नैनीताल में बुआ की चूत पर भतीजे का टैटू!

Hindi Sex Stories : भतीजे ने नैनीताल में विधवा प्यासी बुआ को बनाया रंडी! तड़पाकर पेली उसकी चुत! चुदाई से खुश होकर बुआ ने बनवाई अपनी चूत पर भतीजे के नाम का टैटू!


तो केसे है आप लोग , मैं हाश्मी लायन फिर से हाज़िर हूँ आपके सामने एक नयी कहानी के साथ इस बार बहुत समय हो गया आप लोगो से मिलकर । गर्मी की इन छुट्टियों में मैंने अपनी आंटी यानि मेरी बड़ी बुआ के घर की वादिया देखी।


उनका घर नैनीताल में है । तो इस बार गर्मी से बचने के लिए मैंने वाही का इरादा बनाया । यहाँ पर आंटी ने मुझे पहाड़ो की ऊंचाई से अपनी लेकर चूत की गहराई तक के नज़ारे दिखाए । 


चलिए अब कहानी की शुरुआत करते है । जून के महीने की शुरुआत में ही आंटी ने घर पर फ़ोन कर के बोल दिया की “हाश्मी की छुट्टिया हो गई होंगी ।


उसे मेरे पास भेजदो ।” मेरी आंटी नैनीताल में एक छोटी कपड़ो की दुकान चलाती है उनके हस्बैंड अब इस दुनिया में नहीं है , वो बस अपने एक 8 साल के लड़के के साथ रहती है ।


उनकी फोन] पर मम्मी से बात ख़तम होने के अगले दिन ही मैं नैनीताल के लिए निकल गया । जेसे ही मैं उनके घर पहुंचा उन्होंने मुझे देखते ही गले से लगा लिया ।


उनका ऐसा करना बस ग़ज़ब हो गया आंटी के भारी भरकम मोटे चुंचे मेरे सीने दब गए गर्मी की वजह से मैंने बस शर्ट पहनी थी तो उनके निप्पल मुझे चुभते हुए महसूस हुए ।


मैंने भी थोडा मोके का फ़ायदा लिया उनकी पीठ पर अपना हाथ ले जाकर अपनी तरफ उनको दबा लिया । उफ्फ्फ! उनके जिस्म से एक खास महक आ रही थी जेसे वो अभी नहाकर आई हो।


 उनके चुंचे मेरे सीने में इस तरह दबे हुए थे की अंदाज़ा हो रहा था के उनका साइज़ 36 से कम नहीं है । उसके ऊपर से आंटी ने बहुत हलकी सी कुर्ती पहनी हुई थी ।


गले मिलकर हम अलग होने वाले थे उससे पहले ही मैंने उनके कंधे पर एक किस कर दिया आंटी ने मुझे एक हसींन सी मुस्कान दी और मेरे हाथ से बैग लेकर अन्दर चली गई ।


 आंटी की उम्र 40 साल थी उनके चेहरे पर मेहनत की थोड़ी झुर्रिया थी लेकिन जिस्म वासना की प्यास को नहीं छुपा पाता था जब वो अन्दर जा रही थी तो मेरी नज़रे उनकी 38 की गांड और हिचकोले खाती 30 की कमर को ही देख रही थी ।


आंटी ने मुझे अन्दर बुलाया और सोफे पर बेठने को कहा , उनका घर बस छोटासा था मैं जहा बेठा था उधर से मुझे आंटी के पीछे का पूरा आकार दिख रहा था ।


मैंने उनसे उनके बेटे के बारे में पुचा तो उन्होंने बताया की वो समर कैंप गया है आंटी बिल्कुल अकेली थी तो मुझे बुला लिया । ये Honeymoon Family Sex Story आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


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पहले दिन तो कुछ खास नहीं हुआ , अगले दिन मैं सुबह जल्दी उठा क्योंकी मुझे पहाड़ो वाली सुबह की हवा पसंद है । सुबह उठकर मैंने जब आंटी को देखा तो देखता ही रह गया आंटी ने पेटीकोट पहना था।


 जो आधी गांड से निचे था और एक बूब बहार निकला हुआ था । आंटी को देखकर समझ आ रहा था की रात उम्होने अपनी चूत की गर्मी को बहुत मेहनत से शांत करा होगा ।


