जीजू ने दोनों साली की चूत एक साथ फाड़ी! थ्रीसम चुदाई

जीजू के लन्ड पर गुजरे वो हसीन पल अब आपके साथ बाटने जा रही हूं तो अपने अपने लन्ड को पकड़ लीजिए और चूत पर हाथ रख लीजिए क्यों के आज आपका पानी रुकने वाला नहीं है।


हाय सबको, मैं मनप्रीत फिर से बोल रही हूं। आप लोगों ने जो मेरी पिछली कहानी जीजू ने मुझे दीदी के सामने चोदकर मेरी सील तोड़ दी!  को प्यार दिया उसके लिए मैं आपकी आभारी हूं।


अब अपनी पिछली कहानी के आगे की कहानी आप सब को बताने जा रही हूं। जिसमें जीजू ने हम दोनों की threesome चुदाई करी थी। 


तो अपने अपने लन्ड को पकड़ लीजिए और चूत पर हाथ रख लीजिए क्यों के आज आपका पानी रुकने वाला नहीं है। तो चलिए मज़ा करते है - 


हाय सबको, मैं मनप्रीत बोल रही हूं। वाह! कल रात की तो बात ही अलग थी? जीजू ने मुझे ऐसी चुदाई दी कि आज भी चूत में हलचल महसूस हो रही है। 


वो खून जो सोफे पर लगा था, वो मेरी सील टूटने का सबूत था। लेकिन सुबह होते ही सब कुछ नॉर्मल हो गया,


जैसे कुछ हुआ ही ना हो। दीदी ने मेरी लाइव चुदाई देखकर भी कुछ नहीं कहा, बस मेरे चेहरे को देखकर मुस्कुरा दी जब मैंने उन्हें जगाया।


सब एक एक कर के नाश्ते के लिए तैयार हुए हमने एक साथ ही खाना खाया। 


जीजू ने अपने हाथों से बनाकर सबको चाय पिलाई, और मैं तो बस उनके हसीन चेहरे को घूर रही थी ये वही चेहरा था जो रात मेरे ऊपर चढ़ाई करते हुए हुए पसीना पसीना हो गया था।


 हम दोनों की आंखें मिली उनकी आंखों में वो चमक थी जो कह रही थी – "साली जी! कल रात तो बस शुरुआत थी।" अब अगली सुबह, यानी मेरी पहली चुदाई के अगले दिन, हम सब होटल के कमरे में सोकर उठे। 


मैं सबसे पहले उठी, क्योंकि रात भर मुझे नींद ही नहीं आई। मेरी चूत में हल्का सा दर्द था मैने फोटो लेकर देखा तो वो लाल हो रही थी और सुजान भी आई हुई थी। लेकिन सच कहूं तो वो दर्द मज़े का था।


मैंने आईने में खुद को देखा – मेरी गोरी चूंचियां अभी भी थोड़ी लाल थीं, मेरे नाज़ुक निप्पल पर जीजू के दांतों के निशान थे जीजू ने रात मेरे ऊपर प्यार भरी मोहर लगाई थी।


 मैंने हंसते हुए सोचा, "अरे वाह, जीजू ने तो मार्किंग कर दी है।" फिर मैंने जल्दी जल्दी नहा लिया आज मुझे जीजू को उकसाना था तो एक टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहन लिया।


मेरी गांड़ तो गोल मटोल है ही, उसके ऊपर शॉर्ट्स में वो और उभर रही थी।मेरी दीदी अभी भी सो रही थी, उनके मोटे चूंचे कपड़ो से बाहर झांक रहे थे।


मैंने मज़ाक में उनके चूंचे दबाए, वो आह! करके उठ गईं। वो नशीली निगाहों से मुझे देखते हुए बोली "मनप्रीत, तू फिर से? रात भर की गांड़ मस्ती उतरी नहीं तेरी?" 


