पॉर्न देखकर बहन ने लिया भाई का लंड!

Antarvasna : प्रिया बहन ने Porn देखते हुए चूसा भाई का लंड! चटवाई चूत! फिर First Time चुदवाकर ही अंदर ले लिया माल! अब भाई को मदारचोद बनाकर Threesome की प्लानिंग!


मैं आर्यन शर्मा, उम्र 26 साल, एक तंदरुस्त जवान मर्द जिसका 8 इंच का मोटा लंड हमेशा चूत की तलाश में रहता है। हम एक पंजाबी फैमिली हैं और पानीपत में रहते हैं। हमारे घर में कुल पांच सदस्य हैं - मैं, मम्मी अंजलि, पापा विनोद, और दो बहनें।


मेरी बड़ी बहन नेहा की शादी दो साल पहले हो चुकी है। वो अपने पति के साथ लंदन में रहती है। 


छोटी बहन प्रिया 22 साल की है, बी.कॉम की पढ़ाई कर रही है और एक कॉल सेंटर में जॉब भी करती है। पापा आर्मी से रिटायर्ड होकर दिल्ली के रोहिणी में अपना बिजनेस चलाते हैं। वहीं रहते हैं और सिर्फ छुट्टियों पर आते हैं।


मम्मी अंजलि का फिगर उम्र से बिल्कुल अलग है। 45 की उम्र में भी वो 35 की लगती हैं। गोरा रंग, बड़े-बड़े दूध जैसे बूब्स, और कमर से नीचे फैली हुई गोल गांड। 


जब वो साड़ी पहनकर चलती हैं तो उनकी गांड का जलवा देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।


प्रिया भी कम नहीं है। 22 साल की जवानी में उसका बदन पूरी तरह से तराशा हुआ है। कॉलेज में लड़के उसके पीछे घूमते हैं। उसके बूब्स मम्मी से थोड़े छोटे हैं लेकिन उभार पूरा है। 


गांड एकदम उठी हुई और चूत... अह्ह्ह... सोचकर ही लंड तन जाता है।


ये सब शुरू हुआ तीन महीने पहले। एक रात मैं अपने रूम में पॉर्न देख रहा था। अचानक प्रिया दरवाजा खोलकर अंदर आ गई। मैंने हड़बड़ी में लैपटॉप बंद किया लेकिन वो देख चुकी थी।


"क्या देख रहे हो भैया?" प्रिया ने शरारती मुस्कान के साथ पूछा।


"कुछ नहीं... बस मूवी..." मैंने घबराते हुए कहा।


"झूठ मत बोलो। मुझे पता है तुम क्या देख रहे थे। वो ब्लू फिल्म वाली साउंड तो मुझे बाहर से ही सुनाई दे रही थी," वो हंसते हुए बोली।


मेरी हालत खराब हो रही थी। पसीना आ रहा था। लेकिन प्रिया का रवैया अजीब था। वो नाराज नहीं लग रही थी। बल्कि उसकी आंखों में कोई और ही चमक थी।


"डरो मत भैया। मैं मम्मी-पापा को कुछ नहीं बताऊंगी। बल्कि..." वो रुकी और मेरे पास आकर बैठ गई।


"बल्की क्या?" मैंने पूछा।


"बल्कि मुझे भी देखने दो। मैंने आज तक पूरी पॉर्न मूवी नहीं देखी," वो शरमा कर बोली।


मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं समझ नहीं पा रहा था कि यह सपना है या हकीकत। मेरी अपनी बहन मेरे साथ पॉर्न देखना चाहती थी!


