भाई के मोटे लंड से बहन की फट गई चूत!

Family Sex Story : गाली-गलौच भरे भाई-बहन के रिश्ते में लगी आग! जब विक्रम के मोटे लंड ने स्नेहा की टाइट चूत फाड़ी! अब भाई से चुदकर चीखती है "भैया जोर से मारो!"


मेरा नाम विक्रम है, 25 साल का। मैं कानपुर में एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। हमारे घर में पापा, मम्मी, मैं और मेरी छोटी बहन स्नेहा रहते हैं।


स्नेहा 21 साल की है और बीएससी फाइनल ईयर में पढ़ रही है।


हम दोनों भाई-बहन बचपन से ही काफी खुलकर रहते हैं। घर में गाली-गलौच, मस्ती और चिढ़ाने का सिलसिला चलता ही रहता है। स्नेहा मुझे "भैया" कम और "ये साला विक्रम" या "हरामी" ज्यादा कहती है।


मैं भी उसे "चूतिया", "पागल", "कुतिया" जैसी गालियाँ प्यार से देता हूँ। मम्मी-पापा को ये सब मालूम है, इसलिए वो अब बोलते भी नहीं।


पिछले दो साल से मम्मी-पापा अक्सर गांव चले जाते हैं क्योंकि दादी की उम्र हो गई है और उनकी तबीयत अक्सर खराब रहती है। इस बार भी वो 15-20 दिन के लिए गांव गए हुए थे। घर में सिर्फ मैं और स्नेहा ही थे।


स्नेहा काफी smart और बोल्ड स्वभाव की लड़की है। गोरी, लंबे बाल, और अब कॉलेज जाते-जाते उसका फिगर अच्छा खासा निखर आया है। 34-28-36 का फिगर, खासकर उसकी गांड अब काफी भारी और गोल हो गई है।


घर में वो ज्यादातर टाइट टी-शर्ट, शॉर्ट्स या सलवार सूट में घूमती रहती है।


एक सामान्य शाम थी। मैं ऑफिस से थका हुआ घर आया। जैसे ही दरवाजा खोला, स्नेहा किचन से चिल्लाई —


"अरे ओए हरामी! आ गया साला? जूते बाहर रख और हाथ धोकर आ। खाना लगाती हूँ।"


मैं मुस्कुराया और बोला, "चुप कर रंडी! पहले मेरे लिए ठंडा पानी ले आ। पूरा दिन ऑफिस में पसीना बहाया है।"


स्नेहा पानी की बोतल लेकर आई और मुझे देते हुए बोली, "ले, पी ले। कितना मोटा हो गया है तू जिम करने के चक्कर में। अब तेरी टी-शर्ट भी टाइट हो रही है।"


"तेरी तरह तो नहीं, तेरी तो गांड देखकर लगता है जैसे दो तरबूज रखे हों," मैंने चिढ़ाते हुए कहा।


स्नेहा ने मुझे घूरा और बोली, "हरामखोर! मेरी गांड पर नजर मत डाल। अपनी नजर संभाल। वरना मम्मी को बता दूंगी कि भैया अपनी बहन की गांड ताकता रहता है।"


हम दोनों हंस पड़े। ये हमारा रोज का सिलसिला था। यह XXX Hindi Sex Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


रात को खाना खाने के बाद हम दोनों लिविंग रूम में सोफे पर बैठकर Netflix देख रहे थे। स्नेहा मेरे बगल में पैर समेटकर बैठी थी। उसने एक पुरानी लूज टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी।


टी-शर्ट काफी ढीली थी, इसलिए जब वो झुकती तो उसके स्तनों की गहरी लाइन साफ दिख जाती थी।


किसी रोमांटिक सीन के दौरान स्नेहा अचानक बोली, "भैया, सच बताना... तू अभी तक किसी लड़की को चोदा है या नहीं?"


मैं हड़बड़ा गया। "अबे क्या बकवास कर रही है? तुझे क्या मतलब?"


"अरे यार, बस पूछ रही हूँ। कॉलेज में मेरी फ्रेंड्स कहती हैं कि उनके भाई उनके सामने ही अपनी गर्लफ्रेंड को चोदते हैं। मैं सोच रही थी कि तू भी ऐसा कुछ करता होगा।"


मैंने उसे एक थप्पड़ मारते हुए कहा, "चुप कर साली! तेरे दिमाग में गंदगी भरी हुई है। हम भाई-बहन हैं, ऐसे नहीं सोचना चाहिए।"


स्नेहा हंसी और मेरे सीने पर सिर रख दिया। "अच्छा जी, गुस्सा मत करो। बस मजाक कर रही थी। लेकिन सच में... कभी-कभी मन करता है कि कोई अपना हो, जिसके सामने बिना शर्म के सब कुछ कह सकूँ।"


मैं चुप रहा। उसकी बातें सुनकर मेरे मन में एक अजीब सा रोमांच हो रहा था, लेकिन मैंने खुद को रोका।


रात को सोने से पहले स्नेहा मेरे रूम में आई। "भैया, AC मेरा खराब हो गया है। आज तेरे रूम में सो सकती हूँ?"