उन्होंने जिस तरह से कहा उससे साफ था के हम बहनों के बीच से शर्म की बाधा हट चुकी है, लेकिन उनकी आंखों में शरारत थी। मैं जान गई कि वो शुरू से आखिर तक सब देख चुकी थीं।


जीजू अपने कमरे से आए, फ्रेश होकर वो नीली शर्ट में जैसे कोई हीरो लग रहे थे।


"चलो नाश्ता करते हैं, फिर दिल्ली घुमाने ले चलूंगा तुम दोनों को , एग्जाम हो गया, अब मज़ा लो।" उन्होंने कहा।


ये Jija Sali Ki Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है। पहले हम तीनों नीचे कैंटीन में गए।


आलू पराठे, दही, चाय – सब कुछ मज़े लेकर खाया। जीजू मेरी टांग को टेबल के नीचे से छू रहे थे, उनकी हरकत से मैं शर्मा रही थी लेकिन रोक नहीं रही थी। 


दीदी ने भी ये सब नोटिस किया, लेकिन कुछ बोलीं नहीं। बस उनकी सांसें थोड़ी तेज़ हो गईं जो सिर्फ मुझे दिखी।


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नाश्ता करते हुए जीजू ने प्लान बनाया। "सबसे पहले हम लाल किला चलते हैं, फिर इंडिया गेट, उसके बाद कनॉट प्लेस। शाम को लोटस टेम्पल और रात को डिनर बाहर ही करेंगे।" 


हम बहने तो खुश हो गए, नाश्ता पानी निपटा कर होटल से बाहर निकले, जीजू ने दिन भर के लिए टैक्सी बुक की। रास्ते में मैं दोनों के बीच में बैठी, दीदी विंडो साइड आ गई।


जीजू का हाथ मेरी जांघ पर रखा हुआ था, जिसे वो धीरे-धीरे ऊपर सरका रहे थे। मैंने उनकी तरफ देखा, तो वो मुस्कुरा रहे थे।


"जीजू, दीदी देख रही हैं," मैंने धीरे से कहा।


वो बोले, "तो देखने दो? वो भी तो अपनी हैं।" दीदी ने सब कुछ सुना, लेकिन नज़रें बाहर ही लगाए रखीं। मगर मैंने देखा की उनकी चूंचियां सांस लेते हुए ऊपर-नीचे हो रही थीं।


हम जब लाल किला पहुंचे तो ठंड बढ़ गई थी वैसे भी सर्दी का मौसम था, फिर भी धूप अच्छी निकली थी। हम अंदर घुसे, पहले हमने क्राउनिंग हॉल देखा। 


जीजू भीड़ में मेरे कंधे पर हाथ रखे हुए थे, जैसे मुझे प्रोटेक्ट कर रहे हों। लेकिन उनका हाथ धीरे से मेरी कमर पर सरक गया, फिर कुछ पलो में चूंची की तरफ बढ़ गया। 


मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की और उनको रोकते कहा, "जीजू, यहां लोग हैं।" लेकिन वो बोले, "कोई नहीं देख रहा।" और सच में हमें कोई नहीं देख रहा था मौके से उन्होंने मेरी चूंची को हल्का सा दबा दिया। 


वो मेरे मोटे बूब्स की गोलाई महसूस करते हुए मेरी खुशबू को अपनी सांसों में मिला रहे थे,"मनप्रीत, तेरी चूंचियां तो अभी भी कल रात जैसी ही सॉफ्ट हैं।" मैं शर्मा गई, लेकिन मुझे चूत में गीलापन महसूस हुआ।


दीदी थोड़ी दूर खड़ी थी, अपनी फोटो ले रही थीं। लेकिन मैंने देखा, वो हमें ही घूर रही थीं।


 उनकी आंखों में वो नशीली चमक थी जो कल रात उन्होंने उंगली करते हुए मुझे दिखाई थी। ये Threesome Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


फिर हम दीवारों के पास फोटो लेने गए। जीजू ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, जैसे पोज़ दे रहे हों।


