गर्लफ्रेंड की मां बॉयफ्रेंड के लन्ड से हुई प्रेगनेंट!

Family Antarvasna Sex Story : मां ने बेटी के बॉयफ्रेंड को फाँसा! लंड खाकर पेलवाई चूत! और प्रेगनेंट होकर बन गई बेटी की सौतन! फिर बेटी भी हुई उसी लंड से Pregnant!


कैसे हो मेरे प्यारे लन्ड वाले दोस्तों और चूत वाली पाठिकाओं मेरी कहानियों को आपका प्यार देने के लिए धन्यवाद!!


मेरे एक पाठक ने मुझे भेजी हुई कहानी को अपने शब्दों में ढाल कर आप लोगों की वासना के सामने परोस रहा हूं। पढ़कर बताना कैसी लगी। 


ये कहानी है विभु कुमार की!


विभु लगभग पच्चीस साल का एक सीधा-सादा, मेहनती लड़का था। वह शहर के एक छोटे से किराने की दुकान पर काम करता था, जहां उसका दिन सुबह से लेकर रात तक ग्राहकों की सेवा करते हुए गुजरता था। 


उसके चेहरे पर हमेशा एक हल्की मुस्कान रहती थी, मानो वह अपने छोटे से जीवन में भी संतोष ढूंढ चुका हो। बस उसके जीवन कमी थी तो एक चूत की जो उसकी रातों की तड़पती जवानी को आराम दे सके उसकी आग को शांत कर सके।


विभु के मालिक उसे भरोसेमंद मानते थे और धीरे-धीरे उसे दुकान से जुड़ी ज़िम्मेदारियाँ भी सौंपने लगे थे। 


वैसे तो इसी दुकानों पर मोहल्ले की हर चूत आकर दर्शन देती थी, मगर विभु को एक सच्चे प्यार के रूप में अपनी वासना को शांत करना था। दुकान पर दिन में अड़ोस पड़ोस की भाभियां और लड़कियां आकर विभु से अपने समान को निकलवाती।


 आज कल लड़कियों से अधिक भाभियों को वीडियो शूट का भूत सवार है इसलिए उसकी दुकान पर आकर वो वीडियो बनवाती और गंदे डायलॉग के साथ उससे बात करती जैसे :- तुम अपना बड़ा कोलगेट मुझे दो ताकि मुझे ताज़गी मिल सके।


एक दिन दुकान के मालिक ने विभु को एक नई जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि अब से उसे उनके बच्चों को स्कूल से लाना होगा, क्योंकि वे खुद इस काम के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे।


विभु ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। 


उसके लिए यह काम सिर्फ एक ड्यूटी नहीं था, बल्कि एक नया अनुभव भी था । विभु पढ़ा लिखा नहीं थी इसलिए ये काम उसे अच्छा भी लगा जो उसके रोज़मर्रा के जीवन में थोड़ी ताजगी लाने वाला था । अगले दिन विभु समय पर स्कूल के बाहर पहुंच गया। 


स्कूल का माहौल उसके लिए बिल्कुल नया था—बच्चों की चहल-पहल, शिक्षकों की आवाज़ें और अभिभावकों की भीड़। वह एक कोने में खड़ा होकर बच्चों के छुट्टी होने का इंतज़ार करने लगा। 


तभी अचानक उसकी नजर एक महिला पर पड़ी, जो बच्चों को एक साथ जाने के लिए तैयार कर रही थीं। वह थीं रुपाली मैम—स्कूल की एक शिक्षिका।


रुपाली मैम का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था। स्कूल के लिहाज़ से उनके कपड़े कुछ ज़्यादा भड़काने वाले थे एक दो आदमी को विभु ने कहते सुना ये रूपाली मैडम है विदेश से पढ़कर आई है।


उनकी आंखों में एक आत्मविश्वास था और चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान। मगर सबसे आकर्षक उनका जिस्म था। मैडम एक साड़ी पहने हुए थी जिसका ब्लाउज ब्रा से बस थोड़ा बड़ा था।


रूपाली मैडम के गोरे चूंचे उनकी हरि साड़ी से एक दम कोमल रूई से बनी गेंद जैसे लग रहे थे, उनकी कमर मक्खन जैसी चमक रही थी मैने हाथ रखो को गांड़ पर फिसल जाए।


 विभु की नजर जैसे ही उनसे मिली, दोनों कुछ पल के लिए ठहर गए। यह एक अजीब सा एहसास था, जैसे समय कुछ सेकंड के लिए थम गया हो। विभु ने नजरें झुका लीं, लेकिन दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं।