मैंने आंटी को वाही खड़े खड़े 10 मिनट तक निहारा मैंने धीरे से उनके चुचे को सहलाया उनके निप्पल पर मेरी ऊँगली के जाते ही मुझे एक करंट सा महसूस हुआ ।


आंटी ने थोड़ी हरकत करी तो मैं वहा से जाने लगा लेकिन जाते हुआ मेंरा पैर दरवाज़े से टकरा गया जुस्से उबकी आंख खुली और वो समझ गई की मैंने उनकी जवानी के नज़ारे लूट लिए है ।


मैं बहार आकर बेठ गया कुछ ही पालो में आंटी भी एक नाईट गाउन पहनकर आ गई उन्होंने मुझे कुछ नहीं बोला और सीधी चाय बनाने चली गई । उस दिन आंटी ने दुकान बंद रखने का इरादा बनाया और मेरे साथ घुमने चल दी ।


11 बजे हम घर से निकले और पूरा नैनीताल घुमने के बाद शाम को 4 बजे चिड़िया घर गए वहा जब हम गए तब तक मौसम ख़राब होने लगा था बारिश शुरू हो चुकी थी । हम दोनों को बहुत ठण्ड लग रही थी लेकिन आंटी बुरी तरह काप रही थी ।


मैंने उनकी मदद के लिए अपनी शर्ट निकलकर उनके ऊपर उड़ा दी वो गर्मी लेने के लिए मुझसे मिलकर खड़ी हो गई ।


उनका मादक जिस्म मुझे अपने जिस्म से चिपका हुआ बहुत आनंद दे रहा था।मैंने भी मोके से अपने हाथ को उनके करीब कर दिया और उनको अपनी तरफ ले लिया ।


वो मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उनकी आँखों को देख रहा था मैंने महसूस करा आंटी की सांसे भारी हो रही उनके होठ काँप रहे थे वो मेरे होठो को चूमने के लिए बिलकुल तैयार थी ।


मैंने भी धीरे धीरे अपने होठ उनके करीब करे हमारे होठ बहुत थोड़े से मिले तभी एक बार तेज़ बिजली कडकी और हम अपनी वासना से बहार आ गए । हम दोनों एक दुसरे से अलग हुए और एक दुसरे को शर्माती नजरो से देखने लगे ।


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मुझे समझ नही आ रहा था अभी मुझे क्या करना चाहिए लेकिन आंटी के चेहरे पर मुस्कान थी जिससे मुझे भी सुकून मिला और उम्मीद भी मिली की अब छुट्टिया सुखी नही जायंगी इसमें चुदाई का रंग भरने वाला हे । 


फिर थोड़ी देर बाद मौसम थोडा शांत हुआ तो हम घर आ गए उस रात तूफ़ान का अलर्ट आया था वाही जो आज कल हर बात पर सरकार भेज रही है । आंटी बोली आज हो सके तो मेरे साथ ही कमरे में सो जाना मुझे डर लगेगा अकेले सोने में ।


रात को खाना खाने के बाद हम जब सोने चले तो आंटी ने कपडे बदले उन्हें गुक्स्री रात की तरह ही ब्रा और पेटीकोट पहना मैं उनको आंखे फाड़कर देख रहा था तो वो बोली “पहले कभी औरत नहीं देखि क्या ?” उनकी आवाज़ में हवास भरा एहसास था ।


मैंने भी चांस लेकर बोल दिया “ देखि है लेकिन आप ज्जेसी हसीं नहीं देखि ।“ वो बस शरमाकर रह गई उसके मैंने अपना बिस्तर ज़मीन पर लगाया तब तक वो चाय ले आई।


 मेरे बिस्तर को ज़मीन पर देखकर वो बोली “पागल निचे क्यों लगा रहा है, बचपन में तू मेरे पास सोने के लिए रोता था अब लडकियों जेसे शर्मा रहा है ।”


फिर क्या होता मैंने तुरंत अपनी सेटिंग बिस्तर पर आंटी के पास कर दी मैं सिर्फ काछे में सोया था कोई बनयान नहीं लिया था ।


मेरा जिस्म दिखने में ठीक थाक है और आंटी ने काफी समय से किसी मर्द को अपने आसपास आने नहीं दिया था जिसकी वजह से उनकी वासना भड़क रही थी ।


