बेटे को मूत पिलाकर मुस्लिम माँ ने चुदवाया!


Muslim Mom Sex : मुस्लिम माँ ने बेटे को मूत पिलाकर उसका मोटा लंड चूसा फिर रात भर Bete के मूसल लंड से फड़वाई अपनी चूत! और बनवा लिया चुत का भोंसड़ा! हुई Video Recording... 


रोज़ विला नाम का वो बड़ा बंगला शहर के बाहर था। बाहर से देखने में साधारण लगता था, लेकिन अंदर से पूरी तरह अलग दुनिया थी। पाँच महँगी गाड़ियाँ, दो नौकरानियाँ, और हर महीने पाँच लाख से ज़्यादा की आमदनी।


पति खालिद उनचास साल के थे। आर्मी के जनरल। ज़्यादातर समय बॉर्डर या पोस्टिंग पर रहते थे। घर में उनकी कमी तो महसूस होती थी, लेकिन पैसे और आराम की कमी कभी नहीं हुई।


उनकी पत्नी आयशा चालीस साल की थीं। कद मध्यम, शरीर भरा हुआ।


Figure 46-37-55। छातियाँ भारी और गोल, कमर पतली, लेकिन सबसे खास बात उनकी गाँड़ थी – इतनी बड़ी, भारी और मोटी कि चलते वक्त दोनों तरफ लहराती रहती थी।


जब वे टाइट नाइटी या सलवार पहनती थीं तो पीछे से देखने वाले का ध्यान बँध जाता था। बाल काले और लंबे, होंठ गहरे लाल, और आँखों में एक छुपी हुई शारीरिक प्यास जो अब दिनों से दब रही थी।


उनका बेटा ज़ैन इक्कीस साल का था। कॉलेज की आखिरी साल में पढ़ता था। लंबा, पतला लेकिन जिम जाने की वजह से शरीर अच्छा बन चुका था। घर आता तो सिर्फ शॉर्ट्स और बनियान में घूमता।


आयशा को अब उसके बदलते शरीर पर नज़र जाने लगी थी।


पिछले छह महीने से खालिद बाहर थे। घर में सिर्फ आयशा, ज़ैन और दो नौकरानियाँ। आयशा अक्सर अकेली रहतीं। रात को अपनी उँगलियों से चूत सहलातीं, लेकिन मन नहीं भरता था। कभी-कभी ज़ैन को देखतीं तो दिल में एक अजीब सी गर्मी उठती।


एक सुबह दोनों डाइनिंग टेबल पर कॉफी पी रहे थे। आयशा ने काली टाइट नाइटी पहनी हुई थी जो उनकी बड़ी गाँड़ को साफ दिखा रही थी। ज़ैन शॉर्ट्स में बैठा था।


अचानक उसका हाथ फिसल गया और गरम कॉफी उसके शॉर्ट्स और जांघों पर गिर गई।


“अरे ज़ैन! धीरे-धीरे पिया कर बेटा,” आयशा ने जल्दी से नैपकिन उठाया। “चल बाथरूम में चलते हैं, मैं साफ कर देती हूँ।”


ज़ैन शर्मा गया। “माँ मैं खुद कर लूँगा…”


“लेकिन बेटा, ये गरम कॉफी है, जल्दी साफ करना पड़ेगा वरना छाला पड़ जाएगा।” आयशा का लहजा थोड़ा हुक्मी था। वे उठीं और ज़ैन को बाथरूम की तरफ ले गईं।


अंदर जाते ही आयशा ने दरवाज़ा बंद कर दिया। ज़ैन ने शॉर्ट्स उतार दिए। सिर्फ काली चड्डी में खड़ा था।


आयशा ने गीली नैपकिन से उसकी जांघें साफ करना शुरू किया। जैसे-जैसे हाथ ऊपर बढ़ता गया, उन्होंने महसूस किया कि ज़ैन का लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था। चड्डी के अंदर एक मोटा, लंबा उभार बन गया था।


आयशा की साँसें रुक गईं। “कितना बड़ा हो गया है मेरा बेटा…” उनके मन में एक गंदा ख्याल आया।


उन्होंने जान-बूझकर नैपकिन को उसके लंड के बिल्कुल पास ले जाकर रगड़ना शुरू कर दिया। ज़ैन का लंड और सख्त होता गया। चड्डी में साफ दिख रहा था कि उसका मोटा सुपाड़ा खड़ा हो रहा है।


ज़ैन शर्मा के बोला, “माँ… बस हो गया न?”


