गर्भवती माँ संग बुआ की थ्रीसम चुदाई!
Family Antarvasna : Pregnant माँ को बेटे से चुदवाते देख बुआ की चूत हुई गीली! रंगेहाथ पकड़कर दोनों बहने बनी बेटे की राँड! और Threesome में फड़वाई अपनी चूत-गांड!
मेरा नाम पूर्णिमा ताई है। पचपन साल की उम्र में भी मेरा शरीर अभी भी गरम रहता है। बेटा निखिल के साथ मेरी चुदाई अब रोजाना का काम बन चुकी थी। मेरा पेट छह महीने का हो चुका था।
निखिल दिल्ली छोड़कर घर आ गया था। हम दोनों अब खुलकर जी रहे थे। दिन में माँ-बेटा, रात में मैं उसकी राँड बन जाती। मेरी चूत हमेशा उसकी लौड़े के लिए गीली रहती।
वह मुझे कुतिया की तरह चोदता, मेरे मुँह में अपना गाढ़ा वीर्य उड़ेलता, मेरी गांड में उंगली डालकर मुझे पागल बनाता। और मैं मजे लेती।
“बेटा, और जोर से चोद… माँ की चूत फाड़ दे…” यही मेरे मुँह से निकलता।
एक दिन अचानक मेरी बड़ी बहन सुनीता आ गई। उम्र सत्तावन। उसका पति 12 साल पहले मर चुका था। देहांत हो गया था। वह बिलकुल अकेली पड़ गई थी। आँखें सूजी हुईं, चेहरा उदास।
“पूर्णिमा, अब मैं कहाँ जाऊँ? घर सूना हो गया है। क्या मैं तुम्हारे पास रह सकती हूँ?” मैंने उसे गले लगा लिया। ये XXX Kahani व Mom Pregnant aur Behen Virgin Chudai Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।
“बहन, ये तेरा ही घर है। रह, जितना चाहे रह।” निखिल भी आया, बुआ के पैर छुए। सुनीता ने उसके सिर पर हाथ फेरा।
“कितना बड़ा हो गया है तू… पहले तो गोद में खेलता था।”
सुनीता हमारे घर में रहने लगी। उसका कमरा अलग था, लेकिन रात को जब निखिल मुझे चोदता तो आवाजें दबाना मुश्किल हो जाता। मेरी कराहें, बिस्तर की चरमराहट, निखिल की गंदी गालियाँ - सब कुछ दीवारों के पार जाता होगा।
पहले हफ्ते तो सुनीता चुपचाप रही। खाना बनाती, घर संभालती। लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी दिखने लगी। रात को वह देर तक जागती रहती।
कभी-कभी मैंने देखा कि वह बाथरूम से निकलते समय अपने जांघों के बीच हाथ फेर रही होती।
धीरे-धीरे उसे शक होने लगा। एक रात वह प्यास के बहाने उठी और हमारे कमरे के पास से गुजरी। दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर नीली रोशनी में उसने देखा - निखिल मेरे ऊपर सवार था।
मेरी टाँगें उसके कंधों पर थीं। वह जोर-जोर से धक्के मार रहा था।
“माँ की चूत कितनी TIGHT है बेटा… और गहरा डाल… आह्ह्ह…” मैं चीख रही थी। निखिल मेरी गर्दन दबाए हुए था। ये Family XXX Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
“राँड की औलाद, तेरी चूत में आज पूरा वीर्य भर दूँगा। गर्भवती होने के बावजूद तेरी चुत कितनी हरामी और प्यासी है।”
सुनीता वहाँ खड़ी काँप रही थी। उसकी अपनी चूत गीली हो गई थी। उसने जल्दी से कमरे में वापस भागकर दरवाजा बंद कर लिया। रात भर वह अपनी उंगलियों से अपनी चूत मसलती रही।
दिमाग में वही नजारा घूम रहा था - बहन की फैलती हुई चूत, भांजे का मोटा लौड़ा अंदर-बाहर हो रहा था।
अगले दिन से सुनीता और बेचैन हो गई। खाने की मेज पर उसकी नजरें बार-बार निखिल के पैंट के उभार पर जातीं। जब मैं झुककर बर्तन धोती तो मेरी गांड की शक्ल देखकर उसकी साँसें तेज हो जातीं।
रात को वह अपने कमरे में लेटकर अपनी बड़ी छातियों को मसलती, निपल्स को मोड़ती और फुसफुसाती - “काश कोई मेरी भी चूत फाड़ दे… बारह साल से सूखी पड़ी है ये राँड की चूत।”
फिर वह दिन आ गया। दोपहर का समय था। निखिल छुट्टी पर था। हम दोनों सोच रहे थे घर खाली है। सुनीता बाजार गई हुई थी। मैंने निखिल को ड्राइंग रूम के सोफे पर खींच लिया। उसकी पैंट खोल दी।
