खिड़की से देखी रचना दीदी की भईया संग चुदाई!

Didi Ki Antarvasna : खिड़की से देखी रचना दीदी की भईया संग चुदाई! गंदी गालियों के साथ फाड़ी चूत! रात भर चली Dirty Chudai! फिर प्यासी चुत में माल डाल बुझाई प्यास!


दोस्तो आज अपने परिवार की चुप्पी हुई सच्चाई को लेकर आया हूँ कि जो कि बदले हुए नए समाज में बताना चाहता हूँ. 


मेरा नाम गौरव है और उस समय तक महज बारहवीं क्लास 


का पढ़ने वाला लड़का था. मेरा पापा का स्कूल था जो कि केवल दसवीं तक ही सीमित था जिसे माँ के बाद दो भाभी चलाती हैं .मेरा परिवार काफी ज्यादा बड़ा और फैला हुआ है.


बावजूद इसके मेरे कई भाई अपने पैर पर खड़ा हो चुके है. 


मेरे अलावा छोटे भाई की शादी नहीं हुई थी बाकी सारे भाई बहन शादीशुदा होने के साथ-साथ परिवार सँभाल चुकी थी. 


मेरी सगी बड़ी बहन भी कुँवारी थी जो कि मुझसे चार साल बड़ी थी. वो लॉ की पढ़ाई पूरी करने हैदराबाद गयी थी और उनकी सहेली गाँव में थी और शादी की बात चल रही थी. 


गाँव में बड़ा परिवार होने के कारण मैं शहर में बड़े चाचा और चाची के साथ रहता हूँ. फिलहाल मेरे घर की स्थिति यह है कि रोहिणी जो कि चाची की बड़ी बेटी थी शादी तीन साल पहले हो चुकी थी. यह कहानी उससे दूसरी बेटी की सहेली की है. 


मेरी बड़ी चाची और चाचा दोनों रेल्वे में कर्मचारी और उनके


चार बेटियाँ है, बड़ी वाली शादीशुदा है और उसके बाद भी उनकी तीन बेटी है. उनकी तीसरी वाली बेटी अपने मामा के घर पढ़ाई करती हैं.चौथी लेकिन छोटी बेटी मात्र दस साल की है.


चाची की दूसरी बड़ी बेटी का नाम रिचा है और फिलहाल आरबीआई में नौकरी करती हैं. इस घटना से पहले शादी की बात चल रही थी जिसमें तीन लड़के को देखने के बाद पसंद नहीं आया. वैसे भी रोहिणी दीदी मुझसे छह साल बड़ी थी. 


तब रिचा दीदी की शादी की बात करने के लिए लड़के के परिवार ने भोपाल बुलाया. बड़े चाचा और चाची गए हुए थे 


.मेरे घर की स्थिति कुछ इस प्रकार से थी मेरी बड़ी चाची बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत है बिना चाचा से चुदे शांति नहीं मिलती थी मैंने कई बार दोनों को सेक्स करते हुए देखा था. मेरे दो भाइयों की शादी हो चुकी थी और मेरे से बड़े भाई कुंवारे थे. 


बड़ी चाची की तीन लड़की थी जिसमें से दो शहर में पढ़ाई करती थी और तीसरी आठवीं क्लास में पढ़ाई कर रही हैं. 


रोहिणी दीदी कॉलेज की नंबर एक डांसर थी जिसने कई सारे मेडल जीते हैं दूसरी तरफ वो बहुत बड़ी चुदक्कड़ लड़की है.


चुदक्कड़ लड़कियों के समुह में रहने के कारण यह हाल था. 


उनकी सहेली रचना हमारे घर कई सालों से आती रहीं हैं और 


उसने थोड़ी बहुत मुलाकात होती रहीं. रचना दीदी के पापा कई सालों से जेल में जेलर हैं, हमारे गाँव से ताल्लुक रखती हैं. उनके बड़े बेटे रोहन की नौकरी शहर में लगी थी जिस कारण उनकी बेटी और बेटा संग गाज़ियाबाद में रहती थी और मेरे बड़े चाचा चाची भी वही थे.


