पति के सामने भाई ने फाड़ी मेरी चूत!
Antarvasna Cheating Wife : होटल में भाई विकाश ने कंबल के नीचे सहलाईं टाँगें! फाड़ी पैंटी और मारे चूत पर थप्पड़! बहनचोद ने कर दी चुत गीली! चुदाई के लिए तड़पाया!
दोस्तों, जैसे कि आप सबने पारुल गोवा की कहानी पारुल की गोवा ट्रिप 1 और भाग 2 को बहुत प्यार दिया था। उसी से उत्साहित होकर आज मैं आपके लिए पारुल का उसके भाई के साथ सेक्स की कहानी लेकर आया हूँ। ये स्टोरी भी मुझे कविता भाभी (मेरी मकान मालकिन) ने बताई है।
आगे की कहानी पारुल के शब्दों में:-
इस वेट पुसी XXX कहानी में मैं आपको बताऊँगी कि मेरे भाई ने कैसे मुझे असली हनीमून का अहसास करवाया।
दोस्तों, मेरा एक कजिन भाई विकाश है। जो मेरे पति का मेरी शादी के बाद दोस्त भी बन गया। अब दोनों का साथ में सारनाथ में रेस्टोरेंट है। लंका रोड वाले रेस्टोरेंट पर मेरे पति रहते हैं और सारनाथ वाले रेस्टोरेंट पर विकाश रहता है।
विकास अभी कुँवारा है पर बहुत ही हरामी है। वो कई लड़कियों के साथ सुहागरात मना चुका है। मेरे पति ने बताया था कि इससे ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसकी आदतें अच्छी नहीं हैं।
जबकि मैं विकाश को बचपन से जान रही थी। लेकिन अपने पति को एहसास नहीं होने दिया कि मुझे उसके बारे में सब पता है।
पिछले साल 2025 में मेरे पति का प्रयागराज में एक बिजनेस ट्रिप था।
तो मैंने कहा कि मैं भी घर बैठी-बैठी बोर हो गई हूँ। मैं भी साथ चलती हूँ। उन्होंने कहा, “अच्छा ठीक है। तुम पैकिंग कर लो। जब जा ही रहे हैं तो दो दिन घूम भी लेंगे। माइंड फ्रेश हो जाएगा।”
मैं उत्साहित हो गई कि आखिरकार कहीं बाहर घूमने जा रहे हैं। मैंने जल्दी से पैकिंग शुरू कर दी।
अगले दिन हम करीब एक बजे दोपहर में प्रयागराज के होटल में पहुँच गए। जहाँ हम लोगों का रूम बुक था। मेरे पति रिसेप्शन पर जिस वक्त फॉर्म भर रहे थे, मैं जाकर लॉबी में एक सोफे पर बैठ गई।
तब मैंने डीप नेक ब्लाउज पहन रखी थी। मैंने नोटिस किया कि सामने एक मोटा आदमी बैठा था। जो मेरी गोरी छाती की तरफ घूरे जा रहा था। मेरे खुराफाती दिमाग में एक आइडिया आया।
मैंने सोचा इतने टाइम से कोई फन भी नहीं किया है तो क्यों न थोड़ी मस्ती की जाए। वैसे भी मैं यहाँ नई थी। किसी को क्या पता चलेगा कि कौन है।
मैं जानबूझकर थोड़ा और टेढ़ी होकर बैठ गई। अपनी एक टाँग दूसरी के ऊपर रख कर।
मेरी ऐसी स्थिति में उस आदमी को अब मेरी गोरी छाती के साथ-साथ मेरी गोरी मोटी गांड के उभार भी साफ-साफ दिखाई देने लगे। मुझे दूसरों को टीज करना बहुत अच्छा लगता है।
वो मोटा आदमी तो मानो खुशी से पागल ही हो गया। वो अपनी पैंट के ऊपर से ही अपना रिटायर्ड लंड ठीक करने लगा। मानो उसे लंड खड़ा होने का अहसास हो गया था।
इतनी देर में मेरे पति ने मुझे इशारा कर दिया कि चलो रूम की चाबी मिल गई है। मैं वहाँ से उठकर चल दी।
वो मोटा आदमी जब तक मैं उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गई, पीछे से मेरी मोटी मटकती हुई गांड को निहारता रहा।
हम लोग थोड़ा आराम करने के बाद चार बजे के आसपास बाहर घूमने आए। वहाँ जाते ही मैंने चेंज कर लिया था। मेरे पति फोन पर बात कर रहे थे। फोन बंद करते ही वो कुछ परेशान से हो गए।
मैंने पूछ लिया कि किसका फोन था और परेशान क्यों लग रहे हो? वो बोले, “भैन का लंड। यहाँ भी एक मुसीबत आ ही गई है।” मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि इतना बड़ा क्या हो गया।
