शादी में मोनिका ने लिया मोटा लंड!
Cuckold Sex Story : अधूरी भूख वाली Biwi गेस्ट रूम में रंडी बनकर चुदी! पति का छोटा लंड भूल, गैर के मोटे लंड पर झड़ी! यह देख लंड दबाते हुए नशे में डूबा पति!
नमस्कार दोस्तों। मेरा नाम आमित है। उम्र चालीस साल। जम्मू-कश्मीर के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। ट्रांसपोर्ट का छोटा-मोटा बिजनेस है। सुबह गाड़ियाँ निकलती हैं, शाम को हिसाब बैठता है, रात को शरीर थक जाता है।
मेरी पत्नी मोनिका पैंतीस साल की है। गोरा रंग, लंबे काले बाल, फिगर छत्तीस-अट्ठाईस-अड़तीस। बड़े भारी स्तन, पतली कमर और मोटी गोल गांड। शादी को बारह साल हो चुके थे।
हमारी सेक्स लाइफ खराब नहीं थी, लेकिन अधूरी थी। मोनिका के अंदर एक भूख रहती थी जो मेरे पाँच-साढ़े पाँच इंच के लंड और सात मिनट की चुदाई से कभी नहीं बुझती थी।
रात को मैं थककर आता। मोनिका बेडरूम की लाइट धीमी कर देती। मैं उसे चूमता, कुर्ते के ऊपर से स्तन दबाता, फिर कुर्ती ऊपर करता, ब्रा का हुक खोलता।
उसके दोनों बड़े गोरे स्तन बाहर झूल जाते। मैं एक-एक करके मुँह में लेता, लेकिन जल्दी-जल्दी। मोनिका आहें भरती।
“आमित… थोड़ा और जोर से… काटो ना… आह्ह्ह…”
मैं हल्का सा काटता और नीचे सरक जाता। पैंटी उतारता। उसकी चूत हमेशा साफ शेव की हुई, गुलाबी, कभी-कभी पहले से गीली। दो उंगलियाँ डालकर हिलाता, फिर लंड निकालकर अंदर डाल देता। पाँच-सात मिनट जोर-जोर से हिलाता।
मोनिका कहती, “हाँ… आमित… और… थोड़ा और…” लेकिन मैं झड़ जाता। वह मुस्कुराकर मुझे चूम लेती। मैं जानता था कि उसकी चूत अभी भी तरस रही है।
एक रात उसने साफ कहा, “आमित, मुझे लगता है मुझे ज्यादा ताकत चाहिए… लंबी चुदाई… कोई ऐसा जो मुझे पूरा रोक न पाए।” मैं हँस दिया।
“बस करो मोनिका, हमारी उम्र हो रही है।” वह चुप हो गई। उस रात उसके चेहरे पर जो कमी थी, वह मेरे दिमाग में बैठ गई।
कुछ हफ्ते बाद मोनिका के मायके जम्मू में उसकी चचेरी बहन की शादी तय हुई। मोनिका बोली कि वह दो-तीन दिन पहले चली जाएगी, घर सँभालने में मदद करेगी।
मैंने सोचा सरप्राइज दूँगा। काम निपटाया, एक दिन पहले ही गाड़ी पकड़ी। शाम ढल चुकी थी जब मैं मायके पहुँचा। आँगन में मेहमान, लाउडस्पीकर, खुशबू, भीड़। मैं चुपके से अंदर घुसा। मोनिका को ढूँढ़ने लगा।
तभी देखा। मोनिका एक लंबे-चौड़े आदमी के साथ कोने में बात कर रही थी। बाद में पता चला उसका नाम विक्रम था, अड़तीस साल। मोटा शरीर, कंधे चौड़े, घनी दाढ़ी, आँखों में सीधा नशा। दोनों की निगाहें मिल रही थीं।
मोनिका हँस रही थी उस अंदाज़ में जिस अंदाज़ में वह घर पर कभी नहीं हँसती। कुछ देर बाद दोनों धीरे-धीरे अलग हुए और पीछे वाले गेस्ट रूम की तरफ चल दिए।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। गुस्सा नहीं आया पहले। सिर्फ एक भारी सी बेचैनी। मैं दीवार से सटकर पीछे-पीछे गया। गेस्ट रूम का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं था। आधा इंच का गैप था। मैं झाँका।
