पड़ोस वाली भाभी ने चोदना सिखाया! 02
Hindi Sex Stories : कैसे छोटू ने ट्यूशन पढ़ने के बहाने आकर अपनी भाभी की चूत चाटी फिर गांड और चूत दोनों फाड़ दी! रोज़ाना चोदकर बनाया भोंसड़ा!! Antarvasna Story
इस कहानी का पहला भाग : "पड़ोस वाली भाभी ने चोदना सिखाया!"
मैंने अपनी जीभ उनकी चूत की फांकों के बीच घुसा दी। नमकीन, गर्म रस मेरी जीभ पर फैल गया। मैं जोर-जोर से चाटने लगा - ऊपर क्लिटोरिस को चूसता, फिर जीभ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। भाभी पागल हो रही थीं।
"आआआह्ह्ह! हां छोटू... वहां... चूसो... उममम... फाड़ दो मेरी चूत... आह्ह! मैं झड़ने वाली हूं... आह्ह्ह!"
उनकी टांगें कांपने लगीं। मैंने तेजी से चाटा और वे एक जोरदार झटके के साथ झड़ गईं। उनके चूत का गर्म पानी मेरे मुंह पर छूट गया। मैंने सब चाट लिया।
भाभी ने मुझे उठाया और मेरी पैंट खोल दी। मेरा मोटा, खड़ा लंड बाहर आ गया। "वाह छोटू... आज और भी बड़ा और सख्त लग रहा है।" कहते हुए भाभी घुटनों पर बैठ गईं और बिना किसी रुके पूरा लंड मुंह में ले लिया।
"ग्लक... ग्लक... उममम... मम्म..." वे गहरी गला चूस रही थीं। कभी पूरा मुंह में, कभी सिर्फ टॉप चूसतीं, कभी अंडों को चाटतीं। मैं उनके बाल पकड़े हुए उनके मुंह में धक्के दे रहा था। "भाभी... आपका मुंह तो स्वर्ग है... चूसो... और जोर से..."
कुछ देर बाद मैंने उन्हें उठाया और बेडरूम में ले गया। भाभी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी टांगें अपने कंधों पर रख दीं। मेरा लंड उनकी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था।
"डाल दो छोटू... अब और इंतजार नहीं... फाड़ दो अपनी भाभी की चूत..." वे अधीर हो रही थीं।
मैंने एक जोरदार धक्का मारा। "झप्प!" मेरा पूरा लंड उनकी गर्म, टाइट चूत में घुस गया।
"आआआह्ह्ह्ह! मर गई... छोटू... बहुत मोटा है तेरा... आह्ह! धीरे... उममम... अब जोर से... चोदो मुझे!"
मैं तेजी से धक्के मारने लगा। कमरे में छप-छप-छप की आवाज़ गूंज रही थी। उनकी चूचियां उछल रही थीं। मैं झुककर उन्हें चूसता, काटता, और नीचे जोर-जोर से चोदता।
"हां छोटू... फाड़ दो... मेरी चूत तुम्हारी है... रोज चोदना... आह्ह! आह्ह! मैं तुम्हारी रंडी हूं... उममम... और तेज... और तेज!"
हम दोनों पसीने से तर थे। मैंने पोजीशन बदली। उन्हें कुत्ते की तरह घुटनों पर करवाया और पीछे से उनकी गांड पकड़कर लंड घुसा दिया।
"आह्ह्ह! गांड में नहीं... चूत में... हां... यही... मारो... फाड़ दो मेरी गांड... आह्ह!"
उनकी सफेद गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मैं उनके बाल खींचे, गर्दन चूमी और लगातार चोदता रहा। भाभी कई बार झड़ चुकी थीं।
आखिरकार मैं भी झड़ने वाला था। "भाभी... निकल रहा है..."
"अंदर डाल दो छोटू... मेरी चूत में भर दो अपना गर्म पानी... आह्ह!"