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तभी दुकान मालिक के बच्चे दौड़ते हुए उसके पास आए और बोले, “हाफू आ गए! हाफू आ गए!” विभु थोड़ा मुस्कुरा दिया, क्योंकि बच्चे उसे प्यार से यही नाम बुलाते थे। 


रुपाली मैम ने यह सुनकर हल्की मुस्कान दी और विभु की ओर देखा वो पास से गुजरते हुए बोली बच्चे आपका मज़ाक बना रहे है, विभु शरमाया और नज़रे झुकाली जिससे आँखें रूपाली मैडम की चूंचियों की गहराई में रुक गई। 


मैडम ने उसकी नज़र पकड़ी और पल्लू ठीक कर के मुस्कुराती हुई चली गई। उस मुस्कान में अपनापन था, और शायद एक अनकही शुरुआत भी। विभु बच्चों को लेकर घर लौट आया, लेकिन उसका मन वहीं स्कूल में रह गया था। वह बार-बार रुपाली मैम की मुस्कान को याद कर रहा था उनकी चूंची को ख्यालों में दबाकर महसूस कर रहा था। 


अगले दिन वह फिर समय से पहले स्कूल पहुंच गया, शायद सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि अपनी वासना वाले प्यार को भड़काने वाली उस एक झलक के लिए भी। उसकी आंखें भीड़ में सिर्फ एक चेहरा ढूंढ रही थीं।


कुछ ही दिनों में यह सिलसिला रोज़ का बन गया। हर दिन स्कूल जाना, बच्चों को लेना और रुपाली मैम की एक झलक देखना—यह सब विभु के दिन का सबसे खास हिस्सा बन गया। 


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धीरे-धीरे दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातें भी शुरू हो गईं। कभी बच्चों के बारे में, कभी स्कूल के बारे में, और कभी यूं ही सामान्य बातें। एक दिन विभु ने हिम्मत करके रुपाली मैम से उनका नंबर मांग लिया। उसने कहा, “अगर कभी बच्चों के बारे में कोई ज़रूरी बात हो तो काम आ जाएगा।” 


रुपाली मैम ने बिना ज्यादा सोचे मुस्कुराते हुए अपना नंबर दे दिया। उस दिन विभु का दिल खुशी से भर गया, जैसे उसने कोई बहुत बड़ी जीत हासिल कर ली हो उस दिन रूपाली मैडम ने एक शर्ट के पैंट पहनी थी।


 जिसमें काली ब्रा का कुछ हिस्सा और गोरी चूंची के उभर चमक रहे थे, ये नज़ारा याद करते हुए पहली बार विभु का हाथ अपनी पेंट के अंदर चला गया और बहुत साल बाद विभु ने मुठ मारी।


कुछ दिनों में दोनों के बीच फोन पर भी बातचीत शुरू हो गई थी। शुरुआत में बातें औपचारिक ही थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनमें गर्माहट का एहसास बढ़ने लगा। रात को सोने से पहले उनको बातचीत का इंतज़ार रहने लगा।


 हर छोटी-बड़ी बात वे एक-दूसरे से साझा करने लगे। यह रिश्ता धीरे-धीरे दोस्ती से आगे बढ़ रहा था मैडम बहुत खुले दिमाग वाली थी हर हसी खुशी की बात पर वो फोन को चूम लिया करती थी जिससे वो शर्मा जाता था।


रुपाली मैम को विभु की सादगी और शर्म बहुत पसंद थी। वह उसकी शर्म और अंदर के जज़्बात से प्रभावित थीं। वहीं विभु को रुपाली मैम का आत्मविश्वास और उनकी खुली सोच बहुत अच्छी लगती थी।


 धीरे धीरे दोनों की खाने के लिए पूछने वाली बाते चूत और लन्ड को खाने तक पहुंच गई। वैसे तो दोनों अलग-अलग दुनिया से थे, लेकिन उनके चूत और दिल के बीच की दूरी कम होती जा रही थी।


एक दिन रुपाली मैम ने विभु से कहा, “तुम कभी मेरे घर आओ, मां से मिलना भी हो जाएगा।” विभु - “मिलने तो आ सकता हूं मगर आप तो अपनी मम्मी के साथ रहती हो तो मुझे अजीब लगेगा।


रूपाली मैम - अरे मेरी जान! इतना शर्माऑगे तो इन जवानी को कोई और चख लेगा”, ये कहते हुए विभु के फोन पर एक फोटो आई, जिसमें रूपाली मैडम बेड पर लेती एक टांग ऊपर कर के अपनी पैंटी दिखा रही थी।