मैंने लैपटॉप खोला। एक अमेरिकन पॉर्न चल रही थी। जिसमें एक लड़की को दो लड़के चोद रहे थे। प्रिया घूर-घूर कर स्क्रीन देख रही थी। उसकी सांसें तेज हो रही थीं।


"भैया... ये सच में ऐसे ही होता है?" उसने धीमी आवाज में पूछा।


"हां... बस फिल्म में थोड़ा ड्रामा ज्यादा होता है," मैंने कहा।


"तुमने कभी किया है?" उसने पलटकर पूछा।


मैं चौंक गया। यह सवाल की मैंने उम्मीद नहीं की थी।


"मतलब...?" मैंने टालने की कोशिश की।


"अरे बताओ ना। किसी लड़की के साथ सोए हो?" वो जोर देकर पूछ रही थी।


"हां... कॉलेज में एक गर्लफ्रेंड थी। दो-तीन बार..." मैंने हकलाते हुए कहा।


प्रिया चुप हो गई। वो फिर से स्क्रीन देखने लगी। लेकिन अब उसकी बॉडी लैंग्वेज बदल गई थी। वो थोड़ा क्लोज आ गई थी। उसका हाथ मेरे हाथ से टच हो रहा था।


"भैया... एक बात पूछूं?" उसने फिर से कहा।


"हां पूछो।"


"लड़की को दर्द नहीं होता? जब लंड अंदर जाता है..." वो शर्माते हुए बोली।


"पहली बार थोड़ा होता है। फिर तो मजा आता है," मैंने समझाया।


"तुम्हारा कितना बड़ा है?" उसने अचानक पूछा।


मैं हक्का-बक्का रह गया। मेरी बहन मुझसे मेरे लंड के बारे में पूछ रही थी!


"प्रिया... यह..." मैंने कहना चाहा।


"अरे बताओ ना। मैंने आज तक किसी का लंड नहीं देखा। बस अपने बॉयफ्रेंड के ऊपर से ही फील किया है," वो बोली।


मेरा सिर चकराने लगा। उसका बॉयफ्रेंड! और वो उसके लंड को फील कर चुकी थी!


"तुम्हारा बॉयफ्रेंड है?" मैंने पूछा।


"हां... रोहन। लेकिन वो सिर्फ ऊपर से ही सहलाता है। अंदर नहीं डालता। डरता है," वो मुंह बनाते हुए बोली।


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मैं समझ गया। वो अपनी चूत की आग बुझाना चाहती थी। और मैं उसके सामने बैठा था।


"दिखाओगे?" उसने आंखें झुकाते हुए कहा।


मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। लेकिन अब वो पैंट फाड़कर बाहर आने को तरस रहा था। आप यह Desi Antarvasna Story GaramKahani.com पर पढ़ रहे हैं।


"प्रिया... यह गलत है। हम भाई-बहन हैं," मैंने विरोध किया। लेकिन मेरा विरोध बहुत कमजोर था।


"कोई नहीं जानेगा भैया। बस दिखाओ तो... मुझे जानना है कि असली लंड कैसा दिखता है। रोहन का तो बहुत छोटा लगता है," वो बोली।


मैंने हिम्मत की। मैंने अपनी पैंट की चेन खोली। अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड का उभार साफ दिख रहा था।


"वाह... कितना बड़ा लग रहा है," प्रिया ने आश्चर्य से कहा।


"बाहर निकालो ना," उसने कहा।


मैंने अंडरवियर नीचे किया। मेरा 8 इंच का मोटा लंड हवा में तनकर खड़ा था। प्रिया की आंखें बड़ी-बड़ी हो गईं।


"ये तो रोहन से दोगुना है!" वो चिल्लाते हुए बोली।


"चुप रहो! मम्मी सुन लेंगी," मैंने उसका मुंह दबाते हुए कहा।


हम दोनों चुप हो गए। कान खड़े करके सुना। कोई आवाज नहीं थी। मम्मी अपने रूम में सो रही थीं।


"सॉरी भैया... लेकिन ये तो बहुत मस्त है," प्रिया ने धीमी आवाज में कहा।


वो आगे झुकी। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया। उसके हाथ की गर्मी मेरे लंड पर महसूस हुई। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।


"कितना गरम है," प्रिया बोली।


वो उसे सहलाने लगी। ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर। मेरा लंड उसके हाथ में फनफना रहा था।


