पति के सामने भाई ने फाड़ी मेरी चूत! 02


Family Sex Stories : पति को नींद की गोली देकर! भाई ने वर्मा के सामने फाड़ी नंगी चुत! कुतिया बनाकर करी बेरहम चुदाई! मुँह-मम्मों पर छोड़ा माल! फिर बनाई हनीमून Plan!


अभी तक आपने "पति के सामने भाई ने फाड़ी मेरी चूत!" में पढ़ा :-


मैंने भी उससे कहा, “मुझे तुम्हारा लंड चाहिए… जैसे भी दो बस दे दो! मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है बहनचोद!”


उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी थोंग पैंटी को फाड़ते हुए मुझे नीचे से पूरी नंगी कर लिया। फिर मेरी चिकनी गोरी चूत पर तीन-चार थप्पड़ लगाते हुए कहा, “ये लंड इतनी आसानी से नहीं मिलता। इसके लिए तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा।”


मैंने उत्सुकता से कहा, “हाँ हाँ कुछ भी करवा लो… बस मुझे चाहिए।”


ये सुनते ही उसने मुझे पीछे की ओर धक्का देते हुए कहा, “तो बस… फिर अगर मेरा लंड लेना है तो मेरी हाँ में हाँ मिलाती रहना।”


ये बोलकर वो ठीक होकर बैठ गया और मुझे भी पीछे कर दिया क्योंकि मेरे पति की वाशरूम से बाहर आने की आवाज आ रही थी।


हम लोग वापस अपनी-अपनी जगह पर ऐसे बैठ गए जैसे कुछ हुआ ही न हो।


जैसे ही पंकज बाहर आए विकास उठकर खड़ा हो गया और मेरे पति से बोला, “चलो अब पारुल को सोने देते हैं। आप चलो मेरे साथ मेरे रूम में। वर्मा साब भी वेट कर रहे होंगे। उनसे भी कुछ काम की बात कर लेते हैं।”


मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं इस उल्लू के पट्ठे को चूत चोदने को कह रही हूँ और ये मेरे पति को भी दूसरे रूम में लेकर जा रहा है।


कम से कम मैं अपने पति के साढ़े पाँच इंच के लंड से ही चूत चुदवा लेती क्योंकि उस वक्त मेरी चूत में चुदने की ऐसी आग लगी हुई थी कि मुझे बस लंड चाहिए था।


मैं गुस्से से मुँह पलटकर लेट गई बिना कोई जवाब दिए… और वो लोग दरवाजा बंद करके बाहर चले गए। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अब अपनी वेट पुसी की आग कैसे बुझाऊँ!


अब आगे :-


मैं अपनी भभकती चूत को ठंडा करने के लिए सोच रही थी। जब कुछ समझ में ना आया तो मैं शॉवर लेने चली गई। वहाँ मैंने कुछ देर विकास का लंड याद करके अपनी चूत सहलाई और ठंडा पानी चूत पर डाला। पर कुछ खास फर्क नहीं पड़ा।


जब मैं वापस रूम में आई तो बेड पर अपनी गांड टिकाते हुए मैंने अपना फोन चेक किया। उस पर चार नोटिफिकेशन्स आए हुए थे।


मैंने चेक किया तो चार मैसेज किसी अननोन नंबर से आए थे। जिसमें लिखा था कि ये मेरा नंबर है। तुम सो मत जाना। मैं अभी थोड़ी देर में पंकज को सेट करके कुछ तरकीब लगाकर आऊँगा - विकास।


बाकी दो मैसेज भी पंकज के ही थे। सो गई क्या?


मैंने पहले पंकज के मैसेज का रिप्लाई किया। नहीं, मैं अभी शॉवर लेकर आई हूँ। बताओ क्या हुआ? विकास को मैंने कोई रिप्लाई नहीं किया। इतने में उसका एक और मैसेज आया कि मैं तुम्हारे पति के साथ एक शर्त लगा रहा हूँ। अगर वो पूछे तो हाँ बोलना।


मैंने फिर भी कोई रिप्लाई नहीं किया। कुछ मुझे गुस्सा भी था और मुझे कुछ समझ भी नहीं आ रहा था कि यह क्या बात कर रहा है और मुझे क्या रिप्लाई करना चाहिए।


कुछ देर बाद पंकज का एक और मैसेज आया कि अगर सोई नहीं हो तो मुझे कॉल करो। कुछ बात करनी है।