इस बीच आसपास से मालूम हुआ रचना दीदी बहुत बड़ी रांड थी, कॉलेज में कई लड़कों के साथ संबंध था. मुझे रोहिणी दीदी की सहेली रचना दीदी में कोई दिलचस्पी नहीं थी क्युकी उनकी चूत काफी ज्यादा ढीली थी.


जब मैंने कई बार देखा तो जाकर आखिरकार यकीन हुआ.


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चितरंजन भईया कई सालों से शहर में थे और तैयारी करके, सरकारी नौकरी का पेपर देकर रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे.


 चितरंजन भईया बिल्कुल ही शांत किस्म के आदमी थे और उतना ही छिपा हुआ राज था. हम दोनों ही भाई बहन जवान तो हो चुके थे लेकिन अभी भी बच्चों की तरह ही रहते थे.


रचना दीदी तीन घर छोड़ कर रहती हैं.चाची के रहने पर आया करती और नहीं रहने पर खाना बनाकर भैया को खिलाती थी


भईया रचना दीदी से काफी ज्यादा मज़ाक किया करते थे. 


अगली सुबह चाचा चाची के जाने के बाद रचना दीदी आई हुई थी और रात को घर ही रुक गई.चाचा ने घर मैन टाउन से दूर गाँव वाला इलाक़ा में ले रखा था. घर में चार मीडियम साइज़ के छोटे छोटे कमरे थे जो अकेला इंसान के लिए काफ़ी था. 


शांत वातावरण में सोने का मजा की कुछ अलग था. रात को 


तीन बजे के करीब मेरे पेट में दर्द होने लगा, जिस कारण मैं दवाई लेने के लिए बाहर जाने लगा, लाइट पूरी तरह बंद थी. 


मैंने दवाई ढूँढने के बाद उसे खाई और सोने जाने लगा.


मैंने सोचा भैया को देखता चलू, मैंने रौशनदान से देखा सूरज की हल्की-फुल्की किरनों से देखा भैया और रचना नंगे ही लिपट कर एक दूसरे के बाहों में सोए हुए थे. उन दोनों के कपड़े इधर उधर फेंके हुए दिखाई दिया, कुछ ज्यादा दिखाई नहीं पड़ा.


मैं पूरा माजरा समझ गया और जाकर बिस्तर पर लेट गया.


यहाँ रहते हुए मुझे पता था चितरंजन भईया नौ बजे उठते थे. मैंने अलार्म लगाया और सात बजे उठने का फैसला लिया. 


सुबह के सात बजे उठते ही जो मैंने सोचा था, वो ही हुआ.


उसी वक़्त मुझे बगल वाले कमरे से उहह आहह की आवाज़ आने लगी. यह बिल्कुल ही जानी पहचानी आवाज़ थी. मैंने जाकर चुपके से रौशन दान के पीछे से छुपकर देखने लगा था.


मैंने देखा रचना दीदी नीचे से सलवार खोली हुई और भईया नीचे लेटे हुए थे और 


रचना दीदी जोर-जोर से कराह रही थी - “आह्ह्ह… चितरंजन… और जोर से… आह्ह… मेरी चूत फाड़ दे… उफ्फ… आह्ह्ह…” वो ऊपर-नीचे होकर धक्के मार रही थी।


मुझे अपने भैया और दीदी की सहेली को नंगा इस हालत में देख मुझे शर्म आने लगी और मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.