आयशा ने आँखें उठाकर उसके चेहरे की तरफ देखा, लेकिन नज़र नीचे चली गई। “हाँ बेटा… लेकिन ये चड्डी भी गीली हो गई है। उतार दे, मैं धुल देती हूँ।”


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ज़ैन ने पहले मना किया, लेकिन आयशा के बार-बार कहने पर उसने चड्डी भी उतार दी। अब वो बिल्कुल नंगा खड़ा था। उसका लंड – आठ इंच से ज़्यादा लंबा, मोटा, हल्का सा ऊपर की तरफ झुका हुआ, और सुपाड़े पर चमक आ रही थी।


आयशा की आँखें खुली रह गईं। उन्होंने लंड को घूरते हुए देखा जैसे पहली बार किसी मर्द का लंड देख रही हों।


“सुभानअल्लाह…” उनके मुँह से निकल गया बिना सोचे।


ज़ैन ने पूछा, “क्या हुआ माँ? ऐसे क्यों देख रही हो?”


आयशा ने जल्दी से नज़र हटा ली। “कुछ नहीं बेटा… बस इतना बड़ा हो गया है तू।” उन्होंने चड्डी उठाकर वॉशिंग मशीन में डाल दी। पर उनका मन अब वहीं अटक गया था।


शाम को खालिद का फोन आया। आयशा फोन पर बात करते-करते ज़ैन के कमरे के पास पहुँच गईं। दरवाज़ा थोड़ा खुला था। अंदर ज़ैन बिस्तर पर बैठा था, बिल्कुल नंगा।


एक हाथ में उसका मोटा लंड था और वो ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था। लंड इतना बड़ा था कि उसके दोनों हाथ भी नहीं समा रहे थे। सुपाड़े से थोड़ा प्रीकम निकल रहा था।


आयशा की चूत में एक झटका लगा। फोन पर ही उनके मुँह से निकल गया – “इंसान अल्लाह… कितना मोटा और लंबा लंड है रे…”


खालिद ने सुना। “क्या बोल रही है बेगम? कितना बड़ा?”


आयशा ने जल्दी से संभाला। “अरे कुछ नहीं… मैं टीवी पर एक बड़ा सा घोड़ा देख रही थी।”


खालिद हँसने लगा। “अच्छा, घोड़े का लंड देख के खुश हो गई? ले आ घर पर, रोज़ चूस लेना।”


आयशा ने सोचा, “ये घोड़ा नहीं… ये मेरा बेटा है जिसका लंड घोड़े जैसा है।” उन्होंने फोन काट दिया और अपने कमरे में आ गईं। चूत गीली हो चुकी थी।


अगला दिन। सुबह ज़ैन जिम से आया था, पसीना-पसीना। आयशा ने कहा, “बेटा कपड़े उतार, मैं धुल देती हूँ। और ये तौलिया ले ले।”


लेकिन उन्होंने तौलिया जान-बूझकर छुपा दिया। ज़ैन ने कहा तौलिया नहीं मिल रहा। आयशा बोलीं, “तो चड्डी उतार के दे दे, मैं धुल देती हूँ। तू तो बचपन से मेरे सामने नंगा रहता था न?”