मैंने उसी वक्त कॉल लगा दी।


फोन उठाते ही पंकज बोले, “जल्दी बताओ मुझे क्या करना चाहिए। विकास ने एक शर्त रखी है। अगर वर्मा साब का कॉन्ट्रैक्ट हमें लेना है तो मुझे उसे तुम्हारे साथ प्रैंक करने की परमिशन देनी होगी।


और अगर वो प्रैंक में जीत जाता है तो उसके बाद जो भी उसकी शर्त होगी वो भी। तो मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।”


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मैंने विकास की बात को याद करते हुए पंकज से कहा, “आप बेकार में इतना सोच रहे हो। मैं उसे प्रैंक में जीतने ही नहीं दूँगी क्योंकि उसे थोड़ी न मालूम है कि आपने मुझे प्रैंक के बारे में पहले ही बता दिया है।”


मेरे जवाब से मेरे पति खुश हो गए और बोले, “ठीक है फिर तुम देख लेना।” उन्होंने फोन बंद कर दिया।


करीब दस मिनट के बाद दरवाजे की घंटी बजी। मैंने जैसे ही दरवाजा खोला विकास ने मुझे गोद में उठा लिया और जोर से मेरे होंठों को चूसने लगा। “उम्म… आह्ह…” मैं पूरी तरह से मदहोश हो गई थी।


जब मैंने ये अहसास किया कि हम लोग रूम के बाहर कॉरिडोर में ही खड़े हैं और उसके दोनों हाथ मेरी गांड को मसल रहे हैं तो मैंने उसे अंदर जाने को कहा। वो मुझे गोद में उठाए हुए ही कमरे में आ गया।


अंदर आते ही उसने मुझे बिना गोद से उतारे मेरे सारे कपड़े उतारकर मुझे पूरी तरह नंगी कर लिया। उसने चार थप्पड़ मेरी मोटी और गोरी गांड पर इतनी कसके लगाए कि मेरे दोनों चूतड़ बुरी तरह लाल हो गए। “आह्ह… दर्द…”


उसने मुझे बेड पर पटकते हुए अपनी टी-शर्ट उतार दी और खुद भी ऊपर से पूरा नंगा हो गया। उसकी जिम फिट बॉडी देखकर मैं अब अपने आपको पूरी तरह उसे सौंप चुकी थी।


मैंने लपककर उसके एक निप्पल को मुँह में ले लिया और आँखें बंद करके मैं उसके निप्पल चूसने-चाटने में लग गई थी। “आह… कितना सख्त है…”


इतने में मेरा हाथ उसकी पीठ को सहलाते हुए थोड़ा नीचे उसकी गांड पर जा टिका।


मेरी आँखें खुल गईं क्योंकि अब वो नीचे से भी पूरा नंगा हो चुका था। मैंने आव देखा न ताव सीधा उसका आठ इंच का लंड हाथ में पकड़ लिया। उसका लंड इतना मोटा और आग की तरह तप रहा था।


मैं उसे दोनों हाथों से ऐसे पकड़ रही थी जैसे मैं न जाने कब से उसका लंड हाथ में पकड़ने को तरस रही थी। जैसे ही मैं उसका लंड मुँह में लेने के लिए आगे हुई विकास ने मुझे पीछे धक्का दे दिया। 


मैंने फिर से उसकी तरफ बढ़ते हुए कहा, “प्लीज मुझे एक बार अपना लंड चूसने दो। मैं कब से तुम्हारा लंड चूसने को तरस रही हूँ।”


विकास बोला, “मैंने तुमसे कहा था न कि ये लंड इतनी आसानी से नहीं मिलेगा। तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा।”


मैंने कहा, “हाँ मैं सब करने को तैयार हूँ। क्या करना है बोलो। बस मुझे अभी ये लंड चूसने दो प्लीज!”


उसने मुझे बेड पर सीधा लिटाते हुए अपना ये मोटा लंड मेरे होंठों पर छुआ दिया।


उसके लंड की खुशबू आते ही मैं तो जैसे पागल ही हो गई और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। इससे पहले कि मैं उसका लंड मुँह में लेने के लिए मुँह खोलती वो पीछे हटा और मेरे साथ बेड पर लेट गया।


मैंने झट से उसकी तरफ पलटते हुए उसका लंड फिर से हाथ में पकड़ लिया। वो कहने लगा, “अगर तुम्हें ये लंड सच में चाहिए तो तुम्हें दो काम करने हैं।”


मैंने कहा, “क्या काम?”


उसने बताया, “मुझे शर्त लगाकर चोदने में और शर्त जीतने में बड़ा मजा आता है। एक शर्त मैंने वर्मा से लगाई थी कि पंकज की बीवी को मैं कभी भी चोद सकता हूँ अगर कोई अच्छी शर्त लगाए।”


“ओके… और?”


