दो कजिन भाइयों संग रानी की पहली थ्रीसम!
Family Sex : शादी वाले घर में दोनों कजिन भाइयों ने रात को रानी की पैंटी उतारी, एक ने चोदी चूत! दूसरे ने मुँह में ठूंसा लंड! फिर दोनों ने अंदर भर दिया अपना माल!
दोस्तों, मेरा नाम रानी है। मैं इस साइट की नियमित पाठिका हूँ। आज पहली बार अपनी असली जिंदगी की वो कहानी बताने जा रही हूँ जो सोलह साल बाद भी मुझे याद आते ही अंदर तक हिला देती है।
मैं अभी भी वही हूँ - हाइट 5.5, गेहुँआ रंग, फिगर 38-36-44। जहाँ जाती हूँ लोग मेरी गांड ताड़ते हैं।
मेरे पति के साथ मिलकर मैंने 3सम, गैंगबैंग, वाइफ स्वैपिंग सब कर लिया है। तीस से ज्यादा लंड ले चुकी हूँ। लेकिन ये कहानी तब की है जब मैं सिर्फ अठारह साल की थी और अभी भी गाँव की लड़की थी।
हमारे गाँव से सौ किलोमीटर दूर शहर में बुआ की शादी थी। हम तीन दिन पहले पहुँचे। घर में बहुत भीड़ थी। बुआ के दो बेटे थे - आकाश और विकास।
आकाश बड़े वाले। हाइट 5.11, जिम से गठा हुआ शरीर, चौड़े कंधे, और आँखों में एक ऐसी चमक जो सीधे अंदर तक उतर जाती थी।
विकास छोटे वाले। डॉक्टर की पढ़ाई कर रहे थे, 5.6 की हाइट लेकिन बदन आकाश से कम नहीं। दोनों को देखते ही मेरा दिल अजीब सा धड़कने लगा था।
पहली शाम जब मैं घर के काम में मदद कर रही थी तो आकाश किचन में आए। मेरे पास से गुजरते हुए उनका हाथ जानबूझकर मेरी कमर से छू गया। मैंने घूमकर देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे। कुछ नहीं बोले।
बस पानी का गिलास लेकर चले गए। लेकिन वो छूना मेरे शरीर में रह गया।
रात के खाने के समय विकास मेरे सामने बैठे। बातों-बातों में उनकी नजर बार-बार मेरे ब्लाउज पर जा रही थी। एक बार तो जब मैंने झुककर रोटी ली तो उनके चेहरे का रंग ही बदल गया।
मैंने जानबूझकर नजरें मिलाईं। उन्होंने नजरें नहीं फेरीं। बस हल्की सी मुस्कान दी।
उस रात हम दोनों कजन सिस्टर के साथ आकाश-विकास वाले कमरे में सोने गए। बेड पर दोनों भाई सो रहे थे। हमने नीचे फर्श पर बिस्तर बिछाया। मैं जानबूझकर बेड के बिल्कुल किनारे सोई।
मेरी गांड बेड की तरफ थी। मन में अजीब सी बेचैनी थी। दिन भर के उन छोटे-छोटे छूने और निगाहों ने मुझे अंदर से गरम कर रखा था।
रात के करीब साढ़े बारह बजे मेरी नींद खुली। पहले तो कुछ समझ नहीं आया। फिर धीरे-धीरे अहसास हुआ - मेरी गांड पर कोई हाथ रखे हुए है। हल्का सा, लेकिन साफ। दिल जोर से धड़कने लगा।
मैंने साँस रोक ली। हाथ धीरे-धीरे दबाने लगा। गोलाकार। कभी ऊपर, कभी नीचे। ये XXX Antarvasna Hindi Sex Stories आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।
मैंने आँखें बंद रखीं। शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। हाथ अब और हिम्मत से काम कर रहा था। उंगलियाँ मेरी पायजामे की डोर तक पहुँचीं। धीरे से नाड़ा खोला।
मैंने अभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अंदर से मैं चाहती थी कि वो आगे बढ़े।
पायजामा और पैंटी दोनों साथ-साथ नीचे खिसकने लगे। अब मेरी नंगी गांड उनके हाथ में थी। उंगलियाँ बीच की दरार में घूमने लगीं। फिर एक उंगली सीधे मेरी चूत के होंठों पर आई।
मैं पहले से गीली थी। उंगली आसानी से अंदर चली गई।
मैंने बहुत हल्की सिसकी ली। आवाज लगभग नहीं निकली। उंगली अंदर-बाहर होने लगी। धीरे-धीरे। मेरी चूत और गीली होती जा रही थी। दूसरा हाथ आगे आकर मेरे ब्लाउज के ऊपर से बूब्स पर रख दिया गया। मसलने लगा। निप्पल सख्त हो चुके थे।