उसका लौड़ा पहले से ही तना हुआ था - मोटा, नसों से भरा, सिर पर चमकता हुआ। मैंने घुटनों के बल बैठकर उसे मुँह में लिया। गला भर तक निगल लिया। “चूस माँ… और गहरा… अपनी हरामी जीभ से चाट…” निखिल मेरे बाल पकड़कर धकेल रहा था।
मैंने अपनी साड़ी ऊपर की और चूत पर उंगली घुमाने लगी। अचानक दरवाजे की आवाज आई। सुनीता वापस आ गई थी। उसने सामान नीचे रखा और ड्राइंग रूम की तरफ बढ़ी।
दरवाजा खुला तो उसने सब कुछ साफ देख लिया। मैं घुटनों पर बैठी निखिल का लौड़ा चूस रही थी। थूक की लार उसके अंडों तक टपक रही थी। निखिल की आँखें बंद थीं, मुँह से गंदी गालियाँ निकल रही थीं।
“राँड… तेरा मुँह कितना गरम है… आज पूरा वीर्य तेरे गले में उतारूँगा…” सुनीता की आँखें फटी की फटी रह गईं। पहले तो वह सदमे में खड़ी रही। फिर उसके चेहरे पर गुस्से की लाली छा गई।
“क्या बकवास चल रही है ये?!” उसकी आवाज गड़गड़ाहट जैसी थी। ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
“पूर्णिमा! तू अपने ही बेटे से चुदवा रही है?! हरामी! कुलटा! और तू निखिल… अपनी माँ की चूत में लौड़ा डाल रहा है?! शर्म नहीं आती?!”
वह काँप रही थी। आँखों से आँसू और गुस्सा दोनों बह रहे थे। मैंने मुँह से लौड़ा निकाला। थूक टपक रहा था। निखिल भी हैरान खड़ा था। उसका लौड़ा अभी भी सीधा था।
सुनीता चिल्लाती रही।
“बारह साल से विधवा हूँ मैं! पति मर गया तो मैंने अपनी चूत बंद रखी। और तू… अपनी ही औलाद से अपनी चूत फड़वा रही है!” उसने एक तकिया उठाकर मुझ पर फेंका।
“जा, निकल यहाँ से! दोनों हरामजादे!”
मैं उठी। साड़ी ठीक की। आवाज में भी डर नहीं था।
“सुनीता… शांत हो जा। सुन तो सही।” निखिल ने भी पैंट ऊपर की लेकिन उभार साफ दिख रहा था। सुनीता रोने लगी।
“मैंने क्या सोचा था… बहन के घर में शांति मिलेगी। यहाँ तो… यहाँ तो माँ-बेटा मिलकर चुदाई कर रहे हैं!”
मैं उसके पास गई। उसका हाथ पकड़ा।
“बहन, बैठ। सच सुन। निखिल के आने के बाद मेरी चूत ने फिर से जीना शुरू किया। बारह साल से सूखी पड़ी थी। कोई छूने वाला नहीं था। जब उसने मुझे चोदा… पहली बार… तो लगा जैसे मरते-मरते जी गई।
अब मैं उसकी राँड हूँ। और वह मेरा लौड़ा। हम दोनों खुश हैं। तू क्यों जल रही है?”
सुनीता की आँखों में आँसू थे, लेकिन उसके होंठ काँप रहे थे। ये XXX Kahani वाली Hindi Sex Kahani व Mom Son Bua Family Group Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।
वह बोली, आवाज दबी हुई - “जल नहीं रही… जलन तो… अंदर है। बहुत अंदर।” उसने अपना सीना दबाया। “पति के मरने के बाद से मेरी चूत पागल हो रही है। रात-रात भर उंगलियाँ डालती हूँ। दो-तीन उंगलियाँ… फिर भी तृप्ति नहीं मिलती।
सपने में कोई आता है, मुझे कुतिया की तरह चोदता है। मैं चीखती हूँ… लेकिन जाग जाती हूँ। खाली। सूखी। अकेली।”
उसकी आँखें निखिल के पैंट के उभार पर टिक गईं। “आज जब तुम्हें चोदते देखा… तो मेरी चूत से पानी निकल आया। गुस्सा इसलिए आया क्योंकि… क्योंकि मुझे भी वही चाहिए।
मेरी भी चूत फटनी चाहिए। मेरी भी गांड में कोई लौड़ा घुसे। मेरी छातियाँ कोई मसले… चूसे… काटे।”
कमरे में सन्नाटा छा गया। निखिल की साँसें तेज हो गईं। उसका लौड़ा फिर से सख्त हो चुका था। मैंने सुनीता का चेहरा उठाया। “तो फिर क्यों रोक रही है खुद को? यहाँ तीनों हैं।
मेरी चूत निखिल के लिए खुली है। तेरी चूत भी खोल दे। आज से तू भी हमारी राँड बन जा।”
सुनीता का शरीर काँप रहा था। उसने धीरे से साड़ी का पल्लू गिराया। उसकी बड़ी भारी छातियाँ बाहर आ गईं। निपल्स काले और सख्त।
“पूर्णिमा… मैं… मैं डरती हूँ। लेकिन… मेरी चूत जल रही है। निखिल… तू… तू बुआ की चूत भी चोद सकता है?”