"प्रिया... रुको..." मैंने कहा।


"क्यों? अच्छा नहीं लग रहा?" उसने पूछा।


"बहुत अच्छा लग रहा है। लेकिन यह गलत है," मैंने कहा।


"गलत तो कुछ भी नहीं है भैया। जब मजा दोनों को आ रहा है तो..." वो बोली और झुककर मेरे लंड पर एक किस कर दिया।


उसके होंठों का स्पर्श मेरे लंड पर हुआ। मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं। यह सपने जैसा था। मेरी बहन मेरे लंड को चूम रही थी।


"अच्छा लग रहा है," प्रिया ने कहा।


वो फिर से किस करने लगी। इस बार उसने जीभ भी निकाली। मेरे लंड के सुपाड़े पर जीभ फिराई।


"उम्म्म..." मैंने हल्की सी आवाज निकाली।


"शांत रहो भैया। मम्मी जाग जाएंगी," प्रिया ने कहा।


वो मेरे लंड को चूसने लगी। धीरे-धीरे। पहले सिर्फ सुपाड़ा। फिर थोड़ा और अंदर। उसका मुंह गरम था। नम था। और बहुत तंग था।


"आह्ह्ह... प्रिया..." मैंने फुसफुसाते हुए कहा।


वो चूसती रही। उसने एक हाथ से मेरे लंड की जड़ को पकड़ा। दूसरे हाथ से मेरे अंडकोष सहलाने लगी।


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मैंने उसके सिर को पकड़ लिया। उसके बालों में हाथ फिराया। वो और तेज चूसने लगी।


"उम्म्म... चूस ले रंडी... अपने भाई का लंड चूस..." मैंने गंदी बातें करते हुए कहा।


प्रिया और उत्तेजित हो गई। वो मेरे लंड को गले तक लेने की कोशिश कर रही थी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। लेकिन वो रुकी नहीं।


मैंने उसे उठाया। उसे अपनी गोद में बिठाया। मेरा लंड उसकी जांघों के बीच में था। वो सिर्फ एक नाइटी पहने हुए थी। नीचे कोई पैंटी नहीं थी।


"तुम पैंटी नहीं पहनती?" मैंने पूछा।


"नहीं... सोते वक्त नहीं पहनती। अच्छा लगता है हवा लगना," वो शरमा कर बोली।


मैंने उसकी नाइटी ऊपर उठाई। उसकी चूत सामने थी। बिल्कुल साफ शेव की हुई। गुलाबी। और गीली।


"कितनी गीली है तुम्हारी चूत," मैंने कहा।


"तुम्हारे लंड को देखकर हो गई," वो बोली।


मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी टांगें फैला दीं। मैं उसकी चूत के पास गया। उसकी खुशबू मेरे दिमाग में घूम गई। एक अजीब सी मदहोशी सी छा गई।


मैंने उसकी चूत पर किस किया। वो कांप उठी।


"भैया... क्या कर रहे हो?" उसने कहा।


"चाट रहा हूं तुम्हारी चूत को। जैसे तुम मेरा लंड चूस रही थी," मैंने कहा।


मैंने उसकी चूत की फांकों को चाटना शुरू किया। ऊपर से नीचे। नीचे से ऊपर। उसकी चूत का रस मीठा था। नमकीन था। और बहुत गरम था।


"आह्ह्ह... उम्म्म... भैया..." प्रिया कराहने लगी।


वो अपनी कमर उठा-उठा कर मेरे मुंह पर रगड़ने लगी। मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाल दी। उसकी दीवारें मेरी जीभ को चूस रही थीं।


"ओह्ह्ह... फाड़ दो मेरी चूत... चाटो... और चाटो..." प्रिया चीखने लगी थी।


मैंने उसका मुंह दबा दिया। मम्मी के जागने का डर था। लेकिन प्रिया बेकाबू हो रही थी। वो झड़ने वाली थी।


मैंने तेजी से चाटना जारी रखा। उसकी चूत फड़क रही थी। उसकी जांघें कांप रही थीं। और फिर...


