भाभी की ब्लैकमेल चुदाई!
Family Sex Story: भाभी ने देवर को वीडियो से ब्लैकमेल कर बाथरूम में चूत-गाँड दोनों चोदवाई! फिर कुत्ता बनाकर लिया घर के हर कोने में Wild Dirty & Risky Sex का मज़ा!
अभी तक आपने "भाभी ने चुदाई दिखाकर लिया लन्ड!" में पढ़ा :
“बाथरूम में आ… दस मिनट।”
रूही की आँखें चमक उठीं। वो धीरे से उठीं और बाथरूम की तरफ चली गईं। मैं भी पीछे-पीछे गया। दरवाज़ा बंद करने की जल्दी में मैंने ठीक से लैच नहीं लगाया। अंदर घुसते ही मैंने रूही को दीवार से सटाया और उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया।
उसके होठ थोड़े मोटे थे, गुलाबी लिपस्टिक लगी हुई। चूसने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था। “उम्ममम… उम्म… अओम्म…” की आवाज़ें बाथरूम में गूँजने लगीं।
मैंने उसकी कुर्ती के बटन खोले। ताज़ी उभरी जवानी सामने आ गई—छोटे लेकिन सख्त चूचे, गुलाबी निप्पल। मैंने एक को मुंह में लिया और चूसा। रूही ने सिर पीछे किया और सिसकी भरी—“आह्ह… हाशमी… धीरे…”।
मेरे हाथ उसकी जींस के अंदर चले गए। पैंटी के ऊपर से चूत सहलाई तो वो गीली मिल गई। “स्स्स… अह्ह…” की आवाज़ निकली उसके मुंह से।
मैंने उसे घुमाया और जींस नीचे खींचने लगा। तभी…
धड़ाम!
अब आगे :-
दरवाज़ा जोर से खुला। भाभी खड़ी थीं। आँखें गुस्से से लाल। साड़ी का पल्लू गिरा हुआ, बाल बिखरे। “यह क्या चल रहा है?!” उनकी आवाज़ कमरे में गूँज गई।
रूही की हालत खराब हो गई। उसने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने, हाथ जोड़कर माफी माँगने लगी। भाभी ने उसे कॉलर से पकड़ा और घर के बाहर धकेल दिया। “निकल यहाँ से! और दोबारा Pan दिखी तो पैर तोड़ दूँगी!” रूही रोती हुई भाग गई।
भाभी वापस आईं तो मैं अभी भी अधनंगा खड़ा था। उन्होंने दरवाज़ा बंद किया, एक कदम आगे बढ़ीं और मेरे गाल पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। कानों में सन्नाटा छा गया।
“अपने कमरे में जा। अभी!” उनकी आवाज़ में गुस्सा था, लेकिन आँखों में कुछ और भी था - जो मैं उस समय समझ नहीं पाया।
मैं सिर झुकाए अपने कमरे में चला गया। पूरा दिन बीत गया। शाम को खाना टेबल पर आया तो भाभी ने मुझसे बात तक नहीं की।
भाई पूछ रहे थे क्या हुआ, उन्होंने सिर्फ इतना कहा - “कुछ नहीं, छोटी-मोटी बात।” रात हुई। घर सो गया। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ सोच रहा था कि अब क्या होगा। कहीं भाभी सच में भाई को तो नहीं बता देंगी?
तभी रात के सवा एक बजे फोन पर व्हाट्सएप की आवाज़ आई।
भाभी का मैसेज:
“हाशमी, बाथरूम का नल खराब हो गया है। जल्दी आकर ठीक कर दो।”
मेरा दिल धड़कने लगा। हाथ कांप रहे थे। मैं उठा, पजामा पहना और बाथरूम की तरफ चला। दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर हल्की रोशनी जल रही थी। भाभी पहले से खड़ी थीं - नीली सिल्की नाइटी में। जैसे ही मैं अंदर घुसा, उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया और लैच लगा दी।
मैंने सिर नीचे किया। हिम्मत नहीं हो रही थी उनकी आँखों में देखने की। तभी उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया और मेरा ठोड़ी पकड़कर चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आँखें अब गुस्से में नहीं थीं।
उनमें एक अजीब सी चमक थी। अचानक उन्होंने मेरा फोन छीन लिया। गैलरी खोली। मेरी साँस रुक गई।
वहाँ उनकी सारी नंगी तस्वीरें और वीडियो थीं—नहाते हुए, पैंटी पहनते हुए, और वो वाली रात जब वो खिड़की के सामने खड़ी होकर उंगली कर रही थीं।
भाभी मुस्कुराईं। धीरे-धीरे, कातिल अंदाज में। “सब जानती हूँ, हाशमी। तुम मेरी पैंटी पहन-पहनकर मुट्ठ मारते हो। मेरी और भैया की चुदाई भी देख ली। घरवालों को कुछ नहीं बताऊँगी… लेकिन एक शर्त है।”
मेरी आवाज़ कांपते हुए निकली, “क्या… क्या शर्त है भाभी?”
