रिधिमा का लन्ड से चूत तक का सफर!

Antarvasna Kahani : ट्रांस गर्ल रिधिमा की पहली चुदाई में बॉस ने कपड़े फाड़कर जबरदस्ती चोदा और फाड़ी कुंवारी सील! लंड से नयी चूत तक का Wild और कामुक कहानी!


Garam Kahani के सभी पाठकों को मेरा हेलो, मैं रिधिमा हूं। बहुत दिनों से सोच रही थी के अपनी आप बीती कहानी आप लोगों के साथ साझा करु। मुझे हमेशा से मशहूर होने का बहुत शोक था।


मैं बचपन से सपने देखा करती थी के लोग मुझे पसंद करे मैं कही जाऊं तो भीड़ लग जाए। मेरा असली नाम रिधिमा नहीं रिषभ हुआ करता था मैं पहले ऊपरी जिस्म से एक लड़का था लेकिन मेरे अंदर जज़्बात लड़कियों वाले थे।


मुझे लड़कियों में घूमना फिरना पसंद नहीं था मेरे कुछ पक्के जिगरी दोस्त थे जिन्हें मेरी सच्चाई पता थी मेरा चेहरा लड़कियों की तरह नाज़ुक था न मेरी मूंछें आती थी और न दाढ़ी।


जब मुझे मेरे दोस्त छूते थे तो अच्छा लगता था मगर मैं एक छोटे शहर की रहने वाली थी जहां मेरे जज़्बात समाज के लिए एक कलंक की तरह थे।


एक बार मेरे दोस्तों ने मुझे ब्ल्यू फिल्म दिखाई जिसमें एक मोटा काला आदमी मेरे जैसे एक लड़के की गांड़ मार रहा था वीडियो में उस मोटे ने अपने 10 इंच के लन्ड को दूसरे लड़के की गांड़ में डालकर फंसा रखा था।


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वो दोनों घापा घुप्प गांड़ मार रहे थे जिसे देखकर मेरे गांड़ में भी लालच आने लगा। मैने अपने दोस्त अभय, विशाल और राज को अपनी परेशानी बताई।


 उनकी मदद से मैने अपना घर बार सब छोड़ दिया और दिल्ली रहने आया । मेरे पास थोड़े पैसे थे और बाकी पैसे मैने अपने दोस्तों से उधर लिए और फिर अपना ऑपरेशन करा कर मैं रिषभ से रिधिमा बना।


ये कहानी मैं लिख रही हूं दुनिया को ये बताने के लिए की आप लोगों का साथ नहीं मिला इसलिए मुझे अपनी नई चूत और पुरानी गांड़ को गिरवी रखकर वो बनना पड़ा जो मैं अब हूं। 


जब मैं दिल्ली आई तो मुझे बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा जैसे की मुझे अकेला लड़का समझ कर कोई कमरा नहीं देता था। बहुत मुश्किल से एक मोहल्ले में मुझे घर मिल गया लेकिन वो लड़कों से भरा एक PG था, जहां निहायती बिगड़े लड़के थे।


मुझे 2 अनजान लड़कों के साथ बिस्तर बांटना पड़ता था मैं अंदर से लड़की थी तो आप सोच सकते मेरी कैसी हालत होती होगी।


कभी कभी वो लड़के कमरे के अंदर चुदाई की वीडियो देखा करते थे फिर एक दूसरे को हसी मज़ाक मैं छू लिया करते थे। वो समझगए थे मैं शर्मिला हूं इसलिए मुझे सबसे ज़्यादा सताया जाता।


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मुझे वो जबरदस्ती चुदाई की फिल्म दिखाते उसमें लड़के लड़की नए नए तरीके से लन्ड को चूत में लेते थे। उसे देखकर मेरा भी मन हो गया के कोई मेरी मार ले।


जब वो सब सोए होते तो मैं बेचैन तड़पकर जागती रहती वो सब लड़के वॉशरूम जाकर मूठ मार के सो जाते थे मगर मुझे अपनी गांड़ की शांति चाहिए थी।


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मेरी किस्मत खराब थी के आसपास 4 5 लन्ड होने के बाद भी मैं कुछ नहीं कर सकती थी। उस रात मैं एक लड़के के लन्ड पर हाथ रखकर सो गई।


कुछ दिन तो गुज़र गए लेकिन वो लड़के रोज़ रात को चुदाई की वीडियो देखते और मूठ मार के सोते मेरा लन्ड खड़ा नहीं हो पाता था इसलिए मुझे मानसिक तनाव होने लगा।