ज़ैन शर्मा के पीठ करके चड्डी उतार के दे गया। आयशा ने उसकी मोटी गाँड़ देखी – टाइट और गोल। और आगे से उसका लंड लटक रहा था, हल्का सा खड़ा।


उन्होंने चड्डी को मुँह के पास लेकर सूँघा। उस पर ज़ैन का प्रीकम लगा था।


आयशा ने जीभ निकालकर उसे चाट लिया। कड़वा-मीठा स्वाद। उन्होंने चड्डी को अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया जब तक वॉशिंग मशीन चल रही थी। चूत और गीली हो गई।


शाम को ज़ैन ने कहा, “माँ बहुत प्यास लगी है।”


आयशा के मन में एक गंदा आइडिया आया। वे जल्दी से अपने कमरे में गईं, बाथरूम में बैठीं और एक गिलास में अपना गरम मूत भर लिया। उन्होंने थोड़ा सा हल्दी पाउडर डालकर रंग बदल दिया।


ज़ैन के पास लेकर आईं। “बेटा ये ले, स्पेशल हल्दी वाला पानी। एनर्जी के लिए।”


ज़ैन ने पिया। आयशा उसे देखते हुए अपनी टाँगें रगड़ रही थीं। जब ज़ैन ने सारा मूत पी लिया तो आयशा की चूत से एक हल्का सा पानी निकल आया।


उन्होंने तुरंत अपने कमरे में जाकर नाइटी उतार दी, बिस्तर पर लेट गईं और उँगली से अपनी गीली चूत में उँगली डालकर हिलाने लगीं।


“आह्ह्ह… ज़ैन… मेरा बेटा… तू मेरा मूत पी रहा था… उफ्फ… अब मेरी चूत भी पी लेगा क्या?” वे ज़ोर-ज़ोर से उँगली अंदर-बाहर कर रही थीं।


“ज़ैन… बेटा… आह्ह्ह… कितना बड़ा लंड था तेरा… मैं देख रही थी जब तू हिला रहा था… मेरी चूत फाड़ देगा तू… उफ्फ… आह्ह्ह!”


उनके मुँह से निकलता रहा – “ज़ैन… बेटा… अम्मी की चूत में डाल दे अपना मोटा लंड… चोद दे अम्मी को… आह्ह्ह… ज़ोर से…!” वे झड़ गईं। सारा बिस्तर गीला हो गया। पर उनका मन अब और भूखा हो गया था।


रात के दो बज चुके थे। पूरा घर खामोश था। सिर्फ पंखे की हल्की आवाज़ आ रही थी। आयशा अपने कमरे में नंगी लेटी हुई थीं। उनके शरीर पर पसीने की हल्की परत थी। चूत अभी भी गीली थी।


उन्होंने सोचा – अब और इंतज़ार नहीं। आज रात वो अपने बेटे के पास जाएंगी… लेकिन नींद में चलने का नाटक करके।


वे उठीं, बिल्कुल नंगी। उनके भारी स्तन हिल रहे थे, बड़ी गाँड़ लहरा रही थी। बाल खुले थे। उन्होंने दरवाज़ा खोला और ज़ैन के कमरे की तरफ बढ़ीं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। डर भी था, लेकिन चूत की प्यास ज़्यादा थी।


ज़ैन के कमरे के बाहर पहुँचकर उन्होंने दरवाज़ा हल्का सा खटखटाया। कुछ देर बाद ज़ैन ने दरवाज़ा खोला। उसकी आँखें नींद से भरी थीं। जैसे ही उसने माँ को बिल्कुल नंगी देखा, उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।


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“माँ…? इतनी रात में… और ये हालत में… क्या हुआ?” ज़ैन हैरान था।


आयशा ने कुछ नहीं बोला। आँखें अधखुली रखीं, जैसे सच में नींद में हों। उन्होंने आगे बढ़कर ज़ैन के गले में हाथ डाल दिया और धीरे से उसके सीने से सट गईं। उनके भारी स्तन ज़ैन की छाती से रगड़ रहे थे। ज़ैन स्तब्ध खड़ा रहा।


आयशा ने जान-बूझकर थोड़ा लड़खड़ाकर गिरने का नाटक किया। ज़ैन ने उन्हें पकड़ लिया। उसका एक हाथ सीधा आयशा की भारी छाती पर पड़ गया। दूसरा हाथ उनकी कमर पर।


आयशा ने अंदर से मुस्कुराया। ज़ैन ने उन्हें धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया।


ज़ैन खड़ा होकर माँ को देख रहा था। उनकी नंगी देह – गोरी, भरी हुई, स्तन बड़े और गोल, निप्पल सख्त, पेट थोड़ा नरम, और नीचे घनी काली झाड़ी वाली चूत। गाँड़ बिस्तर पर दबकर फैल गई थी। ज़ैन की साँसें तेज़ हो गईं।


