मौलवी अब्बा ने बेटी की सील पैक चूत फाड़ी!

Family Sex Stories : अब्बा ने आयशा बेटी की कुंवारी चूत चाटी, चुचे चूसे और 9 इंची लंड घुसाकर डॉगी-मिशनरी-काउगर्ल में की जोरदार चुदाई! फाड़ दी सील! भर दी चूत! 


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“ले रंडी… मेरी हलाल गांड वाली रंडी… ले पूरा लंड…”


“हाँ हज़ूर… मैं आपकी रंडी हूँ… चोदिए… मेरी गांड फाड़ दीजिए… अह्ह्ह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…”


तीसरी बार दोनों साथ ही झड़े। हबीबुर रहमान ने जैनब की गांड के अंदर अपना माल भर दिया। दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए। जैनब हबीबुर रहमान की छाती पर सिर रखे हुए थी।


उनके लंड पर अभी भी वीर्य और चूत का रस लगा हुआ था।


हबीबुर रहमान ने जैनब के बाल सहलाते हुए कहा, “अब आयशा को बुलाऊँ? उसने सब देख लिया है। अब उसकी बारी है।”


जैनब शर्मा गई लेकिन बोली, “जो आपकी मर्जी हज़ूर… लेकिन धीरे से… वो अभी कुंवारी है।”


हबीबुर रहमान मुस्कुराए, “हलाल राहत में कोई जल्दबाजी नहीं। पहले उसे बुलाकर बात करूँगा।”


अब आगे :-


रात के नौ बज चुके थे। बारिश अब तेज हो गई थी। हबीबुर रहमान बेडरूम में जैनब के साथ लेटे हुए थे। जैनब थककर सो चुकी थी, उसकी साड़ी अभी भी कमर तक ऊपर थी और जांघों पर वीर्य के निशान सूख रहे थे।


हबीबुर रहमान ने अपनी लुंगी ठीक की, दाढ़ी सहलाई और धीरे से उठकर बाहर निकल आए।


ऊपर आयशा का कमरा था। दरवाजा बंद था लेकिन अंदर से हल्की रोशनी आ रही थी। हबीबुर रहमान ने धीरे से दरवाजा खटखटाया।


“आयशा बेटी… खोलो।”


अंदर आयशा चौंक गई। वो बिस्तर पर बैठी थी। उसने अभी-अभी जो कुछ रसोई और बेडरूम में देखा था, वो बार-बार उसकी आँखों के सामने घूम रहा था। उसकी सलवार-कमीज भीग चुकी थी।


जांघों के बीच भारी गर्मी थी। वो २१ साल की थी, लेकिन अभी तक पूरी तरह Seal Pack थी। कुंवारी।


आयशा की बैकस्टोरी: आयशा हबीबुर रहमान की सौतेली बेटी थी। उसकी असली माँ की मौत बचपन में हो गई थी। हबीबुर रहमान ने उसे बहुत प्यार से बड़ा किया था। घर में सख्त पर्दे का माहौल था।


कॉलेज में भी वो लड़कों से दूर रहती थी। नमाज़ पाँच वक्त पढ़ती थी, कुरान की तालीम लेती थी। लेकिन अंदर ही अंदर उसका शरीर बहुत उत्तेजित रहता था। रातों को अकेले में वो अपने स्तनों को दबाती, जांघें रगड़ती, लेकिन कभी आगे नहीं बढ़ी थी।


वो पूरी तरह सील पैक थी – चूत अभी तक किसी लंड को छू भी नहीं पाई थी। आज पहली बार उसने अपने अब्बा का मोटा लंड अपनी माँ की चूत और गांड में जाते देखा था। उसकी देह में आग लग गई थी।


“जी… अब्बा…” आयशा ने काँपती आवाज में जवाब दिया और दरवाजा खोल दिया।


हबीबुर रहमान अंदर आए। कमरे में हल्की सी खुशबू थी – आयशा के बदन की। उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया और चाभी घुमा दी।


“बैठो बेटी।” उन्होंने बिस्तर के किनारे बैठते हुए कहा।


आयशा शर्मा गई। आँखें नीची कर लीं। उसके गाल लाल हो गए थे।  ये Antarvasana Baap Beti Ki Seal Pack Chudai wali Hot Hindi Sex Kahani aap GaramKahani par padh rahe hain!


