सविता भाभी बारिश में चुदने आई! 02

Family Hindi Sex Stories : भाभी को जालीदार गाउन पहनाया! कॉफी पीते घूरा लंड! चुचियाँ दबाकर निकाला दूध! फिर लंड हाथ में लेकर Pyasi Bhabhi बोलीं - फाड़ दे मेरी चूत!


अभी तक आपने : "सविता भाभी बारिश में चुदने आई!" में पढ़ा :-


बालकनी में बैग खोला। तीन साड़ियाँ निकालीं। दो टाँग दीं। तीसरी खोलते ही कुछ गिरा - अंदर की चड्डी। उठाकर देखा, पिछला भाग पूरा फटा था, छेद-छेद हो गए थे। झट से सूँघा। सविता की चूत की मिठास उसमें से आ ही रही थी।


गीली होने की वजह से उसे भी सुखने डाल दिया। साथ शायद एक ही पैंटी लाई थीं। ब्रा पहनती ही नहीं थीं, यह पहले से मालूम था।


अंदर गया। हॉल में एसी चालू था, भीगकर आई थीं, ठंड लगने लगी थी। फटाफट बोला, “सविता, गरमा-गरम कॉफी लेकर आता हूँ। या चाय चाहिए? तुम बोलो।”


धीरे बोलीं, “चलेंगी कॉफी।” मुस्कुराईं। फिर, “सुनो ना, मेरे पास सिर्फ साड़ियाँ हैं और वो सब भीग गईं। तुम्हारे पास माँ का कोई गाउन वगैरह हो तो दोगे क्या?” नेकी और पूछ-पूछ वाली बात हो गई।


“हाँ सविता, क्यों नहीं। और अब ये घर तुम्हारा ही है। कुछ चाहिए तो बेझिझक माँगना।” बस मुस्कुराईं। उनकी बहुत फिक्र कर रहा था। शायद पहली बार कोई इतने अच्छे से पेश आ रहा हो। वो भी खुश थीं।


अंदर चलने को कहा, अपना कमरा दिखाया। “सविता, ये मेरा रूम है। गीले कपड़े उतारो। मैं तब तक नए कपड़े लेकर आता हूँ।” कमरे में गईं, मुड़ीं, मेरी तरफ देखते-देखते दरवाजा बंद कर लिया।


हँसते हुए बोलीं, “अब जाओ यहाँ से और गाउन लेकर आओ जल्दी।” थोड़ा शर्माया। उनकी साड़ी उतरते देखना था। पीछे-पीछे आते देख समझ गई थीं, इसलिए झट दरवाजा लगा दिया था।


अब और कितनी देर रोक सकती थीं? आज पूरी रात मेरी थी।


माँ-पापा के कमरे गया। मालूम था पापा गुस्सा होते हैं तो माँ शांत करने के लिए कुछ अलग तरह के गाउन इस्तेमाल करती हैं, ऊपर वाली अलमारी में रखे हैं। बिस्तर पर चढ़कर देखने लगा - सबसे हॉट कौनसा है।


गाउन देखते-देखते लंड ने सलामी दे दी, खड़ा हो गया। हर गाउन में उन्हें ही देख रहा था। लंड से बोला, बेटे आज तू ही इज्जत रखने वाला है, मस्त खड़ा हो जा।


अब आगे :-


एक गाउन मिला - लाल, स्लीवलेस, नेक बहुत नीचे, स्तनों वाले हिस्से पर जाली, कमर के नीचे साइड का कपड़ा पूरा जाली का। वही पसंद आया। दौड़ते हुए दरवाजे पर खटखटाया।


सविता ने दरवाजा खोला। साड़ी खोल रखी थी। अब बस ब्लाउज में थीं। चुचियाँ साफ दिख रही थीं। नीचे लहंगा। हँसते हुए मुझे देखने लगीं। ऐसा देखकर लंड और खड़ा हो गया।


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हाथ से गाउन लिया। लेते वक्त नजर खड़े लंड पर पड़ी। शॉर्ट्स में था, बाहर आने को तरस रहा था। एकदम शर्मा गईं। मेरी तरफ देखा, झट दरवाजा बंद कर लिया।


रिएक्शन देखने वहीं रुका। वही हुआ। जोर से बोलीं, “अमेय ये क्या है? मुझे गाउन चाहिए था और ये तुमने क्या दिया है?” जोर-जोर से हँसते हुए बोल रही थीं। मैं बाहर ही था।


“माँ जाते वक्त सब लेकर गई हैं। जो बचा है वही दिया। यही पहनना पड़ेगा आज। वरना अपनी भीगी साड़ी पहनकर आ जाओ बाहर।” ये Desi Sex Ki Hindi Sex Kahani आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है!