विभु - बाबू! ऐसे मत करो यार! अंदर के जज़्बात जाग जाते है”। रूपाली मैम - तो जगाना जाज़बात इस जिस्म की आग को शांत करो वरना कोई और देखना पड़ेगा मुझे।


उनकी बातों में एक धमकी थी विभु पहले थोड़ा झिझका, लेकिन फिर उसने हामी भर दी। उसके मन में हल्की घबराहट थी, लेकिन साथ ही एक लन्ड में उत्साह भी था। वह इस नए कदम को लेकर बहुत सोच रहा था।


जब विभु पहली बार रुपाली मैम के घर पहुंचा, तो उसने देखा कि घर बहुत सादा और सुकून भरा था। वहां की हवा में एक वासना फैली हुई थी दीवारों पर कुछ हीरो हीरोइन की आधी नंगी सी तस्वीरें थी। 


तभी उसके सामने रूपाली मैडम की मम्मी आ गई। रुपाली मैम की मां, मीनाक्षी जी, बहुत ही गठीले जिस्म की कामुक दिखने वाली महिला थीं। उन्होंने विभु का बड़े प्यार गले से लगाकर स्वागत किया।


इस उमर में पहली बार विभु ने किसी औरत को गले लगाया था वो भी इसी औरत जिसने दिन के उजाले में एक नाइटी पहनी थी। वो नाइटी उनके भरे पूरे चुदक्कड जिस्म की लालसा छुपाने में असमर्थ थी। फिर उन्होंने उसे छोड़ा।


विभु जल्दी ही मीनाक्षी जी के साथ घुल-मिल गया। उसके शर्मीले मिज़ाज और सच्चाई ने उन्हें प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि यह लड़का दिल का बहुत अच्छा है।


थोड़ी बहुत बात चीत कर के उन्होंने विभु से ऊपर कमरे में जाकर सोने का बोला और उठकर चली गई। न चाहते हुए भी, विभु उनकी मटकाती गांड़ से नज़र नहीं हटा पाया। वो बस नाश्ते को रखकर ऊपर चली गई।


उसके बाद रूपाली मैडम आई वो बस एक आधी स्कर्ट और टी शर्ट में थी, उनके चूंचे शर्ट से आधे बाहर निकलते दिख रहे थे। विभु को पहले ही गर्मी चढ़ी हुई थी अब रूपाली को देखकर वो अधिक बहकने लगा।


रूपाली ने उसे सोफे पर बैठाया और उसके बराबर में लगभग गोदी में होती हुई बैठ गई। रूपाली के इतने खुले जज़्बात देखकर विभु हैरान था तभी रूपाली बोली “अरे मेरी जान! थोड़ा मुझे भी तो देखलो।” 


रूपाली ने अपनी चूंची विभु के चेहरे पर लगाते हुए कहा फिर उसके गाल पर चूमने लगी, विभु के लिए ये पहली बार था उसने हिचकिचाकर कहा “रूपाली मैडम ! पानी प्लीज़!”।


रूपाली उसके लन्ड को दबाते हुए बोली “हां! अभी निकालती हूं तुम्हारा पानी, थोड़ा रुको। 


अब विभु को भी जोश आ चुका था, उसने भी रूपाली को चूमना शुरू कर दिया, विभु ने उसे सोफे पर पीछे गिराया और उसके ऊपर आकर होठों को चूसने लगा। रूपाली भी बेधड़क उसका साथ दे रही थी।


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दोनों एक दूसरे की जीभ को चूसकर होठ चूमे जा रहे थे। विभु ने उसकी शर्ट उतारकर फेकी और 38 की मोती चूंची विभु के सामने आ गई, विभु ने चूंची को दबाना चालू का दिया। 


रूपाली अआआह! हम्ममम ओह, और करो अआआह! ओह अआआह। अआह आराम से मेरी जान! कहकर उसे उत्तेजित कर रही थी। फिर विभु ने एक निप्पल को मुंह में लेकर पीया और रूपाली मछली की तरह तड़पने लगी।


वो उसके बाल सहला रही थी अपनी चूत को लन्ड पर घिस रही थी, रूपाली ने अपनी स्कर्ट उठाकर चूत के छेद को लन्ड पर दबाया और विभु को चूमने लगी।


रूपाली की लाल लिपस्टिक विभु के चेहरे पर अपनी वासना के निशान बना चुकी थी विभु ने अपनी पेंट खोलनी शुरू करी तो रूपाली बोली “मेरी जान! कमरे में चलो अब।” 


ये कहते हुए रूपाली ने उसे हटाया और अपनी ब्रा को विभु के मुंह में दबाकर ऊपर की मंज़िल पर जाते हुए आने का इशारा देने लगी जाते जाते वो अपने नंगे चूंचे विभु को दिखा दिखा कर हिला रही थी।