उन्होंने जवाब नहीं दिया। सिर्फ दोनों हाथों से अपनी नाइटी के ऊपर वाले बटन खोलने लगीं। एक… दो… तीन… फिर एक झटके में पूरी नाइटी उतारकर फेंक दी।
अब भाभी मेरे सामने सिर्फ गुलाबी लेस वाली ब्रा और काली ट्रांसपेरेंट पैंटी में खड़ी थीं। तीस इंच के भारी चूचे ब्रा में फँसकर ऊपर उभरे हुए थे। निप्पल कपड़े के आर-पार साफ दिख रहे थे।
कमर पतली, लेकिन गाँड इतनी मोटी कि पैंटी उसके बीच में धँस गई थी। पैंटी के बीच हल्का गीला धब्बा चमक रहा था।
उन्होंने ब्रा का हुक खोला। दोनों बड़े-बड़े गोल चूचे लहराते हुए बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल पहले से सख्त। फिर पैंटी भी उतार दी। उनकी चूत बिल्कुल साफ मुँडी हुई थी -
गुलाबी, थोड़ी सूजी हुई, और ऊपर छोटा सा क्लिटोरिस बाहर निकला हुआ। बीच का छेद हल्का-हल्का चमक रहा था। ये Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
भाभी ने एक कदम आगे बढ़ाया। आवाज़ कम लेकिन साफ थी -
“अब चोद मुझे। अपना सात इंच का मोटा लंड मेरी चूत में डाल। अगर मना किया… तो कल सुबह ये सारी वीडियो तेरे भाई को भेज दूँगी।”
मेरा लंड पैंट में दर्द कर रहा था। इतना तन गया था कि आगे झुक गया था।
भाभी ने खुद मेरे पजामे की डोरी खोली और अंडरवियर समेत नीचे खींच दिया। मेरा मोटा, नसों वाला लंड बाहर निकलकर झूलने लगा। उन्होंने उसे हाथ में पकड़ा, हिलाया और धीरे से बोलीं -
“वाह… कितना मोटा और गर्म है। तेरी वाली को तो रोज़ यही चाहिए था न?”
भाभी घुटनों के बल बैठ गईं। बाथरूम की ठंडी टाइल्स उनके घुटनों से छू रही थीं, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उन्होंने मेरे लंड को दोनों हाथों में लिया। उंगलियों से नसें सहलाईं, टॉप पर अंगूठे से गोला बनाया।
पहले जीभ निकाली और सिर्फ टॉप को चाटा—धीरे-धीरे, गोलाकार। “स्स… अह्ह…” की हल्की आवाज़ उनके गले से निकली जैसे वो खुद मज़ा ले रही हों।
फिर उन्होंने पूरे लंड को मुंह में ले लिया। गरम, गीला मुंह। एकदम गले तक। “ग्लक… ग्लक… स्लर्प…” की आवाजें बाथरूम में गूँजने लगीं। उनकी आँखों में पानी आ गया, लेकिन वो रुकीं नहीं।
एक हाथ से मेरे अंडकोष सहला रही थीं, दूसरे से अपनी चूत पर उंगली फेर रही थीं। मैं दीवार का सहारा लेकर खड़ा था। कमर अपने आप आगे-पीछे हो रही थी।
पाँच-छह मिनट तक वो लगातार चूसती रहीं। कभी सिर्फ टॉप, कभी पूरा निगलकर। लार उनके ठोड़ी से टपककर मेरे लंड पर बह रही थी। अचानक उन्होंने लंड बाहर निकाला, सांस ली और बोलीं,
“इतना मोटा… भैया का तो आधा भी नहीं है। आज पूरी तरह निगलूँगी।” फिर से मुंह में लिया और इस बार और गहरा। मेरी साँसें तेज हो गईं। लगा अब निकल जाएगा, लेकिन उन्होंने ठीक समय पर छोड़ दिया।
उठीं। आँखें वासना से लाल। उन्होंने बाथरूम की दीवार का सहारा लिया, दोनों पैर थोड़े फैलाए, गाँड पीछे की तरफ निकाली और一手 से अपनी चूत के होंठ खोल दिए। “अब डाल… अपनी भाभी की भूखी चूत में ठेल दे, मेरे राजा।”
मैंने लंड का सिरा उनके छेद पर रखा। चूत पहले से इतनी गीली थी कि टॉप हल्का सा छूते ही अंदर की तरफ खिंचने लगा। मैंने धीरे-धीरे दबाव डाला। “चुप… चुप…” की आवाज़ के साथ सिरा घुस गया।