मैने अपनी परेशानी अपने पुराने दोस्तों को बताई। उन लोगों ने मेरी मदद करी मुझे लड़की बनाने के लिए पैसे और जगह सब का इंतज़ाम करा। जिस दिन मेरा ऑपरेशन होना था उसी दिन उन लोगों ने अपनी चाल चल दी जब हम चलने को तैयार हुए ।


तो मेरे 3 दोस्त अभय, विशाल और राज वहीं रुके और राज बोला “तेरी मदद के बदले हमें भी कुछ चाहिए, जब तू लड़की बन जाएगा तो तेरी गांड़ और चूत पर हमारा भी हक होगा हम जब बोलेंगे तुझे चुदाई करनी पड़ेगी”।


उन कमीनो ने ऐसी सड़क पर मुझे लाकर छोड़ा था जहां मैं उनकी बात माने बिना नहीं रह सकती थी। मैने उनकी शर्त मानली फिर आखिरकार मैने अपने असली रूप को अपनाया और मैं रिषभ से रिधिमा बन गई।


डॉक्टर ने मुझे पूरा बदल दिया, मेरे सीने की जगह चूंची आ गई मेरे दोस्तो ने मुझे मेरी पसंद से नहीं बल्कि अपनी हवस का लिए लड़की बनाया था ।


मेरी चूंची उन्होंने 28 की कराई पेट 26 का हुआ और गांड़ 30 की कराई गई। मैं दिखने में 26 27 साल की कुंवारी लड़की लगने लगी और मेरे लन्ड की जगह चूत आ गई।


मेरे चूंचे गोल और सख्त थे उनकी वजह से मुझे थोड़ा भरी महसूस होता था। 


मेरे ऑपरेशन के बाद जब तीनों हरामी दोस्त मुझे देखने आए तो तबियत को किसी ने नहीं पूंछा उन्होंने सीधे मेरे चूंची पर हाथ रखा, वो मुझे सहला रहे थे मैं हॉस्पिटल के बिस्तर पे चद्दर के नीचे नंगी थी।


उन सालों ने अपने असली रंग दिखाए उन्होंने चद्दर के अंदर हाथ डाल दिए। वो मेरे निप्पल सहला रहे थे मेरे चूंचे दबा रहे थे मुझे समझ नहीं आ रहा था किसका हाथ कहा जा रह है कोई मेरी चूत सहला रहा था।


 कोई गांड़ को नीचे से दबा रह था उन्होंने मेरे होठ अमीषा पटेल जैसे कराए थे राज ने मौका पाकर मेरे होठों पर होठ रख दिए और मुझे चूमने लगा मेरी आंखों मैं आंसू थे ये खुशी के थे या दुख के मुझे समझ नहीं आया।


अचानक कमरे के दरवाज़े पर किसी की दस्तक हुई और उन तीनों ने मुझे छोड़ दिया। दरवाज़े पर डॉक्टर थे और हम सब अभी भी कमरे में थे डॉक्टर ने मुझसे बोला “बधाई हो रिधिमा आपकी नई ज़िंदगी के लिए।


मगर ध्यान रखना अगले 3 महीनों तक आप किसी से शारीरिक संबंध नहीं बना सकती क्यों के अभी आपका जिस्म अच्छे से दिल दिमाग से संपर्क बनाने में समय लगा।


मेरे दिल को तसल्ली मिल गई कम से कम 3 महीने मैं अपने जिस्म के साथ सुकून के पल बीता सकती थी और 3 महीने के बाद ये 3 दरिंदे मेरे जिस्म को नोचने वाले थे।


मुझे इन तीन महीनों में खुदको इतना कामयाब बनाना था के कोई मुझपर अपनी मर्ज़ी न चला सके। ये Antarvasna Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


अभय का एक घर दिल्ली में भी था तो हम सब वही रुकने चले गए। घर जाते ही तीनों ने मुझे दबोच लिया मुझे खड़े खड़े ही सब छू ने लगे डॉक्टर ने मेरी आवाज़ को भी लड़की की तरह पतला कर दिया था मेरे अंदर का मर्द मर चुका था अब बस रिधिमा थी। 


मैने सब को एक एक कर के धक्का दिया मुझे उनके छू ने से बहुत दर्द हो रहा था, मैने उन लोगों को समझाते हुए कहा “देखो डॉक्टर ने बोला है 3 महीने तक मैं नहीं चुद सकती थोड़ा रुको वरना सब खराब हो जाएगा।”


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 उन्होंने भी उस समय के लिए मेरी बात मानली मगर फिर भी मुझे उनकी मूठ मारनी पड़ी। रात में खाना खाकर जब हम सोने चले तो सब ने मिलकर मुझे नंगा करा।