"आह्ह्ह... आ गया... झड़ गई मैं..." वो मेरे मुंह पर ही झड़ गई।


उसका पानी मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया। वो थक कर बिस्तर पर गिर पड़ी।


मैंने प्रिया का सारा रस पी लिया। वो थकी हुई सांसें ले रही थी। उसकी चूत अभी भी फड़क रही थी। मैं उसके ऊपर लेट गया। मेरा लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा था और उसकी चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था।


"प्रिया... अब और नहीं रुक सकता," मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा।


वो कुछ नहीं बोली। बस अपनी आंखें बंद करके सिर हिला दिया। यह हरी झंडी थी।


मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा। वो गीली थी। बहुत गीली। मेरा सुपाड़ा अंदर घुस गया।


"आह्ह्ह... धीरे भैया... पहली बार है..." प्रिया ने दर्द से चीखते हुए कहा।


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मैंने रुक गया। उसके बूब्स को सहलाने लगा। उसके निप्प्स को मसलने लगा। वो थोड़ा शांत हुई।


"अब?" मैंने पूछा।


"धीरे-धीरे करो..." वो बोली।


मैंने धक्का लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। प्रिया ने अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए।


"दर्द हो रहा है?" मैंने पूछा।


"हां... लेकिन चलो..." वो बोली।


मैंने एक और जोरदार धक्का लगाया। पूरा लंड अंदर समा गया। प्रिया के मुंह से एक जोरदार चीख निकली। लेकिन इस बार मैं रुका नहीं। मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और धक्के लगाने शुरू कर दिए।


"उम्म्म... आह्ह्ह... भैया... धीरे..." वो कराह रही थी।


लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। तीन महीने से मैं किसी चूत में अपना लंड नहीं डाला था। और अब मेरी बहन की चूत मेरे सामने थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी।


"तड़प... तड़प... तड़प..." बिस्तर की चरपराहट की आवाज आ रही थी।


प्रिया की चूत बहुत तंग थी। मेरे लंड को कस रही थी। मैं जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर लग रहा था। चप-चप की आवाजें हो रही थीं।


"कैसा लग रहा है तुम्हें अपने भाई का लंड?" मैंने गंदी बातें करते हुए पूछा।


"बहुत मस्त है... और तेज... चोदो मुझे... अपनी बहन को रंडी बना दो..." प्रिया भी अब मजे लेने लगी थी।


वो अपनी कमर उठा-ठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। हमारी आवाजें बढ़ रही थीं। मुझे डर था कि कहीं मम्मी न जाग जाएं।


"चुप रहो... मम्मी सुन लेंगी," मैंने कहा।


"तो सुनने दो... आज तो मुझे पूरा मजा लेने दो..." प्रिया बोली।


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मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं। और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। मेरा लंड उसकी चूत की गहराई तक जा रहा था। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को चूस रही थीं।


"आह्ह्ह... भैया... मैं फिर से झड़ने वाली हूं..." प्रिया ने कहा।


"रुको... मैं भी झड़ने वाला हूं... एक साथ..." मैंने कहा।


मैंने स्पीड और बढ़ा दी। अब मैं पूरी तरह से जानवर बन चुका था। मेरी बहन को चोदने का मजा ही कुछ और था। यह गुनाह था। और गुनाह में मजा हमेशा ज्यादा आता है।


"आह्ह्ह... आ गया... झड़ गई..." प्रिया ने चीखते हुए कहा।


उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। उसकी पिचकारी मेरे लंड पर पड़ी। और वो ही मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया।


"मैं भी आया... ले अपने भाई का माल..." मैंने कहा और अपना सारा वीर्य उसकी चूत में भर दिया।


गरम-गरम माल उसकी चूत में भर रहा था। मैंने पूरा लंड अंदर डालकर झड़ना जारी रखा। छह-सात झटके लगे। और फिर मैं थककर उसके ऊपर गिर पड़ा।


हम दोनों सांसें ले रहे थे। पसीने से लथपथ थे। प्रिया ने मुझे गले लगा लिया।


"भैया... यह तो बहुत मस्त था," वो बोली।


"हां... तुम भी कम नहीं हो," मैंने कहा।


"अब रोज करेंगे?" उसने पूछा।


"रोज? तुम पागल हो?" मैंने कहा।


"क्यों? मम्मी को पता नहीं चलेगा। वो रात में गहरी नींद में सोती हैं। और पापा तो दिल्ली में हैं। हमारे पास पूरी रात है," वो बोली।