कमरे में हल्की पीली रोशनी थी। विक्रम ने मोनिका को धीरे से दीवार से लगा दिया। दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। फिर विक्रम आगे बढ़ा और मोनिका के होंठ चूम लिए। शुरू में नरम किस था। फिर गहरा हो गया।
उसकी जीभ मोनिका के मुँह में घुस गई। मोनिका की आँखें बंद हो गईं। विक्रम का एक हाथ उसकी पीठ पर था, दूसरा कुर्ते के ऊपर से स्तनों पर। जोर से दबा रहा था।
उसने कान में कहा, “मोनिका, तेरे स्तन बहुत भारी और नरम लग रहे हैं। छूते ही मेरा लंड फटने को हो रहा है।”
मोनिका हाँफते हुए बोली, “जोर से दबाओ विक्रम… मेरे पति तो बस हल्के से छूते हैं… मुझे जोर चाहिए… इनको अपना बना लो आज… आह्ह्ह…”
विक्रम ने कुर्ती ऊपर कर दी। ब्रा का हुक एक झटके में खोल दिया। मोनिका के दोनों बड़े गोरे स्तन बाहर झूल गए। निप्पल पहले से सख्त थे।
विक्रम ने एक स्तन दोनों हाथों से नीचे से उठाया, मुँह खोलकर पूरा भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। चुप्प-चुप्प की आवाज कमरे में गूँज रही थी। दाँतों से निप्पल काट रहा था। मोनिका सिसक उठी।
“आह्ह्ह… हाँ… और जोर से चूसो… काटो… मेरे स्तनों को लाल कर दो… आह्ह विक्रम… ऐसे ही… पति कभी मुँह से नहीं लेता इतना…”
दूसरा स्तन भी उसी तरह चूसा गया। मोनिका का एक हाथ विक्रम के बालों में था। दूसरे हाथ से वह अपनी सलवार के ऊपर से चूत सहला रही थी। विक्रम नीचे झुका। सलवार का नाड़ा खोला।
सलवार और पैंटी एक साथ नीचे सरका दी। मोनिका की चूत पूरी नंगी थी - साफ शेव, गुलाबी, रस से चमक रही थी। विक्रम घुटनों पर बैठ गया, उसके पैर फैलाए और चूत को देखा।
“बहुत सुंदर और गीली चूत है रंडी,” उसने कहा। फिर जीभ निकाली और क्लिट पर चाटना शुरू किया। दो उंगलियाँ धीरे से अंदर डालीं, अंदर-बाहर करने लगा। मोनिका कमर उठा-उठाकर चीख रही थी।
“आह्हhhhh… उंगलियाँ और गहरी… चाटो मेरी चूत को… पति कभी मुँह नहीं लगाता… हाँ… यही… मैं झड़ने वाली हूँ… अह्ह्ह विक्रम मत रोको…”
बाहर मैं खड़ा था। पैंट में लंड पूरी तरह तन चुका था। हाथ दरवाजे के फ्रेम पर थे। गुस्सा अभी भी नहीं आया था। सिर्फ एक गहरी, गंदी उत्तेजना। मेरी पत्नी किसी और के मुँह से चुद रही थी और मैं देख रहा था।
विक्रम खड़ा हुआ। पैंट उतारी। उसका लंड बाहर आया - आठ इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुईं, सिरा चमकदार और लाल। मोनिका ने आगे बढ़कर उसे पकड़ लिया।
हाथ से ऊपर-नीचे किया, फिर मुँह खोलकर सिरा चूसा। धीरे-धीरे और अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। विक्रम ने उसके बाल पकड़े और हल्के से आगे-पीछे करने लगा।
“चूस रंडी… गले तक ले… अच्छे से चूस… तेरे पति का लंड कभी ऐसा मुँह में लिया होगा?”