यह सुनकर शांत हो गईं। लगा होगा गुस्से से बोल रहा हूँ। कुछ नहीं बोलीं। मैं कॉफी बनाने चला गया। कॉफी तैयार हुई। देने कमरे गया तो वहाँ नहीं थीं।


हॉल में देखा - सोफे पर चादर लपेटे बैठी हैं। पहले से भीगी थीं, घर में एसी, ऊपर से वैसा गाउन - ठंड ज्यादा लगने लगी थी। जाकर हाथ में कॉफी थमाई। मुझे देखकर एकदम शर्मा गईं। अब खड़ा लंड साफ देख रही थीं।


पूछा, “अमेय, तुम्हें तो ज्यादा ही ठंड लग रही है ऐसा लगता है।” लंड देखकर हँस पड़ीं। एकदम जवाब दिया, “अब रात भर तो गरम ही होना है। अभी थोड़ी ठंड सहने में क्या जाता है।”


इस जवाब की उम्मीद नहीं थी। शर्माईं, कुछ न बोलकर कॉफी पीने लगीं। बीच-बीच में लंड घूरतीं, आँखों में देखतीं, घूँट लेतीं। पूरी कॉफी खत्म होने तक यही चला। कुछ बोल नहीं रही थीं। मैं भी बस उनकी आँखों में देखे जा रहा था। कॉफी खत्म हुई तो ठंड कम हो गई।


मैंने सविता के हाथ से कप लिया, किचन में रख आया। अब खुद को रोक नहीं पा रहा था। इतनी ठंड में किसी शरीर की गरमाहट महसूस करना अलग सुख देता है। झट से हॉल में आया।


सविता मेरी राह देख रही थीं। आते ही कामुक नजर से देखने लगीं। आने से पहले चादर उतार चुकी थीं।


सोफे पर पैर फैलाकर बैठी थीं। स्तन जाली से ढके थे, गाउन की जाली से चुचियाँ बाहर निकल आई थीं। लंड और बड़ा हो गया। शॉर्ट्स में छेद कर देगा ऐसा लग रहा था।


“सविता, तुम कितनी खूबसूरत हो। सच में मेरे सामने हो या मैं सपना देख रहा हूँ?”


शर्माईं। “अगर सपना लग रहा है तो छू के देख लो। मैं सच में हूँ तुम्हारे सामने। आओ इधर।”


झट शर्ट उतारी, पास चला गया। एकदम बोलीं, “शैतान! मैंने बस छूने को कहा था, शर्ट उतारने को नहीं।” एक न सुनी। पास गया, बाँहों में जकड़ लिया। स्तन छाती से पूरे चिपक गए, बड़े चुचे चुभ रहे थे।


उन्होंने शरीर सौंप दिया, मुझे भी बाँहों में जकड़ लिया। आँखें बंद कर लीं। दोनों जोर से साँस ले रहे थे। आज तक न महसूस किया एहसास था। लंड कड़क हो चुका था, उनके घुटने को हल्का छू रहा था।


जानबूझकर घुटना आगे-पीछे कर लंड सता रही थीं। होश खो बैठी थीं। ये Family Antarvasna Kamuk Kamvasna Ki Chudai Ki Kahani आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है!


पति की कमी और अधूरी प्यास आज पूरी हो रही थी। स्तन लगने पर गुदगुदे गद्दे जैसा अहसास हुआ। छाती से दबाव डाल रहा था, वो हल्की सिसकियाँ देकर और उत्साहित कर रही थीं। थोड़ी देर यही खेल चला।


अब रसीले होंठ चाहिए थे। थोड़ा दूर किया, गर्दन पकड़कर मुँह में जीभ दे दी, उनकी जीभ चाटने लगा। मुँह का रस पी रहा था। बीच-बीच में गला चाटता, लव बाइट्स देता। बस सिसकियाँ देतीं। उन्हें भी मजा आने लगा था।


हल्के से हाथ लिया, उनके हाथ को लंड पर रख दिया। हाथ आते ही कसकर पकड़ा, सहलाने लगीं। मुँह से खुद शब्द निकले, “इतना बड़ा लंड है तुम्हारा अमेय। बापरे।” हँसने लगीं।


कुछ नहीं बोला, बस महसूस करता रहा। और जोर से किस करने लगा। उनका हाथ लंड और उत्तेजित कर रहा था। एक हाथ गाउन में डाला, स्तन जोर-जोर से दबाने लगा।


जोर की सिसकी दी — “ओह्ह अमेय… आह… आह…” पूरी चूत गीली हो चुकी थी। पानी बहकर जाँघों तक आ चुका था।


पंद्रह-बीस मिनट के किस के बाद थोड़ा होश आया। प्यास लगी - एक-दूसरे का रस पी-पीकर मुँह सूखा दिया था। पास रखी बोतल खोली, दो घूँट पिए। वो मस्ती के मूड में थीं।


