झाड़ियों में दोस्त की माँ चोद दी!

Family Antarvasna : खेत के पास झाड़ियों में चोद दी दोस्त की गदराई माँ की गांड! फिर शुरू हुई चुत चुदाई से घरेलू रंडी-रखेल बनने का सफर! हुई Full Desi Chudai!


दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं 25 साल का हूँ और कुशीनगर जिले के एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। देखने में गोरा, कद-काठी अच्छी और बॉडी थोड़ी muscular है।


गाँव में मेरी जिंदगी काफी सादी है, लेकिन एक चीज हमेशा मुझे परेशान करती रही है – मेरे दोस्त सत्यम की माँ शीला आंटी।


सत्यम मेरा बचपन का दोस्त है। उसकी माँ शीला आंटी की उम्र 40 साल है। हाइट करीब 5 फीट 3 इंच, रंग दूधिया गोरा और शरीर ऐसा कि गाँव के ज्यादातर मर्द उनकी तरफ घूरते रहते हैं।


वो हमेशा टाइट साड़ी और ब्लाउज पहनती हैं, जिसमें उनकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ और खासकर मोटी, गोल-गोल, सुडौल गांड साफ दिखती है। जब वो चलती हैं तो उनकी गांड हिलती हुई लगती है, जैसे जानबूझकर सबका ध्यान खींच रही हों।


आंटी बातें तो बहुत संस्कारी करती हैं, लेकिन उनकी बॉडी की हर हरकत कुछ और ही कहानी बताती है।


मैं उन्हें पहली बार करीब 6 महीने पहले ध्यान से देखा था। सत्यम के घर गया था तो आंटी बाहर आँगन में साड़ी ठीक कर रही थीं।


उनकी पीठ मेरी तरफ थी और जब उन्होंने झुककर कुछ उठाया तो उनकी गांड इतनी मोटी और भरी हुई लगी कि मेरे लंड में हल्की सी हलचल हो गई। 


उस दिन से उनकी गांड मेरे दिमाग में बस गई। रात को सोते समय अक्सर उनकी कल्पना करता – वो साड़ी उतारकर नंगी खड़ी हैं, मैं उनके पीछे से पकड़ता हूँ और... फिर मुठ मार लेता।


कई बार तो दिन में भी जब अकेला होता तो उनकी याद आते ही लंड खड़ा हो जाता।


धीरे-धीरे मेरी नजरें उन पर और गहरी होती गईं। गाँव में जब भी मिलते, आँखें मिलतीं। एक बार बाजार में सामान उठाने में मदद की तो उनका हाथ मेरे हाथ से छू गया।


आंटी ने मुस्कुराते हुए धन्यवाद कहा, लेकिन उनकी आँखों में कुछ और ही चमक थी। मैंने सोचा शायद वो भी मुझे नोटिस कर रही हैं।


एक और दिन सत्यम के घर गया तो आंटी अकेली थीं। साड़ी पहने हुए आँगन में झाड़ू लगा रही थीं।


जब उन्होंने झुककर झाड़ू मारी तो उनकी गांड मेरी तरफ उभर आई – इतनी बड़ी, गोल और टाइट कि साड़ी चिपक गई थी। मैं चुपचाप खड़ा देखता रहा।


आंटी ने पीछे मुड़कर देखा तो शर्मा गईं, लेकिन कुछ नहीं बोलीं। बस मुस्कुरा दीं। उस दिन से मेरे मन में और भी गंदे ख्याल आने लगे।


रात को बिस्तर पर लेटकर उनकी गांड की कल्पना करता – कैसे वो हिलती है, कैसे छूने पर मुलायम लगेगी, कैसे दबाने पर सिसकारियाँ निकलेंगी। लंड हाथ में लेकर धीरे-धीरे मसलता और सोचता कि अगर कभी मौका मिला तो पीछे से पकड़कर जोर से दबाऊँगा। 


🔥 एक और कामुक स्टोरी : मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई! 03


कई बार तो सपने में भी देखता - आंटी मेरे सामने नंगी खड़ी हैं, मैं उनकी चूत चाट रहा हूँ और वो मेरे सिर को अपनी जांघों में दबा रही हैं। सुबह उठकर लंड अभी भी खड़ा मिलता।


एक दिन गाँव के बाहर खेत के पास मिले। आंटी अकेली थीं। मैंने हिम्मत करके बात शुरू की, “आंटी, आजकल बहुत सुंदर लग रही हैं।”