वो मुझे एक तक देखने लगी तो मैंने भी चिमटी लेते हुए बोला “ पहले कभी मर्द नहीं देखा क्या आपने ?” आंटी इठलाते हुए बोली “देखे तो है लेकिन तेरे जेसा नहीं देखा “।


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यूही इधर उधर की बाते करते हुए हम सो गए, बीच रात में मेरी आँख खुली तो मैंने देखा आंटी मुझसे बिलकुल चिपकी हुई है उनकी एक टांग मेरे ऊपर है और उनके चुचे मेरे चेहरे के ऊपर हे ।


मैंने भी मज़े लेने की ठानली ऐसे हालत में जो इन्सान पीछे हाटे वो मर्द कहलाने के लायक नहीं यही सोचकर मैंने अपना हाथ उनकी पीठ पर रख दिया ।


मैंने भी अपनी टांग उनकी टांगों के बीच कर दी और अपने लंड को उनकी चूत के करीब कर दिया मैंने उनको थोडा अपनी तरफ खिंचा फिर अपने चेहरे को उनके चुचे में दबा दिया ।


 शायद आंटी भी जाग रही थी वो अपनी गांड को हिलाकर चूत लंड पर दबाने लगी वो अपने चुचे मेरे चेहरे पर मसल रही थी ।


मैं चाहता था आंटी खुद अपनी चूत में मेरा लंड ले ले , उस रात मैंने बस उनको अपनी बाहों में लेकर जिस्म से जिस्म को रगड़कर वासना की आग को भडकाता रहा ।


सुबह तक हम इसी तरह लिपटे हुए सोते रहे, सुबह जब मेरी आंख खुली तो आंटी पूरी मेरे ऊपर चड़ी हुई थी । ये Antarvasana Aunty Sex Stories आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


मैंने उठकर उन्हें जगाया वो उठने में नाटक रही थी वो दिखा रही थी जेसे सोई हुई है लेकिन मुझे पता था वो बस मज़े ले रही है । जब मैं उन्हें हटाने लगा तो उन्होंने मुझे पकड़ लिया वो हिलने लगी और चूत को मेरे लंड पर घिसने लगी ।


मेरा मन कर रहा था अभी इसी समय Aunty Ki Chudai कर दूं लेकिन मुझे आंटी को तडपाना था इसलिए मैंने तब तो कुछ नही करा फिर भी आंटी ने मुझे उकसाने की पूरी कोशिश करी । 


आंटी अपनी टंगे खोलकर चूत को मेरे लंड पर दबा रही थी उनके मुंह से मादक सिसकिय निकल रही थी वो बार बार अपने होठ मेरे होठो पर सहला रही थी लेकिन मुझे चूम नही रही थी वो मेरी प्रतिकिर्या का इंतजार कर रही थी ।


मैंने सिर्फ अपनी पकड़ ढीली करी तो आंटी ने तेज़ी से चूत को लंड पर मसलना शुरू कर दिया वो पुरे 10 मिनट तक अपनी चूत सहलाती रही और आखिरकार एक सुकून भरी आआआअह ! के साथ आंटी शांत हो गई।


 मुझे अपने कच्छे के पास गिला गिला महसूस हुआ । आंटी मेरे ऊपर ही पानी निकाल चुकी थी उसके बाद आधे घंटे हम लेटे रहे फिर बाद वो उठी और जाने लगी मैंने अपनी आंखे बंद रखी मैं नाटक कर रहा था ये बात वो भी जानती थी ।


थोड़ी देर बाद मैं भी बाहर आ गया मैने बाहर आकर देखा आंटी नाश्ता तैयार कर रही थी। मैने पीछे से जाकर आंटी को गले लगाकर Good Morning बोला लेकिन उन्होंने मुझे पीछे हटा दिया।


आंटी मुझे नाराज़ हो कर दिखा रही थी मुझे उनकी अदा पर हसी आ गई। मैं बाहर जाकर टीवी देखने लगा और आंटी ने नाश्ता लाकर सख्ती से टेबल पर रखा । मैं समझ गया अगर इनको लंड नहीं दिया तो बहुत गुस्सा हो जाएगी फिर चुदेगी भी नहीं।