अगर मीटिंग कैंसिल भी हुई होती तो कभी उन्हें ऐसे नहीं देखा था।
मैंने कहा, “चलो आप रिलैक्स हो जाओ। आराम से बताओ क्या हुआ है?” वो बोले, “जिस क्लाइंट से मीटिंग है वो मादरचोद विकास का क्लाइंट है।”
मैंने कहा, “तो इसमें इतनी परेशानी की क्या बात हो गई?” मेरे पति ने बताया, “वो बड़ा हरामी लड़का है। बहुत उल्टा-सीधा बोलता है। लड़कियों की इज्जत नहीं करता। और तो और… तुम्हारे बारे में भी कह रहा था।”
ये कहते ही वो अचानक से चुप हो गए। मैं हैरान थी कि मेरे बारे में कैसे। मैं तो उसकी बहन हूँ। मैंने फिर से पूछा, “क्या… मेरे बारे में क्या?” वो बोले, “कुछ नहीं, छोड़ो ऐसे ही।”
मैंने कहा, “नहीं मुझे बताओ क्या बात है?” उन्होंने बताया कि उन्हें कई दूसरे लोगों ने बताया है कि ये विकास बाकी सब लड़कियों की तरह तुम्हारे बारे में भी अनाप-शनाप बोलता रहता है।
मैंने आश्चर्य से पूछा, “मेरे बारे में कैसे?” फिर एक पल रुककर मैंने दोबारा कहा, “अच्छा क्या बोलता है मेरे बारे में?” “जाने दो, तुम्हें क्या करना है?” मेरे पति धीमी आवाज में बोले।
मैंने कहा, “मुझे क्यों नहीं करना… मेरे बारे में कोई कुछ बोले, मुझे पता तो होना चाहिए?” “रमेश बता रहा था कि किसी पार्टी में सब लोगों के सामने बोल रहा था कि गांड तो पंकज की वाइफ की है बस… खूब मजे देती होगी पंकज को…”
एकदम से उत्तेजित होकर मेरे पति बोले और चुप हो गए। मैं भी एक पल के लिए सुन्न हो गई। मैंने पानी का गिलास पंकज को दिया और उनकी पीठ को सहलाया।
उन्हें शांत होने को कहा, “आप पानी पियो… ऐसे तो बहुत लोग कुछ भी बोलते हैं। सबकी बातों को इतना सीरियसली लोगे तो कैसे चलेगा?”
वो अभी भी खराब मूड में थे। मैंने उनका मूड चेंज करते हुए कहा, “उल्टा तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारी बीवी की गांड इतनी मस्त है कि मेरा भाई भी मेरी गांड का इतना दीवाना है।”
मेरी इस बात पर मेरे पति की हँसी निकल गई और हम दोनों इस बात पर हँसने लगे। वो हँसते हुए बोले, “यार, तुम भी कभी-कभी बड़ी हरामीपने की बातें करती हो।”
मैं मन ही मन सोच रही थी कि डार्लिंग मैं तो शुरू से ही हरामन हूँ। वो बोले, “चलो फिर भी तुम ख्याल रखना… उससे थोड़ी दूरी बनाकर ही रखना।” मैं हम्म कहकर चुप हो गई।
मेरे पति भी इतना कहकर खड़े हो गए और मुझसे बोले, “अच्छा तुम यहीं रहना… मैं मिलकर आता हूँ।”
मैंने देखा कि दूसरी तरफ जो रेस्टोरेंट बना हुआ था, मेरा भाई विकाश बैठा था। और उसके साथ वही मोटा आदमी था जो होटल की लॉबी में मेरी गोरी टाँगें और मेरी मोटी गांड को ताड़ रहा था। मेरे पति भी उसी टेबल पर जाकर बैठ गए।
थोड़ी देर बात करने के बाद मेरे पति और वो मोटा आदमी वहाँ से उठकर कहीं जाने लगे। मेरे पति ने दूर से मुझे इशारे से समझाया कि मैं यहीं पर प्रतीक्षा करूँ। वो अभी थोड़ी देर में आ जाएँगे।
इतने में मैंने देखा विकाश बड़ी हरामी नजरों से मेरे गोरे व मोटे मम्मे ताड़ रहा था।
मैंने एक पल के लिए नजर नीचे कर ली और दोबारा तिरछी नजर से देखने की कोशिश की तो वो चलते हुए मेरी तरफ ही आ रहा था। उसके चेहरे पर बहुत हरामी स्माइल थी।
उसे अपनी ओर आता देखकर मेरी तो गांड ही फट गई। मैं एकदम से घूम गई और मेरे न चाहते हुए अब उसका ध्यान मेरे मोटे मम्मों से हटकर मेरी मोटी गांड पर चला गया।
उसी वजह से वो हरामी विकाश मेरे पीछे से गुजरते हुए कमेंट पास करके गया, “बहना की गांड तो और भी मस्त लग रही है।”
