जंगल में शिखा दीदी की गांड और चूत मरवाई


Cuckold Bhai : शिखा दीदी को दोस्त से जंगल में चुदवाते देखा! दीदी की मुँह चुदी! फटी टाइट चूत! कुंवारी गांड में पेला लंड! और चेहरे पर छोड़ी माल! भाई मारता रहा मुठ!


दोस्तों, ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। ये वही सच्ची घटना है जो मैंने अपनी आँखों से देखी थी।


आज से लगभग तीन साल पहले की बात है। मैंने अपनी ही सगी बड़ी बहन शिखा को अपने सबसे अच्छे दोस्त से चुदवाते हुए देखा था… और सिर्फ देखा नहीं, बल्कि छिप-छिपकर कई बार मजा भी लिया था।


मेरा नाम गौरव है। उम्र उस समय सत्रह साल। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ। बारहवीं क्लास में पढ़ता था। कॉलेज औसत था, लेकिन लड़कियों की कमी नहीं थी।


मैं और मेरे दोस्त नई-नई लड़कियों को फंसाकर पेलने के चक्कर में रहते थे। उस समय तक मैं चार लड़कियों को चोद चुका था। लेकिन दिल में एक खास जगह मेरी दीदी के लिए बनी हुई थी।


दीदी का नाम शिखा है। उम्र उन्नीस। फिगर 30-26-36। लंबी, हल्की गोरी, थोड़ी मोटी लेकिन कमर पतली और गांड इतनी उठी और गोल कि जब वो कॉरिडोर में चलती तो दोनों चुत्तड़ अलग-अलग लहराते हुए नजर आते।


पीठ पर काला “*” का टैटू। कॉलेज की बेस्ट डांसर। हमेशा गुलाबी लिपस्टिक, हल्की काजल और टाइट कपड़े। उनके बूब्स बड़े नहीं थे लेकिन गोल और सख्त थे, और गांड… वो गांड तो जैसे जानबूझकर मेरी नींद उड़ाने के लिए बनी हो।


दीदी के तीन-चार बॉयफ्रेंड थे। मैं भी नई-नई लड़कियों को पेलता रहता था, इसलिए पहले कभी गंदी नजर से नहीं देखा। लेकिन धीरे-धीरे सब बदलने लगा।


जब दीदी घर में स्कर्ट पहनकर घूमती या नहाकर बाल खोलकर निकलती, तो मेरा लंड अपने आप तन जाता। मैं बाथरूम जाकर मुठ मारता और दीदी की गांड और चूत के ख्याल से ही झड़ जाता।


कॉलेज में मेरा सबसे करीबी दोस्त था अलगा। नाम साधारण था लेकिन वो कॉलेज का सबसे बड़ा हरामी। काला-सांवला, मजबूत बदन, और लंड के मामले में कुख्यात।


उसने कई लड़कियों को पेल रखा था। एक दिन मैंने उससे अपनी एक्स गर्लफ्रेंड की चुदाई करवाने की सुपारी तक दे दी थी। अलगा ने कहा था, “भोसड़ीके, तेरी कोई भी चीज हो, मैं पेल दूँगा।”


उन्हीं दिनों मैं नई लड़की ढूंढ रहा था। तभी ख्याति मिली। बातें हुईं, दोस्ती बढ़ी। लेकिन असली तूफान तब आया जब एक दिन दीदी मेरे साथ कॉलेज आ रही थीं और अलगा सामने से आ गया।


मैंने दोनों को मिलवा दिया। अलगा ने दीदी को ऊपर से नीचे तक घूरा। दीदी ने भी मुस्कुराकर नमस्ते किया। उस पल मुझे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मैंने अनदेखा कर दिया।


कॉलेज में शौचालय का निर्माण कार्य चल रहा था। इसलिए लड़के-लड़कियाँ बाउंड्री वॉल पार करके पीछे जंगल में पेशाब करने जाते थे। वहाँ घनी झाड़ियाँ थीं, कुछ टूटे हुए पत्थर और पुरानी दीवारें।


कई जोड़े वहाँ चुदाई कर चुके थे। इस्तेमाल किए हुए कंडोम और गीली पैंटी तक मिल जाती थी।


उस दिन की बात है।


तीसरे पीरियड के बाद मुझे भी जोर की पिसाब लगी। मैं बाउंड्री पार करके जंगल की तरफ बढ़ा। दूर से हल्की आवाजें आ रही थीं। पहले लगा कोई और जोड़ी होगी। लेकिन जैसे-जैसे पास गया, आवाजें साफ होने लगीं।