मैने नाश्ता छोड़ा और आंटी के पास जाकर फिर से प्यार से गले लगाकर पूछा “क्या बात है आप तो गुस्सा लग रही हो।” वो बोली “मैं क्यू होती गुस्सा जा तू जाकर नाश्ता कर ले।”


 उस समय मैने ज़्यादा बात करना ठीक नहीं समझा वो पूरे दिन आंटी ने मुझसे ठीक से बात नहीं की। ये XXX Desi Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


दुबारा से जब रात हुई तो मैने अपना बिस्तर उनके साथ ही लगाया वो बिना मुझसे कोई खास बात चीत करे ही सो गई थी। मैं भी कुछ देर तक ऐसे ही लेटा रहा करीब 1 घंटा गुज़रने के बाद मैं आंटी की तरफ पलटा।


मैने आंटी को हल्के से हिलाकर देखा तो वो सो चुकी थी उनकी पीठ मेरी तरफ थी मैं आगे बढ़ा और उनसे चिपक गया मैने अपना हाथ उनकी कमर में डाल दिया फिर एक पैर को उनकी गांड़ के ऊपर लेजाकर लंड उनके अंदर दबाने लगा।


मैं अपने होठों से आंटी के गले को सहला रहा था अपने हाथ धीरे धीरे उनके मोटे चूचों पर लेकर जा रहा था मैने उनके एक चूचे को धीरे से दबाया तो उनकी अआआह! निकल गई।


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मैं समझ गया वो जाग चुकी है आंटी ने मेरा कोई विरोध नहीं करा मैं अपने हाथ को चूचे से कमर तक सहला रहा था धीरे धीरे उनके कान पर चूम रहा था कभी पीठ पर कभी गले को चूम रहा था।


आंटी भी गरम होने लगी थी उनकी इससस! आह सीसीस ! की आवाज़ मुझे हरा सिग्नल दे रही थी मैने धीरे से उनके चूचे को पकड़ा फिर अपनी तरफ पलटने लगा।


वो भी धीरे धीरे मेरी तरफ मूड गई वो अपनी बड़ी गहरी आंखों से मुझे देख रही थी उनके चूचे तेज सांसों की वजह से ऊपर नीचे हो रह थे मेरा हाथ उनके चूंचे पर था उनका एक हाथ मेरे हाथ पर था।


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आंटी एक असंतुष्ट आवाज़ में बोली “रात तो तूने मुझे ठुकरा दिया तो अब क्यों आया है मेरे पास।” मैने उनके माथे को चूमते हुए कहा “मैं बस आपको थोड़ा तड़पाना चाहता था लेकिन आप तो नाराज़ हो गई।”


उनकी आंखों में एक प्यास थी आंटी अपने कांपते होठों से बोली “तड़प तो में बहुत समय से रही हूं लेकिन इस बुढ़िया के पास अब कोई अपना नहीं है बस तू ही मेरे है मुझे आज अपना बना ले हाशमी ।”


आंटी मेरे चेहरे को सहला रही थी वो बहुत नज़ाकत से मेरे होठ अपन करीब कर रही थी धीरे धीरे हमारे होठ मिल गए। मैने उनके होठों को अपने होठों में दबा लिया आंटी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी।


हम एक दूसरे के होठों से रस चूस रहे थे। आंटी मुझे अपन ऊपर खींच रही थी उन्होंने अपनी टांगे खोली और मुझे अपन ऊपर लेकर कमर पर टांगे बांधी।


वो बेतहाशा मुझे चूम रही थी उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर कोने कोने में घूम रही थी। फिर मैने उनको उठाकर ब्रा को निकाल फेंका उनके मोटे सांवले चूचे मेरे सामने झूम रहे थे काले निप्पल बिल्कुल चॉकलेट जैसे लग रहे थे।


मैने आंटी से कहा “ मैं आपका बजाऊंगा मगर फिर मेरे अलावा इस जिस्म को कोई दूसरा नहीं छुएगा।” आंटी ने मेरे लंड को पकड़कर कहा “मैं तेरी हूं हमेशा के लिए तेरी रण्डी बनकर रहूंगी।”


आगे की कहानी : "नैनीताल में बुआ की चूत पर भतीजे का टैटू! 02"

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