विकास ने बताया, “और वर्मा वैसे भी तुम्हें एक बार पूरी नंगी देखना चाहता है क्योंकि तुमने उसे होटल की लॉबी में टीज जो किया था अपनी चिकनी गोरी छाती और मटकती हुई गांड दिखाकर।”


“उल्लू का पठा ठरकी मोटा!” मैंने वर्मा को गाली देते हुए कहा।


विकास हँसते हुए बोला, “मैंने सोचा कि जब उसे दिखाना ही है तो क्यों ना पूरी नंगी करके चोदते हुए ही दिखाऊँ।”


मैंने कहा, “नहीं तुम पागल हो। वो मेरे पति को सब बक देगा। ऐसे नहीं और उनके कॉन्ट्रैक्ट पर भी बुरा असर हो सकता है।”


विकास बोला, “जितने का कॉन्ट्रैक्ट वो तुम्हारे पति को दे रहा है उससे दो गुना पैसे वो मुझे दे रहा है तुम्हें नंगी करने और नंगी करके चोदते हुए उसे दिखाने के लिए।”


मैं उसकी ये बात सुनकर हैरान ही रह गई। सच में ये विकास तो बहुत ही हरामी लड़का है। मन में मैंने सोचा कि इस हरामी में और इसके लंड में कुछ तो बात है कि गलत होते हुए भी जो ये बोल रहा था मैं वो करने को तैयार थी।


मैंने उससे कहा, “लेकिन इसमें तो तुम्हारा फायदा ज्यादा… और मुझे क्या मिलेगा। इसमें तुम तो मुझे आज के बाद कभी मिल भी नहीं पाओगे!”


उसने कहा, “ऐसा नहीं है। दूसरी शर्त मैंने तुम्हारे पति पंकज के साथ लगाई है कि अगर मैं तुम्हें प्रैंक करने में जीत गया तो मेरी मन चाही होगी और मन चाही में मैं तुम्हें 4-5 दिन के लिए माँगने वाला हूँ… एक बढ़िया से हनीमून के लिए।”


मैं शॉक हो गई और कहा, “इस बात को पंकज कभी नहीं मानेंगे… नहीं नहीं कभी भी नहीं हो सकता ये!”


उसने फिर से मुझे अपनी तरफ खींचते हुए कहा,


“ये सिर्फ तुम्हें बताया है। पंकज को तो मैं ये कहने वाला हूँ कि मेरी कजिन की शादी है तो पारुल को भेज दो क्योंकि मेरी कजिन को गाइड करने वाला और शॉपिंग में हेल्प करने वाला कोई नहीं है।”


मैंने ठंडी साँस ली।


विकास ने पूछा, “पहले तुम बताओ तुम मेरे साथ जाना चाहती हो क्या… मेरी पत्नी बनकर हनीमून पर?”


मुझे लगा वो मुझे स्पेशल फील करवाना चाहता है तो मैंने कहा, “हाँ मगर ये सब कैसे होगा?”


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विकास बोला, “मुझे दूसरों की गर्लफ्रेंड्स और दूसरों की बीवियों के साथ सुहागरात मनाना बहुत सेक्सी लगता है!


जहाँ 5-6 दिन तक वो किसी दूसरे की गर्लफ्रेंड या वाइफ को दिन-रात पागलों की तरह चोदता है… और उन्हें डिस्टर्ब करने वाला कोई भी नहीं होता।”


उसकी बातें सुनकर मेरी चूत पानी छोड़ रही थी और दिमाग कह रहा था कि ये तो तुझे रखैल बनाना चाहता है।


विकास जब ये बोला, “मुझे पंकज ने बताया था कि तुम अभी बेबी प्लान नहीं कर रहे हो। मेरी ये फंतासी है कि किसी भी सुंदर लड़की की चूत में सबसे पहला बीज मैं डालूँ।”


यह सुनकर मैंने बिना कुछ सोचे ही उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। “उम्म… आह्ह…”


मैंने उसके कान में धीरे से कहा, “ठीक है बुला लो वर्मा को। लेकिन उसे मत बताना कि मुझे पता है कि वो देख रहा है। उससे कहना कि बस चुपचाप देखे और वापस चला जाए।”


“क्यों?”