भाभी ने लंबी साँस भरी - “आह्ह्ह… बड़ा है रे… धीरे… आअआह…”। ये Desi Antarvasna Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।
फिर मैंने उनकी पतली कमर पकड़ी और एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड एक झटके में अंदर चला गया। उनकी चूत बहुत टाइट, गरम और चिकनी थी। उन्होंने जोर से सिसकारी -
“उफ्फ्फ… मर गई… तेरे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी… आह्ह… और अंदर डाल… पूरी चोद दे… ये सुख तेरे भाई नहीं दे पाए आज तक…”।
मैंने दोनों हाथों से कमर कसकर पकड़ी और पूरा सात इंच एक ही धक्के में अंदर ठेल दिया। भाभी की चीख निकल गई - “आईईई… हाय माँ… फट गई… बहुत मोटा है… आह्ह आअआह ओह्ह्ह्ह…”।
अब मैं रुकने वाला नहीं था। तेज-तेज धक्के शुरू कर दिए। हर धक्के पर “फट… फट… फट…” की आवाज़ हो रही थी। उनकी मोटी गाँड मेरे पेट से टकरा-टकरा कर लहरा रही थी। तीस इंच के चूचे नीचे लटककर जोर-जोर से हिल रहे थे।
मैंने आगे झुककर एक हाथ से उनका चूचा पकड़ा और जोर से मसला। निप्पल को उंगलियों में दबाया, मरोड़ा।
भाभी पागल हो रही थीं - “आह्ह… हाँ… चूस मेरे चूचे… काट ले… जोर से चोद… मेरी चूत आज से तेरी हो गई… फाड़ डाल… अब तुझे किसी और की जरूरत नहीं पड़ेगी…”।
उनकी गंदी बातों ने मुझे और उकसाया। मैंने रफ्तार बढ़ा दी। लंड पूरी तरह बाहर निकालकर फिर जड़ तक ठेल रहा था। चूत से सफेद झाग बनने लगा था। वो अपनी गाँड पीछे मार-मारकर जवाब दे रही थीं।
बारह-तेरह मिनट बाद मैंने उन्हें घुमाया। दीवार से सटाकर खड़ा किया, एक टांग अपनी कमर पर चढ़ाई और फिर से लंड अंदर डाल दिया। इस पोजीशन में और गहराई तक जा रहा था।
भाभी की आँखें बंद थीं, मुंह से सिर्फ—“आह्ह… उफ्फ… हाँ… और जोर से… बच्चेदानी तक चोद… आह्ह…” निकल रहा था।
फिर मैंने उन्हें बाथरूम की ठंडी फर्श पर लिटा दिया। दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और सुहागरात वाली स्टाइल में जोर-जोर से चोदने लगा।
अब हर धक्के पर उनकी चीख निकल रही थी - “आईई… मर गई… फट गई चूत… हाशमी… तू मस्त नजारे दिखा रहा है… तेज… तेज…”। चूत अंदर से और गरम हो गई थी।
हर बार लंड बाहर निकालते समय उसके होंठ लंड को चूस रहे थे। ये Kamvasna वाली Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
मैंने दोनों हाथों से उनके चूचे दबाए, निप्पल मुंह में लेकर चूसे, काटे। भाभी का शरीर कांपने लगा—“हाशमी… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह… जोर से… हाँ… यहीं… आह्ह्ह्ह्ह…”।
अचानक उनका पूरा शरीर तन गया। चूत ने मेरे लंड को जोर-जोर से जकड़ लिया और वो चीखते हुए झड़ गईं। गरम पानी मेरे लंड और जांघों पर बह निकला।
मैं रुका नहीं। उन्हें घुटनों के बल करवाया, मोटी गाँड दोनों हाथों से पकड़ी और फिर से लंड अंदर ठेल दिया। अब गाँड थपथपाते हुए तेज-तेज चोद रहा था।
भाभी फिर से मस्त हो गईं - “हाँ… गाँड मार… मेरी मोटी गाँड फाड़ डाल… आह्ह… आज रात भर चोद मुझे…”।