ये सुनकर मेरे पूरे बदन में जैसे करंट दौड़ गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं गुस्सा करूँ या खुश हो जाऊँ। मेरा कजिन भाई मेरे बारे में ऐसा बोल रहा है। मैंने सिर्फ अपना सर झुका लिया और अपने फोन में ऐसे देखने लगी जैसे मैंने वो सब सुना ही न हो जो उसने बोला था।
इतने में मेरे कानों में मेरे पति की आवाज आई, “पारुल, चलो चलते हैं।” मैंने जैसे ही पलटकर देखा तो वो विकाश और वो मोटा आदमी मेरे पति से हाथ मिलाकर जा रहे थे।
हम लोग अपने रूम की तरफ बढ़ते हुए जा रहे थे। मेरे पति ने मुझसे धीमी आवाज में पूछा, “ये विकास तुम्हें क्या कह रहा था?” चूँकि हम लोग होटल के कॉरिडोर से गुजर रहे थे तो उनका धीमी आवाज में पूछना लाजिमी था।
मेरी आँखों में जैसे अजीब सी चमक आ गई थी और मैंने अपनी वो चमक को दबाने का भरसक प्रयास करते हुए कहा, “मुझे तो मालूम ही नहीं। मैं तो अपनी सहेली कविता से फोन पर बात कर रही थी।”
लेकिन मन ही मन मैं सोचने लगी कि यार ये तो बिल्कुल मेरा आइडियल मैन है जैसा बन गया है… बिल्कुल वैसा जैसे लड़के मुझे अच्छे लगते हैं। बॉडी बिल्डर और हरामीपन… वाह क्या कॉम्बिनेशन है।
मैंने अपने शादी के बाद से ही विकाश को बहुत कम बार देखा था। तो अब वो बिल्कुल बदल गया है। बॉडी बिल्डर बन गया है।
अब शाम हो चुकी थी। हम लोग अभी सोच ही रहे थे कि डिनर के लिए बाहर कहाँ जाना है। इतने में हमारे रूम की डोरबेल बजी।
पंकज ने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने विकास वाइन की बोतल हाथ में लेकर खड़ा था। मेरे पति उससे कुछ कह पाते इससे पहले वो सीधा रूम में दाखिल हो गया।
वाइन की बोतल को मेरे हाथ में देते हुए बोला, “ये तुम्हारे लिए मेरी प्यारी बहना।” ये कहते ही उसने मुझे एक फ्रेंडली हग देते हुए गले से लगा लिया और मेरी मोटी गांड का हल्का सा स्पर्श ले लिया।
इतने में मेरे पति बोले, “अरे विकास, तुम यहाँ कैसे आ गए… और वर्मा साब कहाँ हैं?”
मुझे एक पल के लिए लगा कि पंकज ने विकास को मेरी मोटी गांड सहलाते हुए देख लिया है लेकिन उन्होंने कुछ नहीं देखा था। वो विकास के पीछे थे तो विकास मेरे पीछे क्या कर रहा है वो उन्हें पक्का नहीं दिखा था।
मैं वाइन की बोतल को टेबल पर रखकर जल्दी से वाशरूम की ओर भागी क्योंकि विकास के अचानक ऐसे मेरी गांड को सहलाने से मेरी चूत ने एकदम काफी पानी छोड़ दिया था।
मेरी पैंटी मेरी ब्लैक मिनी ड्रेस के अंदर पूरी गीली हो रही थी।
मैं जब पैंटी चेंज करने के बाद रूम में वापस आई तो विकास के चेहरे पर एक हरामी स्माइल थी और वो हवस वाली नजरों से मेरी चूत की तरफ ऐसे देख रहा था मानो उसे पता चल गया हो कि मैं क्या करके आई हूँ।
जैसे ही मैं जाकर पंकज के साथ बैठी। हम लोग ड्रिंक करते हुए बात कर रहे थे और अब काफी फ्रैंक भी हो गए थे।
इतने में विकास के फोन पर एक कॉल आया जो उसी वर्मा का था जो इनका क्लाइंट था और ये लोग उसके साथ मीटिंग करने आए थे।
विकास ने कुछ बात करके फोन रख दिया और मेरे पति से कुछ कहने लगा। मैं तो दो ड्रिंक के बाद वैसे ही थोड़ा टिप्सी हो रही थी। आधी बातें मुझे समझ ही नहीं आ रही थीं।
मैंने जब से विकाश को आज देखा है तब से ही पागल हो गई हूँ कि मेरा आइडियल मैन मेरा भाई ही है।
मैं इससे चुदना चाहती हूँ। पर विकाश मेरा भाई है तो मैं रिश्तों की लाज के वजह से खुद से पहल नहीं करना चाहती थी। पर अगर मेरे भाई ने पहल किया तो बिल्कुल पीछे नहीं हटूँगी।