उनका लन्ड मेरी गांड़ से सटा हुआ था वो सख्त होता हुआ मुझे गांड़ पर महसूस हुआ । "जीजू, ये क्या?" मैंने फुसफुसाया। वो बोले, "तेरी वजह से खड़ा हो गया।"


मैंने पीछे मुड़कर देखा, उनकी पैंट में उभार साफ दिख रहा था। तभी दीदी आईं, "क्या कर रहे हो दोनों?" लेकिन उनकी आवाज़ में जलन नहीं, बल्कि वासना थी। 


जीजू ने हंसकर कहा, "पोज़ दे रहे हैं। तू भी आ।" फिर दीदी भी आईं, लेकिन घूमते घूमते हुए उनका हाथ जीजू की जांघ पर चला गया ये अनजाने में हुआ या "बहाने से" जीजू समझ नहीं पाए।


दीदी बोलीं, "तुम्हारी पेंट साफ कर रही हूं।" लेकिन मैं जान गई, वो उनके लन्ड के पास छू रही थीं।


जीजू की सांसें तेज़ हो गईं। मैने देखा पूरे समय उनका लन्ड खड़ा रहा वो हमारी वजह से मुझे उनकी हालत देख देखकर मज़ा आ रहा था। हम लाल किले से निकले सीधे इंडिया गेट की तरफ।


रास्ते में ऑटो लिया और टैक्सी को छुट्टी दी क्योंकि उसमें चिपका चिपकी मुमकिन नहीं थी।


मैं फिर से बीच में बैठी। अब आसानी से जीजू का हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर सरक गया, उन्होंने मेरी प्यारी सी चूत पर उंगली से सहलाया।


मैं तुरंत कांप गई, "जीजू, दीदी..." मैने डरते हुए उनको रोकने चाहा। लेकिन दीदी ने ही अब खुद कहा, "मनप्रीत, आराम से बैठ, ट्रैफिक है।"


और खुद उनका हाथ जीजू की गोद में आ गया "मेरा फोन गिर गया," बहाना बनाकर वो बात टालने लगी लेकिन उनकी चोरी मुझे पता थी। वो जीजू की लन्ड को मोबाइल की बहाने से दबा रही थीं।


जीजू ने एक कामुक आह! की आवाज़ करी, मगर हम ऑटो में थे तो उन्होंने कंट्रोल किया। "जसप्रीत, तू भी..." वो चौक कर बोले। 


दीदी शर्मा गईं, मगर उन्होंने लन्ड पर से हाथ नहीं हटाया। मैं दोनों के चेहरे के बदलते रंग देख रही थी, मेरी दीदी जो हमेशा शरमाती रहती थीं, आज बेशर्म व कामुक हो गई थीं।


शायद जीजू के मर्दाने जिस्म ने उन्हें पागल कर दिया था।


हम जाम से निकल कर इंडिया गेट पहुंचे। वह घूमते घूमते शाम हो रही थी, पूरे इलाके में खूबसूरत लाइट्स जलने लगीं थी माहौल बहुत रोमांटिक हो चला था।


हम सब खूब घूमे, तीनों से सेक्सी सेक्सी फोटो लिए। जीजू ने मुझे बोटिंग के लिए कहा। फिर हम नाव पर बैठे, दीदी किनारे पर रुकी।


नाव में जीजू ने मुझे गोद में खींच लिया। "मनप्रीत, तेरी गांड़ कितनी मस्त है," कहकर उन्होंने मेरी गांड़ दबा दी। मैं उनके छूते ही हंस दी, मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी।


उनका लन्ड फिर सख्त होता मुझे गांड़ के छेद पर महसूस हुआ,


मेरी जांघ से सटा वो सांप मुझे ललचा रहा था। "जीजू, आपका पूरे दिन तक खड़ा कैसे है?" मैंने पूछा।


वो बोले, "तुम दोनों सालियों की वजह से। तेरी चूंचियां, तेरी चूत... और जसप्रीत की वो 38 वाली चूंचियां! तुम दोनों ने मेरी हालत बिगड़ रखी है आज।"