“माँ… तुम सच में सो रही हो क्या?” उसने धीरे से पूछा।


कोई जवाब नहीं। ज़ैन ने हिम्मत करके हाथ बढ़ाया और आयशा के एक स्तन को छुआ। उँगलियाँ नरम मांस पर फिसल गईं। उसने धीरे से दबाया। आयशा ने अंदर से साँस ली, लेकिन बाहर कुछ नहीं बोली।


ज़ैन ने दूसरा स्तन भी पकड़ लिया और दोनों को मसलने लगा। निप्पल को उँगलियों से घुमाया। आयशा की चूत में गुदगुदी होने लगी।


ज़ैन और बहादुर हो गया। उसने माँ की टाँगें धीरे से खोलीं।


चूत साफ दिख रही थी – गीली, फूली हुई। ज़ैन ने झुककर सूँघा। खुशबू ने उसका लंड और खड़ा कर दिया। उसने एक उँगली चूत के पास रखी और धीरे से रगड़ा। आयशा की चूत से थोड़ा पानी निकला।


“अम्मी… तेरी चूत कितनी गीली है…” ज़ैन ने फुसफुसाया।


आयशा अब और इंतज़ार नहीं कर सकीं। उन्होंने आँखें खोलीं और ज़ैन को देखकर मुस्कुरा दीं।


“बेटा… तुझे पता था न कि अम्मी जाग रही है?” उन्होंने धीरे से कहा।


ज़ैन चौंका, लेकिन फिर हँस दिया। “पता था माँ… लेकिन मैं भी यही चाहता था।”


आयशा उठ बैठीं और ज़ैन के पास खींच लिया। “तो अब और नाटक नहीं। आज रात तू अपनी अम्मी को चोदेगा।”


ज़ैन ने तुरंत अपने कपड़े उतार दिए।


उसका लंड कड़क खड़ा था – मोटा, लंबा, नसें उभरी हुई। आयशा ने उसे देखा और जीभ चाट ली। उन्होंने ज़ैन को बिस्तर पर पीठ के बल लिटाया और उसके लंड के पास बैठ गईं।


“इतना मोटा लंड… और ये मेरा बेटा है…” उन्होंने कहा और जीभ से सुपाड़े को चाटा। ज़ैन का शरीर काँप गया।


“आह्ह्ह… माँ…”


आयशा ने पूरा लंड मुँह में ले लिया। गला भर गया, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। ज़ैन का लंड उनकी जीभ पर फिसल रहा था। वे चूस रही थीं, चाट रही थीं, और कभी-कभी दाँतों से हल्का काट रही थीं।


ज़ैन के मुँह से निकल रहा था – “आह्ह्ह… अम्मी… ज़ोर से चूसो… उफ्फ… कितना मज़ा आ रहा है…”


आयशा ने एक हाथ से अपने स्तन मसलते हुए लंड चूसना जारी रखा। दूसरा हाथ अपनी चूत में डालकर उँगली कर रही थीं। कमरे में चूसने की गीली आवाज़ें भर गईं – “चुप-चुप… चुप-चुप…”


ज़ैन ने आयशा के बाल पकड़ लिए और उनकी मुँह में लंड ठोकने लगा। “ले अम्मी… पूरा ले… तेरी चूत के लायक लंड है ये…”


आयशा की आँखों से आँसू आ गए, लेकिन वे रुकी नहीं। ज़ैन चिल्लाया – “माँ… गिरने वाला है… आह्ह्ह!”


उन्होंने लंड और गहरा मुँह में लिया। ज़ैन का गरम वीर्य फूटा – एक, दो, तीन… कुल नौ-दस फुहारें। आयशा ने ज्यादातर निगल लिया, बाकी उनके स्तनों और गले पर गिर गया। उन्होंने लंड से चिपका हुआ वीर्य चाट लिया।


“स्वादिष्ट है बेटा…” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।


ज़ैन ने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनकी टाँगें चौड़ी कर दीं। “अब मेरी बारी अम्मी।”


उन्होंने झुककर आयशा की चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से फटे हुए होंठों को चाटा, फिर अंदर घुसा दी। आयशा के मुँह से निकला – “आह्ह्ह… ज़ैन… उफ्फ… चूत चाट रहा है मेरा बेटा… आह्ह्ह… ज़ोर से…!”


