भाभी ने चुदाई दिखाकर लिया लन्ड!
Desi Sex Kahani : भाभी ने भईया के साथ चुदाई के दौरान खिड़की से दिखाई नंगी चूत! फिर इसारों से खड़ा कर दिया लंड! फिर जब मेरी गर्लफ्रेंड आई तब भाभी ने कर दिया कांड!
कैसे हो दोस्तों! आज मैं तुम्हें अपनी असली जिंदगी की वो कहानी सुना रहा हूँ जो अब तक सिर्फ मेरे दिमाग और मुट्ठों में कैद थी। मेरा नाम हाशमी है। उम्र इक्कीस साल।
तगड़ा शरीर, गोरा रंग, चौड़े कंधे और चेहरा ऐसा कि लड़कियाँ एक बार देख लें तो दूसरी नज़र डाले बिना नहीं रह पातीं। लेकिन इन सबके बावजूद मेरा सबसे बड़ा पागलपन कोई गर्लफ्रेंड नहीं, बल्कि घर की वो औरत थी जिसे मैं भाभी कहता था।
मेरे बड़े भाई की शादी हुए सिर्फ छह महीने हुए थे। वो सरकारी नौकरी करता था और पोस्टिंग भी इसी शहर में थी, इसलिए वो और उनकी पत्नी रोज़ी भाभी हमारे ही घर में रहते थे।
रोज़ी भाभी… नाम लेते ही मेरा लंड अपनी पैंट में करवट बदलने लगता था। अट्ठाईस साल की उम्र में भी उनका बदन ऐसा था जैसे गाँव की खेतों में काम करने वाली मजबूत औरत का हो -मज़बूत, गठीला और हर जगह भरा-भरा।
तीस इंच के भारी-भरकम गोल चूचे, अट्ठाईस इंच की पतली कमर और अट्ठाईस इंच की मोटी, गोल, हिलती-डुलती गाँड। जब वो घर में साड़ी या नाइटी पहनकर चलतीं तो उनकी गाँड की लहरें मेरे दिमाग में रात भर घूमती रहतीं।
मैं उनका दीवाना पहले दिन से था। जब पहली बार उन्हें देखा था, साड़ी में बंधी कमर और चूचों की वो उभरी हुई आकृति… मेरा सात इंच का मोटा, नसों वाला लंड तुरंत तन गया था।
उसके बाद तो हालत और खराब हो गई। मैं रोज रात अपनी बालकनी की सीट पर बैठकर उनके कमरे की खिड़की से भाई-भाभी की चुदाई देखता। भाभी जब नहातीं तो बाथरूम की छोटी सी खिड़की से चुपके से वीडियो बना लेता।
उनकी गीली पैंटी चुराकर अपने कमरे में पहनता, चूत वाली जगह की हल्की खट्टी-मीठी खुशबू सूंघता और कल्पना करता कि एक दिन वही गर्म, चिकनी चूत मेरे लंड को निगल रही है।
कुछ दिन पहले की बात है। रात के करीब साढ़े बारह बज रहे थे। मैं अपनी बालकनी की अंधेरी सीट पर बैठा था। भाई-भाभी के कमरे में हल्की रोशनी जल रही थी। खिड़की आधी खुली थी।
भाभी नंगी थीं। उनके तीस इंच के चूचे भाई के हाथों में दबे जा रहे थे और वो घोड़ी बनकर ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने अपने पजामे की डोरी ढीली की और लंड बाहर निकाला। हाथ में तेल लगाकर धीरे-धीरे मूठ मारने लगा।
तभी भाभी की नज़र मुझ पर पड़ी। ये Antarvasna Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।
मेरा दिल बैठ गया। लगा अब चीखेंगी, भाई को जगाएँगी, सब खत्म। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आई। वो मुझे देखती रहीं… और फिर धीरे-धीरे मुस्कुराईं। एक कातिल मुस्कान।
उन्होंने भाई को नीचे लिटाया और खुद ऊपर बैठ गईं। फिर अचानक खड़ी हो गईं। कमरे के बीचोंबीच, खिड़की के ठीक सामने। उनकी मोटी गाँड मेरी तरफ थी।
उन्होंने दोनों हाथों से अपनी गाँड के गोल हिस्सों को फैलाया और मुझे पूरा नज़ारा दिखाया - गुलाबी, थोड़ी सूजी हुई चूत और बीच में वह छोटा सा छेद जो पहले से चमक रहा था।
मैंने सांस रोक ली। भाभी ने एक लंबी उंगली अपनी चूत की गहराई तक उतारी, अंदर-बाहर किया, फिर वही उंगली निकालकर अपने मुंह में ले ली और चूसी। आँखें मेरी आँखों में गड़ाए हुए।
उनके चेहरे पर न कोई शर्म थी, न डर। सिर्फ वासना। फिर वो घुटनों के बल बैठ गईं, भाई का लंड हाथ में लिया और मुझे देखते हुए उसकी टॉप को चूमा। जीभ से चाटा। फिर पूरा मुंह में ले लिया।
ग्लक… ग्लक… की आवाज़ आने लगी। वो लगातार मुझे देख रही थीं, जैसे कह रही हों—“देख, मैं कैसे चूसती हूँ… तू भी ऐसा ही कर।”