 मैं 3 लड़कों के बीच में अकेली लड़की थी मेरा जिस्म बेहद कामुक हो गया था मेरे हाथ किसी फूल की तरह कोमल बन गए थे। तीनों लड़के नंगे हो कर बिस्तर पर लेट गए और मुझे भी नंगा होकर नाचने के लिए बोला।


पहली बार मैं नंगी होकर नाच रही थी और मुझे देखकर 3 लड़के अपने मोटे लन्ड सहला रहे थे मैं इस दुनिया में लड़की बनते ही रण्डी बन गई थी। उसके बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर आने के लिए कहा और उनके जिस्मों को चूमने बोला उनको तो शायद ख्याल भी नहीं था मैं उनका दोस्त रिषभ हूं।


मेरे हाथों का स्पर्श व जिस्म की महक सब कुछ लड़की का था वो सब भी मुझे रिधिमा ही बोल रहे थे। उस रात मैने एक एक कर के तीनों के लन्ड चूसे और मूठ मारी तीनों के लन्ड 7 से 8 इंच के थे।


वो मेरी कलाई जितने मोटे थे। उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुंह को छोड़ा जिससे मेरी नाक से भी उसके लन्ड का पानी आ गया खेर वो सो गए और मैं भी थककर गिर गई।


अगली सुबह जब तक मैं उठी तो सब जा चुके थे मेरे मोबाइल पर एक मैसेज था हम सब घर के लिए निकल गए है लेकिन तू अपना ख्याल रख हम 3 महीने के बाद आएंगे अब ok Darling, रिद्धि।


मैने सोच लिया के मुझे अपनी ज़िंदगी मिल गई मगर मैं वो नहीं हों दूंगी जो ये सब चाहते है मैने घर के बहा जाकर पहले नौकरी ढूंढी। लड़की हों के कारण मुझे नौकरी आसानी से मिल गई।


मैने एक कॉल सेंटर में काम शुरू कर दिया। कुछ दिनों में मैने अपने बॉस से दोस्ती करनी शुरू कर दी। मैं उसपर डोरे डालने लगी लिफ्ट में आते जाते मैं उससे चिपककर चलती थी।


मेरा बॉस 60 साल का बुड्ढा आदमी था जिसे पैसे और पहचान की कमी नहीं थी उसकी मदद से मैने अपने नई पहचान वाले कागज़ तैयार करा लिए और कानूनन पूरी तरह रिद्धि बन गई। एक रात हम उसकी कार में थे उसने बहुत पी रखी थी।


मैं और वो कार के पीछे की तरफ थे। उसने अपने ड्राइवर को जाने के लिए बोल दिया और कार में बस वो और मैं अकेले रह गई मैने एक टाइट शर्ट और पैंट पहनी थी। वो बार बार मेरी चूत के करीब की जगह सहला रहा था।


 मैने उसे बस पैसे के लिए रिझाया था लेकिन आज मुझे उसके साथ बैठकर डर लग रहा था। मैने उसको बोला के मुझे घर जाना है मगर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, वो मेरे हाथ को चूमने लगा मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था।


मैने उसे रोकने की कोशिश करी मगर वो मेरी नहीं सुन रहा था। वो धीरे धीरे मेरे करीब आया और अपने मजबूत हाथों से मेरे चेहरे को घुमाकर होठ चूमने लगा। मैं मचलने लगी वो भारी और तगड़ा आदमी था ।


मैं रोने लगी मगर उसे मुझपर कोई तरस नहीं आया। फिर उसने मेरे गाल पर एक ज़ोर का तमाचा मारा जिससे मेरी रूह कांप गई। उसने पूरी तरह से मुझे अपने नीचे दबा लिया। उसके बाद मेरी पेंट का बटन खोलकर चड्डी को एक तरफ कर दिया ।


उसने अपनी पेंट ढीली करी और मेरी टांगों को चीर कर मेरे ऊपर गिर गया अभी मेरा ऑपरेशन पूरे हुए 2 महीने ही गुज़रे थे मुझे बहुत दर्द हो रहा था मैने उसे मना करा मगर उसने अपने लन्ड को मेरी चूत पर लगाकर ज़ोर का धक्का मार दिया। 


मेरी तेज़ चीख निकली आअआआअअह! उसने मेरे होठों पर होठ रखकर मेरी चीख दबा दी। वो मेरे होठों को चूस रहा था और लन्ड को चूत में घुसा रह था। मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे।