हबीबुर रहमान धीरे से बोले, “जो तुमने रसोई में देखा… और बेडरूम में… वो सब अल्लाह की मर्जी थी। तुम्हारी अम्मी को बहुत दिन से हलाल राहत की जरूरत थी। मैंने उन्हें राहत दी।”


आयशा चुप रही। उसकी साँस तेज थी।


“अब तुम बताओ बेटी… तुम्हें क्या महसूस हुआ जब तुमने देखा?” हबीबुर रहमान ने नरम आवाज में पूछा।


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आयशा ने हिम्मत करके कहा, “अब्बा… मुझे… बहुत शर्म आ रही थी… लेकिन… मेरे अंदर कुछ… गर्मी हो गई थी। मैं हिल ही नहीं पाई।”


हबीबुर रहमान मुस्कुराए। उनकी दाढ़ी हिली। “ये शैतान का खेल है बेटी। तुम २१ साल की हो गई हो। तुम्हारा शरीर अब जवान हो चुका है। स्तन भारी हो गए हैं, चूत में रस आने लगा है।


लेकिन तुम अभी तक कुंवारी हो। ये अच्छी बात है। अल्लाह कुंवारी लड़कियों को बहुत पसंद करता है।”


आयशा की आँखें नम हो गईं। “अब्बा… मुझे डर लगता है। मैंने कभी किसी को… छुआ तक नहीं।”


“इसीलिए तो मैं यहाँ हूँ।” हबीबुर रहमान ने धीरे से आयशा का हाथ अपने हाथ में लिया। उनकी उँगलियाँ गर्म थीं। “अल्लाह ने मुझे घर की औरतों की हिफाजत और हलाल राहत का जिम्मा दिया है।


तुम मेरी बेटी हो, लेकिन तुम्हारी जरूरतें भी पूरी करनी हैं। धीरे-धीरे… बिना किसी जल्दबाजी के।”


आयशा ने हाथ नहीं छुड़ाया। बल्कि उसकी उँगलियाँ हल्की सी काँपीं।


हबीबुर रहमान ने आयशा के चेहरे को ऊपर उठाया। “देखो मुझे।”


आयशा ने आँखें उठाईं। हबीबुर रहमान की गहरी नजर उसके चेहरे पर थी।


“तुम बहुत खूबसूरत हो बेटी। तुम्हारे स्तन… तुम्हारी कमर… तुम्हारी गांड… सब अल्लाह की नईमत हैं। इन्हें बेकार नहीं छोड़ना चाहिए।”


आयशा शर्मा कर मुस्कुराई। “अब्बा… आप ऐसी बातें…”


“सच कह रहा हूँ।” उन्होंने धीरे से आयशा के गाल पर हाथ फेरा। फिर उसकी गर्दन को सहलाया। आयशा की साँस और तेज हो गई।


“क्या तुम्हें अच्छा लग रहा है?” उन्होंने पूछा।


आयशा ने हल्का सा सिर हिलाया। “हाँ… थोड़ा… लेकिन डर भी लग रहा है।”


हबीबुर रहमान धीरे से आयशा के पास सरक आए। उनका घुटना आयशा की जांघ से छू गया। उन्होंने आयशा के बालों को कान के पीछे किया और उसके कान में फुसफुसाए:


“डरो मत बेटी। आज सिर्फ थोड़ा-थोड़ा। मैं तुम्हें छूँगा… तुम मुझे छू सकती हो। बस इतना। कोई जल्दबाजी नहीं।”