मैंने सोचा। यह सही मौका था। घर में कोई नहीं था। सिर्फ मम्मी थीं जो अपने रूम में सोती थीं।


"ठीक है। लेकिन बहुत सावधानी से," मैंने कहा।


उस रात के बाद से हमारा सिलसिला शुरू हो गया। रोज रात को मम्मी के सोने के बाद प्रिया मेरे रूम में आ जाती। कभी वो मेरा लंड चूसती, कभी मैं उसकी चूत चाटता। और फिर हम चोदने लगते।


तीन महीने हो गए थे। हम दोनों एक-दूसरे की हर चाहत जान चुके थे। प्रिया ने मुझे बताया कि उसने दो साल पहले अपने बॉयफ्रेंड से अपनी सील तुड़वाई थी। लेकिन वो उसे छोड़कर चला गया था।


एक दिन हम पॉर्न देख रहे थे। एक मूवी में एक लड़की को उसके भाई और उसके दोस्त ने एक साथ चोदा था।


"भैया... क्या तुमने कभी दो लड़कियों को एक साथ चोदा है?" प्रिया ने पूछा।


"नहीं... लेकिन करना चाहूंगा। एक साथ दो औरतों को चोदना... अलग-अलग तरीकों से... यह मेरा सपना है," मैंने कहा।


"और घर में? किसी को पसंद करते हो?" प्रिया ने शरारती अंदाज में पूछा।


मैं समझ गया। वो मम्मी की बात कर रही थी।


"क्या मतलब?" मैंने टालने की कोशिश की। आप यह Desi Antarvasna Story GaramKahani.com पर पढ़ रहे हैं।


"अरे बताओ ना। मम्मी को देखते हो ना कभी-कभी?" वो बोली।


मैं चौंक गया। क्या वो जानती थी?


"तुम्हें कैसे पता?" मैंने पूछा।


"मैंने देखा है तुम्हें। जब मम्मी नहाती हैं तो तुम दरवाजे के पास खड़े होते हो। और तुम्हारा लंड तन जाता है," वो हंसते हुए बोली।


मेरी हालत खराब हो गई। मेरी बहन को सब पता था।


"प्रिया... मैं..." मैंने कहना चाहा।


"अरे डरो मत। मैं मम्मी को कुछ नहीं बताऊंगी। बल्कि... मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं," वो बोली।


"क्या मतलब?" मैंने पूछा।


"मतलब यह कि अगर तुम चाहो तो मम्मी को भी चोद सकते हो," वो शांति से बोली।


मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। क्या सुन रहा था मैं?


"तुम पागल हो?" मैंने कहा।


"नहीं। मैं सच कह रही हूं। मम्मी और मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है। हम एक-दूसरे के सारे राज जानते हैं। और मम्मी भी... वो भी तो औरत हैं ना। उन्हें भी चाहिए," वो बोली।


"लेकिन मम्मी... वो तो..." मैंने कहा।


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"अरे भैया, पापा महीने में एक बार आते हैं। और वो भी सिर्फ दो-तीन दिन। वो सेक्स में तो इंटरेस्ट रखते हैं लेकिन मम्मी के साथ नहीं। शायद बाहर किसी और से करते होंगे।


मम्मी की उम्र 45 साल है। वो भी तो चूत में लंड चाहती होंगी ना," प्रिया ने समझाया।


"और मम्मी मानेंगी?" मैंने पूछा।


"मेरी जिम्मेदारी। लेकिन तुम्हें भी मेरी एक शर्त माननी होगी," वो बोली।


"क्या?"