मोनिका लंड चूसते हुए बोली, आवाज दबी हुई, “नहीं… कभी नहीं… तुम्हारा बहुत मोटा है… मुझे आज पूरी तरह फाड़ दो… आह्ह्ह…”
विक्रम ने मोनिका को बेड पर लिटाया। उसके पैर अपने कंधों पर रखे। लंड का सिरा चूत के मुँह पर रगड़ा, फिर धीरे से दबाव दिया। सिरा अंदर गया। फिर आधा लंड। मोनिका आह भर रही थी।
आखिर में विक्रम ने एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड एकदम से अंदर चला गया।
“आआआह्ह्ह… विक्रम… फट गई मेरी चूत… बहुत मोटा… बहुत गहरा… अह्ह्ह…” मोनिका चीख उठी।
विक्रम धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मारने लगा। हर धक्के पर फच-फच की आवाज आ रही थी। मोनिका के स्तन हिल रहे थे।
“जोर से विक्रम… और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ… यही चाहिए था मुझे… पति कभी ऐसा नहीं ठोक पाता… आह्ह्ह…”
विक्रम ने रफ्तार बढ़ाई। मोनिका की टाँगें उसके कंधों पर थीं। हर धक्के पर बिस्तर हिल रहा था। मोनिका के नाखून चादर नोच रहे थे।
“आह्हhhhh… विक्रम… और… गहरा… अह्ह्ह मेरी चूत ले लो… आज पूरी…”
फिर उसने मोनिका को पलट दिया। कुत्ते वाली स्टाइल। गांड ऊपर, चूत पीछे की तरफ खुली हुई, रस टपक रहा था। विक्रम ने बाल पकड़े और एक जोरदार थप्पड़ गांड पर मारा। चटाक। मोनिका चिल्लाई।
“हाँ… और थप्पड़ मारो… बाल खींचो… मुझे रंडी समझकर चोदो… मेरी चूत तुम्हारी है आज… आह्ह्ह…”
विक्रम गरज रहा था। “ले मेरी रंडी… तेरी चूत आज मैं खूब ठोक रहा हूँ… ले… ले… और ले…” हर ठोकने पर मोनिका की चीखें फूट रही थीं। चूत से रस बाहर निकलकर जाँघों पर बह रहा था। विक्रम ने दूसरा थप्पड़ मारा। गांड लाल हो गई।
मोनिका खुद गांड पीछे की तरफ धकेल रही थी।
“आह्ह्ह… फाड़ दो… अह्ह्ह विक्रम… पति के सामने भी ऐसे सोचा करती थी… अब सच में हो रहा है… आह्हhhhh…”
पोजीशन बदली। विक्रम लेट गया। मोनिका ऊपर चढ़ी। उसने लंड पकड़कर अपनी चूत में डाला और उछल-उछलकर चुदवाने लगी। उसके भारी स्तन जोर-जोर से ऊपर-नीचे हिल रहे थे।
विक्रम नीचे से धक्के मार रहा था और दोनों स्तन मसल रहा था। निप्पल उसके हाथों में दब रहे थे।
मोनिका चीख रही थी, “हाँ… गहरा… और गहरा… मैं झड़ रही हूँ… झाड़ दो अंदर… अह्ह्ह विक्रम मत निकालना… अंदर ही छोड़ना… आह्ह्ह…”
कमरे में सिर्फ फच-फच और दोनों की साँसें थीं। मोनिका की कमर अकड़ गई। वह काँपते हुए झड़ गई। उसकी चूत ने लंड को कस लिया। विक्रम ने उसे कसकर पकड़ा और चूत के अंदर ही गर्म-गर्म मोटी वीर्य की धारें छोड़ दीं। मोनिका फिर से काँपी।
“आह्हhhhh… भर गया… अह्ह्ह… पूरा अंदर…”
दोनों पसीने से तर-बतर लेट गए। मोनिका ने विक्रम के सीने पर सिर रखा। आवाज अब धीमी थी, लेकिन साफ।