मेरे हाथ कांप रहे थे। मैंने पजामा और नीचे उतार दिया। मेरा सात इंच का मोटा लंड सीधा खड़ा था, नसें फूली हुई, टॉप से पहले से ही पानी टपक रहा था। भाभी ने देखा और उनकी आँखें चमक उठीं।
उन्होंने भाई का लंड छोड़कर मुझे इशारा किया—अपना लंड दिखा। मैंने और पास खींच लिया। अब सिर्फ खिड़की का शीशा और थोड़ी दूरी हम दोनों के बीच थी।
भाभी ने फिर से भाई का लंड मुंह में लिया, लेकिन आँखें मेरी लंड पर थीं। वो चूसते हुए एक हाथ से अपनी चूत खोलकर मुझे छेद दिखा रही थीं।
फिर उन्होंने बैठने का पोज़ लिया। भाई के लंड पर धीरे-धीरे बैठ गईं। “आह्ह्ह…” की लंबी सिसकी निकली उनके मुंह से। वो मुझे देखते हुए ऊपर-नीचे होने लगीं। ये Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
हर बार जब वो पूरी तरह बैठतीं तो उनकी मोटी गाँड फैल जाती और चूत के होंठ लंड को निगल लेते। उन्होंने हाथ से मूठ मारने का इशारा किया। मैंने आज्ञा मान ली। अपना लंड पकड़कर तेज-तेज हिलाने लगा।
भाभी की आवाज़ें अब साफ सुनाई दे रही थीं—
“आआआह… ओह्ह्ह्ह… कितना मोटा है जी… मन करता है पूरा खा जाऊँ… आह्ह… अच्छा लग रहा है न… असली मज़ा तो बाकी है बाबू…”
भाई की आँखें बंद थीं, आनंद में डूबे हुए। उसने सिर्फ इतना कहा, “रोज़ तो खाती हो, आज क्या नई बात है जाने मन…” लेकिन भाभी जवाब देने के मूड में नहीं थीं। वो सिर्फ मुझे देख रही थीं और जोश के साथ कूद रही थीं।
उनकी चूचें जोर-जोर से हिल रही थीं, निप्पल सख्त। मैं भी अब नियंत्रण खो चुका था। मूठ की रफ्तार तेज कर दी। भाभी की उत्तेजना देखकर मेरा शरीर कांपने लगा।
अचानक भाभी की कमर अकड़ गई। उन्होंने जोर से दाँत दबाए और “आह्ह्ह्ह… मैं झड़ गई…” कहते हुए अपने आप को भाई के ऊपर गिरा दिया। उसी पल भाई का भी पानी निकल गया।
और मैं… मैंने भी खड़े-खड़े अपने गाढ़े माल को बालकनी की रेलिंग पर झाड़ दिया। सफेद धारें निकलती रहीं।
भाभी ने आँखें खोलीं। मेरा लंड अभी भी तना हुआ था, ऊपर से माल चिपका हुआ। उन्होंने अपने पास पड़ी काली पैंटी उठाई और खिड़की की तरफ फेंक दी। पैंटी हवा में तैरती हुई मेरे पास आई।
मैंने पकड़ ली। उसमें उनकी चूत की ताज़ी खुशबू थी—खट्टी, मीठी और गरम। मैंने उससे अपना लंड साफ किया और पैंटी वापस उनकी तरफ फेंक दी। भाभी ने पैंटी को पकड़ा, लंबी सांस लेकर सूंघा, और उनकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया।
उन्होंने हवा में मुझे चूमने का इशारा किया, एक कातिल स्माइल दी, और भाई के ऊपर ही गिर गईं।
मैं कांपते हुए अपने कमरे में लौट आया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। हाथ में अभी भी उनकी पैंटी की खुशबू बाकी थी। उस रात मैंने तीन बार और मुट्ठ मारी।
हर बार वही नज़ारा आँखों के सामने घूमता रहा—भाभी की खुली चूत, उनकी उंगली, उनकी आँखें, और वह पैंटी।
सुबह हुई तो सब कुछ सामान्य लग रहा था। भाभी किचन में नाश्ता बना रही थीं। नाइटी पहने, बाल बिखरे, चेहरा बिल्कुल वैसा जैसे रात में कुछ हुआ ही न हो।
उन्होंने मुझे चाय दी, मुस्कुराईं, और पूछा, “नींद अच्छी आई?” मैंने सिर्फ सिर हिलाया। हिम्मत नहीं हो रही थी आँखों में आँखें डालने की। लेकिन अंदर ही अंदर एक आग जल रही थी।
मैंने सोचा, शायद वो भूल गई हों… या अनदेखा कर रही हों। लेकिन मैं गलत था। वो कुछ और ही खेल खेलने वाली थीं। ये Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
सुबह का नाश्ता सामान्य रहा। भाभी ने पराठे बनाए, अचार निकाला और मुझे चाय दी। उनका चेहरा बिल्कुल शांत था, जैसे रात की कोई बात ही न हुई हो। लेकिन जब वो किचन में झुककर बर्तन धो रही थीं तो उनकी मोटी गाँड नाइटी के अंदर से साफ उभर रही थी।
मैंने जानबूझकर उनकी तरफ पीठ करके बैठा, फिर भी मेरा लंड पैंट में तन गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। बार-बार ख्याल आता—क्या वो सच में भूल गईं? या खेल खेल रही हैं?