आंटी शर्मा गईं लेकिन बोलीं, “अरे बेटा, क्या कह रहा है तू?” लेकिन उनकी आँखें मेरी तरफ टिक गईं। 


मैंने आगे बढ़कर कहा, “सच में आंटी, गाँव में सब आपकी चर्चा करते हैं।” आंटी ने हल्का सा हाथ मेरे कंधे पर रखा और बोलीं, “चुप कर बेटा, कोई सुन लेगा।” लेकिन हाथ हटाने में देर लगाई।


उस स्पर्श से मेरे शरीर में करंट दौड़ गया।


धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। कभी-कभी सत्यम के घर जाता तो आंटी चाय देतीं और थोड़ी देर बातें करतीं।


एक बार जब सत्यम बाहर था, आंटी ने मुझे अकेले में कहा, “तुम बहुत अच्छे लड़के हो राहुल, लेकिन नजरें बहुत तेज हैं।”


मैंने हँसते हुए कहा, “आंटी, आप जैसी औरत को देखकर नजरें तो खुद-ब-खुद तेज हो जाती हैं।” आंटी शर्मा गईं लेकिन मुस्कुरा दीं। उस दिन से मुझे यकीन हो गया कि आंटी भी मुझे नाप रही हैं।


एक शाम जब आंटी बाजार से आ रही थीं तो मैंने मदद की। सामान उठाते समय मेरा हाथ उनकी कमर से छू गया। आंटी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी साँसें थोड़ी तेज हो गईं।


मैंने देखा उनकी चुचियाँ साड़ी में उभरी हुई थीं। मन किया कि अभी पकड़ लूँ, लेकिन खुद को रोका। रात को उस स्पर्श की याद में मुठ मारते हुए सोचा - एक दिन जरूर मौका आएगा।


फिर वो दिन आ गया जब आंटी ने बाइक पर बैठने को कहा।


बाइक पर बैठते ही शीला आंटी ने मेरी कमर पकड़ ली। उनकी मुलायम, गर्म जांघें मेरी कमर से सटी हुई थीं और उनकी बड़ी, गोल गांड बाइक की सीट पर दब रही थी।


जैसे ही मैंने बाइक स्टार्ट की, उनकी साड़ी की पल्लू हवा में उड़ गई और उनके भारी मम्मे मेरी पीठ से रगड़ने लगे। मैं जानबूझकर सड़क के छोटे-छोटे गड्ढों पर बाइक चला रहा था ताकि वो झटके लगें और उनकी चुचियाँ मेरी पीठ से और जोर से दबें।


आंटी को भी सब समझ में आ रहा था। उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोलीं, “राहुल... बाइक इतनी तेज मत चलाओ, गिर जाएंगे।” लेकिन उनकी आवाज में हल्की सी काँपन थी।


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “आंटी डरो मत, मैं संभाल लूंगा।” और फिर जानबूझकर ब्रेक लगाया। 


आंटी आगे की तरफ झुक गईं और उनके दोनों मम्मे मेरी पीठ पर पूरी तरह दब गए। मेरे लंड ने पैंट के अंदर उछलकर जवाब दिया।


रास्ते में आंटी कभी-कभी मेरे कंधे पर हाथ फेरतीं, जैसे गलती से। हर बार उनका स्पर्श मेरे शरीर में आग लगा देता। मैंने सोचा – आज मौका है। आंटी भी कुछ महसूस कर रही हैं।


लगभग आधे रास्ते बाद आंटी ने कहा, “राहुल... नहर के पास वो सुनसान रास्ता है ना? वहाँ रुक जा।” मैंने पूछा, “क्यों आंटी?” उन्होंने शरमा कर कहा, “कुछ नहीं... बस रुक जा।” मैंने बाइक किनारे खड़ी कर दी।


आंटी उतर गईं और बोलीं, “तुम यहीं रहो, मैं आती हूँ।”


वे नहर की तरफ झाड़ियों में चली गईं। मैं चुपचाप उनके पीछे-पीछे चला गया। झाड़ियों के पीछे से उनकी साड़ी की सरसराहट सुनाई दे रही थी। अचानक आंटी की चीख निकली – “अरे... सांप... सांप!”