फिर गरम साँस मेरे कान पर पड़ी। धीमी, भारी आवाज में कहा गया, “रानी… तू जागी हुई है। मैं जानता हूँ। दिन भर से तेरी निगाहें मुझे देख रही थीं… और मेरी तुझे।”
आकाश भैया थे।
मेरा शरीर काँप गया। लेकिन मैं उठी नहीं। न ही उन्हें रोका। उनकी उंगली मेरी चूत में और तेज चलने लगी। दूसरे हाथ से वो मेरे निप्पल को ब्लाउज के ऊपर से ही मरोड़ रहे थे।
“बोल… अगर मना है तो अभी कह दे। मैं रुक जाऊँगा,” उन्होंने फुसफुसाया।
मैं कुछ पल चुप रही। फिर बहुत धीमी आवाज में कहा, “मत रुको…” ये Incest Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
आकाश की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने मुझे धीरे से खींचा। मैं उठी। छोटी सिस्टर गहरी नींद में थी। मैंने बेड पर आकाश के पास जगह बनाई। जैसे ही मैं उनके करीब लेटी, उन्होंने मुझे अपनी तरफ मोड़ा। इस बार कोई झपट्टा नहीं था।
पहले उन्होंने सिर्फ मेरे बालों को सहलाया। फिर गाल पर उंगली फेरी। फिर धीरे से होंठों के करीब आए। मैंने आँखें बंद कर लीं। पहला किस बहुत हल्का था। सिर्फ होंठों का स्पर्श। दूसरा थोड़ा गहरा। तीसरे में उनकी जीभ ने मेरे होंठ खोले।
मैंने भी जवाब दिया। हाथों से उनके सीने को छूने लगी। आकाश ने मेरा ब्लाउज ऊपर किया। ब्रा का हुक खोला। मेरे बूब्स बाहर आते ही उन्होंने एक को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसा। मैं कराह उठी।
तभी मुझे पीछे से किसी और के हाथ का अहसास हुआ। मैं सहम गई। आकाश ने मेरे कान में कहा, “विकास है। हम दोनों एक-दूसरे से कुछ नहीं छुपाते। अगर तू चाहे तो वो भी रह सकता है… वरना अभी चला जाएगा।”
मैंने पीछे मुड़कर देखा। अंधेरे में विकास के चेहरे की रूपरेखा दिख रही थी। उनकी आँखों में वही भूख थी जो आकाश की आँखों में थी। मैंने कुछ पल सोचा। फिर धीरे से सिर हिलाया।
विकास ने मेरे पैरों के पास जगह बनाई। उनकी जीभ पहले मेरी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर पड़ी। फिर धीरे-धीरे ऊपर गई। जब उनकी जीभ मेरी चूत पर लगी तो मेरे मुँह से लंबी सिसकी निकल गई।
आकाश मेरे बूब्स चूस रहे थे और विकास मेरी चूत चाट रहे थे।
मैंने आकाश का हाथ पकड़कर उनके लंड तक ले गई। पजामे के अंदर से ही मोटा और कड़ा लंड महसूस हुआ। मैंने खुद उनका पजामा नीचे किया। लंड बाहर आया - सात इंच का, मोटा और नसों वाला। मैंने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगी।
आकाश ने मेरे बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा, “आराम से रानी… रात लंबी है।”
विकास की जीभ अब और गहराई तक जा रही थी। मेरी कमर अपने आप उनकी तरफ उठ रही थी। आकाश ने मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और फिर से किस करने लगे। इस बार गहरा और भूखा।
मैं दोनों के बीच पिसी जा रही थी। एक मेरे बूब्स और होंठ ले रहा था, दूसरा मेरी चूत। शरीर में आग लग चुकी थी। शर्म अब बहुत पीछे छूट चुकी थी।
मैंने आकाश के लंड को अपने मुँह के करीब लाया। पहले नोक को चाटा। फिर धीरे से मुँह में लिया। आकाश की कराह निकली। विकास ने उसी समय अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं।
“आह्ह्ह… धीरे… भैया…” मेरी आवाज लंड के अंदर दबकर निकली।
आकाश ने मेरे बाल पकड़ लिए लेकिन जोर से नहीं धकेला। बस सहलाते हुए कहा, “ऐसे ही… आराम से चूस…”
विकास मेरी चूत को चाटते और उंगलियों से फैलाते जा रहे थे। मेरा शरीर काँपने लगा। थोड़ी देर बाद मैं उनके मुँह पर ही झड़ गई। मेरे पैर तन गए। आकाश का लंड मेरे मुँह से निकल गया। मैं हाँफ रही थी।
आकाश ने मुझे देखकर मुस्कुराया। “अब तैयार है?”