इस तरह का संयोग बहुत ही अच्छा लग रहा था. चितरंजन रचना दीदी को कमरे में चोद रहा था, भैया की उम्र करीब 24 साल थी और रचना दीदी की 25 साल की थी।


वो नजारा देख मेरा लंड खड़ा हो गया और मुझे सेक्स का साध चढ़ने लगा. चितरंजन रचना की गांड को पकड़ते हुए ऊपर नीचे कर रहे थे 


रचना दीदी चितरंजन भईया के पेट को हाथो से पकड़ी हुई थी, उनके मुँह से आह आह की आवाज आने लगी, 


रचना दीदी भैया के गले पर थप्पड़ मारती हुई बोली, “चितरंजन मादरचोद… चोद मुझे… बहनचोद… और जोर से ठोक… आह्ह्ह… मेरी चूत का भोसड़ा बना दे…”


भईया बोले रचना साली छिनार रंडी आज मैं तुम्हें पागल कर दूँगा चोद चोद कर! चितरंजन रचना को उछाल उछाल कर चोदने में लगा था और काफ़ी फट फट चुदाई की आवाज जोर जोर से आ रही थी। 


मैं काफी समय से चाहता था कि चितरंजन भैया संबंध बनाए,


बाहर की चुप्पी हुई दुनिया को देखे. उनके चुदाई के कौशल स्वभाव को देखकर, ऐसा जरूर लगता कि पक्का कॉलेज में उनकी गर्लफ्रेंड रही होगी जो भाई को खूब शांत करती होगी। 


चितरंजन भईया तेजी से कमर हिला हिलाकर चुत चोद रहे थे. 


साथ ही अपने होठो को दीदी के होठो से चिपके हुए थे और अपने एक हाथ से दोनो स्तनों को बारी बारी से नोच रहे थे.


चितरंजन बहुत तेजी के साथ दीदी की चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करना शुरू किया और दीदी की आवाज और तेज हो गई - “आह्ह्ह… चितरंजन… गहरा डाल… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…”


 आज भी तुझे जी भरकर चोदूंगा हराम जादी. चितरंजन भईया रचना को पूरी ताकत से चोदने लगे.


उनकी ताबड़तोड़ चुदाई से कुछ ही मिनट में दीदी की चुत ने पानी छोड़ दिया. उसके कारण भईया के लंड की तेज स्पीड से कमरे में फच फच फच की आवाज होने लगी।


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करीब छह मिनट बाद दीदी चीख उठीं — “आह्ह्ह… चितरंजन… छोड़ दे… मैं झड़ गई… आह्ह्ह… बहुत हो गया… लेकिन मत निकाल… आह्ह…”


 चितरंजन बोले, “साली मादरचोद रंडी… कितने दिनों बाद मिली है… थोड़ी देर और रुक… तेरी चूत अभी और चोदूँगा… कुतिया…” 


चितरंजन रचना की गांड को हाथ से पकड़कर दबाते हुए चोद


रहे थे.रचना के मुँह से आहहहईई की आवाज़ निकल रही थी. वो भी लंड के धक्के का जबाब देते हुए अपनी कमर उसकी कमर से टकरा रही थी। 


रचना दीदी भईया का पूरा लंड अपनी चुत में अन्दर तक लेने की कोशिश कर रही थीं. रचना दीदी के कमर के नीचे का पूरा शरीर किसी रंडी की तरफ फैला हुआ है। 


भईया के हाथ और होंठ दोनों रचना दीदी के ऊपर थे. उनके मुँह से सेक्सी सिसकारियां पूरे माहौल में उत्तेजना भर रही थी. रचना दीदी अपनी चुत पर काफी सारा थूक लगाने लगी.


कुछ ही देर के भीतर रचना भईया का मोटा लंड गले तक ले रही थी। वो सच में रंडी की तरह चूस रही थी — “गप… गप… आह्ह… और गहरा… मादरचोद… पूरा अंदर ले…”


और भईया के टट्टे सहलाती हुई मसल रही थीं. चितरंजन भईया का लंड पूरा टाईट होकर रचना की मुट्ठी में बकरे की तरह फँसा हुआ था.


रचना ने भईया के मोटे लंड को गिला करने के बाद छोड़ दिया. 


तब उसी समय एकाएक भईया ने जोरदार झटके से अपना लंड रचना की चूत में पूरा घुसेड़ दिया. जैसे दीदी का दर्द कम हुआ, उन्हें मजा आने लगा. वो उतेजना में दीदी तड़प रही थी.