मैंने जोर का झटका मारा और उनके अंदर ही सारा माल उड़ेल दिया। हम दोनों थककर लेट गए। भाभी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं, मेरे लंड को अभी भी अपनी उंगलियों से सहला रही थीं।
"अब रोज आएगा ना छोटू?" उन्होंने प्यार से पूछा।
"हां भाभी... रोज... आपकी चूत और गांड दोनों की चुदाई करूंगा," मैंने कहा।
उस पहले पूरे सेक्स के बाद हम दोनों बिस्तर पर नंगे लेटे हुए थे। भाभी मेरी छाती पर सिर रखे लेटी थीं, उनकी उंगलियां मेरे अब भी अर्ध-खड़े लंड को धीरे-धीरे सहला रही थीं। मेरा गर्म वीर्य उनकी चूत से रिस-रिस कर उनकी जांघों पर बह रहा था।
"छोटू... आज तूने अपनी भाभी को अच्छे से चोदा... लेकिन अभी तो शुरुआत है," भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा और मेरे लंड को हल्का दबा दिया। "मम्म... फिर से खड़ा हो रहा है... कितना जवान लंड है तेरा।"
मैंने मुस्कुराते हुए उनकी गांड पर हाथ फेरा। "भाभी, अब से रोज ट्यूशन का समय आपकी चूत और गांड की ट्यूशन होगा।"
भाभी हंस पड़ीं और मेरे ऊपर चढ़ गईं। उनकी गीली चूत मेरे पेट पर रगड़ रही थी। "तो आज ही दूसरी क्लास शुरू कर दो... मैं अभी भी भूखी हूं।"
मैंने उन्हें पलटकर अपने मुंह के ऊपर बिठा लिया। 69 पोजीशन। उनकी चूत मेरे मुंह पर थी और मेरा लंड उनके मुंह में। मैंने उनकी चूत को जोर-जोर से चाटना शुरू किया। "आह्ह्ह! छोटू... हां... चाटो... अपनी जीभ अंदर डालो... उममम... स्वाद ले मेरी चूत का..."
भाभी भी मेरा पूरा लंड मुंह में लेकर गला चूस रही थीं। "ग्लक... ग्लक... उमम... मोटा लंड... चूसती हूं मैं इसे रोज..." उनकी थूक मेरे अंडों तक बह रहा था।
हम दोनों एक-दूसरे को चाटते-चूसते 10 मिनट तक पागल रहे। फिर मैंने उन्हें उठाया और दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। पीछे से उनकी टांगें थोड़ी फैलाकर मेरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया।
"आआआह्ह्ह! फाड़ दिया... छोटू... जोर से... हां... चोदो अपनी भाभी को... आह्ह! आह्ह! छप... छप... छप..."
मैं उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मार रहा था। उनकी बड़ी गांड मेरे पेट से हर धक्के पर टकरा रही थी। मैंने झुककर उनकी पीठ चूमते हुए एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी क्लिट चुटकी ली। भाभी पागल हो गईं।
"नहीं... छोटू... मैं फिर झड़ जाऊंगी... आह्ह! हां... वहीं... मारो... मेरी चूत फट जाएगी आज... उममम... और तेज... चोदो मुझे जैसे कुत्ती को चोदा जाता है!"
मैंने उनकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। "पटाक!" भाभी सिहर उठीं। "हां... मारो... गांड लाल कर दो... मैं तुम्हारी सेक्सी रंडी भाभी हूं... आह्ह!"
हम दोनों फिर एक साथ झड़ गए। इस बार मैंने बाहर निकालकर उनकी गांड पर अपना गर्म पानी उड़ेल दिया। भाभी ने मुड़कर मेरे लंड को मुंह में लेकर साफ कर दिया।
उस दिन के बाद हमारा रोज का रूटीन बन गया।
दूसरे दिन...