"हाँ सो जा, लेकिन दीवार की तरफ सोना। मेरी तरफ मत आना," मैंने कहा।


स्नेहा मुस्कुराई और बोली, "डर मत, तेरी बहन हूँ... अभी तक तो।"


वो मेरे बगल में लेट गई। अंधेरे में उसकी सांसें साफ सुनाई दे रही थीं।


अगली सुबह मैं उठा तो स्नेहा अभी भी मेरे बगल में सो रही थी। उसकी टी-शर्ट ऊपर चढ़ गई थी और उसकी पेट और कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। शॉर्ट्स भी थोड़े ऊपर सरक गए थे, जिससे उसकी मोटी जांघें साफ नजर आ रही थीं।


मैं कुछ देर तक उसे देखता रहा। फिर खुद को डांटा और बेड से उठ गया।


"उठ साली! 8 बज गए हैं," मैंने उसे हिलाते हुए कहा।


स्नेहा आँखें मलते हुए बोली, "अरे यार... थोड़ा और सोने दे ना हरामी। रात भर तू करवटें बदलता रहा, मुझे नींद नहीं आई।"


"मैं करवटें बदल रहा था? तू तो मेरे ऊपर चढ़ आई थी कल रात," मैंने चिढ़ाते हुए कहा।


स्नेहा हंस पड़ी। "झूठ मत बोल। मैं तो दीवार की तरफ सोई थी। तू ही मेरे पास सरक आया था।"


हम दोनों नॉर्मल तरीके से तैयार हुए। मैं ऑफिस चला गया। पूरे दिन ऑफिस में भी स्नेहा की वो सुबह वाली इमेज बार-बार आ रही थी। मैं खुद को समझा रहा था कि वो मेरी छोटी बहन है, लेकिन मन नहीं मान रहा था।


शाम को जब मैं घर वापस आया तो स्नेहा किचन में थी। इस बार उसने एक बहुत टाइट ब्लैक टॉप और ग्रे शॉर्ट्स पहने हुए थे। टॉप इतना टाइट था कि उसके 34 साइज के स्तन अच्छे से उभरे हुए दिख रहे थे।


"क्या बना रही है?" मैंने पूछा।


"तेरे लिए चिकन करी और रोटी। आज मेरा मूड है," उसने कहा और मुड़कर मुझे देखा।


खाने के बाद हम फिर सोफे पर बैठ गए। इस बार स्नेहा मेरे बहुत करीब बैठी। एसी की ठंडक में वो धीरे-धीरे मेरे कंधे पर सिर टिका रही थी।


"भैया... एक बात बताऊँ?" उसने धीमी आवाज में कहा।


"बोल।" यह Desi Sex के साथ Antarvasana Bhai Bahan Ki Chudai Ki Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


"पिछले कुछ महीनों से मुझे अजीब सा लगता है... जब तू मुझे गाली देता है, चिढ़ाता है... तो मुझे अच्छा लगता है। और कभी-कभी... जब तू मुझे देखता है, तो मेरे शरीर में कुछ होता है।"


मैं चुप रहा। दिल जोरों से धड़क रहा था।


स्नेहा आगे बोली, "मुझे पता है ये गलत है। हम भाई-बहन हैं। लेकिन मैं झूठ नहीं बोल सकती। मुझे तेरे पास आने का मन करता है। तू मुझे छूए, मुझे गले लगाए... और शायद... और भी कुछ।"


मैंने गहरी सांस ली और बोला, "स्नेहा, ये सब सोचना भी मत। अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा? मम्मी-पापा, समाज... सब बर्बाद हो जाएगा।"


स्नेहा मेरी तरफ मुड़ी। उसकी आँखें नम थीं। "मुझे भी डर लगता है भैया। लेकिन मैं क्या करूँ? रात को अकेले में जब मैं... खुद को छूती हूँ, तो अक्सर तेरे नाम का लेती हूँ।"