आयशा की छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके निप्पल कमीज़ के अंदर खड़े हो गए थे।


हबीबुर रहमान ने बहुत धीरे से आयशा की कमीज़ के ऊपर वाले बटन खोले। पहला बटन… दूसरा… तीसरा। उसकी गोरी छाती और ब्रा का ऊपरी हिस्सा दिख गया।


उन्होंने ब्रा के ऊपर से ही आयशा के भारी स्तन को हल्का सा दबाया।


“उम्म्म्ह्ह…” आयशा के मुंह से पहली बार सिसकारी निकली।  ये Family Sex : Abba Ne Beti Ki Kunwari Chut Phadi wali Garam Kahani aap GaramKahani par padh rahe ho!


“कैसा लग रहा है बेटी?”


“अच्छा… लेकिन शर्म भी आ रही है अब्बा…”


हबीबुर रहमान ने आयशा को अपनी गोद में खींच लिया। आयशा उनकी छाती से सट गई। उनकी दाढ़ी उसके गाल से छू रही थी। उन्होंने आयशा की पीठ सहलानी शुरू की, फिर धीरे से उसकी कमर पर हाथ फेरा।


“तुम्हारी अम्मी ने भी पहले यही महसूस किया था। अब तुम भी महसूस करो। ये हलाल है बेटी… बिल्कुल हलाल।”


आयशा ने हिम्मत करके हबीबुर रहमान की छाती पर हाथ रख दिया। उनकी लुंगी के अंदर से गर्मी आ रही थी।


हबीबुर रहमान ने आयशा के होंठों के पास अपना चेहरा ले जाकर धीरे से उसके निचले होंठ को चूमा। सिर्फ हल्का सा। आयशा काँप उठी।


“अब्बा…” वो फुसफुसाई।


“बस इतना ही आज।” हबीबुर रहमान ने मुस्कुराते हुए कहा। लेकिन उनकी आँखों में भूख साफ थी। “कल रात हम और आगे बढ़ेंगे। तुम तैयार रहना।”


आयशा ने शर्म से सिर हिलाया, लेकिन उसकी जांघें आपस में रगड़ रही थीं। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।


हबीबुर रहमान उठे। “अब सो जाओ। और याद रखो… ये सब हमारे बीच का हलाल राज है।”


वे कमरे से बाहर निकल गए। आयशा बिस्तर पर लेट गई। उसका बदन अभी भी काँप रहा था। उसने अपनी सलवार के अंदर हाथ डाला और पहली बार अपनी गीली चूत को छुआ।


“अल्लाह… अब्बा…” वो फुसफुसाई।


अगली रात। बारिश थम चुकी थी लेकिन हवा में नमी थी। हबीबुर रहमान ने रात का खाना खाकर जैनब को नमाज़ पढ़ने भेज दिया और धीरे से आयशा के कमरे की तरफ बढ़े।


उनका दिल भी थोड़ा तेज धड़क रहा था। आज वो अपनी सौतेली बेटी को और करीब लाना चाहते थे।


दरवाजा खटखटाने पर आयशा ने तुरंत खोल दिया। वो आज खास तैयारी करके बैठी थी। हल्का सा गुलाबी नाइट सूट पहना हुआ था, जिसकी नेकलाइन थोड़ी गहरी थी।


बाल खुले हुए थे, आँखों में काजल और होठों पर हल्की सी लिपस्टिक। उसकी गोरी छाती सूट के अंदर से साफ उभर रही थी।


“अंदर आइए अब्बा…” आयशा की आवाज काँप रही थी लेकिन आँखों में शर्म के साथ उत्सुकता भी थी।


हबीबुर रहमान अंदर आए और दरवाजा बंद करके चाभी घुमा दी। उन्होंने आयशा को ऊपर से नीचे तक देखा और मुस्कुराए।