मैं दौड़कर उनके पास पहुँचा। आंटी डर के मारे काँप रही थीं। उनके ठीक सामने एक छोटा सा सांप था। मैंने डंडा उठाकर उसे भगाने की कोशिश की, लेकिन वो भागा नहीं।


आंटी मेरे पास आ गईं और मेरी बांह पकड़ लीं। उनके हाथ काँप रहे थे।


👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई! 02


“आंटी घबराओ मत, मैं हूँ ना।” मैंने उन्हें अपने पास खींच लिया। उनकी सांसें मेरे गले पर पड़ रही थीं। कुछ देर बाद सांप चला गया। आंटी ने राहत की साँस ली, लेकिन अब वो मेरी बांह छोड़ने में देर कर रही थीं।


नहर की पटरी बहुत ऊँची और संकरी थी। आंटी बोलीं, “राहुल... मुझे पटरी पर चढ़ना है, लेकिन अकेले नहीं चढ़ पाऊँगी। तुम मुझे पीछे से थोड़ा सा धक्का दे दो।”


मेरा दिल धड़कने लगा। पहली बार इतनी बड़ी, मोटी गांड को छूने का मौका मिल रहा था। मैंने आंटी के पीछे खड़े होकर कहा, “ठीक है आंटी, मैं संभाल लूँगा।”


जैसे ही आंटी ने एक पैर आगे बढ़ाया, मैंने उनके दोनों चूतड़ों को पीछे से पकड़ लिया। उनकी गांड मेरे हाथों में भर गई – इतनी मुलायम, गर्म और भारी कि मेरे लंड ने तुरंत पैंट फाड़ने की कोशिश की।


मैंने जोर से ऊपर की तरफ धक्का दिया। आंटी ऊपर चढ़ने लगीं, लेकिन एक बार गिर गईं।


“आंटी... फिर से कोशिश करो।” मैंने इस बार उनकी गांड को और अच्छे से पकड़ा। मेरी उँगलियाँ उनके चूतड़ों के बीच की दरार में घुस गईं। आंटी सिसकार उठीं – “आह्ह्ह... राहुल... क्या कर रहे हो?” लेकिन उन्होंने हाथ नहीं हटाया।


तीसरी बार जब मैंने उन्हें उठाया, तो मैंने जानबूझकर अपनी उँगलियाँ उनकी गांड की दरार में और गहरी घुसा दीं। आंटी का शरीर सिहर गया। उन्होंने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें आधी बंद थीं।


“राहुल... तुम्हारा... वो... इतना फूला हुआ क्यों है?” आंटी ने धीरे से पूछा। मैंने जवाब दिया, “आंटी... आपकी गांड को छूकर हो गया है।”


आंटी शर्मा गईं, लेकिन अब उनका विरोध कमजोर हो रहा था। मैंने उन्हें और जोर से खींचा और उनकी कमर पकड़ ली। आंटी मेरी छाती से टकरा गईं। उनके भारी मम्मे मेरी छाती पर दब गए।


“आंटी... प्लीज... एक बार...” मैंने उनके कान में फुसफुसाया। आंटी ने आँखें बंद कर लीं। मैंने उनकी कमर के ऊपर साड़ी को ऊपर खींच लिया। उनकी लाल रंग की ट्रांसपेरेंट पैंटी दिखने लगी।


मैंने उनके चूतड़ों को दोनों हाथों से दबोच लिया और जोर-जोर से मसलने लगा।


आंटी ने पहले तो “छोड़ो मुझे” कहा, लेकिन उनकी आवाज में अब ताकत नहीं थी। मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी चूत पर रख दिया। आंटी काँप उठीं – “आह्ह्ह... राहुल... क्या कर रहे हो... आह्ह्ह...”


मैंने उनकी पैंटी को साइड किया और उँगली उनके भोसड़े पर फेरी। आंटी की साँसें और तेज हो गईं। उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली।


“आंटी... आपकी गांड... इतनी मोटी... मैं रोज सोचता हूँ...” मैंने उनके कान में कहा। आंटी ने कोई जवाब नहीं दिया, बस मेरी कमर को और जोर से पकड़ लिया।


मैंने उन्हें पेड़ के सहारे झुकाया। आंटी अब पूरी तरह मेरे सामने झुकी हुई थीं। उनकी बड़ी गांड मेरे लंड के सामने थी। मैंने अपना 8 इंच लंबा और मोटा लंड निकाला और उनकी गांड पर रगड़ने लगा।


आंटी सिसकार उठीं – “आह्ह्ह... राहुल... धीरे... आह्ह्ह...”


