माँ से शादी - सुहागरात में बनाया अपने बच्चे की माँ!
Family Sex Stories : माँ से शादी कर सुहागरात में फाड़ी चूत! जबरदस्ती कोख में भरा माल! माँ हुई प्रेग्नेंट! बच्चा के बड़े होने पर हुई पूरी फॅमिली में Group Chudai!
हैलो फ्रेंड्स, यह मेरी पहली कहानी है। यह कहानी मेरी और मेरी माँ के बीच की है।
मैं अखिल हूँ, उम्र बीस साल। कॉलेज के लास्ट ईयर में पढ़ता हूँ।
घर में सिर्फ मैं और मेरी माँ कोमल रहती हैं। माँ की उम्र सैंतीस साल है। उनकी शादी सोलह साल की उम्र में हो गई थी और एक साल बाद मैं पैदा हुआ। जो भी हमें साथ देखता है, उसे लगता है कि माँ मेरी बड़ी दीदी हैं।
जब से मैं अठारह साल का हुआ, तब से माँ को लेकर मेरे मन में गंदे खयाल आने लगे थे। लेकिन हिम्मत नहीं हुई कुछ करने की।
मैं रात को बिस्तर पर लेटा रहता और सोचता कि अगर माँ एक बार मेरे ऊपर आ जाएँ तो कैसा लगेगा। उनकी गोरी जाँघें, भारी स्तन और पतली कमर मेरे दिमाग में घूमती रहतीं।
माँ की बॉडी हल्की मोटी है। गोरी त्वचा, सेक्सी चेहरा और 36-34-38 का फिगर। वो खुद को अच्छी तरह मेंटेन रखती हैं। पापा ने गाँव में अरेंज्ड मैरिज की थी। शादी के तीन साल बाद ही पापा ऑस्ट्रेलिया चले गए।
उन्होंने माँ को साफ कह दिया था कि उनकी शादी जबरदस्ती हुई थी और वो किसी और से प्यार करते हैं। माँ ने दादा-दादी को कुछ नहीं बताया और अकेली जिंदगी बिताने लगीं।
एक शाम जब मैं कॉलेज से लौटा तो माँ किचन में खाना बना रही थीं। मैंने पीछे से उन्हें गले लगाया।
“माँ… आज बहुत थक गया हूँ।” माँ हँसीं। “बेटा, हाथ धो ले। खाना तैयार है।” मेरा लंड उनकी गांड से छू गया। माँ थोड़ी देर के लिए रुक गईं, लेकिन कुछ नहीं बोलीं। मैंने हाथ हटा लिया।
रात को खाना खाते समय मैंने कहा, “माँ, आप बहुत अकेली रह गईं। पापा चले गए तो आपने मेरे लिए सब सहा।” माँ की आँखें नम हो गईं।
“बेटा, किस्मत में यही था। अब तू पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बन जा, बस यही मेरी खुशी है।”
मैंने उनकी उँगलियाँ पकड़ लीं। “माँ… अगर आप बुरा नहीं मानेंगी तो मुझे एक बात कहनी है।” माँ ने कहा, “बोल बेटा। नहीं मानूँगी।”
मैंने कहा, “पहले कसम खाओ कि गुस्सा नहीं करोगी।” माँ ने कहा, “तेरी कसम। अब बोल।”
मैंने गहरी साँस ली। “माँ… मैं किसी और से शादी नहीं करूँगा। अगर करूँगा तो सिर्फ आपसे। आप आज भी जवान हो। कोई नहीं कहेगा कि हम माँ-बेटे हैं। मुझे आपको सुख देना है।”
माँ का चेहरा सफेद पड़ गया। “अखिल… दिमाग ठीक है तेरा? मैं तेरी माँ हूँ। ऐसी बात मुँह से निकालना भी पाप है।”
मैंने कहा, “माँ, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। अगर आप हाँ नहीं बोलोगी तो मैं शादी नहीं करूँगा। और आज से खाना भी नहीं खाऊँगा।”
माँ रो पड़ीं। “बेटा, यह गलत है। तू अपनी जिंदगी बर्बाद मत कर।” लेकिन मैं नहीं माना। अगले दिन से मैंने खाना छोड़ दिया।
माँ रोज खाना लातीं और कहतीं, “जिंदा छोड़ दे बेटा। रोटी खा ले।” मैं सिर हिलाकर मना कर देता। नौवें दिन मेरी तबीयत बिगड़ने लगी। माँ डर गईं।
उन्होंने मेरे माथे पर हाथ रखा और कहा, “ठीक है बेटा… मैं हाँ कहती हूँ। लेकिन ये बात सिर्फ हमारे बीच रहेगी।”
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मैं खुश हो गया। हमने मंदिर में शादी की तारीख तय की। सुहागरात की रात माँ ने लाल साड़ी पहनी थी। घूँघट में उनका चेहरा छुपा था। मैंने घूँघट उठाया।
“माँ… आज आप मेरी पत्नी हो।” माँ की आँखें नम थीं। “हाँ बेटा… आज तू मेरा पति है।”
