खेत में प्यासी चाची की पहली चुदाई!

Family Sex Story : प्यासी चाची रिधिमा की खेत में पहली चुदाई! जब 25 साल के अभिनय ने अपनी 36 साइज की चूचियों वाली भूखी चाची की चूत को खेत में ट्यूबवेल पर फाड़ा! Antarvasna Chachi Sex Story


मेरा नाम अभिनय है, और यह कहानी मैं खुद आपको सुना रहा हूँ जो की एक सच्ची कहानी है यह उस समय की बात है जब मैं शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से थोड़ा थक चुका था।


मुझे हमेशा अपने गांव चोदमपुर की याद आती थी, जहाँ सादगी और अपनापन बसता है।


एक दिन अचानक मम्मी का फोन आया के चाची बहुत परेशान है जाकर उनकी खेर खबर ले ले। मैंने तय किया कि मैं अपनी चाची रिधिमा से मिलने गांव जाऊँगा।


मुझे क्या पता था कि यह सफर मेरी ज़िंदगी की सबसे खास याद बन जाएगा मुझे अंदाज़ा भी नहीं था ये सफर मेरे और चाची के रिश्ते में से शर्म और हया को दूर फेक देगा।


मैं सुबह-सुबह बस पकड़कर चोदमपुर के लिए निकल पड़ा। रास्ते भर खेत, पेड़ और खुला आसमान देखकर मन को सुकून मिल रहा था, चाची को मैने फोन कर के बताया की घर आ रहा हूं।


 मेरी बात सुनकर वो भी खुश हो गई। शहर की ऊँची-ऊँची इमारतों से दूर यह दुनिया बिल्कुल अलग थी। जैसे-जैसे बस गांव के करीब पहुँच रही थी, मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था।


मुझे अपनी चाची से मिलने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।


करीब 5 साल बाद में अपनी चाची से मिलने जा रहा था, जब मैने उनको आखिरी बार देखा था तब वो बस मुझसे 2 साल बड़ी थी मेरी उम्र अभी 25 साल है, चाची के बारे में सोचता हूं तो आज भी उनका गोल मोल चेहरा मेरी नजरों में आ जाता है।


मुझे याद है एक बार हम कपड़े छत से उतार रहे थे तो मेरे हाथ में उनकी ब्रा आ गई थी जिसपर 28 का नंबर लिखा था


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चाची ने जब मुझे उस ब्रा को पकड़े देखा तो झट से मुझसे छीन लिया और बदमाश कहती हुई नीचे चली गई थी। कुछ पल मेरी आंख लगी थी के मेरा गांव आ गया जब मैं गांव पहुँचा तो सबसे पहले मुझे घर की तरफ जाने की जल्दी थी।


घर के पास पहुंचते ही मैंने देखा कि आंगन में अजीब सी खामोशी थी मम्मी ने बताया था के वो और बाबा तीर्थ यात्रा पर होंगे इसलिए पीछे से घर का ख्याल रखना है मुझे।


जब मैने घर को ध्यान से देखा तो बहुत अफसोस हुआ पहले जहां हंसी-खुशी की आवाजें गूंजती थीं, वहां आज सन्नाटा था।


मेरा दिल थोड़ा घबरा गया और मैं तेजी से अंदर की ओर बढ़ा। अंदर जाकर जो देखा, उसने मुझे अंदर तक हिला दिया। मेरे चाचा बिस्तर पर लेटे हुए थे और उनकी तबियत बहुत खराब लग रही थी।


उनका चेहरा कमजोर और थका हुआ था, जैसे वो कई दिनों से बीमार हों।


मेरी चाची रिधिमा उनके पास बैठी थीं और उनकी आंखों में उदासी साफ दिख रही थी। मुझे देखते ही उनकी आंखों में हल्की सी चमक आई, लेकिन वह मुस्कान अधूरी थी।


मैं समझ गया कि घर में सब कुछ ठीक नहीं है। मेरी चाची पहले से बहुत बदल गई थी , गांव की औरतों की तरह उनका जिस्म तो बेहद कामुक था मगर चेहरा मुरझा गया था।


चाची को ये भी होश नहीं था के मैं आ रहा हूं क्यों के जा मैने उन्हें अब देखा तो उनके कपड़े बहुत अस्तव्यस्त थे, उनके ब्लाउज का बस एक बटन लगा हुआ था, उनकी ब्रा नहीं थी।


 मोटे मोटे चूंचे आधे बाहर निकले हुए थे। उनकी हालत फिल्मों की एक रण्डी जैसी लग रही थी, 36 के चूंचे और 32 का नंगा पेट साफ दिख रहा था। वो बस पुराने से पेटीकोट में बैठी थी जो थोड़ा फैट भी रहा था।


मेरे मम्मी पापा को तीर्थ पर गए 1 महीना हो गया था शायद उसके बाद से चाची की ऐसी हालत हुई । चाची के होठ सूखे व प्यासे थे मगर ये प्यास पानी की नहीं थी। मेरे चाचा हमेशा से रंगीन किस्म के थे ।


मेरे सामने भी चाची दिन में दो बार उन चुदाई करती थी और अब हालत साफ थी के चाची चुदासी थी और चाचा का लन्ड अभी इस हाल में नहीं था के चाची की ज़रूरत पूरी कर सके।


मैं हमेशा से चाची की इज़्ज़त करता आया हूं मगर चाची के इस हाल को देखकर मेरा लन्ड भी सख्त हो गया, चाची मुझे देखकर करीब आई और गले से लिपट गई।


चाची इतनी सख्ती से गले लगी के मेरा लन्ड दब गया और हम दोनों के मुंह से “ज़्म्म्म्मम्म्म! “ की सिसकारी निकल गई। मुझे समझ नहीं आया चाची ने मुझे गले लगाया लन्ड को देखकर भागी चली आई।