“माशा अल्लाह… आज मेरी बेटी बहुत प्यारी लग रही है। लगता है तुमने खुद को मेरे लिए सजाया है।”


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आयशा शर्मा कर सिर झुका लिया। “आपने कल कहा था ना… तैयार रहना…”


हबीबुर रहमान बिस्तर पर बैठ गए और आयशा को अपने पास बुलाया। “आओ बेटी… मेरी गोद में बैठो।”


आयशा झिझकते हुए उनकी गोद में बैठ गई। उसकी मोटी गांड उनके लंड के ऊपर आ गई। हबीबुर रहमान ने अपनी मजबूत बाहों से उसे कसकर जकड़ लिया। उनकी दाढ़ी आयशा के गाल से छू रही थी।


“डरो मत। आज हम बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे। तुम्हें जो अच्छा लगे, वो बताना।” ये Moulvi Abba Aur Beti Ki Incest Chudai Free Hindi Sex Story aap Garam kahani par padh rahe hain!


आयशा ने हल्का सा सिर हिलाया। हबीबुर रहमान ने पहले तो उसके बाल सहलाए, फिर गर्दन को चूम लिया। आयशा की साँस भारी हो गई।


“उम्म्म्ह्ह…” छोटी सी सिसकारी निकली उसके मुंह से।


हबीबुर रहमान ने आयशा का चेहरा अपनी तरफ घुमाया और धीरे से उसके होंठों पर किस किया। पहले हल्का, फिर थोड़ा गहरा। उनकी जीभ आयशा के निचले होंठ को चूसने लगी।


आयशा पहली बार इस तरह किस हो रही थी। उसका पूरा बदन काँप रहा था।


कुछ देर किसिंग के बाद हबीबुर रहमान ने आयशा की नाइट सूट की जिप नीचे खींच दी। सूट दोनों तरफ खुल गया। उसकी गोरी छाती पर सफेद ब्रा थी। उन्होंने ब्रा के कप को नीचे सरकाया और दोनों भारी स्तन बाहर निकाल दिए।


“वाह बेटी… कितने सुंदर और भारी स्तन हैं तुम्हारे।”


हबीबुर रहमान ने एक स्तन हाथ में लिया और धीरे-धीरे मसलने लगे। निप्पल को उँगलियों से दबाया। फिर मुंह लगाकर चूसने लगे।


“आह्ह्ह्ह… अब्बा… गुदगुदी हो रही है… उम्म्म्ह्ह्ह…” आयशा ने उनकी गर्दन पकड़ ली। उसकी आँखें बंद हो गईं।


हबीबुर रहमान दूसरे स्तन को भी चूसने लगे। कभी हल्का काटते, कभी जोर से चूसते। आयशा की जांघें आपस में रगड़ रही थीं। उसकी चूत अब पूरी तरह भीग चुकी थी।


“अब्बा… नीचे… बहुत गर्मी हो रही है…” आयशा ने शर्माते हुए फुसफुसाया।


हबीबुर रहमान ने आयशा को बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी नाइट सूट पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। उन्होंने पैंटी के ऊपर से ही चूत पर हाथ फेरा। कपड़ा पूरी तरह गीला था।


“माशा अल्लाह… कितनी गीली हो गई है मेरी सील पैक बेटी।”


वे धीरे से पैंटी खींचकर उतार दी। आयशा की गुलाबी, कुंवारी चूत पहली बार उनके सामने थी – बिना बाल, चिकनी, और ऊपर से रस टपक रही थी।


हबीबुर रहमान ने झुककर उसकी चूत को सूँघा। फिर जीभ से हल्का सा चाटा।


“आआआह्ह्ह्ह… अब्बा… क्या कर रहे हैं… उफ्फ्फ़… बहुत अच्छा लग रहा है…” आयशा ने तकिए को जोर से पकड़ लिया।


हबीबुर रहमान अब पूरी जीभ से चूत चाटने लगे। क्लिटोरिस को चूसते, जीभ अंदर डालते। आयशा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी।


“अब्बा… कुछ हो रहा है… आह्ह्ह्ह… रुकिए… नहीं… मत रुकिए… आआआह्ह्ह्ह!”