निखिल आगे बढ़ा। उसने सुनीता की कमर पकड़ी और जोर से अपनी ओर खींचा। “बुआ, आज से तुम्हारी चूत मेरी है। माँ की तरह तुम्हें भी कुतिया बनाऊँगा। तैयार हो?” सुनीता ने सिर्फ सिर हिलाया। उसकी साँसें हाँफने लगीं।
मैंने दोनों को सोफे पर धकेल दिया। सुनीता लेट गई। मैंने उसकी साड़ी पूरी उतार दी।
उसकी चूत पर घना काला बाल था। पहले से गीली चमक रही थी। निखिल ने अपनी पैंट उतारी। लौड़ा बाहर निकल आया - मोटा, लंबा, सिर से पानी टपकता हुआ। सुनीता की आँखें फैल गईं।
“इतना… इतना बड़ा… मेरे पति का तो इससे आधा भी नहीं था।”
निखिल घुटनों के बल बैठा। उसने सुनीता की जांघें चौड़ी कीं और जीभ चूत पर फेर दी। ये Group Gangbang Story : Maa Behen Bete Ki Chudai आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
“आह्ह्ह्ह… बेटा… बुआ की चूत चाट… और अंदर… जीभ डाल…” सुनीता चीख पड़ी। निखिल उसकी चूत चाट रहा था जैसे भूखा कुत्ता। क्लिटोरिस को चूस रहा था, उंगलियाँ अंदर घुमा रहा था।
मैंने अपनी साड़ी हटाई और सुनीता के मुँह पर अपनी चूत रख दी।
“चूस बहन… मेरी चूत चूस। निखिल का स्वाद अभी भी इसमें भरा है।” सुनीता ने जीभ निकालकर मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी। उसकी जीभ मेरी गीली सिलवटों में घुस रही थी।
थोड़ी देर बाद निखिल उठा। उसने अपना लौड़ा सुनीता की चूत के मुहाने पर रखा। “बुआ, अब ले मेरा लौड़ा। सालों से सूखी चूत आज फटेगी।” उसने एक जोरदार धक्का मारा।
सुनीता चीख उठी—“आह्ह्ह्ह… फट गई… मेरी चूत फट गई… और अंदर… पूरा डाल…” निखिल ने जड़ तक धकेल दिया। सुनीता की आँखें पीछे मुड़ गईं। “इतना गहरा… कभी नहीं गया कोई… चोद… जोर से चोद बुआ की चूत…”
निखिल धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ सुनीता की भारी छातियाँ उछल रही थीं।
मैंने झुककर उसकी निपल्स मुँह में ले लिए और जोर से चूसने लगी। “हरामी… दोनों हरामी… मुझे कुतिया बना रहे हो…” सुनीता बड़बड़ा रही थी। निखिल ने उसकी टाँगें कंधों पर चढ़ा लीं और और तेज चोदने लगा।
चूत की आवाज—छपाक-छपाक—पूरे कमरे में गूँज रही थी। “ले बुआ… तेरी चूत कितनी गरम है… माँ से भी TIGHT… आज दोनों राँडों को भर दूँगा…”
मैंने सुनीता का मुँह अपने लौड़े (मतलब अपनी चूत) से हटाया और निखिल के मुँह पर बैठा दी।
“चाट बेटा… माँ की चूत चाट जबकि बुआ को चोद…” निखिल दोनों काम एक साथ कर रहा था। जीभ से मेरी चूत चाट रहा था, लौड़े से सुनीता की चूत फाड़ रहा था। सुनीता के नाखून सोफे में गड़ गए।
“आ रही हूँ… बुआ आ रही है… चोद… और जोर से… वीर्य अंदर डाल… गर्भवती बना दे बुआ को भी…”
निखिल ने जोर का धक्का मारा और अपना गाढ़ा वीर्य सुनीता की चूत में उड़ेल दिया। गर्म लहराते हुए। सुनीता चीखते हुए चरम पर पहुँच गई। उसका शरीर काँप रहा था। चूत से वीर्य बाहर निकलने लगा।
मैंने झुककर उसे चाटा। “स्वादिष्ट… बहन की चूत से निकला बेटे का वीर्य…”
लेकिन रात अभी शुरू ही हुई थी। निखिल का लौड़ा थोड़ा देर में फिर सख्त हो गया। इस बार उसने मुझे कुतिया की पोजीशन में बिठाया। पीछे से मेरी चूत में घुसा।