मैंने आँखें खोलीं। दोनों भाई मेरे नंगे शरीर को देख रहे थे। मैंने धीरे से सिर हिलाया।
आकाश मेरे ऊपर आ गए। उनके लंड का सिरा मेरी गीली चूत पर रखा। आँखों में आँखें डाले धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। मैंने उनकी पीठ पकड़ ली।
“आह्ह्ह… आकाश… धीरे…”
वो रुक-रुककर अंदर जाते रहे। पूरा लंड समाते ही दोनों की साँसें एक हो गईं। विकास ने मेरा हाथ पकड़कर अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया। मैं उसे हिलाते हुए आकाश के धक्के सहने लगी।
रात अब सिर्फ शुरू हुई थी। ये Threesome Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है
आकाश का लंड मेरी चूत में धीरे-धीरे अंदर तक चला गया। मैंने उनकी पीठ पकड़ रखी थी। पहली बार किसी इतने मोटे लंड को ले रही थी। बॉयफ्रेंड वाला उतना मोटा नहीं था।
आकाश रुक-रुककर धक्के दे रहे थे। हर धक्के के साथ मेरी साँसें तेज हो रही थीं।
“आह्ह्ह… आकाश भैया… धीरे… अभी… थोड़ा दर्द… है…”
उन्होंने मेरा चेहरा अपने करीब किया और किस करते हुए धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। विकास मेरे बगल में लेटे हुए थे। उनका लंड मेरे हाथ में था। मैं उसे हिला रही थी।
विकास ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा, “देख तेरा चेहरा कैसे बदल रहा है… मजा आ रहा है ना?”
मैंने सिर हिलाया। आकाश अब नियमित धक्के मार रहे थे। मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। “छप-छप” की हल्की आवाज आने लगी। मेरे बूब्स उनके सीने से दब-दब कर फैल रहे थे।
आकाश ने एक बूब्स मुँह में ले लिया और चूसते हुए चोदने लगे।
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे घुमाया। मैं ऊपर आ गई। खुद लंड को अपनी चूत में सेट करके बैठ गई। पूरा अंदर जाते ही दोनों की कराहें एक साथ निकलीं। मैं ऊपर-नीचे होने लगी।
आकाश ने मेरे बूब्स दोनों हाथों से पकड़ रखे थे। विकास ने उठकर अपना लंड मेरे मुँह के पास ला दिया।
मैंने उसे मुँह में ले लिया। अब एक लंड मेरी चूत में था और एक मुँह में। आकाश नीचे से धक्के दे रहे थे और मैं विकास को चूस रही थी। मेरी आँखों से पानी आ रहा था लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
“आह्ह्ह… रानी… तेरी चूत कितनी गरम है… आह्ह्ह…” आकाश कराह रहे थे।
विकास ने मेरे बाल पकड़ लिए। “और गहरा ले… हाँ… ऐसे…”
मैं दोनों को एक साथ संभाल रही थी। शरीर पसीने से चमक रहा था। थोड़ी देर बाद आकाश की गति तेज हो गई। उन्होंने मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से ऊपर की तरफ धकेलना शुरू कर दिया। मेरी चूत से पानी निकल रहा था।
“भैया… मैं… झड़ने वाली हूँ… आह्हhhhh…”
मेरा शरीर तन गया। मैं विकास का लंड मुँह से निकालते हुए जोर से कराह उठी। आकाश ने भी उसी पल मेरी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया। गरम वीर्य अंदर भर गया। मैं उनके ऊपर गिर पड़ी। दोनों हाँफ रहे थे।
विकास ने मुझे धीरे से नीचे उतारा। आकाश साइड में हट गए। विकास मेरे ऊपर आ गए। उनका लंड भी लगभग उसी साइज का था। उन्होंने बिना देर किए मेरी चूत में डाल दिया।
मामा का वीर्य अभी भी अंदर था। विकास के लंड के साथ वो बाहर की तरफ बहने लगा।
“आह्ह्ह… विकास… और जोर से… चोदो…”
