मौसी बीमार तो बेटी ने पकड़ा लंड!
Family Sex Kahani : मौसी भर्ती… फिर बेटी अनन्या भैया को बुलाया बिस्तर पर! चुम्मा से शुरू, फिर बूब्स चूसे, चाटी टाइट चूत! गांड पर थप्पड मार पूरी रात जमकर चुदाई!
मेरा नाम आर्यन है। उम्र 24 साल। मैं दिल्ली में रहता हूँ। मेरी एक कजिन बहन है, जिसका नाम अनन्या है। उम्र 22 साल। हम दोनों बचपन से बहुत करीब रहे हैं।
हमारे परिवार एक-दूसरे से बहुत अच्छे रिश्ते रखते हैं, इसलिए छुट्टियों में हम अक्सर एक-दूसरे के घर आते-जाते रहते थे।
अनन्या देखने में बहुत खूबसूरत है। गोरा रंग, लंबे काले बाल, 34-26-36 का फिगर। उसकी गांड गोल और मोटी है, और चुचियाँ भरी हुई। जब वो टाइट जींस और क्रॉप टॉप पहनती है, तो उसकी बॉडी इतनी सेक्सी लगती है कि मन करता है अभी पकड़ लूँ।
लेकिन वो मेरी कजिन है… इसलिए मैं हमेशा खुद को रोकता रहा।
पिछले महीने मेरी मौसी (अनन्या की माँ) अस्पताल में भर्ती हो गई थीं। अनन्या अकेली घर पर थी। मौसी ने मुझे फोन करके कहा, “आर्यन बेटा, कुछ दिन अनन्या के साथ रह लेना। वो अकेली घबराती है।” मैंने हाँ कह दी।
मैं उनके घर पहुँचा। अनन्या ने दरवाजा खोला। वो हल्के गुलाबी नाइटी में थी। नाइटी इतनी पतली थी कि उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आ जाओ भैया… अकेले में बहुत डर लग रहा था।”
मैं अंदर गया। घर शांत था। हम दोनों रसोई में खड़े होकर चाय बना रहे थे। अनन्या मेरे बगल में खड़ी थी। उसकी बांह मेरी बांह से छू रही थी। मैंने नोटिस किया कि वो जानबूझकर करीब आ रही है।
रात का खाना साथ खाया। बातें करते-करते पुरानी यादें ताजा हो गईं। बचपन के दिन, जब हम छत पर छुप-छुपाकर खेलते थे। अनन्या हँसते हुए बोली, “भैया, याद है जब तुमने मुझे पानी में धक्का दिया था? मैं कितनी नाराज हुई थी।”
मैंने हँसकर कहा, “हाँ… और फिर तूने मेरा मोबाइल छुपा दिया था।”
धीरे-धीरे बातें गहरी होती गईं। अनन्या ने मेरी तरफ देखा और बोली, “भैया… तुम बहुत बदल गए हो। पहले इतने मसल्स नहीं थे।” उसने मेरी बांह पर हाथ फेरा। उसका हाथ गर्म था।
मैंने महसूस किया कि उसका स्पर्श मेरे शरीर में हलचल पैदा कर रहा है।
रात के 11 बज गए। अनन्या ने कहा, “भैया, आज तुम मेरे कमरे में सो जाओ। मैं अकेली सो नहीं पाऊँगी।” मैंने मना किया, “अनन्या… ये ठीक नहीं लगेगा।” लेकिन वो जिद करने लगी।
“प्लीज भैया… डर लग रहा है।” आखिरकार मैं मान गया।
हम उसके कमरे में चले गए। कमरे में एक डबल बेड था। अनन्या ने लाइट बंद कर दी। सिर्फ खिड़की से हल्की रोशनी आ रही थी। वो मेरे बगल में लेट गई। पहले तो दोनों चुप थे। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज गूंज रही थी।
अनन्या ने धीरे से कहा, “भैया… तुम बहुत बदल गए हो।” उसने फिर से मेरी बांह पर हाथ फेरा। उंगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरकती गईं, जैसे वो जानबूझकर समय ले रही हो।
मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “तू भी बहुत बदल गई है अनन्या। अब तू छोटी बच्ची नहीं रही।” उसने हँसकर मेरी छाती पर हल्का मुक्का मारा।
"भैया… शरमा मत दो।” लेकिन उसकी हँसी में पहले जैसी मासूमियत नहीं थी। आँखों में कुछ और था।