“उम्म… ग्लक… ग्लक… उम्म…”


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मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं झाड़ियों के पीछे छिप गया और आहिस्ता से देखा।


सामने का नजारा देखकर मेरी साँस रुक गई।


शिखा दीदी सफेद शर्ट और नीली स्कर्ट में थीं। शर्ट के बटन खुले हुए थे। अलगा की पूरी यूनिफॉर्म एक तरफ पड़ी थी। दीदी घुटनों के बल बैठी हुई थीं और अलगा का काला, मोटा, नसों वाला कटवा लंड उनके मुँह में गहराई तक जा-जाकर निकल रहा था।


अलगा दोनों हाथों से दीदी के बाल पकड़े हुए था और जोर-जोर से मुँह चोद रहा था।


“ले रंडी… पूरा ले… गले तक समा… साली…”


दीदी की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वो पीछे नहीं हट रही थीं। लंड जब उनके गले में जाता तो “ग्लक” की आवाज निकलती और लार ठोड़ी से बहकर उनके बूब्स पर गिर जाती। उनके छोटे-छोटे बूब्स शर्ट के अंदर से हिल रहे थे।


मैंने अपने पजामे में हाथ डाला। मेरा लंड पहले ही सख्त हो चुका था। गुस्सा भी आ रहा था और इतनी तेज उत्तेजना भी कि लंड दर्द करने लगा था।


अलगा ने अचानक लंड बाहर निकाला। लंबी मोटी लार की लकीर दीदी के निचले होंठ से लंड के सिरे तक टंगी रही। दीदी ने साँस लेते हुए कहा, “बहुत मोटा है साले… मुँह पूरा नहीं ले पा रही…”


अलगा हंसा, “अभी तो मुँह ही है रंडी… आगे चूत और गांड दोनों लेनी पड़ेगी।”


उसने दीदी को उठाया और पास पड़े बड़े पत्थर पर लिटा दिया। स्कर्ट ऊपर की, पैंटी एक झटके में पैरों तक खींच दी। दीदी की चूत मेरे सामने पूरी तरह नंगी थी। घने काले घुंघराले बाल, थोड़े सूजे हुए गुलाबी होंठ, और बीच में चमकती हुई गीली दरार।


अलगा झुका और कुत्ते की तरह चाटने लगा। जीभ अंदर तक घुसा दी, क्लिट को चूसा, होंठों को फैला-फैलाकर चाटा। दीदी की दोनों टांगें काँप रही थीं।


“आह्ह्ह… अलगा… जीभ… और अंदर… आह्ह्ह… चूस… मेरी चूत चूस… हरामी…”


दीदी ने दोनों हाथों से अलगा का सिर अपनी चूत में और जोर से दबा लिया। उनकी कमर उठ-उठकर अलगा के मुँह से रगड़ रही थी। थोड़ी देर में दीदी का शरीर अकड़ गया।


उन्होंने जोर से कराहते हुए झड़ दिया। पानी अलगा के मुँह और नाक पर लग गया। अलगा ने सब चाट लिया और मुस्कुराते हुए बोला, “कितनी प्यासी है तेरी चूत रंडी… पानी ही छोड़ दी।”


अब दीदी की आँखों में सिर्फ हवस बची थी। उन्होंने खुद अलगा को लिटाया और उसके लंड के ऊपर बैठ गईं। एक हाथ से लंड पकड़कर अपनी चूत के मुँह पर लगाया और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।


“आह्ह्ह… बड़ा… है… धीरे…”


नोक अंदर गई, फिर आधा, फिर एक झटके में पूरा 7 इंच का मोटा काला लंड उनकी चूत में गायब हो गया। दीदी की आँखें बंद हो गईं और लंबी कराह निकल गई।


“आह्हhhhh… पूरा… अंदर… चला गया… आह्ह्ह… कितना मोटा…”


वो उछल-उछलकर चुदने लगीं। उनके छोटे बूब्स हवा में कुलांचें मार रहे थे। अलगा नीचे से धक्के दे रहा था और दोनों हाथों से उनके बूब्स मसल रहा था।


“चोद… जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे साले…”