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मेरे मुँह के नीचे अपना मुँह खोलकर रुक गईं, इशारा किया। मेरे मुँह से ही पानी पीना था। वैसा ही किया - मुँह में लिया, उनके मुँह में डाल दिया। चाव से गटक लिया। अब पूरी गरम थीं, पसीना-पसीना। समझ गया, तैयार हैं।


स्तनों पर हाथ रखा, दबाना शुरू किया। तभी अचानक - क्या हुआ पता नहीं - एकदम उठीं, थोड़ा दूर जाकर खड़ी हो गईं। मैं सोफे पर बैठा, वो सेक्सी गाउन में सामने खड़ी।


कपड़े में अब इतनी ताकत नहीं थी कि सुंदरता छुपा सके। चुचियाँ एकदम खड़ी। गांड बहुत बड़ी, गाउन थोड़ा फिट, एकदम उठने से कपड़ा गांड के अंदर चला गया, और उभरकर दिख रही थी। लंड फटना बाकी था, इतना कड़क।


रोमांस में टोपा शॉर्ट्स से थोड़ा बाहर आ चुका था, उन्हें साफ दिख रहा था। पर चेहरा जरा उदास था। वहीं से पूछा, “अमेय, क्या हम ये सब सही कर रहे हैं? डर लग रहा है। आज आई तो हूँ, पर कुछ समझ नहीं आ रहा।”


उठकर पास गया। “हाँ सविता, हम कुछ गलत नहीं कर रहे। तुम ही सोचो - पति अब नहीं रहा, मैं भी सिंगल हूँ। किसी को धोखा तो नहीं दे रहे ना।


रही बात समाज की, वो तो वैसे भी बोलेगा, ऐसे भी बोलेगा। हमें चुनना है किसकी सुनें। मैं किसी से नहीं डरता। तेरे लिए कुछ भी कर सकता हूँ। और मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूँ। ये ले, तू ही देख ले।” इतना कहकर लंड उनके बाएँ हाथ को छुआ।


एकदम हँस पड़ीं। “अमेय, तुम्हें कुछ शर्म है के नहीं? तुम कुछ ज्यादा ही शरारती होते जा रहे हो।”


शर्माते हुए हाथ ऊपर कर जोर की अंगड़ाई ली। मौके का फायदा उठाया, झपट लिया। चिल्लाईं, “अमेय थोड़ा धीरे। वरना आज तू मेरी कमर तोड़ ही देगा।” हँसने लगीं।


“सविता, तेरी कमर टूट जाए या पलंग पर, आज नहीं छोड़ने वाला। आज ऐसा चोदने वाला हूँ कि तू पति को भूल जाएगी, देख ले।”


मेरी तरफ देखा। शायद पति का जिक्र अच्छा न लगा हो। ये Bhabhi ki Chudai Ki Kahani आप गरमकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है!


“तुम कुछ भी बोलते हो! पागल… मैंने तो तुम्हें कितना भोला-सीधा समझा था। माँ के सामने कितना अच्छा बनकर घूमता है। बताना पड़ेगा दीदी को तुम कैसे हो।” हँस पड़ीं।


“हाँ-हाँ। पागल तूने बनाया है सविता। ये सब तेरा ही दोष है। और देख, मन में तेरे भी है। फर्क इतना है कि मैं बोलकर दिखा रहा हूँ, तू मन में रखती है।”


देखकर हँसा। वो भी शर्मा गईं। इस दौरान मोटा लंड उनके हाथ पर बार-बार लग रहा था। जाने-अनजाने हाथ उस पर घिस रही थीं, जैसे जादुई चिराग हो जिससे कोई जिन निकलने वाला हो।


फिर पकड़ा, उल्टा घुमाया। कुछ न बोलकर चुपचाप होते जा रही थीं जैसे मैं कर रहा था। हाथ पीछे लिए, दोनों हाथों से स्तन जोर से दबोच लिए। चिल्लाईं, “आह्ह… ओह्ह अमेय… धीरे ना, दुखता है। ऐसे कौन करता है क्या?”