ज़ैन ने उनकी चूत के अंदर जीभ घुमाई, फिर निप्पल चूसते हुए दो उँगलियाँ चूत में डाल दीं। आयशा का शरीर काँप रहा था। “आह्ह्ह… बेटा… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ… आह्ह्ह!”


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उनका पानी छूटा। ज़ैन ने सब कुछ पी लिया।


अब ज़ैन का लंड फिर से खड़ा हो चुका था। आयशा ने उसे ऊपर खींचा। “अब डाल बेटा… अपनी अम्मी की चूत में अपना मोटा लंड डाल।”


ज़ैन ने लंड सेट किया और धीरे से दबाया। सुपाड़ा चूत के अंदर घुसा। आयशा चीख पड़ीं – “आह्ह्ह… धीरे… मोटा है बेटा… उफ्फ…!”


ज़ैन ने धीरे-धीरे आधा लंड अंदर डाला। फिर एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड बच्चेदानी तक पहुँच गया। आयशा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह्ह… ज़ैन… फाड़ दिया… मेरी चूत फाड़ दी… आह्ह्ह!”


ज़ैन ने कमर चलानी शुरू की। धीरे-धीरे पहले, फिर तेज़। “फच-फच… फच-फच…” की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं।


आयशा चिल्ला रही थीं – “आह्ह्ह… ज़ोर से चोद… बेटा… अम्मी की चूत तेरी है… आह्ह्ह… उफ्फ… और गहरा…!”


ज़ैन ने उनकी टाँगें कंधों पर रख लीं और और तेज़ चोदना शुरू कर दिया। स्तन उछल रहे थे। आयशा उन्हें पकड़कर मसल रही थीं। “आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है… मेरा बेटा मुझे चोद रहा है… आह्ह्ह…!”


ज़ैन ने उन्हें पलटा और डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। एक हाथ से उनकी बड़ी गाँड़ पर थप्पड़ मारते हुए।


“ले अम्मी… ये ले… तेरी मोटी गाँड़ हिल रही है… आह्ह्ह!”


आयशा चीख रही थीं – “आह्ह्ह… मार… और मार… चोद मुझे… उफ्फ… मैं तेरी रंडी हूँ आज रात… आह्ह्ह!”


ज़ैन ने फोन उठाया और वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आयशा ने देखा लेकिन कुछ नहीं बोलीं।


“भेज देना अपने अब्बू को भी… वो देखें कि उनकी बेगम बेटे से कैसे चुदवाती है…”


ज़ैन हँसा और स्पीड और बढ़ा दी। आयशा का शरीर काँप रहा था। “आह्ह्ह… आ रहा है… आह्ह्ह… ज़ैन…!”


दोनों एक साथ झड़ गए। ज़ैन ने अंदर ही वीर्य छोड़ा। गरम वीर्य चूत में भर गया। आयशा ने आह भरी – “आह्ह्ह… भर दिया… मेरा बेटा ने अम्मी की चूत भर दी…”


वे दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। ज़ैन ने आयशा को अपनी गोद में उठाया और फिर से लंड अंदर डाल दिया। इस बार आयशा ऊपर बैठकर चोद रही थीं।


“आह्ह्ह… ज़ैन… उफ्फ… लंड कितना मोटा है… आहhh…!”


सुबह पाँच बजे तक वे चोदते रहे। अलग-अलग पोज़ीशन में – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, स्टैंडिंग। हर बार मॉनिंग, चीखें और गंदी बातें। आखिर में दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। बिस्तर पूरी तरह गीला था।


तो दोस्तों बताए की क्या आपको आगे की कहानी चाहिए जिसमे मैंने खालिद को वीडियो भेजने के बाद वाला सीन की Antarvasna ऐसे ही Hindi Sex Kahani में लाऊ?? कॉमेंट करके बताना जरूर!!


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