मैंने सोचा ये लन्ड, दीदी को कितना तड़पा रहा होगा। ये Antarvasna भरी Sali Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


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दीदी किनारे से हमें देख रही थीं। जब हम लौटे, तो वो गुस्से में बोलीं, "मुझे भी बोटिंग करवाओ।" जीजू ने हां कहा। नाव पर जाते ही दीदी ने जीजू के कंधे पर सिर रखा।


"जीजू, मैं बहुत थक गई हूं," ये उनका एक और बहाना मगर सब कुछ झूठ था उनको सिर्फ लन्ड चाहिए था।


लेकिन उनका हाथ धीरे धीरे नीचे, जीजू के लन्ड पर पहुंच गया मैं दूरबीन से सब देख रही थी। "ये इतना क्यों सख्त है?" वो फुसफुसाईं। जीजू ने हंसकर कहा, "तेरी वजह से।"


मैं किनारे से देख रही थी, मेरी दीदी जो कभी जीजू को सिर्फ भाई की तरह देखती थीं, आज उनके लन्ड को सहला रही थीं। 


जीजू का लन्ड पूरे दिन खड़ा रहा – कभी मेरी चूंची दबाने से, कभी दीदी के छूने से। वो पैंट में उभरा हुआ जीजू को तड़पा रहा था मुझे उन्हें देखकर मज़ा आ रहा था। 


फिर हम सब कनॉट प्लेस गए जीजू के कार्ड से हम दोनों ने शॉपिंग की। जीजू ने मुझे एक टाइट ड्रेस दिलाई जब मैं चेक करने गई तो वो ट्रायल रूम में घुस आए। 


"देखूं कैसी लग रही है," कहकर उन्होंने मेरी चूंचियां दबाईं। "जीजू, आप यहां?" मैं आराम से चिल्लाई। लेकिन चूंची दबाकर बहुत मज़ा आया। बाहर दीदी इंतज़ार कर रही थीं।


हम जब निकले, तो दीदी ने कहा, "जीजू, मुझे भी हेल्प कर के दिखाओ।" फिर ट्रायल रूम में वो गईं, जीजू भी अंदर गए।


मैंने बस सुना, "जीजू, ये ब्लाउज टाइट है, मदद करो।" और फिर उनकी आह! निकली "हाय जीजू, धीरे...आआह जीजू अफ़फ!"शायद जीजू उनके चूंचे दबा रहे थे।


दीदी पूरी कामुक हो चुकी थीं, बार-बार बहाने बनाकर जीजू के लन्ड को छू रही थीं – कभी बैग से कुछ गिरा के, कभी भीड़ में धक्का खा के।


शाम को हम लोटस टेम्पल पहुंचे । अंदर बहुत शांति थी, लेकिन हमारा मन उत्तेजित। जीजू ने मुझे दीवार के पास ले जाकर होठों पर चूमा। "मनप्रीत, तेरे होंठ कितने मीठे हैं।"


मैं तो वही पिघल गई। दीदी ने भी देख लिया, लेकिन इस बार जलन की बजाय, वो खुद जीजू के पास गईं।


"मेरा दुपट्टा गिर गया," कहकर झुकीं और फिर से उनका लन्ड छुआ। जीजू की सांसें तेज़। "जसप्रीत, तू आज कुछ ज़्यादा ही शरारती हो रही है।


"वो बोलीं, "तुम्हारी गलती है, इतना मर्दाना लन्ड क्यों छुपाए हो।"


रात को डिनर के लिए हम सरजॉन रेस्तरां। हमने तंदूरी चिकन, नान भर पेट खाया।


टेबल के नीचे जीजू का पैर मेरी चूत पर था और एक हाथ से वो दीदी की चूत सहला रहे थे। मैं बैठी हुई कांप रही थी। दीदी ने भी अपना पैर उनके लन्ड पर रखा।


जीजू का लन्ड पूरे दिन खड़ा रहा था, अब उसमें दर्द कर रहा होगा। खाना खाते हुए दीदी ने खुलकर कहा,