नाश्ता खत्म होने के बाद भाई दफ्तर चले गए। घर में सिर्फ मैं और भाभी रह गए। मैंने हिम्मत जुटाई और किचन में जाकर बोला, “भाभी… आज क्या मैं अपनी गर्लफ्रेंड को घर बुला लूँ? बहुत दिनों से मिला नहीं हूँ। थोड़ी मदद कर दो न।”
भाभी ने बर्तन धोना बंद किया। मुड़ीं और मुझे देखा। उनकी आँखों में एक हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन आवाज़ बिल्कुल सामान्य। “कौन है वो? नाम क्या है?”
“रूही… कॉलेज की है।”
उन्होंने सिर हिलाया। “ठीक है। नंबर दे। मैं बुला लेती हूँ। घरवालों को बोल दूँगी मेरी सहेली की बहन है, एग्जाम की वजह से आई है।”
मैं हैरान था। रात के बारे में एक शब्द भी नहीं। कोई इशारा, कोई नज़रअंदाज़, कुछ नहीं। बस सामान्य भाभी वाली बात। उन्होंने मेरा फोन लिया, रूही का नंबर निकाला और खुद कॉल कर दी। आधे घंटे में रूही आने वाली थी।
रूही आई तो नीली जींस और नारंगी कुर्ती में। गोरी त्वचा, लंबे बाल, और चेहरा कच्ची काली जैसा खूबसूरत। भाभी जितनी कामुक बॉडी नहीं थी, लेकिन जवानी ताज़ी थी।
आँगन में बैठकर हम बातें करने लगे। आँखें लड़ाई, हँसी-मज़ाक। ये Desi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
थोड़ी देर के लिए भाभी का ख्याल दिमाग से हट गया। लेकिन जब भाभी चाय लेकर आईं और रूही के सामने मुस्कुराते हुए बैठीं, तो मेरी नज़र फिर उनकी साड़ी के पल्लू के नीचे छिपे चूचों पर चली गई।
दोपहर का खाना हुआ। घर की आदत के मुताबिक सब आराम करने चले गए। भाई पहले ही दफ्तर से लौटकर सो चुके थे। माँ भी अपने कमरे में। भाभी अपने कमरे में चली गईं। मैंने रूही को इशारा किया।
“बाथरूम में आ… दस मिनट।”
रूही की आँखें चमक उठीं। वो धीरे से उठीं और बाथरूम की तरफ चली गईं। मैं भी पीछे-पीछे गया। दरवाज़ा बंद करने की जल्दी में मैंने ठीक से लैच नहीं लगाया। अंदर घुसते ही मैंने रूही को दीवार से सटाया और उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया।
उसके होठ थोड़े मोटे थे, गुलाबी लिपस्टिक लगी हुई। चूसने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था। “उम्ममम… उम्म… अओम्म…” की आवाज़ें बाथरूम में गूँजने लगीं।
मैंने उसकी कुर्ती के बटन खोले। ताज़ी उभरी जवानी सामने आ गई—छोटे लेकिन सख्त चूचे, गुलाबी निप्पल। मैंने एक को मुंह में लिया और चूसा। रूही ने सिर पीछे किया और सिसकी भरी—“आह्ह… हाशमी… धीरे…”।
मेरे हाथ उसकी जींस के अंदर चले गए। पैंटी के ऊपर से चूत सहलाई तो वो गीली मिल गई। “स्स्स… अह्ह…” की आवाज़ निकली उसके मुंह से।
मैंने उसे घुमाया और जींस नीचे खींचने लगा। तभी…
धड़ाम!
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