विभु भी पीछे पीछे ऊपर जाने लगा। ऊपर एक कमरे में रूपाली की मम्मी सोई थी इसलिए दोनों ने कोई आवाज़ नहीं करी।


विभु जब कमरे में घुसा तो रूपाली ने लाइट बंद कर दी थी, विभु बोला “जान कहा पर हो! लाइट बंद कर दी दिख भी नहीं रही अब।” तभी बेड की तरफ से एक हलचल की आवाज़ आई।


विभु ने एक हवस भरी सांस भरते हुए अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। इतना दूर आकर ऐसे मौके पर अगर मर्द पीछे हटे तो औरत की नज़रों में शायद ही कभी उठ पाए ।


विभु धीरे से बेड पर चढ़ा उसे अब चुदाई भरा नशा महसूस होने लगा था, रूपाली शांत लेती थी और अंधेरे में अपने जिस्म को सहला रही थी, विभु ने उसको पेरो पैसे चूमना शुरू करा।


 वो धीरे धीरे चूमता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ने लगा। फिर वो जांघों तक पहुंचा एक एक कर के दोनों जांघें चूमी रूपाली की अआआह! हम्ममम, मुद्हम्म! ओह की आवाज़ कमरे में चुदासी आग भड़का रही थी।


फिर वो चूत पर पहुंचा तो पता चला पैंटी उतर चुकी थी, विभु ने चूत की लकीर पर चूमा वो हल्की हल्की गीली हो गई थी, फिर वो जीभ को चूत के अंदर लेजाकर चुदाई करने लगा।


रूपाली अआआह! हम्ममम! ओहह्ह्ह्ह विभु अआआह! ये इज़्ज़्ह्ह मेरी जानाअज! हां चूसो मुझे आगाह। कहकर मचलने लगी।


इन्हीं आवाजों के साथ वो पहली बार झाड़ी और सारा पानी विभु के मुंह में छोड़ दिया, फिर विभु पेट को चूमते चूमते चूचों पर आ गया।


उसने एक बार ज़ोर से निप्पल के पास काटा जिससे रूपाली की आअआअह! निकल गई उसकी आवाज़ काफी तेज़ थी तो मम्मी के जागने के डर से विभु ने उसके होठों पर होठ रखकर चुप कर दिया।


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अब दोनों के लिए ही रुकना संभव नहीं था रूपाली ने विभु को पलटा और उसे चूमने लगी!


चूमते हुए उसे अपना हाथ विभु के लन्ड पर रखा और चूत पर लगा दिया, एक पाल के लिए दोनों ने अपनी सांस रोकी और एक आअआअह! के साथ रूपाली ने अपनी चूत में विभु का लन्ड भर लिया।


रूपाली पूरी तरह विभु पर गिर गई और चूत में उसके लन्ड को खाने लगी विभु भी नीचे से धक्के लगा रहा था दोनों की आअआअह! ओहह्ह्ह्ह हम्ममम अआआह! और तेज़ अआआह की आवाज़ माहौल को गरमा रही थी।


 रूपाली अआआह ओहह्ह्ह्ह विभु अआआह! अआह हिम्मम्मम बहुत अच्छे अआआह ओहद आअआअह! विभु आह ओहह्ह्ह्ह करते हुए चुद रही थी।


विभु को रूपाली का जिस्म भरी लग रहा था इसलिए उसने उसे पलटा और तेज़ी से लन्ड पेलने लगा और दोनों अपनी ताकत से चुदाई में अपना हिस्सा बना रह थे ।


अआह हिम्मम्मम बहुत अच्छे अआआह ओहद आअआअह! अआह हिम्मम्मम बहुत अच्छे अआआह ओहद आअआअह!ओहद आअआअह! अआह हिम्मम्मम कहते कहते 10 मिनिट तक दोनों ने चुदाई को अंजाम दिया और आखिर में साथ ही झड़ गए।


चुदाई पूरी होने के बाद रूपाली ने विभु के चेहरे को पकड़ा और होठों से होठ लगा लिए, उसने विभु को पलटा और अपना थूक यानी अपना रस उसे पिलाने लगी पहले विभु को मज़ा आया लेकिन फिर उसे थोड़ा अजीब लगा। 


पास में लगे बटन पर उसका हाथ लगा तो कमरे में लाइट जल गई। जिससे विभु की दुनिया हिल रूपाली की मम्मी मीनाक्षी जो विभु के मुंह से मुंह लगाकर उसे अपना थूक पिला रही थी।