विकास ने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और गहराई तक पेलने लगे। हर धक्का मेरे अंदर तक जा रहा था। आकाश ने मेरे मुँह में अपना आधा नरम लंड दे दिया। मैं उसे चूसने लगी। थोड़ी देर में वो फिर से सख्त हो गया।
विकास करीब दस मिनट तक लगातार चोदते रहे। फिर उन्होंने अचानक लंड निकाला और मेरे मुँह की तरफ बढ़ाया। आकाश हट गए।
विकास ने मेरे बाल पकड़कर लंड मुँह में ठूंस दिया और पूरा वीर्य अंदर उड़ेल दिया। मैंने निगलने की कोशिश की लेकिन बहुत सारा बाहर निकल आया।
हम तीनों बिस्तर पर पड़े हाँफ रहे थे। छोटी सिस्टर अभी भी नीचे गहरी नींद में थी। कमरे में सिर्फ हमारी साँसें गूंज रही थीं।
थोड़ी देर बाद आकाश ने मुझे अपनी तरफ खींचा। “एक राउंड और…”
मैं थकी हुई थी लेकिन शरीर में अभी भी गर्मी बाकी थी। आकाश ने मुझे कुतिया की पोजीशन में कर दिया। पीछे से लंड मेरी चूत में डालकर जोर-जोर से पेलने लगे। विकास मेरे नीचे आ गए। मैंने उनका लंड फिर से मुँह में ले लिया।
इस बार दोनों ज्यादा रुखाई से ले रहे थे। आकाश मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे। “क्या मस्त गांड है तेरी रानी… हिलती कितनी अच्छी है…”
“आह्ह्ह… भैया… और मारो… आह्ह्ह…”
विकास मेरे मुँह में लंड ठोक रहे थे। आकाश पीछे से चोद रहे थे। मेरा शरीर दोनों के बीच झूल रहा था। कुछ देर बाद आकाश ने लंड निकालकर मेरी गांड की दरार पर रगड़ना शुरू कर दिया। मैं सहम गई।
“वहाँ… मत डालना… अभी…” मैंने लंड मुँह से निकालकर कहा।
आकाश हँसे। “अभी नहीं डालूँगा। बस बाहर से मजा ले रहा हूँ।” उन्होंने फिर से चूत में डाल दिया और जोर-जोर से चोदने लगे। इस बार वो जल्दी झड़ गए। मेरी गांड पर ही माल छोड़ दिया।
विकास ने भी मुझे घुमाया और मिशनरी में चोदना शुरू कर दिया। मैं उनकी गर्दन से लिपट गई। उनके धक्के गहरे और तेज थे। मैं फिर से झड़ गई। विकास ने मेरी चूत में ही अपना दूसरा राउंड छोड़ दिया।
रात के करीब तीन बज गए थे। हम सब थक चुके थे। आकाश ने मुझे अपने और विकास के बीच लिटा दिया। दोनों ने मुझे दोनों तरफ से पकड़ रखा था। मेरे शरीर पर उनके हाथ घूम रहे थे। कभी बूब्स, कभी गांड, कभी जांघें।
आकाश ने मेरे कान में कहा, “कल रात भी आना। अकेले। सिस्टर को मत लाना।”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस उनकी छाती से चिपक गई। विकास ने पीछे से मेरी गांड सहलाते हुए कहा, “हम दोनों तेरा इंतजार करेंगे।”
मैं धीरे से नीचे फर्श वाले बिस्तर पर चली गई। पायजामा और ब्लाउज समेटा। शरीर में दर्द था। चूत सूजी हुई थी। गांड पर आकाश का सूखा वीर्य चिपका था। लेकिन मन में एक अजीब सा सुकून और उत्तेजना दोनों थे।
सुबह जब सब उठे तो मैंने सामान्य चेहरा बनाया। छोटी सिस्टर कुछ नहीं जानती थी। आकाश और विकास दोनों ने नाश्ते के समय मेरी तरफ देखकर हल्की मुस्कान दी। उनकी निगाहों में रात वाला वादा साफ झलक रहा था।
दिन भर घर में शादी की तैयारियाँ चलती रहीं। लेकिन मेरा ध्यान बार-बार उन दोनों पर जाता। जब भी आकाश पास से गुजरते उनका हाथ जानबूझकर मेरी कमर या गांड से छू जाता।
विकास एक बार किचन में मिले तो उन्होंने मेरे कान में कहा, “रात को देर से आना। विस्की भी रखी है।”
मेरा दिल फिर से जोर से धड़कने लगा। पहली रात तो बस शुरुआत थी। दूसरी रात क्या होने वाली थी, ये सोचकर ही मेरी चूत गीली होने लगी थी।
आगे की कहानी : "विस्की पिलाकर भाइयों ने रानी की फाड़ी गांड!"
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