ये सुनकर मेरा लंड अपने आप खड़ा हो गया। मैंने घबराकर पैर मोड़ लिए।


उस रात फिर बिजली चली गई। बारिश भी शुरू हो गई थी। स्नेहा फिर मेरे रूम में आ गई।


"भैया, अकेले डर लग रहा है। आज भी यहीं सोऊँगी।"


मैंने हाँ कह दिया।


अंधेरे में वो मेरे बहुत करीब लेटी। इस बार उसका एक हाथ मेरी कमर पर था। धीरे-धीरे उसकी उंगलियाँ मेरे पेट पर घूमने लगीं।


"भैया... तेरा शरीर बहुत अच्छा है," उसने फुसफुसाते हुए कहा।


"स्नेहा... बस कर।"


"क्यों? तुझे अच्छा नहीं लग रहा क्या?"


मैं चुप रहा। उसकी सांसें अब मेरे गले के पास आ रही थीं। अचानक उसने हल्का सा किस मेरे गाल पर कर दिया।


"स्नेहा!" मैंने चौंककर कहा।


"बस एक छोटा सा किस... प्लीज मना मत कर। मैं तेरी बहन हूँ ना? भाई को प्यार करने में क्या बुराई है?"


मैंने उसे रोका नहीं। वो धीरे से मेरे सीने पर सिर रखकर लेट गई। उसके स्तन मेरी बांह से दब रहे थे। मैं महसूस कर सकता था कि उसके निप्पल्स सख्त हो चुके हैं।


कुछ देर बाद उसने धीरे से पूछा, "भैया... तेरा भी खड़ा हो रहा है क्या?"


मैं शर्म से कुछ नहीं बोल पाया। यह Nonveg Brother Sister Hindi Sex Story आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


स्नेहा हल्के से हंसी और बोली, "मुझे पता है... मैं महसूस कर रही हूँ। तू भी मुझसे attract हो रहा है ना?"


मैंने आखिरकार मान लिया, "हाँ... लेकिन ये बहुत खतरनाक है स्नेहा। हम रुक जाएँ तो बेहतर है।"


स्नेहा मेरे कान के पास फुसफुसाई, "रुकना चाहते हो तो रुक जाओ... लेकिन मुझे नहीं रुकना। मैं अब और इंतजार नहीं कर सकती।"


उस रात हम दोनों एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। कोई और आगे नहीं बढ़ा, लेकिन हवा में भारी तनाव और आकर्षण साफ महसूस हो रहा था।


अगले तीन-चार दिन हम दोनों के बीच का सिलसिला और गहरा होता गया। दिन में तो हम नॉर्मल भाई-बहन जैसे बातें करते, गालियाँ देते, लेकिन रात को मेरे रूम में अकेले रहते ही माहौल बदल जाता।


एक रात स्नेहा मेरे बेड पर आई और सीधे मेरी गोद में बैठ गई। उसने सिर्फ एक लंबी टी-शर्ट पहनी हुई थी, नीचे कुछ नहीं।


"भैया... आज मैं बहुत गर्म हो रही हूँ," उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा।


"स्नेहा, हम अभी भी रुक सकते हैं..." मैंने कमजोर आवाज में कहा।


"रुकना नहीं है मुझे।" कहते हुए उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर की और मेरे सीने पर किस करने लगी। उसके होंठ गर्म थे। धीरे-धीरे वो नीचे की तरफ सरकती गई और मेरी शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे खड़े लंड को हाथ से दबा दिया।


"वाह भैया... कितना मोटा और सख्त हो गया है तेरा। मेरी वजह से?" उसने शरारत से मुस्कुराते हुए पूछा।


मैं कुछ नहीं बोल पाया। स्नेहा ने मेरी शॉर्ट्स नीचे सरका दी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया। उसने कुछ पल उसे देखा फिर आँखें बंद करके मुंह में ले लिया।


"आह्ह... स्नेहा... धीरे..." मैं कराह उठा।


वो मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी। कभी जीभ घुमा रही थी, कभी गहरे मुंह में ले रही थी। "मम्मी-पापा को पता चला तो मार डालेंगे हमें," मैंने सांस फूलते हुए कहा।


स्नेहा लंड मुंह से निकालकर बोली, "तो मत बताना। ये हमारा राज रहेगा। मैं तेरी छोटी रंडी बनना चाहती हूँ भैया।"


ये सुनकर मेरा दिमाग पूरी तरह से कामवासना से भर गया। मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया। उसकी टी-शर्ट ऊपर कर दी। उसके गोरे स्तन सामने थे। मैंने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।