फिर मैंने चाची से पूछा, “क्या हुआ चाचा को?” उन्होंने धीमी आवाज में अपने मादक जिस्म को मुझसे सहलाते हुए बताया कि चाचा पिछले कुछ समय से बीमार हैं।


इलाज चल रहा है, लेकिन हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। वो कुछ कर नहीं पाते है। उनकी आवाज में थकान , मायूसी और चिंता दोनों झलक रही थीं।


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उस पल मुझे महसूस हुआ कि चाची कितनी अकेली हो गई हैं। मैंने तय किया कि अब मैं कुछ दिनों के लिए यहीं रुकूंगा चाची के अकेलेपन को दूर कर के ही जाऊंगा। मैंने चाची से कहा कि वह चिंता ना करें।


 मैं उनके साथ हूँ। मेरी बात सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए, लेकिन वो खुशी के थे उन्होंने मेरे चेहरे को अपने करीब कर लिया एक पल को मुझे लगा वो मेरे होठ चूमने वाली है मगर फिर उन्होंने मेरे गाल चूम लिए।


शायद उन्हें पहली बार लगा कि कोई उनका सहारा बन सकता है।


उस दिन से मेरी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू हुआ मुझे कही न कही अंदाज़ा हुआ के औरत की चूत अगर खुश हो तो ही घर संसार सुखी रह सकता है। अगले दिन से ही मैंने घर के कामों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया।


हम दोनों को पता था के चाची को क्या चाहिए मगर गांव के संस्कार हमारे बीच आ रहे थे, इसलिए फिलहाल चाची मेरा होना महसूस कर के अपनी चूत को तसल्ली दे है थी ।


रोज़ सुबह जल्दी उठकर मैं आंगन साफ करता और चाचा के लिए दवा लाता।


चाची पहले अकेले सब संभालती थीं, लेकिन अब उन्हें थोड़ा आराम मिलने लगा था। हम दोनों मिलकर घर के छोटे-बड़े काम करने लगे। धीरे-धीरे घर में फिर से हलचल लौटने लगी। मैंने उनको बाज़ार से कुछ साड़िया लाकर दी जिसमें वो बवाल लगती थी।


एक सुबह मैं और चाची आंगन की सफाई कर रहे थे चाचा अंदर सो रहे थे, चाची पोंछा लगाते हुए सोफे के नीचे तक चली गई, उनके चूंचे बहुत मोटे थे उनका रंग सांवला था जो उनके जिस्म को आकर्षक बना देता था।


चाची ने मुझे आवाज़ दी “अभिनय मैं फंस गई मेरी मदद करो”।


मैं मुड़ा तो आंखें फटी रह गई, एक दम मोती 40 की गांड़ मेरी तरफ उठी हुई थी, चाची सोफे में फंसी हुई थी। चाची की इस मुद्रा ने मुझे हिला दिया और मैने बिना सोचे उनकी कमर को पकड़ कर खींचा।


मेरे अंदर एक शैतान सा जाग गया था मैने मदद करने के बहाने अपने लोवर पजामे को थोड़ा ढीला कर दिया।


फिर मैंने अपने घुटने चाची के पैरों के बीच में लिए जिससे उनकी टांगे खुल गई और मैंने अपना थोड़ा वज़न उनके ऊपर डाला अब मेरा लन्ड चाची की गांड़ में अच्छी तरह लग रहा था। 


मैने अपने हाथ उनकी कमर पर नीचे बंधे और खींचने के बहाने लन्ड को गांड़ पर रगड़ दिया। चाची नीचे से निकलने की कोशिश कर रही थी। मगर में बस उनकी आधी चूंची पकड़कर सहला रहा था और लन्ड से गांड़ को दबा रहा था।


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जब मुझे लगा देर ज़्यादा हो रही है तो मैने उनके ब्लाउज के अंदर हाथ लिया और ज़ोर से खींचकर चाची को सोफे के नीचे से बाहर निकाला।


चाची तो बाहर आ गई मगर उनके ब्लाउज के बटन टूट गए और मुझे हसीन वादियों जैसा नज़ारा देखने मिल गया। चाची तुरंत ही शर्मा कर अंदर चली गई।


चाची पहले बहुत चुप-चुप रहती थीं, लेकिन अब वो मुझसे बातें करने लगीं उनकी आवाज़ में वासना की मधुरता झलकती थी। हम दोनों साथ बैठकर चाय पीते और पुराने किस्से याद करते।


मेरे सामने वो अपने कपड़ो को कभी ठीक नहीं करती उनकी अदा से पता चलता के वो मेरे लन्ड को तैयार कर रही है।


वो मुझे अपने बचपन की कहानियां सुनातीं और मैं उन्हें शहर की बातें बताता। हमारी बातचीत में एक सच्ची दोस्ती की झलक तो थी साथ ही हवस भरे रिश्ते के पनपने की निशान भी थे। 


धीरे-धीरे हमारा रिश्ता और गहरा होता गया। हम साथ बैठकर मेरे फोन में रोमांटिक फिल्म देखते थे वो मुझसे चिपककर मज़ा लेती थी। हम दोनों के पास हरा सिग्नल था बस मौके की कमी थी।


एक दिन मैंने चाची से कहा कि हम खेतों में भी काम करेंगे। पहले वो थोड़ी हिचकिचाईं, लेकिन फिर मान गईं। हम दोनों सुबह-सुबह खेतों की ओर निकल पड़े। खेतों की मिट्टी की खुशबू ने मन को ताजगी से भर दिया।


आगे की कहानी : "खेत में प्यासी चाची की पहली चुदाई! 02"

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