मैंने उनके होंठों पर मुँह रखा। पहले तो माँ सिकुड़ गईं, लेकिन फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगीं। मैंने ब्लाउज के बटन खोले। ब्रा हटाई। उनके भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और जोर से चूसा। माँ सिसकीं।
“आह… अखिल… धीरे…”
मैंने उनकी पैंटी उतारी। चूत पहले से गीली थी। मैंने दो उँगलियाँ डाल दीं। माँ ने कमर हिलाई।
“आह्ह… बेटा… बहुत दिनों बाद… आह्ह…” मैंने लंड निकाला और उनकी चूत पर रखा। “माँ… आज मैं अंदर डाल रहा हूँ।” माँ ने आँखें बंद कर लीं। “धीरे करना… बहुत टाइट है…”
मैंने धीरे से दबाव दिया। लंड का सिरा अंदर गया। माँ चीख उठीं।
“आह्ह्ह… दर्द… आह्ह…” मैं रुक गया। “माँ… निकाल दूँ?” माँ ने सिर हिलाया। “नहीं… डाल… लेकिन धीरे…” मैंने पूरा लंड अंदर किया। माँ की लंबी कराह निकली। “आह्ह्ह्ह… बेटा… पूरा आ गया…”
मैंने धीमे धक्के शुरू किए। माँ हर धक्के पर सिसकी भर रही थीं।
“आह… हाँ… ऐसे ही… आह्ह… और गहरा…” मैंने उनके स्तनों को मुँह में लिया और चूसता हुआ चोदने लगा। माँ की टाँगें मेरी कमर पर चढ़ गईं। “और जोर से… आह्ह… अखिल… मुझे चोद…”
मैंने स्पीड बढ़ाई। बिस्तर बोलने लगा। माँ की चूत से पानी निकल रहा था।
“आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… मत निकालना… अंदर… आह्ह्ह…” माँ का शरीर तन गया। उन्होंने जोर से आह भरी और झड़ गईं। मैंने अंदर ही रखा। थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया। सारा माल उनकी चूत में छोड़ दिया।
माँ हाँफ रही थीं। मैं उनके ऊपर लेटा रहा। माँ ने मेरे बाल सहलाए।
“बेटा… आज बहुत दर्द हुआ… लेकिन अच्छा भी लगा…” मैंने उनके होंठ चूमे। “माँ… अब रोज चोदूँगा। आज से आप मेरी बीवी हो।”
रात भर हमने दो और राउंड किए। एक बार माँ ऊपर बैठीं और खुद कूद-कूदकर चुदवाईं।
दूसरी बार मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा। दोनों बार मैंने अंदर ही माल छोड़ा। सुबह जब आँख खुली तो माँ मेरे सीने पर सिर रखकर सो रही थीं। नंगी। उनकी चूत से अभी भी मेरा माल रिस रहा था।
मैंने धीरे से लंड फिर से उनकी चूत में डाला। माँ की आँखें खुलीं।
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“अखिल… सुबह-सुबह…” लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं। मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। माँ सिसकियाँ भरती रहीं। “आह… बेटा… धीरे… आह्ह…” थोड़ी देर बाद मैं फिर से उनकी चूत में झड़ गया।
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सुहागरात के बाद हमारी जिंदगी बदल गई। माँ अब पहले जैसी नहीं रहीं। सुबह उठते ही वो मेरे पास आ जातीं। कभी चाय लेकर, कभी बिना कुछ बोले मेरे लंड को हाथ में ले लेतीं।
“बेटा… सुबह से खड़ा है… थोड़ा निकाल दे…” मैं उन्हें बिस्तर पर लिटा देता। उनकी चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई होती। मैं धीरे-धीरे चोदता। माँ सिसकियाँ भरतीं। “आह… अखिल… और गहरा… आह्ह…”
एक हफ्ते बाद माँ ने खुद कहा, “अब मुझे डर नहीं लगता। तू रोज चोद। मैं तेरी बीवी हूँ।” रात को वो साड़ी उतारकर नंगी हो जातीं। मैं उनके भारी स्तन चूसता, चूत चाटता।
माँ कमर हिलाकर बोलतीं, “जीभ और अंदर डाल… आह्ह… बेटा…” मैं दो उँगलियाँ डालकर फिंगर करता। माँ झड़ जातीं। फिर मैं लंड डालता और जोर-जोर से ठोकता।
“माँ… तेरी चूत कितनी गर्म है… कस रही है…” माँ कराहतीं, “हाँ… चोद… अपनी माँ की चूत फाड़ दे… आह्ह्ह…”
दो महीने बाद माँ की तबीयत खराब होने लगी। उल्टी आती। डॉक्टर ने कहा कि वो प्रेग्नेंट हैं। माँ रो पड़ीं। “अखिल… तेरा बच्चा है…” मैंने उन्हें गले लगाया।
“माँ… हम दोनों का बच्चा है। मैं खुश हूँ।” माँ मुस्कुराईं।