चितरंजन भईया हल्के-हल्के धक्के मार कर दीदी की चूत की 


चुदाई करने लगे. रचना दीदी दर्द से सिसकाने लगी.रचना भी दर्द को भूलकर मजे मे आह्ह्ह उहहा करते हुए पूरी रंडी वाली हरकते करने लगी। 


वो पागल होने लगी, जोर जोर से थरथराने लगी और अचानक रचना दीदी की चुत से पानी की तेज धार निकली. चितरंजन ने चोद चोदकर रचना दीदी का पसीना निकाल दिया था, जिसके कारण से वो पानी पानी हो गई थी. 


उसकी ज़ोरदार चुदाई से रचना भी अपनी गांड हिलाने लगी, वह भैया के हर धक्के पर नीचे से अपनी गांड उठाने लगी थी और साथ ही उसके मुँह से मस्ती भरी आवाज़ निकलने लगी.


उसके कमर के नीचे का पूरा शरीर किसी रंडी की तरफ फैला हुआ है. चितरंजन भईया थोड़ा आराम से चूत में अपना लंड अन्दर- बाहर करना शुरू किया. रचना अपनी गांड भी नीचे से उठने लगी थी. उन दोनों की तालमेल कई गुना बैठ रहीं थीं. 


उनकी चूत का छेद आसपास से काफी काला और खुला हुआ दिख रहा था जिस कारण उनमे कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. 


कई बार के चुत के रस से सारा का सारा बिस्तर गन्दा हो गया. 


थोड़ी देर चुदाई करते करते भईया रुके और आराम करने लगे.


फ़िर चितरंजन रचना के स्तन चूसने लगे और उस हालत में पूरे माहौल में मादक सिसकारियां गूँज रही थी.भईया धक्के पर धक्के लगा रहे थे और दीदी बेहाल थी। 


मुझे सिर्फ भईया के आंड दिखाई दे रहे थे उसके साथ ही मुझे चुत के पानी से सने हुए हल्के-फुल्के सफेद रंग के टटे देखकर काफी ज्यादा अच्छा दिखता था. भईया ने दबाकर लंड चूत में धकेल दिया। 


वो उछाल उछाल कर रचना दीदी के चूत को चोदने लगे हुए थे. चितरंजन ने रचना की एक टांग अपने कंधे पर रखकर चुत चोद रहे थे। उनकी लंड ने रचना दीदी की फुद्दी में ठोकते हुए उनके ऊपर चढ़ गया। 


दोनो की धकापेल चुदाई चालू हो गई.


चितरंजन हार्ड चुदाई करते हुए बीच बीच में रचना की साँवली गांड पर अपने हाथ से थप्पड़ मारते थे और चूचे को चूम रहे थे, रचना दीदी जोर से चीख रही थी - “आआ… मर गई… आह्ह्ह… चितरंजन… फाड़ दे मेरी चूत… आह्ह… और जोर से…”


उसकी चूत में उसके लंड को आते जाते साफ देख रहा था। 


चितरंजन के थप्पड़ों की थपाक थपाक की आवाज़ आ रही थी और रचना बस आहह आहह करके आवाज़ कर रही थीं.


भईया की चुदाई बहुत जोरदार थी. उन्होंने भी स्पीड तेज कर दिया. उसकी चूत में लंड तेज गति से अन्दर बाहर हो रहा था. तभी उन्होंने दोबारा से धक्का मारा. रचना दीदी का चेहरा पहले से लाल हो रखा था,पहले से ज्यादा और लाल हो गया.


एक बार फ़िर से सफेद सफेद रंग का पानी चितरंजन भईया के झांटे के पास दीदी की चूत से सफ़ेद पानी निकलते हुए चुत चिकनी होने लगी. रचना दीदी अपना दम तोड़ चुकी थी.