आठ-दस मिनट और चोदने के बाद मैं भी चरम पर पहुँच गया। लंड बाहर निकाला और उनके चूचों, पेट, गले और मुंह पर गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य उछाल दिया। धारें उनके चेहरे पर गिर रही थीं।
भाभी मुस्कुराईं। लंड मुंह में लेकर आखिरी बूंद तक चूस लिया। फिर धीरे से उठीं, अपने शरीर से माल पोछती हुई बोलीं—“अब से जब मन करेगी… बुलाऊँगी। वरना वीडियो भेज दूँगी।
गर्लफ्रेंड बनाने की जरूरत नहीं… मेरी चूत तेरे लंड के बिना नहीं मानेगी।”
उस रात के बाद हमारा ब्लैकमेल वाला रिश्ता पक्का हो गया। कभी रसोई में झुककर, कभी छत पर रात के अंधेरे में, कभी भाई के सोने के बाद उनके ही बिस्तर पर- चुदाई जारी रही।
बाहर से भाभी सती-सावित्री बनी रहतीं, लेकिन जब दरवाज़ा बंद होता तो पूरी तरह मेरी सेक्स रंडी बन जातीं।
दोस्तों, ये थी मेरी देवर-भाभी वाली असली कहानी। कभी-कभी भाभी खुद ब्लैकमेल करके अपनी भूख मिटा लेती हैं… और तुम बस उनके पालतू बनकर रह जाते हो।
उस रात बाथरूम से निकलते समय भाभी ने मेरा चेहरा दोनों हाथों में लिया। उनके अंगूठे मेरे होठों पर फिरे। आवाज़ बहुत धीमी थी, लेकिन सीधी दिल में उतर गई -
“अब तू मेरा कुत्ता है, हाशमी। जब बुलाऊँ… तुरंत आना। वर्ना ये वीडियो भैया के व्हाट्सएप पर चली जाएंगी। समझा?” मैंने सिर्फ सिर हिलाया।
लंड अभी भी आधा तना हुआ था, उनके मुंह की लार उस पर सूख रही थी।
अगले तीन दिन कुछ नहीं हुआ। भाभी सामान्य रहीं। नाश्ता देतीं, हँसतीं, भाई के साथ टीवी देखतीं। लेकिन चौथे दिन दोपहर को जब घर खाली था, किचन से उनका मैसेज आया—“आ जा। झुककर बर्तन धो रही हूँ।”
मैं गया। भाभी साड़ी में थीं, पल्लू एक तरफ गिरा हुआ। सिंक के आगे झुकी हुईं। मैंने पीछे से साड़ी उठाई। उनके नीचे सिर्फ एक पतली पैंटी थी, जो पहले से गीली थी।
मैंने पैंटी खींचकर एक तरफ की और बिना किसी बात के अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया।
“आह्ह्ह… सीधे अंदर… अच्छे कुत्ते…” उन्होंने दबे स्वर में कहा। मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारे। बर्तनों की आवाज़ में हमारी सिसकियाँ मिल गईं। पाँच मिनट में ही वो कांपते हुए झड़ गईं। मैंने बाहर निकालकर उनकी गाँड पर माल गिराया।
उन्होंने साड़ी ठीक की, मुस्कुराईं और बोलीं - “शाम को छत पर। देर मत करना।”
उस रात छत पर अंधेरा था। गर्म हवा चल रही थी। भाभी सिर्फ एक ढीली नाइटी में आईं। कोई ब्रा नहीं, कोई पैंटी नहीं। उन्होंने खुद नाइटी उतारी और चारपाई पर घोड़ी बनकर बैठ गईं।
“आज गाँड में डाल… धीरे से। पहली बार है।” मैंने थूक लगाकर धीरे-धीरे अंदर धकेला। उनकी गाँड बहुत टाइट थी। “आह्ह… हाय… फट रही है… लेकिन मत रुक… पूरा डाल…” धीरे-धीरे पूरा लंड समा गया।
मैंने उनकी मोटी गाँड थपथपाते हुए चोदा। वो तकिये में मुंह दबाकर चीख रही थीं। जब दोनों झड़ गए तो उन्होंने मेरा लंड चूसकर साफ किया और फुसफुसाईं - “अब तू मेरी गाँड का भी मालिक है।”
एक हफ्ते बाद की बात है। भाई रात की ड्यूटी पर थे। भाभी ने मुझे उनके ही कमरे में बुलाया। बिस्तर पर लेटी हुईं, टांगें फैलाए। “आज आराम से चोद… जैसे सच्ची पत्नी को चोदते हैं।”