धीरे-धीरे वो मेरे और करीब आ गई। पहले सिर्फ कंधा छुआ, फिर उसका सिर मेरे कंधे पर टिक गया।
उसकी साँसें मेरे गले पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं। मैंने उसके बाल सहलाए- उंगलियाँ बालों में फँस गईं। वो और चिपक गई। उसकी जांघ मेरी जांघ से सट गई, पहले हल्के से, फिर पूरा दबाव देकर।
मैंने महसूस किया कि मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा है। अनन्या ने भी महसूस किया। उसने कुछ पल चुप रहकर फिर फुसफुसाया, “भैया… तुम्हारा… वो…?” मैं शर्मा गया। आवाज में झिझक थी, “कुछ नहीं… सो जा अब।”
लेकिन अनन्या नहीं सोई। उसने मेरी छाती पर हाथ फेरा—पहले हल्के से, जैसे सिर्फ जाँच रही हो, फिर हथेली पूरा वजन देकर।
“भैया… मुझे ठंड लग रही है।” मैंने उसे गले लगा लिया। उसका शरीर मुलायम और गर्म था। पतली नाइटी के नीचे उसके मम्मे मेरी छाती से दब रहे थे। हर साँस के साथ वो हल्के-हल्के रगड़ खा रहे थे।
नाइटी इतनी पतली थी कि उनके गोल आकार और सख्त निप्पल्स साफ महसूस हो रहे थे।
अनन्या ने धीरे से अपना चेहरा ऊपर किया। हमारी आँखें मिलीं। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज और हमारी तेज साँसें थीं। दोनों कुछ पल सिर्फ देखते रहे। न तो कोई हँसा, न ही कोई पीछे हटा।
फिर अनन्या ने हल्के से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए—बस छुआ, दबाया नहीं। एक पल के लिए।
मैं चौंक गया। “अनन्या… ये क्या…?”
उसने फुसफुसाया, आवाज काँप रही थी, “भैया… आज रात… मुझे तुम्हारा साथ चाहिए। अकेले में… डर लग रहा है।”
मैंने उसे थोड़ा दूर धकेलने की कोशिश की, लेकिन हाथ उसकी कमर पर ही रुक गए। “अनन्या… हम कजिन हैं… ये गलत है… सो जा, प्लीज।”
अनन्या ने मेरी बात नहीं मानी, लेकिन जबरदस्ती भी नहीं की। वो मेरे ऊपर नहीं चढ़ी। बस और करीब सरक आई। उसका माथा मेरे माथे से छू गया। साँसें मिल रही थीं।
उसने फिर से मेरे होंठ छुए—इस बार थोड़ा देर तक। जब मैंने जवाब नहीं दिया, तो उसने धीरे से जीभ की नोक से मेरे निचले होंठ को छुआ।
मैं खुद को रोकता रहा, लेकिन शरीर ने जवाब दे दिया। मेरा हाथ उसकी कमर पर और कस गया। नाइटी के ऊपर से ही उसकी नरम कमर महसूस हो रही थी। अनन्या ने हल्की सिसकारी भरी—बहुत धीमी, जैसे खुद भी हैरान हो।
मैंने नाइटी को थोड़ा ऊपर नहीं खींचा। बस उंगलियों से उसकी कमर और पेट के नरम हिस्से को सहलाया, कपड़े के ऊपर से। अनन्या की साँसें और तेज हो गईं।
उसने मेरी गर्दन में चेहरा छुपा लिया और फुसफुसाई, “भैया… मत रोक… बस थोड़ी देर… और करीब रहने दो।”
उसकी आवाज में डर था, चाहत थी, और थोड़ी सी जिद भी। मैंने आँखें बंद कर लीं।
विरोध के शब्द मुँह तक आए, लेकिन निकले नहीं। उसके शरीर की गर्माहट, पतली नाइटी के नीचे धड़कते मम्मे, और जांघों का लगातार दबाव… सब कुछ मुझे धीरे-धीरे कमजोर कर रहा था।
मैंने उसकी नाइटी ऊपर की। उसके नंगे मम्मे बाहर आ गए। गोल, सख्त और गुलाबी निप्पल।
मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और धीरे से चूसने लगा। अनन्या का शरीर सिहर गया — “आह्ह्ह… भैया… चूसो… और जोर से… आह्ह्ह…”