हम तीनों लोग अब बेड पर बैठे थे। एक तरफ मैं और मेरे पति थे। दूसरी ओर सामने विकास बैठा था।
इतने में मुझे महसूस हुआ कि विकास ब्लैंकेट के अंदर मेरी चिकनी टाँगों को सहला रहा है और मेरा पैर अपनी पैंट के ऊपर से ही अपने आधे खड़े लंड पर रगड़ रहा था।
मैंने महसूस किया कि उसका लंड किसी मोटे खीरे से कम नहीं महसूस हो रहा था।
लंड की मोटाई महसूस करते ही मेरी चूत में तो जैसे आग लग गई हो। मेरा मन हो रहा था कि कैसे मैं एक बार विकास का लंड हाथ में पकड़ूँ। कैसे एक बार मुँह में लेकर चूस लूँ, चाट लूँ।
मेरे पैर से उसके मोटे लंड को मसलते हुए मुझे इतना तो पता चल ही गया था कि उसने पैंट के नीचे कुछ नहीं पहना है।
इतने में पंकज उठकर वाशरूम की ओर चले गए। वो जैसे ही वाशरूम में गए विकास ने मुझे टाँगों से पकड़कर इतनी जोर से अपनी तरफ खींचा और जब तक मैं कुछ समझ पाती वो मेरे होंठ मुँह में लेकर चूसने लगा।
मुझे भी जैसे मौका ही चाहिए था। मैंने झट से अपना दायाँ हाथ उसके मोटे लंड पर रखते हुए उसके कान में कहा, “बहुत मोटा और आग की तरह गर्म है भाई तुम्हारा लंड।”
वो बोला, “अभी तो ये आधा खड़ा है और पैंट में कैद है। एक बार आजाद हो गया तो बहन तेरी चूत से होकर तेरे हलक तक चोट मारेगा।”
वो इतनी बुरी तरह से मेरे मोटे मम्मे मसल रहा था जैसे आज उखाड़ ही डालेगा। मैंने भी उससे कहा, “मुझे तुम्हारा लंड चाहिए… जैसे भी दो बस दे दो। मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है।”
उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी थोंग पैंटी को फाड़ते हुए मुझे नीचे से पूरी नंगी कर लिया। फिर मेरी चिकनी गोरी चूत पर तीन-चार थप्पड़ लगाते हुए कहा, “ये लंड इतनी आसानी से नहीं मिलता। इसके लिए तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा।”
मैंने उत्सुकता से कहा, “हाँ हाँ कुछ भी करवा लो… बस मुझे चाहिए।”
ये सुनते ही उसने मुझे पीछे की ओर धक्का देते हुए कहा, “तो बस… फिर अगर मेरा लंड लेना है तो मेरी हाँ में हाँ मिलाती रहना।”
ये बोलकर वो ठीक होकर बैठ गया और मुझे भी पीछे कर दिया क्योंकि मेरे पति की वाशरूम से बाहर आने की आवाज आ रही थी।
हम लोग वापस अपनी-अपनी जगह पर ऐसे बैठ गए जैसे कुछ हुआ ही न हो।
जैसे ही पंकज बाहर आए विकास उठकर खड़ा हो गया और मेरे पति से बोला, “चलो अब पारुल को सोने देते हैं। आप चलो मेरे साथ मेरे रूम में। वर्मा साब भी वेट कर रहे होंगे। उनसे भी कुछ काम की बात कर लेते हैं।”
मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं इस उल्लू के पट्ठे को चूत चोदने को कह रही हूँ और ये मेरे पति को भी दूसरे रूम में लेकर जा रहा है।
कम से कम मैं अपने पति के साढ़े पाँच इंच के लंड से ही चूत चुदवा लेती क्योंकि उस वक्त मेरी चूत में चुदने की ऐसी आग लगी हुई थी कि मुझे बस लंड चाहिए था।
मैं गुस्से से मुँह पलटकर लेट गई बिना कोई जवाब दिए… और वो लोग दरवाजा बंद करके बाहर चले गए। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अब अपनी वेट पुसी की आग कैसे बुझाऊँ।
दोस्तों, चूत में लंड तो गया और विकास का लंड ही गया। मगर वो सब कैसे हुआ और उस मोटे क्लाइंट के साथ क्या सीन हुआ। वो सब मैं आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में बताता हूँ।
अगला भाग : "पति के सामने भाई ने फाड़ी मेरी चूत! 02"
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