मैं झाड़ियों के पीछे खड़ा काँप रहा था। एक हाथ से पेड़ पकड़े हुए था और दूसरे से अपने लंड को भींच रहा था। दीदी की वो आवाजें… वो गांड जो हर उछाल पर थरथरा रही थी… सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।


दीदी अलगा के लंड पर सवार होकर जोर-जोर से उछल रही थीं। हर बार जब वो नीचे बैठतीं तो पूरा काला मोटा लंड उनकी चूत में गायब हो जाता और “छप” की आवाज आती।


उनके छोटे-छोटे गोल बूब्स हवा में थरथरा रहे थे। अलगा दोनों हाथों से उन बूब्स को पकड़-पकड़कर मसल रहा था और कभी-कभी निप्पल को ऐंठ भी देता।


“आह्ह्ह… अलगा… इतना गहरा… चूत फट रही है… लेकिन मत निकाल… और जोर से… आह्ह्ह…”


मैं झाड़ियों के पीछे खड़ा काँप रहा था। मेरा लंड पजामे के अंदर पूरी तरह तन चुका था और सिरे से पानी टपकने लगा था। दीदी की वो मोटी गांड हर उछाल पर थरथरा रही थी।


मैंने मन ही मन सोचा – “साली… इतनी बेशर्म बन गई है… मेरे सामने ही कुतिया बनकर चुद रही है।”


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अचानक अलगा ने दीदी को उल्टा कर दिया। अब दीदी चारों हाथ-पैरों पर थी। कुतिया वाली पोजीशन। अलगा ने पीछे से लंड उनकी चूत में एक झटके में डाल दिया और जोर-जोर से पेलने लगा।


दोनों हाथों से दीदी की कमर पकड़ी हुई थी और हर धक्के के साथ उनकी मोटी गांड उसके पेट से जोर से टकरा रही थी।


“ले रंडी… ले… अपनी बड़ी बहन वाली चूत… आज पूरा फाड़ दूँगा…”


दीदी चीख रही थीं लेकिन आवाज में दर्द से ज्यादा मजा था।


“हाँ… फाड़ दे… हरामी… जोर से पेल… मेरी चूत फाड़ दे… आह्ह्ह… थप्पड़ मार गांड पर…”


अलगा ने उनकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे। एक… दो… तीन… लाल निशान पड़ गए। दीदी और जोर से पीछे की तरफ धकेलने लगीं। उनकी चूत से पानी की आवाज साफ आ रही थी – छप-छप-छप।


मैंने अपना लंड बाहर निकाला और धीरे-धीरे हिलाने लगा। दीदी की वो आवाजें कानों में पड़ रही थीं तो मेरा लंड और सख्त होता जा रहा था।


थोड़ी देर बाद अलगा ने लंड निकाला। दीदी की चूत खुली और लाल हो चुकी थी। उसने लंड का सिरा उनकी गांड के छेद पर रखा।


“अब इसकी बारी… रंडी की गांड…”


दीदी ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में थोड़ा डर था लेकिन हवस ज्यादा।


“धीरे… पहली बार है… दर्द होगा…”


अलगा ने थूक लगाया और धीरे-धीरे दबाव दिया। नोक अंदर गई। दीदी की लंबी चीख निकल गई।


“आईईईई… गांड में… दर्द… अह्ह्ह… निकाल… नहीं… मत निकाल… धीरे डाल…”


अलगा रुकने वाला नहीं था। उसने दोनों हाथों से दीदी की गांड फैलाई और लगातार दबाव बढ़ाया। आधा लंड अंदर चला गया। दीदी के नाखून जमीन में गड़ गए। आँसू बहने लगे लेकिन वो पीछे हट नहीं रही थीं।


“आह्हhhhh… फट गई… मादरचोद… पूरी गांड फट गई… आह्ह्ह…”


फिर एक लंबा धक्का और पूरा 7 इंच का मोटा काला लंड उनकी गांड में जड़ तक समा गया। दीदी का पूरा शरीर काँप उठा।


“आईईईईई… मर गई… हरामी… निकाल मत… अंदर ही रख… आह्ह्ह…”


अलगा ने बिना हिले कुछ पल अंदर रखा। फिर बहुत धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे धक्के पर दीदी की आवाज निकल रही थी। धीरे-धीरे दर्द मजे में बदलने लगा।


“आह्ह्ह… अब… अच्छा लग रहा है… और तेज… गांड चोद… हरामी… थप्पड़ मार… आह्ह्ह…”


अलगा ने स्पीड बढ़ा दी। अब वो पूरे जोर से पेल रहा था। दीदी की मोटी गांड उसके पेट से टकरा-टकरा कर लहरा रही थी। उसने बाल पकड़कर सिर पीछे खींच लिया और और तेजी से धक्के मारने लगा।


“बोल… तू क्या है?”