मैंने दोनों मम्मों को बारी-बारी से चूसा। अनन्या मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपनी छाती से दबा रही थी। उसकी साँसें तेज हो गई थीं। “भैया… और… आह्ह्ह… मत रोक… आह्ह्ह…”
मैंने उसकी नाइटी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। मैंने उसकी पैंटी पर हाथ फेरा। वो पहले से गीली थी। “अनन्या… तू इतनी गीली कैसे…?” उसने शर्माते हुए कहा, “भैया… तुम्हें देखकर… आह्ह्ह…”
मैंने उसकी पैंटी साइड की और उंगली उसकी चूत पर फेरी। अनन्या का शरीर काँप गया — “आह्ह्ह… भैया… उंगली… आह्ह्ह…” मैंने धीरे-धीरे उंगली अंदर डाली। उसकी चूत टाइट और गर्म थी। अनन्या ने मेरे कंधे पर नाखून गाड़ दिए।
अनन्या ने मेरी पैंट का बटन खोला। उसका हाथ मेरे लंड पर चला गया। “भैया… कितना मोटा है… आह्ह्ह…” उसने लंड को बाहर निकाला और धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसका हाथ गर्म और मुलायम था।
मैंने उसे लिटा दिया और उसकी जांघों के बीच अपना चेहरा रख दिया। अनन्या की पैंटी अभी भी साइड थी। मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरी। अनन्या जोर से कराह उठी — “आह्हhhhh… भैया… चाटो… आह्ह्ह… और गहरा… आह्ह्ह…”
मैंने उसकी क्लिट चूसी। अनन्या की जांघें काँप रही थीं। उसने मेरे सिर को अपनी जांघों में दबा लिया। “भैया… अब मत रोक… मुझे… आह्ह्ह…”
मैं अनन्या की चूत चाट रहा था। उसकी जांघें मेरे सिर के दोनों तरफ काँप रही थीं।
“आह्हhhhh… भैया… और… आह्ह्ह… चाटो… आह्ह्ह…” अनन्या मेरे बाल पकड़कर जोर से दबा रही थी। उसकी चूत से मीठा रस निकल रहा था, जिसे मैं चाट रहा था।
मैंने अपनी जीभ और गहराई तक डाली। अनन्या का शरीर अकड़ गया। “आह्ह्ह… भैया… वहाँ… आह्ह्ह… मत… आह्ह्ह…” लेकिन उसने मेरे सिर को और जोर से अपनी जांघों में दबा लिया।
मैंने उसकी क्लिट को चूसते हुए दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं।
अनन्या चीख पड़ी — “आह्हhhhh… भैया… उंगलियाँ… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…” मैंने उंगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। अनन्या की गांड बिस्तर पर उछल रही थी।
थोड़ी देर बाद अनन्या ने मुझे ऊपर खींचा। “भैया… अब काफी… मुझे तुम्हारा चाहिए… आह्ह्ह…” उसकी आँखें कामुकता से भरी हुई थीं। उसने खुद मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
“भैया… डालो… प्लीज… आह्ह्ह…” अनन्या ने लंड की नोक अपनी चूत के मुँह पर रख दी। मैंने धीरे से धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। अनन्या की आँखें फैल गईं — “आह्हhhhh… भैया… मोटा… आह्ह्ह… धीरे… आह्ह्ह…”
मैं रुक गया। “दर्द हो रहा है?” अनन्या ने सिर हिलाया, “थोड़ा… लेकिन मत निकाल… आह्ह्ह…” मैंने धीरे-धीरे और अंदर धकेला। पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। अनन्या ने मेरे कंधे पर नाखून गाड़ दिए।
“आह्ह्ह… भैया… पूरा… अंदर है… आह्ह्ह…”
आगे की कहानी : "मौसी बीमार तो बेटी ने पकड़ा लंड! 02"
💬 Leave a Comment :-
📝 Comments :
No comments yet. Be the first to comment!