आयशा पहली बार झड़ गई। उसकी चूत से पानी छूटा और हबीबुर रहमान की दाढ़ी भीग गई।


हबीबुर रहमान उठे। अपनी लुंगी खोली। ९ इंच का मोटा, काला लंड पूरी तरह खड़ा था। टॉपा चमक रहा था।


आयशा ने डरी-डरी नजर से देखा। “अब्बा… ये… बहुत बड़ा है… मेरे अंदर कैसे जाएगा?”


“धीरे-धीरे जाएगा बेटी। आज पूरा नहीं डालूँगा। बस थोड़ा-थोड़ा।”


हबीबुर रहमान आयशा के ऊपर लेट गए। लंड को उसकी चूत पर रखकर रगड़ने लगे। टॉपा बार-बार क्लिट पर रगड़ खा रहा था।


“उम्म्म्ह्ह्ह… अब्बा… गर्म है… आह्ह्ह…”


वे धीरे से आगे बढ़े। सिर्फ टॉपा ही अंदर गया। आयशा की आँखें फट गईं।


“दर्द हो रहा है अब्बा… लेकिन मज़ा भी आ रहा है…”


हबीबुर रहमान रुके नहीं। बहुत धीरे-धीरे आधा लंड अंदर डाला। फिर रुक गए। आयशा के आँसू निकल आए लेकिन वो उन्हें रोके नहीं पा रही थी।


“हलाल है बेटी… ये तुम्हारी हलाल राहत है… शांत हो जाओ…”


वे धीरे-धीरे हल्के धक्के मारने लगे। आयशा की चूत बहुत टाइट थी। हर धक्के पर वो “आह्ह्ह… उफ्फ़… अब्बा…” कर रही थी।


‘कुछ मिनट बाद हबीबुर रहमान ने लंड बाहर निकाला और अपना वीर्य आयशा की पेटी और स्तनों पर छोड़ दिया। दोनों थककर लेट गए।


आयशा हबीबुर रहमान की छाती से सटकर लेटी थी। उसकी चूत में हल्का दर्द था लेकिन चेहरा संतुष्ट था।’


लेकिन हबीबुर रहमान अभी रुकने वाले नहीं थे। उनका लंड अभी भी आधा सख्त था। उन्होंने आयशा की चूत से टपकते वीर्य को अपनी उँगलियों पर लिया और आयशा के होंठों पर लगा दिया।


“चाट बेटी… अपना और मेरा हलाल रस चाट… स्वाद ले।”


आयशा शर्मा कर भी जीभ निकालकर चाटने लगी। “उम्म्म्ह्ह… नमकीन है अब्बा…”


हबीबुर रहमान मुस्कुराए। “अभी तो शुरुआत है रंडी। आज तेरी सील पैक चूत को अच्छी तरह फाड़ के छोड़ूँगा।”


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उन्होंने आयशा को पेट के बल लिटाया, उसकी मोटी गांड ऊपर उठाई। फिर लंड पर थूक लगाकर चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।


“आआआह्ह्ह्ह्ह!!! अब्बा… फट गई… बहुत मोटा है… आह्ह्ह्ह!” आयशा चीख पड़ी।


“चुप रंडी… ले पूरा लंड… तेरी कुंवारी चूत अब मेरी हलाल चूत है।” हबीबुर रहमान ने उसके बाल पकड़े और तेज-तेज धक्के मारने लगे।


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“अह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ़… अब्बा… और तेज… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह्ह… हाँ… गहरा… बहुत गहरा…” आयशा की आँखें उलट गईं। दर्द और मजे का मिश्रण था।


हबीबुर रहमान ने उसकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। “बोल… अब्बा का लंड कैसा लग रहा है तेरी चूत में?”