विभु ने हड़बड़ा कर खुदको छुड़ाया और गुस्सा होने लगा वो कुछ कहता तभी मीनाक्षी जी बोली “अबे ओ कुछ भी बोलने से पहले ये वीडियो देख”। कमरे में कैमरा लगा था जिसकी वीडियो में विभु मीनाक्षी जी की चुदाई करते दिख रहा था।


 विभु के चेहरे से उड़ते रंग देखकर वो बोली “ये सब मेरा प्लान था! मुझे पता था आज तू यहां आने वाले वाला है और मेरी बेटी को चोद ने वाला है।


देख मैं बहुत साल से चुदाई की प्यासी हूं तू मेरी बेटी से शादी कर और मुझे रखैल बना कर रख! वरना तू सोच भी नहीं सकता तेरे साथ क्या होगा मेरे राजा।


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विभु की गांड़ अब फट चुकी थी, उसके पास उनकी बात मानने का कोई रास्ता नहीं था। 


जब उन्होंने बताया के रूपाली की चाय में नींद की गोली थी और उसके ऊपर आते ही मीनाक्षी जी ने उसे दूसरे कमरे में सुला दिया था तब उसे और डर लगने लगा फिर हार कर विभु ने उनकी बात मामली।


धीरे-धीरे विभु उस घर का हिस्सा सा बन गया। वह अक्सर वहां आने लगा और समय बिताने लगा मीनाक्षी जी ने उसे अपनी रखैल बना लिया था वो जब मन करता तब उसको बुलाती थी।


मगर धीरे धीरे पता था मीनाक्षी जी दिल की बुरी नहीं है, उन्होंने विभु की पढ़ाई में मदद करी और अपनी जायदाद में भी हिस्सा दिया। ये Antarvasna Hindi Sex Stories आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।


अब तीनों के बीच एक खास रिश्ता बन गया था। हंसी-मजाक, बातें , चाय के साथ चुदाई के बिताए पल—सब कुछ बहुत सुंदर लगने लगा था। विभु को लगता था कि उसने अपने जीवन में एक नया परिवार पा लिया है।


वहीं रुपाली मैम के लिए भी विभु एक खास इंसान बन चुका था मीनाक्षी जी ने इस राज़ को अपनी बेटी से छुपाया।


कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली। यह कोई फिल्मी इजहार नहीं था, बल्कि एक सच्चा और सादा स्वीकार था। विभु ने समझ लिया था कि यह रिश्ता सिर्फ चूत या लन्ड का नहीं, बल्कि कुछ और गहरा है।


दोनों ने इस रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाने का फैसला किया।


उनका प्यार किसी दिखावे पर नहीं, बल्कि समझ और वासना पर टिका था। वे एक-दूसरे का सम्मान करते थे और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का वादा किया। उनके बीच का रिश्ता दिन-ब-दिन मजबूत होता गया और जीवन में एक नई रोशनी भरता गया।


विभु अब पहले से ज्यादा खुश रहने लगा था हालांकि उसे रोज रात को दो चुदासी औरते शांत करनी होती थी। उसकी जिंदगी में अब एक मकसद था, एक साथी था और एक परिवार था।


रुपाली मैम और मीनाक्षी जी के साथ बिताए पल उसके लिए अनमोल बन गए थे। उसे लगता था कि उसकी दुनिया अब पूरी हो गई है।


विभु अब बस घर जमाई थी, रूपाली आज भी पढ़ाती है और मीनाक्षी जी विभु के जिस्म को पूरी तरह चूस चूसकर मज़ा लेती है, कभी वो उसे अपना सुसु पिलाती है कभी थूक पीने को कहती है। 


55 साल की चुदासी औरत की वासना को शांत करना 25 साल की लड़की के मुकाबले बहुत मुश्किल है। ये बात विभु ने अब जानी थी। जब उसकी सास और बीवी यानी रूपाली और मीनाक्षी जी दोनों पेट से हो गई थी।


मीनाक्षी जी ने तो समाज की बातों को देखकर एक लंबी तीर्थ यात्रा करी और जब लौटी तो हाथ में एक लड़का था, इधर रूपाली की गोद में भी एक लड़की आ चुकी थी।


विभु अपने ही बच्चों का बाप और दादा दोनों बन गया था, मीनाक्षी जी अपने ही बच्चों को दादी और मां बन चुकी थी और रूपाली जाने अनजाने अपने ही बच्चों की मां और बेटी बन गई।


तो दोस्तों यह Mom Fuck Hindi Sex Stories कैसी लगी? कॉमेंट करके जरूर बताए!

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