मैं दोपहर में पहुंचा। भाभी ने बच्चे को सोने के लिए उनके रूम में भेज दिया था। आज उन्होंने एक शॉर्ट स्कर्ट और टॉप पहना था। जैसे ही मैं अंदर घुसा, भाभी ने दरवाजा बंद किया और मुझे सोफे पर धकेल दिया।
"आज जल्दी चोद मुझे... तेरे पापा-मम्मी कभी भी आ सकते हैं... लेकिन मुझे तेरे लंड की बहुत जरूरत है," वे बोलीं।
मैंने उनकी स्कर्ट ऊपर की। कोई पैंटी नहीं पहनी थीं। चूत पहले से गीली थी। मैंने उन्हें सोफे पर घुटनों के बल बैठाया और पीछे से लंड घुसा दिया।
"आह्ह्ह! हां छोटू... गहरा... और गहरा... फाड़ दो... आह्ह! आह्ह!"
छप-छप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैं उनकी स्कर्ट ऊपर करके उनकी नंगी गांड को देखते हुए चोद रहा था। बीच-बीच में उनकी चूचियों को टॉप के अंदर से मसलता।
अचानक बाहर कोई आवाज आई। भाभी घबरा गईं लेकिन चुदाई नहीं रुकी। "जल्दी... तेज... निकाल दो अंदर... आह्ह!" हम दोनों जल्दी-जल्दी झड़ गए।
तीसरे दिन...
भाभी ने मुझे फोन करके बुलाया। "छोटू, आज नहाने के बाद आना।"
जब मैं पहुंचा तो भाभी बाथरूम में नंगी खड़ी थीं। पानी बह रहा था। मैं कपड़े उतारकर उनके साथ घुस गया। गर्म पानी के नीचे हम एक-दूसरे को चूम रहे थे।
मैंने भाभी को दीवार से सटाया और उनकी एक टांग उठाकर लंड अंदर डाल दिया। पानी की धार के बीच छप-छप की आवाज और तेज हो रही थी।
"उममम... छोटू... पानी में चुदना कितना मजेदार है... हां... मेरी चूत को पानी के साथ चोदो... आह्ह! आह्ह! मैं पागल हो रही हूं... चूसो मेरी चूचियां!"
मैं उनकी चूचियों को चूसता हुआ जोर-जोर से धक्के मार रहा था। भाभी की चीखें बाथरूम में गूंज रही थीं। "आआह्ह! छोटू... मैं आ गई... झड़ रही हूं... आह्ह्ह!"
उस दिन मैंने पहली बार उनकी गांड चुदाई की। भाभी को बाथरूम के फर्श पर घुटनों के बल बैठाया। मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे-धीरे उनकी टाइट गांड में घुसाने लगा।
"आह्ह्ह! धीरे छोटू... पहली बार है... आह्ह! दर्द हो रहा है... लेकिन रुकना मत... पूरा डाल दो... उममम... हां... अब जोर से... फाड़ दो अपनी भाभी की गांड!"
धीरे-धीरे पूरी गांड में घुस गया। मैंने उनकी कमर पकड़कर पंपिंग शुरू की। भाभी पहले दर्द से कराह रही थीं, फिर मजा लेने लगीं।
"हां... अब तेज... गांड मारो... चोदो अपनी भाभी की गांड... आह्ह! आह्ह! मैं गांड चुदवाने वाली रंडी बन गई हूं तेरी... उममम... और तेज... भर दो अपनी भाभी की गांड में!"
मैंने जोर-जोर से उनकी गांड चोदी। उनकी सफेद गांड लाल हो गई थी थप्पड़ों से। आखिरकार मैंने उनकी गांड के अंदर ही अपना सारा माल भर दिया। भाभी थककर फर्श पर लेट गईं, लेकिन चेहरे पर संतोष था।
"छोटू... तूने मुझे पूरी तरह से अपनी बना लिया... अब मेरी चूत, गांड और मुंह... सब तुम्हारा है।"
उसके बाद हमारे सेक्स सेशन्स और गर्म होते गए। कभी बालकनी में, कभी रात को जब भैया बाहर होते, कभी टेबल पर झुकाकर... हर दिन नई पोजीशन, नई हरकत। भाभी अब पूरी तरह से सेक्स की भूखी हो चुकी थीं।
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