"आह्ह... भैया... और जोर से चूसो... काटो उन्हें... मेरे चुचे बहुत दिनों से प्यासे हैं," स्नेहा कराह रही थी।


मैंने उसकी शॉर्ट्स भी उतार दी। उसकी चूत पूरी तरह गीली और साफ थी। मैंने उंगलियों से छुआ तो वो सिहर उठी।


"भैया... पहले उंगली डालो... फिर अपना मोटा लंड डालना," उसने शर्माते हुए कहा।


मैंने दो उंगलियाँ उसकी चूत में डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। स्नेहा कमर उठा-उठाकर मेरी उंगलियों का साथ दे रही थी। "हां... इसी तरह... और तेज... आह्ह... फट जाएगी मेरी चूत... लेकिन मत रुकना।"


कुछ देर उंगली करने के बाद मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था।


"स्नेहा... आखिरी मौका है। मना कर दे तो अभी रुक जाता हूँ," मैंने कहा।


स्नेहा ने मेरी कमर पकड़ी और बोली, "चोद दो मुझे भैया... अपनी बहन की चूत फाड़ दो आज। मैं तेरी हूँ... पूरी तरह तेरी रंडी हूँ।"


मैंने धीरे से दबाव डाला। मेरा लंड उसकी टाइट चूत में घुसने लगा। स्नेहा दर्द से कराह उठी — "आह्ह... बड़ा है तेरा... धीरे भैया... फट रही हूँ मैं..."


आधा लंड अंदर डालकर मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया। स्नेहा की आँखों से आंसू निकल आए लेकिन वो मुस्कुरा रही थी।


"अब जोर से चोदो... अपनी छोटी बहन को जोर से चोदो... आह्ह... हां... इसी तरह..."


मैंने स्पीड बढ़ा दी। कमरे में "थप थप थप" की आवाज गूंजने लगी। स्नेहा अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेटे हुए थी और जोर-जोर से चीख रही थी — "फाड़ दो मेरी चूत... भैया का लंड बहुत मस्त है... और गहरी मारो... हां... हां... आह्ह..."


मैंने उसे doggy style में किया। उसकी मोटी गांड ऊपर थी। मैंने गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और फिर से जोर से चोदने लगा।


"ले साली... ले अपनी भाई का लंड... कितनी टाइट चूत है तेरी... रोज चोदूंगा अब तुझे," मैंने dirty talk शुरू कर दिया।


"हां भैया... रोज चोदना... जब मन करे चोदना... मैं तेरी personal घरेलू रंडी हूँ... आह्ह... मेरी गांड भी मारना कभी..."


लगभग 20 मिनट तक मैंने उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदा — missionary, doggy, फिर cowgirl में स्नेहा खुद ऊपर चढ़कर अपनी गांड हिला रही थी।


आखिर में जब मैं झड़ने वाला था तो स्नेहा बोली, "अंदर डाल दो भैया... अपनी बहन की चूत में अपना गर्म पानी भर दो... प्लीज..."


मैंने जोर-जोर से ठोके लगाए और स्नेहा की चूत के अंदर ही झड़ गया। स्नेहा भी मेरे साथ ही झड़ गई। उसका पूरा शरीर कांप रहा था। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।


कुछ देर बाद स्नेहा ने मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए कहा, "भैया... आज के बाद हम रोज ऐसा करेंगे ना? लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए।"


मैंने उसके माथे को चूमते हुए कहा, "हाँ... लेकिन बहुत सावधानी से। अगर मम्मी-पापा को शक भी हुआ तो सब खत्म हो जाएगा।"


स्नेहा मुस्कुराई और बोली, "डर मत। दिन में मैं तुझे गालियाँ दूंगी... रात को तेरी रंडी बन जाऊंगी।"


उस रात के बाद हमारे बीच एक नया रिश्ता शुरू हो गया। दिन में हम दोनों एक-दूसरे को चिढ़ाते, गालियाँ देते, मस्ती करते। लेकिन जैसे ही घर में अकेले होते, स्नेहा मेरी गोद में आ जाती और हम दोनों भूल जाते कि हम भाई-बहन हैं।


कई बार तो वो ऑफिस से आने के तुरंत बाद मुझे दरवाजे पर ही चूम लेती और कहती, "जल्दी नहा लो हरामी... तेरी बहन की चूत आज बहुत प्यासी है।"


ये हमारा राज था। खतरनाक, गर्म और बेहद लत लगाने वाला।


तो दोस्तों यह Bhai Bahan Ki Chudai Ki कहानी कैसे लगी कॉमेंट करके जरूर बताए! 

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