मैंने उनकी पैंटी को पूरी तरह साइड किया और लंड उनके भोसड़े पर सेट किया। आंटी ने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पकड़ ली।


मैंने आंटी की पैंटी को पूरी तरह साइड कर दिया और अपना मोटा, 8 इंच लंबा लंड उनके भोसड़े पर सेट किया। आंटी की साँसें अब बहुत तेज हो चुकी थीं।


उन्होंने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी जांघ पकड़ ली और धीरे से बोलीं, “राहुल... धीरे... बहुत मोटा है... आह्ह्ह...”


मैंने पहले अपनी उँगली उनके भोसड़े में डाली और अंदर-बाहर करने लगा।


आंटी का शरीर सिहर उठा – “आह्हhhhh... राहुल... क्या कर रहे हो... आह्ह्ह... उँगली... आह्ह्ह...” उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उँगली निकाली और लंड की नोक से उनके भोसड़े को रगड़ने लगा।


आंटी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें आधी बंद थीं और होंठ काँप रहे थे। “राहुल... प्लीज... अब मत टालो... आह्ह्ह...” मैंने धीरे से धक्का मारा। लंड की नोक उनके भोसड़े में घुस गई।


आंटी जोर से सिसकार उठी – “आह्हhhhh... मोटा... आहhhhh... धीरे... राहुल... आह्ह्ह...”


💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : मुस्लिम माँ-बेटी की खेत में चुदाई!


मैंने रुककर आंटी की कमर पकड़ ली। फिर धीरे-धीरे और जोर से धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। आंटी की आँखें फटी की फटी रह गईं।


उन्होंने मुंह से आवाज निकालने की कोशिश की लेकिन मैंने अपना एक हाथ उनके मुंह पर रख दिया। “आह्हhhhh... फट गई... आह्ह्ह... राहुल... निकालो... प्लीज... आह्ह्ह...”


मैंने आंटी के बाल पकड़कर और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। आंटी का शरीर अकड़ गया। उन्होंने मेरी जांघ पर नाखून गाड़ दिए। “आह्हhhhhhh... अल्लाह... फट गई... आह्ह्ह... मर गई... आह्ह्ह...”


मैं कुछ देर रुका रहा ताकि आंटी को दर्द सहने का मौका मिले। फिर धीरे-धीरे कमर चलाने लगा।


“फच... फच...” की हल्की आवाज आने लगी। आंटी पहले दर्द से कराह रही थीं – “आह्ह्ह... धीरे... आह्ह्ह... राहुल... आह्ह्ह...” लेकिन 3-4 मिनट बाद उनकी सिसकारियाँ बदलने लगीं।


“आह्ह्ह... अब... थोड़ा... अच्छा लग रहा है... आह्ह्ह... और... आह्ह्ह...” आंटी ने खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलनी शुरू कर दी। मैंने स्पीड बढ़ा दी।


“सलमा आंटी... आपकी चूत... कितनी टाइट है... आह्ह्ह... मैं रोज सोचता था... आह्ह्ह...”


आंटी अब जोर-जोर से सिसकार रही थीं – “आह्ह्ह... राहुल... और जोर से... आह्ह्ह... फाड़ दे... मेरी चूत... आह्ह्ह... आज मुझे अच्छे से चोद... आह्ह्ह...”


मैंने उनकी साड़ी को और ऊपर खींच लिया और उनकी मोटी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारने लगा। हर थप्पड़ के साथ आंटी की चूत मेरे लंड को और कस लेती थी।


“आह्ह्ह... सलमा मोमी... आपकी गांड... इतनी मोटी... मैंने कभी नहीं देखी... आह्ह्ह...” मैंने उनके बाल पकड़कर और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं।


उन्होंने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पकड़ ली और अपनी गांड को मेरे लंड की ओर खींचने लगीं।


“आह्ह्ह... राहुल... और गहरा... आह्ह्ह... मेरी चूत फाड़ दो... आह्ह्ह... मादरचोद... चोद... आह्ह्ह...” आंटी अब खुद गालियाँ देने लगी थीं। मैं और जोश में आ गया।


आगे की कहानी :- "झाड़ियों में दोस्त की माँ चोद दी!  02"

← Previous Story

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

>
';

📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!