“ये रात मैं कभी नहीं भूलूंगी… कल फिर मिलेंगे। घर वाले सो जाएँ तो यहीं आ जाना।”
विक्रम ने उसके बाल सहलाए। “तेरी चूत अब मेरी है मोनिका। जब तक शादी है यहाँ, रोज लूँगा।” मोनिका ने कुछ नहीं कहा। बस सिर हिलाया।
मैं दरवाजे के बाहर खड़ा सब देख चुका था। मेरा लंड पैंट में पूरी तरह खड़ा था। हाथ काँप रहे थे। गुस्सा नहीं आया। बल्कि एक अपार, गंदी उत्तेजना छा गई थी।
मेरी पत्नी किसी और के मोटे लंड से फट रही थी, रंडी बनकर चीख रही थी, और मैं देख रहा था।
मैंने पैंट के ऊपर से लंड दबाया। दो-तीन बार सहलाया तो पानी निकलने ही वाला था। खुद को रोका। चुपचाप वहाँ से हट गया। गलियारे में साँस ली। आँगन में शादी का शोर जारी था। किसी को पता नहीं चला।
रात को मैं शहर के एक छोटे लॉज में रुका। नींद नहीं आई।
बार-बार वही दृश्य घूम रहा था - मोनिका की खुली जाँघें, विक्रम का आठ इंच का लंड उसकी चूत में समाता हुआ, उसका “फाड़ दो” वाला स्वर। सुबह मैंने चेहरा धोया और “आधिकारिक” रूप से मायके पहुँचा।
मोनिका सामान्य थी। रिश्तेदारों के बीच मुस्कुरा रही थी, चाय दे रही थी, बहन की शादी की बातें कर रही थी। जब हमारी निगाहें मिलीं तो वह एक पल रुक गई, फिर मुस्कुरा दी जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मैंने कुछ नहीं पूछा। रात को जब भीड़ थमी तो हम एक छोटे से कमरे में सोए। मैंने उसे छुआ। कुर्ती के नीचे स्तन पहले से सख्त थे। पैंटी उतारी तो चूत पहले से कहीं ज्यादा गीली थी। रस उंगलियों तक आ गया।
मोनिका ने आँखें बंद कीं। “आमित… आज थोड़ा और करो…” उसकी आवाज में वही भूख थी, लेकिन अब उसमें एक और परत थी - जो मैंने कल रात अपनी आँखों से देखी थी। मैंने लंड डाला। वह पहले से ढीली और गरम थी।
पाँच मिनट में मैं झड़ गया। मोनिका ने मुझे चूम लिया। मुस्कुराई भी। लेकिन जब मैं बाथरूम गया तो आईने में अपना चेहरा देखा।
मैं जानता था कि उसकी चूत अभी भी विक्रम के लंड की याद कर रही है। और सबसे गंदी बात यह थी कि मुझे भी वही बात नशा दे रही थी।
मैं कुछ नहीं बोला। बस सोचता रहा - मेरी पत्नी की ये छुपी हुई भूख अब मुझे भी पकड़ चुकी है। कल फिर गेस्ट रूम का दरवाजा आधा खुला होगा या नहीं, यह मैं नहीं जानता था।
लेकिन मन के किसी कोने में मैं चाहता था कि वह फिर खुला मिले।
दोस्तों, ये कहानी मैंने अपनी जुबानी बताई है। हर पल, हर शब्द, हर हरकत को जैसे देखा था वैसे लिखा है।
अगर ये Cuckold Husband Hindi Sex Kahani आपको पसंद आई तो बताओ, और डिटेल या अगला भाग चाहिए तो लिख दूंगा!
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