“रंडी… तेरी रंडी… शिखा रंडी… आह्ह्ह… चोद… और जोर से…”


मैं सामने खड़ा अपना लंड जोर-जोर से हिला रहा था। दीदी की वो चीखें, वो गालीयाँ, वो थप्पड़ों की आवाज… सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।


गुस्सा भी आ रहा था कि ये साला मेरी दीदी को कुतिया बना रहा है, लेकिन लंड इतना सख्त था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था।


अलगा ने अचानक लंड निकाला और फिर से चूत में डाल दिया। फिर गांड में। बारी-बारी दोनों छेदों को पेल रहा था। दीदी अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। वो खुद गांड पीछे कर-करके लंड ले रही थीं।


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“आह्ह्ह… दोनों… फाड़ दे… चूत भी… गांड भी… आज पूरी रंडी बना दे मुझे… आह्ह्ह…”


थोड़ी देर बाद दीदी का शरीर अकड़ गया। उन्होंने जोर से चीखते हुए गांड और चूत दोनों से एक साथ झड़ दिया। पानी अलगा के लंड और जांघों पर लग गया। अलगा रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी पेलता रहा।


“ले… झड़… रंडी… अब मेरी बारी…”


उसने दीदी को पलटा, उनकी टांगें कंधों पर रखीं और मिशनरी में सबसे तेज रफ्तार से चोदने लगा। दीदी की आँखें पलट रही थीं। तीसरी बार झड़ गईं।


आखिर में अलगा ने लंड निकाला, दीदी के चेहरे के ऊपर खड़ा हो गया और जोर-जोर से हिलाते हुए अपना गाढ़ा सफेद माल उनके चेहरे, आँखों, बालों और खुले मुँह पर उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि दीदी के पूरे चेहरे पर सफेद परत चढ़ गई।


दीदी ने जीभ निकालकर जितना बन पड़ा चाट लिया। आँखें बंद किए हुए मुस्कुरा रही थीं।


“स्वादिष्ट… तेरा माल… हरामी…”


अलगा हाँफते हुए एक तरफ बैठ गया। दीदी अभी भी लेटी हुई थीं। चेहरे पर वीर्य, जांघों पर निशान, गांड लाल, चूत सूजी हुई। बाल पूरी तरह बिखरे हुए।


मैंने भी उसी समय झाड़ियों के पीछे अपना माल छोड़ दिया। इतना जोर से कि मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।


थोड़ी देर बाद दोनों कपड़े पहनने लगे। दीदी ने चेहरा साफ किया, लेकिन आँखों के आसपास और बालों में अभी भी सफेद द्रव चमक रहा था। लिपस्टिक पूरी मिट चुकी थी। गर्दन और जांघों पर लाल निशान थे।


वे दोनों धीरे-धीरे कॉलेज की तरफ चल दिए। मैं पीछे-पीछे गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। गुस्सा, जलन, उत्तेजना और एक अजीब सा मजा सब एक साथ।


उस दिन के बाद अलगा ने अगले दो हफ्तों में दीदी को उसी जंगल में पाँच-छह बार और चोदा। कभी सिर्फ मुँह में, कभी चूत में, कभी गांड में। दीदी खुद समय निकालकर जाने लगीं। मैं हर बार छिपकर देखता। कभी-कभी तो खुद भी हाथ से निकाल लेता।


कॉलेज खत्म होने तक उनकी ये चुदाई चलती रही। दीदी के बाकी बॉयफ्रेंड्स भी थे, लेकिन अलगा वाला खेल सबसे गंदा और नियमित था।


और मैं… हर बार सिर्फ देखता रहा।


ये थी मेरी शिखा दीदी की असली चुदाई की कहानी… जो मैंने अपनी आँखों से देखी और अपनी मुट्ठी से महसूस की!


दोस्तों यह Bhai Bahan की Hindi Sex Kahani कैसे लगी जरूर बताए!! और अगर आपको भी अपनी Fantasy - Hindi Sex Stories लिखवानी हो तो नीचे कॉमेंट करे!


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