सुनीता मेरे नीचे लेट गई और मेरी छातियाँ चूसने लगी। “चोद माँ को… और जोर से… मैं देखूँगी कैसे बेटा माँ की चूत फाड़ता है…” निखिल धक्के मार रहा था। मेरा सोफे से रगड़ खा रहा था।
“आह्ह्ह… बेटा… बुआ देख रही है… और गहरा… माँ की गांड में भी डाल दे आज…”
उसने लौड़ा निकाला और मेरी गांड के छेद पर लगाया। थूक लगाकर धीरे-धीरे धकेलने लगा। ये Maa Bahan Bete Ki Chudai Aur Pregnent Chut Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
“माँ की गांड भी टIGHT है… ले… पूरा अंदर…” मैं चीख पड़ी। दर्द और मजे का मिश्रण। सुनीता मेरे मुँह में अपनी उंगलियाँ ठूंस रही थी। “चूस… मेरी उंगलियाँ चूस जबकि बेटा तेरी गांड चोद रहा है…”
घंटों चली चुदाई। निखिल ने बारी-बारी से दोनों की चूत और गांड चोदी।
कभी सुनीता को ऊपर बैठाकर मुझे चाटने को कहा। कभी दोनों को आमने-सामने लिटाकर एक-एक करके चोदा। कमरा वीर्य, पसीने और चूत के रस की बदबू से भर गया। सुनीता पागल हो चुकी थी।
“और… और चोदो… मेरी चूत को हमेशा के लिए अपना बना लो… अब मैं भी तुम्हारी राँड हूँ… माँ-बेटे की रखैल…”
रात खत्म होने तक सुनीता की चूत से वीर्य की धार बह रही थी। मेरी गांड में भी भरा था। निखिल थककर बीच में लेट गया। दोनों बहनें उसके दोनों तरफ। सुनीता ने अपना सिर उसके सीने पर रखा।
“निखिल… अब से रोज… रोज मेरी चूत भी लेना। माँ के साथ। तीनों मिलकर Threesome करेंगे!” ये Family First Time Sex & XXX Antarvasna Desi Incest Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा—“बहन, अब ये घर तीन राँडों और एक लौड़े का हो गया। समाज जो चाहे कहे। हम तो अपनी चूत की आग बुझाएँगे।”
उस दिन के बाद घर में कोई रोक-टोक नहीं रही। सुबह उठते ही निखिल किसी एक की चूत में घुस जाता। कभी दोनों को एक साथ चोदता। रसोई में, बाथरूम में, बालकनी में।
सुनीता अब खुलकर गाली देती - “चोद हरामी… बुआ की चूत फाड़… वीर्य अंदर डाल…मादरचौद.......
और मैं देखती रहती। अपनी बड़ी बहन को अपने बेटे से चुदवाते हुए। मेरी चूत और भी गीली हो जाती। फिर मैं भी शामिल हो जाती। तीनों शरीर एक हो जाते। लौड़ा, चूत, गांड, मुँह—सब कुछ इस्तेमाल होता। गंदे शब्द, जोर की कराहें, बिस्तर की चरमराहट।
अब हम तीनों एक परिवार हैं। माँ, बुआ और बेटा। चुदाई का परिवार। और हर रात जब निखिल हम दोनों की चूतों में बारी-बारी से अपना लौड़ा ठूंसता है तो मैं फुसफुसाती हूँ -
“बेटा, आज रात दोनों राँडें तेरी हैं। जो चाहे कर… चूत फाड़, गांड फाड़, मुँह भर… हम तैयार हैं।”
सुनीता भी साथ में कराहती है - “हाँ… चोद… हमें कुतिया बना दे… हमेशा के लिए…”
और निखिल हँसता है। अपना मोटा लौड़ा और गहरा धकेलता है। कमरा गंदे शब्दों और चुदाई की आवाजों से गूँज उठता है। यही हमारी जिंदगी है अब। गंदी, हरामी, बेरोक-टोक।
और हमें कोई शर्म नहीं। क्योंकि चूत की आग बुझाने के लिए रिश्ते कोई मायने नहीं रखते!
तो दोस्तों कैसे लगी आपको यह Family में Mom Son और Bua की Threesome सेक्स की Hindi Sex Kahani? नीचे कॉमेंट करके जरूर बताए!
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