"मुझे भी एक नया लंड चाहिए। तुम्हारे अलावा। कोई और मर्द जिससे मैं चुदवा सकूं," वो बोली।


मैंने सोचा। यह फेयर डील लग रही थी।


"ठीक है। मैं कुछ करता हूं," मैंने कहा।


"तो फिर तैयार हो जाओ अपनी मम्मी को चोदने के लिए। मैं बात करती हूं," प्रिया ने कहा।


अगले दिन प्रिया मम्मी के साथ उनके रूम में गई। मैं बाहर हॉल में बैठा था। मेरी धड़कन तेज हो रही थी। क्या होगा? क्या मम्मी मानेंगी?


आधे घंटे बाद प्रिया बाहर आई। उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी। वो मेरे पास आकर बैठ गई।


"क्या हुआ? मम्मी ने क्या कहा?" मैंने बेसब्री से पूछा।


प्रिया ने मेरी तरफ देखा। उसकी आंखों में शरारत थी।


"मम्मी ने कुछ नहीं कहा... बस सुनती रहीं। लेकिन मैंने उनकी आंखों में कुछ देखा भैया," वो धीमी आवाज में बोली।


"क्या देखा?" मैंने पूछा।


"वो राजी हैं। लेकिन वो खुद कुछ नहीं कहेंगी। उन्हें लगता है कि यह गलत है। लेकिन मैं जानती हूं... वो अंदर-अंदर चाहती हैं," प्रिया ने कहा।


"तो अब क्या करें?" मैंने पूछा।


"अब मेरी प्लानिंग है। धीरे-धीरे करेंगे। पहले उनका मूड बनाएंगे। उन्हें यह एहसास दिलाएंगे कि वो अभी भी जवान हैं। कि उन्हें भी मजे लेने का हक है," प्रिया बोली।


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"कैसे?" मैंने पूछा।


"कल से शुरू करेंगे। तुम उनके सामने थोड़ा खुले रहना। शर्टलेस घूमना। नहाते वक्त दरवाजा थोड़ा खुला रखना। और मैं... मैं उनसे बात करूंगी। उन्हें समझाऊंगी," प्रिया ने कहा।


मैं समझ नहीं पा रहा था कि यह सब कहां जाएगा। लेकिन मेरे मन में उम्मीद की एक किरण जगी थी। क्या सच में मैं अपनी मम्मी को...


"भैया, एक बात और," प्रिया ने कहा।


"क्या?"


"अगर यह सब हुआ... तो यह हम तीनों के बीच का राज रहेगा। कोई बाहर वाला नहीं जानेगा।


और मम्मी... वो तुम्हारी पत्नी नहीं बनेंगी। वो तुम्हारी मम्मी ही रहेंगी। लेकिन रात में... रात में वो तुम्हारी रखैल बन जाएंगी," प्रिया ने कान में फुसफुसाते हुए कहा।


मेरा लंड पैंट में फनफना उठा।


"और अगर मम्मी राजी हुईं... तो हम तीनों एक साथ सोएंगे। एक ही बिस्तर पर। तुम एक रात मम्मी को चोदोगे... दूसरी रात मुझे। और कभी-कभी... दोनों को एक साथ," प्रिया ने आगे कहा।


मैंने उसे गले लगा लिया। यह सोचकर ही मेरा दिमाग घूम रहा था।


"अब जाओ सो जाओ। कल से शुरू होगा असली खेल। मम्मी को पटाने का खेल। उन्हें अपने बेटे के लंड का दीवाना बनाने का खेल," प्रिया ने कहा।


वो उठकर अपने कमरे में चली गई। मैं अकेले सोफे पर बैठा रहा। मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल था - मम्मी। उनकी गोरी चूत। उनके बड़े बूब्स। उनकी गोल गांड।


क्या वो सच में राजी हो जाएंगी? क्या मैं अपनी माँ को चोद पाऊंगा?


रात भर मैं करवटें बदलता रहा। नींद नहीं आ रही थी। सुबह होते ही नया दिन शुरू होगा। और उस दिन से शुरू होगी मम्मी को पटाने की यात्रा।


क्या प्रिया का प्लान काम करेगा? क्या मम्मी अपने बेटे के लंड के लिए अपनी चूत देंगी?


जानने के लिए पढ़ें अगला भाग - "बहन ने बनाया मदारचोद!"

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