मैं बेजान सी होकर उसके नीचे पड़ी थी उसने मेरे होठों को छोड़ा तो मेरी रोनी सी आहे निकल पड़ी! अआह ओहह्ह्ह्ह आगाह! मत करो दर्द हो रहा है अआआह! अआह प्लीज़ मत करो।


मगर वो नहीं रुका उसका लन्ड 5 इंच का था लेकिन मोटा था वो मुझे चोद रहा था और मैं चुद रही थी। पूरी कार आगाह ओह आअआअह नहीं हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह नहीं आअआअह! की आवाज़ से लार्स रही थी। मुझे पहली बार एक लड़की होने के नुकसान पता चले।


उस जालिम ने मेरे कपड़े फाड़ डाले थे और अपने भारी जिस्म का फायदा लेकर वो मुझे चोद रहा था। दर्द की वजह से मेरी जान निकलती जा रही थी।


 उसके मैं बस बे सुध सी आगाह ओह आअआअह, नहीं हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह नहीं आगाह ओह आअआअह नहीं हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह ओह! की आवाज़ निकल रही थी।


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कुछ देर चुदाई के बाद उसका गर्म गर्म लन्ड का रस मेरी ताज़ी ताज़ी चूत में निकलता हुआ मुझे महसूस हुआ। मुझे पहली बार इसी गर्माहट महसूस हुई मुझे ये चुदाई पसंद नहीं आई लेकिन लन्ड के पानी की गर्मी ने एक अजीब सा आराम दिया था।


उसके बाद मेरा बॉस उठा और कार चलाने लगा, मैं पिछली सीट पर नंगी पड़ी थी मुझे कुछ नहीं था हम कहा जा रहे है। थोड़ी देर में गाड़ी एक घर के बाहर रुकी और बॉस वापस पूछे आया उसने सहारा देकर मुझे नंगी ही सहारे से उठाकर घर में ले गया।


वहां घर में लेजाकर उसने मुझे वही सोफे पर गिरा दिया। मेरी हालत अध मरी सी हो रही थी मैने उससे मिन्नत करी के मुझसे नहीं हो पाएगा मुझे छोड़ दो। वो साला बॉस हंसते हुए बोला


“अरे बेबी! पहली बार में ऐसा ही लगता है अब नहीं होगा दर्द अब तो तू खुल चुकी है।” ये Virgin Girl Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


इतना कहकर वो मेरे ऊपर लेट गया और मेरे होठ चूमने लगा, इस बार वो आराम आराम से मेरे होठ पी रहा था तो मुझे भी परेशानी नहीं हुई। वो धीरे धीरे मेरे पूरे जिस्म को सहला रहा था।


 अब मैं भी थोड़ी बहकने लगी थी। वो मेरे गले को चूम रहा था मेरी चूत अब उसके लन्ड पर घिस रही थी। मुझे थोड़ा अच्छा लग रहा था धीरे धीरे मेरे हाथ भी उनके जिस्म पर चलने लगी मैने भी सोच लिया अब जब करना ही है तो मजे ही ले लिए जाए।


फिर बॉस ने अपना लन्ड दोबारा मेरी चूत के दरवाज़े पर रखा वो मेरे ऊपर लेट कर चूसने लगा अआह! मेरी चुदासी भरी पहली आह निकली। वो मेरे निप्पल को चूसने लगे और एक झटके से लन्ड को मेरी चूत में उतार दिए इस बार दर्द कम हुआ।


अब मैं खुलकर आअआअह, ओह हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह और तेज़ आगाह ओह आअआअह हम्ममम हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह ओह! ओह हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह और तेज़ आगाह ओह आअआअह हम्ममम हम्ममम उन्ह्ह्ह्ह ओह! की आवाज़ कर रही थी।


वो अपने होठ मेरे होठों के बिल्कुल करीब लाकर मुझे चोद ने लगे। हर धक्के पर हमारे होठ टकराते हमारी सांसे एक साथ भाग दौर कर रही थी मैं दूसरी चुदाई की वजह से बुरी तरह हाफ रही थी।


करीब पंद्रह मिनट बाद बॉस और मेरा पानी एक साथ निकल गया। मेरे मुंह से एक बहुत सुकून भरी आअआअह! निकली और मैं चारों खाने चित हो गई।


इस तरह मेरी मुझे अपने आपको हासिल करने की कीमत चुकानी पड़ी और मैने अपनी असली पहचान को पा लिया! मुझे कमेंट कर के ज़रूर बताना के मेरी कहानी आप लोगों को कैसी लगी।

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