“अब चुदाई कम करनी पड़ेगी।” लेकिन मैं नहीं रुका। पेट निकलने से पहले तक मैं रोज चोदता रहा। माँ ऊपर बैठकर खुद कूदतीं।
“धीरे… लेकिन मत रुक बेटा… आह्ह…”
जब पेट ज्यादा निकल गया तो चूत में डालना बंद कर दिया। एक रात माँ ने खुद कहा, “बेटा… गांड में डाल… चूत में दर्द होता है।” मैंने तेल लगाया। पहले उँगली से खोला। माँ सिसकीं।
“आह… धीरे…” फिर लंड का सिरा अंदर किया। माँ चीख उठीं। “आह्ह्ह… दर्द… लेकिन मत निकाल…” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में डाला। माँ की आँखों से आँसू निकल आए।
“आह्ह… बेटा… बहुत मोटा है…” मैंने धीमे धक्के शुरू किए। थोड़ी देर बाद माँ खुद गांड पीछे की तरफ धकेलने लगीं। “अब अच्छा लग रहा है… और जोर से… आह्ह…”
नौ महीने बाद माँ ने जुड़वाँ बच्चे दिए। एक बेटा और एक बेटी। दोनों स्वस्थ थे। माँ बहुत खुश थीं। बच्चे पैदा होने के दो महीने बाद फिर से चुदाई शुरू हो गई।
माँ की चूत पहले से थोड़ी ढीली हो गई थी, लेकिन गांड अभी भी टाइट थी। मैं दोनों छेदों में बारी-बारी से चोदता।
माँ कराहतीं, “आह… अखिल… आज गांड में ही छोड़… आह्ह…”
सालों बीतते गए। मैं चालीस का हो गया। माँ सत्तावन की। लेकिन उनका जिस्म अभी भी जवान था।
हमारे चार बच्चे हो गए। दो बेटे और दो बेटियाँ। एक दिन मैंने बच्चों को सच्चाई बता दी। सबसे बड़ा बेटा अठारह का था। उसने कहा, “पापा… मुझे भी माँ को चोदना है।” माँ कुछ नहीं बोलीं। बस सिर झुका लिया।
उस रात तीनों एक बिस्तर पर थे। मैंने माँ को घोड़ी बनाया। मेरा बेटा पीछे से उनकी चूत में लंड डाल रहा था। मैं उनके मुँह में लंड दे रहा था। माँ दोनों तरफ से कराह रही थीं।
“आह्ह… बेटा… और गहरा… आह्ह… अखिल… मेरे मुँह में…” मेरा बेटा जोर-जोर से ठोक रहा था।
“माँ… तेरी चूत बहुत गर्म है… आह्ह…” माँ झड़ गईं। दोनों ने अंदर ही माल छोड़ दिया।
धीरे-धीरे दोनों बेटे माँ को चोदने लगे। कभी अकेले, कभी मेरे साथ। बेटियाँ भी बड़ी हो गईं।
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एक रात बड़ी बेटी ने कहा, “पापा… मुझे भी चोदो।” मैंने मना नहीं किया। उसकी चूत टाइट थी। पहली बार में वो चीख उठी।
“आह्ह्ह… पापा… दर्द… लेकिन मत निकाल…” मैंने धीरे-धीरे चोदा। वो झड़ गई। बाद में दोनों बेटियाँ मुझसे और अपने भाइयों से चुदने लगीं।
अब मेरे दोनों बेटों की शादी हो चुकी है। बहूएँ भी घर में रहती हैं। एक रात मैंने छोटी बहू को कमरे में बुलाया।
“बहू… आज तेरी चूत चोदूँगा।” वो शर्माई, लेकिन मना नहीं किया। मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से ठोका। वो सिसकियाँ भरती रही।
“आह… ससुर जी… और जोर से…” मैंने उसकी गांड में भी डाल दिया। वो तीन बार झड़ गई।
मेरी माँ अब सत्तावन की हैं, लेकिन जब भी दामाद आते हैं तो माँ को चोदते हैं। एक बार मैंने खुद देखा। दामाद माँ को दीवार से सटाकर चोद रहा था। माँ कराह रही थीं।
“आह्ह… दामाद… और गहरा… आह्ह…” मैंने कुछ नहीं कहा। बस देखता रहा।
आज भी घर में सब खुलेआम चुदाई करते हैं। माँ की कोख से जन्मा हर लड़का उन्हें चोदता है। बेटियाँ अपने बाप और भाइयों से चुदती हैं। बहूएँ मुझसे। दामाद माँ से। कोई शर्म नहीं बची।
कहानी यहीं खत्म होती है। अगर अगला हिस्सा चाहिए जिसमें दामादों और बहुओं की चुदाई डिटेल में हो तो कॉमेंट में बताना। धन्यवाद।
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📝 Comments :
Reena
Mere bete ko maine gali ki ladki ko chodte dekha uska lund 6 inch ka or mota bhi meri chut me pani aa gaya mujhe uska chahiye kaise patau , vo choti si 14 saal ki ladki kaise uska lund le maje le rahi thi
Deepu
Reenasg karo