मैं उनके ऊपर लेटा। पहले चूचों को देर तक चूसा, निप्पल काटे, फिर चूत में उंगली डालकर गीला किया। जब लंड अंदर गया तो उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए और आँखों में आँखें डालकर बोलीं -
“देख मुझे… देखता रह… मैं तेरी रंडी हूँ… भैया की बीवी होकर तेरे लंड की दीवानी…” उस रात हमने दो घंटे तक चुदाई की। अलग-अलग पोजीशन। कभी वो ऊपर, कभी मैं।
आखिर में उन्होंने मेरा बीज अंदर ही छोड़ने दिया। गरम वीर्य उनकी चूत में भर गया। वो लेटी रहीं, टांगें फैलाए, और मुस्कुराती हुई बोलीं—“अब रोज ऐसे ही भर… जब तक मैं कहूँ।”
धीरे-धीरे ये सिलसिला घर का हिस्सा बन गया। कभी सुबह जब भाई ब्रश कर रहे होते, भाभी मुझे बाथरूम में खींच लेतीं और जल्दी-जल्दी मुंह में ले लेतीं। कभी दोपहर को जब सब सो रहे होते, छत की सीढ़ियों पर खड़े-खड़े चोद लेतीं।
एक बार तो भाई के सोने के दौरान उनके बगल वाले कमरे में, दरवाज़ा थोड़ा खुला छोड़कर चुदाई की। जोखिम जितना बढ़ता, भाभी उतनी ही गीली होतीं।
उनके मुंह से गंदी बातें अब आम हो गई थीं - “आज मेरी चूत फाड़ दे”, “गाँड में गहरा डाल”, “अपना माल मेरे मुंह में उगल”, “मुझे कुतिया बनाकर चोद”। मैं भी बदल गया था।
पहले जो लड़का सिर्फ खिड़की से देखता था, अब वो उनकी चूत और गाँड का मालिक बन चुका था। ब्लैकमेल का डर हमेशा रहता, लेकिन धीरे-धीरे वो डर भी मज़े का हिस्सा बन गया।
एक रात, चुदाई के बाद भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी हुई थीं। पसीने से भीगे शरीर। ये Desi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
उन्होंने धीरे से कहा, “तुम जानते हो ना… मैं भैया से प्यार करती हूँ। लेकिन ये भूख… ये मोटा लंड… ये गंदगी… सिर्फ तुमसे मिलती है। इसलिए तुम्हें पालतू बना रखा है।”
मैंने उनके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “जब तक तुम कहोगी… मैं रहूँगा।”
बाहर से घर बिल्कुल सामान्य दिखता। भाभी सती-सावित्री पत्नी बनी रहतीं - चाय बनातीं, साड़ी पहनतीं, भाई का ख्याल रखतीं। लेकिन जब भी मौका मिलता, दरवाज़ा बंद होते ही वो मेरी सेक्स रंडी बन जातीं।
उनकी चूत, उनकी गाँड, उनके मुंह… सब मेरे लंड के लिए तैयार रहते।
दोस्तों, ये थी मेरी असली देवर-भाभी कहानी। जो शुरू हुई थी एक खिड़की और एक पैंटी से, और खत्म हुई एक ऐसे रिश्ते में जहाँ भाभी खुद ब्लैकमेल करके अपनी भूख मिटाती हैं।
कभी-कभी जिंदगी में ऐसी भूखी भाभियाँ मिल जाती हैं… जो तुम्हें अपना कुत्ता बना लेती हैं। और तुम खुशी-खुशी उनकी जंजीर में बंध जाते हो।
अब तो कभी रसोई में झुककर, कभी छत पर, कभी भाई के सोने के बाद उनके ही बेड पर – हमारी चुदाई चलती रहती है। भाभी अब पूरी तरह मेरी सेक्स रंडी बन चुकी हैं। लेकिन बाहर से अभी भी सती-सावित्री पत्नी बनी रहती हैं।
दोस्तों, ये थी मेरी Devar Bhabhi Sex Story । अब किसी भाभी की चूत चोदने से पहले सावधान रहना। कभी-कभी भाभी खुद आपको ब्लैकमेल करके अपनी भूख मिटाती हैं।
वो समय आप बस उनके पालतू बनकर रह जाते हो।
ये Hindi Sex Kahani कैसी लगी, कॉमेंट में जरूर बताना। hashmilion5@gmail.com
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