"मनप्रीत, कल रात... मैंने तुझे चुदवाते हुए देख लिया था।" मैं शर्मा गई। जीजू भी हंस पड़े। हम फिर होटल लौटे दिन भर के थके हुए, लेकिन तीनों चुदाई की आग में गर्म थे।


हम अपने कमरों में जाने लगे लेकिन दीदी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। वो बोली"मनप्रीत, सुन देखना जीजू... कितने कमाल के हैं कल रात जब मैने उनको तेरी चूत चोदते देखा, तो मेरी चूत भीग गई।


आज पूरे दिन उनका लन्ड मैं इसलिए छूती रही, लेकिन हर बार वो मना कर देते थे। कहते हैं, 'पहले मनप्रीत से बात कर लूं।'" मैं हैरान हो गई। ये Xxx Desi Girl Chudai Ki Kahani आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


"दीदी, तो क्या करना मुझे?" वो बोलीं, "मैं चाहती हूं की जीजू मुझे भी चोदें। लेकिन अकेले नहीं, तू भी आना साथ में हम थ्रीसम करेंगे। तू कल रात की तरह शामिल हो जाना।" 


मैं हंस दी मैने उनकी चूत को पकड़ के बोला "दीदी, मैं तो तैयार हूं। लेकिन जीजू को मनाना पड़ेगा, लेकिन उससे पहले मुझे आपके इन रसीले होठों को चूसना है।"


मैने बिना उनकी इजाज़त का इंतज़ार करे उनके होठों 15 मिनट चूसे मैं जानती थी जीजू मान जाएंगे आखिर कौन सा मर्द दो अप्सराओं को एक साथ चोदने से इनकार करेगा।


मैं जीजू के कमरे गई। उनका दरवाज़ा खुला था। वो नंगे लेटे थे, उनकी मर्दानी छाती बालों से भरी थी। "जीजू, वो दीदी..." मैं बोली। वो उठे और झट से मुझे गोद में खींच लिया।


"क्या हुआ साली जी?" उनके हाथ मेरी चूंचियों पर आ गया। फिर मैंने उनको सब बताया। वो बोले, "जसप्रीत? 


वो जो चाहती है मैं अच्छे से जनता हूं लेकिन मैंने सोचा, पहले तेरी सील टूटी है, तुझे हर्ट ना हो।" मैंने कहा, "जीजू, हम दोनों आपकी हैं। आज आपको खुली छूट है हमारे साथ थ्रीसम करो।"


वो मुस्कुरा दिए फिर बोले "ठीक है, बुला ला उसको।" फिर जसप्रीत दीदी आईं। मैने कमरा में लाइट्स डिम के दी।


हम तीनों जल्दी से बेड पर आए। जीजू ने पहले दीदी को चूमा। "जसप्रीत, तेरी चूंचियां तो कितनी भारी है।" वो उनके बूब्स दबाने लगे। दीदी आह! हम्म! जीजू कहते हुए मॉन करने लगीं। मैं बस उनको देख रही थी, मेरी चूत सुबह से गीली थी। फिर जीजू ने मुझे खींचा।


 "मनप्रीत, तू भी आ मेरी जान।" हम दोनों बहने उनकी गोद में थी।


जीजू के लन्ड को हम दोनों ने छुआ। वो 7 इंच का सांप, सख्त और मोटा हुआ जा रहा था। पहले दीदी ने चूसा साथ साथ मैंने उसे सहलाया। फिर जीजू ने दीदी को लिटाया। उनकी पूरी साड़ी उतारी।


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38 की चूंचियां बाहर उछलने को तड़प उठी। वो उनके बूबे चूसे, फिर धीरे धीरे नोचे जाने लगे। दीदी चिल्लाई, "आह जीजू! उफ्फ! चोदो न मुझे!" लेकिन जीजू बोले, "पहले मनप्रीत क्यों के वो छोटी है।"