“बहुत मज़ा आ रहा है अब्बा… मैं आपकी हलाल रंडी हूँ… चोदिए… मेरी चूत को निचोड़िए… आआआह्ह्ह्ह… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…”


हबीबुर रहमान ने आयशा को घुमाकर मिशनरी पोजीशन में कर दिया। उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरी ताकत से लंड अंदर-बाहर करने लगे। हर धक्के पर आयशा के बड़े स्तन उछल रहे थे।


“ले मेरी सील पैक बेटी… ले पूरा 9 इंच… तेरी चूत अब मेरे लंड की गुलाम हो गई है… बोल… हलाल है ना?”


“हलाल है अब्बा… बिल्कुल हलाल… आह्ह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… मुझे अपनी हलाल रंडी बना दो… उफ्फ्फ़… बहुत जोर से… मारिए… चोदिए… अह्ह्ह्ह्ह!”


आयशा ने अपनी टांगें और फैला दीं। हबीबुर रहमान झुककर उसके स्तन चूसने लगे, निप्पल को दाँतों से काटते हुए।


“चूसिए अब्बा… मेरे चुचे चूसिए… काटिए… आह्ह्ह्ह… मैं आपकी हलाल दासी हूँ… जितना चाहे चोदिए…”


कुछ देर बाद हबीबुर रहमान ने आयशा को उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया (काउगर्ल पोजीशन)। अब आयशा खुद ऊपर-नीचे हो रही थी।


“हाँ रंडी… अपनी गांड हिला… पूरा लंड अंदर ले… चोद अपनी अब्बा के लंड से… आह्ह्ह्ह…”


आयशा तेजी से कूद रही थी। उसके स्तन उछल-उछलकर हबीबुर रहमान के चेहरे से टकरा रहे थे। “अब्बा… बहुत मोटा है… मेरी चूत फट रही है… लेकिन रोकूँगी नहीं… आह्ह्ह्ह… मैं आ गई… आआआह्ह्ह्ह्ह!!!”


आयशा जोर से झड़ गई। उसकी चूत से पानी छूटा और हबीबुर रहमान के लंड को निचोड़ने लगा। Family Antarvasna Hindi Sex Stories – Sirf GaramKahani par!


हबीबुर रहमान ने भी उसे कसकर पकड़कर तेज धक्के दिए और तीसरी बार अपना गाढ़ा वीर्य आयशा की चूत के अंदर ही छोड़ दिया।


“ले मेरी बेटी… ले पूरा हलाल माल… भर गई तेरी चूत… अब तू पूरी तरह मेरी हलाल रंडी हो गई है।”


दोनों पसीने से तर-बतर होकर लेट गए। आयशा हबीबुर रहमान की छाती पर सिर रखे हुए थी। उसकी चूत से वीर्य टपक रहा था। हल्का दर्द था लेकिन चेहरा पूरी तरह संतुष्ट और शर्मीला था।


हबीबुर रहमान ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “कल रात तेरी अम्मी जैनब भी हमारे साथ रहेगी। तीनों मिलकर हलाल राहत लेंगे। तू तैयार रहेगी ना बेटी?”


आयशा ने शर्मा कर सिर हिलाया। “जी अब्बा… जो आपकी मर्जी… लेकिन… मुझे डर भी लग रहा है… अम्मी के सामने…”


“डरने की कोई बात नहीं। तेरी अम्मी भी मेरी हलाल रंडी है। कल रात हम तीनों मिलकर अल्लाह के नाम पर मजे करेंगे।”


आयशा ने उनकी छाती में मुँह छुपा लिया, लेकिन उसकी जांघें फिर से रगड़ने लगीं। अंदर ही अंदर उसे नई उत्तेजना महसूस हो रही थी...


 आगे की कहानी जिसमे होती है बाप बेटी और अम्मी की Threesome चुदाई!! :- "जल्द ही.."

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