उसी समय चितरंजन भईया ने जोर से कहा, “ले रंडी… मेरा माल ले…” और अपना पूरा वीर्य रचना की चूत में छोड़ दिया। रचना हाँफते हुए बोली, “आह्ह्ह… भर गया… आह्ह…”


 रचना दी निढाल हो बिस्तर पर लुढ़क गई.


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कुछ देर बाद भईया ने उनको बांहों मे भर लिया और होंठो को धीरे-धीरे चूसने लगे. वो दोनों काफ़ी ज्यादा एक दूसरे को मिस कर रहे थे जिसका नतीज़ा यहाँ देखा जा सकता था. 


फ़िर रचना उसके लंड को अपने हलक तक अंदर लेती रही.


जब रचना ने मुँह से लंड निकाला, तब भिगा और थूक से लसलसा लंड दिखाई पड़ा.भईया ने वापस से रचना के मुँह में लंड डाल दिया.


चितरंजन रचना के मुँह को जोर-जोर से चोद रहा था। “गले तक ले साली… पूरा निगल… आह्ह…” रचना की आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन वो चूसती जा रही थी।


चितरंजन भईया कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे. तभी चितरंजन कापने लगा और उसके पूरी जान लगा कर रचना के मुँह को लंड को जांघो के बीच मे दबोच लिया और अपने लंड को उसके गले के अंदर लेजा कर फँसा दिया.


रचना को किसी रंडी की तरह बहुत जोर जोर से चोद रहे थे.


भईया ने अचानक एक झटके में अपना लंड बाहर निकाल लिया, भाई का लंड बाहर निकलते ही रचना दीदी जोर जोर से खांसी और लंड का गंदा सफ़ेद माल बाहर निकलने लगा.


वो अपने आप को सम्हाल नहीं सकीं. उसी समय उल्टी करते हुए चितरंजन भईया के वीर्य को थूकने लगी. वह शांत होती रहीं और साँस को काबु करने लगी. रचना दीदी ने भैया को दो जोड़ से थप्पड़ मारा और कहा तुम रूक क्यूँ गए थे चितरंजन.


वो शांत रहे. उसने कहा तुम्हें तो कॉलेज के दिनों से ही पता है कि मुझे एकदम हार्ड सेक्स पसंद है फिर तुम रुक क्यूँ गए थे. 


मैं वहाँ से निकल गया और हॉल में आ गया. थोड़ी देर बाद रचना ने अपने कपड़े पहने। 


कुछ देर बाद बाहर आकर बेसिन के पास जाकर मुँह धोने लगी. रचना ने अपने बाल फिर चेहरे को सही किया. वो इधर आने लगी. मैं सब कुछ जानते बुझते 


हुए भी पूछ लिया रचना दीदी आपके मुँह पर सफेद रंग का क्या लगा हुआ था. वो शॉक थी और मेरे पास बैठकर बोली गौरव वो मैं दही खा रहीं थीं, अचानक से मेरे ऊपर गिर गई. 


रचना दीदी बातचीत कर ही रहीं थीं कि उसी समय बड़ी चाची और रिचा दीदी बाहर से आती हुई दिखी और फ़िर मैंने रचना दीदी की और देखा, चितरंजन भैया अभी भी ऊपर ही थे।


मैं सोच रहा था कि काश थोड़ा पहले चाची आ गई होती तो भंडा फुट गया होता लेकिन किस्मत किस्मत की बात थी.


बड़ी चाची के पीठ पीछे इस तरह का खेल लगभग 4-5 दिन तक चला था. तब से रोजाना यही सीन होता था और भैया का लंड लटका रहता था और रचना दीदी गिली होकर जाती. 


एक सवाल जो कि मेरे मन में यह सवाल उठता कि बड़ी चाची के घर में ऐसा होता लेकिन क्या उनको पता नहीं चलता होगा? या क्या पता वो भी इस कहानी में शामिल?


मैंने अपने बड़े चाचा के घर की सच्चाई को बताया है, उम्मीद है पसंद आई होगी. अपनी राय जरूर मेरे इस मेल ayushkamra06@gmail.com पर बताए. 

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