जीजू सच में जेंटल मैन थे उसकी इसी बात ने आज मेरी चूत उनके नाम करवा दी थी।


उन्होंने प्यार से मुझे लिटाया, फिर मेरी चूत चाटी दीदी मेरे मुंह पर चूत रखकर मुझे खिलाने लगी। पीछे से जीजू दीदी की गांड़ में उंगली करने लगे।


फिर जीजू ने मुझे तैयार करा उन्होंने मेरी चूत पर अपना लन्ड रखा और एक ज़ोरदार धक्का लगाया।


दीदी मुझे चूत चटवा रही थी, जीजू मुझे ज़ोर से चोद रहे थे मैं आआह, उफ्फ! ओहद्ह अआआह! की आवाज़ करना चाह रही थी मगर मेरी आवाज़ दीदी की चूत तले दबी हुई थी।


दीदी और जीजू मिलकर मेरे जिस्म के साथ खेल रहे थे दोनों पूरी ताकत से मेरी चूची मसल रहते। मेरा जिस्म लाल होता जा रहा था।


मैं उत्तेजना की वजह से जल्दी ही झड़ गई, मेरी इतनी खतरनाक हालत थी के मैं हाफ रही थी। फिर दीदी की बारी आई। उनका भी चूत का छेद सुबह से गीला था। जीजू ने अब उनकी चूत में लन्ड डाला।


वो खुली हुई सील वाला माल थी जीजू जब धक्का मारा तो पूरा लन्ड अंदर घुस गया! 


दीदी की ज़ोर से चीख, "आआह, अआआह! जीजू! ओह अम्मा!" मैं उनके चूंचे पर टूट पड़ी मैं भी उन्हें दबा रही थी। जीजू मस्ती से दीदी को चोद रहे थे, वो ज़ोर-ज़ोर से लन्ड अंदर बाहर करने लगे।


हमारी आहें कमरे में आगाह, उम्ममम, ओह! अआआह! जीजू। आअआआअह दीदी उद्यम्मम्म्म!


अआआह मनप्रीत आआह ! जसप्रीत ओह ! मेरी सालियों हम्मम!अआआह। जीजू ओह अआआह माँ चुद गई तेरी बेटियां ओह माँ अआआह! कौनसी आह किस की थी समझना मुश्किल था।


फिर हमारा थ्रीसम आगे बढ़ा । मैं ऊपर आई और दीदी नीचे जीजू का लन्ड मेरी चूत में दुबारा घुसा, उनकी उंगली दीदी की चूत में गई ।


 फिर हमने अपनी चूत लन्ड पर स्विच की जीजू को हमने नीचे लिया और बारी बारी उनके ऊपर कूदने लगी , जब मैं उनके लन्ड पर चढ़ती तो दीदी अपनी चूत उनके मुंह पर रगड़ती।


जब दीदी अपनी चूत जीजू के लन्ड पर लाती तो मैं जीजू से चूत चटवाती हम दोनों उनकी गोद में सवार थे।


 हम दोनों बहने इतना बहक गई थी के एक दूसरे के नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक चाटने चूसने लगी माहौल ऐसा था जैसे चूत खुद कह रही हो लन्ड चूत में आ-जा।


रात भर ये चुदाई का खेल चलता रहा एक एक करके हम दोनों झड़ते रहे और आखिर मैं जीजू ने अपना रस हमारे चूचों पर बरसाया।


फिर सोते सोते जीजू ने हमें बाहों में भरा और हम तीनों सुबह तक यूंही नंगे एक दूसरे के ऊपर सोते रहे।


अगले दिन हम थोड़ा घूमे फिर घर के लिए रवाना हो गए वो रात वो दिन वो पल मेरे लिए अनमोल थे अब कुछ दिनों में मेरी दीदी की शादी होने वाली है।


 लेकिन ये बात कोई नहीं जनता के वो प्रेगनेंट है और बच्चा जीजू का ही है, ये कहानी आपको कैसी लगी hashmilion5@gmail.com पर मेल कर के ज़रूर बताए। धन्यवाद।

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