कान में हलकी आवाज में, “मैं ऐसा ही करूँगा। मुझे तेरे स्तन और बड़े करने हैं। चुप बैठ, मैं जैसा बोलता हूँ वैसा कर।” इस बार कुछ नहीं बोलीं। आँखें बंद, बस सिसकियाँ। छाती जोर-जोर से दबाने लगा। दर्द हो रहा होगा, सहन कर रही थीं।


स्तन दबाते-दबाते चुचियों तक जाता, आखिर में चुचियाँ जोर से दबाता। एकदम सिसकी, जोर-जोर से साँसें। हाथ पीछे थे। हल्के से एक हाथ में मोटा लंड सौंप दिया। हाथ में आते ही दबाना शुरू किया।


मुझे भी अच्छा लगने लगा, साँसें बढ़ीं। मस्त लंड सहला रही थीं। बीच-बीच में लंड उनकी गांड पर लगता, हल्के से दोनों टाँगों के बीच ले जाकर रगड़ता। पसंद आ रहा था। बहुत दिनों बाद ऐसा सुख मिल रहा था।


जोर-जोर से सिसकियाँ, मुँह से आह… ओह्ह…


धीरे बँधे बाल खोले। बाल बहुत लंबे थे, गांड तक। देखकर और उत्तेजित हो गया। और जोर से स्तन सहलाने लगा, लंड उनके हाथ में आगे-पीछे करने लगा। अब दर्द ज्यादा होने लगा था।


“अमेय… आह आह… रुको जरा… ओह्ह ओह्ह… और जोर से मत दबाओ। वरना मेरा दूध निकल जाएगा।”


समझ गया, मजा आ रहा है, एकदम गरम हो चुकी हैं। उन्होंने लंड छोड़ा, मेरे हाथों पर हाथ रखे, हाथ चुचियों पर ले गईं जैसे बस चुचियाँ दबवानी हों। वैसा ही किया। अब बस चुचियाँ जोर से दबाने लगा।


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चिल्ला रही थीं, “ओह्ह… आह्ह… आह्ह… बस बस।” थोड़ी देर में स्तनों से दूध बहने लगा। पीना था, पर इतने बड़े स्तन हाथ से छोड़ने को मन नहीं था, और दबाना था। थोड़ी देर फिर सहलाता रहा, छाती से चुचियों तक का सफर जारी रखा। जोर-जोर से सिसकियाँ भरती रहीं।


अब बारी थी हथियार पैंट से निकालने की। अभी तक शॉर्ट्स के अंदर ही मसल रही थीं। पहले उन्हें नंगा देखना चाहता था, अब रहा न गया। झट शॉर्ट्स उतार दी। छब्बीस साल का लड़का, चालीस साल की औरत के सामने नंगा।


छह इंच का लंड अब उनके पिछवाड़े में चुभने लगा। लंड की गरमाहट उन्हें, गांड की गरमाहट लंड को। हाथ उनके स्तनों पर, उनके हाथ मेरे हाथों पर। बायाँ हाथ हटाकर उनके बाएँ हाथ पर रखा, उसी हाथ से स्तन सहलाने लगा।


बस आह… ओह्ह… ओह्ह अमेय… जोर से… और जोर से… कहने लगीं। थोड़ी देर उनकी उंगलियों से चुचियाँ दबाईं, झट हाथ नीचे लाया। समझ पातीं उससे पहले गरम मोटा लंबा लंड उनके बाएँ हाथ में सौंप दिया। अ


ब महसूस कर रही थीं - ऊपर कपड़ा नहीं था। ठंडे हाथ पर लंड। हर धमनी पर उंगलियाँ घुमा रही थीं, हर जगह हाथ लगाकर देख रही थीं। टोपे के छेद पर भी उंगली फेरी। इतना बड़ा लंड पहले कभी हाथ में नहीं लिया था।


हल्के से कान में, “सविता, कैसा लगा मेरा हथियार? उसे जरा हिलाओ ना। या बस हाथ ही घुमाती रहोगी?”


आँखें बंद ही थीं। हँसते हुए बोलीं, “अरे तुम आदमी हो या शैतान। इतना बड़ा लंड। मेरे पति का दो बार लंड लिया तो भी तेरे जितना नहीं हो पाएगा। आदत नहीं है हाँ अमेय, इतना बड़ा लंड अंदर लेने की!


ये तो मेरी चूत फाड़ देगा। धीरे करना थोड़ा। वरना बात नहीं करूँगी तुमसे।”


“सविता, सबका कभी न कभी पहला बार होता है। पहले थोड़ा धीरे ही करूँगा, बाद में तुझे बुलेट ट्रेन की सवारी करनी पड़ेगी। आज तो तेरी चूत फाड़ने वाला हूँ। आज तू बस मेरी सुनेगी। जो बोलूँगा वही होगा।”


इतना कहते ही लंड जोर से कसकर पकड़ लिया। दर्द से थोड़ा चिल्लाया। उनके हाथ में पूरा लंड बैठ ही नहीं रहा था, फिर भी दबाती जा रही थीं। शायद आगे मिलने वाले दर्द का अहसास अभी मुझे दिलाना चाहती थीं।


“सविता धीरे। क्या इसे पकड़कर झूलने वाली हो? इतना जोर से पकड़ रही हो।” बदले में स्तन एकदम जोर से दबाए। एकदम झटका देकर मुझसे दूर आगे भाग गईं।


आगे की कहानी :- "जल्द ही!"

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