“उसके साथ कहीं मेरे पति भी पीछे-पीछे आ गए तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो जाएगी।”


इस पर विकास ने बताया कि ऐसा नहीं होगा। उसने पहले ही पंकज की ड्रिंक में नींद की गोली मिला दी थी। अब तक तो वो बहुत गहरी नींद में होगा।


ये कहते ही उसने वर्मा को मैसेज कर दिया कि आ जाओ। मैसेज भेजते ही मेरे बदन में एक अजीब सी सनसनी दौड़ गई क्योंकि ये सब मैं पहली बार कर रही थी।


इतने में दरवाजा खुलने की आवाज आई जो विकास ने खुला ही छोड़ रखा था जब से वो आया था। हम दोनों को पता चल गया कि वो वर्मा ही होगा।


विकास ने मुझे अपनी दोनों टाँगों के बीच बिठा लिया और अपना ये मोटा लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। उसका लंड इतना मोटा और बड़ा था कि वो मेरे मुँह में जा ही नहीं रहा था। “गप… आह्ह… बहुत मोटा है…”


लंड चूसते हुए मैंने विकास के फोन में नोटिफिकेशन देखा जो कि बिल्कुल मेरे सामने बेड पर पड़ा था। वो वर्मा का मैसेज था जिसमें लिखा था कि इसकी गांड मेरी तरफ घुमा। मुझे पूरी तरह नजर नहीं आ रही।


मैंने दूसरे हाथ से फोन विकास की तरफ खिसकाते हुए उसे हल्का सा हिलाया कि मैसेज आया है ताकि वर्मा को भी न पता चले कि फोन मैंने दिया है।


विकास ने मैसेज पढ़कर ब्लैंकेट पूरा बेड से नीचे फेंक दिया और मुझे उठाकर अपनी एक तरफ घोड़ी बना लिया जहाँ मेरी पूरी मोटी चिकनी नंगी गांड अब दरवाजे के पास खड़े वर्मा की तरफ हो गई थी।


अब वो मेरी सिर्फ गांड ही नहीं बल्कि मेरी चूत भी अच्छे से देख पा रहा था।


विकास ने एक हाथ से अपना मोटा लंड पकड़ लिया और मेरा मुँह अपने टट्टों पर रख दिया क्योंकि उसका इतना मोटा लंड तो मेरे मुँह में फिट ही नहीं हो रहा था।


मैंने आज से पहले कभी किसी के टट्टे नहीं चूसे थे। विकास के टट्टे देखने में भी बहुत मोटे और ऐसे चिकने थे जैसे वैक्सिंग करवा रखी हो।


उसके टट्टों में से अलग सी खुशबू आ रही थी और उन पर हल्का-हल्का पसीना भी आ रहा था। मन ही मन में मैं बहुत उत्तेजित हो रही थी और उसके टट्टे इतने प्यार से चूस और चाट रही थी जैसे टट्टों पर कोई शहद लगा हुआ हो।


“आह्ह… कितने बड़े हैं…”


काफी देर तक उसके टट्टे अच्छी तरह चाटने के बाद मैंने मुँह हटाया तो वो खड़ा हुआ और मुझे गोद में उठा लिया।


जिस समय उसने मुझे गोद में उठाया मेरी हल्की सी नजर दरवाजे की ओर गई तो ठरकी वर्मा घुटनों तक अपनी पैंट उतारकर अपना 5-6 इंच का लंड मसल रहा था। लेकिन अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उल्टा अच्छा लग रहा था।


मेरा भाई मेरी चूत में लंड दे रहा है और दूसरा जिसको मेरी चूत नसीब नहीं हो सकती वो सिर्फ देखकर मजे ले रहा था।


इतने में विकास ने एक हाथ से मुझे उठा रखा था और दूसरे हाथ से अपने मोटे लंड का सुपारा मेरी चूत पर एक-दो बार रगड़ दिया था। मेरी चूत ने और ज्यादा पानी छोड़ दिया था जो कि पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी।


“हाँ… अब ये चूत पूरी तरह से मेरा लंड लेने को रेडी है।”


ये बोलकर विकास ने मेरी चूत को अपने लंड पर रखा और एक ही झटके में मुझे पूरा लंड की तरफ धकेल दिया।


“ऊई मां मर गई… आह्ह्ह…”


एक ही बार में जैसे उसने मेरी चूत फाड़ दी हो। मैंने अपने नाखून उसके मजबूत कंधों में गाड़ दिए और पूरी तरह निढाल होकर उसके कंधे पर गिर गई।


उसने मुझे दूसरे झटके के लिए थोड़ा ऊपर की ओर उठाया ही था कि मैं “आह आह आह” बोलकर पहले झटके में ही झड़ गई।


मेरी चीख सुनकर… और एक ही झटके में मुझे झड़ते देखकर वर्मा का लंड भी झड़ गया। कुछ पल बाद वो धीरे से कमरे से बाहर चला गया।


