्यार भरा थप्पड़ मेरे मारते हुए बोली “पहले नहीं डाल सकता था कबसे तड़पा रहा है।"
रजनी मां ने मेरे चेहरों को हाथ में लिया और मेरे होठों को अपने होठों में दबाने लगी वो लगातार मेरे होठ चूस रही थी। मैने भी अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी तो उसे वो पीने लगी।
मां के होठों में से निकलता रस मेरे जोश को बड़ा रहा था। उन्होंने अपनी टांगे मेरी कमर पर बांधी और लंड को चूत में खींचने लगी मैने भी एक ज़ोरदार धक्का मार दिया।
आअआअह! की चीख उनके मुंह से निकलने को थी जिसे मैने चूमकर रोका मुझे डर था की मेरी नानी दूसरे ही कमरे में है।
रजनी मां अपने नाखून मेरी पीठ में घुसा रही थी मैं लगातार लंड को उनकी चूत में अंदर बाहर कर रहा था जब वो थोड़ा काबू में ही तो मैने उनके होठों को छोड़ा।
अब मां अआआह! हम्ममम! ओह्ह्ह चोद मेरे बेटे आआआह! ओह्ह्ह्ह मुझे इंतज़ार था इस रात का अआआह! मेरे बेटे मुझे अपना बनाले आआआह! और चोद अच्छे से बुझा से मेरी प्यास को, बोलते हुए चुद रही थी।
चुदाई करते करते मां दस मिनट में ही झड़ गई लेकिन काम खत्म नहीं हुआ था। मां ने मुझे लेटने को बोला और मेरे ऊपर आकर लंड मुंह ने दबाकर चूसने लगी।
उनके होठ लंड पर महसूस करते ही में तो असमान में उड़ने लगा। मां पेशेवर रण्डी की तरह मेरा लंड चूस रही थी।
वो कभी मेरी मुठी मारती कभी मुंह ने लंड लेकर चूसने लगती उनकी अदा की वजह से मैं भी खुद को ज़्यादा नहीं रोक सका और कुछ ही देर में मैने अपना पूरा पानी उनके चेहरे पर ही छोड़ दिया।
मां के चेहरे को देखकर मेरी हसी निकल गई और हम दोनों हंसते हंसते एक दूसरे को बाहों में भर लिए।
सुबह तक हम यूँही नंगे सोते रहे और अगली सुबह एक नए रिश्ते के साथ हमारी आँख खुली जो आज तक बरकरार है।
ये Mom Son Sex Story आपको कैसी लगी? और अगले हिस्से में क्या होना चाहिए कमेन्ट में ज़रूर बताए! धन्यवाद।
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