वर्मा के कमरे से बाहर जाते ही विकास ने मुझे कमर से पकड़ा और मेरे गोल-मटोल गोरे मोटे मोम्मे चूसने लगा। उसने इतने जोर से मेरे निप्पल चूसे कि वो पूरी तरह लाल हो गए और इतना तन गए कि दर्द महसूस होने लगा।


“आह्ह… दर्द… लेकिन अच्छा लग रहा है…”


मैं अब उसके लंड के अगले झटके के लिए रेडी हो चुकी थी। मैं अभी भी उसकी गोद में उसके लंड पर ही बैठी थी और उसका पूरा लंड मेरी चूत में था।


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उसने मुझे कमर से ही पकड़कर अगला झटका दिया जो उसने आराम से ही दिया था ताकि मेरी चूत थोड़ा और पानी छोड़ दे। दो झटके प्यार से देने के बाद मेरी चूत फिर से पूरी गीली हो गई और विकास ने कुछ झटके बहुत तेज दे दिए।


मैं चीख रही थी। “आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह…” तो विकास ने झटके से अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया। लंड निकलते ही मेरी चूत से पिचकारी ही छूट गई।


विकास ने मुझे बेड पर पटकते हुए कुतिया बना दिया और कुतिया बनाते ही उसने फिर से अपना पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया। मैंने अपना मुँह तकिये में दबा लिया ताकि मेरी चीखें बाहर न जाएँ।


लेकिन विकास ने तेज-तेज चोदते हुए मेरा तकिया हटा दिया और कहने लगा, “दिल खोलकर चिल्ला। मेरा और जोर से चोदने का मन करता है।”


बहुत देर तक कुतिया बनाकर मेरी चूत मारने के बाद उसने अपना सारा माल मेरे मुँह पर और मेरे गोरे मोटे मम्मों पर छिड़क दिया।


उसका माल इतना ज्यादा निकला कि मैं पूरी तरह उसके माल से भर गई थी। काफी माल मेरे मुँह के अंदर भी गया जो कि मुझे काफी टेस्टी लगा। “आह्ह… कितना गाढ़ा है…”


उसने इतना सारा माल छिड़क दिया था कि मुझे शॉवर लेने जाना पड़ा।


अब मैं शॉवर लेकर आ चुकी थी। हम दोनों बेड पर पूरी तरह से नंगे एक-दूसरे के साथ चिपककर लेटे थे। मैं उसके टट्टों को हाथ में लेकर सहला रही थी और उससे कह रही थी,


“कितना माल भरा है इनमें। मुझे तो तुम्हारे टट्टों से ही प्यार हो गया है। मैंने लाइफ में पहली बार किसी के टट्टे चाटे हैं। मेरा तो मन करता है बस तुम्हारे टट्टे ही चूसती रहूँ।”


वो कहने लगा, “तो चूस लो किसने रोका है?”


“ना बाबा ना! टट्टे चूसूँगी तो तुम्हारा लंड फिर से तन जाएगा और मेरी चूत में अब इतनी हिम्मत नहीं कि दोबारा इतना बड़ा लंड अंदर ले सकूँ।”


“हा हा हा…”


कुछ पल बाद विकास ने हँसते हुए मेरी गांड पर थप्पड़ लगाते हुए कहा, “तुम्हारी गांड कब काम आएगी… अब चूत को रेस्ट दे देंगे।”


मैंने कहा, “जी नहीं! मैंने आज तक पीछे किसी से नहीं करवाया और पीछे वाली बहुत दर्द देती है ऐसा मैंने सुना है।”


विकास बोला, “एक बार तुमने मुझसे गांड मरवा ली तो सिर्फ गांड ही मरवाना पसंद करोगी। इस बात की गारंटी देता हूँ।”


मैंने उसकी बात को टालते हुए कहा,


“चलो वो तो देखेंगे। अभी तो तुमने मुझे हनीमून पर भी ले जाना है। वहाँ भी तो कुछ हनीमून स्पेशल होना चाहिए। वैसे भी अब काफी देर हो गई है। तुम्हें अपने रूम में चले जाना चाहिए।


अगर मेरे पति की आँख खुल गई और वो अचानक आ गए तो गड़बड़ हो जाएगी।”


विकास ने कपड़े पहने और वो चला गया।


अगली कहानी में मैं आपको बताऊँगी कि कैसे मुझे विकास हनीमून पर ले गया और उसने मेरे साथ क्या-क्या किया।


आपको मेरी XXX फ्रेंड चीटिंग वाइफ की Hindi Sex Kahani कैसी लगी मुझे मेल करके बताएँ। engineermeandhoti@gmail.com


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